Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 January 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 12 January 2019


GS Paper 1 Source: Economic Times

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Topic : Earth’s magnetic North Pole is moving

संदर्भ

शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी का चुम्बकीय उत्तरी ध्रुव कनाडा से साइबेरिया की ओर खिसकता जा रहा है.

विश्व चुम्बकीय मॉडल पर इसका प्रभाव

उत्तरी ध्रुव के पूर्व की ओर खिसकने के कारण वैश्विक क्षेत्र मॉडल – विश्व चुम्बकीय मॉडल – पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. यह मॉडल आजकल जहाजों के आने-जाने की प्रणालियों से लेकर स्मार्ट फ़ोन के गूगल मैप तक को नियंत्रित करता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अब इस मॉडल को शीघ्र से शीघ्र अद्यतन करना होगा.

पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र खिसक क्यों रहे हैं?

  • पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में परिवर्तन ध्रुव के खिसकने के साथ-साथ पृथ्वी के गहरे अन्दर होने वाली उथल-पुथल के कारण होते हैं. पृथ्वी के सबसे अंदरूनी भाग में द्रव पदार्थ के मंथन से अधिकांश चुम्बकीय क्षेत्र जन्म लेते हैं.
  • उदाहरण के लिए 2016 में उत्तरी-दक्षिण अमेरिका और पूर्वी प्रशांत महासागर के गहरे अंदर चुम्बकीय क्षेत्र का कुछ अंश कुछ समय के लिए तेज़ी से बढ़ गया. इस घटना का यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी के स्वार्म अभियान जैसे उपग्रहों ने पता लगाया.

विश्व चुम्बकीय मॉडल क्या है?

  • यह एक प्रकार चार्ट है जिसका प्रयोग कंपास द्वारा सूचित उत्तर दिशा और वास्तविक उत्तर दिशा का पता लगाने के लिए किया जाता है. इस मॉडल का प्रयोग न केवल जहाज़ों में अपितु वायुयानों और भूवैज्ञानिक अनुप्रयोगों (जैसे – पृथ्वी में छेद करना और खनन करना) में होता है.
  • विश्व चुम्बकीय मॉडल गूगल मैप सहित स्मार्ट फ़ोनों के मानचित्र अनुप्रयोग का एक अंश होता है. विश्व चुम्बकीय मॉडल की देख-रेख अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन के शोधकर्ता करते हैं.

ध्रुवों के इधर-उधर होने से क्या होगा?

हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में हलचल के कारण एक दिन ऐसा हो सकता है कि चुम्बकीय दक्षिणी ध्रुव चुम्बकीय उत्तरी ध्रुव बन जाए और उत्तरी ध्रुव दक्षिणी ध्रुव में बदल जाए. ऐसी घटना के भयावह परिणाम होंगे. इससे बिजली के ग्रिड नष्ट हो सकते हैं और धरातल पर रहने वाले प्राणियों को सौरी विकरण की अत्यधिक मात्रा का सामना करना पड़े.

Earths-magnetic-North-Pole-is-movingसबसे बड़ा खतरा बिजली ग्रिड के सौर आँधियों के कारण ध्वस्त होने का है. इसलिए कुछ वैज्ञानिक यह कहने लगे हैं कि यदि धरती को अन्धकार में डूबने से बचाना है तो शीघ्र से शीघ्र नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का सहारा लेना चाहिए.

  • ध्रुवों के बदले से अत्यंत आविष्ट पदार्थ (charged particles) उत्पन्न होंगे जो उपग्रहों और अन्तरिक्ष यात्रियों पर भीषण प्रभाव डाल सकते हैं.
  • ध्रुवों में बदलाव से पृथ्वी की जलवायु भी बदल सकती है. हाल ही में डेनमार्क में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी के मौसम पर इसके चुम्बकीय क्षेत्र का व्यापक प्रभाव होता है.

GS Paper 2 Source: Times of India

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Topic : Section 126 of the RP Act, 1951

संदर्भ

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 126 और अन्य अनुभागों तथा आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों में बदलाव सुझाने के लिए उप-चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा की अध्यक्षता में गठित समिति ने हाल ही में अपना प्रतिनिवेदन जमा कर दिया है.

IP एक्ट का अनुभाग 126 क्या है?

  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 126 में मतदान की समाप्ति के लिए नियत किये गये समय के समाप्त होने वाले 48 घंटों की कालावधि के दौरान टेलीविज़न अथवा उसके समान उपकरण के द्वारा तथा अन्य माध्यम से चुनाव सामग्री के प्रदर्शन का प्रतिषेध किया गया है.
  • इस अनुभाग में चुनाव सामग्री की परिभाषा देते हुए उसमें ऐसी किसी भी सामग्री को रखा गया है जिससे चुनाव के परिणाम को प्रभावित किया जा सकता है.
  • यह प्रावधान एग्जिट पोल के संचालन और चुनाव की निर्दिष्ट अवधि में उसके परिणाम के प्रकाशन पर रोक है.
  • निर्वाचन के सम्बन्ध में कोई सार्वजनिक सभा या जुलूस नहीं बुलाएगा, न आयोजित करेगा, न उसमें उपस्थित होगा, न उसमें सम्मिलित होगा और न ही उसे संबोधित करेगा.
  • कोई संगीत समारोह या कोई नाट्य अभिनय या कोई अन्य मनोरंजन द्वारा जनता के समक्ष किसी निर्वाचन सम्बन्धी बात का प्रचार नहीं करेगा.

अनुभाग 126 के उल्लंघन के लिए दंड

यदि कोई अनुभाग 126 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उसे दो वर्षों तक का कारावास अथवा अर्थदंड अथवा दोनों सजाएँ दी जा सकती हैं.

समिति के सुझाव

  • चुनाव के 48 घंटे पहले की अवधि में प्रचार कार्य पर लगी रोक के उल्लंघन से सम्बंधित सामग्री को इन्टरनेट सेवा प्रदाता और सोशल मीडिया कंपनियाँ चुनाव आयोग के इस विषय में निर्देश के तीन घंटे के अन्दर-अंदर वापस ले ले.
  • जनप्रतिनिधित्व के अधिनियम 26(1) अनुभाग में संशोधन करके प्रचार-बंदी के अवधि को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सेवा प्रदाताओं पर भी लागू किया जाए. सेवा प्रदाताओं में आने वाले प्रदाता हैं – टेलिकॉम सेवा प्रदाता, इन्टरनेट सेवा प्रदाता, वेब-होस्टिंग सेवा प्रदाता, सर्च इंजन इत्यादि.
  • आदर्श आचार संहिता में संशोधन कर राजनैतिक दलों को निर्देश दिया जाए कि चुनाव के कम से कम 72 घंटे पहले वे अपना घोषणा-पत्र अवश्य निर्गत कर दें.
  • प्रचार बंदी की अवधि में स्टार प्रचारक प्रेस कांफ्रेंस नहीं करें अथवा चुनाव के मामले में साक्षात्कार न दें.
  • सेवा प्रदाताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके मंच का उपयोग स्वतंत्र एवं न्यायपूर्ण चुनाव को दूषित करने में न हो.
  • चुनाव आयोग सेवा प्रदाताओं से सम्पर्क करने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगा. परन्तु साथ ही सेवा प्रदाता भी चुनाव आयोग के लिए एक विशेष शिकायत निवारण चैनल खोल कर रखेगा. सेवा प्रदाताओं को समय-समय पर आयोग को उनके द्वारा किये गये उपायों को प्रतिवेदित करना होगा.
  • सेवा प्रदाताओं का यह दायित्व होगा कि वे राजनैतिक विज्ञापनों का एक संग्रह रखेंगे जिसमें स्पोंसर करने वालों, व्यय और लक्षित पहुँच के बारे में जानकारी होगी.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Sino-Indian Digital Collaboration Plaza

संदर्भ

राष्ट्रीय सॉफ्टवेर एवं सर्विस कंपनी संघ (National Association of Software and Services Companies – NASSCOM) ने गुईयांग और डालियान के नगरपालिका प्रशासनों के साहचर्य से एक मंच का अनावरण किया है जिसे चीनी-भारतीय डिजिटल सहयोग प्लाजा (The Sino-Indian Digital Collaboration Plaza – SIDCOP) का नाम दिया गया है.

SIDCOP क्या है?

  • SIDCOP एक एकल कृत्रिम बुद्धि से युक्त मंच है जिसका उद्देश्य भारतीय IT कंपनियों और चीनी अध्यवसायों को एक-दूसरे के निकट लाना है. इस मंच का प्रबंधन संयुक्त रूप से एक भारतीय और एक चीनी कम्पनी के द्वारा किया जायेगा.
  • इस पहल का उद्देश्य जटिल व्यावसायिक वातावरण में IT उपकरणों का प्रयोग करके भारतीय IT अध्यवसायों की विशेषज्ञता को व्यवसाय रूपांतरण एवं संचालन में अधिकतम सुधार लाने के लिए भुनाना है.

यह मंच चीनी अध्यवसायों के लिए एक सीमाहीन बाजार उपलब्ध कराता है जिससे उन्हें भारतीय अध्यवसायों से सम्पर्क करके व्यावसायिक समाधानों से सम्बन्धित सबसे उत्कृष्ट औद्योगिक प्रथाओं को अंगीकृत करने और संचालन को अधिकतम फलदायी बनाने में सहायता मिले.

NASSCOM क्या है?

  • NASSCOM एक लाभ-रहित उद्योग संघ है जो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एवं व्यापार प्रक्रिया की आउटसोर्सिंग (BPO) उद्योग से सम्बंधित सर्वोच्च निकाय है.
  • इसकी सदस्यता भारत में पंजीकृत कंपनियों के लिए खुली हुई है.
  • इसका मुख्य कार्य IT-BPM उत्पादों और सेवाओं को उपलब्ध कराना है.
  • NASSCOM का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा की गुणवत्ता एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्यक ढंग से भारतीय सॉफ्टवेर और BPM उद्योग में कार्यान्वयन हो रहा है या नहीं.
  • इसकी स्थापना 1988 में हुई थी.
  • यह एक लाभ-रहित संगठन है.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Partnership Summit

संदर्भ

मुंबई में भागीदारी शिखर सम्मलेन (Partnership Summit) का 25वाँ सत्र आयोजित होने जा रहा है. इसका आयोजन औद्योगिक नीति और प्रोत्साहन विभाग वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, महाराष्ट्र राज्य सरकार एवं भारतीय उद्योग संघ (Confederation of Indian Industry – CII) मिलकर कर रहे हैं.

भागीदारी शिखर सम्मलेन क्या है?

  • यह एक वैश्विक मंच है जिसमें भारतीय और वैश्विक नेताओं को भारतीय आर्थिक नीति एवं वृद्धि की प्रवृत्तियों पर संवाद, विवाद, विमर्श करने का अवसर प्रदान किया जाता है.
  • इसमें होने वाले उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान और B2B बैठकों से यह आशा की जाती है कि नई भागीदारियाँ बनेंगी और निवेश के नए अवसरों का पता चलेगा.
  • यह मंच भारत को उभरते हुए “नया भारत” अथवा “नया वैश्विक आर्थिक पता” के रूप में विश्व के नेताओं के समक्ष प्रस्तुत करेगा.

भारतीय उद्योग संघ (CII) क्या है?

  • भारतीय उद्योग संघ (Confederation of Indian Industry – CII) एक गैर-सरकारी, लाभ-रहित, उद्योग द्वारा संरक्षित एवं उद्योग द्वारा प्रबंधित संगठन है जो भारत की विकास प्रक्रिया में बढ़-चढ़ कर भूमिका निभाता है.
  • इस मूर्धन्य व्यवसाय संघ की स्थापना 1895 में हुई थी. आज इसमें लगभग 9,000 सदस्य हैं जो निजी एवं सार्वजनिक प्रक्षेत्रों (SMEs एवं MNCs) से आते हैं.
  • CII उद्योग जगत, सरकार एवं सिविल सोसाइटी के साथ परामर्शदात्री एवं विमर्शपूर्ण प्रक्रियाओं के माध्यम से तालमेल बिठाते हुए भारत के विकास के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करता है और इस वातावरण को बनाए रखने की चेष्टा करता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Renuka Ji Dam

संदर्भ

यमुना की ऊपरी घाटी में रेणुका जी बहुउद्देशीय बाँध परियोजना के निर्माण को फिर से आरम्भ करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने इन पाँच राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं – उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश.

रेणुका जी बाँध परियोजना

  • रेणुका जी बाँध परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी की सहायक नदी गिरी पर भंडारण परियोजना के रूप में अभिकल्पित एक पहल है.
  • इस परियोजना के अंतर्गत एक 148 मीटर ऊँचा एक बाँध बनाया जाएगा जिससे दिल्ली और इस घाटी से सम्बंधित अन्य राज्यों को पानी दिया जाएगा.
  • इस परियोजना से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा.
  • इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार सिंचाई एवं पेय-जल पर होने वाली लागत का 90% अर्थात् ₹3,83 करोड़ खर्च और शेष ₹432.54 करोड़ घाटी के राज्यों को देना होगा.

रेणुका जी का माहात्म्य

  • रेणुका जी बाँध बन जाने से गिरी नदी में जल का प्रवाह 110% बढ़ जाएगा जिससे दिल्ली और अन्य घाटी राज्यों की पेयजल विषयक आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी.
  • रेणुका जी बाँध से सम्बंधित बाँध हथनीकुंड, वजीराबाद और ओखला में होंगे. इन बराजों से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और राजस्थान को पानी मिलेगा.

Prelims Vishesh

Armed Forces Veterans Day :-

  • जल, थल एवं नौसेना के वरिष्ठ सैनिकों को सम्मानित करने के लिए 14 जनवरी, 2019 को मनाया जा रहा है.
  • पहले इस दिवस का नाम “युद्ध-विराम दिवस” था जो नवम्बर 11 को मनाया जाता था क्योंकि इसी दिन प्रथम विश्व-युद्ध में युद्ध विराम लागू हुआ था. परन्तु 1954 से इसका नाम बदलकर Veterans Day कर दिया गया.
  • यह दिवस 14 जनवरी को 2015 से मनाया जा रहा है क्योंकि उसी तिथि को फील्ड मार्शल जनरल के.एम. करियप्पा सेवा-निवृत्त हुए थे.

Indus Food 2019 :-

  • ग्रेटर नॉएडा में स्थित इंडिया-एक्सपो मार्ट में 14 और 15 जनवरी, 2019 को INDUS FOOD – II का आयोजन होगा.
  • इस आयोजन की थीम है – ‘World Food Supermarket’.
  • इस आयोजन का उद्देश्य खाद्य एवं पेय-पदार्थ क्षेत्र में भारत के निर्यात को बढ़ावा देना है.

Army Tech Seminar (ARTECH 2019) :-

नई दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र (Manekshaw Centre) में भारतीय सेना ने आर्मी टेक्नोलॉजी सेमीनार, 2019 (ARTECH 2019) का आयोजन किया है जिसकी थीम है – स्थल-युद्ध पर उभरती हुई तकनीकों का विध्वन्सात्मक प्रभाव (Disruptive Impact of Emerging Technologies on Land Warfare).


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