Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 November 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 06 November 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Office of Profit

संदर्भ

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आम आदमी पार्टी (आप) के 11 विधायकों के कथित रूप से लाभ के पद पर रहने को लेकर उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली एक याचिका खारिज कर दी है.

मामला क्या है?

मार्च, 2017 में विवेक गर्ग नामक एक व्यक्ति ने राष्ट्रपति के समक्ष याचिका देकर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत समेत आप के 11 विधायकों को विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराने की मांग की था. उनका दावा था कि दिल्ली के 11 जिलों में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों का सह-अध्यक्ष होने के नाते ये सभी विधायक लाभ के पद पर आसीन हैं.

यह मुद्दा चुनाव आयोग के पास भेजा गया जिसने अगस्त में राय दी कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सह अध्यक्ष होने से वे विधायक के रूप में अयोग्य नहीं हो जाते क्योंकि उन्हें वेतन, भत्ते, फीस आदि के रूप में पारिश्रमिक नहीं मिलते. उसके अतिरिक्त उन्हें स्टाफ कार, कार्यालय का स्थान, कर्मचारी, टेलीफेान या निवास भी नहीं दिये गये हैं.

लाभ का पद किसे कहते हैं?

यदि कोई विधायक अथवा सांसद किसी सरकारी पद पर है और वह इसके लिए कोई लाभ प्राप्त करता है तो उस पद को लाभ का पद कहा जाता है. यदि कोई विधायक/संसद केंद्र अथवा राज्य सरकार के अन्दर किसी लाभ के पद पर कार्यरत है तो उसे विधान सभा/संसद की सदस्यता से पदच्युत किया जा सकता है.

विवाद क्या है?

पंजाब में मुख्यमंत्री के लिए परामर्शियों की नियुक्ति का विपक्ष ने इस आधार पर विरोध किया है कि यह सब राज्य मंत्रिमंडल के आकार के विषय में विहित संवैधानिक ऊपरी सीमा से बचने के लिए किया जा रहा है. विदित हो कि संविधान के अनुच्छेद 164(1A) में हुए 91वें संशोधन में यह प्रावधान किया गया है कि मंत्रियों की संख्या सदन के कुल सदस्यों की संख्या के 15% से अधिक नहीं होना चाहिए.

विधायक/सांसद को पदच्युत करने का आधार

संविधान की धारा 102 और धारा 191 में क्रमशः सांसद और विधायक को पदच्युत करने का आधार वर्णित किया गया है. इसके अनुसार इनकी पदच्युति इन कारणों से हो सकती है –

  1. केंद्र अथवा राज्य सरकार के अन्दर लाभ का पद धारण करना.
  2. पागल होना.
  3. दिवालिया होना.
  4. भारत का नागरिक नहीं होना अथवा किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेना.

विधायक/सांसद लाभ के पद से वंचित क्यों हैं?

संविधान के निर्माताओं का विचार था कि विधायक/सांसद को किसी भी रूप में कार्यकारिणी के प्रति उत्तरदायी नहीं होना चाहिए, अन्यथा विधायी करते समय वह प्रभावित हो सकता है. दूसरे शब्दों में यदि कोई विधायक/सांसद सरकार के अन्दर लाभ के पद पर नहीं है तो वह स्वतंत्र होकर बिना सरकारी दबाव के अपने कर्त्तव्य का निर्वाह कर सकेगा.


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : National Registry of Voluntary Organ Donors

संदर्भ

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और पंजाब तथा हरियाणा की राज्य सरकारों के साथ-साथ चंडीगढ़ संघीय क्षेत्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 (‘The Transplant of Human Organs and Tissues Act, 1994) को शब्दश: और सही भावना से लागू करें और इसको लागू करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की सुझावों पर विचार करें.

विशेषज्ञ समिति के मुख्य सुझाव

  1. अंगदाताओं के लिए एक राष्ट्रीय पंजी (National Registry of Donors) बनाना और दानकर्ताओं एवं ग्रहणकर्ताओं का सत्यापन बायो-मैट्रिक्स के आधार पर करना.
  2. प्रत्यारोपण के लिए अधिकृत सभी शल्य चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों का एक डेटाबेस तैयार करना.
  3. प्रत्यारोपण प्रक्रिया में लगे हुए सभी अस्पतालों को एक ऐसी बायो-मेट्रिक प्रणाली में निवेश करना होगा जो आधार एवं पैन जैसे राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ी हुई हो.
  4. यदि दानकर्ता जीवित हों तो उन्हें प्रत्यारोपण में निहित जोखिमों के बारे में समझाकर उनकी सहमति ले लेना.
  5. दानकर्ताओं को यह अधिकार होगा कि शल्य क्रिया होने के पहले कभी भी वे अपनी सहमति वापस ले सकते हैं.
  6. समिति ने सुझाव दिया है कि जीवित दानकर्ता को अपनी सहमति पर फिर से विचार करने के लिए एक प्रतीक्षा अवधि दी जानी चाहिए.
  7. दानकर्ता को प्रत्यारोपण से सम्बंधित खर्चों के लिए एकमुश्त राशि दी जाए जो कम से कम 50,000 रु. अवश्य हो.
  8. एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें दानकर्ता के लिए चिकित्सा बीमा के साथ-साथ शल्य क्रिया के पश्चात् की आवश्यकताओं को पूरी करने हेतु उचित प्रबंध हो.
  9. अंगदान में कभी-कभी धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताएँ आड़े आती हैं और रिश्तेदार को भी किसी बात को लेकर भय होता है. अतः समिति का सुझाव है कि अंगदान हेतु सकारात्मक परिवेश बनाने के लिए इसमें सत्यापित गैर-सरकारी संगठनों और धार्मिक निकायों को भी शामिल किया जाए.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : BIMSTEC

संदर्भ

जहाजरानी राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री मनसुख मंडाविया आंध्र प्रदेश के  विशाखापत्तनम  में पहले ‘बिम्‍सटेक बंदरगाह’ सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. यह सम्‍मेलन 7-8 नवम्‍बर को आयोजित किया जा रहा है.

सम्मेलन का माहात्म्य

  • सम्‍मेलन में आयात-निर्यात तथा तटीय जहाजरानी को प्रोत्‍साहित कर आर्थिक सहयोग बढ़ाने की संभावना का पता लगाया जाएगा.
  • सम्‍मेलन में विभिन्न निवेश के अवसरों और बंदरगाहों पर उत्पादकता और सुरक्षा के लिए अपनाए गए बेहतरीन तौर-तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी.
  • बिम्सटेक राष्ट्रों की विविध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत इसे पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है, जिसमें जहाजों के जरिये पर्यटन को बढ़ावा देने में बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

BIMSTEC की स्थापना एवं स्वरूप

  • BIMSTEC का full form है – Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation.
  • यह एक क्षेत्रीय संगठन है जिसकी स्थापना Bangkok Declarationके अंतर्गत जून 6, 1997 में  हुई थी.
  • इसका मुख्यालय बांग्लादेश की राजधानी ढाकामें है.
  • वर्तमान में इसमें 7 देशहैं (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका)  जिनमें 5 दक्षिणी-एशियाई देश हैं और 2 दक्षिण-पूर्व एशिया के देश (म्यांमार और थाईलैंड) हैं.
  • इस प्रकार के BIMSTEC के अन्दर दक्षिण ऐसा के सभी देश आ जाते हैं, सिवाय मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के.

BIMSTEC के उद्देश्य

  • BIMSTEC का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (बंगाल की खाड़ी से संलग्न) के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है.
  • आज यह संगठन 15 प्रक्षेत्रों में सहयोग का काम कर रहा है, ये प्रक्षेत्र हैं –व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, मत्स्य पालन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद निरोध, पर्यावरण, संस्कृति, लोगों का लोगों से सम्पर्क, जलवायु परिवर्तन.

BIMSTEC क्षेत्र का महत्त्व

  • बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है. इसके आस-पास स्थित 7 देशों में विश्व की 22% आबादी निवास करती है और इनका संयुक्त GDP 2.7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर है.
  • यद्यपि इन देशों के समक्ष आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं तथापि 2012-16 के बीच ये देश अपनी-अपनी आर्थिक वृद्धि की वार्षिक दर को 4% और 5% के बीच बनाए रखा है.
  • खाड़ी में विशाल संसाधन भी विद्यमान हैं जिनका अभी तक दोहन नहीं हुआ है.
  • विश्व व्यापार का एक चौथाई सामान प्रत्येक वर्ष खाड़ी से होकर गुजरता है.
  • बिम्‍सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र और आसपास के सात देश शामिल हैं, जो एक क्षेत्रीय एकता का प्रतिनिधित्‍व करते हैं. बिम्सटेक का उद्देश्य क्षेत्रीय संसाधनों और भौगोलिक लाभ का उपयोग करके आम हित के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग के साथ व्यापार में तेजी लाना और विकास को गति देना है.

भारतीय हित

  • इस क्षेत्र में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी है, अतः इससे भारत के हित भी जुड़े हुए हैं. BIMSTEC न केवल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है, अपितु इसके अन्दर हिमालय और बंगाल की खाड़ी जैसी पर्यावरण व्यवस्था विद्यमान है.
  • “पड़ोस पहले” और “एक्ट ईस्ट” जैसी नीतिगत पहलुओं को लागू करने में BIMSTEC एक सर्वथा उपयुक्त मंच है.
  • भारत के लगभग 300 मिलियन लोग अर्थात् यहाँ की आबादी का एक चौथाई भाग देश के उन चार तटीय राज्यों में रहते हैं जो बंगाल की खाड़ी के समीपस्थ हैं. ये राज्य हैं – आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल. इसके अतिरिक्त 45 मिलियन की आबादी वाले पूर्वोत्तर राज्य चारों ओर भूभागों से घिरे हुए हैं और इनकी समुद्र तक पहुँच नहीं है. BIMSTEC के माध्यम से इन राज्यों को बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों से सम्पर्क करना सरल हो जाएगा और विकास की अनेक संभावनाएँ फलीभूत होंगी.
  • बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्त्व भी है. इससे होकरमनक्का जलडमरूमध्य पहुंचना आसान होगा. उधर देखने में आता है कि चीन हिन्द महासागर में पहुँचने के लिए बहुत जोर लगा रहा है. इस क्षेत्र में उसकी पनडुब्बियाँ और जहाज बार-बार आते हैं, जो भारत के हित में नहीं हैं. चीन की आक्रमकता को रोकने में BIMSTEC देशों की सक्रियता काम आएगी.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Core Investment Companies

संदर्भ

RBI पैनल ने मुख्य निवेशक कंपनियों (Core Investment Companies – CICs) के लिए सख्त नियमों का प्रस्ताव किया है.

ये नए नियम निगम मामलों के मंत्रालय के भूतपूर्व सचिव तपन राय की अध्यक्षता में भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा 3 जुलाई, 2019 को मुख्य निवेशक कम्पनियों के लिए नियामक एवं पर्यवेक्षक ढाँचे की समीक्षा हेतु गठित कार्यसमूह की अनुशंसा पर आधारित हैं.

कुछ नए नियम

  • मुख्य निवेशक कम्पनियों को बोर्ड स्तर की समितियों का गठन करना होगा, स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति करनी होगी तथा आंतरिक अंकेक्षण करवाना होगा.
  • उन कम्पनियों को समेकित वित्तीय विवरण तैयार करना होगा तथा अपने बोर्डों से कर्मचारियों अथवा कार्यकारी निदेशकों को अलग रखना होगा.
  • स्टेप-डाउन निवेशक कम्पनियों को किसी दूसरी मुख्य निवेशक कम्पनी में निवेश की अनुमति नहीं होगी, किन्तु अन्य समूह कम्पनियों में निवेश करने के लिए स्वतंत्र होंगे.
  • किसी स्टेप डाउन मुख्य निवेशक कम्पनी में जो मुख्य निवेशक कम्पनी पूँजी का योगदान करेगी, वह इसके अपने फंड के 10% से अधिक हो सकती है.
  • इस पूँजी को योगदान करने वाली कम्पनी के शुद्ध मूल्य से घटाया जा सकता है, जैसा कि अन्य गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों के मामले में होता है.
  • किसी समूह में मुख्य निवेशक कम्पनियों की अधिकतम दो परतें (layers) होनी चाहिएँ.

मुख्य निवेशक कम्पनियाँ (CICs) क्या हैं?

CIC भी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ होती हैं, परन्तु इनकी संपदा 100 करोड़ रु. या उससे अधिक होती है और ये कुछ शर्तों के अधीन शेयरों, सिक्यूरिटी के अधिग्रहण का व्यवसाय करती है.

इन्हें सार्वजनिक धनराशि स्वीकार करने की अनुमति मिली हुई होती है, परन्तु इनकी विशुद्ध संपदा का कम-से-कम 90% इन चीजों में निवेश के रूप में होता है – इक्विटी शेयर, प्राथमिकता शेयर, बांड, डिबेंचर अथवा ग्रुप कंपनियों में ऋण.

इक्विटी शेयरों में CIC का निवेश उसकी विशुद्ध सम्पदा के 60% से कम नहीं होना चाहिए.

छूट : जिन CIC की सम्पदा 100 करोड़ रु. से कम होती है उनको RBI के पंजीकरण और विनयमन से छूट मिलती है, परन्तु तभी जब वे वित्तीय क्षेत्र में विदेश में निवेश करना चाहती हैं.

सार्वजनिक धनराशि में क्या-क्या वस्तुएँ आती हैं? क्या ये सार्वजनिक जमा के समतुल्य हैं?

सार्वजनिक धनराशि और सार्वजनिक जमा एक जैसे नहीं होते हैं. वस्तुतः सार्वजनिक जमा सार्वजनिक धनराशि का ही एक हिस्सा होता है. इसके साथ-साथ कई अन्य प्रकार की धनराशियाँ सार्वजनिक धनराशि के अंतर्गत आती हैं, जैसे – अंतर-निगम जमा (inter-corporate deposits), बैंक फाइनेंस और सभी ऐसी धनराशियाँ जो प्रत्यक्ष रूप से बाहरी स्रोतों से प्राप्त होती हैं, यथा – वाणिज्यिक कागजात, डिबेंचर आदि के निर्गमन से उगाही गई धनराशि. परन्तु यद्यपि सार्वजनिक धनराशि के अन्दर सार्वजनिक जमा भी आ जाता है तथापि यह उल्लेखनीय है कि CICs सार्वजनिक जमा स्वीकार नहीं कर सकतीं.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Inclusive growth and issues arising from it.

Topic : Alternative Investment Funds (AIFs)

संदर्भ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने हेतु 25,000 करोड़ रुपये का वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) बनाने की मंजूरी दे दी है.

  • सरकार इस वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) में 10,000 करोड़ रुपए डालेगी जबकि शेष 15,000 करोड़ रुपए का योगदान स्टेट बैंक तथा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की ओर से किया जायेगा.
  • इस कोष से 1,600 अटकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं हेतु धन उपलब्ध कराया जायेगा. इन परियोजनाओं में कुल मिलाकर 58 लाख आवासीय इकाइयां बननी हैं.
  • यह कदम रोजगार के अवसर प्रदान करने और सीमेंट, लोहा तथा इस्पात उद्योग में मांग बढ़ाने के लिए उठाया गया है. इन परियोजनाओं के लिए AIF से फंड उपलब्ध कराया जाएगा.

वैकल्पिक निवेश कोष क्या है?

  • वैकल्पिक निवेश कोषों (AIF) निवेश के साधन हैं, लेकिन इसके जरिये शेयर बाजार, बॉन्ड्स, डेट जैसे पारंपरिक निवेश साधनों में निवेश नहीं किया जाता है.
  • इसका निवेश वैसे साधनों में किया जाता है, जिसकी कोई निश्चित परिभाषा नहीं है.
  • वैकल्पिक निवेश कोषों में शामिल साधन हैं- कमोडिटीज, प्राइवेट इक्विटी, हेज फंड्स, वेंचर कैपिटल, सोशल वेंचर्स फंड, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स, वेंचर कैपिटल फंड्स, एसएमई फंड्स,प्राइवेट इक्विटी फंड्स के अलावा, पेंटिंग्स, दूसरे आर्ट्स, शराब, पुराने सिक्के और डाक टिकट.
  • इससे मिले रिटर्न पर नियम के मुताबिक, कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है.
  • अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के जरिये काफी अमीर निवेशकों ( हाई नेटवर्थ इन्वेस्टर्स-एचएनआई) से उनके फायदे को ध्यान में रखकर रकम जुटाई जाती है. यह रकम निश्चित निवेश नीति के तहत जुटाई जाती है. इसमें भारतीय और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों को निवेश करने की अनुमति मिली हुई है.

वैकल्पिक निवेश कोष की तीन श्रेणियाँ

श्रेणी 1 (Category I): इस तरह के एआईएफ को सरकार से खास मदद या छूट मिलती है. इसमें सोशल वेंचर फंड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स, वेंचर कैपिटल फंड्स, एसएमई फंड्स, स्टार्ट-अप्स फंड्स बगैरह शामिल हैं. 

श्रेणी II (Category II): इस श्रेणी वाले एआईएफ को किसी तरह की खास सरकारी मदद या छूट नहीं मिलती है. बिना कर्ज लिये ये कहीं भी निवेश कर सकते हैं. हालांकि, अपने रोजाना के कामकाज के लिए उन्हें कर्ज लेने की छूट है. प्राइवेट इक्विटी फंड (पीई फंड), डेट फंड्स बगैरह इस श्रेणी में शामिल हैं. 

श्रेणी III (Category III): इस श्रेणी के फंड्स को किसी तरह की सरकारी छूट या मदद नहीं मिलती है. ये छोटी अवधि में लाभ के लिए काम करते हैं. हेज फंड्स इसी श्रेणी में शामिल हैं. श्रेणी III के एआईएफ ओपेन एंडेड भी हो सकते हैं और क्लोज एंडेड भी. यानी, इसमें एक निश्चित समयसीमा के भीतर ही  निवेश किया जा सकता है या 


Prelims Vishesh

Thiruvalluvar :-

  • पिछले दिनों तमिलनाडु भाजपा ने एक चित्र ट्विट किया जिसमें तमिल संत “तिरुवल्लुवर” को श्वेत शाल के स्थान पर गेरुआ शाल पहने तथा विभूतिधारण किये हुए दिखाया गया. इससे एक विवाद खड़ा हो गया.
  • ज्ञातव्य है कि तिरुवल्लुवर एक प्रसिद्ध तमिल कवि और दार्शनिक थे जिन्होंने नीतिशास्त्र तिरुक्कुरल की रचना ई थी.
  • उनका समय चौथी शताब्दी से पहली शताब्दी ई.पू. के बीच का बताया जाता है.
  • संगम काल के तमिल कवि मामुलानार ने उल्लेख किया था कि तिरुवल्लुवर तमिल साहित्य के सबसे बड़े विद्वान् थे.

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