Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 May 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 06 May 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc.

Topic : Earthquakes in or near Assam

संदर्भ

हाल के एक अध्ययन के अनुसार, उत्तरी असम के शोणितपुर क्षेत्र में लगातार भूकंप आने का एक कारक, एक अज्ञात स्थलानुरेख (lineament) है.

स्थलानुरेख

  • स्थलानुरेख (lineament), किसी भूदृश्य में, अंतर्निहित भूगर्भीय संरचना जैसे कि भ्रंश (Fault) के प्रभाव से निर्मित एक रेखीय आकृति होती है.
  • स्थलानुरेख संरचनात्मक लक्षण हैं. इन संरचनात्मक लक्षणों के कारण, ठोस तथा कठोर चट्टानों में जल भण्डार विकसित होते हैं. उदाहरण के लिये फोल्डिंग के असर से कठोर चट्टानें टूटती तथा बिखरती हैं. उनके टूटने और बिखरने के कारण प्रभावित हिस्सों में खाली स्थान विकसित होते हैं.

असम में लगातार भूकंप आने के कारण

भारतीय भूगर्भीय सर्वेक्षण (Geological Survey of India- GSI) के अनुसार, शोणितपुर जिला, विवर्तनिक रूप से जटिल त्रिकोणीय क्षेत्र में अवस्थित है. यह क्षेत्र पूर्व-पश्चिम दिशा में विस्तृत अथेरखेत भ्रंश (Atherkhet Fault), उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर जाने वाले कोपिली भ्रंश (Kopili Fault) तथा उत्तर-दक्षिण दिशा में फैले स्थलानुरेख (lineament) से घिरा है.

भूकंप जोन

लगातार टक्कर से परतों की दबाव सहने की क्षमता खत्म होती जाती हैं. परतें टूटने के साथ उसके नीचे मौजूद ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं. इस वजह से हिमालय क्षेत्र में भूकंप आता है. भारतीय उपमहाद्वीप को भूकंप के खतरे के लिहाज से सीसमिक जोन 2,3,4,5 जोन में विभक्त किया गया है. पाँचवा जोन सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है. पश्चिमी और केंद्रीय हिमालय क्षेत्र से जुड़े कश्मीर, पूर्वोत्तर और कच्छ का रण इस क्षेत्र में आते हैं.

पूर्वोत्तर भारत भूकंप के प्रति संवेदनशील क्यों है?

  1. सियांग दरार (Siang Fracture), एमला भ्रंश (Yemla Fault), नामुला क्षेप (Namula Thrust) और कैनियन क्षेप (Canyon Thrust) पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में फैले हुए हैं तथा मुख्य हिमालय क्षेप (Main Himalayan Thrust), मुख्य सीमा क्षेप (Main Boundary Thrust), मुख्य केंद्रीय क्षेप (Main Central Thrust) तथा कई गौण भ्रंशो के सहारे सक्रिय हैं.
  2. पूर्वोत्तर क्षेत्र को भूकंपीय मंडल V (Seismic Zone V) में सीमांकित किया गया है, जोकि अति संवेदनशीलता वाले क्षेत्र को इंगित करता है.
  3. भारतीय प्लेट, उत्तर-पूर्व दिशा में, हिमालय क्षेत्र में यूरेशियन प्लेट की ओर गतिशील है. इन दोनों प्लेटों के तिर्यक टकराव तथा स्थानीय विवर्तनिक (टेक्टॉनिक) अथवा भ्रंश सरंचनाओ में संचित दबाव तथा तनाव का निर्गमन होने से भूकंप की घटनाएँ होती हैं.

भूकंप के विषय में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें :- भूकंप


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Supreme Court declares Maratha quota law unconstitutional

संदर्भ

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय के पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा, राज्य के अधीन सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठा समुदाय को आरक्षण देने वाले महाराष्ट्र के कानून को रद्द कर दिया गया.

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2017: सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एन. जी. गायकवाड़ की अध्यक्षता में गठित 11 सदस्यीय आयोग ने मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (Socially and Educationally Backward Class- SEBC) के अंतर्गत आरक्षण की संस्तुति की.
  • वर्ष 2018: महाराष्ट्र विधानसभा में मराठा समुदाय के लिए  16% आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया गया.
  • वर्ष 2018: आरक्षण को जारी रखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की सीमा 16% के बदले शिक्षा में 12% और नौकरियों में 13% से ज्यादा नहीं होनी चाहिये.
  • वर्ष 2020: सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी और इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पास एक बड़ी खंडपीठ को दिये जाने के लिये हस्तांतरित कर दिया.

मराठा आरक्षण कानून’ क्या था?

  1. नवंबर 2018 में, महाराष्ट्र राज्य सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग अधिनियम’ के अंतर्गत मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान किया गया था.
  2. इस विशेष अधिनियम को महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सहित विधानसभा और विधान परिषद दोनों के द्वारा अनुमोदित किया गया था.
  3. 12% और 13% (शिक्षा और नौकरियों में) मराठा आरक्षण ने कुल आरक्षण सीमा को क्रमशः 64% और 65% तक बढ़ा दिया.

न्यायिक हस्तक्षेप

प्रारंभ में, ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग’ (SEBC) के अंतर्गत दिए जाने वाले आरक्षण को बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने आरक्षण को बरकरार रखते हुए कहा कि आरक्षण को 16 प्रतिशत की बजाय, इसे घटाकर शिक्षा में 12 प्रतिशत और नौकरियों में 13 प्रतिशत किया जाना चाहिए.

  1. तदनुसार, मराठा छात्रों के लिए शैक्षणिक संस्थानों और नौकरियों में प्रदान करने हेतु अधिनियम लागू किया गया था.
  2. 9 सितंबर, 2020 में, मराठा आरक्षण के समक्ष एक और बाधा उत्पन्न हो गई, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसके कार्यान्वयन पर रोक लगा दी गई और मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए सौंप दिया गया.

मराठा आरक्षण क़ानून को रद्द करने का कारण

  1. मराठा आरक्षण दिए जाने से आरक्षण की सीमा निर्धारित 50 प्रतिशत को पार कर गई थी.
  2. न्यायालय ने कहा, कि मराठा समुदाय के लिए अलग से आरक्षण प्रदान करने से,, अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 21 (विधि की सम्यक प्रक्रिया) का उल्लंघन होता है.

महाराष्ट्र सरकार की दलीलें

  1. इंद्रा साहनी फैसले को पुनर्विचार के लिए 11-न्यायाधीशों की खंडपीठ के पास भेजा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें एक मनमाने ढंग से सीमा का निर्धारण कर दिया गया, जिस पर संविधान में कोई विचार नहीं किया गया है.
  2. इसके अतिरिक्त, इंद्र साहनी मामले के पश्चात्, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए कुछ निर्णयों में, खुद ही इस नियम से छूट ली गयी है.

1992 के निर्णय पर पुनर्विचार करने पर न्यायालय की टिप्पणी

न्यायालय ने कहा है, कि इस मामले पर पुनर्विचार करने की कोई जरूरत नहीं है. न्यायालय ने कहा कि हालाँकि, वर्ष 1992 में न्यायालय द्वारा 50% आरक्षण की सीमा का निर्धारण मनमाने ढंग से किया गया था, किंतु यह अब संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त है.

मराठा आरक्षण, अपवादात्मक मामला क्यों नहीं हो सकता है?

मराठा समुदाय एक प्रभावशाली अगड़ा समुदाय है, तथा राष्ट्रीय जीवन की मुख्य धारा में शामिल हैं. इसलिए, न्यायालय ने उपरोक्त स्थिति को कोई एक असाधारण मामला नहीं माना है.

सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग’ (SEBC) को चिह्नित करने हेतु राज्य की शक्ति तथा 102 वें संशोधन पर न्यायालय की टिप्पणी

संविधान (एक सौ और दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2018 (One Hundred and Second Amendment of the Constitution of India) के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग’ को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया है.

इस संशोधन के अंतर्गत राष्ट्रपति के लिए पिछड़े वर्गों को अधिसूचित करने की शक्तियाँ प्रदान की गयीं हैं.

  1. कई राज्यों द्वारा इस संशोधन की व्याख्या पर सवाल उठाए गए है, और इन्होंने तर्क दिया है, कि यह संशोधन उनकी शक्तियों पर अंकुश लगाता है.
  2. वैसे न्यायिक पीठ द्वारा एकमत से 102 वे संशोधन की संवैधानिक वैधता को जारी रखा गया.
  3. पीठ की बहुमत राय के अनुसार, हालांकि ‘सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग’ (SEBC) की पहचान केंद्रीय रूप से की जाएगी, परन्तु फिर भी, राज्य सरकारों के लिए, आरक्षण की सीमा निर्धारित करने और “सहकारी संघवाद” की भावना में विशिष्ट नीति बनाने की शक्ति होगी.

महाराष्ट्र में विद्यमान कुल आरक्षण

  • वर्ष 2001 के राज्य आरक्षण अधिनियम के बाद महाराष्ट्र में कुल आरक्षण 52% था. इसमें SC (13%), STs (7%), OBC (19%), विशेष पिछड़ा वर्ग (2%), विमुक्त जाति (3%), घुमंतू जनजाति (2.5%), घुमंतू जनजाति धनगर के लिये (3.5%)और घुमंतू जनजाति वंजारी (2%) के कोटा शामिल थे.
  • घुमंतू जनजातियों और विशेष पिछड़े वर्गों के लिये कोटा कुल ओबीसी कोटा से बाहर किया गया है.
  • 12-13% मराठा कोटा के साथ राज्य में कुल आरक्षण 64-65% है.
  • 10% आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (Economically Weaker Sections- EWS) के लिये  भी राज्य में कोटा प्रभावी है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Sedition

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन पर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से प्रश्न करने और टिप्पणियों तथा कार्टून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने के कारण राजद्रोह का आरोप लगाया गया है.  

उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रत्याभूत वाक्‌ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार के प्रावधान का उल्लंघन है.

राजद्रोह का कानून कब लाया गया?

यह कानून अंग्रेजों का बनाया कानून है. देश द्रोह का ये वो कानून है जो 151 साल पहले भारतीय दंड संहिता में जोड़ा गया. 151 साल यानी 1870 में जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. अंग्रेजों ने ये कानून इसलिए बनाया ताकि वो भारत के देशभक्तों को देशद्रोही करार देकर सजा दे सके. 

रोमेश थापर वाद, केदार नाथ सिंह वाद, कन्हैया कुमार वाद आदि में राजद्रोह कानून की परिधि को सीमित और पुन: परिभाषित किया गया है तथा सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान, विधिसम्मत सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयास तथा राज्य या जनता की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न करने जैसे कृत्य को इस कानून के अंतर्गत अपराध माना जाएगा.

राजद्रोह की धारा 124ए है?

  • देश के खिलाफ बोलना, लिखना या ऐसी कोई भी हरकत जो देश के प्रति नफरत का भाव रखती हो वो राजद्रोह कहलाएगी.
  • अगर कोई संगठन देश विरोधी है और उससे अंजाने में भी कोई संबंध रखता है या ऐसे लोगों का सहयोग करता है तो उस व्यक्ति पर भी राजद्रोह का मामला बन सकता है.
  • अगर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर मौलिक या लिखित शब्दों, किसी तरह के संकेतों या अन्य किसी भी माध्यम से ऐसा कुछ करता है.
  • जो भारत सरकार के खिलाफ हो, जिससे देश के सामने एकता, अखंडता और सुरक्षा का संकट पैदा हो तो उसे तो उसे उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

राजद्रोह के आरोपी भारत के नायक 

  • बाल गंगाधर तिलक
  • भगत सिंह
  • लाला लाजपत राय
  • अरविंदो घोष
  • महात्मा गांधी (साल 1922 में यंग इंडिया में राजनीतिक रूप से ‘संवेदनशील’ 3 आर्टिकल लिखने के लिए राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.)

इसकी प्रासंगिकता

अंग्रेजों की इस नीति का विरोध पूरे भारत ने किया था. क्योंकि तब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ने उस दौर में राजद्रोह के इस कानून को आपत्तिजनक और अप्रिय कानून बताया था. लेकिन वो आजादी के पहले की स्थिति थी और पूरा देश स्वतंत्रता कि लड़ाई लड़ रहा था. उस परिस्थितियों की तुलना वर्तमान के दौर से नहीं की जा सकती है.

स्वतंत्रता के सात दशक बाद इस कानून को लेकर अकसर सियासत भी खूब होती रही है. कांग्रेस ने तो बकायदा अपने मेनिफेस्टो में लिख दिया था कि… IPC की धारा 124ए जो राजद्रोह अपराध को परिभाषित करती है. जिसका दुरुपयोग हुआ, उसे खत्म किया जाएगा.

इन देशों ने राजद्रोह का कानून खत्म किया

  • ब्रिटेन ने 2009 में राजद्रोह का कानून खत्म किया और कहा कि दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है.
  • आस्ट्रेलिया ने 2010 में
  • स्काटलैंड ने भी 2010 में
  • दक्षिण कोरिया ने 1988 में
  • इंडोनेशिया ने 2007 में राजद्रोह के कानून को खत्म कर दिया.

भारत में राजद्रोह के कानून का प्रयोग

  • 2014 से 2016  के दौरान राजद्रोह के कुल 112 मामले दर्ज हुए.
  • करीब 179 लोगों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया.
  • राजद्रोह के आरोप के 80% मामलों में चार्जशीट भी दाखिल नहीं हो पाई.
  • सिर्फ 2 लोगों को ही सजा मिल पाई.

स्वतंत्र भारत के चर्चित राजद्रोह केस

  • 26 मई 1953 को फॉरवर्ड कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य केदारनाथ सिंह ने बिहार के बेगूसराय में एक भाषण दिया था. राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ दिए गए उनके इस भाषण के लिए उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.
  • पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन (31 अक्टूबर 1984) को चंडीगढ़ में बलवंत सिंह नाम के एक शख्स ने अपने साथी के साथ मिलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे.
  • साल 2012 में कानपुर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को संविधान का मजाक उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस मामले में त्रिवेदी के खिलाफ राजद्रोह सहित और भी आरोप लगाए गए. त्रिवेदी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था.
  • गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ भी राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था. जेएनयू में भी छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथी उमर खालिद पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था.
  • दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ साल 2015 में उत्तर प्रदेश की एक न्यायालय ने राजद्रोह के आरोप लगाए थे. इन आरोपों का आधार नेशनल ज्यूडिशियल कमिशन एक्ट (NJAC) को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना बताया गया.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

शासन चाहे किसी भी प्रवृत्ति का हो, हर प्रकार की व्यवस्था में शासन के खिलाफ आवाज़ उठाना दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. भारत में भी प्राचीन और मध्यकाल में यह किसी-न-किसी रूप में मौजूद था. आधुनिक काल में, जब 1860 में भारतीय दंड संहिता बनाई गई तो उसके बाद राजद्रोह संबंधी प्रावधानों को धारा 124 (A) के अंतर्गत स्थान दिया गया. बहरहाल, वह दौर औपनिवेशिक शासन का था और उस समय ब्रिटिश भारत सरकार का विरोध करना देशभक्ति का पर्याय माना जाता था.

दरअसल, हमें यह समझना होगा कि न तो सरकार और राज्य एक हैं, और न ही सरकार तथा देश. सरकारें आती-जाती रहती हैं, जबकि राज्य बना रहता है. राज्य संविधान, कानून और सेना से चलता है, जबकि राष्ट्र अथवा देश एक भावना है, जिसके मूल में राष्ट्रीयता का भाव होता है. इसलिये कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि राजद्रोह राष्ट्रभक्ति के लिये आवश्यक हो जाए. ऐसी परिस्थिति में सरकार की आलोचना नागरिकों का पुनीत कर्त्तव्य होता है. अतः सत्तापक्ष को धारा 124 (A) दुरुपयोग नहीं करना चाहिये.

सच कहें तो देशद्रोह शब्द एक सूक्ष्म अर्थों वाला शब्द है, जिससे संबंधित कानूनों का सावधानी पूर्वक इस्तेमाल किया जाना चाहिये. यह एक तोप के समान है, जिसका प्रयोग राष्ट्रहित में किया जाना चाहिये न कि चूहे मारने के लिये, अन्यथा हम अपना ही घर तोड़ बैठेंगे.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : MNREGA creates new record this year, 344 crore days got employment

फरवरी, 2021 तक कुल 344 करोड़ कार्य दिवस रोजगार सृजित किए गए हैं, जो अब तक एक वर्ष में सृजित सबसे अधिक कार्य दिवस हैं.

पृष्ठभूमि

वर्ष 2020-21 में सृजित कुल कार्य दिवसों में से, लगभग 52 प्रतिशत महिला कार्य दिवस थे. यह लॉकडाउन में श्रमिकों द्वारा राज्यों (जहां वे नियोजित थे) से उनके मूल राज्यों में किए गए विपरीत प्रवासन (reverse migration) की मात्रा को इंगित करता है और श्रम बाजार में कम रोजगार की मात्रा को दर्शाता है.

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (MGNREGS) के बारे में

  • MGNREGS अधिनियम 2005 के तहत योजना का उद्देश्य ऐसे प्रत्येक परिवार जिनके वयस्क सदस्य अकुशल श्रमकार्य करना चाहते हैं, को एक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 100 दिनों का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार देकर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है.
  • माँग किए जाने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदान किया जाना चाहिए, इस माँग की पूर्ति में असफल होने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए.
  • वित्तीयन को केंद्र और राज्यों के मध्य साझा किया जाता है. केंद्र सरकार अकुशल श्रम की लागत का 100%, अर्ध-कुशल और कुशल श्रम की लागत का 75%, सामग्री की लागत का 75% और प्रशासनिक लागत का 6% वहन करती है.
  • MGNREGS कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) अनिवार्य है, जो जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (VPRP) क्या हैं? :-

नागरिक योजना अभियान (PPC) दिशानिर्देशों एवं पंचायती राज मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से जारी परामर्शी ने स्वयं सहायता समूहों एवं दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत उनके संघों को वार्षिक GPDP नियोजन प्रक्रिया में भाग लेने एवं ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (Village Poverty Reduction Plans– VPRP) तैयार करने के लिए अधिदेशित किया है.

  1. VPRP स्वयं सहायता समूह (SHG) नेटवर्क एवं उनके संघों द्वारा उनकी मांगों एवं स्थानीय क्षेत्र विकास के लिए एक व्यापक मांग योजना है.
  2. VPRP को प्रत्येक वर्ष अक्टूबर से दिसंबर तक ग्राम सभा बैठकों में प्रस्तुत किया जाता है.

ग्राम निर्धनता न्यूनीकरण योजना (VPRP) के घटक

VPRP के अंतर्गत मांगों को पांच प्रमुख घटकों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. सामाजिक समावेशन– NRLM के अंतर्गत SHG में निर्बल लोगों/परिवारों के समावेशन के लिए योजना.
  2. हकदारी– MGNREGS, SBM, NSAP, PMAY, उज्जवला, राशन कार्ड आदि जैसी विभिन्न योजनाओं के लिए मांग
  3. आजीविकाएँ– कृषि, पशुपालन के विकास, उत्पादन एवं सेवा उद्यमों तथा प्लेसमेंट आदि के लिए कुशलता प्रशिक्षण के जरिये आजीविका बढोतरी के लिए विशिष्ट मांग.
  4. सार्वजनिक वस्तुएँ एवं सेवाएँ– विद्यमान अवसंरचना के पुनरोत्थान एवं बेहतर सेवा प्रदायगी के लिए आवश्यक मूलभूत अवसंरचना के लिए मांग.
  5. संसाधन विकास– भूमि, जल, वन एवं स्थानीय रूप से उपलब्ध अन्य संसाधनों जैसे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा एवं विकास के लिए मांग.
  6. सामाजिक विकास– जीपीडीपी के निम्न लागत लागत रहित घटक के अंतर्गत ग्रामों के विशिष्ट सामाजिक विकास पर ध्यान देने के लिए योजनाएँ तैयार की गईं है.

Prelims Vishesh

Long March-5B Y2 :-

  • हाल ही में हिन्द महासागर में स्थित मालदीव के निकट ‘लॉन्ग मार्च -5 बी वाई2’ (Long March-5B Y2) रॉकेट का मलबा गिरा है.
  • ‘लॉन्ग मार्च -5 बी वाई2’ (Long March-5B Y2), एक चीनी रॉकेट है.
  • इस रॉकेट का उपयोग चीन, अन्तरिक्ष में अपने स्पेस स्टेशन के निर्माण हेतु कर रहा है.
  • ‘लॉन्ग मार्च -5 बी वाई2’ रॉकेट, हाल ही में चीन के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण हेतु तीन प्रमुख घटकों में से प्रथम घटक ‘तियान्हे मॉड्यूल’ (Tianhe module) को लेकर गया था.
  • हालांकि ‘लॉन्ग मार्च -5 बी वाई2’ रॉकेट अपने मार्ग से अनियंत्रित हो गया था और चीन के कंट्रोल से बाहर हो गया था. यही कारण है कि इस रॉकेट का मलबा मालदीव के उत्तर में हिंद महासागर में गिरा है.

Operation twist :-

  • हाल ही में RBI ने सरकारी प्रतिभूतियों के दस वर्ष के प्रतिफल को कम करने और मौद्रिक संचारण के सञ्चालन के लिए ऑपरेशन ट्विस्ट का अपना संस्करण शुरू करने का निर्णय किया है.
  • केन्द्रीय बैंक द्वारा एक साथ बॉन्ड की खरीद-बिक्री करने की पहल को वित्तीय जगत में ऑपरेशन ट्विस्ट के नाम से जाना जाता है.
  • लगभग एक दशक पहले अमेरिकी केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ऐसा किया था. वित्त वर्ष 2011-12 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व नें लंबी अवधि के कर्ज को सस्ता करने के लिए ऐसा कदम उठाया था.
  • उसी के तर्ज पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी कार्रवाई करने का सोचा था जिससे कि ब्याज की दरें नीचे आ सकें.
  • सरल शब्दों में कहें तो ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ का अर्थ है कि सरकार या देश की मोनेटरी अथॉरिटी एक ही समय में अल्पकालिक प्रतिभूतियों को बेचकर मिली धन राशि को दीर्घकालिक प्रतिभूतियों में ओपन मार्किट ऑपरेशन के जरिये बेच देती है ताकि देश में दीर्घकालिक निवेश के लिए ब्याज दर में कमी हो जाये और दीर्घकालिक निवेश बढ़ जाये.
  • इसे ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें अल्पकालिक प्रतिभूति को दीर्घकालिक प्रतिभूति में ट्विस्ट या परिवर्तित कर दिया जाता है.

Vaccine Maitri Initiative :-

  • पिछले वर्ष, वैक्सीन मैत्री पहल के तहत, भारत ने श्रीलंका, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश जैसे विभिन्‍न पड़ोसी देशों को टीकों की करीब 10 मिलियन खुराक उपलब्ध कराई थी.
  • इन कारणों से भारत द्वारा अपने पड़ोसी देशों के लिए वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम को फिर से शुरू करने की संभावना कम से कम जुलाई तक नहीं है :- i) कोविड-19 मामलों में वृद्धि के बीच टीकों की उपलब्धता में अकस्मात कमी आना ii) मई से आरंभ होने वाले सार्वभौमिक टीकाकरण के लिए सरकार की योजना आदि.

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