Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 06 August 2019


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders.

Topic : Pashmina Products Receive BIS Certification

पश्मीना उत्पादों की शुद्धता को अभिप्रमाणित करने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards – BIS) ने पिछले दिनों उन उत्पादों की पहचान, मार्किंग और लेबल देने के लिए एक भारतीय मानक प्रकाशित किया है.

अभिप्रमाणन की आवश्यकता और महत्त्व

  • अभिप्रमाणन से पश्मीना में मिलावट रुकेगी.
  • पश्मीना के कच्चे माल से उत्पाद तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों और घुमंतू समुदायों के हितों की रक्षा होगी.
  • ग्राहक पश्मीना की शुद्धता को लेकर आश्वस्त होंगे.
  • आजकल बाजार में गलत लेबल लगाकर नकली अथवा निम्नकोटि की पश्मीना बेची जा रही है. अभिप्रमाणन होने से ऐसी प्रथाओं को हतोत्साह किया जाएगा.
  • अभिप्रमाणन से यह लाभ होगा कि अधिक से अधिक परिवार पश्मीना का काम करने लगेंगे और नई पीढ़ी को यह काम सम्भालने का प्रोत्साहन मिलेगा.

पृष्ठभूमि

पश्मीना उत्पाद उन घुमंतू गड़ेरियों द्वारा बनाये जाते हैं जो चांगथंग (Changthang) जैसे विपरीत और कठिन भूभाग में रहते हैं. ये लोग अपनी आजीविका के लिए केवल पश्मीना पर ही निर्भर हैं. वर्तमान में ऐसे 2,400 परिवार 2.5 लाख पश्मीना बकरियाँ पाल रहे हैं.

पश्मीना बकरियाँ कौन-सी बकरियाँ है?

  • पश्मीना बकरी को चांगथंगी बकरी भी कहते हैं. यह बकरी लद्दाख संघीय क्षेत्र में अत्यंत ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं.
  • इन बकरियों से अत्यंत महीन ऊन निकलता है जो बुनाई के बाद पश्मीना के नाम से जाना जाता है.
  • जो घुमंतू समुदाय इन बकरियों को पालता है उन्हें चांग्पा कहा जाता है.
  • पश्मीना बकरियों ने चांगथंग, लेह और लद्दाख क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में कायाकल्प ला दिया है.

BIS के बारे में

  • BIS भारत सरकार द्वारा Bureau of Indian Standards Act, 1986 के तहत कार्यादेश के माध्यम से गठित एक निकाय (statutory organization) है.
  • पहले इस निकाय का नाम भारतीय मानक संस्थान (ISI) था.
  • यह भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत काम करता है.
  • BIS का पदेन अध्यक्ष (ex-officio) उक्त मंत्रालय का मंत्री होता है.
  • इस निकाय में अन्य 25 सदस्य होते हैं जो केंद्र एवं राज्य सरकारों के उद्योग, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों, उपभोक्ता संगठनों से लिए जाते हैं.
  • भारतीय मानक ब्यूरो भारत के लिए विश्व व्यापार संगठन -TBT (WTO-TBT) पूछताछ केंद्र के रूप में कार्य करता है.

GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Time Release Study (TRS)

सीमा-पार माल ढुलाई की गति को तेज करने के लिए और इस प्रकार व्यापारियों को लाभ पहुँचाने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग पहला राष्ट्रीय समय निर्गमन अध्ययन (Time Release Study – TRS) करवाएगा. यह कार्य वार्षिक आधार पर अब से प्रत्येक वर्ष इसी समय किया जाएगा.

समय निर्गमन अध्ययन क्या है?

समय निर्गमन अध्ययन विश्व सीमा शुल्क संगठन (World Customs Organization – WCO) का एक रणनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय रूप से मान्य साधन है जिससे आगमन के समय से लेकर माल के भौतिक निर्गमन तक लगने वाले वास्तविक समय को मापता है.

उद्देश्य

इस अध्ययन का उद्देश्य माल के आवागमन की प्रक्रिया में होने वाली अड़चनों का पता लगाना है और साथ ही इस प्रक्रिया को कुशल और कारगर बनाने के लिए आवश्यक उपाय करना है.

विश्व सीमा शुल्क संगठन के TRS का विशेष उल्लेख विश्व व्यापार संगठन व्यापार सुविधा समझौते (WTO TFA) की धारा 7.6 में अंकित है जहाँ इसे माल के निर्गमन के औसत समय को मापने और प्रकाशित करने का सदस्यों के लिए एक साधन कहा गया है.

TRS का उपयोग

  • आज सदस्य देशों द्वारा TRS का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है. ये सदस्य व्यापार को सुगम बनाने के लिए गठित अपनी-अपनी राष्ट्रीय समितियों के अनुसार रणनीति की योजना बनाने और TFA उपायों को सम्यक ढंग से क्रमबद्ध करने में इस साधन का उपयोग कर रहे हैं.
  • विगत वर्षों में इस साधन ने पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया है. अंतर्राष्ट्रीय दानकर्ता समुदाय और WCO विकास भागीदार WTO TFA के आकलन, मूल्यांकन और अभिवृद्धि को मापने के एक प्रमुख उपाय के रूप में इस साधन की अनुशंसा कर रहे हैं.

आवश्यकता और माहात्म्य

व्यापारियों को सीमा-शुल्क के क्लीयरेंस में होने वाली देरी अत्यंत खलती है. जब उन्हें यह पता ही नहीं होता है कि जो माल वे मँगा रहे हैं, वे माल कब उनके पास पहुंचेंगे तो उन्हें उत्पादन का समय संधारित करने में समस्या होती है. कोई शीमा शुल्क प्रशासन कारगर है या नहीं, यह जानने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापारी समुदाय यह देखता है कि माल निकलने में कितना समय लग रहा है. समय निर्गमन अध्ययन (TRS) सीमा शुल्क प्रशासकों के लिए भी मार्गनिर्देशन का काम करता है और उन्हें आंतरिक समीक्षा करने के लिए बाध्य करता है.


GS Paper  2 Source: PIB

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Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : National Education Policy (NEP)

भारत के उपराष्ट्रपति श्री. एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र बना देगी. विदित हो कि 15 अगस्त तक लोगों से इस नीति के विषय में सुझाव और विचार मांगे गये हैं. श्री नायडू ने आह्वान किया कि लोग इस पर अपने विचार समय सीमा के अन्दर प्रकट करें.

पृष्ठभूमि

के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक प्रारूप तैयार किया था. इस वर्ष मई में इस प्रारूप को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सार्वजनिक करते हुए उस पर लोगों से मन्तव्य मांगे थे. इसके लिए समय सीमा 15 अगस्त, 2019 रखी गई है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रारूप के मुख्य तथ्य

  1. 1986 के बाद पहली बार एक व्यापक शिक्षा नीति तैयार की जा रही है.
  2. यह नीति इन चार नींवों पर रखी गई है – उपलब्धता, समानता, गुणवत्ता, सुलभता और उत्तरदायित्व.
  3. तीन वर्ष से छह वर्ष तक के सभी बच्चों को 2025 तक उच्च कोटि की शिक्षा के साथ-साथ देखभाल की व्यवस्था की जायेगी.
  4. यह व्यवस्था विद्यालयों और आँगनवाड़ियों में भी की जायेगी क्योंकि वहाँ बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और पोषण का भी ध्यान रखा जाता है.
  5. जो बच्चे तीन वर्ष से कम के होंगे उनके परिवारों को भी विद्यालय और आँगनवाड़ियाँ वही सुविधाएँ उपलब्ध कराएंगी.
  6. 2025 तक सभी बच्चे उम्र के अनुसार साक्षरता और अंक ज्ञान प्राप्त करने लगेंगे. राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसके लिए कई प्रकार के कार्यक्रमों और उपायों का वर्णन किया गया है.
  7. पाठ्यक्रमों और बाल शिक्षा से सम्बंधित अन्य संरचनाओं को फिर से रूपांकित किया जाएगा. विद्यालय की पढ़ाई और अन्य शिक्षेतर गतिविधियों पर एक साथ ध्यान दिया जाएगा.
  8. शैक्षणिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यावसायिक पढ़ाई की सुविधा भी दी जायेगी.
  9. ऐसी परीक्षा पद्धति बनाई जायेगी जिससे बच्चे तनाव से मुक्त हो कर सही ज्ञान पा सकें.
  10. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप में यह लक्ष्य रखा गया है कि 3 से 18 वर्ष के बीच के सभी बच्चों को 2030 तक विद्यालय की शिक्षा मिले. इसके लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम का दायरा स्कूल-पूर्व शिक्षा से 12वीं तक बढ़ा दिया जाएगा.
  11. शिक्षक शिक्षा के मूल आधार होते हैं. अतः नई शिक्षा नीति में शिक्षकों को शैक्षणिक प्रणाली के केंद्र में रखा गया है. सभी विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक होंगे और उनके काम करने के लिए ऐसा परिवेश दिया जाएगा जिससे विद्यालय में उत्तम कार्य-संस्कृति का उदय हो. एक भी अस्थायी शिक्षक नहीं रखा जाएगा. सभी पदों पर सक्षम और योग्य शिक्षक नियुक्त होंगे.
  12. अच्छे शिक्षक तैयार हो सकें इसके लिए चार वर्षों का एक कठोर प्रशिक्षण शिक्षकों को उनके अपने-अपने विषय के लिए दिया जाएगा.
  13. भारत के वर्तमान में चल रहे 800 विश्वविद्यालयों और 40,000 से अधिक महाविद्यालयों को जोड़कर 10-15 हजार ऐसे संस्थानों में बदल दिया जाएगा जो उत्कृष्टता के लिए जाने जाएँगे जिससे गुणवत्ता में सुधार हो और क्षमता का विस्तार हो. नई व्यवस्था में केवल बड़े-बड़े कई शैक्षणिक शाखाओं वाले संस्थान रह जाएँगे जिनमें अच्छा-ख़ासा निवेश किया जाएगा.
  14. उच्चतर शिक्षा के संस्थान तीन प्रकार के होंगे – i) प्रकार एक (Type 1) में वे विश्वविद्यालय होंगे जो मुख्यतः शोध पर ध्यान देंगे, परन्तु स्नातक से लेकर PHD तक की पढ़ाई भी साथ-साथ चलेगी ii) प्रकार दो (Type 2) में वे विश्वविद्यालय आएँगे जिनका मुख्य ध्यान पढ़ाई पर होगा, पर वहाँ साथ-साथ शोध कार्य भी चलेगा iii) प्रकार तीन (Type 3) में महाविद्यालय आएँगे जहाँ स्नातक की पढ़ाई होगी.
  15. ये सभी संस्थान अपनी ओर से डिग्री बाँटेंगे अर्थात् ये विश्वविद्यालय की सम्बद्धता (affiliations) का नियम नहीं होगा.
  16. महाविद्यालयों में विज्ञान, कला, मानविकी, गणित और व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध कराई जायेगी और छात्र स्वतंत्र रूप से विषयों का चयन करेंगे. छात्र अपनी इच्छानुसार किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश और वहाँ से निकल भी सकेंगे. उन्होंने जितनी पढ़ाई की उस हिसाब से उनको उचित डिग्री मिलेगी.
  17. स्नातक के लिए तीन वर्षों का पाठ्यक्रम होगा परन्तु साथ ही चार वर्षों का कार्यक्रम भी उपलब्ध होगा.
  18. सार्वजनिक शिक्षा के सभी स्तरों पर सरकारी निवेश में बढ़ोतरी की जायेगी.

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप में क्या कमी है?

  1. यह ठीक है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप में इस बात पर चर्चा हुई है कि समाज के कई ऐसे समूह हैं जिनका शिक्षा प्रणाली में प्रतिनिधित्व नहीं है. परन्तु राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रारूप वर्तमान प्रणाली में पहले से विद्यमान असमानताओं का उल्लेख नहीं करता है.
  2. गुणवत्तायुक्त शिक्षा गरीब बच्चों के लिए सुलभ नहीं है जबकि अमीर बच्चों के लिए है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रारूप में इस खाई को पाटने के विषय में कुछ नहीं कहा गया है.
  3. प्रारूप में विद्यालयों के लिए एक सामान्य न्यूनतम स्तर बताना चाहिए था जिसके नीचे कोई विद्यालय नहीं जा सके.
  4. नई शिक्षा नीति में अभिभावकों को निजी विद्यालयों के नियामक के रूप में प्रस्तुत किया गया है. परन्तु यह संभव नहीं प्रतीत होता है क्योंकि विद्यालय के संचालक संसाधन के मामले में सशक्त और समृद्ध होते हैं. उनसे विद्यालय में गुणवत्ता, सुरक्षा और समानता लागू करवाना अभिभावकों वश की बात नहीं होगी, विशेषकर गरीब और नवशिक्षित अभिभावकों के लिए.

चुनौतियाँ

  • नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर खर्च होने वाली धनराशि को दुगुना कर GDP का 6% करने तथा शिक्षा पर समग्र सार्वजनिक व्यय को वर्तमान 10% से बढ़ाकर 20% करने की बात कही गई है. यह वांछनीय तो है पर निकट भविष्य में यह संभव नहीं दिखता क्योंकि अधिकांश अतिरिक्त धनराशि राज्यों से आनी है.
  • प्रारूप में पालि, प्राकृत और फारसी के लिए नए संस्थान बनाने की बात कही गई है. यह एक नवीन विचार है, परन्तु क्या अच्छा नहीं होता कि इसके बदले मैसूरू में स्थित केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान को ही एक विश्वविद्यालय बनाते हुए इन भाषाओं के अध्ययन के लिए सुदृढ़ किया जाता.
  • शिक्षा अधिकार अधिनियम को विस्तारित करते हुए उसमें स्कूल-पूर्व बच्चों को शामिल करना एक अच्छा प्रस्ताव है. परन्तु यह काम धीरे-धीरे होना चाहिए क्योंकि वर्तमान शैक्षणिक अवसंरचना और शिक्षक पदों में रिक्तियों को देखते हुए यह काम तेजी से नहीं हो सकता है. पुनः शिक्षा अधिकार अधिनियम में इस आशय का सुधार करने में भी समय लग सकता है.
  • नई नीति के अनुसार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग गठित होना है. परन्तु इस आयोग की राह कई प्रशासनिक कारणों से काँटों भरी हो सकती है. उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017 का क्या होगा? चिकित्सा, कृषि और विधि से सम्बंधित संस्थानों को एक ही छतरी के अन्दर लाना सरल नहीं होगा.
  • प्रस्तावित नीति में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक प्राधिकरण (National Higher Education Regulatory Authority) की अभिकल्पना है. पर यह प्राधिकरण नियमन करने में कहाँ तक सफल होगा कहा नहीं जा सकता.
  • शिक्षा नीति के प्रारूप में उच्चतर शिक्षा निधि एजेंसी (Higher Education Funding Agency) जैसी एजेंसियों और उत्कृष्ट संस्थानों के विषय में मौन है.

GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Jammu & Kashmir Reorganisation Bill-2019

भारतीय संघ में जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति (special status) को समाप्त करते हुए केंद्र सरकार ने संविधान में वर्णित सभी प्रावधानों को उस राज्य में लागू कर दिया है और साथ ही उसको दो संघीय क्षेत्रों (Union Territories) में विभाजित कर दिया है.

इस सन्दर्भ में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने पिछले दिनों दो संकल्प और दो विधेयक संसद में अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया. ये हैं –

  1. धारा 370 (Article 370) से सम्बंधित 1954 के तात्कालिक राष्ट्रपति के आदेश का अवक्रमण करते हुए वर्तमान राष्ट्रपति के द्वारा निर्गत आदेश संविधान (जम्मू और कश्मीर में लागू) आदेश, 2019 / Constitution (Application to Jammu & Kashmir) Order, 2019 {संदर्भ. अनुच्छेद 370 (1)}
  2. संविधान की धारा 370 की समाप्ति के विषय में संकल्प {संदर्भ. अनुच्छेद 370 (3)}
  3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 {संदर्भ. संविधान की धारा 3}
  4. जम्मू-कश्मीर आरक्षण (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019

पृष्ठभूमि

अभी तक जम्मू-कश्मीर से सम्बंधित विधायी कार्य के लिए संसद को केवल अवशिष्ट शक्तियाँ ही थीं, जैसे – आतंक और अलगाववादी गतिविधियों को रोकने के लिए कानून बनाना, विदेश और देश के अन्दर की यात्रा पर कर लगाना तथा संचार से सम्बंधित कानून बनाना.

मुख्य परिवर्तन

  • राष्ट्रपति ने संविधान की धारा 370 में प्रदत्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इसके प्रावधानों को बदल दिया है जिसके फलस्वरूप अब सभी केन्द्रीय कानून और संधियाँ जम्मू-कश्मीर में भी लागू होंगी.
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को संघीय क्षेत्र बना दिया गया है. जम्मू-कश्मीर में विधान सभा रहेगा और लद्दाख में विधान सभा नहीं होगा.
  • राष्ट्रपति ने जो अधिसूचना निर्गत की है उसके अनुसार संविधान के सभी प्रावधान उनके संशोधनों, अपवादों एवं परिवर्तनों के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू हो गये हैं.
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 में उपराज्यपाल को व्यापक शक्तियाँ दी गई हैं और मुख्यमंत्री पर यह दायित्व दिया गया है कि वह सभी प्रशासनिक निर्णयों और कानून से सम्बंधित प्रस्तावों से उपराज्यपाल को अनिवार्य रूप से अवगत कराएगा.
  • सभी केन्द्रीय कानूनों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर राज्य के कानून अब नए संघीय क्षेत्रों पर लागू होंगे.
  • जम्मू कश्मीर (J&K) एवं लद्दाख की सम्पत्तियों और दायित्वों का बँटवारा एक केन्द्रीय समिति के सुझाव के अनुसार एक वर्ष में कर दिया जाएगा.
  • राज्य लोक उपक्रमों तथा स्वायत्त निकायों में काम करने वाले कर्मचारी अगले एक वर्ष तक अपने पदों पर बने रहेंगे जब तक उनके विषय में नया निर्णय नहीं लिया जाएगा.
  • दोनों संघीय क्षेत्रों की पुलिस और विधि व्यवस्था केंद्र के हाथ में होगी.
  • धारा 370 के उपवाक्य (3) के परन्तुक (proviso) में वर्णित शब्दावाली “संविधान सभा” को सुधारकर अब उसे “विधान सभा” कर दिया गया है.

जम्मू-कश्मीर संघीय क्षेत्र की विधायी शक्तियाँ

  1. विधि व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर राज्य सूची में वर्णित सभी विषयों पर जम्मू-कश्मीर की विधान सभा संघीय क्षेत्र के पूरे भूभाग के लिए अथवा उसके किसी अंश के लिए कानून बना सकती है.
  2. यदि संसद द्वारा और विधान सभा द्वारा बनाए गये कानूनों में यदि कोई विसंगति है तो संसद का क़ानून माना जाएगा और विधान सभा का कानून निरस्त हो जाएगा.
  3. मुख्यमंत्री का यह काम होगा कि वह मंत्रिमंडल द्वारा संघीय क्षेत्र के प्रशासन से सम्बंधित लिए गये निर्णयों और कानून बनाने के प्रस्तावों को उपराज्यपाल को बतायेगा और अन्य ऐसी सूचनाएँ उपलब्ध कराएगा जिन्हें उपराज्यपाल चाहे.

उपराज्यपाल की भूमिका एवं शक्तियाँ

  • संविधान की धारा 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में उपराज्यपाल (Lieutenant Governor – LG) की नियुक्ति करेगा.
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 में प्रावधान है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों संघीय क्षेत्रों के लिए एक ही उपराज्यपाल होगा.
  • लद्दाख में विधान सभा नहीं होगा, इसलिए वहाँ केंद्र उपराज्यपाल की सहायता के लिए परामर्शियों की नियुक्ति करेगा.
  • जहाँ तक जम्मू-कश्मीर संघीय क्षेत्र की बात है वहाँ का उपराज्यपाल अखिल भारतीय सेवाओं एवं भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो से सम्बद्ध मामलों के साथ-साथ उन सभी विषयों पर अपने विवेक के अनुसार काम करेगा जो विधान सभा के क्षेत्राधिकार के बाहर आते हैं.
  • उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करेगा और मुख्यमंत्री के सहयोग से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेगा. उपराज्यपाल ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएगा.
  • उपराज्यपाल को यह शक्ति होगी कि वह आदेश निकाले जो उतना ही प्रभावी होंगे जितना कि विधान सभा द्वारा पारित कोई अधिनियम.

प्रभाव

  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 का सदन में उपस्थापित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि 1954 के आदेश के दिन लद गये. विदित हो कि उस आदेश में धारा 3 के साथ एक परन्तुक जोड़ा गया था जिसके अनुसार “राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने-घटाने अथवा उसका नाम बदलने अथवा उसकी चौहद्दी संशोधित करने के बारे में संसद में कोई भी विधेयक नहीं लाया जा सकता जब तक कि विधान सभा सहमति न दे दे.”
  • 1954 के आदेश के समाप्त होते ही राज्य की विधान सभा की शक्तियाँ समाप्त हो गई हैं और संसद द्वारा आरक्षण सहित अन्य विषयों पर बनाए गये कानून जम्मू-कश्मीर में उसी तरह लागू होंगे जिस तरह देश के अन्य भागों में लागू होते हैं.
  • केंद्र सरकार का कहना है कि उसने प्रस्ताव के द्वारा एक पुराने भेद-भाव को समाप्त किया है और जम्मू-कश्मीर के निवासियों तथा देश के अन्य नागरिकों के बीच की खाई को पाटने का काम किया है.
  • संविधान की धारा 352 में एक उपवाक्य के द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि जम्मू-कश्मीर की सरकार की सहमति के बिना आंतरिक विप्लव अथवा आसन्न खतरे को छोड़कर किसी भी आधार पर आपातकाल जम्मू-कश्मीर में नहीं लगाया जा सकता. 1954 के आदेश के निरस्त हो जाने के कारण यह प्रावधान भी समाप्त हो गया है.

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 लाने के पीछे का तर्क

  • धारा 370 ने जम्मू-कश्मीर को भारत में सच्चे तौर पर विलय को रोक रखा था.
  • धारा 370 पक्षपातपूर्ण धारा थी क्योंकि यह लिंग, वर्ग, जाति और उत्पत्ति स्थान के आधार पर भेद-भाव करती थी.
  • इस धारा की समाप्ति के पश्चात् जम्मू-कश्मीर में निजी निवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है जो अंततः यहाँ विकास की सम्भावनाओं को बढ़ाएगा.
  • निवेश बढ़ने पर रोजगार का सृजन होगा तथा यहाँ का सामाजिक-आर्थिक परिवेश बेहतर होगा.
  • पूरे भारत वर्ष के लोग जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जमीन खरीदने में निवेश करेंगे और बहुदेशीय कम्पनियाँ यहाँ उद्योग लगा सकती हैं जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी.

चुनौतियाँ

  • भारत सरकार के प्रस्तावों पर आपत्ति करने वाले लोग इनके विरुद्ध न्यायालय जाएँगे.
  • भारत सरकार के निर्णय के विरुद्ध जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों में प्रतिक्रिया हो सकती है तथा इस प्रकार की प्रतिक्रिया देश के अन्य भागों में भी हो सकती है. ऐसी प्रतिक्रियाओं को सरकार कैसे संभालती है यह देखने का विषय होगा.

एक सामान्य राज्य और संघीय क्षेत्र (UT) में अंतर

  • राज्यों में एक चुनी हुई सरकार होती है, परन्तु संघीय क्षेत्र में चुनी हुई सरकार होने पर भी प्रशासन उपराज्यपाल के अधीन होता है.
  • साधारण राज्यों में प्रशासन मुख्यमंत्री के अधीन होता है, किन्तु संघीय क्षेत्रों में (जहाँ विधान सभा नहीं हो) यह काम राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक प्रशासक देखता है.
  • राज्यों में कार्यकारी प्रमुख राज्यपाल होता है जबकि संघीय राज्यों में राष्ट्रपति ही कार्यकारी प्रमुख होता है.
  • साधारण राज्य में कानून बनाने के लिए एक विधानसभा होती ही होती है, परन्तु किसी संघीय क्षेत्र में ऐसा होना अनिवार्य नहीं है.
  • साधारण राज्यों को शक्तियाँ संघीय पद्धति के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति वितरण के आधार प्राप्त होती हैं, जबकि संघीय क्षेत्र के मामले में शक्तियाँ भारत सरकार के हाथ में केन्द्रित होती हैं.

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Syllabus : Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security.

Topic : One nation-one ration card

भारत सरकार ने तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रायोगिक रूप से एक राष्ट्र – एक राशन कार्ड योजना का अनावरण किया है.

इस योजना के अंतर्गत जिन परिवारों के पास खाद्य सुरक्षा कार्ड हैं वे इन राज्यों के किसी भी राशन दुकान से कम मूल्य पर चावल और गेहूँ खरीद सकते हैं बशर्ते उनके राशन कार्ड इस सेवा के लिए आधार नंबर से जुड़े हुए हों.

एक राष्ट्र –  एक राशन कार्ड योजना की विशेषता

एक राष्ट्र – एक राशन कार्ड योजना यह सुनिश्चित करेगी कि जन-वितरण प्रणाली से लाभ लेने वाले सभी व्यक्ति, विशेषकर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले, देश के अन्दर किसी भी अपनी पसंद की PDS दुकान से अनाज आदि प्राप्त कर सकें.

लाभ

इस योजना का लाभ यह होगा कि खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी युक्त अनाज पाने से कोई निर्धन व्यक्ति इसलिए वंचित न हो जाए कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान चला गया है. इस योजना से एक अतिरिक्त लाभ यह होगा कि कोई व्यक्ति अलग-अलग राज्यों में जन-वितरण प्रणाली का लाभ लेने के लिए एक से अधिक राशन कार्ड नहीं बनवा पायेगा.

माहात्म्य

इस योजना से के फ़लस्वरूप लाभार्थी किसी एक PDS दुकान से बंधा नहीं रह जाएगा और ऐसी दुकान चलाने वालों पर उसकी निर्भरता घट जायेगी और साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों में भी कटौती होगी.

चुनौतियाँ

  • प्रत्येक राज्य के पास जन-वितरण प्रणाली के विषय में अपने नियम होते हैं. यदि एक राष्ट्र – एक राशन कार्ड योजना लागू की गई तो संभावना है कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिले. वैसे भी सभी जानते हैं कि इस प्रणाली में भ्रष्टाचार होता रहता है.
  • इस योजना से जन-सामान्य का कष्ट बढ़ जाएगा और बिचौलिए तथा भ्रष्ट PDS दुकान के मालिक उसका शोषण करेंगे.
  • इन्हीं कारणों से तमिलनाडु ने इस योजना का विरोध किया है और कहा है कि इसको लागू करने से अवांछित परिणाम होंगे. साथ ही उसका कहना है कि यह योजना संघवाद पर कुठाराघात करती है.

Prelims Vishesh

Significance of US Federal Reserves rate cut and its impact on India :-

  • 11 वर्षों के अंतराल के पश्चात् अमेरिका के केन्द्रीय बैंक – यू.एस. फ़ेडरल रिज़र्व – ने पहली बार ब्याज दरों में क्वार्टर-प्रतिशत की कटौती घोषित की है.
  • विदित हो कि इस प्रकार की कटौती अन्य कई विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव डालता है.
  • इस कटौती से मुद्रा व्यापार के हिसाब से भारत का बाजार पहले से अधिक आकर्षक हो जाएगा.

Indian Space Research Organisation (ISRO) Technical Liaison Unit (ITLU) :-

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रूस की राजधानी मास्को में इसरो की एक तकनीकी सम्पर्क इकाई (ITLU) स्थापित करने की अनुमति दे दी है.
  • इस प्रकार की दो इकाइयाँ वाशिंगटन और पेरिस में पहले भी स्थापित हो चुकी हैं.
  • इन इकाइयों के माध्यम से इसरो अमेरिका और यूरोप की अन्तरिक्ष एजेंसियों के साथ तालमेल बढ़ा सकेगा और तकनीकों का आदान-प्रदान कर सकेगा.

Reservation jobs in factories for locals in Goa :-

  • गोवा की सरकार कारखानों की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 80% आरक्षण देने की योजना बना रही है.
  • विदित हो कि पिछले दिनों आंध्र प्रदेश ने भी इस प्रकार का आरक्षण दिया है जिसमें 75% आरक्षण का प्रावधान किया गया है.

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