Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 June 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 11 June 2019


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : BS – VI norms

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय स्वचालन प्रौद्योगिकी केंद्र (International Centre for Automotive Technology – ICAT) ने दो चक्कों वाली श्रेणी के लिए भारत स्टेज – VI (BS – VI) हेतु भारत का पहला प्रकार अनुमोदन प्रमाणपत्र (Type Approval Certificate – TAC) निर्गत कर दिया है. पिछले वर्ष ICAT ने  वॉल्वो आइशर व्यावसायिक गाड़ियों को भारी व्यावसायिक गाड़ी श्रेणी के अंतर्गत BS – VI मानक का अनुमोदन किया था. इस श्रेणी में ऐसा अनुमोदन भारत में पहली बार दिया गया था.

पृष्ठभूमि

भारत स्टेज मानक स्वचालित वाहनों से होने वाले उत्सर्जन से सम्बंधित मानक हैं जिनका अनुपालन गाड़ी निर्माताओं द्वारा अनिवार्य कर दिया गया है. ये मानक सभी दो चक्कों वाले, तीन चक्के वाल, चार चक्कों वाले तथा निर्माण उपकरण वाले वाहनों पर लागू होते हैं.

वायु प्रदूषण की बढ़ती हुई समस्या को रोकने के लिए भारत सरकार ने निर्णय किया है कि वह BS – V मानकों को पार करते हुए सीधे BS – IV मानकों से BS – VI मानकों को 1 अप्रैल, 2020 से लागू करवाएगी. उस तिथि के बाद भारत में वही गाड़ियाँ बिकेंगी और पंजीकृत होंगी जो BS – VI मानकों को पूरा करेंगे. ये मानक कठोर हैं और वैश्विक स्तर के बराबर के हैं.

ICAT क्या है?

  • ICAT का पूरा नाम है – International Centre for Automotive Technology अर्थात् अंतर्राष्ट्रीय स्वचालित प्रौद्योगिकी केंद्र.
  • यह मानेसर में स्थित है.
  • ICAT के द्वारा दिया गया प्रमाणपत्र सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्राधिकृत प्रमाणपत्र होता है.
  • यह केंद्र भारत सरकार के भारी उद्योग विभाग के अंतर्गत NATRiP कार्यान्वयन सोसाइटी उपभाग के अन्दर आता है.
  • यहाँ सभी प्रकार के वाहनों के परीक्षण, सत्यापन, रूपांकन और समेकीकरण की सुविधा दी जाती है.
  • यह केंद्र स्वचालित वाहन उद्योग को वाहन मूल्यांकन और अवयव निर्माण की आधुनिकतम तकनीकों को अपनाने में सहायता करता है जिससे कि उनकी विश्वसनीयता, टिकाऊपन और वर्तमान तथा भविष्य के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके.

BS मानक (BS Norms) क्या है?

  • BS का full-form है – Bharat Stage
  • Bharat Stage (BS) कारों के अन्दर प्रयोग होने वाले ईंजन के द्वारा मुक्त किये गये प्रदूषक तत्त्वों के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार के द्वारा बनाया गया मानक है.
  • विदित हो कि भारत प्रदूषण के विषय में यूरो (European) प्रदूषण मानकों का अनुसरण करता रहा है पर इस मामले में वह पाँच साल पीछे चल रहा है.

BS IV और BS VI में क्या अंतर है?

  • वर्तमान बीएस -4 और नए बीएस -6 मानकों में जो मुख्य अंतर है वह गंधक (sulfur) की मात्रासे सम्बंधित है.
  • BS VI प्रमाणित ईंजन 80% कम सल्फर छोड़ता है.
  • विश्लेषकों का कहना है कि BS VI प्रमाणित ईंजन लगाने से डीजल की गाड़ियों में 70% कम NOx (nitrogen oxides) निकलेगा तथा पेट्रोल की गाड़ियों में 25% कम NOx निकलने की आशा है.

ईंधन के स्तरों का उत्क्रमण आवश्यक क्यों?

वायु प्रदूषण को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि ईंधन से सम्बंधित मानकों का कठोरता से उत्क्रमण होता रहे. भारत में अभी भी मोटर वाहनों का प्रचलन विकसित देशों की तुलना में कम है. इसलिए विश्व-भर के कार निर्माताओं की नज़र भारत पर टिकी हुई है. दूसरी ओर, दिल्ली जैसे शहरों की वायु गुणवत्ता संसार भर में सबसे निकृष्ट मानी जाती है. कुछ दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी में सम-विषम योजना लागू की गई थी जिससे वहाँ वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ. इसके अतिरिक्त बड़े-बड़े डीजल कारों का पंजीकरण रोकने के लिए न्यायालय में याचिकाएं दी गई हैं. अतः सरकार इस विषय में शिथिलता से काम नहीं चला सकती.

चीन जैसे अन्य विकासशील देशों ने कुछ समय पहले अपने वाहनों को उत्क्रमित कर उन्हें यूरो 5 उत्सर्जन मानकों के बराबर पहुँचा दिया है, परन्तु भारत इस मामले में पीछे रह गया है. चीन और मलेशिया का इस विषय में यह अनुभव रहा है कि निकृष्ट वायु गुणवत्ता व्यवसाय के लिए भी ठीक नहीं है. अतः उत्सर्जन मानकों में सुधार करने से हमारे यहाँ निवेश भी बढ़ेंगे.


GS Paper  2 Source: Indian Express

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Topic : Why lakhs are protesting on the streets in Hong Kong

संदर्भ

वर्तमान में हॉन्ग कॉन्ग में एक व्यापक आन्दोलन छिड़ा हुआ है. आन्दोलनकर्ता चीन में एक कानून में परिवर्तन के विरुद्ध रैलियाँ निकाल रहे हैं. संशोधित नियमों के अनुसार जिस व्यक्ति पर हत्या एवं बलात्कार का आरोप होगा उसको मुकदमे के लिए चीन भेज दिया जाएगा. एक बार यह कानून लागू हो गया तो बाद में इसे मकाऊ पर भी चीन लागू करना चाहेगा क्योंकि हॉन्ग कॉन्ग की भाँति मकाऊ भी चीन का विशेष स्वायत्तर्ण प्रशासनिक क्षेत्र माना जाता है.

hong kong protest

चीन की प्रतिक्रिया

चीनी सरकार का कहना है कि वर्तमान कानून में कुछ ऐसे छिद्र हैं जिनके कारण अपराधी हॉन्ग कॉन्ग शहर का लाभ उठाने में समर्थ हो जाते हैं. चीन का कहना है कि ऐसे छिद्र को बंद करना आवश्यक है. उसने यह आश्वासन भी दिया है कि देश निकाला कर चीन भेजने के बारे में अंतिम निर्णय हॉन्ग कॉन्ग के न्यायालय ही लेंगे. इस प्रकार के देश निकला विशेष श्रेणी के आरोपितों पर ही लागू होगा अर्थात् राजनीतिक और धार्मिक अपराधों के आरोपित व्यक्तियों को मुकदमे के लिए चीन नहीं भेजा जाएगा.

आन्दोलनकारियों की चिंता

आन्दोलनकारियों को डर है कि कानून में इस परिवर्तन का लाभ उठाकर चीन हॉन्ग कॉन्ग में रहने वाले राजनैतिक विरोधियों को परेशान करेगा. उनका विचार है कि जिन आरोपित व्यक्तियों को ले जाया जाएगा उनको यातना दी जायेगी. उनका एक तर्क यह भी कि हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता पहले से डगमग चल रही है, अतः इस संशोधन से वह और भी कमजोर हो जायेगी.

हॉन्ग कॉन्ग और चीन में क्या रिश्ता है?

हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था. ब्रिटेन ने उसे चीन से 99 वर्ष की लीज पर लिया था. यह लीज 1997 में पूरी हो गयी तो ब्रिटेन ने इसे चीन को लौटा दिया. परन्तु “एक देश दो प्रणालियाँ” इस सिद्धांत के अंतर्गत हॉन्ग कॉन्ग को अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र का दर्जा दे दिया गया. फलतः हॉन्ग कॉन्ग के पास अपने कानून और अपने न्यायालय हैं. इसके अतिरिक्त यहाँ के निवासियों को कई प्रकार की नागरिक स्वतंत्रता मिली हुई है. हॉन्ग कॉन्ग और चीन के बीच प्रत्यर्पण से सम्बंधित कोई समझौता नहीं है.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : What is the three-language formula?

संदर्भ

हिंदी को लेकर 50 वर्ष से चला आ रहा विवाद फिर से पिछले दिनों उभर गया जब 2019 की नई शिक्षा नीति का प्रारूप प्रकाशित किया गया जिसमें उन राज्यों में हिंदी की पढ़ाई अनिवार्य करने का प्रस्ताव है जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती है.  यह प्रारूप केंद्र सरकार के पुराने त्रि-भाषा फोर्मुले के अनुसार ही है. परन्तु इसको लेकर तमिलनाडु में जम कर विरोध हो रहा है. तमिल भाषियों का कहना है कि उन पर हिंदी बलपूर्वक थोपी जा रही है. ऐसी उग्र प्रतिक्रिया को देखते हुए सरकार ने प्रारूप में से हिंदी के बारे में किए गये विवादास्पद प्रावधान को विलोपित कर दिया है.

त्रि-भाषा फोर्मुला क्या है?

त्रि-भाषा फोर्मुले के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में क्षेत्रीय भाषा के अतिरिक्त हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई का प्रावधान है. यह फार्मूला सबसे पहली बार 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में रूपांकित हुआ था. इस नीति के अनुसार क्षेत्रीय भाषाएँ प्राथमिक और माध्यमिक पढ़ाई के स्तर पर शिक्षा का माध्यम पहले से ही हैं, परन्तु राज्य सरकारों को चाहिए कि माध्यमिक पढ़ाई के स्तर पर त्रि-भाषा फोर्मुले को लागू करें. वांछनीय यह होगा कि उत्तर भारतीय राज्यों को दक्षिण की एक भाषा और अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाई जाए. इसी प्रकार जहाँ हिंदी नहीं बोली जाती है, उन राज्यों में क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भी पढ़ाई जाए.

NEP, 1968 हिंदी को सम्पर्क भाषा बनाने के बारे में क्या कहती है?

1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह कहा गया था कि हिंदी को देश की संपर्क भाषा बनाने की दिशा में कदम उठाये जाएँ और यह सुनिश्चित किया जाए कि वह भारत की मिश्रित संस्कृति के सभी अवयवों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम बन जाए जैसा कि संविधान की धारा 351 में प्रावधान किया गया है. गैर-हिंदी राज्यों में ऐसे महाविद्यालयों और उच्चतर शिक्षा के अन्य संस्थानों का निर्माण किया जाए जहाँ हिंदी की शिक्षा को प्रोत्साहन मिले.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : All States can now constitute Foreigners Tribunals

संदर्भ

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों विदेशी (प्राधिकरण) आदेश, 1964 में कतिपय संशोधन किये हैं.

ये संशोधन क्या हैं?

  • नया संशोधन सभी राज्यों और संघीय क्षेत्रों के जिला दंडाधिकारियों को यह शक्ति देता है कि वे प्राधिकरण गठित कर ये निर्णय लें कि भारत में अवैध ढंग से रहने वाला कोई व्यक्ति विदेशी है अथवा नहीं.
  • संशोधन में यह भी प्रावधान किया गया है कि चाहे तो कोई व्यक्ति अपना पक्ष लेकर प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित हो सकता है.
  • संशोधित आदेश में जिला दंडाधिकारियों को यह शक्ति दी गई है कि यदि किसी व्यक्ति ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी से उसके बाहर निकाले जाने के विरुद्ध कोई दावा प्रस्तुत नहीं भी किया हो तो भी वे प्राधिकरण के पास उसका मामला यह निर्धारित करने के लिए भेज सकते हैं कि वह विदेशी है अथवा नहीं.

वर्तमान चलन

इस विषय में वर्तमान में जो भी कार्रवाई हो रही है वह 1964 के विदेशी (प्राधिकरण) आदेश के अनुसार हो रही है. ज्ञातव्य है कि 1964 के आदेश में यह स्पष्ट रूप से वर्णित है कि केंद्र सरकार आदेश निकाल कर विदेशी प्राधिकरण को ऐसे मामले निर्णय हेतु भेज सकती है जिनमें यह प्रश्न हो कि अमुक व्यक्ति विदेशी अधिनियम, 1946 (1946 का 31) के परिभाषा के अंतर्गत विदेशी है अथवा नहीं. नए संशोधन का निहितार्थ यह है कि अब राज्य सरकारें भी अपने-अपने विदेशी प्राधिकरणों का गठन कर सकेंगी.


Prelims Vishesh

Various initiatives launched in India on the eve of World Food Safety Day:

  • विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने विभिन्न प्रकार के कदम उठाये हैं. इनमें एक कदम राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक बनाने से सम्बंधित है.
  • यह सूचकांक FSSAI द्वारा बनाया गया है जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा से सम्बंधित पाँच मानदंडों पर राज्यों के प्रदर्शन को आँकना है जिससे उन्हें बेहतर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रोत्साहन मिला.
  • इस सूचकांक में चंडीगढ़ को शीर्षस्थ स्थान मिला है.
  • खाद्य सुरक्षा के लिए उठाया गया एक अन्य कदम बैटरी से चलने वाले एक उपकरण का अनावरण है जिसका नाम रामन 1.0 रखा गया है. हाथ में रखकर चलाये जाने वाले इस उपकरण से एक मिनट से भी कम समय में घी, तेल आदि में मिलावट को पकड़ा जा सकता है.
  • सरकार की अन्य पहल का नाम है खाद्य सुरक्षा जादुई बक्सा (Food Safety Magic Box). यह बक्सा खान-पान में मिलावट की जाँच करता है. इसे कोई भी चला सकता है.
  • FSSAI ने खाद्य सुरक्षा के लिए सही खाएँ (Eat Right Awards) नामक पुरस्कार घोषित किये हैं जिनका उद्देश्य लोगों को सही भोजन करने के विषय में जागरूक बनाने वाले व्यक्तियों और खाद्य निर्माता कंपनियों के योगदान को मान्यता देना है.

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