Sansar डेली करंट अफेयर्स, 09 June 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 09 June 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Monsoon session of Parliament likely to begin in July

संदर्भ

संसद का मानसून सत्र जुलाई में तय समय पर प्रारम्भ होने की आशा है.

संसद के बजट सत्र, 2021, जिसकी शुरुआत 29 जनवरी 2021 (शुक्रवार) को हुई थी, को  25 मार्च 2021 (गुरुवार) को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया था और संवैधानिक मानदंडों के अंतर्गत, अगला सत्र छह महीने की अवधि के भीतर आयोजित किया जाना अनिवार्य होता है. यह अवधि 14 सितंबर को समाप्त हो रही है.

पृष्ठभूमि

पिछले साल मार्च में महामारी शुरू होने के बाद से, संसद के तीन सत्रों की अवधि में कटौती की गई है. इनमें से पहला सत्र वर्ष 2020 का बजट सत्र था. पिछले साल का शीतकालीन सत्र का समय भी कम किया गया, और मानसून सत्र, जो आमतौर पर जुलाई में शुरू होता है, पिछले साल सितंबर में शुरू हुआ था.

संसद के सत्र (Parliament Sessions)

  • संसद के सत्र के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 85 में प्रावधान किया गया है.
  • संसद के किसी सत्र को बुलाने की शक्ति सरकार के पास है. इस पर निर्णय संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा लिया जाता है जिसे राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप दिया जाता है.
  • भारत में कोई निश्चित संसदीय कैलेंडर नहीं है. संसद के एक वर्ष में तीन सत्र होते हैं.
  • सबसे लंबा, बजट सत्र (पहला सत्र) जनवरी के अंत में शुरू होता है और अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह तक समाप्त हो जाता है. इस सत्र में एक अवकाश होता है ताकि संसदीय समितियाँ बजटीय प्रस्तावों पर चर्चा कर सकें.
  • दूसरा सत्र तीन सप्ताह का मानसून सत्र है, जो आमतौर पर जुलाई माह में शुरू होता है और अगस्त में खत्म होता है.
  • शीतकालीन सत्र यानी तीसरे सत्र का आयोजन नवंबर से दिसंबर तक किया जाता है.
नोट
 

बजट अधिवेशन (फरवरी-मई), मानसून अधिवेशन (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन अधिवेशन (नवंबर-दिसंबर). किंतु, राज्यसभा के मामले में, बजट के अधिवेशन को दो अधिवेशनों में विभाजित कर दिया जाता है. इन दो अधिवेशनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है. इस प्रकार राज्यसभा के एक वर्ष में चार अधिवेशन होते हैं.

संसद सत्र आहूत करना (Summoning of Parliament)

  • सत्र को आहूत करने के लियेराष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन को समय-समय पर सम्मन जारी करता है, परंतु संसद के दोनों सत्रों के मध्य अधिकतम अंतराल 6 माह से अधिक का नहीं होना चाहिये. अर्थात् संसद को कम-से-कम वर्ष में दो बार मिलना चाहिये.

स्थगन (Adjournment)

  • संसद की बैठक कोस्थगन या अनिश्चितकाल के लिये स्थगन या सत्रवसान या विघटन (लोकसभा के मामले में) द्वारा समाप्त किया जा सकता है. स्थगन द्वारा बैठक को कुछ निश्चित समय, जो कुछ घंटे, दिन या सप्ताह हो सकता है, के लिये निलंबित किया जा सकता है.

सत्रावसान (Prorogation)

  • सत्रावसान द्वारा न केवल बैठक बल्कि सदन के सत्र को भी समाप्त किया जाता है.  सत्रावसान की कार्रवाई राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. सत्रावसान और फिर से इकट्ठे होने (Reassembly) तक के समय को अवकाश कहा जाता है. सत्रावसान का आशय सत्र का समाप्त होना है, न कि विघटन (लोकसभा के मामले में क्योंकि राज्यसभा भंग नहीं होती है).

कोरम (Quorum)

  • कोरम या गणपूर्ति सदस्यों की न्यूनतम संख्या है, जिनकी उपस्थिति के चलते सदन का कार्य संपादित किया जाता है. यह प्रत्येक सदन में पीठासीन अधिकारी समेत कुल सदस्यों का दसवाँ हिस्सा होता है. अर्थात्  किसी कार्य को करने के लिये लोकसभा में कम-से-कम 55 सदस्य तथा राज्यसभा में कम-से-कम 25 सदस्यों का होना जरूरी है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Functions and responsibilities of the Union and the States, issues and challenges pertaining to the federal structure, devolution of powers and finances up to local levels and challenges therein.

Topic : Rengma Nagas demand autonomous district council

संदर्भ

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कार्बी-आंगलोंग स्वायत्त परिषद् (Karbi Anglong Autonomous Council- KAAC) को एक ‘क्षेत्रीय परिषद्’ (Territorial Council) में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है, इसी बीच असम के रेंगमा नागाओं (Rengma Nagas) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्र एक स्वायत्त जिला परिषद् (Autonomous District Council) का गठन करने की मांग की है.

संबंधित प्रकरण

असम सरकार, कार्बी-आंगलोंग क्षेत्र में स्थित प्रभावी उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौता करने की कगार पर है, इसी बीच NSCN-IM नामक नागा संगठन ने कहा है, कि रेंगमा नागाओं को पीड़ित करने वाला कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा.

  1. इस सारे प्रकरण के केंद्र में कार्बी आंगलोंग क्षेत्र है, जिसे पहले ‘रेंगमा हिल्स’ (Rengma Hills)के नाम से जाना जाता था. रेंगमा हिल्स को निहित स्वार्थों के चलते बाहरी लोगों के आक्रामक अंतः प्रवाह का शिकार बनाया जाता रहा है.
  2. नागालैंड राज्य के निर्माण के समय वर्ष 1963 में, रेंगमा हिल्स को असम और नागालैंड के बीच विभाजित कर दिया गया था.

स्वायत्त जिला परिषद् क्या हैं?

संविधान की छठी अनुसूची के अनुसार, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में जनजातीय क्षेत्र हैं जो तकनीकी रूप से अनुसूचित क्षेत्रों से अलग होते हैं. यद्यपि ये क्षेत्र राज्य के कार्यकारी अधिकार क्षेत्र में आते हैं, परन्तु कतिपय विधायी एवं न्यायिक शक्तियों का प्रयोग करने के लिए इनमें जिला परिषदों एवं क्षेत्रीय परिषदों का प्रावधान किया गया है. प्रत्येक जिला एक स्वायत्त जिला होता है और राज्यपाल अधिसूचना निर्गत कर के इन जनजातीय क्षेत्रों की सीमाओं में परिवर्तन कर सकता है अथवा उन्हें विभाजित कर सकता है.

अपनी अधिसूचना के माध्यम से राज्यपाल निम्नलिखित काम कर सकता है –

  1. कोई भी क्षेत्र सम्मिलित कर सकता है
  2. कोई भी क्षेत्र को भारत कर सकता है
  3. नया स्वायत्त जिला बना सकता है
  4. स्वायत्त जिले का क्षेत्र बढ़ा सकता है
  5. स्वायत्त जिले का क्षेत्र घटा सकता है
  6. स्वायत्त जिले का नाम बदल सकता है
  7. किसी स्वायत्त जिले की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है

जिला परिषदों एवं क्षेत्रीय परिषदों की बनावट

  1. जिला परिषद् में अधिक से अधिक 30 सदस्य होंगे जिनमें अधिकतम चार व्यक्ति को राज्यपाल नामित करेगा और शेष वयस्क मताधिकार के आधार पर चुने जाएँगे.
  2. स्वायत्त क्षेत्र के रूप में सृजित प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक अलग क्षेत्रीय परिषद् होगी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : Ethanol Blended Petrol Programme

संदर्भ

सरकार ने वर्ष 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल सम्मिश्रण (90 प्रतिशत डीजल के साथ 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण) का लक्ष्य निर्धारित किया है. 20 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य पहले वर्ष 2030 तक प्राप्त किया जाना था, जिसे बाद में वर्ष 2025 तक और अब वर्ष 2023 तक हासिल करना है.

निर्णय का सकारात्मक प्रभाव

  • यह निर्णय निम्न उत्सर्जन के कारण पेरिस जलवायु सम्मेलन के लक्ष्यों को पूर्ण करने में मदद करेगा. ज्ञातव्य है कि एथनॉल अणु में ऑक्सीजन की उपस्थिति ईंधन के अधिक पूर्ण दहन में सहायक होती है.
  • सरकार के इस निर्णय से अनेक कार्यों के लिए गन्ने की अधिक खपत में कमी आएगी.
  • सम्बंधित कारखाने किसानों के बकाया गन्ना मूल्य को चुका सकेंगे और एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के लिए अधिक एथनॉल की उपलब्धता बढ़ेगी.
  • सभी डिस्टिलरी इस योजना का लाभ उठा सकेंगी और अधिक से अधिक संख्या में डिस्टिलरी ईबीपी कार्यक्रम हेतु एथनॉल की आपूर्ति करेंगी.
  • एथनॉल आपूर्तिकर्ताओं को समर्थन मिलने से गन्ना किसानों के बकाये में कमी आएगी और इस प्रक्रिया में गन्ना किसानों की मुश्किलों में कमी आएगी.
  • B-Heavy शीरा/आंशिक गन्ना रस तथ 100% गन्ना रस से तैयार एथनॉल की खरीद के लिए ऊंचे मूल्य पेश किए जाने के कारण ईबीपी कार्यक्रम के लिए एथनॉल की उपलब्धता पहली बार बढ़ेगी.
  • यह महंगे तेल आयात में कटौती करने में भी सहायता करेगा.

लाभ

पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के कई लाभ हैं –

  • इससे आयात पर निर्भरता में कमी आएगी.
  • कृषि क्षेत्र को समर्थन मिलेगा
  • पर्यावरण अनुकूल ईंधन उपलब्ध होगा
  • प्रदूषण का स्तर कम होगा.
  • किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी.

एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol : BSP) कार्यक्रम

  • एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को कार्यान्वित करने के लिए भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों के द्वारा होने वालीएथनॉल की खरीद की प्रक्रिया निर्धारित की है.
  • इस योजना के तहत एथनॉल की खरीद अच्छे दामों पर की जायेगी जिससे सम्बंधित मिल गन्ना किसानों के बकायों का भुगतान करने में सक्षम हो जायेंगे.
  • C heavy खांड़ (गुड़ का एक रूप) से बनने वाले एथनॉल का दाम ऊँचा होने तथा B heavy खांड़ एवं गन्ने के रस से उत्पन्न एथनॉल की खरीद की सुविधा के कारण EBP कार्यक्रम के तहत एथेनॉल की उपलब्धता बहुत बढ़ने की संभावना है.
  • पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के कई लाभ हैं.
  • इससे बाहर से पेट्रोल मंगाने की आवश्यकता में कमी तो आएगी ही, साथ ही इससे किसानों को आर्थिक लाभ भी होगा.
  • यह ईंधन पर्यावरण की दृष्टि से भी अनुकूल है क्योंकि इससे कम प्रदूषण होता है.

इथेनॉल के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम

  • इथेनॉल उत्पादन के लिए बी श्रेणी के भारी शीरे में बदलाव किया गया है तथा गन्ने के रस, चीनी और चाशनी से इथेनॉल उत्पादन की अनुमति प्रदान की गई है.
  • EBP कार्यक्रम के लिए इथेनॉल पर माल और सेवा कर (जीएसटी) में 18% से 5% की कमी की गई है.
  • इथेनॉल उत्पादन क्षमता में संवर्धन और वृद्धि के लिए ब्याज अनुदान योजना (Interest Subvention Scheme) संचालित की गई है.
  • इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के आधार पर विभेदक इथेनॉल मूल्य प्रणाली आरंभ की गई है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation and pollution related issues.

Topic : ‘Sea Snot’ outbreak in Turkey

संदर्भ

काला सागर को एजियन सागर से जोड़ने वाले तुर्की के मरमारा सागर में ‘सी स्‍नॉट’ (Sea Snot) का सबसे बड़ा प्रकोप देखा जा रहा है. इस चिपचिपे पदार्थ को निकटवर्ती ‘काले सागर (ब्लैक सी) और एजियन सागर में भी देखा गया है.

काला सागर

काला सागर एक महाद्वीपीय समुद्र है जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप, कॉकेशस और अनातोलिया के प्रायद्वीप (तुर्की) से घिरा है. अटलांटिक महासागर में यह भूमध्य और एजियन सागरों और विभिन्न जलडमरूमध्यों के माध्यम से जुड़ा हुआ है. इसमें बोस्पोरस की जलसंयोगी मारमरा सागर का नाम उल्लेखनीय है.

एजियन सागर

ईजियन सागरभूमध्य सागर का एक विस्तार है. यह दक्षिणी बाल्कान क्षेत्र और एनाटोलिया प्रायद्वीप के बीच में स्थित है, इस प्रकार ये यूनान और तुर्की के मध्य स्थित है. यह भूमध्य सागर की एक भुजा है जिसके पश्चिम में युनान और पूर्व में टर्की हैं. यह डार्डेनेल्स और बॉसपोरस जल-संयोजकों द्वारा मारमारा और काला सागर से जुड़ा है.

black sea

सी स्‍नॉट और उसका गठन

  • यह समुद्री श्लेष्म (Marine Mucilage) है जो शैवालों में पोषक तत्त्वों की अति-प्रचुरता हो जाने पर निर्मित होती है.
  • शैवालों में पोषक तत्त्वों की अति-प्रचुरता ग्लोबल वार्मिंग, जल प्रदूषण आदि के कारण गर्म मौसम होने पर होती है.
  • यह एक चिपचिपा, भूरा और झागदार पदार्थ जैसा दिखता है.

चिंताएँ

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिये खतरा:

  1. इससे बड़े पैमाने पर जलीय जीवों जैसे- मछली, कोरल, स्पंज आदि मर गये हैं.
  2. यह अब समुद्र की सतह के साथ-साथ सतह से 80-100 फीट नीचे भी विस्तृत हो गया है जो और भी नीचे तक पहुँच सकता है तथा समुद्र तल को ढक सकता है.

मछुआरों की आजीविका प्रभावित:

  1. मछुआरों के जाल में यह कीचड़ जमा हो जाता है, जिससे इनके जाल भारी होकर टूट जाते हैं.
  2. इसके अतिरिक्त कीचड़ वाला जाल मछलियों को दिखाई देता है जिससे वे दूर भागा जाती हैं.

पानी से जन्म लेने वाली बीमारियाँ:

यह इस्तांबुल जैसे शहरों में हैजा जैसी जल जनित बीमारियों के प्रकोप का कारण बन सकता है.

इसके प्रसार को रोकने हेतु तुर्की द्वारा उठाए जा रहे कदम

  1. तुर्की ने संपूर्ण मरमरा सागर को संरक्षित क्षेत्र घोषित करने का निर्णय लिया है.
  2. तटीय शहरों और जहाजों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और अपशिष्ट जल-उपचार में सुधार के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.
  3. आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जा रही है.

Prelims Vishesh

Pran Vayu Devta Pension Scheme- PVDPS :-

  1. हरियाणा सरकार द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “प्राण वायु देवता पेंशन योजना” (Pran Vayu Devta Pension Scheme- PVDPS) और ऑक्सी वन (ऑक्सीजन वन) योजनाओं की घोषणा की गई.
  2. यह 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के वृक्षों को सम्मानित करने की एक पहल है, जिन्होंने जीवन-भर ऑक्सीजन का उत्पादन, प्रदूषण कम करके, छाया प्रदान करके मानवता की सेवा की है.
  3. पूरे राज्य में ऐसे वृक्षों को चिह्नित किया जाएगा और स्थानीय लोगों को इस योजना में शामिल कर इनकी देखभाल की जाएगी.
  4. ऑक्सी वन (Oxy Van), एक चिन्हित की गई भूमि के टुकड़े हैं, जिन पर 3 करोड़ पेड़ लगाए जायेंगे.

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