Sansar डेली करंट अफेयर्स, 08 September 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 08 September 2018


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Trust status for Bharat Ke Veer

संदर्भ

कार्रवाई में मारे गए पैरा मिलिट्री कर्मियों के परिवारों को सहायता देने वाले निजी संगठन “भारत के वीर” को हाल ही में सरकार ने न्यास का दर्जा/”status of a trust ” प्रदान कर दिया है. इस न्यास में सिने अभिनेता अक्षय कुमार और पूर्व राष्ट्रीय बैडमिंटन विजेता पुल्लेला गोपीचंद को न्यासियों में शामिल किया गया है.

भारत के वीर क्या है?

  • भारत के वीर एक ऐसा संगठन है जिसका उद्देश्य कर्तव्य के समय अपने जीवन का बलिदान करने वाले भारतीय सैनिकों के परिवार को सहायता पहुँचाने के लिए दान आमंत्रित करना है.
  • इसके वेबसाइट को NIC (National Informatics Centre – NIC) का तकनीकी सहयोग मिलता है और इसे भारतीय स्टेट बैंक का भी समर्थन प्राप्त है.
  • यह संगठन भारत के वीर नामक कोष चलाता है जिसमें कोई भी दान कर सकता है. दान की गई राशि को शहीद होने वाले केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल/केन्द्रीय पैरा मिलिट्री दल के सैनिक के सबसे निकटवर्ती सम्बन्धी के खाते में जमा कर दिया जाता है.
  • एक शहीद के परिवार को अधिकतम 15 लाख रूपये का दान किया जा सकता है. यदि कोई व्यक्ति 15 लाख रु. से अधिक का दान करता है तो अधिकाई (surplus) राशि को किसी दूसरे शहीद के परिवार के खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है.

कोष का प्रबंधन

भारत के वीर कोष का प्रबन्धन एक समिति द्वारा किया जाता है जिसमें लब्ध प्रतिष्ठ व्यक्ति और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं. यह समिति राशि को आवश्यकतानुसार और समान रूप से शहीदों के परिवार को निर्गत करती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Chabahar Port

संदर्भ

इस विषय में हुई एक अंतरिम संधि के अनुरूप ईरान चाबहार बंदरगाह के संचालन का जिम्मा एक भारतीय कंपनी को एक महीने के अन्दर सौंपने जा रहा है.

भारत और ईरान के बीच हुई संधि में की गई व्यवस्था के अनुसार भारत को चाबहार बंदरगाह चरण 1 के दो बर्थों को आवश्यक उपकरण देना और उन्हें 10 वर्षों की लीज पर संचालित करना है. इसके लिए भारत को 85.21 मिलियन डॉलर का निवेश करना होगा और प्रत्येक वर्ष 22.95 मिलियन डॉलर राजस्व का व्यय करना होगा.

चाबहार बंदरगाह

  • भारत ने ही चाबहार बंदरगाह बनाया है.
  • इसका उद्देश्य है कि चारों तरफ जमीन से घिरे अफगानिस्तान को फारस की खाड़ी (Persian Gulf) तक पहुँचने के लिए एक ऐसा यातायात गलियारा मिले जो पाकिस्तान होकर नहीं गुजरे क्योंकि पाकिस्तान से इसकी अक्सर ठनी रहती है.
  • आशा है कि इस गलियारे के चालू हो जाने से अरबों रुपयों का व्यापार हो सकता है.
  • ईरान का चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर स्थित उस देश का एकमात्र बन्दरगाह है.
  • चाबहार के बंदरगाह से भारत को मध्य एशिया में व्यापार करने में सुविधा तो होगी ही, अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे (International North-South Transport Corridor) तक उसकी पहुँच भी हो जाएगी.
  • चाबहार बंदरगाह चालू होने के बाद भारत में लौह अयस्क, चीनी और चावल के आयात में महत्त्वपूर्ण वृद्धि होगी.
  • इसके अतिरिक्त खनिज तेल के आयात की लागत भी बहुत कुछ घट जायेगी.
  • ज्ञातव्य है कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारा ईरान से लेकर रूस तक जाता है और इसमें यह एक भूमि मार्ग है जिसमें समुद्र, रेल, सड़क यातायात का सहारा लिया जायेगा.
  • विदित हो कि चीन ने खाड़ी तक अपनी पहुँच बनाने के लिए पाकिस्तान को ग्वादर नामक बंदरगाह बनाने में मदद की है जिससे उसका क्षेत्र में दबदबा हो जाए.
  • चाबहार बंदरगाह भारत को चीन के इस दबदबे का प्रतिकार करने में सक्षम बनाएगा.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : MOVE, the first global mobility summit

संदर्भ

हाल ही में नीति आयोग ने विभिन्न मंत्रालयों और औद्योगिक भागीदारों के सहयोग से नई दिल्ली में एक सम्मेलन का आयोजन किया, जिसका नाम है – ‘MOVE: Global Mobility Summit’. इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमन्त्री द्वारा किया गया.

सम्मलेन का उद्देश्य

सम्मलेन का उद्देश्य यातायात व्यवस्था में क्रान्ति लाना है. इसके लिए परिवहन से सम्बंधित सभी हितधारकों (stakeholders) को इकठ्ठा कर आवश्यक ढाँचे के निर्माण करने की योजना है. प्रस्तावित यायातात तंत्र सुरक्षित, स्वच्छ, भलीभाँति आपस में जुड़ा, सस्ता, सहज उपलब्ध और समावेशी होगा.

सम्मलेन के मुख्य तत्त्व

  • सम्मलेन में विश्व-भर के ऐसे राजनैतिक नेता शामिल होंगे जो परिवहन क्षेत्र से जुड़े हैं. इसमें पूरे विश्व से 2,200 से अधिक प्रतिभागी आये. आने वाले प्रतिभागी इन क्षेत्रों से सम्बंधित थे- सरकारी नेता, अनुसंधान संगठन, अकादमिक प्रतिनिधि, अग्रणी उद्योगपति, थिंक टैंक और नागरिक सामाजिक संगठन.
  • इस सम्मलेन में जिन देशों के दूतावासों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, वे हैं – अमेरिका, जापान, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी और ब्राजील.

गतिशीलता (Mobility) की आवश्यकता

गतिशीलता जीवन के इंजन को चलायमान रखती है. चाहे वह आपका व्यक्तिगत काम हो या आप आराम करने जा रहे हों अथवा कोई माल ढुलाई की बात हो, गतिशीलता अति आवश्यक है. इसके बिना मानव जीवन के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती. कम समय में बड़ी दूरी को पार करने की क्षमता भी गतिशीलता से ही संभव है.

किसी भी नगर के डिजाईन में गतिशीलता एक प्रमुख तत्त्व होती है. पैदल यात्री और निजी परिवहन से लेकर सार्वजनिक आवागमन और माल ढुलाई में तेजी से ही भारत की अर्थव्यवस्था और लोगों की क्षमताओं में वृद्धि हो सकती है.

आज यह आवश्यकता है कि यातायात के साधनों को ऐसा बनाया जाए कि उनका सतत उपयोग हो सके. साथ ही इन्हें स्वच्छ होना चाहिए जिससे कि पर्यावरण पर दुष्प्रभाव न पड़े. इनके सस्ते होने से निम्न आय वाले उपभोक्ता इनका लाभ उठा सकेंगे और उद्योग के लिए माल ढुलाई भी सस्ती उपलब्ध होगी. यातायात के साधन भी ऐसे हों जिनमें कम से कम ऊर्जा लगे और कम से कम उत्सर्जन हो. विदित हो कि भारत ने जलवायु परिवर्तन के विषय में अंतर्राष्ट्रीय वचन दे रखे हैं जिनका पालन करना आवश्यक है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty

संदर्भ

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने फिर से अमेरिका और भारत सहित 8 देशों से यह अनुरोध किया है कि वे CTBT की पुष्टि करे जिससे विश्व को आणविक अस्त्रों से मुक्त रखने के वैश्विक प्रयास सार्थ हो सकें.

CTBT का full form है – Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty अर्थात् व्यापक अणु परीक्षण अनुबंध संधि.

पृष्ठभूमि

अब तक 180 से अधिक देशों ने CTBT हस्ताक्षरित कर दिए हैं और उनमें अधिकांश ने उसकी पुष्टि भी कर दी है. परन्तु यह संधि तभी प्रभावी होगी जब इसकी पुष्टि वे आठ देश न कर दें जिनके पास आणविक क्षमता है. ये देश हैं – चीन, मिस्र, भारत, ईरान, इज़राइल, उत्तरी कोरिया, पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका.

CTBT क्या है?

CTBT एक ऐसी संधि है जो सभी प्रकार के आणविक विस्फोट को निषिद्ध करती है. इस संधि की रुपरेखा जेनेवा में हुए निरस्त्रीकरण सम्मलेन में तैयार की गई थी और इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंगीकृत कर लिया था. 24 सितम्बर, 1996 से यह संधि हस्ताक्षर के लिए खुली हुई है.

भारत और CTBT

भारत को आरम्भ से ही CTBT पर कुछ आपत्तियाँ हैं. भारत भी चाहता है कि यह विश्व आणविक अस्त्रों से मुक्त हो. पर उसका कहना है कि निरस्त्रीकरण एक अंतिम लक्ष्य है जिसका मार्ग परीक्षण पर प्रतिबंध से होकर जाता है.

भारत के अनुसार यह एक जटिल विषय है. भारत को संधि की धारा 14 के Entry-into-force (EIF) अनुच्छेद पर भी अप्पत्ति है क्योंकि किसी अंतर्राष्ट्रीय संधि में प्रतिभागिता को स्वेच्छा से रोके रखने के अधिकार का यह उल्लंघन है.

संधि की आवश्यकता

आणविक निरस्त्रीकरण और आणविक अप्रसार के लक्ष्य को पाने में CTBT की एक प्रमुख भूमिका है. इस संधि के बने हुए 20 वर्ष हो गये हैं पर अभी भी इसे लागू नहीं किया जा सका है. इसे लागू करने में विफलता के कारण इसे पूरे तौर से कार्यान्वित नहीं किया जा रहा है जिसका असर अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : NASA’s Cassini spacecraft

संदर्भ

NASA के Cassini अन्तरिक्षयान द्वारा भेजे गए डाटा से वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि शनि के उत्तरी ध्रुव पर एक गर्म और बहुत ऊँची जेट धारा उठ रही है जिसका आकार छह कोणों (षट्कोण) वाला है.

मुख्य तथ्य

  • शनि में उठने वाली जेट धारा इस ग्रह के बादलों के अन्दर दिखने वाले प्रसिद्ध षट्कोण से मिलती-जुलती है.
  • इसका अर्थ यह है कि बादलों में स्थित षट्कोण ऊपर उठने वाली जेटधारा के आकार को प्रभावित करता है.
  • ऐसा प्रतीत होता है कि जेटधारा सैंकड़ों मील ऊँची है.
  • वैज्ञानिकों द्वारा देखी गई जेटधारा ग्रह के समताप मंडल (stratosphere) से सैंकड़ों मील ऊपर है.

Cassini Mission क्या है?

  • कैसिनी मिशन अंतरिक्षयान शनि ग्रह की ओर 15 अक्टूबर, 1997 के  छोड़ा गया था. इसके प्रक्षेपण में NASA, यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी और इटली स्पेस एजेंसी का सहयोग था.
  • अब तक यह अन्तरिक्षयान शनि ग्रह (ringed planet) और उसकी चंद्रमाओं से संबधित हजारों चित्र नए तथ्य भेज चुका है.
  • कैसिनी अन्तरिक्ष यान शनि पहुँचने वाला चौथा और उसकी कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला अन्तरिक्षयान है. इसमें Huygens नामक एक लैंडर संलग्न है जो 2005 में शनि के चंद्रमा टाइटनपर उतरा था.

मिशन के उद्देश्य

  • शनि के छल्ले की त्रि-आयामी संरचना और गतिशील व्यवहार का पता लगाना.
  • उपग्रह की सतहों और प्रत्येक वस्तु के भूवैज्ञानिक इतिहास की संरचना का पता लगाना.
  • आईपेटस (Iapetus) के अग्रणी गोलार्ध पर काले पदार्थ (dark material)  की प्रकृति और उत्पत्ति कापता लगाना.
  • चुंबक मंडल के त्रि-आयामी संरचना और गतिशील व्यवहार को मापना.
  • बादलों के स्तर पर शनि के वायुमंडल के गतिशील व्यवहार का अध्ययन करना.
  • टाइटन के बादलों और धुंध में समय-समय पर होने वाले परिवर्तन का अध्ययन करना.
  • क्षेत्रीय पैमाने पर टाइटन की सतह का पता लगाना.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Kepler space telescope

संदर्भ

नासा की ग्रहों का पता लगाने वाली Kepler अन्तरिक्ष दूरबीन अब तक 2,300 से अधिक ग्रहों का पता लगा चुकी है. इस दूरबीन को इसके ईंधन की स्थिति को देखते हुए sleep-mode पर डाल दिया गया था और इसी के समान ग्रहों का अन्वेषण करने वाले एक उपग्रह TESS को सक्रिय कर दिया गया था. परन्तु इसने फिर से अपनी वैज्ञानिक गतिविधियाँ शुरू कर दी हैं.

शीघ्र ही इस दूरबीन ईंधन समाप्त हो जाएगा. इसलिए इससे सम्बंधित वैज्ञानिक प्रयास कर रहे हैं कि इससे यथासम्भव अधिक से अधिक data लिया जा सके.

Kepler space telescope

  • नासा के वैज्ञानिक प्लांट-हंटिंग केपलर अन्तरिक्ष दूरबीन में संगृहीत नवीनतम आँकड़ों को डाउनलोड करने की तैयारी कर रहे हैं.
  • ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि यह इस अंतरीक्ष-यान में ईंधन समाप्ति की ओर है.
  • वर्तमान में NASA ने इस यान को no-fuel-use safe mode में डाल रखा है जिससे कि आँकड़ों को शीघ्र-से-शीघ्र डाउनलोड किया जा सके.
  • Kepler – एक अंतरिक्ष यान (spacecraft) का नाम है जिसमें एक शक्तिशाली telescope लगा हुआ है.
  • इस telescope को सौरमंडल से बाहर स्थित ग्रहों को खोजने के लिए बनाया गया है.
  • इसका नाम जोहान्स केप्लर के नाम पर रखा गया है जो स्वयं एक प्रसिद्ध जर्मन गणितज्ञ और खगोलविद् थे.
  • Kepler mission को 2009 में launch किया गया था.
  • इस मिशन का उद्देश्य हमारी निकटस्थ आकाशगंगा में सैंकड़ों पृथ्वी के आकार एवं उससे छोटे ग्रहों की खोज करना और आकाशगंगा में स्थित खरबों तारों के एक छोटे हिस्से का पता लगाना है  जिनमें निवास-योग्य ग्रह हो सकते हैं.

TESS

  • TESS का full form है – Transiting Exoplanet Survey Satellite.
  • यह सौर प्रणाली के बाहर उपग्रहों की खोज के लिए एक नया मिशन है.
  • विदित हो कि इसी उद्देश्य से पूर्व में भेजे गए Kepler mission का जीवनकाल समाप्त होने जा रहा है. यह मिशन उसी का स्थान ले रहा है.
  • TESS mission का प्रारम्भ सौरमंडल के पड़ोस में स्थित छोटे ग्रहों का पता लगाने के लिए 18 April 2018 को किया गया.
  • जब कोई उपग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो उस घटना को संक्रमण (transit) कहा जाता है. उस समय उस तारे की चमक में रुक-रुक कर और नियमित रूप से कमी आ जाती है. यह यान इस घटना का अध्ययन करेगा. इसके लिए यह कम से कम 2 लाख तारों पर नजर रखेगा.
  • यह जिन तारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगा वे केपलर द्वारा परीक्षित तारों की तुलना में 30 से 100 गुने अधिक चमकीले हैं.
  • यह यान पृथ्वी और चन्द्रमा के परिक्रमा पथ पर रहकर समस्त आकाश का सर्वेक्षण करेगा.

Prelims Vishesh

Eight Avian Species Declared “Extinct” in New Study :-

Spix_Macaw

  • वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि पक्षियों की 8 प्रजातियाँ लुप्त हो गई हैं.
  • विदित हो कि ऐसा 21वीं शताब्दी में पहली बार हुआ है.
  • लुप्त होने वाली पक्षी हैं – Spix’s macaw, Alagoas foliage-gleaner, cryptic treehunter, Pernambuco pygmy-owl, poo-uli, black-faced honeycreeper और glaucous macaw.
  • इस सूची की अधिकांश प्रजातियाँ द.अमेरिका, विशेषकर ब्राज़ील से सम्बंधित हैं जहाँ जंगल कटाई का काम बड़े पैमाने पर हुआ है.

Bonnethead shark :-

  • हाल ही में वैज्ञानिकों ने शार्क की एक सर्वहारा प्रजाति की पहली बार खोज की है जिसका नाम Bonnethead है.
  • यह बहुतायत से मैक्सिको की खाड़ी में पाई जाती है.

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