Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 June 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 11 June 2018


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Central Vigilance Commission

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  1. पूर्व NIA प्रमुख शरद कुमार को (चार साल की अवधि के लिए/65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक) Vigilance Commissioner के रूप में नियुक्त किया गया है.
  2. यह सतर्कता से सम्बंधित देश की सर्वोच्च संस्था (vigilance institution) है.
  3. यह अपनी रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है.
  4. यह एक संवैधानिक संस्था नहीं है अपितु Santhanam committee की सिफारिशों के आधार पर एक कार्यकारी आदेश से इसका गठन 1964 में किया गया.
  5. इस आयोग में एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और दो सतर्कता आयुक्त होते हैं.
  6. इनका चयन प्रधान मंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोकसभा के विपक्षी के नेता मिल कर करते हैं और उस पर राष्ट्रपति मुहर लगाते हैं.
  7. यदि कोई विपक्ष का नेता नहीं है तो लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का नेता इस चयन में भाग लेता है.
  8. इनका कार्यकाल 4 साल का अथवा आयुक्त के 65 वर्ष के हो जाने तक होता है.
  9. दुर्व्यवहार और अयोग्यता साबित हो जाने पर राष्ट्रपति केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और अन्य सतर्कता आयुक्त को हटा सकता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Lateral entry into Civil Services

  1. सरकार ने केंद्र में संयुक्त सचिव के स्तर पर सीधी नियुक्ति करने का निर्णय लिया है.
  2. इस संबंध में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने संयुक्त सचिव स्तर के 10 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं.
  3. ये आवेदन आर्थिक मामलों के विभाग, राजस्व विभाग, वाणिज्य एवं राजमार्ग विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के पदों के लिए मँगाए जा रहे हैं.
  4. इन पदों के लिए निजी क्षेत्र की कम्पनियों, परमार्शदाता संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय/बहुराष्ट्रीय संगठनों में 15 साल के कार्यानुभव से युक्त संयुक्त सचिव के समकक्ष स्तर के पदों पर काम करने वाले व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं.
  5. इसके अतिरिक्त केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, स्वायत्त निकायों, वैधानिक संगठनों, शोध निकायों एवं विश्वविद्यालयों में कार्य करने वाले व्यक्ति भी इन पदों के लिए आवेदन दे सकते हैं.
  6. नियुक्ति 3 से 5 साल के लिए संविदा पर होगी.
  7. सरकार की तरफ से बताया गया है कि सीधी नियुक्ति का यह प्रावधान इसलिए किया जा रहा है कि संयुक्त सचिव के स्तर पर देश की विभिन्न संस्थानों में कार्यरत प्रतिभाओं का शासन में सहयोग प्राप्त किया जा सके.

GS Paper 2  Source: The Hindu

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Topic : Seva Bhoj Yojna

  1. केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में ‘सेवा भोज’ नामक एक नई योजना की शुरूआत की है.
  2. सरकार ने दातव्य धार्मिक संस्थानों द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाल प्रसाद / लंगर / भंडारा आदि भोजन कार्यक्रमों में प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्रियों पर से GST हटाने का निर्णय लिया है.
  3. ये खाद्य सामग्रियाँ हैं – घी, खाने का तेल, आटा, मैदा, रवा/सूजी, चावल, दाल, चीनी और गुड़.
  4. इस योजना का उद्देश्य है उन दातव्य संस्थानों का आर्थिक बोझ हल्का किया जा सके जो बिना किसी भेद-भाव के लोगों को मुफ्त में भोजन का वितरण करते हैं.
  5. दातव्य संस्थानों में आने वाली संस्थाएँ हैं – मन्दिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च, धार्मिक आश्रम, दरगाह, मठ.
  6. वे ही संस्थाएँ इस योजना का लाभ उठा सकेंगी जो निम्नलिखित मापदंडों को पूरा करती हैं –
  • जहाँ हर महीने कम से कम 5000 लोगों को मुफ्त भोजन दिया जाता है.
  • जो संस्थान इस योजना के तहत आवेदन करने की तिथि से पाँच वर्ष पहले अस्तित्व में आई हुई हो.
  • इन संस्थाओं को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम तहत पंजीकृत होना आवश्यक है.

GS Paper 3 Source: Economic Times

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Topic : Bad Bank

  1. “Bad Loan” की अवधारणा सबसे पहली बार 1988 में पिट्सबर्ग स्थित मेलन बैंक  के सन्दर्भ में सामने आई थी.
  2. उस बैंक के व्यवसायिक रियल एस्टेट पोर्टफोलियो में गड़बड़ी के कारण बैंक को आर्थिक घाटा हो रहा था.
  3. McKinsey & Co के अनुसार “bad bank” की यह अवधारणा स्वीडन, फ्रांस और जर्मनी के बैंकिंग संकट में लागू की गई थी.
  4. इसी अवधारणा के आधार पर वित्त मंत्री पियूष गोयल ने हाल ही में यह घोषणा की है कि भारत के संकटग्रस्त लोक उपक्रम बैंकों में फसे ऋण के समाधान के लिए एक बैंकर पैनल बनाया जायेगा जो ARC (asset reconstruction company) या AMC (asset management company) के गठन की संभावना पर विचार करेगा.
  5. इस पैनल के अध्यक्ष पंजाब नेशनल बैंक गैर-कार्यकारी अध्यक्ष सुनील मेहता होंगे.
  6. प्रस्तावित कम्पनी का मुख्य कार्य फंसे हुए ऋण को restructure करना है और ऋण लेने वालों से पैसा वसूलने की प्रणाली विकसित करना है.
  7. विदित हो कि बैंक ऋण तो दे देते हैं पर वसूली करने में उन्हें विशेषज्ञता प्राप्त नहीं है.
  8. इसलिए यदि एक सरकारी संस्था को ऋण वसूली का कार्य दे दिया जाए तो वह यह काम अधिक सुचारू ढंग से कर सकेगा और बैंकों का बोझ भी हल्का हो जायेगा.

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