Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 12 November 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations.

Topic : East Asia Summit: EAS

संदर्भ

विदेश मंत्री द्वारा 15वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (East Asia Summit: EAS) में भाग लिया गया. इस शिखर सम्मेलन के दौरान EAS मंच को सुदृढ़ करने एवं उभरती चुनौतियों के प्रति अधिक अनुक्रियाशील बनाने के तरीकों और हनोई घोषणापत्र (Ha Noi Declaration) को अपनाने पर चर्चा की गई थी.

  • वैश्विक नेताओं द्वारा कोविड-19 टीकों की सुरक्षित, प्रभावी और वहनीय पहुँच को सुनिश्चित करने में समन्वय की महत्ता को रेखांकित किया गया. साथ ही साथ, त्वरित व सतत आर्थिक सुधार के लिए वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को खुला रखने (सभी के लिए उपलब्धता को सुनिश्चित करने) के लिए अधिक से अधिक सहयोग का आह्वान किया गया.
  • शिखर सम्मेलन में, भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से सागरीय विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (United Nations Convention on the Law of the SEA : UNCLOS) के अनुपालन के माध्यम से इस क्षेत्र में एक नियम-आधारित व्यवस्था को प्रोत्साहन देने पर बल दिया.

UNCLOS

सागरीय विधि पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) वैश्विक महासागरों और समुद्री क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित एक व्यापक शासन प्रणाली है, जो महासागरों और संसाधनों के उपयोग को विनियमित करती है.

पूर्वी एशियाई शिखर सम्मलेन क्या है?

  • प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाला पूर्वी एशियाई शिखर सम्मलेन एक मंच है जिसमें शुरुआत में पूर्वी एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया एवं दक्षिणी एशिया के 16 देश शामिल हुए थे. बाद में सम्मलेन की 2011 में होने वाली बैठक में सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 18 कर दी गई और इसमें रूस और अमेरिका भी शामिल हो गये.
  • इस सम्मलेन की प्रथम बैठक 14 दिसम्बर, 2005 को मलेशिया के क्वालालम्पुर में हुई थी.
  • पूर्वी एशियाई शिखर सम्मलेन (East Asia Summit) में राजनैतिक सुरक्षागत एवं आर्थिक मामलों में विचारों का आदान-प्रदान और सहयोग किया जाता है. जिन विषयों में सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है, वे हैं – पर्यावरण, ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य के मामले, सर्वव्यापी रोग, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन एवं ASEAN देशों के बीच आपस सम्पर्क.
  • 2017 के नवम्बर में मनीला, फिलीपींस में सम्पन्न बैठक में पूर्वी एशियाई शिखर सम्मलेन ने सामुद्रिक सहयोग को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर लिया.

EAS का इतिहास

  • पूर्व-एशिया के देशों का समूह बनाने की अवधारणा सबसे पहले मलेशिया के प्रधानमंत्री Mahathir bin Mohamad ने 1991 में प्रस्तुत की थी. आगे चलकर 2002 में पूर्व एशिया अध्ययन समूह ने एक अंतिम प्रतिवेदन दिया.  यह समूह ASEAN+3 देश (चीन, जापान और द.कोरिया) द्वारा गठित किया गया था. इस समूह ने पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की अवधारणा को स्वरूप देने की अनुशंसा की थी.
  • जुलाई 26, 2005 को Vientiane में सम्पन्न ASEAN की मंत्रीस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पहले EAS में आसियान, चीन, जापान, द. कोरिया के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, भारत और न्यूज़ीलैण्ड को शामिल किया जाए. कालांतर में बाली इंडोनेशिया में EAS की छठी बैठक में 19 नवम्बर, 2011 में रूस और अमेरिका को EAS के अन्दर औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

“नाइन-डैश” लाइन क्या है?

नाइन-डैश लाइन दक्षिणी हैनात द्वीप के दक्षिण और पूर्व में सैकड़ों किलीमीटर में फैला क्षेत्र है जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पार्मेल और स्प्रैटली द्वीप श्रृंखला को कवर करता है. चीन ने अपने दावे की पुष्टि हेतु 2000 वर्षों के इतिहास का हवाला दिया जिसमें इन दो द्वीप श्रृंखलाओं को इसके अभिन्न हिस्से के रूप में माना गया था.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Generalized System of Preferences trade privilege

संदर्भ

भारत दवारा बिडेन प्रशासन पर भारत के लिए सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली‘ व्यापार विशेषाधिकार (Generalized System of Preferences trade privilege– GSP trade privilege) बहाल करने के लिए दबाव बनाया जा सकता है.

भारत के GSP व्यापार विशेषाधिकार कब समाप्त किये गए थे?

जून 2019 में निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा भारत के ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ व्यापार विशेषाधिकार (GSP व्यापार विशेषाधिकार) को समाप्त कर दिया गया था. भारत द्वारा इसकी बहाली के लिए कोशिश किये जा रहे हैं.

सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) क्या है?

यह संयुक्त राज्य अमेरिका का एक व्यापार कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत विकासशील देशों में आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने हेतु 129 निर्दिष्ट लाभार्थी देशों और राज्य-क्षेत्रों के 4,800 उत्पादों को वरीयता देते हुए शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति प्रदान की जाती है

  1. ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) की स्थापना 1 जनवरी, 1976 को व्यापार अधिनियम, 1974 (Trade Act of 1974)के द्वारा की गई थी.
  1. GSP दर्जा गैर- व्युत्क्रमिक (non-reciprocal) आधार पर प्रदान किया जाता है. फिर भी अमेरिका इसे बाजार तक पहुंच और टैरिफ में कमी के साथ जोड़ता है, जो कि जीएसपी के मूल सिद्धांतों के विपरीत है.

GSP के उद्देश्य

  1. ‘सामान्यीकृत अधिमानी प्रणाली’ (GSP) का उद्देश्य विकासशील देशों और अल्प विकसित देशों में निर्यात को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है .
  1. संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार को बढ़ाने और इसमें विविधता लाने के लिए लाभार्थी देशों को सहायता प्रदान करके सतत विकास को बढ़ावा देना.

GSP के लाभ

  1. भारतीय निर्यातकों को अप्रत्यक्ष लाभ– निर्दिष्ट उत्पादों पर निम्न शुल्क दर अथवा शुल्क मुक्त प्रवेश से आयातक को होने वाले लाभ से भारतीय निर्यातकों को अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है.
  1. भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी अथवा छूट से आयातक के लिए ये उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते है. क्योंकि अन्य देशों से सामान उत्पाद लेने पर आयातकों को अधिक कर चुकाना पड़ता है.
  2. इस टैरिफ वरीयता से नए निर्यातकों को बाजार में प्रवेश करने और स्थापित निर्यातकों को बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने और GSP प्रदाता देश में लाभांश सुधार करने में सहायता मिलती है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology.

Topic : P-8I Patrol Aircraft

संदर्भ

हाल ही में अमेरिकी कंपनी बोइंग ने लंबी दूरी तक समुद्री सर्विलांस में सक्षम और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान ‘पी-8आई’ को भारतीय नौसेना को सुपुर्द किया है.

पृष्ठभूमि

  • यह नया विमान 2016 में चार नए विमानों की खरीद से जुड़े समझौते के अंतर्गत भारतीय नौसेना को प्राप्त हुआ है.
  • ज्ञातव्य है कि इससे पहले बोइंग द्वारा आठ पी-8आई युद्धक विमान भारतीय नौसेना को सौपे जा चुके है.
  • भारतीय नौसेना पी-8आई विमानों की खरीद करने वाली पहली और सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक है.
  • भारत द्वारा 2009 में पी-8आई विमानों की खरीद के बोइंग के साथ समझौता किया गया था. जिसमें आठ पी-8आई विमानों खरीद के साथ 4 अतिरिक्त पी-8आई विमानों की खरीद का विकल्प रखा गया था.
  • 2011 में बोइंग द्वारा पहला पी-8आई विमान भारत को सौपा गया था और 2015 तक सभी आठ विमान भारतीय नौसेना को प्राप्त हो गए थे.

युद्धक विमान पी-8आई के बारे में

  • पी-8आई भारतीय नौसेना के लिए बोइंग द्वारा निर्मित एक लंबी दूरी का, बहुउद्देशीय समुद्री गश्ती विमान है.
  • यह अमेरिकी नौसेना द्वारा संचालित P-8A पोसाइडन का ही एक प्रकार है.
  • पी-8आई को भारतीय नौसेना में लंबे समय से कार्यरत ‘Tupolev Tu-142’ विमानों के पुराने बेड़े को बदलने के लिए खरीदा जा रहा है.
  • पी-8आई विमान को भारत के विशाल समुद्र तट और क्षेत्रीय जल की सुरक्षा के लिए बनाया डिज़ाइन किया गया है. उल्लेखनीय है कि भारत न केवल समुद्र में इस विमान का प्रयोग कर रहा है बल्कि पूर्वी लद्दाख में भी चीनी सैनिकों की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए बड़े पैमाने पर P-8I का उपयोग किया जा रहा है.
  • यह पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW), सतह रोधी युद्ध (AsuW), सर्विलांस, समुद्री गश्त और निगरानी अभियानों का संचालन कर सकता है.
  • पी-8आई विमान बोइंग के अगली पीढ़ी के 737-800 विमान पर आधारित है.
  • यह विमान CAE AN/ASQ-508A चुंबकीय विसंगति का पता लगाने वाली प्रणाली (Magnetic Anomaly Detection-MAD system), APS-143C (V) 3 मल्टीमोड रडार और रेथियॉन APY-10 निगरानी रडार के अत्याधुनिक वैश्विक संस्करण से सुसज्जित है.
  • APY-10 रडार सभी मौसमों, दिन और रात के मिशन में सटीक जानकारी देती है. पी-8आई को बीईएल डेटा लिंक II संचार प्रणाली, एवेंटेल मोबाइल उपग्रह प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआईएल) द्वारा विकसित संदेश गोपनीयता प्रणाली से साथ भी एकीकृत किया गया है.
  • इसके अलावा भारत अमेरिका से छह और P-8I विमान की खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहा है. विदित हो कि सितंबर 2018 में अमेरिका के साथ COMCASA (संगतता और सुरक्षा समझौता) संधि पर हस्ताक्षर करने के परिणामस्वरूप इन छह विमानों में अधिक उन्नत संचार और सर्विलांस प्रणालियाँ से लैस होंगी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security; Technology missions; economics of animal-rearing.

Topic : PM-KUSUM

संदर्भ

किसानों को सौर ऊर्जा के दोहन में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने पीएम- कुसुम (PM-KUSUM) योजना के दायरे में विस्तार किया है. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy: MNRE) ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुमः: PM-KUSUM) योजना के कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है.

मुख्य परिवर्तन

  1. अब, बंजर, परती एवं कृषि भूमि के अतिरिक्त, किसानों के चरागाह और दलदली भूमि पर भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं.
  2. लघु किसानों की सहायता करने के लिए, तकनीकी-व्यावसायिक व्यवहार्यता के आघार पर अब राज्यों द्वारा 500 kW से कम की लघु सौर परियोजनाओं की अनुमति प्रदान की जा सकती है (पहले अनुमति नहीं थी).
  3. MNRE देशव्यापी सूचना, शिक्षा और संचार (Information, Education and Communication: IEC) गतिविधियों के लिए 33% पात्र सेवा प्रभारों (eligible service charges) को निर्धारित किया जाएगा.
  4. न्यूनतम निर्धारित क्षमता उपयोग कारक (Capacity Utilization Factor: CUF) से संबंधित सौर ऊर्जा उत्पादन में गिरावट की स्थिति में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक (Renewable Power Generator: RPG) पर कोई अर्थदंड आरोपित नहीं किया जाएगा.

KUSUM Yojana

  • यह भारत सरकार की 4 लाख करोड़ की एक योजना है जिसके अंतर्गत किसानों की सहायता के लिए 28,250 MW तक सौर ऊर्जा के विकेंद्रीकृत उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • KUSUM योजना के अनुसार बंजर भूमियों पर स्थापित सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली में से surplus अंश को किसान ग्रिडों को आपूर्ति कर सकेंगे जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा.
  • इसके लिए, बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को किसानों से पाँच वर्षों तक बिजली खरीदने के लिए 50 पैसे प्रति इकाई की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.
  • सरकार किसानों को खेतों के लिए 5 लाख ऑफ़-ग्रिड (ग्रिड रहित) सौर पम्प खरीदने के लिए सब्सिडी प्रदान करेगी. केंद्र और राज्य प्रत्येक सौर पम्प पर 30% सब्सिडी प्रदान करेंगे. अन्य 30% ऋण के माध्यम से प्राप्त होगा, जबकि 10% लागत किसान द्वारा वहन की जायेगी.
  • 7,250 MW क्षमता के ग्रिड से सम्बद्ध (ग्रिड-कनेक्टेड) खेतों के पम्पों का सौरीकरण (Solarisation) किया जाएगा.
  • सरकारी विभागों के ग्रिड से सम्बद्ध जल पम्पों का सौरीकरण किया जाएगा.

कुसुम योजना के कुछ अन्य प्रावधान

  • ग्रामीण क्षेत्र में 500KW से लेकर 2MW तक के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र लगाये जाएँगे जो ग्रिड से जुड़े हुए होंगे.
  • कुछ ऐसे सौर जलपम्प लगाये जाएँगे जो किसानों की सिंचाई की आवश्यकता को पूरी करेंगे परन्तु वे ग्रिड से सम्बद्ध नहीं होंगे.
  • वर्तमान में जो किसान ग्रिड से जुड़े सिंचाई पम्पों के स्वामी हैं उन्हें ग्रिड की आपूर्ति से मुक्त किया जाए और उन्हें अधिकाई सौर ऊर्जा को DISCOMs को देकर अतिरिक्त आय कमाने का अवसर दिया जाए.

योजना के अपेक्षित लाभ

  • यह कृषि क्षेत्र को डीजल-रहित बनाने में सहायता करेगी.
  • यह कृषि क्षेत्र में सब्सिडी का बोझ कम कर DISCOMs की वित्तीय स्थिति में सुधार करने में सहायता करेगी.
  • विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा.
  • ऑफ-ग्रिड और ग्रिड कनेक्टेड, दोनों प्रकार के सौर जल पम्पों द्वारा सुनिश्चित जल स्रोतों के प्रावधान के माध्यम से किसानों को जल-सुरक्षा.
  • नवीकरणीय खरीद दायित्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राज्यों का समर्थन करना.
  • छतों के ऊपर और बड़े पार्कों के बीच इंटरमीडिइट रेंज में सौर ऊर्जा उत्पादन की रीक्तियों को भरना.
  • ऑफ-ग्रिड व्यवस्था के माध्यम से पारेषण क्षति (transmission loss) को कम करना.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

किसी भी देश के मानव विकास सूचकांक एवं ऊर्जा उपभोग में पूरक संबंध होता है. वस्तुतः ऊर्जा ही किसी भी देश के आर्थिक सामाजिक विकास की धुरी है. ऊर्जा संसाधनों के आधार पर ही किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास संभव है. अतः ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत होना अत्यधिक आवश्यक है. जनांकिकीय लाभांश को प्रतिफल में बदलने तथा वैश्विक महाशक्ति बनने हेतु भारत को ‘ऊर्जा सुरक्षा’ के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है. इसके अलावा बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु ऊर्जा सुरक्षा आवश्यक है. आधारभूत ढांचे की दृढ़ता के लिये भी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ आवश्यक है. कौशल विकास सृजन एवं विनिर्माण क्षमता के विकास के लिये ऊर्जा सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है.

नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों से प्राप्त ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा कहते है. ज्ञातव्य है कि नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन कभी समाप्त न होने वाले संसाधान होते हैं, जिन्हें फिर से प्राप्त किया जा सकता है. वस्तुतः पृथ्वी इनका प्राकृतिक रूप से पुनर्भरण करती रहती है. इसमें सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा आदि शामिल है. ये पृथ्वी पर असीमित मात्र में उपलब्ध हैं तथा प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण हितैषी हैं. वस्तुतः पारंपरिक जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से अत्यधिक जल, वायु व मृदा प्रदूषण होता है जो भूमंडलीय ऊष्मन का कारण है. नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों की अपेक्षा सस्ते एवं अधिक वहनीय हैं. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत ही भविष्य के ऊर्जा संसाधन है जो किसी भी राष्ट्र के धारणीय विकास को सुनिश्चित करेंगे. यह धारणीय विकास लक्ष्य (SDG)-7 ‘स्वच्छ एवं वहनीय ऊर्जा’ के अनुकूल है. चूँकि भारत कर्क रेखा पर अवस्थित है अतः भारत के अधिकांश भागों में वर्षभर सौर प्रकाश उपलब्ध रहता है, जिससे अत्यधिक मात्रा में सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है. इसी प्रकार पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि की उपलब्धता भी भारत में है.

संभावित गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की खोज तथा उन्हें किफायती एवं सुलभ बनाने के लिये अनुसंधान की आवश्यकता है. ऊर्जा अवसंरचना का विकास करने के साथ-साथ स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम भंडारण को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयान मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2017-18 में प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपलब्धता (भारत में) को 23355 मेगाजूल बढ़ाने की आवश्यकता है.


Prelims Vishesh

Union Labour Ministry Notifies Draft Rules under the Code on Social Security (CSS) 2020 :-

  • CSS 2020 वस्तुत: पिछले मानसून सत्र में संसद द्वारा पारित तीन श्रम कानून विधेयकों में से एक था. हालांकि अब, सरकार ने CSS, 2020 के प्रावधानों के संचालन हेतु मसौदा नियम जारी किए हैं.
  • मसौदा नियम, केंद्र सरकार के पोर्टल पर असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा स्व-पंजीकरण सहित आधार आधारित पंजीकरण के लिए अधिसूचित किए गए हैं.
  • केंद्र सरकार “गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड (National Social Security Board for Gig Workers and Platform Workers)” की स्थापना करेगी तथा सरकार की सहायता के लिए क्षेत्र विशेषज्ञों (domain experts) का एक उप समूह भी बना सकती है.

Brus living in relief camps seek ST status :-

  • ब्रू समुदाय, जिसे रियांग भी कहा जाता है मिजोरम, त्रिपुरा और दक्षिणी असम के कुछ हिस्सों में अधिवासित एक स्थानिक समुदाय है.
  • वर्तमान में, 30,000 से अधिक ब्रू आदिवासी त्रिपुरा में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जो वर्ष 1997 में मिजो जनजाति के साथ हुए नृजातीय संघर्ष के उपरांत मिजोरम से पलायन कर गए थे.
  • पूर्व में, केंद्र सरकार, त्रिपुरा और मिजोरम की राज्य सरकारों तथा ब्रू-रियांग के प्रतिनिधियों के मध्य त्रिपुरा में शरणार्थियों के स्थायी अधिवास की सुविधा के लिए एक चतुष्पक्षीय समझौते (quadripartite agreement) पर हस्ताक्षर हुए थे.

Sarhad Vistar Vikasotsav 2020 :-

  • इसका आयोजन गुजरात के कच्छ जिले के सीमांत क्षेत्रों में किया जाएगा.
  • इसका उद्देश्य दूरस्थ और सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सड़क संपर्क से संबंधित समस्याओं का समाघान करना है.
  • इसका आयोजन सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Border Area Development Programme: BADP) के तहत किया जा रहा है.
  • BADP को वर्ष 1993-94 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में आरंभ किया गया था.
  • BADP का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की विशेष विकासात्मक आवश्यकताओं को पूर्ण करना और उनके कल्याण हेतु कार्य करना है.

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