Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 September 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 07 September 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Social Empowerment.

Topic : World Social Protection Report

संदर्भ 

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organisation – ILO) की “विश्व सामाजिक संरक्षण रिपोर्ट” 2020-22 (World Social Protection Report – 2020-22) के अनुसार विश्व में 4.1 बिलियन लोगों को किसी भी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है. ज्ञातव्य है कि सामाजिक सुरक्षा, उन उपायों को कहा जाता है जो कि व्यक्तियों के लिए वृद्धावस्था, बेरोज़गारी, बीमारी, विकलांगता, कार्य के दौरान चोट, मातृत्व अवकाश, स्वास्थ्य देखभाल और आय सुरक्षा के प्रावधानों को सुनिश्चित करते हैं.

विश्व सामाजिक संरक्षण प्रतिवेदन के मुख्य तथ्य

  • कोविड 19 महामारी ने संसार में व्याप्त असमानता, सामाजिक सुरक्षा के कवरेज में अंतराल को उजागर किया है. इस प्रकार महामारी ने सरकारों को सामाजिक सुरक्षा के लिए नीतियों के निर्माण के लिए बाध्य किया है.
  • प्रतिवेदन के अनुसार विश्व-भर में विभिन्‍न देश अपने जीडीपी का औसतन 12.9% सामाजिक सुरक्षा (स्वास्थ्य को छोड़कर) पर खर्च करत हैं. इनमें उच्च आय वाल देश औसतन 16.4%, उच्च-मध्यम आय वाले देश 8%, निम्न-मध्यम आय वाले देश 2.5% और निम्न-आय वाले देश 1.1% सामाजिक सुरक्षा पर खर्च करते हैं.
  • वैश्विक-स्तर पर नवजात शिशुओं वाली सिर्फ 45% महिलाओं को नकद मातृत्व लाभ प्राप्त होता है.
  • वर्तमान में वैश्विक स्तर पर चार बच्चों में से केवल एक (26.4%) को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त होता है.

भारत सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाये गये कदम

भारत सरकार ने नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों के सम्बन्ध कई योजनाओं/कार्यक्रमों को लागू किया है, जैसे- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, सुगम्य भारत अभियान, आयुष्मान भारत योजना, मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020, मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, वय वंदना योजना आदि.

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध के बाद ‘लीग ऑफ़ नेशन’ की एक एजेंसी के रूप में की गयी थी.

  1. इसे वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा स्थापित किया गया था.
  2. वर्ष 1946 में ILOसंयुक्त राष्ट्र (United Nations– UN) की पहली विशिष्ट एजेंसी बन गया.
  3. वर्ष 1969 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया.
  4. यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र त्रिपक्षीय एजेंसी है जो सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों को एक साथ लाती है.
  5. मुख्यालय : जिनेवा, स्विट्जरलैंड.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Citizenship (Amendment) Act

संदर्भ 

हाल ही में, तमिलनाडु विधानसभा मेंनागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (Citizenship (Amendment) Act, 2019) को निरस्त करने के लिए केंद्र से आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया है. इसके साथ ही, तमिलनाडु इस ‘अधिनियम’ के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करने वाले केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है.

कारण: तमिलनाडु विधानसभा में सरकार ने ‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम’ के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि यह कानून हमारे संविधान में निर्धारित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और भारत में प्रचलित सांप्रदायिक सद्भाव के लिए भी अनुकूल नहीं है.

पृष्ठभूमि

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA), 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और इसे 10 जनवरी, 2020 से लागू किया गया.

इस अधिनियम के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया गया है.

  • नागरिकता अधिनियम, 1955 में नागरिकता प्राप्त करने हेतु विभिन्न तरीके निर्धारित किये गए हैं.
  • इसके अंतर्गत, भारत में जन्म के आधार पर, वंशानुगत, पंजीकरण, प्राकृतिक एवं क्षेत्र समाविष्ट करने के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने का प्रावधान किया गया है.

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के बारे में भारत सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है चाहे वह मुसलमान ही क्यों न हो. यह अधिनियम किसी भी व्यक्ति की नागरिकता को छीनने का अधिनियम नहीं है, अपितु यह नागरिकता देने का काम करता है.

केंद्र सरकार का कहना है कि जो लोग 2014 तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भाग कर आये हैं उन्हीं को नागरिकता देने के लिए यह संशोधन किया गया है. ऐसे शरणार्थियों में एक भी मुसलमान नहीं है. ये शरणार्थी या तो हिन्दू हैं या बौद्ध हैं या जैन हैं या सिख हैं या पारसी हैं या इसाई हैं.

विरोधियों के तर्क

  • विरोधी सरकार की व्याख्या से संतुष्ट नहीं हैं. उनके अनुसार संशोधन में धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया है.
  • इस प्रकार यह अधिनियम संविधान की धारा 14 के विरुद्ध है, जिसमें समानता का अधिकार दिया गया है.
  • अधिनियम के माध्यम से अवैध आव्रजकों को नागरिकता देने का प्रयास हुआ है.
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में यह प्रावधान है कि किसी प्रवासी भारतीय नागरिक का पंजीकरण रद्द हो सकता है यदि वह किसी कानून का उल्लंघन करता है. इसमें उल्लंघन को ठीक से परिभाषित नहीं किया गया है, अतः मनमाने ढंग से व्याख्या कर के किसी भी प्रवासी भारतीय की नागरिकता समाप्त किये जाने का रास्ता खोल दिया गया है.

नागरिकता अधिनियम, 1955 

  • नागरिकता एक केंद्रीय विषय है और गृह मंत्रालय समय-समय पर नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 16 के तहत राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से राज्यों को शक्तियां प्रत्यायोजित करता है.
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 जन्म (धारा 3), अजनन (descent) (धारा 4), पंजीकरण (धारा 5), और देशीयकरण (धारा 6) के आधार पर भारतीय नागरिकता के अधिग्रहण का प्रावधान करता है.
  • नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता के पर्यवसान के 3 तरीके निर्धारित करता है जैसे – स्वैच्छिक त्यजन (Renunciation) पर्यवसान (Termination) और वंचित (Deprivation) किया जाना.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : Collegium System

संदर्भ 

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय के दस अपर न्यायाधीशों (Additional Judges) और केरल उच्च न्यायालय के दो अपर न्यायाधीशों को इन संबंधित उच्च न्यायालयों में स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया गया है.

इस कदम का महत्त्व

सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम द्वारा अदालतों में रिक्त पदों को भरने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं. वर्तमान में देश के 25 उच्च न्यायालयों में लगभग 465 से अधिक पद रिक्त हैं, और इन रिक्तियों को भरने के लिए ‘न्यायधीशों के नामों’ की लगातार अनुशंसाएँ होते रहने की संभावना है. भारत के सभी उच्च न्यायालयों में न्यायधीशों के कुल 1,098 पद स्वीकृत है और जिसमे से वर्तमान में 41% से अधिक पद खाली हैं.

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्तियां, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के उपबंध (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं.

सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने हेतु नामों की सिफारिश की जाती है.

कॉलेजियम व्यवस्था क्या है?

  1. उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया के सम्बन्ध में संविधान में कोई व्यवस्था नहीं दी गई है.
  2. अतः यह कार्य शुरू में सरकार द्वारा ही अपने विवेक से किया जाया करता था.
  3. परन्तु 1990 के दशक में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करना शुरू किया और एक के बाद एक कानूनी व्यवस्थाएँ दीं. इन व्यवस्थाओं के आलोक में धीरे-धीरे नियुक्ति की एक नई व्यवस्था उभर के सामने आई. इसके अंतर्गत जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की अवधारणा सामने आई.
  4. सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा वरिष्ठतम न्यायाधीश कॉलेजियम के सदस्य होते हैं.
  5. ये कॉलेजियम ही उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति के लिए नाम चुनती है और फिर अपनी अनुशंसा सरकार को भेजती है.
  6. सरकार इन नामों से ही न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कार्रवाई करती है.
  7. कॉलेजियम की अनुशंसा राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं है. यदि राष्ट्रपति किसी अनुशंसा को निरस्त करते हैं तो वह वापस कॉलेजियम के पास लौट जाती है. परन्तु यदि कॉलेजियम अपनी अनुशंसा को दुहराते हुए उसे फिर से राष्ट्रपति को भेज देती है तो राष्ट्रपति को उस अनुशंसा को मानना पड़ता है.

कॉलेजियम व्यवस्था (COLLEGIUM SYSTEM) कैसे काम करती है?

  • कॉलेजियम अपनी ओर से वकीलों और जजों के नामों की केन्द्रीय सरकार को अनुशंसा भेजता है. इसी प्रकार केंद्र सरकार भी अपनी ओर से कॉलेजियम को कुछ नाम प्रस्तावित करती है.
  • कॉलेजियम द्वारा भेजे गये नामों की केंद्र सरकार तथ्यात्मक जाँच करती है और फिर सम्बंधित फाइल को कॉलेजियम को लौटा देती है.
  • तत्पश्चात् कॉलेजियम केंद्र सरकार द्वारा भेजे गये नाम और सुझावों पर विचार करता है और फिर फाइल को अंतिम अनुमोदन के लिए सरकार को फिर से भेज देता है. जब कॉलेजियम फिर से उसी नाम को दुबारा भेजता है तो सरकार को उस नाम पर अनुमोदन देना पड़ता है. किन्तु सरकार कब अब अपना अनुमोदन देगी इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं है. यही कारण है कि जजों की नियुक्ति में लम्बा समय लग जाता है.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Issues related to education.

Topic : Times World University Ranking 2022

संदर्भ 

71 भारतीय विश्वविद्यालयों ने टाइम्स वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022 के लिए क्वालीफाई किया है. ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष 63 भारतीय विश्वविद्यालयों ने इस रैंकिंग में जगह बनाई थी. हालाँकि कोई भी भारतीय विश्वविद्यालय शीर्ष 300 में स्थान नहीं बना पाया है.

रैंकिंग के प्रमुख बिंदु

  • ब्रिटेन के ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय को रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर रखा गया है.
  • नवीनतम रैंकिंग में 99 देशों के 1600 से अधिक विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें अमरीका के सर्वाधिक 183 विश्वविद्यालय इसमें शामिल हैं.
  • IISc बंगलौर सर्वोच्च रैंक हासिल करने वाला भारतीय विश्वविद्यालय है. इसे 301-350 रैंक वाले वर्ग में रखा गया है.
  • इसके बाद आईआईटी रोपड़ (351-400) वाले वर्ग में है.
  • आईआईटी दिल्ली, जामिया मिलिया इस्लामिया, जेएनयू (601-800) वाले वर्ग में शामिल हैं.

भारत सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता एबं पहुँच में सुधार हेतु निम्न कदम उठाये गये हैं

  • शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं समावेशन कार्यक्रम (EQUIP)
  • शिक्षा में बुनियादी ढाँचे और प्रणालियों को पुनर्जीवित करने के लिए RISE पहल का संचालन किया जा रहा है.
  • विज्ञान में परिवर्तनकारी और उन्नत अनुसंधान के लिए योजना (STARS) आरम्भ की गई है.
  • भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित संस्थान (IoE) योजना चलाई जा रही है.
  • इसके अलावा एक अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) को आरम्भ किया गया है.

Prelims Vishesh

Vidyanjali Portal :-

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘विद्यांजलि पोर्टल’ सहित शिक्षा क्षेत्र में कई अन्य पहलों को लांच किया.
  • विद्यांजलि पोर्टल स्कूल विकास के लिए शिक्षा स्वयंसेवकों, दाताओं या CSR योगदान कर्ताओं की सुविधा के उद्देश्य से शुरू किया गया था.
  • शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है, NRI, PIO या भारत में पंजीकृत कोई भी संगठन, संस्थान, कंपनी और समूह निम्नलिखित दो तरीकों से स्वेच्छा से योगदान दे सकता है: –
  1. सुविधाएँ: संपत्ति या सामग्री या उपकरण जैसे बुनियादी नागरिक बुनियादी ढांचा. कक्षा समर्थन सामग्री और उपकरण, बुनियादी विद्युत बुनियादी ढांचा, डिजिटल बुनियादी ढांचा, पाठ्येतर गतिविधियों के लिए उपकरण, खेल, योग और स्वास्थ्य आदि.
  2. सेवाएँ: सेवारत और सेवानिवृत्त शिक्षक, वैज्ञानिक, सरकारी या अर्ध सरकारी अधिकारी, स्व- रोजगार और वेतनभोगी पेशेवर, सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मी, शैक्षणिक संस्थानों के पूर्व छात्र, गृहिणी और अन्य साक्षर व्यक्ति अनुरोध पर स्कूल में स्वयंसेवा के रूप में योगदान दे सकते हैं.

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