Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 06 July 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc.

Topic : Tropical Cyclone Storm Edward

संदर्भ 

हाल ही में एक उष्णकटिबंधीय तूफान ‘एडवर्ड’ महाद्वीपीय अमेरिका से दूर अटलांटिक महासागर की तरफ बढ़ने लगा. मियामी में स्थित अमेरिकी राष्ट्रीय तूफान केंद्र ने कहा के अनुसार एडवर्ड में सबसे तीव्र गति की हवाएँ 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल रही हैं. एडवर्ड तूफान लगभग 57 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात (TROPICAL CYCLONES)                

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को कैरबियन सागर में हरिकेन, पूर्वी चीन सागर में टायफून, फिलीपिंस में “बैगयू”, जापान में “टायसू”, ऑस्ट्रेलिया में “विलिबिलि” तथा हिन्द महासागर में “चक्रवात” और “साइक्लोन” के नाम से जाना जाता है.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की अधिकतम बारंबारता पूर्वी चीन सागर में मिलती है और इसके बाद कैरिबियन, हिन्द महासागर और फिलीपिन्स उसी क्रम में आते हैं. उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के प्रमुख क्षेत्र निम्न्वित हैं –

  1. उत्तरी अटलांटिक महासागर– वर्ड अंतरीप का क्षेत्र, कैरबियन सागर, मैक्सिको की खाड़ी, पश्चिमी द्वीप समूह.
  2. प्रशांत महासागर– दक्षिणी चीन, जापान, फिलीपिन्स, कोरिया एवं वियतनाम के तटीय क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको तथा मध्य अमेरिका का पश्चिमी तटीय क्षेत्र.
  3. हिन्द महासागर– बंगाल की खाड़ी, अरब सागर, मॉरिसस, मेडागास्कर एवं रियूनियन द्वीपों के क्षेत्र.

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएँ

  1. इनका व्यास 80 से 300 किमी. होता है. कभी-कभी इनका व्यास 50 किमी. से भी कम होता है.
  2. इसकी औसत गति 28-32 किमी. प्रतिघंटा होती है, मगर हरिकेन और टायफून 120 किमी. प्रतिघंटा से भी अधिक गति से चलते हैं.
  3. इनकी गति स्थल की अपेक्षा सागरों पर अधिक तेज होती है.
  4. सामान्यतः व्यापारिक हवाओं के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते हैं.
  5. इसमें अनेक वाताग्र नहीं होते और न ही तापक्रम सम्बन्धी विभिन्नता पाई जाती है.
  6. कभी-कभी एक ही स्थान पर ठहरकर तीव्र वर्षा करते हैं.
  7. समदाब रेखाएँ अल्पसंख्यक और वृत्त आकार की होती हैं.
  8. केंद्र में न्यून वायुदाब होता है.
  9. इनका विस्तार भूमध्य रेखा के 33 1/2 उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों तक होता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to Health.

Topic : Bubonic Plague

हाल ही में उत्तरी चीन के एक शहर में बुबोनिक प्लेग का एक संदिग्ध मामला सामने आया है. बुबोनिक प्लेग को लेकर बेन्नूर, (आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र) ने प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के स्तर III की चेतावनी की घोषणा की गयी है.

क्या है ब्यूबोनिक प्लेग?

  • घातक बीमारी ब्यूबोनिक प्लेग (bubonic plague) को मध्य काल में ब्लैक डेथ (Black Death) के रूप में जाना जाता था.
  • बुबोनिक प्लेग बैक्टीरिया यर्सिनिया पेस्टिस के कारण होता है. यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया, आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सू में पाए जाने वाले एक जूनोटिक जीवाणु होते हैं.
  • इस रोग में मरीजों को बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, कमजोरी, सूजन, लिम्फ नोड्स (जिन्हें बुबोस कहा जाता है) की अचानक शुरुआत होती है. यह रूप आमतौर पर एक संक्रमित पिस्सू के काटने से होता है. बैक्टीरिया लिम्फ नोड को बढ़ा देते हैं जहां से और अधिक बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश करते हैं. यदि रोगी को उचित एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज नहीं किया जाता है, तो बैक्टीरिया शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है.
  • इस रोग के लक्षणों में लिम्फ नोड्स में सूजन सम्मिलित हैं एवं इसका प्रभाव कमर, बगल या गर्दन में दिखता है .
  • बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द इसके अन्य लक्षण है.
  • बुबोनिक प्लेग की स्थिति में हैवी डोज के एंटीबायोटिक दवाओं के साथ तत्काल अस्पताल उपचार की आवश्यकता होती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to Health.

Topic : India Tuberculosis Report 2020

संदर्भ

हाल ही में ‘स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय’ ( Ministry of Health and Family Welfare) द्वारा आभासी कार्यक्रम के जरिये वार्षिक तपेदिक (टीबी) रिपोर्ट, 2020 (Annual Tuberculosis Report, 2020) निर्गत की गई है.

वार्षिक तपेदिक (टीबी) प्रतिवेदन, 2020 के मुख्य तथ्य

  • इंडिया टीबी रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, वर्ष 2019 में लगभग 24.04 लाख टीबी (क्षयरोग) मरीज़ों को अधिसूचित/चिन्हित किया गया है जो वर्ष 2018 की तुलना में 14% ज्यादा हैं.
  • प्रतिवेदन के अनुसार, विश्व में टीबी-एचआईवी से एक साथ होने वाली मौतों की संख्या में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है  जिसमे  कुल 9% मरीज़ सम्मिलित हैं.
  • इंडिया टीबी की रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, प्रत्येक वर्ष देश में टीबी-एचआईवी सह-संक्रमण से लगभग 9,700 लोग मर जाते हैं.
  • इंडिया टीबी रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, भारत में कुल 92000 ऐसे लोगों को अधिसूचित किया गया है जिन्हें टीबी और HIV एक साथ है. सभी अधिसूचित टीबी रोगियों में HIV जाँच को लेकर जागरूकता का स्तर वर्ष 2019 में 81% हो गया जो वर्ष 2018 में 67% था.
  • गत दो सालों में टीबी रोगियों में उपचार की सफलता दर 70-73% के आस-पास रही है, जबकि वर्ष 2014-2016 में यह 76 और 77% के बीच रही थी.
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में टीबी के कुल मामलों में से 20% मधुमेह से पीड़ित लोगों के भी हैं. वर्ष 2019 में, संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अधिसूचित टीबी रोगियों में 64 प्रतिशत रोगियों की ब्लड सुगर की जाँच की गई थी.
  • प्रतिवेदन के अनुसार, तम्बाकू के उपयोग के कारण 8% टीबी मामलों में वृद्धि देखी गई है जबकि वर्ष 2018 में यह 4% थी.
  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में अभी भी 0.54 मिलियन टीबी की जनंसख्या को अधिसूचित नहीं किया गया है जो कि एक चिंतनीय बात है.
  • तपेदिक के कुल मामलों में आधे से अधिक वाले पाँच शीर्ष राज्य हैं – उत्तर प्रदेश (20%), महाराष्ट्र (9%), मध्यप्रदेश (8%) राजस्थान (7%) और बिहार (7%) हैं.
  • रिपोर्ट के अनुसार, देश में तपेदिक के कुल आधे से अधिक मामले उपर्युक्त पाँच राज्यों में देखे गए हैं.

तपेदिक क्या है?

  • यक्ष्मा, तपेदिक, क्षयरोग, एमटीबी या टीबी (tubercle bacillus का लघु रूप) एक आम और कई मामलों में घातक संक्रामक बीमारी है जो माइक्रोबैक्टीरिया, साधारणतः माइकोबैक्टीरियम तपेदिक के विभिन्न प्रकारों के कारणों से होती है.
  • क्षय रोग आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं.
  • यह हवा के माध्यम से तब फैलता है, जब वे लोग जो सक्रिय टीबी संक्रमण से ग्रसित हैं, खांसी, छींक, या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं.

चिंता का विषय

  • पिछले दशकों में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद टीबी विश्वभर में मृत्यु के शीर्ष दस कारणों में से एक है. वैश्विक स्तर पर टीबी के कारण अनुमानित 3 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई तथा वर्ष 2017 में 10.0 मिलियन लोगों (9.0–11.1 मिलियन) में टीबी रोग विकसित हुआ. वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट, वर्ष 2018 के अनुसार भारत में वर्ष 2017 के दौरान विश्व टीबी के मामलों की भागीदारी 27% है.
  • तपेदिक (टीबी) बैक्टीरिया (मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस) के कारण होने वाला एक संचारी (संक्रामक) रोग है, जो कि फेफड़ो को प्रभावित करता है, लेकिन यह अन्य हिस्सों (एक्सट्रा पल्मोमनरी टीबी/इतर फुफ्फुसीय तपेदिक) को भी प्रभावित करता है. तपेदिक उपचार और निवारण योग्य है.

संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (REVISED NATIONAL TUBERCULOSIS CONTROL PROGRAMME – RNTCP)

  • RNTCP देश में टीबी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का एक कार्यक्रम है. इसमें वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन की ओर बढ़ने के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना वर्ष 2017-2025 (नेशनल स्ट्रेटेजिक प्लान 2017-2025) के अंतर्गतपता लगाना (डिटेक्ट)- उपचार (ट्रीट)- रोकथाम (प्रिवेंट)– निर्माण (बिल्ड)” (डीटीपीबी) के चार रणनीतिक स्तंभों का एकीकरण किया गया है.
  • वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए आह्वान किया गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) से पांच वर्ष पहले प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है.

RNTCP के पहल

  • निजी क्षेत्रों की भागीदारी –निजी स्वास्थ्य प्रदाता (प्राइवेट हेल्थ प्रोवाइडर इंगेजमेंट) को रोग का पता लगाने एवं टीबी के रोगियों का उपचार करने में शामिल किया गया है.
  • सक्रिय टीबी के मामलों की खोज (एसीएफ) –वर्ष 2017 में उच्च जोखिम वाली जनसंख्या में एसीएफ के तीन चरणों के माध्यम से टीबी रोगियों का पता लगाया गया था.
  • दैनिक उपचार पद्यति –दवा के बोझ को कम करने के लिए निश्चित दवा संयोजक की शुरुआत की गयी.
  • सार्वभौमिक दवा संवेदनशीलता परीक्षण –पर्याप्त उपचार के लिए सभी टीबी रोगियों में दवा प्रतिरोधिकता की जांच.
  • नयी दवा की शुरूआत –बेडाकूलाइन एवं डेलामिनिड जैसी नई विकसित दवाओं की शुरुआत को सात राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में की गयी.
  • पोषण सहयोग –सभी टीबी रोगियों को टीबी उपचार की अवधि के दौरान पोषण संबंधी सहायता के लिए प्रति माह 500 रुपये प्रदान किए जाते है.
  • डिज़िटल पहल –निक्षय, 99 डॉट्स, निक्षय औषधि.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

विश्व टीबी दिवस या विश्व तपेदिक दिवस या विश्व क्षयरोग दिवस या विश्व यक्ष्मा दिवस’ वैश्विक तपेदिक महामारी समाप्त करने तथा तपेदिक (टीबी) के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता प्रसारित करने के प्रयासों को बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है. डॉ॰ रॉबर्ट कॉख ने इस दिन वर्ष 1882 में टीबी के जीवाणु की खोज की थी, जिसके कारण टीबी होता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology. 

Topic : Predator-B drone and Sea Guardian drone

संदर्भ

लद्दाख में चीन के आक्रामक व्यवहार और पाकिस्तान को युद्धक ड्रोन बेंचने की कार्यवाही ने भारत को मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक कार्य करने में सक्षम सशस्त्र प्रीडेटर-बी अमेरिकी ड्रोनों की नए सिरे से खरीद में रुचि व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया है.

प्रीडेटर-बी ड्रोन

  • MQ- 9 रीपर प्रीडेटर-बी ड्रोन का दूसरा नाम है. यह एक मानवरहित वायुयान है जिसे रिमोट से कंट्रोल द्वारा ऑपरेट किया जाता है.
  • इसको जनरल एटॉमिक्स सिस्टम्स (GA-ASI) द्वारा मुख्यतः अमेरिकी वायु सेना के लिए बनाया गया है.
  • यह पहला हंटर किलर यू ए वी है जिसे लंबी दूरियों, अधिक ऊंचाइयों, और निगरानी हेतु बनाया गया है.
  • अमेरिकी प्रीडेटर बी ड्रोन न सिर्फ गुप्त जानकारी इकट्ठा करता है, बल्कि लक्ष्य का पता लगाकर उसे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से नष्ट भी कर देता है.
  • वर्तमान में भारत द्वारा पूर्वी लद्दाख में सर्विलेंस के इस्राइली हेरोन ड्रोन का उपयोग करता है.

सी गार्डियन ड्रोन

  • अमेरिका ने भारत को 4 अरब डालर से अधिक कीमत के 30 सी गार्डियन ड्रोन बेचने की पेशकश की है.
  • यह प्रीडेटर बी ड्रोन का समुद्री संस्करण है जिसमें रेथियन सी वूई मल्टीमोड मैरिटाइम रडार संलग्न है.
  • सी गार्डियन ड्रोन अमेरिका समेत उसकी सहयोगी सेनाओं का एक महत्त्वपूर्ण रक्षा उपकरण है. ये ड्रोन लगातार 40 घंटे तक उड़ान भरते हुए दुश्मन की किसी भी हरकत पर दृष्टि रखने में सक्षम हैं.
  • भारत पहला गैर-नाटो देश है, जिसके लिए वाशिंगटन ने सी गार्जियन के निर्यात को स्वीकृति दी है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : NASA research says the Moon is more metallic than thought before

संदर्भ

चंद्रमा पर पहले मेटल यानी धातु की मौजूदगी के सबूत मिले थे, लेकिन अब पता चला है कि उसकी सतह के नीचे अंदाज से कहीं ज्यादा लोहा और टाइटेनियम मौजूद हो सकता है. नासा के वैज्ञानिकों ने चांद पर बर्फ खोजते-खोजते वहां के गड्ढों (क्रेटर्स) में बेहद बड़ी मात्रा में धातु की खोज कर डाली है.

चांद की सतह पर धातुओं की मौजूदगी है, यह जानकारी तो वैज्ञानिकों को पहले से पता थी, लेकिन नासा के लूनर रिकॉनसेंस ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट (Lunar Reconnaissance Orbiter – LRO) के मिनिएचर रेडियो फ्रीक्वेंसी (एमआरएफ) उपकरण ने संकेत दर्ज किए कि इनकी मात्रा कहीं ज्यादा है और वहां लोहे और टाइटेनियम के भंडार हैं.

चंद्रमा की निचली सतह पर इस धात्विक वितरण को LRO पर स्थापित मिनिचुर रेडियो फ्रीक्वेंसी (Miniature Radio Frequency– Mini-RF) उपकरण द्वारा देखा गया है.

Mini-RF के निष्कर्षों को LRO के वाइड-एंगल कैमराजापान के कगुया मिशन (Kaguya mission) तथा नासा के लूनर प्रॉस्पेक्टर अंतरिक्ष यान से निर्मित धातु ऑक्साइड मानचित्र द्वारा पुष्टि की गयी है.

इसकी खोज किस प्रकार हुई?

इसकी खोज, LRO के Mini-RF उपकरण द्वारा चंद्रमा के उत्तरी गोलार्ध में स्थित क्रेटरों की सतह पर मिट्टी में विद्युतीय गुण (electrical property) का परीक्षण करने के दौरान हुई.

इस विद्युतीय गुण को पारद्युतिक स्थिरांक (dielectric constant) कहा जाता है, तथा यह किसी धातु की विद्युत पारगम्यता (electric permeability) का निर्वात में विद्युत पारगम्यता का अनुपात होता है.

  1. ये पारद्युतिक गुण, धात्विक खनिजों की सांद्रता से प्रत्यक्षतः संबंधित होते हैं.
  2. सर्वेक्षण के दौरान, क्रमिक रूप से 5 किमी व्यास के आकार तक बड़े क्रेटरों में पारद्युतिक गुणों के स्तर में सापेक्षिक रूप से वृद्धि पायी गयी. इससे बड़े आकार के क्रेटर में पारद्युतिक स्थिरांक (dielectric constant) का मान बराबर पाया गया.
  3. इन निष्कर्षों ने संभावना को जन्म दिया कि, बड़े क्रेटरों में पारद्युतिक स्थिरांक में वृद्धि होने का कारण, उल्काओं द्वारा इन बड़े क्रेटरों का निर्माण के दौरान चंद्रमा की सतह के नीचे से लौह तथा टैटेनियम ऑक्साइड युक्त धूल का उपरी सतह पर आ जाना है.

चंद्रमा का निर्माण

चंद्रमा के निर्माण से सबंधित सबसे प्रचलित सिद्धांत यह है, कि लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मंगल ग्रह के आकार का एक आदि-ग्रह (Proto–planet) पृथ्वी निर्माण के आरंभिक काल में ही पृथ्वी से टकरा गया, परिणामस्वरूप पृथ्वी का एक टुकड़ा विखंडित होकर इसका उपग्रह बन गया.

इस परिकल्पना के पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होते हैं, जैसे कि चन्द्रमा तथा पृथ्वी की रासायनिक संरचना में लगभग समानता, आदि.

इन निष्कर्षों के निहितार्थ

  1. हमें मालूम है, कि पृथ्वी की पर्पटी में चंद्रमा की अपेक्षा लौह ऑक्साइड की मात्रा बहुत ही कम पायी जाती है, वैज्ञानिक इसका कारण समझने की कोशिश कर रहे हैं.
  2. अब, चंद्रमा पर धातु की अधिक मात्रा की नई खोज ने वैज्ञानिकों के कार्य को और भी कठिन बना दिया है. इससे, चंद्रमा-निर्माण संबधित परिकल्पनाओं की सत्यता पर प्रश्नचिन्ह लगता है.
  3. इसका एक संभावित कारण यह हो सकता है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी की निचली सतह की सामग्री से हुआ हो, अथवा हाल ही में चंद्रमा पर पायी गयी धातुओं की उपस्थिति,चंद्रमा की पिघली हुई सतह के शनैः शनैः ठंडा होने का परिणाम हो सकती है.

LRO क्या है?

लूनर रिकोनेसेंस ऑरबिटर (LRO) नासा का एक मिशन है जो चंद्रमा की भविष्य में मानव द्वारा की जाने वाली यात्रा के लिए आवश्यक सूचनाएँ एकत्र करने के लिए भेजा गया है.

इसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं –

  • चंद्रमा में सम्भावित संसाधनों का पता लगाना.
  • चंद्रमा के तल का विस्तृत नक्शा तैयार करना.
  • चंद्रमा के विकिरण के स्तरों के बारे में आँकड़े जुटाना.
  • भविष्य में चंद्रमा पर भेजे जाने वाले मानव-सहित अभियानों अथवा रोबोट भेजकर नमूने मंगवाने के अभियान में उपयोगी सिद्ध होने वाले संसाधनों की चन्द्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में खोज करना.
  • भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले रोबोटों और मानवों के उतरने के लिए उपयुक्त स्थलों की मापी करना.

Prelims Vishesh

Central Zoo Authority :-

  • पर्यावरण मंत्रालय ने केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) का पुनर्गठन करते हुए उसमें नए सदस्यों के रूप में दिल्ली के योजनान्वयन एवं स्थापत्य विद्यालय के एक विशेषज्ञ और एक मोलेक्यूलर जीव विज्ञानी को शामिल कर लिया है.
  • उल्लेखनीय है कि CZA एक वैधानिक निकाय है जो देश-भर के चिड़ियाघरों का नियमन करता है.
  • इसकी मान्यता बिना देश में कोई भी चिड़ियाघर संचालित नहीं हो सकता.

Dhamma Chakra Day :-

  • इस वर्ष 4 जुलाई को पड़ने वाली आषाढ़ पूर्णिमा को केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ (International Buddhist Confederation – IBC) के साथ मिलकर धम्मचक्र दिवस मनाने जा रहा है.
  • ज्ञात हो कि बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् आषाढ़ पूर्णिमा को ही बुद्ध भगवान् ने पहली बार पाँच शिष्यों को सारनाथ के निकट मृगवन में पहले उपदेश दिए थे.
  • इस दिवस को श्रीलंका में Esala Poya और थाईलैंड में Asanha Bucha कहा जाता है.
  • यह दिवस हिन्दू और बौद्ध दोनों गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाते हैं.

Places in News – Botswana :-

  • दक्षिणी अफ्रीका के जमीन से घिरे देश बोत्स्वाना के ओकावांगो डेल्टा में सैकड़ों अफ़्रीकी हाथी रहस्मय ढंग से मर गये हैं.
  • ज्ञातव्य है कि किसी भी अफ़्रीकी देश की तुलना में बोत्स्वाना में सबसे अधिक हाथी पाए जाते हैं.
  • ओकावांगो डेल्टा 2014 की विश्व धरोहर सूची में वर्णित है.

Prerak Daur Samman :-

  • स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए 2021 में नगरों को जनसंख्या के आधार पर नहीं, अपितु छह चुनिंदे प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाएगा.
  • यह संकेतक हैं –
  1. अपशिष्ट को गीले, शुष्क और हानिकारक श्रेणियों में विभाजन
  2. गीले कचरे की प्रसंस्करण की क्षमता
  3. गीले और सूखे कचरे के पुनश्चक्रण और प्रसंस्करण
  4. निर्माण कार्य और विध्वंस कार्यों से उत्पन्न कचरे का प्रसंस्करण
  5. जमीन भराई में जा रहे कचरे का प्रतिशत
  6. शहर में स्वच्छता की स्थिति


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