Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 12 February 2019


GS Paper 1 Source: The Hindu

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Topic : 40th anniversary of Iran revolution

संदर्भ

2019 में ईरान की इस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगाँठ है.

ईरानी इस्लामी क्रांति क्या है?

ईरानी इस्लामी क्रांति उन घटनाओं की शृंखला को कहते हैं जो 1979 में गठित हुई थीं और जिनके फलस्वरूप अंततः ईरान के राजा मुहम्मद रेज़ा शाह पहलवी को देश छोड़कर भाग जाना पड़ा था और उनकी सरकार के स्थान पर एक इस्लामी गणतंत्र की स्थापना हुई जिसके प्रमुख ग्रैंड अयोतुल्लाह रुहोल्लाह खोमेनी बने जो उस समय के विद्रोही गुटों में से एक के नेता थे. विदित हो कि इस आन्दोलन में इस्लामी संगठनों के अतिरिक्त बहुत-सारे वामपंथी और छात्र गुट भी शामिल थे.

क्रांति के कारण

  • पश्चिमी धर्म-निरपेक्ष नीतियों के अंतर्गत कथित रूप से हो रहे अत्याचारों का प्रतिरोध करना.
  • अमेरिका द्वारा समर्थित राजतंत्र का नाश करना.

परिणाम

इस्लामी क्रांति के कारण राजतंत्र समाप्त हो गया और ईरान एक धर्मतांत्रिक देश बन गया. यहाँ पर यह ध्यान देने योग्य है कि विश्व-भर में कई तख्तापलट हुए हैं जिनके पीछे राष्ट्रवाद अथवा समाजवाद की भावनाएँ रही हैं. परन्तु ईरानी क्रांति में ऐसा पहली बार हुआ है कि धर्म के नाम पर नया तंत्र स्थापित किया गया.


GS Paper 1 Source: The Hindu

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Topic : Promotion and Protection of Maithili Language and its scripts

संदर्भ

मैथिली भाषा और उसकी लिपियों के संवर्धन और संरक्षण हेतु एक रिपोर्ट बनाने के लिए गठित एक समिति ने एमएचआरडी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें उसने मैथिली भाषा के संवर्धन और संरक्षण के लिए कई सिफारिशें की हैं.

समिति की महत्त्वपूर्ण सिफारिशें इस प्रकार हैं :-

  • मिथिलाक्षर का उपयोग सरल हो इसके लिए लिपि को ‘भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास संस्थान’ के द्वारा शीघ्र से शीघ्र कम्यूटर की भाषा (यूनिकोड) में परिवर्तित करने का काम पूरा किया जाए.
  • मिथिलाक्षर लिपि को सीखने के लिए ऑडियो-विजुअल तकनीक भी विकसित की जाए.

पृष्ठभूमि

  • तिरहुत का मिथिलाक्षर पूरे सांस्कृतिक मिथिलांचल की लिपि है. यह लिपि अत्यंत प्राचीन है और जिसकी गणना पूर्वोत्तर भारत की लिपियों में होती है.
  • मिथिलाक्षर लिपि जिस लिपि परिवार से आती है, उसके अन्य सदस्य हैं – बांग्ला, असमिया, नेबारी, उड़िया और तिब्बती.
  • मिथिलाक्षर का वर्तमान स्वरूप 10वीं शताब्दी में बना था. इसका सबसे पुराना उदाहरण 950 ई. के सहोदरा पाषाण अभिलेखों में देखने को मिलता है.

इसके संरक्षण की आवश्यकता

पिछली एक सती से मिथिलाक्षर के प्रयोग में कमी आती रही है और इस प्रकार हमारी संस्कृति का एक अंश लुप्त होता जा रहा है. आज मैथिलि भाषा को लिखने के लिए देवनागरी का अधिक प्रयोग हो रहा है और बहुत कम ही लोग अब मिथिलाक्षर को जानते हैं. मैथिलि भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : African Union

संदर्भ

मिस्र के राष्ट्रपति अब्दल फत्तह अल-सीसी अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष बन गये हैं. विदित हो कि यह पद प्रत्येक वर्ष अफ्रीका महाद्वीप के पाँच क्षेत्रों में बदलता रहता है अर्थात् प्रत्येक वर्ष एक नए अफ्रीकी क्षेत्र के किसी व्यक्ति को यह पद दिया जाता है.

अफ्रीकी संघ क्या है?

  • अफ्रीकी संघ एक महाद्वीपीय संघ है जिसके सदस्य अफ्रीका के सभी 55 देश होते हैं. परन्तु इसमें अफ्रीका में स्थित यूरोपीय प्रभुता वाले विभिन्न क्षेत्र सम्मिलित नहीं होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ सबसे पहले इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में 26 मई, 2001 को स्थापित हुआ था और अगले वर्ष 9 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका में इसका अनावरण किया गया था.
  • अफ्रीकी संघ अफ्रीकी एकता संघ (Organisation of African Unity – OAU) को विस्थापित कर बना था. ज्ञातव्य है कि 32 अफ्रीकी सरकारों ने मिलकर 25 मई, 1963 को यह संगठन अदीस अबाबा में शुरू किया था.
  • अफ्रीकी संघ के अधिकांश बड़े निर्णय इसकी महासभा में लिए जाते हैं जो हर छह महीने पर बैठती है. इस महासभा में सभी देशों और सरकारों के प्रमुख सदस्य होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ का सचिवालय अदीस अबाबा में स्थित है.

अफ्रीकी संघ के मुख्य उद्देश्य

  • अफ्रीकी देशों और अफ्रीकियों के मध्य एकता एवं एकजुटता को बढ़ावा देना.
  • सदस्य देशों की सम्प्रभुता, भौगोलिक एकता और स्वतंत्रता की रक्षा करना.
  • उन उपायों में तेजी लाना जिनसे महाद्वीप की राजनीतिक एवं सामाजिक-आर्थिक एकात्मता संभव हो सके.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Bill to counter exploitation by NRI spouses

संदर्भ

विदेश में ब्याही जाने वाली भारतीय लड़कियों के विदेश में शोषण की बढ़ती हुई घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने राज्यसभा में एक विधेयक प्रस्तुत किया है.

विधयेक के मुख्य तत्त्व

  • विधेयक का उद्देश्य गलत ढंग से ब्याह कर भारत से विदेश ले जाई गई लड़कियों के शोषण को रोकना है.
  • विधेयक ऐसा प्रावधान करेगा कि ऐसे ब्याह के लिए विदेश में रहने वाले भारतीय को जिम्मेवार बनाया जाएगा और गलत ब्याह में फंसाई गई लड़कियों को सुरक्षा दी जायेगी.
  • नए विधेयक के अनुसार किसी अप्रवासी के साथ यदि भारतीय नागरिक विवाह होता है तो विवाह के 30 दिन के भीतर इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा.
  • अपराधी अप्रवासी भारतीय के विरुद्ध ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई आरम्भ करने के लिए यह विधेयक आपराधिक संहिता और पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में आवश्यक कानूनी प्रावधान करने जा रहा है.

इसकी आवश्यकता क्यों?

विदेश मंत्रालय को ढेर सारी ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जो उन भारतीय महिलाओं की ओर से की जा रही थीं जिनका विवाह किसी अप्रवासी से हुआ था. इनमें से अधिकांश महिलाएँ या तो परित्यक्त हो गई थीं अथवा उन्हें सताया जा रहा था. विधेयक इस आशा से तैयार किया गया है कि इसके प्रावधान अनिवासी भारतीयों को विवाह को शोषण का साधन बनाने से रोकेंगे.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : India-Norway Marine Pollution Initiative

संदर्भ

हाल ही में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नॉर्वे के विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर भारत – नॉर्वे समुद्री प्रदूषण पहल स्‍थापित करने के लिए एक आशय पत्र पर हस्‍ताक्षर किये.

भारत – नॉर्वे समुद्री प्रदूषण पहल

  • इस पहल का उद्देश्‍य समुद्री और समुद्र क्षेत्र के अतिरिक्त ऊर्जा क्षेत्र में ब्लू अर्थव्‍यवस्‍था के रणनीतिक क्षेत्रों में स्‍थायी समाधान विकसित करना है.
  • इस भागीदारी में भारत और नॉर्वे अपने अनुभव और क्षमता साझा करेंगे. इसके अतिरिक्त स्‍वच्‍छ और स्वस्‍थ महासागरों के विकास, समुद्रीय संसाधनों का सतत उपयोग और ब्लू अर्थव्‍यवस्‍था के विकास के प्रयासों में सहयोग करेंगे.
  • भारत – नॉर्वे समुद्री प्रदूषण पहल समुद्री प्रदूषण की समस्‍या से निपटेगी. यह समस्‍या तेजी से बढ़ती हुई पर्यावरणीय चिंता बन गयी है.
  • इस पहल को लागू करने वाले भागीदारों की श्रृंखला के जरिये यह पहल स्‍थायी अपशिष्‍ट प्रबंधन प्रक्रियाओं को लागू करने, समुद्री प्रदूषण के स्रोतों और संभावनाओं के बारे में जानकारी को एकत्र करने और विश्‍लेषण करने के लिए प्रणाली विकसित करने तथा निजी क्षेत्र निवेश में सुधार लाने में स्‍थानीय सरकारों को सहायता देने की मांग करेगी.
  • इससे समुद्र तट की सफाई की कोशिशों, जागरूकता बढ़ाने वाले अभियानों, सीमेंट उद्योग में कोयले के स्थान पर प्‍लास्टिक अपशिष्‍ट को ईंधन के विकल्‍प के रूप में उपयोग करने और जमा योजनाओं के लिए ढांचा विकसित करने में भी मदद मिलेगी.

समुद्री प्रदूषण के कारण

समुद्री प्रदूषण तब होता है जब रसायन, कण, औद्योगिक, कृषि और रिहायशी कचरा, शोर या आक्रामक जीव महासागर में प्रवेश करते हैं और हानिकारक प्रभाव, या संभवतः हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करते हैं. समुद्री प्रदूषण के ज्यादातर स्रोत थल आधारित होते हैं. प्रदूषण प्रायः कृषि अपवाह या वायु प्रवाह से पैदा हुए कचरे जैसे अस्पष्ट स्रोतों से होता है.

समुद्री प्रदूषण के प्रभाव

समुद्री जल में घुलित ऑक्सीजन की कमी
समुद्री जल में प्रदूषकों विशेषकर कार्बनिक प्रदूषकों की मात्रा बढ़ने के साथ ही जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा में कमी होती है.

समुद्री जीवों पर प्रभाव
समुद्री जल में तेल के रिसाव से समुद्री जल सतह पर तेल की पतली परत बन जाती है जिससे वातावरण की वायु जल सतह के सीधे सम्पर्क में नहीं आ पाती. परिणामस्वरूप जल में घुलित ऑक्सीजन की सांद्रता अल्प हो जाती है. इसके आलावा रिसे हुए तेल को हटाने के लिये उपयोग किए जाने वाले डिटर्जेंट भी समुद्र की जलीय जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं.

खाद्य श्रृंखला पर प्रभाव

समुद्री प्रदूषण के दौरान प्रदूषकों के समुद्री खाद्य श्रृंखला अथवा सतह के सेडीमेंट के साथ विभिन्न भौतिक – रासायनिक क्रियाओं के माध्यम से ये उनमें पहुँच जाते हैं. प्रदूषकों के समुद्री जीवों द्वारा ग्रहण किये जाने अथवा समुद्री वनस्पति द्वारा इनके अवशोषण से इनके माध्यम से ये मनुष्य की खाद्य श्रृंखला में भी पहुँच जाते हैं. अनेक विषैले प्रदूषक समुद्री जीवों एवं वनस्पतियों की मृत्यु का कारण बनते हैं और इस प्रकार समुद्र के पारिस्थितिकीय तंत्र को प्रभावित करते हैं. समुद्री जैव-विविधता पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है.

अन्य प्रभाव
उपरोक्त के अतिरिक्त समुद्री प्रदूषण का दुष्प्रभाव समुद्रों पर आधारित जीव-जन्तुओं पर भी पड़ता है. अनेक समुद्री पक्षी जो समुद्रों पाये जाने वाले विभिन्न जीवों जैसे – मछलियों आदि पर निर्भर होते हैं, वे या तो खाद्य श्रृंखला में आने वाले प्रदूषकों के कारण मारे जाते हैं या समुद्री जल में पाये जाने वाले पॉलीथीन की थैलियों को निगलकर मर जाते हैं. कई बार पॉलीथीन की थैलियाँ उनकी गर्दन में फँस जाती हैं और दम घुटने के कारण उनकी मृत्यु हो जाती है.

समुद्री प्रदूषण को रोकने के उपाय

  • प्लास्टिक का उपयोग और गंदगी करना बंद करें क्योंकि वे न केवल नालियों को जाम कर देते हैं बल्कि समुद्रों में भी पहुँच जाते हैं.
  • सुनिश्चित करें कि ऊपर वर्णित रसायनों का उपयोग पानी की धाराओं के पास कहीं भी ना किया जाए और इस तरह के रसायनों के उपयोग को कम करने का प्रयास करें.
  • किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से भारी परिवर्तन कर जैविक खेती के तरीकों के उपयोग की ओर बढ़ने की जरूरत है.
  • सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और छोटे एवं सारभूत उपायों को अपनाकर कार्बन उत्सर्जन को कम करें जो ना केवल पर्यावरण से प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा बल्कि आगामी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य भी सुनिश्चित करेगा.
  • समुद्रों में किसी भी प्रकार के तेल या रसायन को फैलाव को रोकें और यदि किसी भी तरह से आपके सामने कोई तेल या रासायन फैलते हैं तो स्वयंसेवक के रुप में उसकी सफाई करने में मदद करें.
  • स्वयं समुद्र तट को साफ करने की गतिविधियाँ प्रारम्भ करें और इस तरह के कार्यों के विषय में अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : ‘GiveItUp’ campaign

संदर्भ

06 फरवरी, 2019 तक लगभग 1.04 करोड़ LPG उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से ’GiveItUp’ अभियान के तहत अपनी LPG सब्सिडी को त्याग दिया है.

क्या है यह अभियान?

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मार्च 2015 को गिव इट अप अभियान का शुभारंभ किया था.
  • यह अभियान संपन्न तबके से अपनी गैस सब्सिडी त्यागने का अनुरोध करने वाला एक अभियान है.
  • इस अभियान को ऊर्जा केंद्रित वार्षिक शिखर सम्मेलन ‘ऊर्जा संगम 2015’ के अवसर पर शुरू किया गया.
  • इस अभियान के तहत समाज के संपन्न तबकों से अनुरोध किया गया है की वह अपनी एलपीजी सब्सिडी त्याग दें ताकि सब्सिडी को समाज के जरूरतमंद लोगों को दिया जा सके.
  • प्रधानमंत्री ने कम्पनियों और बैंकों से अनुरोध किया था की वह अपने कर्मचारियों को एलपीजी सब्सिडी त्यागने के लिए प्रोत्साहित करें.
  • उनके द्वारा त्यक्त गैस सिलेंडरों को समाज के उस कमजोर वर्गों को दिया जा सके जो अभी भी भोजन पकाने के लिए लकड़ी को ईधन के रूप में प्रयोग करतें हैं.
  • प्रधानमंत्री ने यह भी अनुरोध किया की गिव इट अप अभियान को स्वच्छ भारत और बेटी बचाओ अभियान की तरह ही लिया जाना चाहिए.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : National Gas Grid

संदर्भ

भारत सरकार एक राष्ट्रीय गैस ग्रिड के निर्माण की योजना बना रही है.

नेशनल ग्रिड के उद्देश्य

  • देश के विभिन्न क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता का असंतुलन दूर करना.
  • गैस के रूप में स्वच्छ एवं हरित ईंधन की उपलब्धता देश भर में सुनिश्चित करना.
  • गैस की माँग करने वाले प्रमुख केन्द्रों तक गैस पहुँचाना.
  • विभिन्न प्रक्षेत्रों के उपभोक्ताओं तक गैस की पहुँच सुनिश्चित करना.
  • विभिन्न शहरों को CNG और PNG की आपूर्ति के लिए गैस वितरण का संजाल निर्मित करना.

महत्ता

राष्ट्रीय ग्रिड होने से लोगों को घर तक गैस कनेक्शन मिलेगा. इससे गैस पर चलने वाले वाहनों के लिए बेहतर सुविधा बेहतर मिल सकेगी. ग्रिड के कारण उर्वरक प्रक्षेत्र भी लाभान्वित होगा. परिवहन प्रक्षेत्र और ऊर्जा प्रक्षेत्र को भी इससे बढ़ावा मिलेगा.


Prelims Vishesh

Akshaya Patra Foundation :-

  • पीएम मोदी ने अक्षयपात्र फाउंडेशन के कार्यक्रम में लिया हिस्सा लिया.
  • अक्षयपात्र फाउंडेशन एक एनजीओ है जो सरकारी स्‍कूलों में चलने वाली मिड-डे मील योजना में सरकार के साथ काम करता है.
  • इसकी स्‍थापना वर्ष 2000 में हुई थी.
  • यह फाउंडेशन 12 राज्‍यों के 14702 स्‍कूलों में 10 लाख 60 हजार बच्‍चों को खाना उपलब्‍ध कराता है.

DRDO’s ‘Dare to Dream’ contest :

  • सुरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक “Dare to Dream” नामक एक प्रतियोगिता चलाई है जिसमें स्टार्ट-अप कंपनियों और व्यक्तियों को रक्षा एवं अन्तरिक्ष से सम्बंधित नई-नई तकनीकों का आविष्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
  • इसमें पाँच पुरस्कार हैं जो 3 लाख से 10 लाख रु. तक के हैं.

‘Sarthi Sandesh Vahini’ :

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने सारथि सन्देश वाहिनी नामक एक अभियान चलाया है.
  • उत्तर प्रदेश के परिवार कल्याण मंत्रालय ने शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन के लिए सारथी सन्देश वाहिनी अभियान आरम्भ किया है. यह वाहन विभिन्न डाक्यूमेंट्री तथा फिल्मों के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जानकारी देंगे.

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