Sansar डेली करंट अफेयर्स, 08 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 08 July 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Women related issues.

Topic : Permanent commission to all women officers in Army

संदर्भ 

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक हालिया निर्णय में सरकार को सशस्त्र बलों में योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन / कमांड पोस्टिंग देने हेतु कहा था. हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय को लागू करने के लिए सरकार को एक महीने के विस्तार की स्वीकृति दी है.

चर्चा में क्यों?

कुछ समय पहले, सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि सरकार, शीर्ष न्यायालय के निर्णय के कार्यान्वयन में बाधा डाल रही है.

हालांकि, सरकार ने साफ़ किया कि निर्णय को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है तथा केवल आधिकारिक आदेश निर्गत करना ही शेष रह गया है.

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपान का निहितार्थ

  1. अब महिला अधिकारी सभी कमांड नियुक्तियों के लिए योग्य हो जाएँगी और आगे प्रोन्नति के लिए उनके रास्ते खुल जाएँगे.
  2. इसका एक अर्थ यह भी है कि जूनियर रैंक की महिला अधिकारी वही प्रशिक्षण पाठ्यक्रम कर सकती हैं जो पुरुष करते हैं. अब उन्हें संवेदनशील स्थानों पर नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतर प्रोन्नति के लिए आवश्यक होता है.

न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में की गयी टिप्पणियाँ

  • न्यायालय ने महिला अधिकारियों को महत्तम भूमिका दिये जाने के विरुद्ध तर्कों को निरस्त कर दिया, और इसे समानता के अधिकार’ का उल्लंघन बताया (अनुच्छेद 14).
  • न्यायालय ने जैविक तर्क (biological argument ) को भी विचलित करने वाला कहते हुए निरस्त कर दिया.
  • सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं की शारीरिक सीमा का हवाला देने वाले केंद्र के रूख को खारिज करते हुए इसे ‘लैंगिक रूढ़ियों’ और ‘महिला के खिलाफ लैंगिक भेदभाव’ पर आधारित बताया था, (अनुच्छेद 16).
  • उच्चतम न्यायालय के अनुसार, यह मात्र सेना में वास्तविक रूप से समानता लाने के लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देने की आवश्यकता’ को दर्शाता है.

भारत सरकार का तर्क

भारत सरकार का मंतव्य था कि एक तो महिलाएँ कठिन जगहों पर काम करने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होतीं, वहीँ दूसरी ओर उनके साथ मातृत्व और बच्चों की देखभाल की समस्या रहती है. साथ ही परिवार से अलग तैनाती बच्चों की पढ़ाई, गर्भावस्था के कारण काम से लम्बी अवधि तक दूर रहना आदि ऐसी बाते हैं जिनके कारण उनको स्थायी कमीशन नहीं मिलना चाहिए.

एक आपत्ति यह भी थी कि सेना मुख्यतः पुरुषों की सेवा है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाला सैनिक महिला अधिकारी के आदेश को मानने में कोताही बरत सकता है.

स्थायी कमिशन क्या है?

  • स्थायी कमिशन का मतलब है कि कोई अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है और इसके बाद वह पेंशन का भी हकदार होगा. इसके तहत वे अधिकारी भी स्थयी कमिशन में जा सकती हैं जो अभी शॉर्ट सर्विस कमिशन में काम कर रही हैं. शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत अधिकारियों को 14 वर्ष में सेवानिवृत्त कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है. इससे पहले महिलाएं केवल 10 वर्ष तक ही नौकरी कर पाती थीं.
  • दरअसल सेना में अधिकारियों की कमी पूरी करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू किया गया था. इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही शामिल किया जाता था. लेकिन स्थायी कमिशन के लिए केवल पुरुष ही अप्लाइ कर सकते थे. परेशानी यह थी कि कम समय में रिटायर होने के बाद रोजगार का संकट पैदा होता है और साथ ही एक उम्र के बाद दूसरी जगह नौकरी करने की उम्मीद भी कम हो जाती.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : PMAY-Urban

संदर्भ 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधान मंत्री आवास योजना- शहरी (PMAY-Urban) के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों के विकास के लिए अपनी स्वीकृति दे दी है.

पृष्ठभूमि

  • आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एक उप-योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों (एआरएचसी) की योजना की शुरुआत की है. माननीय वित्त मंत्री ने 14 मई, 2020 को इस योजना की घोषणा की थी. यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को पूरा करेगी.
  • कोविड-19 महामारी के परिणाम स्वरूप देश में बड़े स्तर पर कामगारों/शहरी गरीबों का पलायन देखने को मिला है, जो बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से शहरी क्षेत्रों में आए थे. आमतौर पर, ये प्रवासी किराया बचाने के लिए झुग्गी बस्तियों, अनौपचारिक/ अनाधिकृत कॉलोनियों या अर्ध शहरी क्षेत्रों में रहते हैं. उन्होंने कार्यस्थलों पर जाने के लिए अपना काफी समय सड़कों पर चलकर/ साइकिल चलाकर बिताया है और खर्च बचाने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डालते रहे हैं.

योजना से जुड़े प्रमुख बिंदु

योजना के रूप में शहरी प्रवासियों/गरीबों के लिए कम किराये वाले आवासीय परिसरों का कार्यान्वयन निम्न योजनानुसार किया जायेगा:

  1. वर्तमान में खाली पड़े सरकार द्वारा वित्तपोषित आवासीय परिसरों को 25 साल के लिए रियायत (कन्सेशन) समझौते के माध्यम से एआरएचसी में परिवर्तित कर दिया जाएगा. कन्सेशनेर को कमरों की मरम्मत/पुराना रूप देकर (रिट्रोफिट) और पानी, निकासी/सेप्टेज, स्वच्छता, सड़क आदि आधारभूत ढांचे से जुड़ी कमियों को दूर करके परिसरों को रहने लायक बनाना होगा. राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से कन्सेशनेर (कंपनी) का चयन करना होगा. इन परिसरों को पहले की तरह नया चक्र शुरू करने या खुद ही चलाने के लिए 25 साल के बाद यूएलबी को लौटाना होगा.
  2. 25 साल के लिए उपलब्ध अपनी खाली जमीन पर एआरएचसी के विकास के लिए निजी/सार्वजनिक इकाइयों को स्वीकृति का उपयोग, 50 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर/ एफएसआई, प्राथमिक क्षेत्र उधारी दर पर रियायती कर्ज, किफायती आवास से जुड़ी कर राहत आदि विशेष प्रोत्साहनों की पेशकश की जाएगी.
  3. एआरएचसी के अंतर्गत विनिर्माण उद्योगों, आतिथ्य सेवा, स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा प्रदाताओं, घरेलू/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माण या अन्य क्षेत्रों में लगे अधिकांश कार्यबल, कामगार, विद्यार्थी आदि लक्षित लाभार्थी होंगे, जो ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों से आते हैं और बेहतर अवसरों की तलाश में हैं.
  4. तकनीक नवाचार अनुदान के रूप में इस पर 600 करोड़ रुपये की धनराशि का व्यय होने का अनुमान है, जो निर्माण के लिए चिन्हित नवाचार तकनीक का उपयोग करने वाली परियोजनाओं के लिए जारी की जाएगी. एआरएचसी के अंतर्गत शुरुआती तौर पर लगभग तीन लाख लाभार्थियों को कवर किया जाएगा.
  5. एआरएचसी से शहरी क्षेत्रों में कार्यस्थल के निकट सस्ते किराये वाले आवासों की उपलब्धता के अनुकूल एक नया इकोसिस्टम तैयार होगा. एआरएचसी के अंतर्गत निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा होने का अनुमान है. एआरएचसी से अनावश्यक यात्रा, भीड़भाड़ और प्रदूषण में कमी आएगी.
  6. सरकार द्वारा वित्तपोषित खाली पड़े आवासों को किफायती उत्पादक उपयोग के लिए एआरएचसी में कवर किया जाएगा. इस योजना से अपनी खाली पड़ी जमीन पर एआरएचसी के विकास करने की दिशाओं में इकाइयों के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा और किराये वाले आवासीय क्षेत्र में उद्यमशीलता को प्रोत्साहन मिलेगा.

PMAY-Urban क्या है?

प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा किया गया है. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अभियान की शुरूआत 25 जून, 2015 को की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी पात्र शहरी परिवारों को 2022 तक आवास प्रदान करना है. योजना ने अभूतपूर्व प्रगति की है और शहरी क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ मकानों की मांग के अनुरूप 73 लाख से अधिक मकानों की मंजूरी दी है. लगभग 40 लाख मकान निर्माण के विभिन्न स्तरों पर हैं और 15 लाख से अधिक मकान बनाए जा चुके हैं. इसके अलावा लगभग 12 लाख मकान नई और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से निर्मित किये जा रहे हैं.

  • सरकार का यह मिशन है कि 2022, जब भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे, तक सभी शहरों में सभी के लिए आवास हो जाए.
  • इस योजना के लाभार्थी वे गरीब लोग, EWS (Economically Weak Sections) के नीचे के लोग और LIG (Low Income Group) के लोग होंगे.
  • यह योजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी.
  • पहले चरण में अप्रैल 2015 से मार्च 2017 में 100 शहरों में ऐसे आवास बनाए जायेंगे.
  • दूसरे चरण में अप्रैल 2017 से मार्च 2019 में 200 और शहरों को लिया जायेगा.
  • तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से मार्च 2022 में बाकी शहर इस योजना में शामिल किये जायेंगे.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है.
  • यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है.
  • इस ऋण पर15 साल तक के लिए 5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

योजना का माहात्म्य

  • इस योजना से कई क्षेत्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
  • एक करोड़ घर बनने का अर्थ है कि इसके लिए दो लाख करोड़ रु. के गृह ऋण का वितरण अवश्य होगा. साथ ही इस कार्य को पूरा करने में 80 से 100 मिलियन टन सीमेंट और 10 से 15 मिलियन टन इस्पात की आवश्कता होगी जिससे अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा.
  • एक करोड़ घर बनाने में लगभग 4 बिलियन वर्ग फीट जमीन जमीन लगेगी.
  • उपर्युक्त कारणों से संभावना है कि जब तक यह योजना चलेगी तब तक 9 से 10 करोड़ रोजगार के मौके मिलेंगे.

चुनौतियाँ

यह योजना अत्यंत विशाल योजना है परन्तु इसमें कई बाधाएँ भी हैं. कई बार अच्छी जगह जमीन नहीं मिलती है तो कहीं अपने ब्रांड की साख में क्षति अनुभव करते हुए निजी भवन निर्माता उत्साह से भाग नहीं लेते हैं. बोली लगाने कि प्रणाली, लागत एवं काम पूरा करने की समय-सीमा की कठोरता आदि ऐसे कई कारण हैं जिनसे भवन-निर्माण का कार्य उतनी तेजी से हो रहा है और इसके परिणामस्वरूप निर्माण की सामग्री थोक-भाव में उपलब्ध नहीं होने के कारण लागत भी बढ़ती जा रही है. इसके अतिरिक्त नई तकनीक के अभाव में उत्पादकता, लागत क्षमता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of Policies & Politics of Countries on India’s Interests.

Topic : What is the difference between the F-1 and M-1 Visa Programs?

संदर्भ 

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत से कहा है कि वह छात्रों के हितों को ध्यान रखते हुए एफ -1 वीज़ा और एम -1 वीजा के बारे में नए नियम के प्रभाव को कम करने की प्रयास करेगा.

पृष्ठभूमि

ट्रम्प प्रशासन ने एफ -1 और एम -1 वीजा धारकों के लिए नए नियमों की घोषणा की है जो मात्र ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन कर रहे हैं. इसके अंतर्गत वर्तमान में ऐसे कोर्स में नामांकित छात्रों को अमेरिका त्याग कर बाहर जाना होगा.

F-1 वीजा क्या है?

  • F-1 वीज़ा एक प्रकार का छात्र-वीज़ा है, जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका के किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज, विश्वविद्यालय, उच्च शैक्षणिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय अथवा किसी अन्य शैक्षणिक संस्थान में पूर्णकालिक छात्र के रूप में दाखिला लेने हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश करने की अनुमति देता है.
  • F-1 वीज़ा धारकों को पहले शैक्षणिक वर्ष के दौरान कैंपस के बाहर कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाती है, किंतु कुछ शर्तों और प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए वे कैंपस के अंदर कार्य कर सकते हैं. हालाँकि पहले शैक्षणिक वर्ष के बाद छात्र कैंपस के बाहर भी कार्य कर सकते हैं.

M-1 वीजा क्या है?

एम 1 वीजा अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दिया जाने वाला एक गैर-सरकारी वीजा है. यह वीजा प्राय: ऐसे छात्रों को दिया जाता है जो गैर-अकादमिक पाठ्यक्रम में अध्ययन करते हैं, उदाहरण के लिए व्यावसायिक या वोकेशनल कोर्स इत्यादि में.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Schemes for the vulnerable sections of the society.

Topic : Pradhan Mantri Ujjwala Yojana

संदर्भ 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के लाभ लेने की समय सीमा 1 जुलाई 2020 से 3 महीने के लिए बढ़ाने के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

पृष्ठभूमि

  • सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना नाम से एक राहत पैकेज घोषित किया था जिसका उद्देश्य गरीबों और समाज के ऐसे उपेक्षित लोगों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है जो महामारी से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं पैकेज में उन गरीब परिवारों के लिए राहत को भी समाहित किया गया था जिन्होंने पीएमयू वाई के अंतर्गत एलपीजी कनेक्शन की सुविधा प्राप्त की थी.
  • कोरोना वायरस के दौरान इस योजना का विस्तार निर्धन वर्ग के लोगों को सीधा फायदा पहुँचाने के लिए किया गया है. सरकार के इस निर्णय के माध्यम से गरीब परिवारों को निःशुल्क में LPG सिलेंडर वितरित किए जा रहे है.

प्रधानमन्त्री उज्ज्वला योजना

  • पीएमयूवाई की शुरूआत एक मई 2016 को की गयी. इसके तहत मार्च 2019 तक गरीब परिवार की पांच करोड़ महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य था. बाद में लक्ष्य को बढ़ाकर 2021 तक 8 करोड़ कर दिया गया और अब सभी घर को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का शुभारम्भ डॉ. बी.आर.अम्बेडकर की जयंती परतेलंगाना राज्य में किया गया.
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों तक एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) कनेक्शन पहुँचाना है.
  • इस योजना के अंतर्गत सामाजिक-आर्थिक-जाति-जनगणना (SECC) के माध्यम से पहचान किये गए गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों की वयस्क महिला सदस्य को केंद्र सरकार द्वारा प्रति कनेक्शन 1600 रुपये की वित्तीय सहायता के साथ जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है.
  • यह योजनापेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालयद्वारा लागू की जा रही है.

PMUY के फायदे

  • शुद्ध ईंधन के प्रयोग से महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार
  • अशुद्ध जीवाश्‍म ईंधन के प्रयोग न करने से वातावरण में कम प्रदूषण
  • खाने पर धुएं के असर से मृत्‍यु में कमी
  • छोटे बच्‍चों में स्‍वास्‍थ्‍य समस्या से छुटकारा.

प्रधानमन्त्री उज्ज्वला योजना में पाई गई खामियाँ

  • सिलिंडरों की खपत कम है और उनकी आपूर्ति में अच्छी-खासी देरी होती है.
  • इस योजना के अंतर्गत 31 मार्च, 2018 तक जिन उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ उठाया है उनकी संख्या 1.93 करोड़ है. परन्तु एक वर्ष में उन्हें औसत रूप से 3.66 रिफिल ही मिले हैं.
  • 31 दिसम्बर, 2018 की तिथि को 3.18 करोड़ लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा रहे थे, पर उन्हें वार्षिक रूप से मात्र 3.21 रिफिल ही मिले.
  • इस योजना के अंतर्गत कुछ ऐसे लोगों को भी लाभ निर्गत कर दिया गया है जो लाभार्थी नहीं थे. सरकारी तेल विपणन कंपनियों के सॉफ्टवेर में त्रुटि के चलते ऐसा हुआ है. ये वास्तविक लाभार्थियों की सही पहचान नहीं कर पाते हैं.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes.

Topic : Pradhan Mantri Gareeb Kalyan Anna Yojana

संदर्भ 

कोविड-19 संकट के दौरान देशभर में गरीबों को खाद्यान्न सहायता देने के लिए शुरू की गयी ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ की अवधि पांच महीने और बढ़ाने के फैसले पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दे दी.

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के विषय में

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को कोविड समस्या के दौरान खाद्यान आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु लाया गया था. पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का प्रारम्भ मार्च में किया गया था. इसके तहत 80 करोड़ व्यक्तियों, अर्थात् , भारत की लगभग दो-तिहाई जनसख्या को इस योजना के तहत कवर किया गया एवं इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना अन्‍न दिया गया. इसके अतिरिक्त लोगों को यह अनाज निःशुल्क प्रदान किया गया.
  • अद्यतन अधिसूचना के अनुसार, परिवार के प्रत्येक सदस्य कोकिग्रा मुफ्त चावल / गेहूं प्रदान करने के साथप्रत्येक परिवार को प्रति माह 1 किग्रा मुफ्त चना भी प्रदान किया जाएगा.
  • वर्तमान में प्रधानमत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दी है.

योजना की प्रगति

  • PMGKY के अंतर्गत, विभिन्न राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों ने अप्रैल-जून अवधि के लिए 116.34 एलएमटी खाद्यान्न का उठान किया है. अप्रैल, 2020 में 74.12 करोड़ लाभार्थियों को 37.06 एलएमटी (93 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया; मई, 2020 में 73.66 करोड़ लाभार्थियों को 36.83 एलएमटी (91 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया और जून, 2020 महीने में 59.29 करोड़ लाभार्थियों को 29.64 एलएमटी (74 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण हुआ.
  • भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 46,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत वित्तीय व्यय वहन कर रही है. 6 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और गुजरात को गेहूं का आवंटन किया जा चुका है और शेष राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को चावल का आवंटन किया गया है
  • दाल हेतु अप्रैल से जून तक कुल 5.87 एलएमटी की आवश्यकता का अनुमान था. भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 5,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत भार वहन कर रही है. अभी तक, 5.79 एलएमटी दालें राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को भेजी जा चुकी हैं और 5.59 एलएमटी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों तक पहुंच चुकी हैं, वहीं 4.47 एलएमटी दालों का वितरण किया जा चुका है.
  • 18 जून 2020 तक भंडार में कुल 76 एलएमटी दालें (तुअर-3.77 एलएमटी, मूंग-1.14 एलएमटी, उड़द-2.28 एलएमटी, चना- 1.30 एलएमटी और मसूर- 0.27 एलएमटी) उपलब्ध थीं.

Prelims Vishesh

Operation Samudra Setu :-

  • विदेशों से भारतीय नागरिकों स्वदेश लाने के प्रयास में, ऑपरेशन समुद्र सेतु को भारतीय नौसेना द्वारा 5 मई, 2020 को प्रारम्भ किया गया था. ऑपरेशन समुद्र सेतु 55 दिनों तक चला जिसमें 3,992 भारतीय नागरिकों को भारतीय नौसेना द्वारा समुद्री मार्ग से अपने देश वापस लाया गया.
  • समुद्र सेतु जैसा निकासी ऑपरेशन आखिरी बार 2015 में ऑपरेशन राहत के दौरान भारतीय नौसेना द्वारा किया गया था जब यमन से 5600 लोगों (960 विदेशी नागरिक, शेष भारतीय नागरिक) को निकाला गया था.
  • ऑपरेशन समुद्र सेतु 8 मई को प्रारम्भ हुआ जब आईएनएस आईएनएस जलाश्व ने मालदीव की राजधानी माले से 698 भारतीय नागरिकों को वापस लाया.
  • भारतीय नौसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना था कि पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी जहाज पर COVID -19 संक्रमण के फैलने की कोई घटना न घटित हो. भारतीय नौसेना ने योजनाबद्ध उपायों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लेते हुए पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है.

Agriculture Infrastructure Fund :-

  • 8 जुलाई, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ स्वीकृति दी. इस नई योजना को ‘एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ (कृषि अवसंरचना निधि) नाम दिया गया है.
  • एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में की थी. इस योजना के अंतर्गत, देश में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के जरिये कृषि क्षेत्र जैसे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्टार्टअप्स, प्राथमिक कृषि साख समितियों, कृषि-उद्यमियों को ऋण के रूप में 1 लाख करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.
  • योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2029-30 तक 10 वर्षों के लिए है.
  • एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के प्रबंधन और निगरानी के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा.
  • इस योजना के अंतर्गत 1 लाख करोड़ रुपये के ऋण मंजूर और आवंटित किए जाएंगे, जिनमें से चालू 2020-21 वित्तीय वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये और अगले तीन आगामी वित्तीय वर्ष में 30,000 करोड़ रुपये स्वीकृत और वितरित किए जाएंगे.
  • योजना के अंतर्गत निर्गत किए गए ऋणों पर सब्सिडाइज्ड ब्याज दर होगी. ब्याज की दर 3 प्रतिशत प्रति वर्ष होगी. 3 प्रतिशत की ब्याज दर 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए लागू होगी.
  • ऋण की अदायगी के लिए अधिस्थगन न्यूनतम 6 महीने से लेकर अधिकतम 2 वर्ष तक होगा.
  • माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE)  पात्र उधारकर्ताओं को क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करेगा. क्रेडिट गारंटी कवरेज 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए प्रदान की जायेगी.

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