Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 October 2019

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 11 October 2019


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures.

Topic : National e-Assessment Scheme (NeAC)

संदर्भ

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत पिछले दिनों एक राष्ट्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र (National e-Assessment Centre – NeAC) का उद्घाटन हुआ.

राष्ट्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र क्या है?

  • यह एक स्वतंत्र कार्यालय होगा जो आयकरदाताओं के निर्वैयक्तिक ई-मूल्यांकन (faceless e-assessment) हेतु पिछले दिनों अधिसूचित ई-मूल्यांकन योजना के काम को देखेगा.
  • यह केंद्र दिल्ली में होगा और इसका अध्यक्ष प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (Principal Chief Commissioner of Income Tax – CCIT) होगा.
  • इसके अंतर्गत 8 क्षेत्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र (Regional e-Assessment Centres – ReAC) इन शहरों में होंगे – दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद.
  • इन क्षेत्रीय केन्द्रों के अंतर्गत मूल्यांकन, समीक्षा, तकनीक और सत्यापन से सम्बंधित इकाइयाँ होंगी.
  • प्रत्येक ReAC की अध्यक्षता मुख्य आयकर आयुक्त करेगा.
  • इन सभी क्षेत्रीय केन्द्रों को क्या काम करना होगा इसका निर्धारण NeAC स्वचालित आवंटन प्रणाली के माध्यम से करेगा.

माहात्म्य

NeAC और ReAC से ऐसे अधिकारी जुड़े हुए हैं जो पूरे भारतवर्ष में फैले हुए हैं. अतः आशा की जाती है कि इन सब के सहयोग से बेहतर मूल्यांकन तक पहुँचने में सहायता मिलेगी.


GS Paper 2 Source: Down to Earth

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : WHO issues first World report on vision

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले दिनों नेत्र दृष्टि के विषय में अपना पहला वैश्विक प्रतिवेदन प्रकाशित किया है.

प्रतिवेदन के मुख्य निष्कर्ष

  1. संसार में कम से कम 2.2 बिलियन दृष्टिबाधा से ग्रस्त हैं जिनमें 1 बिलियन लोगों को इस विकलांगता से बचाया जा सकता है.
  2. नेत्रबाधित व्यक्तियों में अधिकतर व्यक्ति वे हैं जो गाँवों में बसते हैं और जिनकी आय कम है.
  3. दृष्टिबाधा के शिकार अन्य व्यक्तियों में स्त्रियाँ, वृद्धजन, दिव्यांगजन, नस्ली अल्पसंख्यक वर्ग और स्वदेशी मूल के लोग होते हैं.
  4. उच्च आय वाले क्षेत्रों की तुलना में निम्न और मध्यम आय वाले क्षेत्रों में दृष्टिबाधा चार गुनी अधिक होती है.
  5. सभी उच्च आय वाले देशों की तुलना में जहाँ अन्धता की दर आठ गुनी तक है, वे क्षेत्र हैं – पश्चिमी और पूर्वी सहारा के नीचे स्थित देश तथा दक्षिणी-एशियाई के ऐसे देश जहाँ आय का स्तर निम्न और मध्यम है.
  6. मोतियाबिंद और ट्रेकोमेटस ट्राइकियेसिस के मामले स्त्रियों में अधिक मिलते हैं, विशेषकर उन स्त्रियों में जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहती हैं.
  7. कम दृष्टि और मोतियाबिंद के कारण दृष्टिबाधा अथवा अन्धता को झेल रहे 1 बिलियन लोगों को सहायता पहुँचाने के लिए 14.3 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Conservation and pollution related issues.

Topic : Green Crackers

संदर्भ

भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR) कुछ नए हरित पटाखे बनाए हैं.

हरित पटाखे क्या होते हैं?

  • हरित पटाखे पारम्परिक पटाखों की तुलना में कम खतरनाक हैं.
  • इन पटाखों से उत्सर्जन कम होता है और आवाज़ का डेसिमल-स्तर भी कम होता है.
  • ये हरित पटाखे इसलिए कहलाते हैं कि इनसे जल के कण उत्पन्न होते हैं जो उत्सर्जन को तो घटा देते ही हैं, साथ ही धूल को भी सोख लेते हैं.
  • हरित पटाखों के प्रयोग से पार्टिकुलेट पदार्थों तथा नाइट्रस ऑक्साइड एवं सल्फर ऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों का उत्सर्जन 30-35% कम होता है.
  • ये पटाखे बनाने में भी 25-30% सस्ते पड़ते हैं और इनको तैयार करने में निर्माताओं को अपने कारखाने में कोई अधिक बदलाव लाने की आवश्यकता नहीं होती है.

पटाखों के रंग कहाँ से आते हैं?

  1. लाल : स्ट्रोन्टियम लवण (स्ट्रोनटियम के नाइट्रेट, कार्बोनेट और सल्फेट)
  2. नारंगी : कैल्शियम लवण (कैल्शियम के कार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट)
  3. पीला : सोडियम लवण (सोडियम के नाइट्रेट और ओक्ज़ेलेट)
  4. हरा : बैरियम लवण (बैरियम के नाइट्रेट, कार्बोनेट, क्लोराइड और क्लोरेट)
  5. नीला : ताम्र लवण (ताम्बे के कार्बोनेट और ऑक्साइड)
  6. बैंगनी : ताम्बे और स्ट्रोन्टियम के यौगिकों का मिश्रण
  7. श्वेत : मैग्नीशियम, एल्यूमिनियम और टाइटेनियम जैसी धातुओं के जलने से.

हरित दिवाली – स्वस्थ दिवाली अभियान

  • यह अभियान 2017-18 में आरम्भ किया गया था. इसका लक्ष्य था बच्चों को पटाखों से होने वाली हानियों के बारे में बताना और उन्हें पर्यावरण-अनुकूल विधि से दिवाली मानने के लिए प्रेरित करना था. बच्चों को कहा गया था कि वे पटाखे नहीं खरीदे, अपितु उनके स्थान पर उपहार, खाने की वस्तुएँ अथवा मिठाइयाँ खरीदें जो उनके मुहल्ले में रहने वाले गरीब और वंचित बच्चों को दिए जाएँ.
  • यह अभियान अत्यंत ही सफल रहा था क्योंकि 2016 की तुलना में 2017 में दिवाली के बाद वायु की गुणवत्ता में ह्रास नहीं हुआ था.

वायु प्रदूषण की समस्या

  • देश में, विशेषकर उत्तर भारत में, जाड़ों के समय वायु प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य-समस्या होता है. यह प्रदूषण धूली, कुछ राज्यों में पराली जलाने, कचरा जलाने, निर्माण कार्य तथा जलवायविक दशाओं के कारण होता है.
  • वायु प्रदूषण का बच्चों, बूढ़ों और स्वास-समस्या से ग्रसित लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इसी समय दिवाली का त्यौहार भी आता है.
  • दिवाली में पटाखे जलाने की परम्परा है. इन पटाखों में ज्वलनशील रसायन होते हैं, जैसे – पोटेशियम क्लोरेट, अलमुनियम चूर्ण, मैग्नीशियम, बेरियम लवण, तांबा, सोडियम, लिथियम, स्ट्रानटियम इत्यादि.
  • ये पदार्थ जलने पर धुआँ छोड़ते हैं और आवाज पैदा करते हैं. इस धुएँ और आवाज का न केवल बच्चों और बूढ़ों के ही अपितु पशुओं और पक्षियों के भी स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • इसके अतिरिक्त पटाखों के जलने से बहुत सारा मलबा भी बनता है.

GS Paper 3 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : All you wanted to know about Nobel Prizes

संदर्भ

शांति पुरस्कार का नोबेल पुरस्कार

  • अबी अहमद अली
  • जन्म : 1976, जिमा जोन, 
  • दक्षिण इथोपिया.
  • डॉक्ट्रेट (शांति एवं सुरक्षा) आदिस अबाबा विश्वविद्यालय, ट्रांसफॉरमेशनल लीडरशिप में मास्टर्स, ग्रीनविच विवि, लंदन.

किस लिए दिया जाएगा?

साल 2019 का नोबेल शांति पुरस्कार इथोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को दिया जायेगा. उन्हें यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शत्रु देश इरीट्रिया के साथ शांति स्थापित करने के लिए दिया जा रहा है. उन्होंने इरीट्रिया के साथ दो दशक से जारी संघर्ष को खत्म करते हुए शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभायी है.

अबी ने पिछले वर्ष इरीट्रिया और जिबूती के बीच राजनीतिक शत्रुता को खत्म कर कूटनीतिक रिश्तों को सामान्य बनाने में मदद की थी. इसके अलावा केन्या और सोमालिया में समुद्री इलाके में चल रहे संघर्ष को खत्म करने में मध्यस्थता की थी. 

अबी नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करनेवाले 100वें व्यक्ति हैं. अबी अहमद (43 वर्ष) को इथोपिया का ‘नेल्सन मंडेला’ भी कहा जाता है. नोबेल समिति के अनुसार, अबी के इन प्रयासों से इथोपिया और इरीट्रिया की पूरी आबादी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा. वर्ष 1995 में उन्होंने रवांडा में यूएन के शांति दूत के रूप में काम किया. साल 2010 में उनका राजनीतिक करियर शुरू हुआ. 

ओरोमो पीपुल्स डेमोक्रेटिक ऑर्गनाइजेशन के सदस्य और बाद में संसद सदस्य बने. इस बीच मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए उन्होंने विभिन्न स्तरों पर प्रयास किया और इसके लिए उन्होंने ‘शांति के लिए एक धार्मिक मंच’ नामक फोरम की स्थापना भी की थी.

साहित्य का नोबेल पुरस्कार

  • पीटर हैंडका
  • जन्म : 1942, ग्रिफेन ऑस्ट्रिया

किस लिए दिया गया?

यह पुरस्कार 76 वर्षीय ऑस्ट्रियाई उपन्यासकार और नाटककार पीटर हैंडका को साहित्य के क्षेत्र में प्र‌भावशाली कार्य के लिए दिया गया है. उन्होंने सरल भाषा में मानवीय अनुभवों पर आधारित लेखन किया है. हालांकि, एक वक्त था जब हैंडका ने साहित्य के नोबेल पुरस्कार को बंद किये जाने की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि इसके विजेताओं का गलत तरीके से महिमामंडन किया जाता है. 

साल 1960 में साहित्यिक गतिविधियों पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी. उनकी एक महत्वपूर्ण कृति ‘सॉरो बियॉन्ड ड्रीम्स’ है, जिसमें उन्होंने 1971 में अपनी मां द्वारा आत्महत्या करने का जिक्र किया है. 

हैंडका ने फिल्म डायरेक्टर विम वेंडर्स के साथ भी काम किया है. इस बार 2018 के साहित्य पुरस्कार की भी घोषणा की गयी है. इसके लिए ओल्गा तोकार्चुक को चुना गया है. तोकार्चुक को पिछले साल मैन बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था. पोलिश लेखक तोकार्चुक की कथात्मक परिकल्पना बेजोड़ है.

साहित्य का 2019 का नोबेल पुरस्कार ऑस्ट्रियाई उपन्यासकार और नाटककार पीटर हैंडका को दिया गया है.

वर्ष 1901 में स्थापित इस पुरस्कार से अस्सी के दशक के मध्य तक किसी अफ्रीकी, अरबी और चीनी साहित्यकार को सम्मानित नहीं किया गया था. उससे पहले दो एशियाई रवींद्रनाथ टैगोर (1913) और यासुनारी कावाबाता (1968) और एक कैरेबियाई सेंट-जॉन पर्स (1960) ही इस श्रेणी में पुरस्कृत हुए थे. 

लातीनी अमेरिका को अस्सी के दशक के मध्य से पहले चार पुरस्कार मिले थे. आज तक केन्या के न्यूगी वा थ्योंगो, सीरियाई मूल के अदूनिस, सोमालिया के नुरुद्दीन फराह जैसे महान साहित्यकारों की अवहेलना की गयी है. इस सूची में अनेक गैर-पश्चिमी लेखकों के नाम गिनाये जा सकते हैं.  

भौतिकी का नोबेल पुरस्कार  

एफजेए पीबल्स

  • जन्म : 1935, विनिपेग, कनाडा
  • पीएचडी (1962, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, अमेरिका), अमेरिका के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में अल्बर्ट आइंस्टीन प्रोफेसर ऑफ साइंस.

माइकल मेयर

  • जन्म : 1942, लुसाने, स्विटजरलैंड
  • पीएचडी (1971, यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा, स्विटजरलैंड), यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा, स्विटजरलैंड में प्रोफेसर.

डिडिएर क्वेलॉज

  • जन्म : 1966, स्विटजरलैंड
  • पीएचडी (1995, यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा, स्विटजरलैंड), यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा, स्विटजरलैंड और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज, यूके में प्रोफेसर

किस लिए दिया गया?

ब्रह्मांड संरचना पर नया सिद्धांत प्रस्तुत करने के लिए.

इस बार भौतिकी का नोबेल ब्रह्मांड की संरचना और इतिहास पर नये सिद्धांत रखने के लिए जेम्स पीब्ल्स और सौरमंडल से बाहर एक और ग्रह खोजने के लिए मेयर व क्वालेज को संयुक्त रूप से दिया जायेगा. 

जेम्स पीबल्स द्वारा 1960 के दशक में बिग बैंग, डार्क मैटर और डार्क एनर्जी पर जो कार्य किया गया, उसे आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान का आधार माना जाता है. बिग बैंग मॉडल, ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय (लगभग 14 अरब साल पहले) से ही उसके बारे में बताता है, जब यह बेहद गर्म और घना था. तब से ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है. यह मॉडल बताता है कि बिग बैंग के चार लाख साल बाद ब्रह्मांड पारदर्शी हो गया. यहां तक की आज भी वह प्राचीन विकिरण हमारे चारों ओर मौजूद है.

इन विकिरणों में ब्रह्मांड के रहस्य छिपे हैं. इन सिद्धांतों और गणनाओं का प्रयोग कर जेम्स पीबल्स ने ब्रह्मांड के शैशव काल की इन निशानियों की व्याख्या की और इससे जुड़ी नयी भौतिक प्रक्रियाओं की खोज की.

इस खोज से हमें पता चला कि ब्रह्मांड के महज पांच प्रतिशत पदार्थ के बारे में ही हम जान पाये हैं. ये वे पदार्थ हैं जिनसे तारे, ग्रह, पेड़-पौधे और हमारा निर्माण हुआ है, बाकी 95 प्रतिशत हिस्सा अज्ञात डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है. आधुनिक भौतिकी के लिए ब्रह्मांड का यह अज्ञात हिस्सा एक रहस्य और चुनौती बना हुआ है.

वर्ष 1995 में मिशेल व डिडिएर ने 51 पेगासी बी ग्रह की खोज की थी, गैस से बना यह ग्रह सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति जितना विशाल है. इस खोज ने खगाेल विज्ञान में एक क्रांति की शुरुआत की. तब से अब तक सौरमंडल से बाहर चार हजार से अधिक ग्रह खोजे जा चुके हैं.

रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार, 2019

जॉन बी गुडएनफ

  • जन्म : 1922, जेना जर्मनी.
  • पीएचडी (1952 यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, यूएस), वर्जीनिया एच कॉकरेल चेयर इन इंजीनियरिंग (यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस, यूएस).

एम स्टेनले व्हिटिंघम

  • जन्म : 1941, ब्रिटेन.
  • पीएचडी (1968 ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, ब्रिटेन), प्रोफेसर, बिंघम्टन यूनिवर्सिटी, 
  • स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर न्यूयार्क, यूएस.

अकिरो योशिनो

  • जन्म : 1948, सूइता, जापान.
  • पीएचडी (2005 ओसाका यूनिवर्सिटी, जापान), फेलो, असाही कसेई कॉरपोरेशन टोक्यो, जापान और प्रोफेसर, मीजो यूनिवर्सिटी, नगोया, जापान.

किस लिए दिया गया?

लिथियम ऑयन बैट्री के विकास के लिए.

वर्ष 2019 का रसायन का नोबेल पुरस्कार लिथियम ऑयन बैट्री के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है. हल्के भार वाली पावरफुल बैट्री आज मोबाइल फोन से लेकर लैपटॉप तक तमाम तरह के पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में प्रयोग की जा रही है. लिथियम ऑयन बैट्री के बढ़ते इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस और व्हीकल आदि की क्षमता में आश्चर्यजनक ढंग से बढ़ोतरी हुई है. लिथियम ऑयन बैट्री में पर्याप्त एनर्जी सोलर और विंड पावर से स्टोर की जा सकती है. 

इसके बढ़ते प्रयोग से जीवाश्म ईंधन मुक्त समाज बनाने में मदद मिलेगी. जीवाश्म ईंधनों को जलाने से पैदा होनेवाला प्रदूषण दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता है. हर साल लाखों मौतें पर्यावरण प्रदूषण से हो रही हैं. स्वच्छ ऊर्जा का प्रयोग आज के समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता है. 

साल 1970 में तेल संकट के दौरान लिथियम ऑयन बैट्री की परिकल्पना की गयी. इसी दौरान स्टेनली व्हिटिंघम ने जीवश्म ईंधन मुक्त तकनीक के विकास की दिशा में काम करना शुरू किया. उन्होंने सुपरकंडक्टर पर विस्तृत शोध किया और उच्च- ऊर्जा वाले पदार्थों की खोज की. इसका प्रयोग कर उन्होंने लिथियम बैट्री में इनोवेटिव कैथोड बनाया. मॉलेकुलर स्तर पर उन्होंने टाइटेनियम डाइसल्फेट का इस्तेमाल किया. हालांकि, धात्विक लिथियम बहुत प्रतिक्रिशील और विस्फोटक प्रकृति का होता है.

ऐसे में बैट्री की क्षमता सीमित थी और इस्तेमाल में कई तरह की सावधानियां बरतने की जरूरत थी. जॉन गुडएनफ ने निष्कर्ष निकाला कि यदि मेटल सल्फाइड की बजाय मेटल ऑक्साइड का इस्तेमाल किया जाय, तो कैथोड की क्षमता में वृद्धि की जा सकती है. 

साल 1980 में उन्होंने इसके लिए कोबॉल्ट ऑक्साइड का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया, जिससे पावरफुल बैट्री बनाने में कामयाबी मिली. इसी आधार पर 1985 अकिरा योशिनो ने पहली कॉमर्शियल लिथियम ऑयन बैट्री बनाने में सफलता प्राप्त की.

एनोड में रिएक्टिव लिथियम इस्तेमाल करने की बजाय योशिनो ने पेट्रोलियम कोक (कॉर्बन मैटीरियल) का प्रयोग किया. साल 1991 में बाजार में आने के बाद लिथियम ऑयन बैट्री ने हमारे जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है. इससे वायरलेस, जीवाश्म ईंधन मुक्त व्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है.

औषधि का नोबेल पुरस्कार

विलियम जे केलिन जूनियर

  • जन्म : 1957, न्यूयॉर्क सिटी, न्यूयॉर्क
  • एमडी (ड्यूक यूनिवर्सिटी, डरहम), स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग (इंटरनल मेडिसिन व आॅन्कोलॉजी में) (जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, बाल्टीमोर व डाना-पाउर्बर कैंसर इंस्टीट्यूट, बॉस्टन)
  • संबद्ध : हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट में पर्यवेक्षक

ग्रेग एल सेमेंजा

  • जन्म :  1956, न्यूयॉर्क, अमेरिका
  • शिक्षा : एमडी/पीएचडी (यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया), स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग (पीडियाट्रिक्स में) (ड्यूक यूनिवर्सिटी, डरहम)
  • संबद्ध : जॉन हॉपकिंस इंस्टीट्यूट फॉर सेल इंजीनियरिंग में वैस्कुलर रिसर्च प्रोग्राम के डायरेक्टर

सर पीटर जे रैटक्लिफ

  • जन्म :  1954, लंकाशायर, यूके
  • शिक्षा : बीएस, एमडी (गोनविले एंड कैस कॉलेज, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी), स्पेशलिस्ट ट्रेनिंग (नेफ्रोलॉजी में) (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी)
  • संबद्ध : फ्रैंसिस क्रिक इंस्टीट्यूट, लंदन में डायरेक्टर ऑफ क्लिनिकल रिसर्च, लुडविग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के मेंबर

किस लिए दिया गया?

ऑक्सीजन के साथ कोशिकाओं का सामंजस्य.

मेडिसन के लिए इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों विलियम जे केलिन जूनियर, सर पीटर जे रैटक्लिफ और ग्रेग एल सेमेंजा को संयुक्त रूप से देने की घोषणा की गयी है. इन वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि कोशिकाएं किस प्रकार ऑक्सीजन की उपलब्धता में आये बदलाव को समझती हैं और उससे सामंजस्य बिठाती हैं. 

अपनी खोज के दौरान वैज्ञानिकों ने उन आण्विक मशीनरी की पहचान की, जो ऑक्सीजन के विभिन्न स्तरों के जवाब में जीन की गतिविधि को नियंत्रित करती हैं. 

इस खोज से हमारे जीवन के सबसे जरूरी अनुकूलन प्रक्रिया की कार्यप्रणाली के बारे में पता चला है. इससे हम यह जान पाये हैं ऑक्सीजन का स्तर किस तरह से हमारे सेलुलर मेटाबॉलिज्म और शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करता है. वैज्ञानिकों की इस खोज से एनीमिया, कैंसर और अन्य बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में नयी रणनीति बनाने का रास्ता साफ हुआ है.

नोबेल पुरस्कार से सम्बंधित  महत्वपूर्ण तथ्य

  • वर्ष 1901 से 2018 के बीच अब तक 908 शख्सियतों और 27 संगठनों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.
  • अब तक कुल 590 पुरस्कार दिये जा चुके हैं.
  • वर्ष 1901 से 2018 तक भौतिकी के क्षेत्र में 210 लोगों को और 112 बार यह पुरस्कार दिया जा चुका है. जॉन बर्डीन अकेले ऐसे भौतिकीविद हैं, जिन्हें भौतिकी के क्षेत्र में दो बार 1956 और 1972 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.
  • रसायन विज्ञान के क्षेत्र में 1901 से 2018 के बीच अब तक कुल 110 बार 181 लोगों को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. फ्रेडिरक सैंगर अकेले ऐसे रसायनशास्त्री हैं, जिन्हें 1958 और 1980 में दो बार रसायन विज्ञान के लिए पुरस्कार मिला है.
  • मेडिसिन के क्षेत्र में 2018 तक 109 बार यह पुरस्कार दिया जा चुका है. इस पुरस्कार से अब तक 216 लोग सम्मानित हो चुके हैं.
  • साहित्य के क्षेत्र में 2018 तक 114 साहित्यकारों को 110 बार यह पुरस्कार दिया जा चुका है.
  • शान्ति के क्षेत्र में 2018 तक 106 हस्तियां और 27 संगठन इस पुरस्कार को हासिल कर चुके हैं. इस क्षेत्र में अब तक 99 बार यह पुरस्कार प्रदान किया जा चुका है.
  • अर्थशास्त्र के क्षेत्र में 1969 से 2018 तक 50 बार 81 लोगों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.
  • वर्ष 1901 से 2018 तक 51 महिलाएं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को हासिल कर चुकी हैं.
  • इस पुरस्कार के लिए कोई भी व्यक्ति खुद का नामांकन नहीं कर सकता है.

नोबेल पुरस्कार के बारे में निर्णय कौन-सी संस्थाएँ करती हैं?

  1. भौतिकी और रसायनशास्त्र : The Royal Swedish Academy of Sciences.
  2. शरीर विज्ञान अथवा औषधि : The Karolinska Institutet
  3. साहित्य : The Swedish Academy
  4. शान्ति : नॉर्वे की संसद (स्ट्रोटिंग) के द्वारा निर्वाचित पंच-सदस्यीय समिति)
  5. अर्थशास्त्र : The Royal Swedish Academy of Sciences

अब तक किन भारतवंशियों अथवा भारत में नागरिकता प्राप्त व्यक्तियों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है?

  1. रबीन्द्रनाथ टैगोर – साहित्य, 1913
  2. सी.वी. रामन – भौतिकी, 1930
  3. हरबिंद खुराना – औषधि, 1968
  4. मदर टरेसा – शान्ति, 1979
  5. सुब्रमनियन चन्द्रशेखर – भौतिकी, 1983
  6. दलाई लामा – शान्ति, 1989
  7. अमर्त्य सेन – अर्थशास्त्र, 1998
  8. वेंकटरमण रामकृष्णन – रसायन, 2009
  9. कैलाश सत्यार्थी – शान्ति, 2014

Prelims Vishesh

World Congress of Poets 2019 :

  • विश्व कवि कांग्रेस का 39वाँ आयोजन इस बार ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित (Kalinga Institute of Industrial Technology – KIIT) और (Kalinga Institute of Social Sciences – KISS) संस्थानों में हो रहा है.
  • 1969 में स्थापित इस कांग्रेस का आयोजन भारत में पहले दो ही बार हुआ है और वह भी मात्र चेन्नई में (1986 और 2007).
  • इस बार के आयोजन की थीम है – “कविता के माध्यम से करुणा”/ Compassion through Poetry.

eDantseva:-

  • भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने AIIMS तथा अन्य हितधारकों के सहयोग से दन्तस्वास्थ्य से सम्बंधित सूचना एवं ज्ञान के प्रसार से विषयक देश के पहले राष्ट्रीय डिजिटल मंच का आरम्भ किया है जिसका नाम ई-दन्तसेवा दिया गया है.
  • इस पोर्टल में दंत चिकित्सा से सम्बंधित ये सारी जानकारियाँ होंगी – राष्ट्रीय दंत स्वास्थ्य कार्यक्रम, दंत चिकित्सा से सम्बंधित अस्पतालों और कॉलेजों की सूची, दंत चिकित्सा से सम्बंधित IEC अर्थात् सूचना-शिक्षा-संचार सामग्रियाँ और एक “सिम्पटम चेकर”.
  • इस पोर्टल में दंत चिकित्सा से सम्बंधित सुविधाओं का सेटेलाइट चित्र और मार्ग-दिशानिर्देश भी दिया गया है जिससे लोग उन सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सकें.

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