Sansar डेली करंट अफेयर्स, 10 October 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 10 October 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora- their structure, mandate.

Topic : FAO

संदर्भ

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एफएओ के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों को दर्शाने के के लिए 16 अक्टूबर 2020 को खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization – FAO) की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर, 75 रुपये मूल्य का स्मारक सिक्का जारी करेंगे. प्रधानमंत्री हाल ही में विकसित 8 फसलों की 17 जैव संवर्धित किस्में भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे.

यह आयोजन कृषि और पोषण को सरकार द्वारा दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रतीक होगा. इसके साथ ही यह सरकार के भूख और कुपोषण को पूरी तरह से समाप्त करने के संकल्प का एक प्रमाण भी है. इस कार्यक्रम को देश भर के आंगनवाड़ियों, कृषि विज्ञान केंद्रों, जैविक और बागवानी मिशनों द्वारा देखा जा सकेगा केंद्रीय कृषि मंत्री, वित्त मंत्री तथा महिला और बाल विकास मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगी. 

भारत और एफएओ

  1. समाज के कमजोर वर्ग और समूहों को आर्थिक रूप से और पोषाहार के मामले में सशक्त बनाने के लिए एफएओ के अबतक के प्रयास अद्वितीय रहे हैं.
  2. भारत का एफएओ के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है. भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी डॉ बिनय रंजन सेन 1956-1967 के दौरान एफएओ के महानिदेशक थे.
  3. 2020 में नोबेल शांति पुरस्कार जितने वाले विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना उनके समय में ही की गई थी.
  4. वर्ष 2016 को अंतर्राष्ट्रीय दलहन और 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किए जाने के भारत के प्रस्तावों को भी एफएओ द्वारा समर्थन दिया गया. 

कुपोषण की समस्या से निबटने के प्रयास

  • भारत ने 10 करोड़ से अधिक लोगों को लक्षित करते हुए एक महत्वाकांक्षी पोषण अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य शारीरिक विकास में बाधा, कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्या से निजात पाना है. कुपोषण एक वैश्विक समस्या है जिसके कारण दो अरब लोग मूल पोषक तत्वों की कमी से पीड़ित हैं. बच्चों में लगभग 45 प्रतिशत मौतें कुपोषण से जुड़ी हैं. ऐसे में यह अभियान सही मायने में संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से एक है.
  • अंतर्राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरुप सूक्ष्म पोषक तत्वों लौह, जस्ता, कैल्शियम, सकल प्रोटीन, लाइसिन और ट्रिप्टोफैन की अधिकता वाले गुणवत्ता युक्त प्रोटीन, एन्थोकायनिन, प्रोविटामिन ए और ओलिक एसिड से भरे पोषक तत्वों की समृद्ध किस्मों के विकास को सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है.
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के नेतृत्व में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के तहत पिछले पांच वर्षों के दौरान फसलों की 53 ऐसी किस्मों का विकास किया गया. वर्ष 2014 से पहले केवल एक बायोफॉर्टिफाइड किस्म विकसित की गई थी. 

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्गत की गई थी.
  • इसका मुख्यालय रोम (Rome), इटली में है. 130 देशों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं.
  • यह संगठन सरकारों और विकास एजेंसियों को कृषि, वानिकी (forestry), मत्स्यपालन तथा भूमि एवं जल संसाधन से सम्बंधित गतिविधियों के संचालन में सहायता करता है. यह विभिन्न परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहायता देने के अलावा शोध कार्य भी करता है.
  • यह शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण (training) कार्यक्रम भी चलाता है और कृषि उत्पादन और विकास से सम्बंधित आंकड़े भी इकठ्ठा करता है.
  • FAO वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा के लिये कार्य करता है. इस संस्था का लक्ष्य भूक मिटाना और पोषण का स्तर ऊँचा करना है.
  • इसका ध्येय वाक्य (motto) है – Fiat Panis अर्थात् लोगों को रोटी मिले…
  • आपको जानना चाहिए कि FAO संयुक्त राष्ट्र की सबसे वृहद् एजेंसी है.
  • वर्तमान में इस संगठन के सदस्यों देशों की संख्या 197 है (according to Wikipedia). इसके अन्दर 194 देश, 1 संगठन और 2 संलग्न सदस्य (associate members) होते हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

प्रधानमंत्री द्वारा देश को समर्पित की जाने वाली 8 फसलों की हाल ही में विकसित जैव-विविधता वाली किस्में पोषण के मामले में 3.0 गुना अधिक हैं. चावल की किस्म सीआर धान 315 जस्ता की अधिकता वाली है; गेहूं की एचडी 3298 किस्म प्रोटीन और लौह से जबकि DBW 303 और DDW 48 प्रोटीन और लौह से समृद्ध है. मक्का की हाइब्रिड किस्म 1, 2 और 3 लाइसिन और ट्राइप्टोफैन से, बाजरे की  सीएफएमवी 1 और 2 फिंगर किस्म  कैल्शियम, लोहा और जस्ता से भरपूर है. छोटे बाजारे की सीसीएलएमवी 1 किस्म लौह और जस्ते से भरपूर है.  पूसा सरसों 32 कम एरियूसिक एसिड से जबकि मूंगफली की गिरनार 4 और 5 किस्म  बढ़े हुए ओलिक एसिड से तथा रतालू की श्री नीलिमा तथा डीए 340 किस्म एंथोसायनिन से भरपूर है.

फसलों की ये किस्में, अन्य खाद्य सामग्री के साथ, सामान्य भारतीय थाली को पोषक तत्वों वाली थाली में बदल देंगी. इन किस्मों को स्थानीय भूमि और किसानों द्वारा विकसित किस्मों   का उपयोग करके विकसित किया गया है. उच्च जस्ता युक्त चावल की किस्म गारो पर्वतीय क्षेत्र तथा  गुजरात के डांग जिले से संग्रहित की गई है.

आईसीएआर ने पोषण संबंधी सुरक्षा को बढ़ाने के लिए परिवार को खेती से जोड़ने के लिए न्यूट्री-सेंसिटिव एग्रीकल्चर रिसोर्सेज एंड इनोवेशंस (NARI) कार्यक्रम शुरू किया है, पोषण सुरक्षा बढ़ाने के लिए पोषक-स्मार्ट गांवों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुनिश्चित करने के लिए केवीके द्वारा सूक्ष्म पोषक तत्वों से युक्त स्वस्थ और विविध आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाने के लिए  विशिष्ट पोषण उद्यान मॉडल विकसित और प्रचारित किए जा रहे हैं.  .

कुपोषण को कम करने और प्राकृतिक रूप से समृद्ध खाद्य सामग्री के माध्यम से भारत को कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए  जैव-फोर्टिफाइड फसलों की किस्मों के उत्पादन को बढ़ावा देकर इन्हें मध्यान्ह भोजन, आंगनवाड़ी आदि जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाएगा. यह किसानों के लिए अच्छी आमदनी सुनिश्चित करेगा तथा उनके लिए उद्यमिता के नए रास्ते खोलेगा.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : Global Hunger Index 2020

संदर्भ

हाल ही में वैश्विक भूख सूचकांक 2020 (Global hunger Index-2020) की रिपोर्ट जारी की गयी है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 107 देशों की सूची में 94 स्थान पर है. इस प्रतिवेदन के अनुसार भारत में भूख की स्थिति ‘गंभीर’ है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020 की रिपोर्ट से जुड़े मुख्य तथ्य

  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020 की रिपोर्ट के अनुसार, 27.2 स्कोर के साथ भारत भूख (hunger) के मामले में ‘गंभीर’ (serious) स्थिति में है. इसके अतिरिक्त, भारत में करीब 14 फीसदी लोग कुपोषण के शिकार हैं.
  • ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020’ (Global hunger Index-2020) में भारत की रैंक 107 देशों में 94वीं है.
  • भारत, अपने कई पड़ोसी देशों से अभी भी पीछे है. इन देशों में नेपाल, श्रीलंका, म्यामांर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं.
  • भारत का पड़ोसी देश ‘चीन’ इस इंडेक्स में 25वें पायदान पर है, जबकि नेपाल और पाकिस्तान क्रमश: 73वें और 88वें पायदान पर हैं.
  • 2020 की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में चाइल्ड वेस्टिंग(child wasting) की स्थित 2015 से 2019 के दौरान और खराब हुई है (2010- 14 की अवधि के मुक़ाबले) 2015 से 2019 की अवधि के दौरान भारत में चाइल्ड वेस्टिंग का प्रसार(prevalence) 17.3 प्रतिशत है जबकि 2010-14 के दौरान यह 15.1 प्रतिशत थी.
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के बच्चों में स्टंटिंग रेट (उम्र की तुलना में कम लम्बाई) 37.4% है.
  • ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020’ में सिर्फ 13 देश ही ऐसे हैं जिनसे भारत आगे हैं. इनमे प्रमुख देश हैं- रवांडा, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, लीबिया, मोजाम्बिक और चाड.

पिछले वर्षों में ग्लोबल हंगर सूचकांक में भारत की स्थिति

  • भारत वर्ष 2015 में 93वें, 2016 में 97वें, 2017 में 100वें, 2018 में 103वें और 2019 में 102वें स्थान पर रहा था.
  • उपर्युक्त रिकॉर्ड बताते हैं कि भुखमरी को लेकर भारत में संकट बरकरार है. भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह है.

वैश्विक भूख सूचकांक

  • विदित हो कि यह सूचकांक प्रतिवर्ष Welthungerhilfe और Concern Worldwide नामक संस्थाओं द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इस सूचकांक में विभिन्न देशों में भूख की स्थिति का तीन आयामों से पता लगाया जाता है – कम कैलोरी लेना, बाल कुपोषण तथा बाल मृत्यु दर.
  • इस सूचकांक में रैंकिंग अधिकतम 100 पॉइंट की होती है जिसमें शून्य का अर्थ सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग और 100 का अर्थ सबसे बुरी रैंकिंग होता है.
  • यदि किसी देश को 10 से कम पॉइंट मिलते हैं तो उसका तात्पर्य होगा कि वहाँ भूख की उपस्थिति कम है. इसी प्रकार 20 से 34.9 पॉइंट का अभिप्राय है कि भूख की उपस्थिति गंभीर है. पुनः 35 से 49.9 का अर्थ होता है कि स्थिति खतरनाक हो गई है तथा 50 से ऊपर पॉइंट होने पर उस देश में भूख की स्थिति अत्यंत खतरनाक मानी जायेगी.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resou

Topic : STARTS

संदर्भ

मंत्रिमंडल ने स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए विश्व बैंक से सहायता प्राप्त‍ 5718 करोड़ रुपये की परियोजना “स्टार्टस” को स्वीकृति दी है.

स्टार्टस परियोजना

  • विश्‍व बैंक से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 3700 करोड़ रुपये) राशि की विश्‍व बैंक की सहायता से 5718 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत वाली STARTS परियोजना का कार्यान्‍वयन किया जाएगा.
  • इसका पूरा नाम है – ‘स्ट्रेंगथनिंग टीचिंग-लर्निंग एंड रिजल्ट्स फॉर स्‍टेट्स’.
  • स्‍टार्स परियोजना स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय (एमओई) के तहत एक नई केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना के रूप में लागू की जाएगी.
  • राष्‍ट्रीय आकलन केन्‍द्र, परख की स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्‍वतंत्र एवं स्‍वायत्तशासी संस्‍थान के रूप में स्‍थापना और सहायता करना.
  • इस परियोजना में 6 राज्यों को सम्मिलित किया गया है – हिमाचल प्रदेश, राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, केरल और ओडिशा शामिल हैं. परियोजना के अतिरिक्‍त 5 राज्‍यों- गुजरात, तमिलनाडु, उत्तराखंड, झारखंड और असम में इसी प्रकार की एडीबी वित्त पोषित परियोजना लागू करने की भी कल्‍पना की गई है. सभी राज्‍य अपने अनुभव और श्रेष्‍ठ प्रक्रियाएं साझा करने के लिए एक दूसरे राज्‍य के साथ भागीदारी करेंगे.

उद्देश्य

  1. स्‍टार्स परियोजना बेहतर श्रम बाजार परिणामों के लिए बेहतर शिक्षा परिणामों और स्‍कूलों द्वारा पारगमन रणनीतियों के साथ काम करने के लिए प्रत्‍यक्ष जुड़ाव के साथ उपायों को विकसित करने, लागू करने, आकलन करने और सुधार करने में राज्‍यों की मदद चाहती है.
  2. स्‍टार्स परियोजना का समग्र फोकस और इसके घटक गुणवत्ता आधारित शिक्षण परिणामों की राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्‍यों के साथ पंक्तिबद्ध है.
  3. इस परियोजना में चुनिंदा राज्‍यों में हस्‍तक्षेपों के माध्‍यम से भारतीय स्‍कूली शिक्षा प्रणाली में समग्र निगरानी और मापक गतिविधियों में सुधार लाने की कल्‍पना की गई है.
  4. यह परियोजना इन परिणामों के साथ निधियों की प्राप्ति और वितरण को जोड़कर वास्‍तविक परिणामों के साथ इनपुट और आउटपुट के रखरखाव के प्रावधान से ध्‍यान केन्द्रित करने में बदलाव करती है.

दो प्रमुख घटक

स्‍टार्स परियोजना के दो प्रमुख घटक हैं:-

1.  राष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस परियोजना में निम्‍नलिखित उपायों की कल्‍पना की गई है, जिनसे सभी राज्‍य और केन्‍द्र शासित प्रदेश लाभान्वित होंगे :-

  • छात्रों के प्रतिधारण, संक्रमण और समापन दरों के बारे में मजबूत और प्रामाणिक डेटा प्राप्‍त करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की राष्‍ट्रीय डेटा प्रणालियों को मजबूत बनाना.
  • राज्‍य प्रोत्‍साहन अनुदान (एसआईजी) के माध्‍यम से राज्‍यों के शासन सुधार एजेंडा को प्रोत्‍साहन देकर राज्‍यों के पीजीआई अंकों में सुधार लाने में शिक्षा मंत्रालय की मदद करना.
  • शिक्षण मूल्‍यांकन प्रणालियों को मजबूत बनाने में सहायता करना.
  • राष्‍ट्रीय आकलन केन्‍द्र (परख) स्‍थापित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय के प्रयासों में मदद करना. ऐसे केन्‍द्र के कार्यों में ऑनलाइन पोर्टलों (उदाहरण के लिए शगुन और दीक्षा), सोशल एवं अन्‍य मीडिया, तकनीकी कार्यशालाओं, राज्‍य भ्रमणों और सम्‍मेलनों के माध्‍यम से अन्‍य राज्‍यों के साथ इन अनुभवों के संग्रहि‍त, क्‍यूरेटिंग और साझा करके संचालन हेतु चुनिंदा राज्‍यों के अनुभव से लाभ उठाना शामिल है.
  • इसके अलावा स्‍टार्स परियोजना में राष्‍ट्रीय घटक के तहत आकस्मिकता, आपातकालीन प्रतिक्रिया घटक (सीईआरसी) सम्मिलित हैं जो इसे किसी प्राकृतिक, मानव निर्मित और स्‍वास्‍थ्‍य आपदाओं के लिए अधिक जवाबदेह बनाएंगे. ये स्‍कूल बंदी/ बुनियादी ढांचा हानि, अपर्याप्‍त सुविधाएं और रिमोर्ट लर्निंग में सहायता प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसी शिक्षण हानि को बढ़ावा देने वाली स्थितियों से निपटने में सरकार की सहायता करेंगे. सीईआरसी घटक वित्त पोषण के त्‍वरित पुन: वर्गीकरण और सहज वित्तीय अनुरोध प्रकियाओं के उपयोग में मदद करेगा.

2. राज्‍य स्‍तर पर, परियोजना में निम्‍नलिखित परिकल्‍पनाएं की गई हैं :-

  • शुरुआती बाल शिक्षा एवं आधारभूत शिक्षण को सशक्‍त बनाना
  • शिक्षण आकलन प्रणालियों में सुधार लाना
  • शिक्षक के विकास और स्‍कूल के नेतृत्‍व के माध्‍यम से क्‍लास रूम के निर्देश एवं सुधार को सशक्‍त करना
  • उन्‍नत सेवा आपूर्ति के लिए शासन एवं विकेंद्रित प्रबंधन
  • स्‍कूल से वंचित बच्‍चों को मुख्‍यधारा में लाकर, कैरियर मार्गदर्शन तथा परामर्श देकर, इंटर्नशिप देकर स्‍कूलों में व्‍यवसायिक शिक्षा को सशक्‍त बनाना.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure- energy.

Topic : Collation of Indias hydrogen & fuel cells research status launched

संदर्भ

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा हाल ही में अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं और शिक्षा जगत के कई वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, उपयोगिताओं और अन्य हितधारकों द्वारा किए जा रहे हाइड्रोजन से संबंधित देश में चल रहे अनुसंधान गतिविधियों का एक संकलन शुरू किया गया है.

हाइड्रोजन और ईंधन कोशिकाओं पर भारत की स्थिति रिपोर्ट का संकलन, विकासशील कार्यक्रमों और रणनीतियों के लिए विभिन्न मुद्दों पर विचार-मंथन, चर्चाओं और प्रस्तुतियों का एक परिणाम था. यह मिशन नवाचार नवीकरणीय और स्वच्छ हाइड्रोजन चुनौती में भाग लेने वाले देश के रूप में भारत की प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की शुरुआत में तेजी लाने के लिए था.

ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग से लाभ

  • हाइड्रोजन द्रव्यमान के मामले में सबसे ज़्यादा ऊर्जा सामग्री (120.7 एमजे/किग्रा) के साथ एक स्वच्छ ईंधन है.
  • हाइड्रोजन ऊर्जा उत्पादन के लिये तथा ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. हाइड्रोजन का अंतरिक्ष यान में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
  • प्रत्यक्षतया हाइड्रोजन का उपयोग आईसी इंजन, डीज़ल और सीएनजी के मिश्रण के साथ तथा फ्यूल सेल में करके बिजली का उत्पादन किया जा सकता है.
  • जब हाइड्रोजन को जलाया जाता है, यह उप-उत्पाद के रूप में पानी का उत्पादन करता है. इसलिये यह न केवल एक कुशल ऊर्जा वाहक, परंतु एक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के रूप में जाना जाता है.
  • हाइड्रोजन पेट्रोल और डीज़ल का विकल्प बन सकता है, इसलिये यह आयात पर हमारी निर्भरता कम कर सकता है.

बड़े पैमाने पर ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का प्रयोग करने की सीमाएँ हैं

  • हाइड्रोजन बहुत कम ऊर्जा घनत्व रखता है. इसलिये, इसको पर्याप्त मात्रा में स्टोर करने के लिये बड़ी जगह की आवश्यकता है. 
  • ऑटोमोबाइल अनुप्रयोगों के लिये, हाइड्रोजन का कॉम्पैक्ट और कुशल तरीके से पर्याप्त मात्रा में स्टोर करने की आवश्यकता हैं ताकि पुनः ईंधन भरने से पहले एक निश्चित ड्राइविंग रेंज प्रदान की जा सके.
  • हाइड्रोजन एक रंगहीन और गंधहीन गैस है तथा दहन के बाद एक रंगहीन लौ पैदा करता है. इसलिये, सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये तथा गैस रिसाव का पता लगाने के लिये विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

हमारे ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय का अधिक उपयोग, डिकार्बोनाइजेशन को प्राप्त करने हेतु हमारा नीतिगत उद्देश्य है. हालांकि, समय-सीमा में डिकार्बोनाइजेशन के लिए कई रास्ते हैं, लेकिन नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन को सबसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है.  ऊर्जा स्रोत के रूप में हाइड्रोजन अगले कुछ दशकों में जलवायु-तटस्थ प्रणालियों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

हाइड्रोजन में प्रति इकाई द्रव्यमान उच्च ऊर्जा सामग्री है, जो गैसोलीन से तीन गुना अधिक है. उपयुक्त ईंधन कोशिकाओं के साथ ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए हाइड्रोजन का उपयोग किया जा रहा है. हालांकि, नवीकरणीय हाइड्रोजन को एक व्यवहार्य विकल्प बनाने के लिए, नई सामग्री के विकास, इलेक्ट्रोलाइट्स, भंडारण, सुरक्षा और मानकों सहित सामग्रियों से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण चुनौतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है. चूंकि हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियां ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद कर सकती हैं, इसलिए आने वाले दशकों में ऊर्जा प्रणाली में हाइड्रोजन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए प्रयासों को और अधिक महत्व दिया गया है.

हाल के वर्षों में दो प्रमुख घटनाक्रमों ने हाइड्रोजन के विकास में योगदान दिया है – नवीकरणीय से हाइड्रोजन आपूर्ति की लागत में कमी आई है और यह गिरावट लगातार जारी है, जबकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन शमन की तात्कालिकता बढ़ गई है, और कई देशों ने अर्थव्यवस्थाओं को विघटित करने की कार्रवाई शुरू कर दिया है.

हाइड्रोजन विभिन्न महत्त्वपूर्ण ऊर्जा चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है, गहन और लंबे समय तक परिवहन, रसायन और लोहा तथा इस्पात सहित कई क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज कर सकता है, जहां उत्सर्जन को कम करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार करने तथा ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देने में मदद करना मुश्किल साबित हो रहा है. इसके अलावा, यह विद्युत प्रणाली में लचीलापन बढ़ाता है. यह नवीकरणीय ऊर्जा से ऊर्जा भंडारण के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है और यह दिनों, हफ्तों या महीनों में बड़ी मात्रा में बिजली के भंडारण के लिए सबसे कम लागत वाला विकल्प बनने के लिए भी तैयार है.


Prelims Vishesh

Compensatory Afforestation:-

  • उत्तराखंड सरकार अपने अपूर्ण प्रतिप्रक वनीकरण को पूरा करने के लिए, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान संचालित करने के बारे में विचार कर रही है.
  • 75 प्रतिशत से अधिक वनावरण वाले राज्य, जो गैर-वानिकी परियोजनाओं के लिए वन मूमि का व्यपवर्तन (divert) करने के इच्छुक हैं, वे अन्य राज्यों में प्रतिपूरक वनीकरण कर सकते हैं.
  • गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि का प्रयोग करने के बाद प्रतिपूरक वनीकरण किया जाता है. कुछ गैर-वानिकी उद्देश्य इस प्रकार हैं, जैसे- खनन गतिविधियाँ या बांधों, उद्योगों अथवा सड़कों का निर्माण.
  • प्रतिपूरक वनीकरण का प्रावधान, वन संरक्षण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत किया गया है.

Madrid Principles for conflict settlement :-

  • यह नागोनॉ-काराबाख संघर्ष (आर्मेनिया और आर्मेनियाई लोगों के मध्य) के शांतिपूर्ण समाधान हेतु एक बुनियादी सिद्धांत है.
  • इसे वर्ष 2007 में, मैड्रिड में आयोजित यूरोपीय सुरक्षा एवं सहयोग संगठन (Organisation for Security and Co-operation in Europe – OSCE) की मंत्रिस्तरीय परिषद में अपनाया गया था.
  • विदित हो कि OSCE विश्व का सबसे बड़ा सुरक्षा-उन्मुख अंतर-सरकारी संगठन है. इसमें तीन महाद्वीपों, यथा- उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया से कुल 57 सदस्य हैं. भारत इसका सदस्य नहीं है.

Gujrat State Fertilization and Chemicals India Ltd. launched indigenous variety of calcium nitrate and boronated calcium nitrate :-

  • भारत में पहली बार कैल्शियम नाइट्रेट और बोरॉन युक्त कैल्शियम नाइट्रेट का निर्माण किया जा रहा है. अभी इसे अन्य देशों से आयात किया जा रहा है.
  • कैल्शियम नाइट्रेट का उपयोग कृषि में जल में घुलनशील उर्वरक के रूप में, अपशिष्ट जलोपचार में तथा सीमेंट कंक्रीट की मजबूती बढ़ाने के लिए किया जाता है.
  • बोरॉन युक्त कैल्शियम नाइट्रेट पौधों की वृद्धि, भौतिक मजबूती, पुष्यों के निषेचन और पादपों में भरपूर मात्रा में फलों के लिए महत्त्वपूर्ण है.

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