Sansar डेली करंट अफेयर्स, 09 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 09 November 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues The Freedom Struggle – its various stages and important contributors /contributions from different parts of the country. Post-independence consolidation and reorganization within the country.

Topic : Maulana Abdul Kalam Azad

संदर्भ

हाल ही में प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती मनाई गई. उल्लेखनीय है भारत में मौलाना अबुल कलाम के जन्म दिवस को “राष्ट्रीय शिक्षा दिवस” के रूप में मनाया जाता है.

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

  • साल 1912 में आज़ाद ने अल-हिलाल नाम की एक पत्रिका निकालनी शुरू की. यह पत्रिका अपने क्रांतिकारी लेखों की वजह से काफी चर्चाओं में रही. ब्रिटिश सरकार ने दो साल के भीतर ही इस पत्रिका की सुरक्षा राशि ज़ब्त कर दी और भारी जुर्माना लगाकर उसे बंद करवा दिया.
  • साल 1923 में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा, ”आज अगर कोई देवी स्वर्ग से उतरकर भी यह कहे कि वह हमें हिंदू-मुस्लिम एकता की कीमत पर 24 घंटे के भीतर स्वतंत्रता दे देगी, तो मैं ऐसी स्वतंत्रता को त्यागना बेहतर समझूंगा. स्वतंत्रता मिलने में होने वाली देरी से हमें थोड़ा नुकसान तो ज़रूर होगा लेकिन अगर हमारी एकता टूट गई तो इससे पूरी मानवता का नुकसान होगा.”
  • हिंदू-मुस्लिम एकता के पैरोकार मौलाना आज़ाद कभी भी मुस्लिम लीग की द्विराष्ट्रवादी सिद्धांत के समर्थक नहीं बने, उन्होंने खुलकर इसका विरोध किया.
  • 1940 के रामगढ़ अधिवेशन में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद में पुनः कांग्रेस के अध्यक्ष पद का निर्वहन किया एवं इसी अधिवेशन में ‘रामगढ़ रिजोल्यूशन’ पारित किया गया.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests

Topic : RCEP

संदर्भ

हाल ही में चीन के नेतृत्व में दस आसियान देशों और आस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया तथा न्यूजीलैंड ने भारत के बिना ही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) पर हस्ताक्षर कर लिए है. भारत के पास भी इसमें शामिल का अवसर था लेकिन भारत की शर्तों को न मानने के कारण भारत ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था. हालांकि यदि भारत RCEP में शामिल होना चाहता है तो भारत इसमें शामिल होने के लिए फिर बातचीत शुरू कर सकता है.

RCEP से सम्बंधित कुछ तथ्य

  • RCEP आसियान के दस सदस्य देशों (ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) तथा आसियान से सम्बद्ध अन्य छ: देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड) के लिए प्रस्तावित है.
  • RCEP के लिए वार्ताएँ कम्बोडिया में नवम्बर 2012 में आयोजित आसियान के शिखर सम्मलेन में औपचारिक रूप आरम्भ की गई थीं.
  • RCEP का लक्ष्य है अधिकांश शुल्कों और गैर-शुल्क अड़चनों को समाप्त कर वस्तु-व्यापार को बढ़ावा देना. अनुमान है कि ऐसा करने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युक्त उत्पादनों के अधिक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे. इसका एक उद्देश्य निवेश से सम्बंधित मानदंडों को उदार बनाना तथा सेवा व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी है.
  • हस्ताक्षरित हो जाने पर RCEP विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क व्यापार हो जायेगा. विदित हो कि इस सम्बद्ध 16 देशों की GDP $50 trillion की है और इन देशों में साढ़े तीन अरब लोग निवास करते हैं.
  • भारत की GDP-PPP $9.5 trillion की है और जनसंख्या एक अरब तीस लाख है. दूसरी ओर चीन की GDP-PPP $23.2 trillion की है और जनसंख्या एक अरब 40 लाख है.

इसमें चीन की इतनी रूचि क्यों हैं?

चीन वस्तु-निर्यात के मामले में विश्व का अग्रणी देश है. इस बात का लाभ उठाते हुए वह चुपचाप अधिकांश व्यापारिक वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की चेष्टा में लगा रहता है और इसके लिए कई देशों पर दबाव बनाता रहता है. उसका बस चले तो व्यापार की 92% वस्तुओं पर से शुल्क समाप्त ही हो जाए. इसलिए चीन RCEP वार्ता-प्रक्रिया में तेजी लाने से और शीघ्र से शीघ्र समझौते को साकार रूप देने में लगा हुआ है.

RCEP के माध्यम से मुक्त एशिया-प्रशांत व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Asia-Pacific – FTAAP) स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें 21 देश होंगे. इन देशों में एशिया-प्रशांत देशों के अतिरिक्त अमेरिका और चीन भी हैं, किन्तु भारत नहीं है.

RCEP को लेकर भारत की चिंताएँ

यद्यपि RCEP पर सहमति देने के लिए भारत पर बहुत दबाव पड़ रहा है, परन्तु अभी तक भारत इससे बच रहा है. इसके कारण निम्नलिखित हैं –

  • ASEAN आयात शुल्कों को समाप्त करना चाह रहा है जो भारत के लिए लाभप्रद नहीं होगा क्योंकि इसका एक सीधा अर्थ होगा की चीनी माल बिना शुल्क के भारत में आने लगेंगे. यहाँ के उद्योग को डर है कि ऐसा करने से घरेलू बाजार में गिरावट आएगी क्योंकि चीनी माल अधिक सस्ते पड़ेंगे.
  • भारत का यह भी जोर रहा है कि RCEP समझौते में सेवाओं, जैसे – पेशेवरों को आने-जाने के लिए दी जाने वाली कामकाजी VISA, को भी उचित स्थान दिया जाए. अभी तक सेवाओं से सम्बंधित प्रस्ताव निराशाजनक ही रहे हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई भी सदस्य देश सार्थक योगदान करने के लिए तैयार नहीं होगा.

RCEP में भारत की भागीदारी से क्या भारतीय किसान सच में प्रभावित हो जाएँगे?

हाल ही में कई किसान संगठनों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी, रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप) को लेकर अपनी नाराज़गी प्रकट की हैं. ये संगठन कह रहे हैं कि यह RCEP समझौता कृषि पर आधारित लोगों की आजीविका को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा. विशेषकर, इस समझौते का सबसे बुरा प्रभाव भारतीय दुग्ध उत्पादन क्षेत्र पर पड़ेगा.

इसमें चीन की इतनी रूचि क्यों हैं?

चीन वस्तु-निर्यात के मामले में विश्व का अग्रणी देश है. इस बात का लाभ उठाते हुए वह चुपचाप अधिकांश व्यापारिक वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की चेष्टा में लगा रहता है और इसके लिए कई देशों पर दबाव बनाता रहता है. उसका बस चले तो व्यापार की 92% वस्तुओं पर से शुल्क समाप्त ही हो जाए. इसलिए चीन RCEP वार्ता-प्रक्रिया में तेजी लाने से और शीघ्र से शीघ्र समझौते को साकार रूप देने में लगा हुआ है.

RCEP के माध्यम से मुक्त एशिया-प्रशांत व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Asia-Pacific – FTAAP) स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें 21 देश होंगे. इन देशों में एशिया-प्रशांत देशों के अतिरिक्त अमेरिका और चीन भी हैं, किन्तु भारत नहीं है.

RCEP को लेकर भारत की चिंताएँ

यद्यपि RCEP पर सहमति देने के लिए भारत पर बहुत दबाव पड़ रहा है, परन्तु अभी तक भारत इससे बच रहा है. इसके कारण निम्नलिखित हैं –

  • ASEANआयात शुल्कों को समाप्त करना चाह रहा है जो भारत के लिए लाभप्रद नहीं होगा क्योंकि इसका एक सीधा अर्थ होगा की चीनी माल बिना शुल्क के भारत में आने लगेंगे. यहाँ के उद्योग को डर है कि ऐसा करने से घरेलू बाजार में गिरावट आएगी क्योंकि चीनी माल अधिक सस्ते पड़ेंगे.
  • भारत का यह भी जोर रहा है कि RCEP समझौते में सेवाओं, जैसे – पेशेवरों को आने-जाने के लिए दी जाने वाली कामकाजी VISA, को भी उचित स्थान दिया जाए. अभी तक सेवाओं से सम्बंधित प्रस्ताव निराशाजनक ही रहे हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई भी सदस्य देश सार्थक योगदान करने के लिए तैयार नहीं होगा.

RCEP में भारत की भागीदारी से क्या भारतीय किसान सच में प्रभावित हो जाएँगे?

हाल ही में कई किसान संगठनों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी, रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप) को लेकर अपनी नाराज़गी प्रकट की हैं. ये संगठन कह रहे हैं कि यह RCEP समझौता कृषि पर आधारित लोगों की आजीविका को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा. विशेषकर, इस समझौते का सबसे बुरा प्रभाव भारतीय दुग्ध उत्पादन क्षेत्र पर पड़ेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability.

Topic : Vivad Se Vishwas

संदर्भ

हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विवाद से विश्वास (Vivad Se Vishwas) योजना को सफल बनाने के लिए बड़े कॉर्पोरेट्स और शीर्ष कर पेशेवरों (tax professionals) के साथ बातचीत की.

मुख्य तथ्य

  • भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को बड़े कॉर्पोरेट्स और शीर्ष कर पेशेवरों ने विवाद से विश्वास योजना के संदर्भ में कई सुझाव दिये.
  • बड़े कॉर्पोरेट्स और शीर्ष कर पेशेवरों ने सुझाव दिया कि “विवाद से विश्वास योजना की कट-ऑफ तारीख (cut-off date) को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.इस योजना के तहत विलय वाली कंपनियों के कर विवादों को निपटाने (tax disputes of merged companies) और मूल्य निर्धारण मामलों को स्थानांतरित करने (transfer pricing matters) के बारे में रुख स्पष्ट करने की आवश्यकता है.
  • बड़े कॉर्पोरेट्स और शीर्ष कर पेशेवरों ने यह भी कहा कि यदि विवाद से विश्वास योजना को ‘मुद्दा वार’ (issue wise) क्रियान्वित किया जाता है तो यह बेहतर परिणाम वाली साबित होगी. एक करदाता को योजना के तहत कुछ विवादों को चुनने और निपटाने की अनुमति दी जानी चाहिए.

विवाद से विश्वास योजना के मुख्य तथ्य

  • यह एक माफ़ी योजना है जो उन विवादों से सम्बंधित है जो आय कर अपीलीय ट्रिब्यूनल (Income Tax Appellate Tribunals – ITAT), उच्च न्यायालयों, सर्वोच्च न्यायालय तथा अंतर्राष्ट्रीय पंचाटों में लंबित चले आ रहे हैं.
  • विवाद से विश्वास योजना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मार्च 31 तक अपने लंबित करों का भुगतान कर देता है तो उसको पूर्ण रूप से ब्याज और दंड से मुक्ति मिल जायेगी.
  • इस योजना का उद्देश्य उन करदाताओं को लाभ पहुँचाना है जिनके मामले अनेक मंचों पर फँसे पड़े हैं.
  • यदि करदाता मार्च 31 तक प्रत्यक्ष करों का भुगतान नहीं कर पायेगा तो उसको फिर जून 30 तक का समय दिया जाएगा. परन्तु इसके लिए उसे 10% अधिक कर देना होगा.
  • यदि मात्र ब्याज और दंड पर विवाद है तो करदाता को विवादित राशि का 25% मार्च 31 तक भुगतान करना पड़ेगा और उसके बाद 30% का भुगतान करना होगा.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability.

Topic : Giri Vikasam Scheme

संदर्भ

हाल ही में विशेषज्ञों द्वारा गिरि विकासम योजना के लचर कार्यान्वयन पर योजना की सफलता के सन्दर्भ में प्रश्न उठाये गए हैं. विदित हो कि कोविड-19 महामारी और भूवैज्ञानिकों (geologists) की कमी ने तेलंगाना राज्य सरकार की महत्त्वाकांक्षी गिरि विकासम योजना (Giri Vikasam scheme) के कार्यान्वयन में बड़ी बाधा उत्पन्न की है.

प्रमुख बिन्दु

  • कोविड-19 महामारी ने करीब हर क्षेत्र को प्रभावित किया है. इस महामारी और इसके कारण लगाए गए राष्ट्रव्यापी लाकडाउन ने गिरि विकासम योजना के क्रियान्वयन में बाधा पहुँचाई है.
  • इसके साथ ही इस योजना के उचित तरीके से क्रियान्वित हेतु तेलंगाना सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में भूवैज्ञानिकों (geologists) को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.
  • उल्लेखनीय है कि ‘गिरि विकासम योजना’ का आवश्यक घटक बोरवेल या ट्यूबवेल (borewell or tubewell) लगाना है. बोरवेल या ट्यूबवेल लगाने के लिए हाइड्रो-जियोलॉजिकल सर्वेक्षण (hydro- geological survey) के द्वारा सही जगह की पहचान की जाती है जिसके लिए भूवैज्ञानिकों की जरूरत होती है.
  • इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा गिरि विकासम योजना हेतु वित्त की उपलब्धता भी सही समय पर सुनिश्चित नहीं कर पा रही है.

गिरि विकासम योजना (Giri Vikasam scheme) के बारे में

  • गिरि विकासम योजना, तेलंगाना राज्य सरकार की एक प्रमुख योजना है जो वहाँ के अनुसूचित जनजातियों के भूमि विकास से सम्बंधित है.
  • इस योजना को तेलंगाना राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है.

गिरि विकासम योजना के घटक

  • बंजर भूमि को खेती योग्य भूमि में परिवर्तित करना.
  • आदिवासी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना.
  • मोटराइज्ड पंप स्थापित करना.
  • सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और बोरवेल की ड्रिलिंग.
  • आदिवासी समुदाय में गिरि विकासम योजना के बारे में जागरूकता फैलाना.

उद्देश्य

  • गिरि विकासम योजना के माध्यम से सतत कृषि विकास को प्रोत्साहन दिया जा रहा है.
  • इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत आदिवासी किसानों की भूमि को कृषि भूमि में परिवर्तित किया जा रहा है.
  • यह योजना आदिवासी किसानों की आय में सुधार करने हेतु एक कदम है.

Prelims Vishesh

Supply Chain Resilience Initiative (SCRI) :-

  • SCRI वस्तुतः: भारत और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार के लिए एक त्रिपक्षीय दृष्टिकोण के रूप में जापान द्वारा प्रस्तावित एक पहल है.
  • इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific region) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करना और साझेदार देशों के साथ पारस्परिक रूप से पूरक संबंधों को बढ़ावा देना है.
  • ऑस्ट्रेलिया, जापान व भारत 522 के एक भाग के रूप में, व्यापार और निवेश संवर्धन के लिए व्यापार एवं निवेश बाधाओं के निवारणार्थ एक त्रिपक्षीय ढांचा स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत हैं.

Rising GST dues for States :-

  • पंद्रहवें वित्त आयोग (Fifteenth Finance Commission) के अनुसार, राज्यों को प्रतिपूर्ति हेतु प्रयुक्त उपकर संग्रह और उनके प्रतिपूर्ति बकाये के मध्य अंतराल वर्ष 2022 तक बढ़ सकता है.
  • इस वर्ष राज्यों के राजस्व में 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट होने की संभावना प्रकट की गई है, जिसमें GST उपकर संग्रह के केवल 65,000 करोड़ रुपये तक ही होने की संभावना है.
  • इससे पूर्व, केंद्र ने राज्यों को धनाभाव की प्रतिपूर्ति हेतु बाजार से उधार लेने की अनुमति प्रदान की थी. यह अनुमति इस आश्वासन के साथ प्रदान की गई थी कि ऋण को भावी GST उपकर संग्रह से सेवित और चुकाया जाएगा.

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