Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 November 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 06 November 2018


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Regional connectivity scheme (RCS)

संदर्भ

क्षेत्रीय सम्पर्क योजना (Regional connectivity scheme – RCS) के तीसरे चरण का सूत्रपात करते हुए नगर विमानन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने पर्यटन स्थलों को शामिल करने वाले हवाई मार्गों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं. इसके लिए आवेदन देने की अंतिम तिथि नवम्बर 20 रखी गई है.

इस योजना के अंतर्गत सरकार जल विमानों (seaplanes) को व्यवसायिक यात्री उड़ान के संचालन की अनुमति देती है. इस योजना के लिए जिन दस पर्यटन स्थलों का चुनाव किया गया है, वे हैं – सरदार सरवोर बाँध पर स्थित स्टेचू ऑफ़ यूनिटी अर्थात् एकता प्रतिमा, अहमदाबाद का साबरमती रिवर फ्रंट, उत्तराखंड-स्थित टेहरी बाँध और तेलंगाना का नागार्जुन सागर.

योजना का उद्देश्य

  • RCS का प्रधान उद्देश्य क्षेत्रीय हवाई सम्पर्क को सस्ता और सुलभ बनाते हुए क्षेत्रीय सम्पर्क व्यवस्था को सुदृढ़ करना.
  • क्षेत्रीय हवाई सम्पर्क को सुलभ बनाने के लिए इस योजना के अंतर्गत विमान संचालकों को छूट और वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है.

योजना का महत्त्व

क्षेत्रीय सम्पर्क योजना (Regional connectivity scheme – RCS) से भारत के पहली-पहली बार विमान सेवा का संचालन करने वाले छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों को हवाई यात्रियों के आवागमन में तीव्र विकास में सहभागी होने का अवसर मिलेगा. साथ ही भारत के विमानन क्षेत्र को बढ़ावा भी मिलेगा.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : India’s nuclear triad is complete

संदर्भ

हाल ही में भारतीय नौसेना की स्वदेशी परमाणविक पनडुब्बी INS अरिहंत समुद्रों में अपनी पहली गश्ती लगाने के पश्चात् वापस लौट आई है. ज्ञातव्य है कि इस पनडुब्बी के पास परमाणु बम से युक्त बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ने की क्षमता है. अतः भारत ने घोषणा की है कि अब उसके पास सुरक्षा की आणविक तिकड़ी उपलब्ध हो गई है अर्थात् अब भारत वायुमंडल, धरातल और समुद्र तीनों जगह से परमाणु बम का प्रक्षेपण करने में समर्थ हो गया है.

महत्त्व

  • आईएनएस अरिहंत की सफलता के परिणामस्वरूप भारत अब उन चुने हुए देशों के समूह में आ गया है जो समुद्र के भीतर से आणविक हथियार छोड़ने के लिए समर्थ पनडुब्बी का रूपांकन, निर्माण और संचालन कर सकते हैं.
  • भारत की यह नीति सर्वविदित है कि वह कभी भी परमाणु हथियार का प्रयोग पहले नहीं करेगा, मात्र प्रतिक्रिया स्वरूप ही करेगा. अतः जब कोई देश भारत पर पहले परमाणु बम छोड़ेगा तो यह पनडुब्बी समुद्र के भीतर से ही उसका बदला ले सकेगी.
  • धरातल अथवा हवा से छोड़े गए परमाणु बमों आसानी से पता लगाया जा सकता है. ऐसी स्थिति में समुद्र के अन्दर चलने वाली पनडुब्बी का महत्त्व बढ़ जाता है क्योंकि दुश्मन उसका पता कभी नहीं लगा पाएँगे.

INS Arihant

अरिहंत को अगस्त 2016 में सेना को सौंपा गया था. यह 6000 टन जल का विस्थापन करता है और इसमें समृद्ध यूरेनियम वाला 83 MW का रिएक्टर लगा हुआ है.

भारत की Nuclear Policy और No First Use Policy के बारे में जानें >> Click here


GS Paper 3 Source: PIB

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Topic : OPERATION GREENS

संदर्भ

भारत सरकार के खाद्य संस्करण उद्योग मंत्रालय (Ministry of Food Processing Industries – MoFPI) ने ऑपरेशन ग्रीन्स के लिए संचालन रणनीति को मंजूरी दे दी है.

संचालन रणनीति कैसी होगी?

ऑपरेशन ग्रीन्स के लिए संचालन नीति के अंतर्गत जो उपाय किये जाएँगे, वे हैं –

मूल्य को स्थिर करने के अल्पकालिक उपाय :

  • खाद्य संस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) टमाटर, प्याज और आलू के उत्पादन से लेकर भंडारण तक के परिवहन तथा इन फसलों के उचित भंडारण के किराए के लिए 50% सब्सिडी देगा.
  • मूल्य को स्थिर करने के लिए उपाय लागू करने हेतु NAFED को नोडल एजेंसी बनाया गया है.

दीर्घकालिक समेकित मूल्य शृंखला विकास परियोजनाएँ

  • कृषक उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organizations – FPOs) तथा उनके संघ की क्षमता का विकास
  • उच्च कोटि का उत्पादन
  • फसल टूटने के बाद उसके प्रसंस्करण की सुविधा
  • फसल उत्पादन को यत्र-तत्र ढुलाई की सुविधा
  • बाजार और खपत केंद्र
  • टमाटर, प्याज और आलू (TOP Crops) की माँग और आपूर्ति की व्यवस्था के लिए ई-प्लेटफार्म बनाना और उसको चलाना

ऑपरेशन ग्रीन्स क्या है?

ऑपरेशन ग्रीन्स एक योजना है जिसकी घोषणा 2018-19 बजट भाषण में की गई थी और इसके लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. इस योजना का उद्देश्य टमाटर, प्याज और आलू (top crops) की आपूर्ति को बनाए रखना और दामों में उछाल के बिना पूरे देश में पूरे वर्ष इनकी उपलब्धता को सुनिश्चित करना है.

Operation Greens के प्रधान लक्ष्य

  • टमाटर-प्याज-आलू के उत्पादन संकुलों और उनके कृषक उत्पादक संगठनों को सुदृढ़ करना और उन्हें बाजार से जोड़ना.
  • टॉप संकुलों में उत्पादन की उपयुक्त योजना बनाकर मूल्य को स्थिर रखना
  • फसल टूटने के बाद होने वाली क्षति को घटाने के लिए फार्म गेट भवन बनाना, समुचित ढुलाई का प्रबंधन करना और भंडारों को खपत केन्द्रों (consumption centres) से जोड़ना.
  • खाद्य प्रसंस्करण की क्षमता में वृद्धि करना.
  • बाजार की जानकारी के विषय में एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना जिससे टॉप फसलों की माँग और आपूर्ति के विषय में तत्क्षण आँकड़ें संगृहित किये जा सकें.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Shakti- India’s first indigenous microprocessor

संदर्भ

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (Indian Institute of Technology Madras – IIT Madras) के शोधकर्ताओं ने हाल ही में भारत के पहले स्वदेशी माइक्रो-प्रोसेसर का रूपांकन किया है और इसका नाम “शक्ति” रखा है.

“शक्ति” क्या है?

  • जिस माइक्रो-प्रोसेसर का रूपांकन हुआ है वह औद्योगिक स्तर का है.
  • इसके माइक्रो-चिप को चंडीगढ़ में स्थित ISRO की अर्ध-संचालक प्रयोगशाला में तैयार किया गया है.
  • शक्ति का निर्माण जिस परियोजना के तहत किया गया उसके लिए धनराशि आंशिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दी थी.
  • शक्ति के निर्माण के लिए विगत दो दशाब्दियों से प्रयास चल रहा था.

महत्त्व

  • शक्ति माइक्रोप्रोसेसर के आ जाने से आयातित माइक्रोचिपों पर देश की निर्भरता में कमी आ जाएगी.
  • संचार एवं रक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी माइक्रो-प्रोसेसर का प्रयोग होने से साइबर आक्रमण का खतरा समाप्त हो जाएगा.
  • इसका उपयोग मोबाइल कम्पयूटिंग, बेतार और नेटवर्किंग प्रणालियों में हो सकता है.
  • साथ ही यह मोबाइल फ़ोनों, स्मार्ट मीटरों और निगरानी रखने वाले कैमरों में भी काम आ सकता है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Ozone hole

संदर्भ

हाल ही में NASA के एक अध्ययन से पता चला है कि क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) से निकलने वाले क्लोरीन की वायुमंडल में अनुपस्थिति के चलते ओजोन परत फिर से बनने लगे हैं.

अध्ययन से सम्बन्धित मुख्य तथ्य

अध्ययन में वायुमंडल की रासायनिक बनावट का नक्शा तैयार किया गया था. इससे पता चला कि 2005 से लेकर 2016 तक प्रत्येक वर्ष वायुमंडल में क्लोरीन का स्तर 0.8% गिरता रहा है. यह संभवतः इसलिए हुआ है कि पूरे विश्व में CFC के उपयोग पर प्रतिबंध लग गया है. पहले भी कुछ शोधों से पता चला था कि ओजोन परत के क्षरण में कमी आई है. वैज्ञानिकों विश्वास है कि 2080 तक ओजोन परत पूरा का पूरा बन जाएगा.

ओजोन परत क्या होता है?

ओजोन गैस पूरे पृथ्वी के ऊपर एक परत के रूप में छाया रहता है और क्षतिकारक UV किरणों के विकिरण को धरातल पर रहने वाले प्राणियों तक पहुँचने से रोकता है. इस परत को ओजोन परत कहते हैं. यह परत मुख्य रूप से समताप मंडल में होती है. इस परत की मोटाई 10-50 किलोमीटर तक होती है. इसे जीवन सहायक इसलिए माना जाता है कि इसमें कम तरंग दैर्ध्य (wave length) का प्रकाश, जो कि 300 नैनोमीटर से कम हो, को अपने में अवशोषित करने की विलक्षण क्षमता है. जहाँ पर वातावरण में ओजोन उपस्थित नहीं होगी, वहाँ सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणें (UV rays) पृथ्वी पर पहुँचने लगेंगी. ये किरणें मनुष्य के साथ-साथ जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के लिए भी बहुत खतरनाक है. ध्रुवों के ऊपर इसकी परत की मोटाई 8 km है और विषुवत् रेखा (equator line) के ऊपर इसकी मोटाई 17 km है.

ओजोन छिद्र क्या होता है?

ओजोन छिद्र उस ओजोन परत के उस भाग को कहते हैं जहाँ वह परत झीनी पड़ गई है. यह छिद्र ध्रुवीय प्रदेशों के ऊपर स्थित है. अगर ओजोन की यह चादर और पतली हो गई तो धरती में गर्मी बढ़ेगी और पराबैंगनी किरण (ultraviolet rays/UV) समस्त प्राणियों और वनस्पतियों को मुश्किल में डाल देगी. ध्रुवों की बर्फ पिघल जाएगी, जिसके चलते समुद्र के पानी का स्तर ऊपर आएगा और फलतः तटवर्ती क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जायेंगे. चर्म कैंसर के मामले ओजोन छिद्र के कारण बढ़ें हैं.

CFC क्या है?

क्लोरोफ्लूरो कार्बन (CFC) एक यौगिक गैस है जिसमें क्लोरीन, फ्लोरीन और कार्बन के तत्त्व होते हैं. हमारे एरोसोलों, वातानुकूलन पदार्थों (refrigerants) और प्लास्टिक फ़ोम (foams) में CFC होता है. जब यह CFC हवा में प्रवेश करता है तो यह उड़ते-उड़ते ओजोन परत तक पहुँच कर ओजोन कणों को नष्ट करने लगता है. CFC 50 से 100 वर्षों तक सक्रिय रहता है.

हमारे सामने चुनौती

CFC यौगिकों का घरेलू और औद्योगिकों क्षेत्रों में इतना ज्यादा प्रयोग हो रहा है कि उनकी जगह दूसरे रसायन को इस्तेमाल करना हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. अभी तक कोई विकल्प नहीं खोजा जा सका है. इन यौगिकों का प्रयोग वातानुकूलन उपकरणों में, पैकेजिंग उद्योग में, इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में, बिजली पैदा करने में, आग को बुझाने के उपकरणों में होता है. CFC विकल्प खोजते समय हमें यह बात दिमाग में रखनी होगी कि जिस तरह CFC यौगिकों में आग नहीं लग सकती, कोई विष नहीं फैल सकता और किसी दूसरे रसायन से वे क्रिया भी नहीं करते – – ये खूबियाँ उसके वैकल्पिक यौगिकों में भी होनी चाहिएँ. इसके साथ ही वैकल्पिक यौगिकों में ओजोन में कमी लाने का दुर्गुण या तो बिल्कुल नहीं या न के बराबर होना चाहिए.

CFC का विकल्प

अनुसंधानों से पता चला है कि ओजोन की परत (ozone layer) नष्ट करने में दो बातें मुख्य रूप से असर डालती हैं-

  • यौगिक में मौजूद क्लोरिन का अनुपात
  • वायुमंडल में तरल यौगिक के सक्रिय बने रहने का समय

इस आधार पर जो मूल CFC खोजे गए थे उनका ओजोन विनाशक अंक एक (1) था और आग बुझाने वाले उपकरणों में विद्यमान CFC में 3 से 10 था. इस आधार पर ऐसे यौगिक खोजे जा रहे हैं जो वायुमंडल में बहुत तेजी से फैल जाएँ और ज्यादा देर तक टिके रहें.

ऐसे यौगिकों की खोज करते हुए वैज्ञानिक हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC) यौगिकों तक पहुँचे. ये टिकाऊ हैं और वायुमंडल की ऊपरी सतह तक पहुँचते-पहुँचते लगभग इनका विनाश हो जाता है. पर्यावरण की दृष्टि से यदि देखें तो CFC यौगिकों की अपेक्षा HFC यौगिक अधिक स्वीकार्य हैं इनका ओजोन विनाशक अंक शून्य से 0.05 तक है जो CFC की तुलना में बहुत कम है. लेकिन अभी नए HFC यौगिकों पर ज्यादा खोज नहीं हुई है. इस विषय में बहुत कम आँकड़े उपलब्ध हैं और इनकी सत्यता के बारे में शकाएँ उठाई गई हैं.

परन्तु जब तक हम सुरक्षित रसायनों और नई तकनीकों को पूरी तरह से विकसित न कर लें तब तक हमारा कर्तव्य है कि हम पृथ्वी के जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की सुरक्षा के लिए ऐसे रसायनों का प्रयोग कम करें जो ओजोन के सुरक्षा कवच को कमजोर बना रहे हैं.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए CFC पर पूरे विश्व में प्रतिबंध लगाया जा चुका है.


Prelims Vishesh

National Mission for Clean Ganga (NMCG) :-

  • नवम्बर 4, 2018 को HCL के नोएडा-स्थित परिसर में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – (NMCG) ने HCL फाउंडेशन तथा जर्मन विकास एजेंसी (GIZ) के सहयोग से बाल गंगा नामक मेले का आयोजन किया.
  • विदित हो कि 2008 में नवम्बर 4 में ही गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया है. इसलिए नवम्बर 4 की तिथि को प्रतीक के रूप में इस मेले के आयोजन के लिए चुना गया.

ICGS Varaha :-

  • भारतीय तटरक्षक (Indian Coast Guard – ICG) ने हाल ही में  एक नए गश्ती जहाज का अनावरण किया है जिसका नाम ICGS वराह रखा गया है.
  • इसे देश में ही Larsen & Toubro (L&T) कम्पनी द्वारा बनाया गया है.
  • इसमें 30mm का एक और 12.7mm के दो तोप लगे हुए हैं और साथ ही आग को काबू करने का प्रबंध भी है.
  • यह 26 सामुद्रिक मील की अधिकतम गति पकड़ सकता है और समुद्र में 5,000 सामुद्रिक मील तक बने रह सकता है.

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