Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 December 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 07 December 2018


GS Paper 1 Source: The Hindu

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Topic : MAYURBHANJ CHHAU

mayurbhanj chhau

मयूरभंज छऊ नृत्य शैली

मयूरभंज छऊ नृत्य शैली का अपना एक लम्बा इतिहास है. आरम्भ में यह एक आदिवासी नृत्य था जिसका जन्म 18वीं शताब्दी में ओडिशा के मयूरभंज जंगलों में हुआ था. 19वीं शताब्दी में इसने एक युद्धकला शैली का दर्जा (martial art form) प्राप्त कर लिया था. परन्तु पुनः कालांतर में छऊ नृत्य का स्वरूप अधिक कोमल हो गया.

राजाओं के संरक्षण में इसका प्रचार-प्रसार हुआ और आज यह पूर्वी भारत की कला और संस्कृति के अंदर एक उत्कृष्ट नृत्य शैली के रूप में जाना जाता है.

छऊ नृत्य के प्रकार

छऊ नृत्य की तीन शैलियाँ हैं जो उन तीन क्षेत्रों के नाम पर हैं जहाँ यह खेला जाता है. उदाहरण के लिए – पुरुलिया (प.बंगाल) की छऊ, सरायकेला (झारखण्ड) की छऊ  तथा मयूरभंज (ओडिशा) की छऊ.

इन तीनों उपशैलियों में जो अंतर है वह मुख्यतः मुखौटों के प्रयोग को लेकर है. सरायकेला और पुरुलिया शैली में नृत्य के समय मुखौटे लगाये जाते हैं, पर मयूरभंज छऊ में मुखौटों का प्रयोग नहीं होता.

सरायकेला और पुरुलिया शैलियों में नर्तक जो मुखौटे लगाते हैं उनकी रूप रेखा अलग होती है.


GS Paper 1 Source: The Hindu

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Topic : Kamsale dance

kamsale dance

  • कमसाले कर्नाटक की एक नृत्य शैली है जिसे बीसू कमसाले भी कहते हैं. यह एक अनूठी लोककला है जिसका प्रदर्शन भगवान् माले महादेश्वर के भक्तजन किया करते हैं.
  • कमसाले पीतल के बने उस वाद्ययंत्र को भी कहते हैं जो कमसाले नृत्य के समय बजाया जाता है. जब कमसाले नृत्य होता है तो नर्तक एक हाथ में इस वाद्ययंत्र और दूसरे में काँसे की एक चकरी रखता है और दोनों से एक लयात्मक टंकार उत्पन्न की जाती है.
  • यह एक सामूहिक नृत्य है जो कर्नाटक के मायसुरु, नैन्जनागुडु, कोल्लेगल और बेंगलुरु क्षेत्रों के गाँवों में पुरुषों के द्वारा नाचा जाता है.
  • कामसाले वाद्ययंत्र होने के साथ ही एक नृत्य उपकरण भी है जिसका प्रोयग नर्तक स्वयं करते हैं.
  • कामसाले नृत्य महादेश्वर अथवा भगवान् शिव की पूजा की परम्परा से जुड़ा हुआ है. यह पूजा हालूकुरुबा समुदाय द्वारा की जाती है.  इस शैली के अधिकांश नर्तक भी इसी समुदाय के होते हैं.
  • इस नृत्य में प्रयोग होने वाला संगीत अत्यंत लयपूर्ण और मधुर होता है.
  • कमसाले नृत्य उस दीक्षा का अंग होता है जो अध्यात्मिक गुरु अथवा शिक्षक अपने शिष्य को प्रदान करता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Central Information Commission

संदर्भ

भारत सरकार केन्द्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission – CIC) के रिक्त पदों को भरने जा रही है.

भर्ती की आवश्यकता क्यों?

सूचना के क्षेत्र में इस सबसे बड़े निकाय में 11 सदस्य होते हैं. परन्तु हाल में ढेर सारी सेवानिवृत्ति होने के कारण इसमें केवल तीन ही सदस्य बचे हैं. यहाँ तक कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद भी गत महीने से खाली है. इस प्रकार अभी 8 सदस्य नहीं हैं.

CIC क्या है?

सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुभाग 12 यह प्रावधान करता है कि भारत सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना देकर केन्द्रीय सूचना आयोग का गठन करेगी जिसमें 1 मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 केन्द्रीय सूचना आयुक्त होंगे.

अधिनियम के अनुभाग 12 (3) में आगे कहा गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त और केन्द्रीय सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की अनुशंसा पर होगी. इस समिति का स्वरूप निम्नवत् होगा –

  1. प्रधानमंत्री इस समिति के अध्यक्ष होंगे.
  2. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एक सदस्य होंगे.
  3. तीसरे सदस्य कोई केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री होंगे जो प्रधानमंत्री द्वारा नामांकित किए जायेंगे.

केन्द्रीय सूचना आयोग के पदों के लिए अर्हता

  • सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुभाग 12 (5) के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त वे व्यक्ति होंगे जो सार्वजनिक रूप से सुप्रतिष्ठित होंगे और जिन्हें इन विषयों का गहन ज्ञान और अनुभव होगा – विधि, विज्ञान एवं तकनीक, समाज सेवा, प्रबन्धन, पत्रकारिता, जन-मीडिया अथवा प्रशासन.
  • अधिनियम के अनुभाग 12 (6) में यह बतलाया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त अथवा केन्द्रीय सूचना आयुक्त संसद के सदस्य अथवा किसी भी राज्य अथवा केन्द्रीय-शाषित क्षेत्र के विधायक नहीं होंगे. साथ ही वे ऐसे व्यक्ति नहीं होंगे जो किसी अन्य लाभ के पद पर हैं अथवा किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं अथवा कोई व्यवसाय करते हों अथवा कोई पेशा करते हों.

मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल और वेतन

  • अधिनियम के अनुभाग 13 के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल पदधारण के अगले पाँच साल तक या 65 वर्ष की आयु तक होगा. उसकी दुबारा नियुक्ति नहीं होगी.
  • अधिनियम के अनुभाग 13(5)(a) में बतलाया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तें वही होंगी जो मुख्य चुनाव आयुक्त की होती हैं.

केन्द्रीय सूचना आयुक्तों का कार्यकाल एवं सेवा शर्तें

  • प्रत्येक सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पाँच वर्ष की अवधि के लिये या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक इनमें से जो भी पहले आये, पद धारण करेगा और सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिये पात्र नहीं होगा.
  • परन्तु प्रत्येक सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर, धारा 12 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिये पात्र होगा.
  • परन्तु यह प्रावधान भी है कि जहाँ सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है वहाँ उसकी पदावधि सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पाँच वर्ष से अधिक नहीं होगी.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Freight Village in Varanasi

संदर्भ

जहाजरानी मंत्रालय ने वाराणसी में गंगा नदी के तट पर अंतर्देशीय जलमार्ग टर्मिनल के पास एक माल-ढुलाई गाँव (freight village) बनाने हेतु 156 करोड़ रुपयों की स्वीकृति प्रदान की है.

इस गाँव का निर्माण भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (Inland Waterways Authority of India) करेगा.

माल-ढुलाई गाँव क्या होते हैं?

  • माल-ढुलाई गाँव (freight village) वास्तव में यातायात के नाभिक केंद्र (hub) होंगे जहाँ यातायात से सम्बंधित सभी प्रकार की सुविधाएँ होंगी.
  • Freight village में स्थानीय खुदरा विक्रेता, गोदाम संचालक, माल-ढुलाई सेवा देने वाले अपने-अपने कार्यालय प्रस्थापित कर सकते हैं.

इसके लाभ

  • माल ढुलाई का एक नाभिक केंद्र होगा जहाँ माल रखा जायेगा और उसका गुण संवर्धन भी किया जायेगा.
  • इस केंद्र से बनारस के पेशेवर मालढुलाई उद्योग के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा.

इस विषय में विश्व बैंक का अध्ययन

  • वाराणसी में माल-ढुलाई गाँव खोले जाने के विषय में विश्व बैंक ने एक अध्ययन किया था. इस अध्ययन में पाया गया कि इसके लिए वाराणसी एक उपयुक्त स्थान है.
  • अध्ययन में यह भी पाया गया कि यहाँ अंतर्देशीय जलमार्ग में यातायात बढ़ने की संभावना है क्योंकि जलमार्ग विकास परियोजना के अंतर्गत पास में ही एक बहुद्देशीय टर्मिनल चालू होने वाला है.

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण क्या है?

  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) एक वैधानिक प्राधिकरण है जो 27 अक्टूबर, 1986 में अस्तित्व में आया था. यह भारत में जलमार्ग का काम देखता है.
  • इसका मुख्यालय उत्तर प्रदेश के नोयडा शहर में स्थित है.
  • यह जलमार्गों में आवश्यक निर्माण कार्य करता है तथा साथ ही नई परियोजनाएँ आर्थिक रूप से हाँथ में लेने लायक हैं या नहीं इसकी जाँच करता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Pradhan Mantri Awas Yojana – Urban

संदर्भ

रेटिंग एजेंसी CRISIL का कहना है कि यदि केंद्र सरकार प्रधानमन्त्री आवस योजना – शहरी (PMAY-Urban)के अंतर्गत सभी को 2022 तक घर देने के लक्ष्य को पूरा करना चाहती है और उसके लिए एक करोड़ घर अगले तीन वर्षों में बनाना चाहती है तो इसके लिए उसे एक लाख करोड़ रू. की धनराशि का प्रबंध करना होगा.

PMAY-Urban क्या है?

प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ((MoHUPA) द्वारा किया गया है.

  • सरकार का यह मिशन है कि 2022, जब भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे, तक सभी शहरों में सभी के लिए आवास हो जाए.
  • इस योजना के लाभार्थी वे गरीब लोग, EWS (Economically Weak Sections) के नीचे के लोग और LIG (Low Income Group) के लोग होंगे.
  • यह योजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी.
  • पहले चरण में अप्रैल 2015 से मार्च 2017 में 100 शहरों में ऐसे आवास बनाए जायेंगे.
  • दूसरे चरण में अप्रैल 2017 से मार्च 2019 में 200 और शहरों को लिया जायेगा.
  • तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से मार्च 2022 में बाकी शहर इस योजना में शामिल किये जायेंगे.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है.
  • यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है.
  • इस ऋण पर 15 साल तक के लिए 6.5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

योजना का माहात्म्य

  • इस योजन से कई क्षेत्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
  • एक करोड़ घर बनने का अर्थ है कि इसके लिए दो लाख करोड़ रु. के गृह ऋण का वितरण अवश्य होगा. साथ ही इस कार्य को पूरा करने में 80 से 100 मिलियन टन सीमेंट और 10 से 15 मिलियन टन इस्पात की आवश्कता होगी जिससे अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा.
  • एक करोड़ घर बनाने में लगभग 4 बिलियन वर्ग फीट जमीन जमीन लगेगी.
  • उपर्युक्त कारणों से संभावना है कि जब तक यह योजना चलेगी तब तक 9 से 10 करोड़ रोजगार के मौके मिलेंगे.

चुनौतियाँ

यह योजना अत्यंत विशाल योजना है परन्तु इसमें कई बाधाएँ भी हैं. कई बार अच्छी जगह जमीन नहीं मिलती है तो कहीं अपने ब्रांड की साख में क्षति अनुभव करते हुए निजी भवन निर्माता उत्साह से भाग नहीं लेते हैं. बोली लगाने कि प्रणाली, लागत एवं काम पूरा करने की समय-सीमा की कठोरता आदि ऐसे कई कारण हैं जिनसे भवन-निर्माण का कार्य उतनी तेजी से हो रहा है और इसके परिणामस्वरूप निर्माण की सामग्री थोक-भाव में उपलब्ध नहीं होने के कारण लागत भी बढ़ती जा रही है. इसके अतिरिक्त नई तकनीक के अभाव में उत्पादकता, लागत क्षमता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Beach pollution in India

संदर्भ

राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (National Centre of Coastal Research – NCCR) ने हाल ही में  भारत के समुद्र तटों (beaches) में प्रदूषण के विषय में एक प्रतिवेदन निर्गत किया है.

प्रतिवेदन के मुख्य तथ्य

  • NCCR ने भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी घाटों के छ: अलग-अलग समुद्र तटों में जाकर वहाँ कचरे का एक गुणवत्तापूर्ण विश्लेषण किया है. यह प्रतिवेदन उसी पर आधारित है.
  • प्रतिवेदन में पाया गया कि देश में समुद्र तटों में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है.
  • समुद्र तटों पर प्लास्टिक कचरे फैलाने के लिए सबसे बड़े दोषी पर्यटक और मछुआरे हैं.
  • प्लास्टिक कचरे का 40%-96% मात्र पर्यटकों द्वारा फैलाए जाते हैं. उदाहरण के लिए चेन्नई के इलिएट बीच में पर्यटकों ने जो प्लास्टिक छोड़े, वह समूचे कचरे का 40% था. ओडिसा के गोपालपुर में तो यह 96% तक था. जहाँ तक अन्य चार बीचों (beaches) की बात है, वहाँ स्थिति इस प्रकार थी – फोर्ट कोची बीच (66%), कर्नाटक का कारवार बीच (60%), विशाखापत्तनम का आर.के. बीच (87%) एवं अंडमान द्वीप का रंगाचंग बीच (81%).
  • कचरे के मामले में पर्यटकों के पश्चात् मछुआरों का नंबर आता है. इसके लिए मछली मारने के जाल सबसे बड़े कारण रहे, परन्तु प्रदूषण फैलाने में मछली मारने की प्रक्रिया भी दोषी रही है.
  • इलिएट बीच और फोर्ट कोची बीच जैसे शहरी क्षेत्रों में जैव-औषधीय कचरा कहीं ज्यादा मिला.
  • पर्यटकों ने प्लास्टिक का कचरा फैलाया ही साथ में नालों से भी ऐसे कचरे बरसात के समय समुद्री तटों पर आकर बिखर गये.
  • अधिकांश कचरे प्लास्टिक बोतल, खाने-पीने के बर्तन और थर्मोकोल के रूप में थे.

समाधान क्या है?

  • जमीन पर फैलने वाले कचरे और उसको समुद्र में घुसने से रोकने के लिए भारत को आज एक राष्ट्रीय समुद्री कचरा नीति चाहिए.
  • विशेषज्ञों का कहना है कि तटीय जल में ठोस कचरा कम से कम पहुँचे इसके लिए ऊपरी भागो में कचरा बूम (debris booms) और फीन डिफ्लेक्टर लगाए जाएँ.
  • यह भी आवश्यक है कि भारत अपने समुद्र तटों के लिए नीला झंडा अर्थात् Blue Fag योजना लागू करे.
  • ब्लू फ्लैग एक ईको-लेबल है जो विश्व-भर में समुद्र तटों को पर्यावरण और सुरक्षा मानकों को लागू करने के लिए दिया जाता है.
  • इन मानकों का निर्धारण 1985 में कोपेनहेगन में स्थित “Foundation for Environmental Education (FEE)” द्वारा किया गया था.

ब्लू फ्लैग टैग

  • भारत में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा ब्लू फ्लैग प्रोजेक्ट में पहली बाल कार्य दिसम्बर 2017 में शुरू किया गया था.
  • इस प्रकार का प्रमाणपत्र (tag) उस बीच (beach) को दिया जाता है जो पर्यावरण के अनुकूल एवं साफ़-सुथरा हो तथा जिसमें सैलानियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ हों.
  • 5 जून, 2018 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चंद्रभागा बीच को यह प्रमाणपत्र दिया गया.

Prelims Vishesh

Sahitya Akademi Award : –

  • साहित्य अकादमी ने 2018 के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार घोषित कर दिए हैं. यह पुरस्कार 24 विभिन्न भारतीय भाषाओं में साहित्य सृजन के लिए दिया जाता है.
  • इस वर्ष भी पूर्व की भाँति 24 कवियों और लेखकों को यह पुरस्कार दिया गया.
  • ये पुरस्कार 1954 से दिए जा रहे हैं.
  • पुरस्कार में एक ताम्र-पत्र (सत्यजीत राय द्वारा रूपांकित), एक शाल और एक लाख रु. दिया जाता है.

Sino-India Joint Exercise Hand-in-Hand 2018 :-

  • भारत और चीन की सेना दक्षिण चीन के चेंगदु में आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में अपनी क्षमताओं में वृद्धि करने औ आपसी समझ को विकसित करने के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगी.
  • यह सैन्य अभ्यास 10 दिसंबर, 2018 से शुरू होगा, जो 14 दिन जारी रहेगा.
  • रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल रेन गुओकियांग ने बताया कि भारत और चीन के सातवें संयुक्त सैन्य अभ्यास में दोनों पक्ष 100-100 सैनिकों को भेजेंगे.
  • इस सैन्य-अभ्यास को ‘हाथ में हाथ’ नाम दिया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद विरोधी अभियान पर ध्यान केंद्रित करना है.
  • यह अभ्यास एक वर्ष के अंतराल पर हो रहा है.

Cabinet approves Agriculture Export Policy, 2018 :-

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 06 दिसंबर 2018 को देश की पहली कृषि निर्यात नीति, 2018 को स्वीकृति प्रदान की.
  • इस नीति का उद्देश्य 2022 तक कृषि उत्पादों का निर्यात 60 अरब डॉलर करना है ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके.
  • वर्तमान में कृषि उत्पादों का निर्यात 37 अरब डॉलर के समतुल्य है. कृषि निर्यात नीति व्यवस्था के माध्यम से किसानों को निर्यात के अवसरों का लाभ मिलेगा.
  • इस नीति से अधिकतर जैविक और प्रसंस्कृत आहार के निर्यात पर अंकुश समाप्त हो जाएगा तथा कृषि उत्पादों के निर्यात के कई मार्ग खुल जाएँगे.

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