Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 11 September 2019


GS Paper 1 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc., geographical features and their location- changes in critical geographical features (including water-bodies and ice-caps) and in flora and fauna and the effects of such changes.

Topic : Mapping lightning across India

संदर्भ

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) के साथ निकटवर्ती साहचर्य रखने वाले अलाभकारी संगठन जलवायु प्रतिरोधी पर्यवेक्षण प्रणाली प्रोत्साहन परिषद् (Climate Resilient Observing Systems Promotion Council – CROPC) ने पहली बार मानसून मध्य (2019) वज्रपात प्रतिवेदन (Mid- Monsoon 2019 Lightning Report) प्रस्तुत किया है जिसमें देश-भर में होने वाले वज्रपातों और उनसे हुई प्राणों की क्षति के विषय में विवरण अंकित किये गये हैं.

इस प्रतिवेदन से ज्ञात होता है कि इस वर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच की चार महीने की अवधि में कम से कम 1,311 लोगों ने वज्रपात से प्राण गँवाए हैं.

प्रतिवेदन का उद्देश्य ऐसे आँकड़े जुटाने हैं जिनके आधार पर वज्रपात की भविष्यवाणी की जा सकती है.

वज्रपात की भविष्यवाणी

  • जब वज्रपात में बिजली पृथ्वी की ओर दौड़ती है और किसी पर गिरती है तो उसके 30-40 मिनट पहले उसकी भविष्यवाणी की जा सकती है.
  • यह भविष्यवाणी मेघों में चमकती हुई बिजली के अध्ययन और अनुश्रवण के आधार पर संभव है.
  • वज्रपात के विषय में समय पर सूचना उपलब्ध हो जाने से अनेकों प्राण बचाए जा सकते हैं.

वज्रपात क्या है?

  • वज्रपात वस्तुतः वायुमंडल में होने वाला एक अत्यंत तीव्र और भारी विद्युत प्रवाह है जिसमें कुछ धरातल की ओर गमन कर जाता है.
  • बिजली का यह प्रवाह 10-12 किलोमीटर लम्बे उन बादलों में होता है जो विशाल आकार के होते हैं और उनमें बहुत अधिक आर्द्रता भरी होती है.

बिजली कैसे गिरती है?

  • बिजली वाले बादल धरातल से 1-2 किलोमीटर की दूरी के भीतर होते हैं जबकि उनका शीर्ष भाग 12-13 किलोमीटर दूरी पर रहता है.
  • इन बादलों के शीर्ष पर तापमान -35 से लेकर -45 डिग्री सेल्सियस होता है.
  • इन बादलों में जैसे-जैसे जलवाष्प ऊपर जाता है, गिरते हुए तापमान के कारण वह संघनित होने लगता है. इस प्रक्रिया में ताप उत्पन्न होता है जो जलकणों को और ऊपर की ओर धकेलने लगता है.
  • जब जलवाष्प शून्य डिग्री सेल्सियस तापमान पर पहुँच जाता है तो उसकी बूँदें छोटे-छोटे बर्फीले रवों में बदल जाती हैं. जब वे ऊपर जाती हैं तो उनका आयतन बढ़ते-बढ़ते इतना अधिक हो जाता है कि ये बूँदें पृथ्वी पर गिरने लगती हैं.
  • इस प्रक्रिया में एक समय ऐसी दशा हो जाती है कि छोटे-छोटे हिम के बर्फीले रवे ऊपर जा रहे होते हैं और बड़े-बड़े रवे नीचे की ओर आते रहते हैं.
  • इस आवाजाही में बड़े और छोटे रवे टकराने लगते हैं जिससे इलेक्ट्रान छूटने लगते हैं. इन इलेक्ट्रानों के कारण रवों का टकराव बढ़ जाता है और पहले से अधिक इलेक्ट्रान उत्पन्न होने लगते हैं.
  • अंततः बादल की शीर्ष परत में धनात्मक आवेश आ जाता है जबकि बीच वाली परत में ऋणात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है.
  • बादल की दो परतों के बीच विद्युतीय क्षमता में जो अंतर होता है वह 1 बिलियन से लेकर 10 बिलियन वाल्ट तक की शक्ति रखता है. बहुत थोड़े समय में ही एक लाख से लेकर दस लाख एम्पीयर की विद्युत धारा इन दोनों परतों के बीच प्रवहमान होने लगती हैं.
  • इस विद्युत धारा के फलस्वरूप भयंकर ताप उत्पन्न होता है जिसके कारण बादल की दोनों परतों के बीच का वायु-स्तम्भ गरम हो जाता है. इस गर्मी से यह वायु-स्तम्भ लाल रंग हो जाता है. जब यह वायु-स्तम्भ फैलता है तो बादल के अंदर भयंकर गड़गड़ाहट होती है जिसे बिजली कड़कना (thunder) कहते हैं.

बिजली बादल से पृथ्वी तक कैसे पहुँचती है?

पृथ्वी विद्युत की एक अच्छी संचालक होती है. इसका आवेश न्यूट्रल होता है. परन्तु बादल की बिचली परत की तुलना में पृथ्वी का आवेश धनात्मक हो जाता है. फलतः इस बिजली का लगभग 15-20% अंश धरती की ओर दौड़ जाता है. इसी को वज्रपात (lightning) कहते हैं.

बादल की बिजली अधिकतर पेड़, मीनार या भवन जैसी ऊँची वस्तुओं पर गिरती है. जब यह बिजली धरती से 80 से 100 मीटर ऊपर होती है तो उस समय यह मुड़कर ऊँची वस्तुओं पर जा गिरती है. ऐसा इसलिए होता है कि वायु बिजली की कुचालक होती है और इससे होकर बहने वाले इलेक्ट्रान बेहतर सुचालक की खोज करने लगते हैं और धनात्मक आवेश वाली पृथ्वी तक पहुँचने के लिए छोटा सा छोटा मार्ग अपनाने लगते हैं.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : CBI to get Centralised Technology Vertical

संदर्भ

भारत सरकार CBI के अन्दर एक CTV खोलने की योजना बना रही है.

CTV क्या है?

  • इसका पूरा नाम है – Centralised Technology Vertical.
  • यह पूरे देश में अन्वेषण करने वाली एजेंसियों को रियल-टाइम अर्थात् क्षण-प्रतिक्षण की सूचना प्रदान करता है.

CTV की आवश्यकता

देश में साइबर अपराध में लगातार वृद्धि हो रही है. साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर जाली विडियो चला रहे हैं जिससे देश को खतरा हो रहा है. इसलिए CBI को CTV की सुविधा देना आवश्यक हो चला है.

CBI क्या है?

  • CBI का पूरा नाम है – Central Bureau of Investigation.
  • यह अपराध अन्वेषण का कार्य करता है.
  • यह कार्मिक लोक शिकायतें एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders

Topic : ‘Eat Right Movement’ Campaign

संदर्भ

भारत सरकार ने सही खाओ भारत आन्दोलन के विषय में एक मास मीडिया अभियान का सूत्रपात किया है.

सही खाओ आन्दोलन क्या है?

  • यह आन्दोलन भारत सरकार के अन्य जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों से सम्बद्ध अभियान है, जैसे – पोषण अभियान, अनीमिया मुक्त भारत, आयुष्मान भारत योजना और स्वच्छ भारत मिशन.
  • इसका आरम्भ FSSAI ने किया है.
  • इस आन्दोलन का उद्देश्य अगले तीन वर्षों के भीतर नमक, चीनी और तेल की खपत को 30% घटा देना है.
  • इस कार्यक्रम में लोगों को बताया जाता है कि वे सही खान-पान का चुनाव करें और स्वास्थ्य में सुधार लाएँ.

सही खाओ आन्दोलन के मुख्य अवयव

  • इस आन्दोलन के लिए FSSAI ने तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किये हैं – सुरक्षित खाओ, स्वास्थ्यकर खाओ और ऐसा भोजन खाओ जो सतत उपलब्ध हो.
  • उपयोग में लाये हुए खाद्य तेल को फिर से उपयोग में लाने से होने वाली हानियों से लोगों को बचाने के लिए ने FSSAI ने खाद्य तेल में कुल ध्रुवीय यौगिकों (Total Polar Compounds – TPC) की अधिकतम सीमा 25% कर दी है.

TPC क्या है?

  • कई देशों में तेल की गुणवत्ता को मापने के लिए Total Polar Compounds – TPC का उपयोग किया जाता है. ज्ञातव्य है कि बार-बार तेल को गरम किये जाने से TPC का स्तर बढ़ जाता है. कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि भोजन के बिना तेल को गर्म करने के दौरान TPC का स्तर कम होता है जबकि यदि भोजन के साथ तेल को गर्म या फ्राई किया जाए तो TPC का स्तर बढ़ जाता है.
  • विदित हो कि यदि दैनिक प्रयोग में लाये जाने वाले तेल में TPC का स्तर ऊँचा हो तो इससे उच्च रक्तचाप, धमनी से सम्बंधित रोग, अल्जाइमर रोग और जिगर की बीमारी जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं.

FSSAI क्या है ?

  1. FSSAI का full form है – Food Safety and Standards Authority of India.
  2. इसकी स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है.
  3. 2006 के पहले खाद्य सुरक्षा से सम्बंधित कई अधिनियम एवं आदेश थे जो विभिन्न मंत्रालयों द्वारा निर्गत किये गये थे. इन सभी को समेकित कर 2006 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 पारित किया गया था.
  4. इस अधिनियम के तहत स्वस्थ भोजन के लिए निर्माण, भंडारण, वितरण, विक्रय-निर्यात आदि सभी स्तरों पर खाद्य-पदार्थ के लिए विज्ञान पर आधारित मानक निर्धारित किये गये हैं.
  5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय है.
  6. इसका अध्यक्ष भारत सरकार के सचिव-स्तर का होता है.
  7. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Advance Pricing Agreements (APAs)

संदर्भ

वर्तमान वित्तीय वर्ष के पहले पाँच महीनों में (अप्रैल से अगस्त, 2019) केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (Central Board of Direct Taxes – CBDT) ने 26 अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (Advance Pricing Agreements – APAs) कर लिए हैं.

इनमें से यूनाइटेड किंगडम के साथ BAPA समझौता हुआ है और अन्य 25 समझौते एकपक्षीय अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते हैं.

अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता क्या होता है?

अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौता (APA) वह समझौता है जो करदाता के भविष्य में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन का मूल्य निर्धारित करने के लिए करदाता एवं उस कर अधिकारी के साथ होता है जो हस्तांतरण-मूल्य निर्धारण पद्धति (Transfer Pricing Methodology) तय करता है.

APA करने से करदाता को यह निश्चित रूप से पता चल जाता है कि उसे अपने अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन के लिए कर देना होगा.

APA के प्रकार

APA तीन प्रकार के होते हैं –

  1. एकपक्षीय
  2. द्विपक्षीय
  3. बहुपक्षीय

एकपक्षीय APA में मात्र करदाता और उस देश का कर अधिकारी शामिल होता है जहाँ करदाता रहता है.

द्विपक्षीय APA (Bilateral APA – BAPA) में ये पक्ष शामिल होते हैं – करदाता, विदेश में करदाता से जुड़ा हुआ प्रतिष्ठान, करदाता के अपने देश का कर अधिकारी और विदेश का कर अधिकारी.

बहुपक्षीय APA (Multilateral APA – MAPA) में ये पक्ष शामिल होते हैं – करदाता, विभिन्न बाहरी देशों में स्थित करदाता से सम्बद्ध दो या दो से अधिक प्रतिष्ठान, करदाता के अपने देश का कर अधिकारी तथा सम्बद्ध प्रतिष्ठानों के कर अधिकारी.

महत्त्व

सरकार का संकल्प है कि वह ऐसी कराधान व्यवस्था सुनिश्चित करे जिसमें आपसी संघर्ष की भावना नहीं हो. APA इस भावना को सुदृढ़ करने वाली योजना है. भारत के APA कार्यक्रम की सराहना देश-विदेश में हो रही है क्योंकि इससे हस्तांतरण मूल के निर्धारण से सम्बंधित जटिल समस्याओं का न्यायोचित और पारदर्शी पद्धति से समाधान हो रहा है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : External benchmark rates

संदर्भ

ऋण लेने वाले व्यक्तियों को निम्न दर पर ब्याज देने पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 1 से बैंकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे घर, गाड़ी और MSME ऋणों की अपनी नई प्लवमान (floating) दर को किसी एक बाह्य बेंचमार्क से जोड़ दें.

बैंकों को यह छूट है कि वे इन चार बाह्य बेंचमार्कों में से एक का चुनाव कर सकते हैं –

  1. रेपो दर (रेपो रेट के बारे में विस्तार से पढ़ें > Repo Rate in Hindi)
  2. तीन महीनों का कोषागार विपत्र
  3. छह महीनों का कोषागार विपत्र
  4. फाइनेंसियल बेंचमार्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रकाशित कोई अन्य बेंचमार्क ब्याज दर

वर्तमान परिदृश्य

वर्तमान में ऋणों की ब्याज दरें बैंक के कोष-आधारित ब्याज दर की सीमान्त लागत से जुड़ी होती हैं, जिसे सीमान्त उधारी लागत दर (Marginal Cost of Lending Rate – MCLR) कहते हैं.

ऋणों की आंतरिक बेंचमार्किंग किसे कहते हैं?

जब आप किसी बैंक से पैसा उधार लेते हैं, वह चाहे घर, कार या व्यवसाय के लिए हो, तो उसके लिए जो ब्याज लगता है वह RBI के द्वारा अनुमोदित कुछ पद्धतियों पर आधारित होता है.

वर्तमान में ब्याज दर निर्धारित करने के लिए MCLR का सहारा लेते हैं. इसके पहले जो पद्धतियाँ अपनाई जाती थीं, वे थीं – आधार दर पद्धति एवं बेंचमार्क प्राइम उधारी दर (Benchmark Prime Lending Rate – BPLR). ये सभी बेंचमार्क आंतरिक बेंचमार्क हैं.

नई पद्धति की आवश्यकता क्यों पड़ी?

फरवरी, 2019 से RBI ने कई बार अपनी पॉलिसी रेट 110 बेसिस पॉइंट (100 bps=1 percentage point) घटाई है. अगस्त महीने में तो अप्रत्याशित रूप से 35 बेसिस पॉइंट की कटौती हुई थी. किन्तु बैंकों ने इतनी उदारता नहीं दिखाई. अगस्त महीने तक उन्होंने ऋण लेने वालों के लिए ब्याज दर में मात्र 29 BPS की ही कटौती की जिसे RBI अनुचित मानता है. इसलिए उसने बैंकों के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि अक्टूबर 1 से उनको घर, गाड़ी और MSME के लिए दिए जाने वाले ऋणों की प्लवमान दरों को बाह्य बेंचमार्क से जोड़ना होगा जिससे ऋण लेने वालों को कम दर पर ब्याज देना पड़े.


Prelims Vishesh

Indo–Thai CORPAT :-

  • भारत और थाईलैंड की समन्वित गश्ती (Indo-Thai CORPAT) का 28वाँ आयोजन हो रहा है जिसमें भारतीय नौसेना (IN) और रॉयल थाई नौसेना (RTN) प्रतिभागिता कर रही हैं.
  • CORPAT का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों तथा सामुद्रिक पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ अवैध रूप से मछली मारने, अवैध तस्करी, समुद्री डकैती की रोकथाम करना भी है.
  • इसके अतिरिक्त यह अवैध आव्रजन को रोकने तथा समुद्र में बचाव का भी काम करता है.

Germany to phase out glyphosate by 2023 :

  • जर्मनी ने यह निर्णय लिया है कि वह 2023 तक खेती में Glyphosate (शाकनाशी, herbicide) के प्रयोग को क्रमशः बंद कर देगा.
  • यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि उन कीड़ों की रक्षा हो सके जो पारिस्थितिकी तन्त्र में प्रधान भूमिका निभाते हैं और खाद्य फसलों के परागण में जिनकी बड़ी भूमिका होती है.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि Glyphosate से कैंसर होने की संभावना रहती है.

Travel & Tourism Competitiveness Report 2019:

  • विश्व आर्थिक मंच के द्वारा प्रकाशित यात्रा एवं प्रयत्न प्रतिस्पर्धा प्रतिवेदन, 2019 में जिन देशों को सर्वाधिक यात्रा-योग्य माना गया है, वे हैं – स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका.
  • जहाँ तक भारत का प्रश्न है, सूची में इसका स्थान वर्ष 2017 से छह स्थान बढ़कर 34वाँ हो गया है.

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