Sansar डेली करंट अफेयर्स, 09 September 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 09 September 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : National Commission on Minorities – NCM

संदर्भ 

सरदार इकबाल सिंह लालपुरा ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है. ज्ञातव्य है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों केंद्र सरकार से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सभी रिक्त पदों को 30 सितंबर, 2021 तक भरने के लिए कहा था.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना

  • वर्ष 1978 में गृह मंत्रालय द्वारा पारित एक संकल्प में अल्पसंख्यक आयोग (Minorities Commission- MC) की स्थापना की परिकल्पना की गई थी.
  • वर्ष 1984 में, अल्पसंख्यक आयोग को गृह मंत्रालय से अलग कर दिया गया और इसे नव-निर्मित कल्याण मंत्रालय (Ministry of Welfare) के अधीन रखा गया, जिसने वर्ष 1988 में भाषाई अल्पसंख्यकों को आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर कर दिया.
  • वर्ष 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अधिनियमन के साथ ही अल्पसंख्यक आयोग एक सांविधिक/वैधानिक (Statutory) निकाय बन गया और इसका नाम परिवर्तित कर के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) कर दिया गया.
  • वर्ष 1993 में पहले वैधानिक राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया और पाँच धार्मिक समुदायों- मुस्लिमईसाईसिखबौद्ध और पारसी को अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में अधिसूचित किया गया.
  • वर्ष 2014 में जैन धर्म मानने वालों को भी अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में अधिसूचित किया गया था.

संरचना

  • NCM में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पाँच सदस्य होते हैं और इन सभी का चयन अल्पसंख्यक समुदायों में से किया जाता है.
  • केंद्र सरकार द्वारा नामित किये जाने वाले इन व्यक्तियों को योग्य, क्षमतावान और सत्यनिष्ठ होना चाहिये.
  • कार्यकाल: प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल पद धारण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि तक होता है.

प्रमुख कार्य

  • संघ और राज्यों के अंतर्गत अल्पसंख्यकों के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना.
  • अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की सुरक्षा के लिये बनाई गई नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक सिफारिशें करना.
  • अल्पसंख्यकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से संबंधित विषयों का अध्ययन, अनुसंधान और विश्लेषण करना.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Iran nuclear deal

संदर्भ 

अमेरिका और जर्मनी द्वारा ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता के लिए जल्द ही वापस लौटने का दबाव बढ़ाया जा रहा है.

  • इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (IAEA) ने कहा है, कि ईरान समझौते का उल्लंघन करते हुए ‘अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम’ के अपने भंडार को बढ़ाता जा रहा है.
  • IAEA ने यह भी कहा है, कि ईरान ने ‘सत्यापन’ और ‘निगरानी कार्रवाहियों’ को “गंभीर रूप से कमजोर” भी कर दिया है.

पृष्ठभूमि

वर्ष 2015 के ‘ईरान आणविक समझौते’ के अंतिम दौर की वार्ता में समझौते के शेष पक्षकारों ने भाग लिया था, और यह वार्ता जून में समाप्त हो गई और इसे दोबारा शुरू करने के लिए कोई तारीख निर्धारित नहीं की गई है.

ईरान आणविक समझौता क्या है?

  • यह समझौता, जिसे Joint Comprehensive Plan of Action – JCPOA के नाम से भी जाना जाता है, ओबामा के कार्यकाल में 2015 में हुआ था.
  • इरानियन आणविक डील इरान और सुरक्षा परिषद् के 5 स्थाई सदस्य देशों तथा जर्मनी के बीच हुई थी जिसेP5+1 भी कहा जाता है.
  • यह डील ईरान द्वारा चालाये जा रहे आणविक कार्यक्रम को बंद कराने के उद्देश्य से की गई थी.
  • इसमें ईरान ने वादा किया था कि वह कम-से-कम अगले 15 साल तक अणु-बम नहीं बनाएगा और अणु-बम बनाने के लिए आवश्यक वस्तुओं, जैसे समृद्ध यूरेनियम तथा भारी जल के भंडार में भारी कटौती करेगा.
  • समझौते के तहत एक संयुक्त आयोग बनाया गया था जिसमें अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के प्रतिनिधि थे. इस आयोग का काम समझौते के अनुपालन पर नज़र रखना था.
  • इस डील के अनुसार ईरान में स्थित आणविक केंद्र अमेरिका आदि देशों की निगरानी में रहेंगे.
  • ईरान इस डील के लिए इसलिए तैयार हो गया था क्योंकि आणविक बम बनाने के प्रयास के कारण कई देशों ने उसपर इतनी आर्थिक पाबंदियाँ लगा दी थीं कि उसकी आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई थी.
  • उल्लेखनीय है कि तेल निर्यात पर प्रतिबंध के कारण ईरान को प्रतिवर्ष करोड़ों पौंड का घाटा हो रहा था. साथ ही विदेश में स्थित उसके करोड़ों की संपत्तियां भी निष्क्रिय कर दी गई थीं.

अमेरिका समझौते से हटा क्यों?

अमेरिका का कहना है कि यह समझौता दोषपूर्ण है क्योंकि एक तरफ ईरान को करोड़ों डॉलर मिलते हैं तो दूसरी ओर वह हमास और हैजबुल्ला जैसे आतंकी संगठनों को सहायता देना जारी किये हुए है. साथ ही यह समझौता ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल बनाने से रोक नहीं पा रहा है. अमेरिका का कहना है कि ईरान अपने आणविक कार्यक्रम के बारे में हमेशा झूठ बोलता आया है.

IAEA क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency – IAEA) आणविक विषयों के लिए विश्व की सबसे प्रधान एजेंसी है. इसकी स्थापना 1957 में संयुक्त राष्ट्र के एक अवयव के रूप में परमाणु के शान्तिपूर्ण प्रयोग पर बल देने के लिए की गई थी.
  • इसका उद्देश्य है परमाणु तकनीकों के सुरक्षित, निरापद (secure) एवं शान्तिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना.
  • यह एजेंसी परमाणु के सैनिक उपयोग पर रोक लगाती है.
  • IAEA संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद् के प्रति उत्तरदायी होती है.
  • इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियेना शहर में है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Account Aggregator Network

संदर्भ 

पिछले सप्ताह भारत ने वित्तीय डेटा-साझा प्रणाली – अकाउंट एग्रीगेटर (एए) नेटवर्क का अनावरण किया जो निवेश और ऋण के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है. यह भारत में ओपन बैंकिंग की व्यवस्था प्रारम्भ करने की दिशा में पहला कदम है, जो लाखों ग्राहकों को सुरक्षित और कुशल तरीके से अपने वित्तीय डेटा तक डिजिटल रूप में पहुँचने और इसे अन्य संस्थानों के साथ साझा करने के लिए सशक्त बनाता है.

अकाउंट एग्रीगेटर (एए)

अकाउंट एग्रीगेटर (एए) रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा विनियमित एक ऐसी इकाई है, (एनबीएफसी-एए लाइसेंस के साथ) जो किसी व्यक्ति को सुरक्षित और डिजिटल रूप में एक वित्तीय संस्थान से प्राप्त अपने खाते की जानकारी को एए में शामिल किसी अन्य विनियमित वित्तीय संस्थान के साथ साझा करने में सहायता करती है. व्यक्ति की सहमति के बिना डेटा को साझा नहीं किया जा सकता है. ऐसी सुविधा देने वाले कई अकाउंट एग्रीगेटर होंगे और उपभोक्ता जिसे चाहे उसे चुन सकता है.

खाताधारकों को इसके उपयोग के लिए सक्षम बनाने के लिए एक बैंक को केवल अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क से जुड़ने की जरूरत है. आठ बैंक पहले से ही सहमति के आधार पर डेटा साझा कर रहे हैं. चार बैंक यह सुविधा शुरू कर चुके हैं, (एक्सिस, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और इंडसइंड बैंक) और चार शीघ्र ही प्रारम्भ करने वाले हैं (भारतीय स्टेट बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और फेडरल बैंक). हालाँकि यह पूरी तरह खाताधारक की इच्छा एवं विवेक पर निर्भर करता कि वह अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क से खाते को जोड़ना चाहता है या नहीं.

सुरक्षा उपाय

अकाउंट एग्रीगेटर डेटा देख नहीं सकते हैं; मात्र व्यक्ति के निर्देश और सहमति के आधार पर वे इसे एक वित्तीय संस्थान से दूसरे वित्तीय संस्थान में भेज सकते हैं. नाम के विपरीत, वे आपके डेटा को ‘एकत्रित’ नहीं कर सकते. अकाउंट एग्रीगेटर प्रौद्योगिकी कंपनियों की तरह नहीं हैं, जो आपके डेटा को एकत्रित करती हैं और आपके विस्तृत व्यक्तिगत विवरण (प्रोफाइल) का निर्माण करती हैं.

अकाउंट एग्रीगेटर डेटा को कूटभाषा (एन्क्रिप्ट) में साझा करता है और केवल प्राप्तकर्ता द्वारा इसे समझा (डिक्रिप्ट) जा सकता है. एक छोर से दूसरे छोर तक कूटभाषा और “डिजिटल हस्ताक्षर” जैसी तकनीक का उपयोग, कागजी दस्तावेजों को साझा करने की तुलना में, इस साझा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाता है.

जरूरत क्‍यों?

भारत की वित्तीय प्रणाली में उपभोक्ताओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे बैंक खाता विवरण की भौतिक रूप से हस्ताक्षरित और स्कैन की गई प्रतियों को साझा करना, दस्तावेजों को नोटरी से हस्ताक्षर करवाने या मुहर लगाने के लिए इधर-उधर परेशान होना या किसी तीसरे पक्ष को अपना वित्तीय विवरण देने के क्रम में व्यक्तिगत उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड साझा करना. अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क इन सभी समस्याओं के बदले एक सरल, मोबाइल-आधारित और सुरक्षित तरीके से डिजिटल डेटा तक पहुँचने व साझा करने की प्रक्रिया की पेशकश करता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security; Technology missions; economics of animal-rearing.

Topic : Declaration of Economic Emergency in Sri Lanka

संदर्भ 

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (Cabinet Committee on Economic Affairs – CCEA) ने ‘रबी विपणन सीजन’ (Rabi Marketing Season) 2022-23 के लिये सभी रबी फसलों के ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (Minimum support price – MSP) में बढ़ोतरी करने को स्वीकृति दे दी है.

इससे किसानों को उनकी फसलों के लिए अधिकतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होंगे और वे विभिन्न प्रकार की फसलों को बोने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे.

न्यूनतम समर्थन मूल्य  (Minimum Support Price)

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिस पर सरकार किसानों द्वारा बेचे जाने वाले अनाज की पूरी मात्रा क्रय करने के लिये तैयार रहती है. जब बाज़ार में कृषि उत्पादों का मूल्य गिर रहा हो, तब सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पादों को क्रय कर उनके हितों की रक्षा करती है.
  • सरल भाषा में, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार के द्वारा तय किया गया वह मूल्य है जिसपर कृषक अपनी फसल सरकार को बेच सकते हैं.
  • जब बाजार की कीमतें सरकार द्वारा तय किये गए न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ जाती हैं तो सरकार की खरीद-एजेंसियाँ किसानों के ​​फसल को खरीदने के लिए आगे आ जाती हैं.
  • जिन फसलों की आपूर्ति घट जाती है, उन फसलों को आगामी मौसम में लगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने हेतु MSP का सहारा लिया जाता है.
  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समितिबुवाई के हर मौसम की शुरुआत में विभिन्न फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है.
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices – CACP) की अनुशंसा पर लिया जाता है.
  • CACP अपनी अनुशंसा माँग और आपूर्ति, उत्पादन की लागत एवं कीमत की रुझान के आधार पर करता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

न्यूनतम विक्रय मूल्य

न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) वह दर है जिसके नीचे मिलों को (mills) खुले बाज़ार में चीनी को थोक व्यापारी एवं थोक उपभोक्ता जैसे पेय और बिस्किट निर्माताओं को बेचने की अनुमति नहीं है.

लघु वन उपज (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना का कार्यान्वयन

  • इस योजना में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वन उत्पादों के क्रय का दायित्व राज्यों द्वारा नामित एजेंसियों के ऊपर होता है.
  • ये एजेंसियाँ बाजार का मूल्य बाजार संवादाताओं के माध्यम से पता लगाती हैं.
  • इस योजना में शीतभंडार, गोदाम आदि अवसंरचनाओं के साथ-साथ उत्पादों को अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाने की भी व्यवस्था की जाती है.
  • इस योजना के कार्यान्वयन और अनुश्रवण के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय नाभिक मंत्रालय (nodal ministry) होता है. यही मंत्रालय TRIFED की तकनीकी सहायता से न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण करता है.

भावान्तर भुगतान योजना 

मध्य प्रदेश में भावान्तर भुगतान योजना चल रही है जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की राशि किसानों को दी जाती है.


Prelims Vishesh

Qeqertaq Avannarleq :-

Qeqertaq Avannarleq

  • यह एक छोटा और निर्जन द्वीप है, जो अभी तक अज्ञात थाम और इसे हाल ही में ‘ग्रीनलैंड’ के तट के निकट खोजा गया है.
  • 60×30 मीटर क्षेत्रफल और समुद्र तल से तीन मीटर ऊंचाई वाला यह द्वीप, अब पृथ्वी पर स्थलीय क्षेत्र का सबसे उत्तर में स्थित भू-भाग बन गया है.
  • इससे पहले, ऊदाक़ (Oodaaq) नामक स्थान को पृथ्वी के सबसे उत्तरी इलाके के रूप में चिह्नित किया गया था.
  • यह खोज, आर्कटिक देशों, अमेरिका, रूस, कनाडा, डेनमार्क और नॉर्वे के बीच उत्तरी ध्रुव और आसपास के समुद्री क्षेत्र, मछली पकड़ने के अधिकार और जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघलने से खुलने वाले शिपिंग मार्गों पर नियंत्रण के लिए संभावित संघर्ष की पृष्ठभूमि में हुई है.

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