Sansar डेली करंट अफेयर्स, 10 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 10 August 2019


GS Paper 1 Source: The Hindu

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Syllabus : The Freedom Struggle – its various stages and important contributors /contributions from different parts of the country.

Topic : Quit India Movement

संदर्भ

8 अगस्त, 2019 को प्रत्येक वर्ष की भाँति भारत ने अगस्त क्रान्ति दिवस मनाया गया. इस बार इसकी 77वीं वर्षगाँठ थी.

भारत आन्दोलन छोड़ो आन्दोलन क्या था?

1942 ई. में क्रिप्स मिशन के विफल हो जाने के पश्चात् 8 अगस्त, 1942 को महात्मा गाँधी ने “करो या मरो” का आह्वाहन करते हुए भारत छोड़ो आन्दोलन का सूत्रपात किया. इस आन्दोलन के तहत पूरे देश में विरोध और प्रदर्शन आयोजित हुए. लोग भारत की स्वतंत्रता शीघ्र घोषित करने की माँग कर रहे थे, परन्तु इस आन्दोलन को ब्रिटिश शासन ने कुचल दिया और यह कहा कि भारत को स्वतंत्रता विश्व युद्ध समाप्त होने के पश्चात् ही दी जा सकती है.

भारत छोड़ो आह्वान कब और कहाँ किया गया?

14 जुलाई, 1942 को कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने वर्धा में एक संकल्प पारित किया जिसमें ब्रिटिश शासन से भारत को पूर्ण स्वतंत्रता देने की माँग की गई थी. अगस्त 8, 1942 को महात्मा गाँधी ने बम्बई के गोवलिया टैंक मैदान में भारत छोड़ो आन्दोलन की माँग की तथा देशवासियों को “करो या मरो” का नारा दिया. प्रारम्भ में उनके इस भाषण पर जवाहरलाल नेहरु और मौलाना आजाद को आपत्ति थी परन्तु बाद में वे गाँधी जी के साथ हो गये.

कुछ मुख्य तथ्य

  • भारत छोड़ो आन्दोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन ने कई राष्ट्रीय नेताओं को कारावास में डाल दिया, जैसे – महात्मा गाँधी, अबुल कलाम आजाद, जवाहर लाल नेहरु और सरदार बल्लभ भाई पटेल.
  • कांग्रेस को एक अवैध संघ घोषित कर दिया गया और देश भर में इसके कार्यालयों पर छापा मार कर निधियों को जब्त किया गया.
  • इस आन्दोलन का पहला भाग शांतिपूर्ण था. जगह-जगह पर जुलूस निकाले गये.
  • आन्दोलन का दूसरा भाग हिंसक हो गया क्योंकि वायसराय लार्ड लिनलिथगो ने इसे दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया. इसकी प्रतिक्रिया में डाकघरों, सरकारी भवनों और रेलवे स्टेशनों में आग लगा दी गई.

भारत छोड़ो आन्दोलन के विषय में डिटेल में यहाँ पढ़ लें >> Quit India Movement in Hindi


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Currency Manipulation

संदर्भ

पिछले दिनों डॉलर की तुलना में चीन की मुद्रा युआन के मूल्य में तेजी से कमी आई है. इस परिप्रेक्ष्य में अमेरिका की ट्रेजरी ने औपचारिक रूप से कहा है कि चीन एक मुद्रा का हेर-फेर करने वाला देश (मुद्रा मैनिपुलेटर) है.

अमेरिका क्यों चितित है?

युआन जब कमजोर होता है चीनी निर्यात सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक हो जाता है. अमेरिका इसी बात को लेकर चिंतित है.

पृष्ठभूमि

चीन में यह लम्बा इतिहास रहा है कि वह विदेशी विनियम बाजार में व्यापक हस्तक्षेप कर के अपनी मुद्रा का मूल्य नीचे रखता है. अभी पिछले दिनों भी उसने अपनी मुद्रा के अवमूल्यन के लिए ठोस कदम उठाये हैं जबकि उसके पास विदेशी विनियम का अच्छा-ख़ासा भण्डार है.

अमेरिका किसी देश को मुद्रा में हेरा-फेरी करने वाला कब और क्यों बताता है?

अमेरिका का ट्रेजरी विभाग वर्ष में दो बार एक प्रतिवेदन प्रकाशित करता है जिसमें वैश्विक, आर्थिक एवं विनियम दर से सम्बन्धित नीतियों की समीक्षा होती है.

किसी देश को “मुद्रा मैनिपुलेटर” का टैग कब मिलता है?

अमरीकी ट्रेजरी विभाग किसी देश को “मुद्रा मैनिपुलेटर” घोषित करने के लिये तीन मानदंडों का प्रयोग करता है :-

  • अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार अधिशेष 20 अरब डॉलर हो.
  • वर्तमान GDP का 3% चालू खाता अधिशेष हो और
  • एक वर्ष में देश से सकल घरेलू उत्पाद के 2% से अधिक विदेशी मुद्रा खरीदी गई हो.

इस प्रकार की घोषणा अमेरिका क्यों करता है?

इस प्रकार की घोषणा कर के अमेरिका का ट्रेजरी विभाग उन देशों के प्रति ध्यान केन्द्रित करता है जिनका अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार अच्छा-ख़ासा होता है और जिनका अमेरिकी और विश्व की अर्थव्यवस्था में अधिक महत्त्व होता है.

आगे क्या होगा?

जैसा कि ऊपर बतलाया गया है कि अमेरिका ने चीन को मुद्रा में हेरा-फेरी करने वाले देश की संज्ञा दे दी है. अब यह होगा कि दोनों देशों के बीच लेन-देन की बातें होंगी. वासत्व में इस प्रकार का वार्तालाप एक वर्ष पूर्व से ही आरम्भ हो चुका है.

अब अमेरिका नए सीमा शुल्क लाने पर विचार कर सकता है. उल्लेखनीय है कि “अमेरिका फर्स्ट व्यापार नीति” के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प पहले से ही अग्रसर हैं.

1988 के विदेश व्यापार और प्रतिस्पर्धा अधिनियम के अधीन अमेरिका को चीन से बात-चीत करनी होगी अथवा वह इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में ले जा सकता है. अमेरिका इस संदर्भ में जो दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है, वे हैं –

  1. अमेरिका विकासशील देशों में निवेश करने वाली एजेंसी विदेश निजी निवेश निगम (Overseas Private Investment Corporation) को चीन को धनराशि देने से रोक सकता है.
  2. अमेरिका जो सरकारी खरीद करता है उसकी संविदाओं से वह चीन को बाहर रख सकता है.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Amendment Bill, 2019

संदर्भ

संसद ने पिछले दिनों सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्ज़ा से बेदखली) संशोधन विधेयक, 2019 पारित कर दिया है.

विधेयक की मुख्य बातें

  • यह विधेयक सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्ज़ा से बेदखली) अधिनियम, 1971 को संशोधित करता है.
  • बेदखली की सूचना : इस विधेयक में आवासीय परिसर से बेदखली की प्रक्रिया से सम्बन्धित प्रावधान जोड़ा गया है. इस प्रावधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सरकारी आवास पर अनधिकृत कब्ज़ा किए हुए है तो केन्द्रीय सरकार का सम्पदा अधिकारी उसको लिखित सूचना निर्गत करेगा जिसमें यह लिखा होगा कि वह व्यक्ति तीन दिनों के भीतर-भीतर यह बताये कि उसे उस आवास से क्यों नहीं निकाला जाए. आवश्यक हो तो यह सूचना विहित प्रक्रिया के साथ सम्बंधित आवास के किसी ऐसे भाग पर चिपका दिया जाएगा जो सब को दिखाई पड़े.
  • बेदखली का आदेश : कब्जेदार द्वारा दिए गये उत्तर पर विचार कर के और यदि आवश्यक हो तो अन्य जाँच-पड़ताल कर के सम्पदा अधिकारी बेदखली का आदेश निकालेगा. यदि कब्जेदार आदेश का अनुपालन नहीं करता है तो सम्पदा अधिकारी उस व्यक्ति को सरकारी आवास से बेदखल करके उस पर अपना कब्ज़ा ले लेगा. इसके लिए वह पुलिस का भी उपयोग कर सकता है.
  • क्षति का भुगतान : यदि अनधिकृत कब्जेदार बेदखली के आदेश न्यायालय में चुनौती दे देता है तो भी उसे हर महीने क्षतिपूर्ति का भुगतान करना पड़ेगा.

प्रभाव

  • विधेयक के अधिनियम बन जाने से सरकारी आवासों पर अनधिकृत कब्ज़ा को सुचारू रूप से और तेजी से हटाने में सहायता मिलेगी. बेदखली के बाद खाली हुए आवासों को प्रतीक्षा सूची के अनुसार दूसरे योग्य व्यक्तियों को आवंटित कर दिया जाएगा.
  • नए अधिनियम के लागू होने पर सरकारी आवास मिलने में लगने वाला समय पहले से घट जाएगा.

पृष्ठभूमि

भारत सरकार सरकारी आवासों पर अनधिकृत कब्ज़ा हटाने के लिए सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्ज़ा से बेदखली) अधिनियम, 1971 का सहारा लेती है, किन्तु कई ऐसे मामले होते हैं जिनमें बेदखली की प्रक्रिया असामान्य रूप से लम्बी हो जाती है और कई पात्रता रखने वाले कर्मचारी बिना सरकारी आवास के रह जाते हैं. इसी बात को दृष्टि में रखते हुए इस अधिनियम में 2015 में भी एक संशोधन किया गया था जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि बेदखली की प्रक्रिया 5 से 7 सप्ताह में पूरी हो जानी चाहिए. परन्तु जैसा कि सर्वविदित है कि इस समय-सीमा का कभी पालन नहीं हुआ और बेदखली में कई बार वर्षों लग जाते हैं.


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UNIDO

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) और राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NICE) ने मिलकर सौर ऊर्जा क्षेत्र के विभिन्न स्तरों के लाभार्थियों के कौशल्य विकास के लिए एक कार्यक्रम का अनावरण किया है.

इस कार्यक्रम में देश और विदेश के विशेषज्ञों को बुलाकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में प्रचलित श्रेष्ठ प्रथाओं से कार्यक्रम में शामिल होने वालों को अवगत कराया जाएगा.

पृष्ठभूमि

यह कार्यक्रम पहले से चल रही परियोजना MNRE-GEF-UNIDO का एक अंग होगा. इसके माध्यम से केंद्रीकृत सौर तापीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्षमता संवर्धन और तकनीकी कार्यबल के लिए कौशल्य विकास पर बल दिया जाएगा. विदित हो कि आजकल सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि औद्योगिक प्रक्रिया में ताप के लिए कोयला, ऊर्जा, भट्ठी-तेल आदि जैसे पारम्परिक जीवाश्म ईंधनों के प्रयोग से कार्बन उत्सजर्न बढ़ रहा है और लागत भी बहुत आती है.

UNIDO क्या है?

  • UNIDO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ एजेंसी है जो निर्धनता न्यूनीकरण, समावेशी वैश्वीकरण एवं पर्यावरणीय सततता के लिए औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है.
  • यह एजेंसी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) एक एक सदस्य भी है.
  • 1 अप्रैल, 2019 तक UNIDO में 170 देश सदस्य के रूप में सम्मिलित हैं.
  • UNIDO के कई नीति-निर्माता शाखाएँ भी हैं जिनकी बैठकों में इसके सदस्य नियमित रूप से एजेंसी के निर्देशक सिद्धांतों एवं नीतियों पर चर्चा करते हुए निर्णय लेते हैं.
  • UNIDO के लक्ष्यों का विवरण LIMA घोषणा में अंकित है जिसे 2013 में आयोजित UNIDO के साधारण सम्मलेन की 15वीं बैठक में अंगीकृत किया गया था. इस घोषणा के अनुसार UNIDO का कार्य सदस्य देशों के अन्दर समावेशी और सतत औद्योगिक विकास (Inclusive And Sustainable Industrial Development – ISID) को प्रोत्साहित करना और उसकी गति तेज करना है.
  • UNIDO के लक्ष्य को सतत विकास के क्रमांक 9 (SDG 9) के रूप में पूर्ण मान्यता मिली हुई है.

UNIDO की चार सामरिक प्राथमिकताएँ

  1. ऐसी समृद्धि लाना जिसमें सभी सम्मिलित हों.
  2. आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को आगे ले जाना.
  3. पर्यावरण को सुरक्षित रखना.
  4. ज्ञान एवं संस्थानों को सुदृढ़ बनाना.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UN Palestine refugee agency

संदर्भ

भारत ने इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीन शरणार्थी एजेंसी को पाँच मिलियन डॉलर का योगदान दिया है. यह धनराशि संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी कार्य एजेंसी (UNRWA) के मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं, जैसे – शिक्षा, स्वास्थ्य की देखभाल, राहत और सामाजिक सेवा में सहायता के लिए दी गई है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी कार्य एजेंसी (UNRWA) क्या है?

  • यह एक राहत एवं मानव विकास एजेंसी है जो 8 दिसम्बर, 1949 को गठित की गई थी.
  • UNRWA 1950 से जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, पश्चिमी तट और गाजा पट्टी में शरणार्थी फिलिस्तीनियों को मानवता के आधार पर स्वास्थ्य, शिक्षा, राहत और सामाजिक सेवाओं के लिए सहायता देता रहा है.
  • फिलिस्तीनी शरणार्थियों की समस्या 1948 में हुए अरब-इजरायल युद्ध के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई क्योंकि युद्ध के कारण बहुत सारे फिलिस्तीनी अपने निवास-क्षेत्र से विस्थापित हो गये थे. इसलिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा UNRWA का गठन किया गया था.
  • इस एजेंसी से 4 मिलियन फिलिस्तीनी शरणार्थियों का कल्याण किया जाता है. विदित हो कि विश्व में जितने शरणार्थी हैं उन्मने से 20% फिलिस्तीनी के ही शरणार्थी हैं.

UNRWA को फण्ड कहाँ से मिलता है?

  • UNRWA को मिलने वाला फण्ड लगभग समूचा का समूचा संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के स्वैच्छिक योगदान से आता है.
  • साथ ही संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट में भी इस एजेंसी के लिए कुछ राशि का प्रावधान रहता है जो मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारियों पर होने वाली लागत पर खर्च होता है.

UNRWA के समक्ष चुनौतियाँ

  • वर्तमान में इस संयुक्त राष्ट्र एजेंसी में कड़की चल रही है क्योंकि अब इसे स्वैच्छिक योगदान बहुत कम देशों से मिल रहे हैं.
  • इस वर्ष इस एजेंसी को 2 बिलियन डॉलर की आवश्कयता है. परन्तु अनुमान है कि इसको मिलने वाली धनराशि आवश्यकता से 200 मिलियन डॉलर कम रहेगी.
  • धन के अभाव के कारण यह एजेंसी अपनी आवश्यक कार्यक्रमों को ठीक से नहीं चला पाएगी.
  • पिछले कुछ दिनों से यह एजेंसी कुछ दुर्गुणों से ग्रस्त दिख रही है, जैसे – यौन कदाचार, भाई-भतीजावाद, गलतियाँ बताने वालों से बदला लेना और अधिक से अधिक बिज़नस क्लास में यात्रा करना.

Prelims Vishesh

e-Rozgar Samachar :-

  • पिछले दिनों सूचना एवं प्रशासन मंत्रालय ने रोजगार समाचार के ई-संस्करण का अनावरण किया.
  • विदित हो कि जनसाधारण को सरकारी नौकरियों के विषय में जानकारी देने के लिए सूचना एवं प्रशासन मंत्रालय अंग्रेजी में एम्प्लॉयमेंट न्यूज़ और हिंदी रोजगार समाचार प्रकाशित किया करता है.

Women Transforming India Awards :-

  • नीति आयोग भारतीय महिला रूपांतरण पुरस्कार का चौथा संस्करण अनावृत करने वाला है.
  • ये पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से भारत की उन महिलाओं से दिया जाता है जो उद्यमिता के क्षेत्र में हैं.
  • 2018 की भाँति इस वर्ष की भी थीम है – महिलाएँ तथा उद्यमिता.

Gogabeel is Bihar’s first community reserve :-

  • बिहार के कटिहार जिले में स्थित गोगाबील नामक U-आकार की झील को राज्य का पहला सामुदायिक सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है.
  • विदित हो कि यह झील महानंदा और कंखड़ तथा साथ ही गंगा नदी के जल-प्रवाह से निर्मित है.
  • यह बिहार का 15वाँ सुरक्षित क्षेत्र है.

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