Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 11 September 2020


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Govind Ballabh Pant

संदर्भ

10 सितंबर को गोविंद बल्लभ पंत की 133 वीं जयंती मनाई गई.

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गोविंद बल्लभ पंत कौन थे?

  1. अपने संकल्प और साहस के मशहूर पंत जी का जन्म 10 सितम्बर, 1887 ई. वर्तमान उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के खूंट (धामस) नामक गाँव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इस परिवार का सम्बन्ध कुमाऊँ की एक अत्यन्त प्राचीन और सम्मानित परम्परा से है. पन्तों की इस परम्परा का मूल स्थान महाराष्ट्र का कोंकण प्रदेश माना जाता है और इसके आदि पुरुष माने जाते हैं जयदेव पंत. ऐसी मान्यता है कि 11वीं सदी के आरम्भ में जयदेव पंत तथा उनका परिवार कुमाऊं में आकर बस गया था.
  2. उन्होंने काशीपुर में प्रेम सभा नामक एक संगठन की स्थापना की जिसने कई दिशाओं में सुधार कार्य शुरू किए. ब्रिटिश शासकों ने समझा कि समाज सुधार के नाम पर यहाँ आतंकवादी कार्यो को प्रोत्साहन दिया जाता है. फलस्वरूप इस सभा को हटाने के अनेक प्रयत्न किये गये पर पंत जी के प्रयत्नों से वह सफल नहीं हो पाये.
  3. उन्होंने ब्रिटिश सरकार के लिए करों का भुगतान नहीं करने के कारण एक स्कूल को बंद होने से बचाया.
  4. 1914 में पंत जी के प्रयत्नों से ही ‘उदयराज हिन्दू हाईस्कूल’ की स्थापना हुई. राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने इस स्कूल के विरुद्ध डिग्री दायर कर नीलामी के आदेश पारित कर दिये. जब पंत जी को पता चला तो उन्होंनें चन्दा मांगकर इसको पूरा किया. 1916 में पंत जी काशीपुर की नोटीफाइड ऐरिया कमेटी में लिये गये. बाद में कमेटी की ‘शिक्षा समिति’ के अध्यक्ष बने. कुमायूं में सबसे पहले निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा लागू करने का श्रेय पंत जी को ही है.
  5. पंतजी ने कुमायूं में राष्ट्रीय आन्दोलनको अंहिसाके आधार पर संगठित किया. आरम्भ से ही कुमाऊं के राजनीतिक आन्दोलन का नेतृत्व पंत जी के हाथों में रहा. कुमाऊं में राष्ट्रीय आन्दोलन का आरम्भ कुली उतार, जंगलात आंदोलन, स्वदेशी प्रचार तथा विदेशी कपड़ों की होली व लगान-बंदी आदि से हुआ. बाद में धीरे-धीरे कांग्रेस द्वारा घोषित असहयोग आन्दोलन की लहर कुमायूं में छा गयी. 1926 के बाद यह कांग्रेस में मिल गयी.

उनके द्वारा धारण किये गए पद

स्वतंत्रता पूर्व

  1. उन्हें, दिसंबर 1921 में, आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत की विधान सभा के लिए चुना गया, जिसे बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश का नाम दिया.
  2. उन्हें नैनीताल से स्वराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुना गया था.
  3. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत वर्ष 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में पंत को संयुक्त प्रांत का प्रमुख नियुक्त किया गया था. उन्होंने वर्ष 1939 तक इस पद पर कार्य किया, इसके पश्चात अंग्रेजों द्वारा भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल करने के विरोध में उन्होंने कांग्रेस के सभी मंत्रियों सहित इस्तीफा दे दिया.
  4. वर्ष 1946 में हुए चुनावों में, पंत को एक बार फिर से संयुक्त प्रांत का प्रमुख नियुक्त किया गया.

स्वतंत्रता के बाद

  1. वे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने.
  2. उन्होंने वर्ष 1955 से 1961 तक भारत के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया. यह उनके कार्यकाल के दौरान राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया था.

प्रमुख योगदान

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जमींदारी व्यवस्था उन्मूलन तथा वन संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया.

  1. उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए अत्यधिक लगान से किसानों को बचाने के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किये.
  2. उन्होंने देश में कई कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया और कुली-बेगार कानून का विरोध किया, जिसमे मजदूरों को ब्रिटिश अधिकारियों के भारी सामान को बिना किसी भुगतान के ढोना पड़ता था.
  3. गांधी के नक्शेकदम पर चलते हुए, पंत ने संयुक्त प्रांत में व्यापक स्तर पर नमक आंदोलन का आयोजन किया. इसके लिए मई 1930 में, उन्हें देहरादून जेल में गिरफ्तार किया गया.
  4. उन्होंने साइमन कमीशन के खिलाफ भी विरोध किया.
  5. पंत, अल्पसंख्यकों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के विरुद्ध थे, उनका कहना था कि यह कदम समुदायों को विभाजित करने वाला है.

पुरस्कार एवं सम्मान

भारत रत्न सम्मान उनके ही काल में आरम्भ किया गया. सन् 1957 में गणतन्त्र दिवस पर महान् देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता, तर्क का धनी एवं उदारमना पन्त जी को भारत की सर्वोच्च उपाधि ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया. आज उनकी याद में उनके जन्म स्थान पर एक स्मारक का निर्माण किया गया है. पंडित पन्त को उत्तराखंड के लोग गोठी पोंढ़ ज्यू कह कर भी पुकारते हैं क्योंकि पन्त जी का जन्म अपने ननिहाल के ‘गोठ’ यानि जो स्थान मवेशियों के लिए बनाया जाता है वहाँ हुआ था.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Economics of animal-rearing.

Topic : Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana

संदर्भ

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 10 सितंबर को डिजिटल माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) का शुभारम्भ करेंगे और ई-गोपाला ऐप का भी अनावरण करेंगे.

प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  1. PMMSY भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास के माध्यम से नीली क्रांति लाने के बनाई गई है. इसके दो अवयव हैं –केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS) और केंद्र प्रायोजित योजना (CSS).
  2. यह योजना वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक 5 वर्षों की अवधि के दौरान लागू की जाएगी.
  3. इस योजना का नोडल मंत्रालयमत्स्य पालनपशुपालन एवं डेयरी मंत्रालयहै.

कार्यान्वयन

केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS) : संपूर्ण परियोजना / इकाई लागत केंद्र सरकार (अर्थात् 100% केंद्रीय वित्त पोषण) द्वारा वहन की जाएगी.

इस योजना के केन्द्रीय प्रायोजित योजना अवयव के दो भाग हैं – i) पहला, जिसमें लाभार्थी नहीं होंगे ii) और दूसरा, जो लाभार्थियों के लिए होंगे.

इसके अंतर्गत जो काम होगा वे हैं –

  1. उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि.
  2. अवसंरचना एवं फसल कटने के बाद का प्रबंधन.
  3. मत्स्यपालन और नियामक ढांचा.

PMMSY के मुख्य लाभ

  1. मत्स्यपालन क्षेत्र में जो महत्त्वपूर्ण कमियाँ हैं उनपर ध्यान देना और इसकी पूर्ण क्षमता को साकार करना.
  2. निरंतर औसत वार्षिक विकास दर पर मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी.
  3. प्रमाणित गुणवत्ता वाले मछली के बीज और दाने की उपलब्धता, मछली कहाँ-कहाँ उपलब्ध हैं यह पता लगाने की प्रक्रिया के साथ-साथ समुद्र आदि में मछुआरों के स्वास्थ्य के कुशल प्रबंधन में सुधार लाना.
  4. आधुनिकीकरण और मूल्य शृंखला के सुदृढीकरण समेत महत्त्वपूर्ण अवसंरचना का सृजन.
  5. 15 लाख मछुआरों, मत्स्य पालकों, मत्स्यकर्मियों, मत्स्य विक्रेताओं एवं मत्स्यपालन एवं सम्बद्ध गतिविधियों में लगे हुए ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए प्रत्यक्ष लाभदायी रोजगार के अवसरों का सृजन.
  6. मत्स्यपालन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना तथा मछली और मत्स्य उत्पादों में प्रतिस्पर्धा में वृद्धि करना.
  7. मछुआरों और मत्स्यकर्मियों के लिए सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना.

ई-गोपाला ऐप

  • ई-गोपाला ऐप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक समग्र नस्ल सुधार, बाज़ार और सूचना पोर्टल है.
  • ई-गोपाला ऐप निम्नलिखित पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा-
  • सभी रूपों (वीर्य, भ्रूण, आदि) में रोग मुक्त जीवाणु (जर्मप्लाज्म) खरीदना और बेचना,
  • गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सेवाओं की उपलब्धता (कृत्रिम गर्भाधान, पशु प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि)
  • पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन करना,
  • उचित आयुर्वेदिक दवा/एथनो पशु चिकित्सा दवा का उपयोग करते हुए जानवरों के उपचार आदि की जानकारी
  • पशु किसानों को टीकाकरण, गर्भावस्था निदान आदि के लिए नियत तारीख पर सूचित करना
  • उन्हें क्षेत्र में विभिन्न सरकारी योजनाओं और अभियानों के बारे में सूचित करना आदि.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure – transport

Topic : Road accidents and related 1.5 lakh deaths per annum would be reduced by 50 per cent by 2025 against the target of 2030

संदर्भ

सरकार द्वारा सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्युओं को वर्तमान 1.5 लाख से घटाकर वर्ष 2025 तक लगभग आधा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है.

पृष्ठभूमि

सरकार द्वारा वर्ष 2015 में ब्राजीलिया घोषणापत्र (Brasilia declaration) पर हस्ताक्षर किए गए थे. इसके तहत भारत ने सड़क दुर्घटना एवं इनसे होने वाली मृत्युओं को आधा करने हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की थी.

महत्त्वपूर्ण आँकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau: NCRB) के अनुसार, वर्ष 2019 के दौरान, सड़क दुर्घटनाओं के कुल 4,37,396 मामले दर्ज किए गए थे, जिनके कारण 1,54,732 लोगों की मृत्यु हुई थीं. इसमें यातायात दुर्घटनाओं (43.9 प्रतिशत) के कारण अधिक मृत्यु हुई थी.

सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण

  • 59.6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएँ अत्यधिक गति (over-speeding) के कारण हुई हैं.
  • 25.7 प्रतिशत दुर्घटनाएँ जोखिमपूर्ण और असावधानीपूर्ण ड्राइविंग या ओवरटेकिंग के कारण हुई हैं.
  • 16.8 प्रतिशत दुर्घटनाएँ शराब पीकर वाहन चलाने, खराब मौसम और यांत्रिक त्रुटि आदि जैसे कारणों से घटित हुई हैं.

चुनौतियाँ

लाइसेंस जारी करने की भ्रष्ट व्यवस्था, दुर्घटनाओं की निम्नस्तरीय वैज्ञानिक जाँच, राजमार्गों पर पैदल यात्री पार-गमन (क्रॉसिंग) का अभाव आदि.

सरकार द्वारा उठाये गये कदम

  1. राजमार्गों पर ब्लैकस्पॉट की पहचान और निवारण : विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank : ADP) द्वारा वित्त पोषित परियोजना. यहाँ ब्लैकस्पॉट का अर्थ है – राजमार्गों पर दुर्घटना प्रवण स्थान.
  2. मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 (Motor Vehicle (Amendment) Act, 2019) के तहत कठोर दंड, दोषयुक्त वाहनों की वापसी और गुड समैरिटन्स (संकट के समय सहायता करने वाले) की पहचान जैसे प्रावधान किए गए हैं.
  3. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति (National Road Safety Policy): इसे वर्ष 2010 में अनुमोदित किया गया था. यह सुरक्षित सड़क अवसंरचना, वाहन एवं वाहन चालक की सुरक्षा आदि के लिए नीतिगत पहल की रूपरेखा निर्धारित करती है.
  4. राजमार्गों से खतरनाक बिंदुओं को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित सड़क योजना का संचालन किया जा रहा है.
  5. समेकित सड़क दुर्घटना डेटाबेस (Integrated Road Accident Database – IRAD) :  इसका निर्माण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – मद्रास ने किया है. इसका संचालन राष्ट्रीय इन्फोर्मेटिक्स केंद्र (NIC) करेगा. इस परियोजना में 258 करोड़ रु. व्यय होंगे जिसके लिए विश्व बैंक भी सहयोग कर रहा है. इस डेटाबेस का प्रायोगिक कार्यान्वयन सबसे पहले उन छह राज्यों में होगा जहाँ सड़क दुर्घटनाओं से सर्वाधिक मृत्यु होती है. ये राज्य हैं – कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश. इस ऐप में पुलिसकर्मी किसी सड़क दुर्घटना से सम्बंधित विवरण के साथ-साथ चित्र और विडियो भी डाल सकता है. ऐसा करने से उस घटना-विशेष के लिए एक अनूठी आई.डी. का सृजन होगा. तत्पश्चात् लोक निर्माण विभाग अथवा स्थानीय निकाय के एक इंजिनियर को उसके मोबाइल पर अलर्ट मिल जाएगा. उसके उपरान्त वह घटना स्थल पर जाएगा, जाँच-पड़ताल करेगा और सड़क की रूपरेखा जैसे अपेक्षित विवरण ऐप पर डाल देगा. इस प्रकार संगृहीत डाटा का विश्लेषण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – मद्रास (IIT-M) का एक दल करेगा और यह सुझाव देगा कि सड़क की रूपरेखा को सुधारने के लिए कौन-कौन से कदम उठाये जा सकते हैं. यदि चाहे तो सड़क पर चलने वाला कोई जन भी अपने अलग मोबाइल ऐप पर सम्बंधित दुर्घटना का डाटा डाल सकता है.

GS Paper 3 Source : The Economic Times

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization, of resources, growth, development and employment.

Topic : Overall FDI rises 10% in FY20, but money coming in from Cayman Islands jumps 305%

संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक के हालिया आँकड़े के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, साथ ही केमैन आइलैंड्स (Cayman Islands) से आने वाले धन में 305 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

मुख्य तथ्य

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) विगत वित्त वर्ष के 74 बिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2020 में 10 प्रतिशत बढ़कर 42.69 बिलियन डॉलर हो गया है.
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण उत्पन्न हुई वैश्विक आर्थिक मंदी और निवेश की चिंताओं के बावजूद, भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है. वर्ष 2019 में भारत वैश्विक स्तर पर 9वाँ सबसे बड़ा निवेश प्राप्तकर्ता देश रहा है.
  • FDI का सर्वाधिक प्रवाह सेवा क्षेत्र (service sector) में प्राप्त हुआ है. इसके अंतर्गत संचार, खुदरा और थोक व्यापार, वित्तीय सेवा, कंप्यूटर एवं व्यावसायिक सेवा तथा विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं.
  • विनिर्माण क्षेत्र को 8.15 अरब डॉलर, संचार सेवाओं को 6.83 अरब डॉलर और खुदरा व्यापार को 4.91 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है.
  • केमैन आइलैंड्स से प्राप्त होने वाले FDI में वर्ष 2019-20 के दौरान 305 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो बढ़कर 3.49 बिलियन डॉलर हो गया है.
  • केमैन आइलैंड्स को टैक्स हेवन क्षेत्र (अल्प कर दर वाले राज्यक्षेत्र) माना जाता है, इसलिए ये निवेश के अनुमार्गन (routing) के लिए सर्वाधिक पसंदीदा स्थलों में से एक बन जाते हैं.
  • भारत में FDI प्रवाह के प्रमुख वाहक हैं: FDI मानदंडों में छूट, युवा एवं वहनीय श्रम बल, बाजार का बड़ा आकार, आर्थिक प्रदर्शन, तकनीकी एवं नवाचार क्षमताएं, व्यवसाय करने में सुगमता (Ease of Doing Business: EoDB) के संदर्भ में किए गए सुधार आदि.
  • ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा भारतीय राज्यों के लिए किए गए एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि EoDB स्कोर में एक प्रतिशत की वृद्धि होने से FDI अंतर्वाह में 6.32 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होती है.

विदेशी निवेश (Foreign Investment)

  • जब कोई देश विकासात्मक कार्यो के लिये अपने घरेलू स्रोत से संसाधनों को नहीं जुटा पाता है तो उसे देश के बाहर जाकर शेष विश्व की अर्थव्यवस्था से संसाधनों को जुटाना पड़ता है.
  • शेष विश्व से ये संसाधन या तो कर्ज (ऋण) के रूप में जुटाए जाते हैं या फिर निवेश के रूप में.
  • कर्ज के रूप में जुटाए गए संसाधनों पर ब्याज देना पड़ता है, जबकि निवेश की स्थिति में हमें लाभ में भागीदारी प्रदान करनी होती है.
  • विदेशी निवेश विकासात्मक कार्यों के लिये एक महत्त्वपूर्ण ज़रिया है. विदेशी निवेश को निम्न दो रूपों में देखा जा सकता है-
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI): यदि विदेशी निवेशक को अपने निवेश से कंपनी के 10% या अधिक शेयर प्राप्त हो जाएँ जिससे कि वह कंपनी के निदेशक मंडल में प्रत्यक्ष भागीदारी कर सके तो इस निवेश को ‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’ कहते हैं. इससे विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होती है.
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (Foreign Portfolio Investment- FPI): यदि किसी विदेशी निवेशक द्वारा कंपनी के 10% से कम शेयर खरीदे जाएँ तो उसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश कहते हैं. FPI के अंतर्गत विदेशी संस्थाओं द्वारा खरीदे गए शेयर को विदेशी संस्थागत निवेश, जबकि विदेशी व्यक्तियों द्वारा खरीदे गए शेयर को पत्रागत/अर्हता प्राप्त विदेशी निवेश कहते हैं.
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की तुलना में बेहतर माने जाते हैं क्योंकि FDI किसी देश की अर्थव्यवस्था को समुचित स्थिरता प्रदान करते हैं जबकि FPI निवेश अस्थिर प्रकृति के होते हैं और इनमें संकट की स्थिति में अर्थव्यवस्था से निकल जाने की प्रवृति देखी जाती है.

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

  • भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को दो अलग-अलग मार्गों के माध्यम से अनुमति दी जाती है- पहला, स्वचालित (Automatic) और दूसरा, सरकारी अनुमोदन के माध्यम से.
  • स्वचालित मार्ग में विदेशी संस्थाओं को निवेश करने के लिये सरकार की पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है.
  • हालाँकि उन्हें निर्धारित समयावधि में निवेश की मात्रा के बारे में भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचित करना होता है.
  • विशिष्ट क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सरकारी अनुमोदन के माध्यम से होता है.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : First World Solar Technology Summit (WSTS)

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance – ISA) द्वारा प्रथम विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (World Solar Technology Summit : WSTS) का आयोजन किया गया.

WSTS का उद्देश्य

विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सौर प्रौद्योगिकियों में हुए हालिया विकासक्रम, (लागत व प्रौद्योगिकी के संबंध में), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, चुनौतियों और इस क्षेत्र से संबद्ध चिंताओं पर चर्चा करने के लिए प्रमुख हितधारकों (शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों आदि) को एकजुट करना है.

शिखर सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष

  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ने नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विश्व बैंक के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत मंत्रालय को देश की “वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड” (OSOWOG) पहल को लागू करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है.
  • OSOWOG का लक्ष्य 140 देशों को एक कॉमन ग्रिड के माध्यम से जोड़ना है, जिसका उपयोग सौर ऊर्जा के अंतरण के लिए किया जाएगा.
  • विश्व भर के शोधार्थियों की सौर ऊर्जा पर लेख प्रकाशित करने के लिए सहायता करने हेतु जर्नल ऑन सोलर एनर्जी (JOSE) का अनावरण किया गया.
  • OSOWOG अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण भारत द्वारा प्रारम्भ की गयी एक पहल है.
  • OSOWOG का ब्लू प्रिंटविश्व बैंक के तकनीकी सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित किया जाएगा.
  • OSOWOG कोतीन चरणों में पूरा करने की योजना है. इसके पहले चरण में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया (MESASEA) को परस्पर जोड़ा जाएगा. दूसरे चरण में अफ्रीका को जोड़ा जाएगा और तीसरे एवं आखिरी चरण में पूरी परियोजना का वैश्वीकरण होगा.

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन

  • ISA (International Solar Alliance) की स्थापना CoP21 पेरिस घोषणा के अनुसार हुई है. 6 दिसम्बर, 2017 को ISA का फ्रेमवर्क समझौता लागू हो गया और इसके साथ ही यह संधि पर आधारित एक अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन के तौर पर औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया.
  • इस संघ का उद्देश्य है सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना जिससे पेट्रोल, डीजल पर निर्भरता कम की जा सके.
  • सौर संघ का प्रधान लक्ष्य विश्व-भर में 1,000 GW सौर ऊर्जा का उत्पादन करना और इसके लिए 2030 तक सौर ऊर्जा में 1,000 बिलियन डॉलर के निवेश का प्रबंध करना है.
  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय, अंतर-सरकारी संघ है जो आपसी समझौते पर आधारित है.
  • अब तक 54 देशों ने इसके फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
  • यह 121 ऐसे देशों का संघ है जो सौर प्रकाश की दृष्टि से समृद्ध हैं. 
  • ये देश पूर्ण या आंशिक रूप से कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं.
  • इसका मुख्यालय भारत में है और इसका अंतरिम सचिवालय फिलहाल गुरुग्राम में बन रहा है.

Prelims Vishesh

Partnership for Action on Green Economy (PAGE) :-

  • PAGE को वर्ष 2013 में आर्थिक विकास को गति प्रदान करने, आय और रोज़गार का सृजन करने, निर्धनता एवं असमता को कम करने तथा राष्ट्रों द्वारा अपनी अर्थव्यवस्थाओं के पारिस्थितिक आधार को सुदृढ़ करने के लिए आर्थिक नीतियों व प्रथाओं का धारणीयता के अनुसार पुनर्निर्धारण करने की दिशा में राष्ट्रों का समर्थन करने के उद्देश्य से अनावृत किया गया था.
  • यह साझेदारी सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्य क्रमांक-8 को प्राप्त करने में देशों को सहायता प्रदान करने का प्रयोजन रखती है.
  • SDG-8 में सभी के लिए “संधारणीय, समावेशी और सतत आर्थिक विकास, पूर्ण और उत्पादक रोजगार तथा सम्माननीय कार्य को बढ़ावा देना” शामिल है.
  • PAGE, संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों यथा- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन और संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को एक मंच प्रदान करता है.

e-Kisan Mandis :-

  • प्रथम ई-किसान मंडी का परिचालन पुणे में प्रारंभ किया गया है. यह भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) की एक पहल है.
  • इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM), जो कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) पर केंद्रित है, के विपरीत ई-किसान मंडियां कृषि उत्पादों के व्यापार के लिए किसानों, कृषि-उत्पादकों, व्यापारियों और छोटे खरीदारों को एक साझा मंच प्रदान करती हैं.
  • ये एक हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत कार्य करेंगी, जिसमें NAFED के स्वामित्वाधीन भूमि ही संबंधित क्षेत्र में कृषि उत्पाद कंपनियों (FPCs) हेतु हब के रूप में आवंटित होगी.

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