Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 12 September 2019


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of Indian Society, Diversity of India.

Topic : Indus Valley settlers had a distinct genetic lineage

संदर्भ

भारत के राज्य हरियाणा के अन्दर राखीगढ़ी नामक सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़े सुनसान स्थल से प्राप्त एक कंकाल के DNA के अध्ययन से पता चलता है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के निवासी भारतीय मूल के ही थे.

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अध्ययन के निष्कर्ष

  • दक्षिण एशिया में रहने वाले आखेट और अन्य संग्रह करने वाले लोगों में न तो स्टेपी क्षेत्र के जीनोम थे और न प्राचीन ईरानी किसानों के ही जीनोम थे अर्थात् इनके जीनोम सबसे अलग थे.
  • ये आखेटक और अन्न को जमा करने वाले समुदाय धीरे-धीरे खेतिहर समुदायों में बदल गये और सिन्धु घाटी सभ्यता की नींव डाली.
  • आगे चलकर ये लोग व्यापार के कारण मेसोपोटामिया, मिश्र, फारस की खाड़ी और दक्षिण एशिया में अन्य जगहों की यात्रा करने लगे जिस कारण इनके आनुवंशिक इतिहास में कुछ मिश्रण हुआ.
  • सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों की उपस्थिति तुर्कमेनिस्तान के गोनुर स्थल और ईरान के शहरे-शोख्ता स्थल में भी देखी जाती है. इससे सिद्ध होता है कि भारत से लोगों का बहिर्गमन पूर्व से पश्चिम दिशा में हुआ था.
  • शोधकर्ताओं ने राखीगढ़ी के कंकाल में अनातोलिया से सम्बंधित कोई जीव नहीं पाया है.

इस अध्ययन का महत्त्व

राखीगढ़ी कंकाल के अध्ययन का बड़ा महत्त्व है क्योंकि इसने सिद्ध कर दिया है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के निवासी न तो स्टेपी से आये थे और न ही ईरान से. इसे यह सिद्धांत भी खंडित हो जाता है कि सिन्धु घाटी सभ्यता के समय दक्षिण-एशिया क्षेत्र में बाहर से बहुत मात्रा में जनसमुदायों का आव्रजन हुआ.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : WHO South-East Asia Region plans to banish measles, rubella by 2023

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र (WHO South-East Asia Region)के सदस्य देशों ने प्रण किया है कि वे 2023 तक अति-संक्रामक बालघाती रोग खसरा (measles) और रूबेला (rubella) का उन्मूलन कर देंगे.

इस आशय का एक संकल्प पिछले दिनों दिल्ली में होने वाली इस संगठन की 72वीं बैठक में अंगीकार किया है.

यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा?

  • राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तरों पर इन दोनों रोगों के विरुद्ध जनसामान्य में प्रतिरोधकता विकसित करने के लिए टीकाकरण के तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा.
  • अति-संवेदनशील प्रयोगशालाओं के माध्यम से इन रोगों से सम्बंधित अलग-अलग मामलों पर निगरानी रखी जायेगी जिससे कि रोग निवारण की उचित योजना बनाई जा सके.
  • 2023 तक देशजन्य खसरा और रूबेला वायरसों के संक्रमण को रोकने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और वित्तीय सहयोग दिया जाएगा.

खसरा और रूबेला का आवश्यक क्यों?

इन रोगों से दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया क्षेत्रों में प्रतिवर्ष खसरा से 5 लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती है. रूबेला से भी 55 हजार बच्चे प्राण गँवाते हैं. अतः गर्भवती स्त्रियों और शिशुओं के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए इन दोनों रोगों से मुक्ति प्राप्त करना आवश्यक है.

खसरा से सम्बंधित तथ्य

  • यह एक अतिशय संक्रामक वायरल रोग है जो नाक, मुँह या गले के जलकणों से फैलता है. इसमें बच्चे को तेज बुखार और नजला हो जाता है तथा उसकी आँखें लाल हो जाती हैं और मुँह के अन्दर उजले छाले पड़ जाते हैं. कुछ दिनों के पश्चात् चेहरे से आरम्भ होकर गर्दन से होते हुए चक्कते नीचे की ओर फैलते चले जाते हैं.
  • इससे बचाव के लिए बच्चों को समय-समय पर टीका देना आवश्यक हो जाता है.

रूबेला से सम्बंधित तथ्य

  • सामान्यतः यह एक हल्का-फुल्का संक्रमण होता है, परन्तु यदि यह रोग किसी गर्भवती स्त्री को हो जाए तो बच्चे में जन्मजात रूबेला के लक्षण (congenital rubella syndrome – CRS) उत्पन्न हो जाते हैं.
  • इससे भ्रूण में दोष आ जाते हैं और नवजात शिशु को मोतियाबिंद और ग्लूकोमा हो सकता है. वह बहरा और मंदबुद्धि भी हो सकता है. रूबेला से जन्मजात बच्चे के हृदय में भी गड़बड़ी हो सकती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Eastern Economic Forum

संदर्भ

पिछले दिनों पूर्वी आर्थिक मंच के पाँचवे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि रूस के सुदूर-पूर्व के विकास के लिए भारत एक बिलियन डॉलर का उधार देगा.

पूर्वी आर्थिक मंच क्या है?

  • विश्व की आर्थिक व्यवस्था, क्षेत्रीय एकीकरण, नए औद्योगिक एवं तकनीकी क्षेत्रों के विकास तथा रूस और अन्य राष्ट्रों द्वारा सामना की जा रही वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श के लिए पूर्वी आर्थिक मंच की स्थापना 2015 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक आदेश के द्वारा की थी.
  • इस मंच की बैठक प्रत्येक वर्ष व्लाडिवोस्टक में ही होती है.
  • इस मंच में होने वाले विचार-विमर्श के निमित्त कई पैनल सत्र, गोलमेज वार्ताएँ, दूरदर्शन पर प्रसारित वाद-विवाद, व्यावसायिक कलेवे (business breakfasts) एवं व्यावसायिक संवाद आयोजित होते हैं जिनमें मुख्य रूप से विविध देशों के साथ रूस के रिश्तों पर चर्चा होती है.
  • इस मंच के व्यावसायिक कार्यक्रम में एशिया प्रशांत क्षेत्र और आसियान के अग्रणी प्रतिभागी देशों के साथ अनेक व्यावसायिक संवाद भी होते हैं.

सुदूर-पूर्व (FAR-EAST) किसे कहते हैं?

रूस के सबसे पूर्वी भाग को सुदूर-पूर्व अर्थात् फार ईस्ट कहते हैं. यह भूभाग प्रशांत और आर्कटिक दो महासागरों की सीमाओं को छूता है और इसके समीप ये पाँच देश पड़ते हैं – चीन, जापान, मंगोलिया, अमेरिका और उत्तर कोरिया.

रूस के सुदूर-पूर्वी संघीय जिले के अन्दर देश की एक-तिहाई से अधिक भूमि आती है.

संसाधन : रूस का सुदूर-पूर्वी भाग प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है. ये संसाधन हैं – हीरे, टीन, बोरेक्स, सोना, टंग्स्टन, मछलियाँ और समुद्री भोज्य पदार्थ. रूस के कोयला भंडार और हाइड्रो-इंजीनियरिंग संसाधनों का एक-तिहाई अंश इसी क्षेत्र में अवस्थित है. पूरे रूस के जंगलों का 30% क्षेत्र इसी क्षेत्र में पड़ता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Hepatitis B

संदर्भ

गत सितम्बर 3 को विश्व स्वास्थ्य संगठन दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र ने घोषणा की कि इस क्षेत्र के चार देश – बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और थाईलैंड – ऐसे पहले चार देश हो गये हैं जिन्होंने हेपेटाइटिस B को नियंत्रण करने में सफलता पाई है. विदित हो कि यदि किसी देश में पाँच वर्ष से कम की आयु वाले बच्चों में से 1% से कम बच्चे हेपेटाइटिस B के शिकार पाए जाते हैं तो यह मान लिया जाता है कि उस देश में इस रोग पर नियंत्रण हो चुका है.

भारत की स्थिति क्या है?

  • 2002 में भारत के सार्वभौम टीकाकरण कार्यक्रम के अन्दर हेपेटाइटिस B का टीका दिया जाना शुरू हो गया था. 2011 में इस कार्यक्रम को और भी तेज कर दिया गया था. परन्तु आज यह स्थिति है कि प्रत्येक वर्ष हेपेटाइटिस B के वायरस से देश में दस लाख लोग संक्रमित हो जाते हैं.
  • इतने प्रयासों के पश्चात् भी पाँच वर्ष से कम के बच्चों में हेपेटाइटिस B के मामले 1% से नीचे नहीं आ पा रहे हैं. इसका एक कारण यह बताया जाता है कि शिशु के जन्म के 24 घंटों के अन्दर हेपेटाइटिस B के टीके की जो मात्रा दी जा रही है वह पर्याप्त नहीं है.

हेपेटाइटिस क्या है?

  • हेपेटाइटिस एक ऐसा रोग है जिसमें यकृत में जलन उत्पन्न होती है जिससे वह क्षतिग्रस्त हो जाता है.
  • इस रोग के कई कारण हैं, जैसे – मदिरा का अधिक सेवन, विषाक्त पदार्थ, कुछ दवाइयाँ और कुछ अन्य रोग. परन्तु यह बहुधा वायरस से ही होता है. ये वायरस तीन प्रकार के होते हैं – A, B और C.

हेपेटाइटिस A, B और C में क्या अंतर है?

  • हेपेटाइटिस A का संक्रमण अल्प अवधि के लिए होता है.
  • हेपेटाइटिस B और C दोनों हेपेटाइटिस A की भाँति शुरू में अल्प अवधि के होते हैं. परन्तु कुछ लोगों में ये वायरस शरीर के अन्दर शेष रह जाते हैं और आजीवन संक्रमण का कारण बन जाते हैं.
  • हेपेटाइटिस A और B के बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं, किन्तु हेपेटाइटिस C के लिए अभी कोई टीका नहीं बना है.

 हेपेटाइटिस B कैसे फैलता है?

हेपेटाइटिस B वायरस एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे असंक्रमित व्यक्ति में रक्त, शुक्र अथवा अन्य शारीरिक द्रवों के माध्यम से प्रवेश कर जाता है.

भारत में टीकाकरण कार्यक्रम

  • सार्वभौम टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी)

भारत सरकार ‘टीका-निवारणीय रोगों’ के खिलाफ़ नि:शुल्क टीकाकरण प्रदान कर रहा है, जिसमें डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी), टेटनस, पोलियो, ख़सरा, बाल्यावस्था में होने वाले तपेदिक का गंभीर प्रकार, हेपेटाइटिस बी, मेनिन्जाइटिस और निमोनिया (हेमोफिल्ट्स इन्फ्लूएंजा टाइप बी संक्रमण), जेई स्थानिक जिलों में जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) और यूआईपी के तहत नए टीकें जैसे कि रोटवायरस टीका, आईपीवी, वयस्क जेई टीका, न्यूरमोकोकल कंजुगेट टीका (पीसीवी) और खसरा-रूबेला (एमआर) शामिल है.

  • मिशन इंद्रधनुष

भारत सरकार ने सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने और यूआईपी को मज़बूत बनाने एवं पुनःऊर्जा देने के लिए दिसंबर 2014 में “मिशन इंद्रधनुष” का शुभारंभ किया. इससे पहले पूर्ण टीकाकरण कवरेज में वृद्धि प्रतिवर्ष 1% थी, जो कि मिशन इंद्रधनुष के पहले दो चरणों के माध्यम से प्रतिवर्ष 6.7% हो गयी है.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने टीकाकरण कार्यक्रम में तेज़ी लाने के लिए 8 अक्टूबर 2017 को तीव्र मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई) का शुभारंभ किया. इस कार्यक्रम के माध्यम से भारत सरकार का उद्देश्य दो वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चों और उन सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचना है, जो नियमित रूप से टीकाकरण कार्यक्रम (प्रतिरक्षण कार्यक्रम) के तहत छूट गए हैं, ताकि दिसंबर 2018 तक 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सकें.

  • एनएचपी इंद्रधनुष टीकाकरण (मोबाइल एप्लिकेशन)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू), भारत सरकार ने माता-पिता और अभिभावक को अपने बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में जागरूक और उनकी टीकाकरण की स्थिति पर नज़र रखने (ट्रैक) के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया गया है. इस एप्लिकेशन को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.

WHO हर वर्ष 9 स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाता है, जैसे –

  • विश्व यक्ष्मा दिवस – 24 मार्च
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस – 7 अप्रैल
  • विश्व टीकाकरण सप्ताह – अप्रैल के अंतिम सप्ताह में
  • विश्व मलेरिया दिवस – 25 April
  • विश्व नो टोबैकू दिवस – 31 May
  • विश्व रक्त दाता दिवस – 14 June
  • विश्व हेपेटाइटिस दिवस – 28 July
  • विश्व एड्स दिवस – 1 December

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Institutes of Eminence Scheme

संदर्भ

पिछले दिनों IIT मद्रास, IIT खड़कपुर, दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय को भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा उत्कृष्ट संस्थान (Institute of Eminence) की पदवी दी गई.

कुछ अन्य निजी विश्वविद्यालयों को भी यह पदवी देने के लिए आशय पत्र (Letters of Intent) निर्गत किये गये हैं. ये हैं – वेल्लोर इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, अमृता विश्वविद्यापीठम्, जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय, कलिंग इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी तथा एयरटेल के सत्य भारती फाउंडेशन का भारती संस्थान.

आगे क्या?

उत्कृष्ट संस्थान की पदवी पाने वाले विश्वविद्यालयों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ एक स्मृतिपत्र पर हस्ताक्षर करना होगा जिसमें उन्हें यह योजना बतानी होगी कि वे कैसे एक विश्व-स्तरीय संस्थान बनने का लक्ष्य प्राप्त करेंगे.

इन सभी संस्थानों को सरकार की ओर से 1,000 करोड़ रु. का अनुदान मिलेगा.

इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स योजना क्या है?

  • यह योजना भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की है. इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को वैश्विक मान्यता दिलवाना है.
  • चुने गये संस्थानों को सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वयत्तता मिलेगी.
  • सरकार इन संस्थानों में से दस को चलाएगी और उन्हें विशेष धनराशि मुहैया कराएगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में संस्थानों को चुनने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में चयन के लिए वही शैक्षणिक संस्थान योग्य माने जाएँगे जिन्हें वैश्विक-स्तर पर शीर्षस्थ 500 संस्थानों में स्थान मिला हुआ है.
  • इसके लिए वह संस्थान भी आवेदन कर सकता है जिसको राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) के अंदर शीर्षस्थ 50 में स्थान मिला है.
  • ‘उत्कृष्ट संस्थान’ के रूप में चुने गए प्रत्येक ‘सार्वजनिक संस्थान’ को पाँच साल की अवधि में 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी. निजी संस्थानों को यह वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी. निजी संस्थानों को यह दर्जा तभी मिलेगा जब वह आगामी 15 वर्ष के लिए अपनी ऐसी योजना प्रस्तुत करे जो भरोसा देने वाली हो.
  • इन संस्थानों को विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए, विदेशी अध्यापकों को भर्ती करने के सन्दर्भ में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी.
  • उन्हें UGC की अनुमति के बिना शीर्ष 500 विश्व-संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग करने की भी अनुमति प्रदान की जायेगी.

निहितार्थ

उत्कृष्ट संस्थानों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी और उनको UGC को रिपोर्ट भी नहीं देना पड़ेगा. वे विदेश से छात्रों को ले सकेंगे और विदेशी शिक्षकों की नियुक्ति कर सकेंगे. इसके अतिरिक्त वे एक लचीला पाठ्यक्रम और शुल्क का ढाँचा अपना सकते हैं.

विश्व-स्तरीय संस्थानों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग के अनुसार, भारत में विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों का अभाव है और यहाँ के शिक्षकों को विदेश की तुलना में कम पैसा दिया जाता है. चीन की तुलना में भारत में विश्वविद्यालय के स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधी है. इस मामले में वह अधिकांश लैटिन अमेरिकी और अन्य मध्यम आय वाले देशों से कहीं पीछे है.


Prelims Vishesh

About NCPCR :-

  • राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) की स्थापना मार्च, 2007 में बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 के तहत हुई थी.
  • इसका प्रशासी मंत्रालय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय है.
  • इस आयोग का काम यह देखना है कि सरकार के द्वारा बनाए गये सभी कानून, नीतियाँ, कार्यक्रम एवं प्रशासनिक तंत्र बाल अधिकारों के अनुकूल हों.
  • विदित हो कि18 वर्ष तक के व्यक्तियों को “बच्चे” के रूप में परिभाषित किया जाता है.

Great Indian Bustards (GIB) :-

  • एक सर्वेक्षण से पता चला है कि राजस्थान केDesert National Park (DNP) में 150 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रहते हैं.
  • यह चिड़ियाँ IUCN की लाल सूची में विकट रूप से संकटग्रस्त (critically endangered species) प्रजाति बताई गई है.
  • राजस्थान के अलावे यह चिड़ियाँ गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में भी पाई जाती है. परन्तु इसका मुख्य निवास राजस्थान में ही है.

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