Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 07 August 2019


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : SANKALP Project

संदर्भ

पिछले दिनों विश्व बैंक से प्राप्त ऋण के सहयोग से चलाये जाने वाले “संकल्प कार्यक्रम” की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई.

संकल्प योजना क्या है?

  • संकल्प का पूरा नाम है – कौशल्य अर्जन एवं आजीविका प्रोत्साहन हेतु ज्ञान के प्रति जागरूकता / Skills Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion.
  • यह एक केंद्र संपोषित योजना है जो कौशल्य विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होती है.
  • इस योजना में “परिणाम” पर बल दिया गया है एवं “व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण” को इस तरह रूपांकित किया गया है कि उसकी परिणति परिणाम के रूप में दिखे.
  • संकल्प योजना राष्ट्रीय कौशल्य विकास मिशन, 2015 (National Skill Development Mission – NSDM) के एक अंगीभूत कार्यक्रम है.
  • आशा की जाती है कि इसके माध्यम से 5 करोड़ युवाओं को बाजार की माँग के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सकेगा.

उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य कौशल्य विकास के लिए आवश्यक सांस्थिक तंत्र को सुदृढ़ करना तथा कार्यबल को ऐसे गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना है जो बाजार की माँग के अनुरूप हो.

कार्य

  • यह योजना राष्ट्रीय कौशल्य विकास मिशन का एक अंग तो है ही, यह भारत सरकार के अन्य कार्यक्रमों से भी जुड़ी है, जैसे – मेक इन इंडिया और स्वच्छता अभियान.
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से कामगारों को घरेलू और विदेशी अपेक्षाओं के अनुसार प्रशिक्षित करना है.
  • इस उद्देश्य को पाने के लिए इस योजना में जो कार्य होंगे वे इस प्रकार हैं – i) राष्ट्रीय एवं राज्य के स्तर पर बाजार के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाला प्रशिक्षण देना और उसका अनुश्रवण करना ii) कौशल्य विकास के कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार लाते हुए उन्हें बाजार के लिए संगत बनाना iii) महिलाओं और अन्य वंचित समूहों के लिए कौशल्य प्रशिक्षण को सुलभ बनाना iv) निजी-सार्वजनिक भागीदारियों (PPPs) के माध्यम से कौशल्य प्रशिक्षण को विस्तार देना.

GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : BS – VI norms

संदर्भ

भारत सरकार ने BS – VI उत्सर्जन मानक के पालन से सैन्य और परासैन्य बलों की बख्तरबंद एवं विशिष्ट गाड़ियों को आगामी अप्रैल, 2020 तक छूट दे दी है.

ऐसा क्यों?

  • यह छूट इसलिए दी गई है कि ये गाड़ियाँ सुदूर एवं विपरीत भूस्थलों में तथा प्रतिकूल वातावरण में चलाना होता है जो एक अत्यंत दुष्कर कार्य होता है.
  • सुरक्षा कारणों से और विशिष्ट कार्रवाइयों से जुड़ी अपेक्षाओं के कारण BS – VI के अनुरूप इनके लिए उचित इंजन का निर्माण करने में अच्छा-ख़ासा समय लग सकता है.
  • जिन परिस्थितियों में सैन्य गाड़ियाँ चलती हैं, उनमें आदर्श परविहन और ईंधन भंडारण बनाए रखना अत्यंत कठिन होता है.

BS मानक (BS Norms) क्या है?

  • BS का पूरा नाम है – Bharat Stage
  • Bharat Stage (BS) कारों के अन्दर प्रयोग होने वाले ईंजन के द्वारा मुक्त किये गये प्रदूषक तत्त्वों के स्तर को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार के द्वारा बनाया गया मानक है. यह मानक दुपहिया, तिपहिया, चौपहिया वाहनों के साथ-साथ निर्माण कार्य में प्रयुक्त वाहनों पर भी लागू होता है.
  • भारत सरकार ने तय किया है कि वह BS – IV के बाद अब सीधे BS – VI के मानकों को 1 अप्रैल, 2020 से लागू कर देगा क्योंकि ये मानक वैश्विक-स्तर के अनुरूप हैं. तात्पर्य यह है कि 1 अप्रैल, 2020 के बाद भारत में वही गाड़ियाँ बिकेंगी और पंजीकृत होंगी जिनमें BS – VI लगा होगा.
  • विदित हो कि भारत प्रदूषण के विषय में यूरो (European) प्रदूषण मानकों का अनुसरण करता रहा है पर इस मामले में वह पाँच साल पीछे चल रहा है.

BS IV और BS VI में क्या अंतर है?

  • वर्तमान बीएस – IV और नए बीएस -6 मानकों में जो मुख्य अंतर है वहगंधक (sulfur) की मात्रा से सम्बंधित है.
  • BS VI प्रमाणित ईंजन 80% कम सल्फर छोड़ता है अर्थात् वर्तमान 50 अंश प्रति मिलियन के स्थान पर इससे होने वाला उत्सर्जन 10 अंश प्रति मिलियन (ppm) होता है.
  • विश्लेषकों का कहना है कि BS VI प्रमाणित ईंजन लगाने से डीजल की गाड़ियों में 70% कम NOx (nitrogen oxides) निकलेगा तथा पेट्रोल की गाड़ियों में 25% कम NOx निकलने की आशा है.

ईंधन के स्तरों का उत्क्रमण आवश्यक क्यों?

वायु प्रदूषण को रोकने के लिए यह आवश्यक है कि ईंधन से सम्बंधित मानकों का कठोरता से उत्क्रमण होता रहे. भारत में अभी भी मोटर वाहनों का प्रचलन विकसित देशों की तुलना में कम है. इसलिए विश्व-भर के कार निर्माताओं की नज़र भारत पर टिकी हुई है. दूसरी ओर, दिल्ली जैसे शहरों की वायु गुणवत्ता संसार भर में सबसे निकृष्ट मानी जाती है. कुछ दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी में सम-विषम योजना लागू की गई थी जिससे वहाँ वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ. इसके अतिरिक्त बड़े-बड़े डीजल कारों का पंजीकरण रोकने के लिए न्यायालय में याचिकाएं दी गई हैं. अतः सरकार इस विषय में शिथिलता से काम नहीं चला सकती.

चीन जैसे अन्य विकासशील देशों ने कुछ समय पहले अपने वाहनों को उत्क्रमित कर उन्हें यूरो 5 उत्सर्जन मानकों के बराबर पहुँचा दिया है, परन्तु भारत इस मामले में पीछे रह गया है. चीन और मलेशिया का इस विषय में यह अनुभव रहा है कि निकृष्ट वायु गुणवत्ता व्यवसाय के लिए भी ठीक नहीं है. अतः उत्सर्जन मानकों में सुधार करने से हमारे यहाँ निवेश भी बढ़ेंगे.


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders.

Topic : Institutes of Eminence Scheme

संदर्भ

पिछले दिनों अपनी बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकृत विशेषज्ञ समिति (Empowered Expert Committee – EEC) के प्रतिवेदनों पर विचार किया. विदित हो कि श्री एन. गोपाल स्वामी की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने अनुशंसा की है कि पंद्रह सरकारी संस्थानों और पंद्रह निजी संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान की पदवी देने पर विचार किया जा सकता है.

इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स योजना क्या है?

  • यह योजना भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की है. इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को वैश्विक मान्यता दिलवाना है.
  • चुने गये संस्थानों को सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वयत्तता मिलेगी.
  • सरकार इन संस्थानों में से दस को चलाएगी और उन्हें विशेष धनराशि मुहैया कराएगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में संस्थानों को चुनने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में चयन के लिए वही शैक्षणिक संस्थानयोग्य माने जाएँगे जिन्हें वैश्विक-स्तर पर शीर्षस्थ 500 संस्थानों में स्थान मिला हुआ है.
  • इसके लिए वह संस्थान भी आवेदन कर सकता है जिसको राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) के अंदर शीर्षस्थ 50 में स्थान मिला है.
  • ‘उत्कृष्ट संस्थान’ के रूप में चुने गए प्रत्येक ‘सार्वजनिक संस्थान’ को पाँच साल की अवधि में 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी. निजी संस्थानों को यह वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी. निजी संस्थानों को यह दर्जा तभी मिलेगा जब वह आगामी 15 वर्ष के लिए अपनी ऐसी योजना प्रस्तुत करे जो भरोसा देने वाली हो.
  • इन संस्थानों को विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए, विदेशी अध्यापकों को भर्ती करने के सन्दर्भ में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी.
  • उन्हें UGC की अनुमति के बिना शीर्ष 500 विश्व-संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग करने की भी अनुमति प्रदान की जायेगी.

निहितार्थ

उत्कृष्ट संस्थानों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी और उनको UGC को रिपोर्ट भी नहीं देना पड़ेगा. वे विदेश से छात्रों को ले सकेंगे और विदेशी शिक्षकों की नियुक्ति कर सकेंगे. इसके अतिरिक्त वे एक लचीला पाठ्यक्रम और शुल्क का ढाँचा अपना सकते हैं.

विश्व-स्तरीय संस्थानों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग के अनुसार, भारत में विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों का अभाव है और यहाँ के शिक्षकों को विदेश की तुलना में कम पैसा दिया जाता है. चीन की तुलना में भारत में विश्वविद्यालय के स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधी है. इस मामले में वह अधिकांश लैटिन अमेरिकी और अन्य मध्यम आय वाले देशों से कहीं पीछे है.


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019

संदर्भ

पिछले दिनों गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 संसद से पारित हो गया.

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) विधेयक के मुख्य तथ्य

  • इस विधेयक के माध्यम से 1967 के गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम को संशोधित किया जा रहा है.
  • आंतकवादी किसे कहेंगे? : मूल अधिनियम के अनुसार केंद्र सरकार किसी संगठन को आतंकवादी करार दे सकती है यदि यह : i) आतंक की कार्रवाई करता है अथवा उसमें शामिल होता है ii) आतंकवाद के लिए तैयारी करता है iii) आतंकवाद को बढ़ावा देता है, अथवा iv) किसी भी रूप में आतंकवाद से जुड़ा हुआ है.
  • पारित संशोधन में यह अतिरिक्त प्रावधान किया गया है कि सरकार चाहे तो इन्हीं आधारों पर किसी व्यक्ति विशेष को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है.
  • सम्पत्ति की जब्ती का अनुमोदन : विवेचना यदि राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) के अधिकारी ने की है तो सम्पत्ति की जब्ती का अनुमोदन NIA का महानिदेशक करेगा. इसके लिए उस सम्पत्ति का आतंकवाद से जुड़ा होना आवश्यक होगा.
  • NIA द्वारा अन्वेषण : मूल अधिनियम के अनुसार मामलों का अन्वेषण उपाधीक्षक अथवा सहायक पुलिस आयुक्त अथवा उससे ऊपर की श्रेणी का अधिकारी करेगा. नए संशोधन के अनुसार, इनके अतिरिक्त NIA के अधिकारी भी अन्वेषण का कार्य कर सकते हैं यदि वे निरीक्षक की श्रेणी अथवा उससे ऊपर की श्रेणी के हों.
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश विरोधी गतिविधियों के लिए कानूनी शक्ति का प्रयोग करना है.
  • अधिनियम में संधियों की अनुसूची जोड़ना : मूल अधिनियम में ऐसी संधियों की एक अनुसूची दी गई है जिसके उल्लंघन को भी आतंकी कार्रवाई के रूप में परिभाषित किया गया है. इस अनुसूची में सब मिलाकर 9 संधियाँ हैं जिनमें प्रमुख हैं – आतंकी बम विस्फोट को दबाने की संधि (1997) और बंधक बनाने के विरुद्ध संधि (1979). इस अनुसूची में अब एक नई संधि जुड़ गई है जिसका नाम है – आणविक आतंकवाद की कार्रवाई को दबाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संधि (2005) / International Convention for Suppression of Acts of Nuclear Terrorism (2005).

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 का विरोध क्यों?

  • आलोचकों का कहना है कि संशोधित अधिनियम में केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों को यह शक्ति दे दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को बिना उचित प्रकिया अपनाए हुए आतंकी घोषित कर सकते हैं. इस घोषणा के पश्चात् उस व्यक्ति का नाम मूल अधिनियम में संशोधित के द्वारा जोड़ी गई “चौथी अनुसूची” में अंकित हो जाएगा. ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति के पास एक ही चारा बचेगा कि वह अपने आप को अनधिसूचित करवाने के लिए केंद्र सरकार को आवेदन दे जिसपर सरकार द्वारा ही गठित समीक्षा समिति विचार करेगी.
  • संशोधन यह नहीं बताता है कि यदि कोई व्यक्ति आतंकी घोषित हो गया तो उसका कानूनी परिणाम क्या होगा क्योंकि चौथी अनुसूची में नाम आ जाने मात्र से वह दंड, कारावास, अर्थदंड, निर्योग्यता अथवा किसी भी प्रकार के नागरिक दंड का भागी हो जाएगा. स्पष्ट है कि यह संशोधन मात्र किसी को आतंकी घोषित करने के लिए सरकार को शक्ति देने हेतु किया गया है.
  • किसी को सरकारी रूप से आतंकी घोषित करना उसे “नागरिक मृत्यु” देने के बराबर होगा क्योंकि इसके फलस्वरूप उसका सामाजिक बहिष्कार हो सकता है, उसे नौकरी से निकाला जा सकता है, मीडिया उसके पीछे पड़ सकती है अथवा किसी स्वघोषित सतर्कता समूह के व्यक्ति के द्वारा उस पर आक्रमण भी हो सकता है.

पृष्ठभूमि

आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए भारत में समय-समय पर कानून बनते रहे हैं. सबसे पहला कानून TADA (1985 से प्रभावी) था जिसका पूरा नाम Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act था. यह कानून 1995 में समाप्त होने दे दिया गया. इसके बाद POTA अर्थात् Prevention of Terrorism Act 1967 में पारित हुआ. यह अधिनियम 2004 में समाप्त कर दिया गया.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Jallianwala Bagh National Memorial (Amendment) Bill, 2019

संदर्भ

पिछले दिनों लोकसभा में जालियाँवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित हो गया. इस विधेयक का उद्देश्य जालियाँवाला बाग़ स्मारक के प्रबंधन की कुछ त्रुटियों को दूर करना तथा इससे सम्बंधित न्यास को अराजनैतिक स्वरूप देना है.

पृष्ठभूमि

जालियाँवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक अधिनियम 1951 में पारित हुआ था. इस अधिनियम के अंतर्गत अमृतसर के जालियाँवाला बाग़ में 13 अप्रैल, 1919 को मारे गये अथवा घायल हुए लोगों की स्मृति में एक राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया था.

अधिनियम में एक न्यास की व्यवस्था भी की गई थी जो स्मारक का प्रबंधन देखता है. इस न्यास में ये व्यक्ति होते हैं –

  1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
  2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष
  3. संस्कृति मंत्री
  4. लोकसभा का नेता प्रतिपक्ष
  5. पंजाब का राज्यपाल
  6. पंजाब का मुख्यमंत्री और
  7. केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन सुप्रसिद्ध व्यक्ति

मूल अधिनियम में किये जा रहे परिवर्तन

  • जालियाँवाला बाग़ राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2019 के द्वारा न्यासी के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष की सदस्यता समाप्त की जा रही है.
  • यह प्रावधान किया जा रहा है कि यदि लोक सभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं हो तो लोक सभा के सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता न्यास का सदस्य बनेगा.
  • मूल अधिनयम के अनुसार जो तीन सुप्रसिद्ध व्यक्ति केंद्र सरकार द्वारा नामित होते थे उनका कार्यकाल 5 वर्ष का होता था और वे दुबारा नामित भी हो सकते थे. संशोधन में यह प्रावधान किया जा रहा है कि केंद्र सरकार यदि चाहे तो बिना कारण बताये ही ऐसे किसी नामित न्यासी का कार्यकाल बीच में ही समाप्त कर सकती है.

Prelims Vishesh

Khanij Bidesh India Ltd. (KABIL) :-

  • राष्ट्रीय अल्मुनियम कम्पनी लिमिटेड (NALCO), हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) और मिनेरल एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (MECL) ने मिलकर एक काबिल नामक कम्पनी बनाई है.
  • इस कम्पनी का पूरा नाम खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड है.
  • यह इसलिए बनाई गई है कि भारत के घरेलू बाजार में अत्यावश्यक और सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सतत बनी रहे.

Samarth :

अपने मंच पर भारतीय शिल्पकारों, बुनकरों और हस्तशिल्पियों को लाने के लिए फ्लिपकार्ट ने समर्थ नामक एक पहल की है जिसके अंतर्गत कारीगरों को अपने उत्पाद इन्टरनेट पर बेचने की सुविधा दी जायेगी.

English Channel :-

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  • फ्रांस के आविष्कारक ने पिछले दिनों अपने होवरबोर्ड से इंग्लिश चैनल को पार किया है.
  • विदित हो कि इंग्लिश चैनल फ़्रांस और ब्रिटेन के बीच स्थित 350 मील लम्बा समुद्र है जो अटलांटिक महासागर का एक भाग है.
  • डोवर जलडमरूमध्य के पास यह चैनल सबसे अधिक संकरा है.

Rice bowl of Karnataka :-

  • तुंगभद्रा बाँध में जल-स्तर गिरने से नदी के कमांड क्षेत्र में चावल की खेती पर खतरा मंडरा रहा है.
  • विदित हो कि तुंगभद्रा नदी के जलच्छादन क्षेत्र में कोप्पल, बेलारी और रायचुर जिलों का 10 लाख एकड़ भूभाग आता है जिसे “कर्नाटक का चावल का कटोरा” कहा जाता है.
  • प्रसिद्ध सोना मसूरी चावल यहीं से आता है.

Meghdoot:

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के विशेषज्ञों ने मिलकर मेघदूत नामक एक नया मोबाइल ऐप बनाया है जो किसानों को तापमान, वर्षा, आर्द्रता और वायुवेग एवं दिशा के बारे में पूर्व से जानकारी देता है.
  • यह ऐप अभी देश के 150 जिलों में उपलब्ध होगा.

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