Sansar डेली करंट अफेयर्स, 08 June 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 08 June 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Unmanned Aircraft System (UAS) Rules of 2020

संदर्भ

हाल ही में नागर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने प्रारूप ‘मानव रहित विमान प्रणाली नियम, 2020’ (Unmanned Aircraft System (UAS) Rules, 2020) को अधिसूचित किया है.

मुख्य तथ्य

केंद्र सरकार ने ड्रोन के आयात, विनिर्माण, व्यापार, परिचालन आदि का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों, स्थानीय निकायों तथा राज्य एवं केंद्र सरकारों या भारतीय नागरिकों द्वारा नियंत्रित कंपनियों को देने का प्रस्ताव किया है.

‘मानव रहित विमान प्रणाली नियम, 2020 का प्रारूप

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी ड्रोन के संबंध में जारी विस्तृत प्रारूप नियम में कहा गया है कि देश में मानवरहित विमान प्रणाली यानी ड्रोन के आयात, विनिर्माण, व्यापार, ड्रोन रखने और उसके परिचालन के लिए नागर विमानन महानिदेशालय की पूर्वानुमति आवश्यक होगी.
  • इसके लिए वही व्यक्ति पात्र होगा जो भारतीय नागरिक हो और जिसकी उम्र 18 साल से अधिक हो.
  • कंपनियों या कॉर्पोरेट इकाइयों के मामले में उनका देश में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा.
  • साथ ही उनका मुख्य कारोबार भी देश में ही होना चाहिये.
  • इसके निदेशक मंडल में कम से कम दो-तिहाई सदस्यों और अध्यक्ष का भारतीय नागरिक होना भी अनिवार्य किया गया है.
  • साथ ही कंपनी का अधिकतर मालिकाना हक और नियंत्रण भी भारतीयों के हाथ में होना चाहिये.
  • केंद्र या राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों, कानून इकाइयाँ जैसे पुलिस बल आदि को भी ड्रोन रखने, परिचालन, आयात, विनिर्माण, खरीद-बिक्री का अधिकारी दिया गया है.
  • ड्रोन से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक वस्तुएँ, इत्यादि को ले जाने की अनुमति नहीं है.

ड्रोन क्या है?

  • मानव रहित विमानों (Unmanned Aerial Vehicle-UAV) को ड्रोन कहा जाता है अर्थात् रिमोट से संचालित होने वाला छोटा विमान.
  • वैसे यह विमान जैसा होते हुए भी विमान नहीं है, बल्कि एक ऐसा रोबोट है जो उड़ सकता है. प्रायः बैटरी के चार्ज होने पर चार पंखों से लैस ड्रोन लंबी उड़ान भर सकते हैं.
  • इन्हें एक रिमोट या विशेषकर इसी के लिये बनाए गए कंट्रोल रूम से उड़ाया जाता है.
  • ड्रोन का हिंदी अर्थ है नर मधुमक्खी और उड़ने के कारण ही इसे यह नाम मिला है. यह बिल्कुल मधुमक्खी की तरह उड़ता है और एक जगह पर स्थिर रहकर मंडरा भी सकता है.
  • ड्रोन अपने आकार, दायरे, स्थिरता और भार उठाने की क्षमता के आधार पर कई प्रकार के होते हैं. इनमें आमतौर पर स्थिर पंख, रोटर रहते हैं और ये बैटरी से ऊर्जा प्राप्त करते हैं.

ड्रोन के प्रकार

ड्रोन को अपने भार के हिसाब से पाँच श्रेणियों में बांटा गया है –

  • नैनो ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 250 ग्राम तक होता है.
  • माइक्रो ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 250 ग्राम से अधिक लेकिन 2 किलो ग्राम से कम होता है.
  • स्मॉल ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 2 ग्राम किलो से अधिक लेकिन 25 किलो ग्राम से कम होता है.
  • मीडियम ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 25 किलो ग्राम से अधिक लेकिन 150 किलो ग्राम से कम होता है.
  • लार्ज ड्रोन: वे ड्रोन जिनका वज़न 150 किलो ग्राम से अधिक होता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

देश में कोरोनावायरस से जुड़ी स्थिति की निगरानी कर रही प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति भी इस बात से प्रोत्साहित है कि कैसे ड्रोन का प्रयोग वायरस और टिड्डी की समस्या से निपटने के लिए किया गया. देश में ड्रोन के प्रयोग का चलन तीव्रता से बढ़ रहा है. ऐसे में इसे उड़ाने को लेकर कई नियमों का इंतज़ार काफी समय से हो रहा था लेकिन अब सरकार ने इसके लिये नए नियमों की घोषणा कर दी है. केंद्र सरकार ने इसके लिये अनुमति लेने के नए नियमों के साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म भी विकसित किया है. ड्रोन के बेहतर प्रयोग से कई समस्याओं से मुकाबला करने में आसानी होगी.

आज ड्रोन को उड्डयन उद्योग का नया अध्याय कहा जा रहा है, जहाँ रोज़गार और नागरिक उद्देश्यों के लिये इसके उपयोग की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं अर्थात् अपनी Eye in the Sky वाली छवि से ड्रोन कहीं आगे निकल आया है. लेकिन ड्रोन के प्रयोग को लेकर सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा इसके दुरुपयोग की पर्याप्त संभावनाएँ हैं. अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन एसोसिएशन ने इन्हें वायु क्षेत्र के लिये खतरा बताते हुए इससे जुड़ी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये व्यापक विचार-विमर्श की सलाह दी है.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

GARUD portal :-

  • नगर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने गरुड़ नामक एक पोर्टल तैयार किया है जो कोविड-19 से जुड़े ड्रोन संचालन के लिए राज्य के प्रतिष्ठानों को छूट दिलाने में सहायता करेगा.
  • गरुड़ का पूरा नाम है – Government Authorisation for Relief Using Drones.

S-400 क्या है?

  • यह एक हवाई प्रतिरक्षा प्रणाली है जो आकाश में शत्रु के विमान को धरती पर से ही भेद सकती है.
  • यह रूस की सर्वाधिक उन्नत प्रणाली है जो 380 km. दूर स्थित बमवर्षकों, जेटों, मिसाइलों और ड्रोनों को भी नष्ट कर सकती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Cooperative security in Persian Gulf littoral

फारस की खाड़ी

  • फारस की खाड़ी, मध्य पूर्व एशिया क्षेत्र में हिन्द महासागर का एक विस्तार है, जो ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच तक गया हुआ है.
  • इसके तटवर्ती क्षेत्र की बात करें तो जो आठ देश आते हैं उनके नाम हैं – ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान.
  • कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख उत्पादक होने के चलते इन देशों के हित समान हैं अर्थात् इस क्षेत्र में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादन किया जाता है और इसलिए इस खाड़ी की वजह से इन देशों की अर्थव्यवस्था भी चलती है और साथ ही साथ पूरे विश्व में यहाँ से तेल और गैस का निर्यात किया जाता है.
  • इस तरह हम कह सकते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और उनकी अपनी समृद्धि में इस खाड़ी का महत्त्वपूर्ण योगदान है.

खाड़ी देश और भारत के बीच सम्बन्ध

  • वर्तमान में भारत के तेल आयात का दो तिहाई हिस्सा फारस की खाड़ी क्षेत्र से आता है और 15 प्रतिशत नाइजीरिया से.
  • निकट भविष्य में, भारत की खाड़ी के तेल पर भारी निर्भरता रहेगी. भारत स्वभावतः चिंतित है कि खाड़ी में अस्थिरता या गड़बड़ी आपूर्ति में व्यवधान पैदा कर सकती है.
  • भारत का सामरिक तेल भंडार स्थापित करने का निर्णय अल्पकालिक व्यवधानों के प्रतिकूल असर को कम कर सकता है न कि लंबे व्यवधानों या निर्यातक देशों द्वारा साफ इन्कार के परिणामों को. फिर भी भारत को इस बात का फायदा है.

भारत की तेल पर निर्भरता

  • आज की तिथि में में बंगाल की खाड़ी में कृष्णा-गोदावरी बेसिन में नए गैस क्षेत्रों की हाल की खोज के बावजूद, आने वाले वर्षों में इन स्रोतों से अतिरिक्त उत्पादन मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए केवल मामूली योगदान देगा.
  • भारत के सामरिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं. इनके अलावा सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी. वर्तमान में ‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम’ (Strategic Petroleum Reserves programme- SPRP) के तहत भारत 87 दिनों तक आवश्यकता पूर्ति की भंडारण क्षमता रखता है. विदित हो कि भारत के सामरिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं. इनके अलावा सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी.
  • इसलिए आयातित तेल और गैस पर भारत की भारी निर्भरता अपरिहार्य है.
  • यह निर्भरता जो वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत है, 2030 तक 90 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है. इसलिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए तेल और गैस क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत के खाड़ी देशों के साथ ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं. अरब खाड़ी के देशों के साथ आर्थिक रूप से सार्थक संबंध तभी बढ़े जब 1970 के दशक के बाद इस क्षेत्र में तेल उत्पादन द्वारा अभूतपूर्व समृद्धि आई. नौकरियों के अवसर खुलने पर भारतीय लोग बहुत संख्या में इन देशों में गए.

आज लगभग 50 लाख भारतीय अरब देशों में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं, और छोटे खाड़ी देशों की कूल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत हैं. भारतीय श्रमिकों की सबसे बड़ी संख्या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में है. दुबई की चमक के पीछे विदेशी कर्मचारियों, भारतीयों सहित, का पसीना और परिश्रम है.

प्रीलिम्स बूस्टर

संयुक्त अरब अमीरात मध्यपूर्व एशिया में स्थित एक देश है. सन् 1873 से 1947 तक यह ब्रिटिश भारत के अधीन रहा. उसके बाद इसका शासन लंदन के विदेश विभाग से संचालित होने लगा. 1971 में फारस की खाड़ी के सात शेख राज्यों आबू धाबी, शारजाह, दुबई, उम्म अल कुवैन, अजमान, फुजइराह तथा रस अल खैमा को मिलाकर स्वतंत्र संयुक्त अरब अमीरात की स्थापना हुई. इसमें रास अल खैमा 1972 में सम्मिलित हुआ.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Tablighi activity now a specific visa violation

सन्दर्भ

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वीजा से सम्बंधित मार्गनिर्देशों में नए संशोधन किये हैं जिनके अंतर्गत विशिष्ट वीजा उल्लंघन के रूप में तब्लीगी गतिविधियों को सम्मिलत किया है.

संशोधन में क्या है?

  • संशोधन के द्वारा भारतीय वीजा से संबंधित सामान्य नीति दिशानिर्देश में एक नई श्रेणी जोड़ी है, जो है – “तब्लीगी गतिविधियों में संलिप्त होने पर प्रतिबंध”.
  • जारी दिशानिर्देश में वीजा की 24 श्रेणियों और विभिन्न शर्तों का विवरण है जिनके तहत ऑनलाइन या विदेश में स्थित दूतावास द्वारा वीजा प्रदान किया जा सकता है.
  • दिशानिर्देश के अनुसार कुछ वीजा संबंधी उल्लंघनों के लिए 500 डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है, जैसे – दो वर्ष से अधिक समय तक रहना, संरक्षित क्षेत्रों का दौरा करना आदि.
  • किसी भी प्रकार के वीजा धारण करने वाले विदेशी नागरिकों और प्रवासी नागरिक (Overseas Citizens of India – OCI) कार्डधारकों को तब्लीग कार्य में संलग्न होने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
  • धार्मिक स्थलों पर जाने और धार्मिक प्रवचनों में शामिल होने जैसी सामान्य धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा.
  • हालांकि, धार्मिक विचारधाराओं का प्रचार करना, धार्मिक स्थानों पर भाषण देना, ऑडियो या दृश्य प्रदर्शन / धार्मिक विचारों से संबंधित पैम्फलेट का वितरण, धर्मांतरण फैलाना, आदि की अनुमति नहीं होगी.

मामला क्या है?

किसी भी विदेशी को किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति देने के लिए गृह मंत्रालय एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है. मार्च 2020 में दिल्ली के निज़ामुद्दीन मर्कज (केंद्र) में तब्लीगी जमात में भाग लेने वाले 960 विदेशियों को MHA ने ब्लैकलिस्ट कर दिया था. यदि किसी विदेशी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है तो उसे भारत आने के लिए किसी भी दूतावास से वीजा नहीं मिल सकता है.

तब्लीगी जमात क्या है?

  • तब्लीगी जमात की स्थापना 1927 में एक सुधारवादी धार्मिक आंदोलन के तौर पर मोहम्मद इलियास कांधलवी ने की थी. यह इस्लामिक आंदोलन देवबंदी विचारधारा से प्रभावित है और उसके सिद्धांतों का दुनिया-भर में प्रचार करता है.
  • जमात उर्दू भाषा का शब्द है. जमात शब्द का मतलब किसी खास उद्देश्य से इकट्ठा होने वाले लोगों का समूह है. तब्लीगी जमात के संबंध में बात करें तो यहां जमात ऐसे लोगों के समूह को कहा जाता है जो कुछ दिनों के लिए खुद को पूरी तरह तब्लीगी जमात को समर्पित कर देते हैं. इस दौरान उनका अपने घर, कारोबार और सगे-संबंधियों से कोई संबंध नहीं होता है. लोगों के बीच इस्लाम की बातें फैलाते हैं और अपने साथ जुड़ने का आग्रह करते हैं. इस तरह उनके घूमने को गश्त कहा जाता है. गश्त के बाद के समय का प्रयोग वे लोग नमाज, कुरान की तिलावत और प्रवचन में करते हैं.
  • जमात के बाद ये लोग अपनी अपनी सुविधा के अनुसार तीन दिन, 40 दिन, कोई चार महीने के लिए तो कोई साल भर के लिए सम्मिलित होते हैं. यह अवधि के समाप्त होने के बाद ही वे अपने घरों को लौटते हैं और रुटीन कामों में लग जाते हैं.
  • इस विचारधारा यानि तब्लीगी जमात के लोग पूरी दुनिया में फैले हुए हैं. बड़े-बड़े शहरों में उनका एक सेंटर होता है जहां जमात के लोग जमा होते हैं. इसे मरकज कहा जाता है. उर्दू में मरकज इंग्लिश के सेंटर और हिंदी के केंद्र के लिए इस्तेमाल होता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कोरोना के कारण लागू पहले चरण के लॉकडाउन के दौरान निर्देशों का उल्लंघन करते हुए निजामुद्दीन के मरकज में मजहबी आयोजन में हजारों की संख्या में तब्लीगी एकत्र हुए थे. यही नहीं, इनमें से कई तब्लीगी कोरोना से संक्रमित होने के बावजूद देश के विभिन्न हिस्सों में घूमते रहे थे. इसकी सूचना सरकार को नहीं दी गई थी. यदि समय पर सरकार को सूचित कर दिया जाता कि मरकज में हजारों तब्लीगी एकत्र हैं तो उसी समय वहीँ पर उनकी जाँच हो जाती परन्तु ऐसा नहीं हो पाया. जमात के लोग पूरे भारत में यहाँ तक कि अंडमान तक चले गये और इस प्रकार COVID-19 के प्रसार में उनकी भूमिका रही. इसलिए सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम उचित जान पड़ता है.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

जो लोग विदेश में रहते हैं, उनको भारत सरकार नागरिकता से भिन्न एक विशेष दर्जा देती है, जिसका सम्बन्ध उस व्यक्ति को भारत सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं से होता है. विशेष दर्जों में ये तीन दर्जे महत्त्वपूर्ण हैं –

  1. अनिवासी भारतीय (NRI- Non-Residents Indians)
  2. भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO – Persons of Indian Origin)
  3. भारत के समुद्रपारीय नागरिक (OCI – Overseas Citizens of India)

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Environmental Performance Index

सन्दर्भ

येल विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में द्विवार्षिक पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index – EPI) 2020 निर्गत किया गया.

विदित हो कि इस बार इस सूचकांक को बनाने में 11 अलग-अलग मुद्दों से सम्बंधित 32 संकेतकों पर विचार किया गया है. ये 11 मुद्दे इस प्रकार हैं – जैव विविधता और आवास (15%), पारिस्थितिकी सेवाएँ (6%), वायु गुणवत्ता (20%), स्वच्छता और पेयजल (16%), मत्स्यन (6%), जल संसाधन (3%), जलवायु परिवर्तन (24%), प्रदूषक उत्सर्जन (3%), कृषि (3%), अपशिष्ट प्रबंधन (2%) एवं भारी धातु (2%).

साथ ही, सूचकांक ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय प्रदर्शन पर 10 वर्ष का अवलोकन किया है.

epi index 2020 india

सूचकांक में विश्व का प्रदर्शन

  1. इस सूचकांक में डेनमार्क और लक्जमबर्ग को क्रमशः प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है.
  2. भारत के पड़ोसी देशों जैसे चीन को 120वाँ स्थान, पाकिस्तान को 142वाँ स्थान, श्रीलंका को 109वाँ स्थान, भूटान को 107वाँ स्थान, नेपाल को 145वाँ, बांग्लादेश को 162वाँ और मालदीव को 127वाँ स्थान प्राप्त हुआ है.

सूचकांक में भारत का प्रदर्शन

  • इस बार के सूचकांक में भारत ने 180 देशों में से 168वाँ स्थान प्राप्त की .
  • 2018 में, भारत ने 100 में से 6 स्कोर के साथ 177वाँ स्थान प्राप्त किया था.
  • भारत जलवायु परिवर्तन के मामले में 106वें स्थान पर और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है.
  • सूचकांक से ज्ञात होता है कि भारत को वायु और जल की गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के लिए अत्यंत प्राथमिकता के साथ स्थिरता के मुद्दों पर व्यापक रूप से ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.
  • अफगानिस्तान को यदि छोड़ दें तो शेष सभी दक्षिण-एशियाई देश भारत से कहीं आगे हैं. साथ ही, सतत विकास लक्ष्यों के मामले में भी भारत का स्थान अन्य देशों की तुलना में कम है.

पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक के विषय में  

  • इस सूचकांक को येल विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल लॉ एंड पॉलिसी’ तथा कोलंबिया विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर इंटरनेशनल अर्थ साइंस इंफॉर्मेशन नेटवर्क’ द्वारा संयुक्त रूप से निर्गत किया जाता है.
  • पर्यावरण प्रदर्शन सूचकांक को ‘विश्व आर्थिक मंच’ (World Economic Forum- WEF) के सहयोग से तैयार किया जाता है.
  • EPI विश्व के अनेक देशों की सतत् स्थिति का आकलन विभिन्न आँकड़ों के आधार पर करता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

पर्यावरणीय समस्याओं का वास्तविक समाधान विकास की पर्यावरणीय लागतों की पहचान करने और इन लागतों को तार्किक बनाने में है. सौर ऊर्जा की ओर तीव्र संक्रमण हेतु सब्सिडी देने के साथ ही अधिक प्रदूषणकारी ईंधनों, जैसे – पेट्रोल और डीजल के दाम के उचित निर्धारण से भी इसे पूरित किया जा सकता है. कोयला-आधारित संयंत्रों द्वारा उत्पादित बिजली की लागत, आंशिक रूप से ही सही उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत में प्रतिबिंबित होनी चाहिये. धीरे-धीरे हम लोग बिजली से चलने वाले वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग करने वाले हैं. ऐसी स्थिति में इनके मूल्य निर्धारण में इनकी सामाजिक लागत का समावेशन किया जाना चाहिये. यह सच है कि पर्यावरण की गुणवत्ता को अचानक बहाल करना असंभव है. परन्तु यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यावरण सम्बन्धी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में हम किसी से पीछे नहीं रहें और निरंतर आगे ही बढ़ते रहें.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

बजट 2020: पर्यावरण मंत्रालय को 2020-21 के बजट में 3100 करोड़ रु.  की राशि आवंटित की गई है. इस बार राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन के लिए बजटीय आवंटन पिछले वित्त वर्ष में 240 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 311 करोड़ रुपये कर दिया गया है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Inclusive growth and issues arising from it.

Topic : Payments Infrastructure Development Fund

सन्दर्भ

हाल ही में भारत भर में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से RBI (Reserve Bank of India-RBI) ने 500 करोड़ रुपए का ‘भुगतान अवसंरचना विकास कोष’ (Payments Infrastructure Development Fund- PIDF) स्थापित किया है.

भुगतान अवसंरचना विकास कोष का उद्देश्य

भुगतान अवसंरचना विकास कोष का उद्देश्य देश के टियर-3 से लेकर टियर-6 तक के केन्द्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में हाथ से और डिजिटल दोनों प्रकार के चलने वाले पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) से सम्बंधित अवसंरचना के निर्माण को प्रोत्साहन देना है.

कोष में अंशदान

भुगतान अवसंरचना विकास कोष के लिए RBI प्रारम्भ में इसका आधा भाग अर्थात् 250 करोड़ का अंशदान करेगा. शेष पैसा कार्ड निर्गत करने वाले बैंक और देश में कार्यरत कार्ड नेटवर्क मुहैया कराएँगे.

कोष का प्रबंधन

कोष का प्रबंधन एक परामर्शी परिषद् करेगी जिसका प्रबंधन और प्रशासन RBI के अधीन होगा.

भुगतान अवसंरचना विकास कोष का माहात्म्य

  • देश में पिछले कई वर्षों से भुगतान की प्रणाली में परिवर्तन हुए हैं. आज भुगतान के लिए कई विकल्प हैं, जैसे – बैंक खाते, मोबाइल फ़ोन, कार्ड आदि.
  • डिजिटल भुगतान को और सुगम बनाने के लिए यह आवश्यक है कि भुगतान लेने से सम्बंधित अवसंरचना को देश-भर में, विशेषकर पिछले क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जाए.
  • उल्लेखनीय है कि 2019-20 के भुगतान सम्बंधित विजन में ऐसे कोष की स्थापना की अभिकल्पना थी. यदि PoS अवसंरचना सुदृढ़ हो जाती है तो धीरे-धीरे नकद की माँग में गिरावट आएगी. अनुमान है कि 2021 तक देश में 50 लाख PoS काम करने लगेंगे.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरे भारत में अबाध डिजिटल गेटवे तैयार हो चुका है? इसका उत्तर “नहीं” में है. आज की तिथि में गाँवों की बात तो दूर है, शहरों तक के कुछ मोहल्लों और गलियों में इंटरनेट और मोबाइल फोन की निर्बाध सेवा उपलब्ध नहीं है. गाँवों में आज भी लोगों को मोबाइल फोन से बात करने के लिए उन जगहों पर जाना पड़ता है, जहाँ नेटवर्क की पहुँच उपलब्ध हो. अतः आवश्यक यह भी है कि डिजिटल गेटवे की व्यवस्था को भी समानांतर तरीके से सुलभ और दृढ किया जाए. जब तक इंटरनेट की निर्बाध सेवा उपलब्ध नहीं होगी, डिजिटल गेटवे की सहज सुविधाएँ नहीं दी जाएँगी, डिजिटल भुगतान को कामयाबी के साथ लागू नहीं किया जा सकेगा.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारतीय शहरों को उनकी जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग टियर में बाँटा गया है-

  1. टियर I – 1,00,000 या उससे अधिक
  2. टियर II – 50,000 से 99,999
  3. टियर III – 20,000 से 49,999
  4. टियर IV – 10,000 से 19,999
  5. टियर V – 5,000 से 9,999
  6. टियर VI – 5000 से कम

Prelims Vishesh

National Productivity Council (NPC) :-

  • राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद् (NPC) एक राष्ट्र-स्तरीय संगठन है जिसकी स्थापना 1958 में भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय ने देश में उत्पादकता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की थी.
  • यह एक स्वायत्त, बहुपक्षीय एवं लाभ-रहित संगठन है जिसमें नियोक्ता और कर्मी संगठनों का समान प्रतिनिधित्व होता है.
  • NPC टोक्यो में स्थित अंतर-सरकारी निकाय – एशियाई उत्पादकता संगठन (APO) – का एक अंग है. विदित हो कि भारत सरकार APO के संस्थापक सदस्यों में से एक है.

National Crisis Management Committee (NCMC) :-

प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत के उपायों को कारगर ढंग से संचालित करने के लिए भारत सरकार ने कैबनेट सचिव की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) का गठन किया है जिसमें सभी सम्बंधित मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ-साथ अन्य संगठनों के व्यक्ति सदस्य के रूप में रहेंगे.

Depsang :

  • पिछले दिनों इस बात की चर्चा रही कि चीन ने देप्सांग में अनेक सैनिकों को तैनात किया है.
  • देप्सांग पश्चिमी क्षेत्र के कुछ एक समतल क्षेत्रों में से एक है जहाँ कोई सेना अपने हल्के वाहनों का प्रयोग कर सकती है. इसलिए चीन की इस पहल को भारत के लिए क्षतिकारक माना जा रहा है.
  • ज्ञात हो कि देप्सांग लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित है.

 Global Economic Prospects :-

  • विश्व बैंक ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की दशा पर हर छह महीने पर छपने वाली रिपोर्ट प्रकाशित कर दी है.
  • ये रिपोर्टें जनवरी और जून में निकलती हैं. जनवरी वाले संस्करण में स्थानीय नीतिगत चुनौतियों के विषय में गहन विश्लेषण होता है और जून के संस्करण में छोटे-छोटे विश्लेष्णात्मक लेख होते हैं.

Changpa community :-

  • चीनी सेना इस वर्ष जनवरी से लद्दाख के चुमूर और डेमचोक में घुस आई है. इसके चलते चांग्पा समुदाय के चरवाहे ग्रीष्मकालीन चारागाह के एक बड़े हिस्से से कट गये हैं. यही नहीं, लद्दाख के चांगथांग पठार में स्थित कोर्जोक-चुमुर पट्टी में पश्मीना बकरियों के बच्चे भी इस वर्ष अधिक मारे गये हैं.
  • पश्मीना बकरी को चांगथंगी बकरी भी कहते हैं. यह बकरी लद्दाख संघीय क्षेत्र में अत्यंत ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं. इन बकरियों से अत्यंत महीन ऊन निकलता है जो बुनाई के बाद पश्मीना के नाम से जाना जाता है. जो घुमंतू समुदाय इन बकरियों को पालता है उन्हें चांग्पा कहा जाता है. पश्मीना बकरियों ने चांगथंग, लेह और लद्दाख क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में कायाकल्प ला दिया है.

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