SANSAR डेली करंट अफेयर्स, 06-07 June 2022

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 06 June 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic: Public Financial Management System – PFMS

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली’ (Public Financial Management System – PFMS) का “एकल नोडल एजेंसी” (Single Nodal Agency – SNA) डैशबोर्ड लॉन्च किया गया.

SNA मॉडल एवं डैशबोर्ड के बारे में

  • SNA मॉडल के तहत हर एक राज्य को प्रत्येक केंद्र प्रायोजित योजना के लिए एक ‘सिंगल नोडल एजेंसी’ (SNA) की पहचान करना और उसे नामित करना आवश्यक होता है.
  • एक राज्य के लिए किसी योजना से संबंधित पूरी धनराशि एक निश्चित बैंक खाते में जमा की जाती है और अन्य सभी कार्यान्वयन एजेंसियों की ओर से किए जाने वाले सभी खर्च इसी खाते से होते हैं.
  • यह मॉडल निधियों का समय पर आवंटन सुनिश्चित करता है, तथा इसके कारण निधियों की निगरानी आसान हो गई है.

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के बारे में

  • सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) एक वेब-आधारित ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन है, जिसे नियंत्रक महालेखाकार (सीजीए), व्यय विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित और कार्यान्वित किया गया है.
  • इसकी शुरुआत 2009 में भारत सरकार की सभी योजनाओं के तहत जारी निधियों पर नज़र रखने और कार्यक्रम कार्यान्वयन के सभी स्तरों पर व्यय की रियल टाइम रिपोर्टिंग के उद्देश्य से हुई थी.
  • वर्तमान में PFMS कबरेज के दायरे में केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ-साथ वित्त आयोग अनुदान सहित अन्य व्यय शामिल हैं.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic: Stockholm Conference

संदर्भ

स्टॉकहोम सम्मेलन (Stockholm Conference) की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.

‘स्टॉकहोम सम्मेलन’ के बारे में

  • ‘संयुक्त राष्ट्र मानव पर्यावरण सम्मेलन’ (United Nations Conference on the Human Environment) 5 जून से 16 जून 1972 के बीच स्वीडन के ‘स्टॉकहोम’ में आयोजित किया गया था.
  • यह पृथ्वी के पर्यावरण पर इस तरह का पहला विश्वव्यापी सम्मलेन था, और इसका विषय (थीम) ‘केवल एक पृथ्वी’ (Only One Earth) था.
  • इस सम्मेलन की परिणति ‘स्टॉकहोम घोषणा’ (Stockholm Declaration) के रूप में हुई, जिसमें पर्यावरण संबंधी सिद्धांत और पर्यावरण नीति के लिए सिफारिशों सहित एक कार्य योजना शामिल थी.

इस सम्मेलन के तीन आयाम थे:

  1. प्रतिभागी देशों द्वारा “एक दूसरे के पर्यावरण अथवा अपने राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों को क्षति नहीं पहुचाने” पर सहमति व्यक्त की गयी.
  2. पृथ्वी के पर्यावरण के लिए ‘खतरे का अध्ययन करने के लिए एक कार्य योजना’ तैयार की की गयी.
  3. देशों के बीच सहयोग स्थापित करने हेतु ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UN Environment programme – UNEP) नामक एक अंतरराष्ट्रीय निकाय की स्थापना की गयी.

स्टॉकहोम सम्मेलन का महत्व और परिणाम:

  • वर्ष 1972 तक दुनिया के किसी भी देश में ‘पर्यावरण मंत्रालय’ नहीं था.
  • ‘नार्वे’ के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन से लौटकर ‘पर्यावरण के लिए एक मंत्रालय स्थापित’ किया.
  • भारत ने, 1985 में अपने ‘पर्यावरण और वन मंत्रालय’ की स्थापना की.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास.

Topic: Bar code and RFID difference

संदर्भ

शीघ्र ही, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ‘रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) युक्त ‘बैगेज टैग’ (Baggage tags) उपलब्ध होंगे. यह देश में अपनी तरह की पहली सुविधा होगी.

RFID के बारे में

‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID), एक ‘टैग’ और ‘रीडर’ से बना एक ‘वायरलेस ट्रैकिंग सिस्टम’ है.

  • इस ‘ट्रैकिंग सिस्टम’ में वस्तुओं या लोगों की जानकारी/पहचान को संप्रेषित करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है.
  • इसमें प्रयुक्त ‘टैग’ में एन्क्रिप्टेड जानकारी, सीरियल नंबर और संक्षिप्त विवरण दर्ज किए जा सकते हैं.

प्रकार – निष्क्रिय और सक्रिय RFID टैग

  1. सक्रिय आरएफआईडी (Active RFIDs) अपने स्वयं के उर्जा स्रोत, ज्यादातर बैटरी का उपयोग करते हैं.
  2. निष्क्रिय आरएफआईडी (Passive RFIDs) को, पाठक के माध्यम से ‘विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा’ प्रसारण का उपयोग करके सक्रिय किया जाता है.

कार्यविधि

  • आरएफआईडी टैग कई अलग-अलग आवृत्तियों – निम्न आवृत्ति (low frequency), उच्च आवृत्ति (High Frequency – HF) और अल्ट्रा-उच्च आवृत्ति (ultra-high frequency – UHF) – पर रेडियो तरंगों का उपयोग करके ‘रीडर’ (पाठक) के साथ संवाद करने के लिए एक एकीकृत सर्किट और एंटीना का उपयोग करते हैं.
  • ‘टैग’ द्वारा ‘रेडियो तरंगों’ के रूप में वापस भेजे गए संदेश को डेटा में अनुवादित किया जाता है और इसका होस्ट कंप्यूटर सिस्टम द्वारा विश्लेषण किया जाता है.
  • बारकोड के विपरीत, RFID को वस्तुओं की पहचान करने के लिए ‘सीधी दृष्टि’ की आवश्यकता नहीं होती है.

‘बारकोड’ क्या होते हैं?

‘बारकोड’ (Barcode), कंप्यूटर सिस्टम में डेटा दर्ज करने के लिए उपयोग की जाने वाली ‘समानांतर पट्टियों अथवा भिन्न-भिन्न चौड़ाई वाली रेखाओं की एक मुद्रित अनुक्रम (सीरीज) होते हैं.

  • ‘बारकोड’ की पट्टियाँ सफेद पृष्ठभूमि पर काले रंग की होती हैं और अनुप्रयोग के आधार पर इनकी चौड़ाई और संख्या में भिन्नता होती है.
  • ये पट्टियाँ / शलाकाएँ (BARS), बाइनरी अंकों- शून्य और एक – का प्रतिनिधित्व करते हैं. बाइनरी संख्याएं एक डिजिटल कंप्यूटर द्वारा संसाधित ‘शून्य’ से ‘नौ अंकों’ का प्रतिनिधित्व करती हैं.
  • इन बारकोड को विशेष ‘ऑप्टिकल स्कैनर’ से स्कैन किया जाता है जिसे ‘बारकोड रीडर’ कहा जाता है.
  • इनमें से अधिकांश कोड्स में केवल दो अलग-अलग चौड़ाई के ‘बार’ का उपयोग किया जाता है, हालांकि कुछ कोड्स में ‘भिन्न प्रकार की चार चौड़ाईयों’ का उपयोग होता है.
  • ‘क्यूआर कोड’ (QR code), बारकोड के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक है.

RFID और बारकोड के बीच अंतर

  1. ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) में ‘संचार’ के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है, और इस तकनीक में डेटा प्राप्त करने के लिए सीधी नजर या दृष्टि की आवश्यकता नहीं होती है; जबकि, बारकोड में ‘स्टिकी टैग’ पर मुद्रित श्वेत-श्याम पैटर्न को पढ़ने के लिए प्रकाश का उपयोग किया जाता है.
  2. RFID टैग, भले ही टैग क्रियाशील न हो, फिर भी एक क्रियाशील या चालू रीडर के साथ ‘संचार’ कर सकता है.
  3. कागज या स्टिकी लेबल पर मुद्रित होने पर, ‘बारकोड’ के घिस जाने या फट जाने का खतरा रहता है, जोकि इनकी पठनीयता को प्रभावित कर सकता है. RFID टैग, बारकोड की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं.
  4. ‘बारकोड स्कैनर’ के विपरीत, RFID स्कैनर एक सेकंड में दर्जनों टैग को प्रोसेस कर सकता है.
  5. ‘बारकोड’ सरल और नकल करने में आसान होते है और नकली बारकोड्स को आसानी से बनाया जा सकता है, जबकि RFID अधिक जटिल होते है और इनकी नक़ल करना कठिन होता है.
  6. बारकोड की तुलना में RFID टैग महंगे होते हैं.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

डीएनए बारकोडिंग (DNA Barcoding)

  • डीएनए बारकोडिंग एक विशिष्ट जीन से डीएनए के एक छोटे खंड का उपयोग करके प्रजातियों की सटीक पहचान करने की एक विधि है.

 ‘इंटरनेशनल बारकोड ऑफ लाइफ’ (International Barcode of Life- iBOL)

  • iBOL डीएनए बारकोड उद्धरण पुस्तकालयों, अनुक्रमण सुविधाओं, सूचनात्मक प्लेटफार्मों, विश्लेषणात्मक प्रोटोकॉल और जैव-विविधता की सूची एवं मूल्यांकन के लिये आवश्यक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करके जैव विविधता विज्ञान को परिवर्तित करने की इच्छा के साथ विश्व के देशों का एक अनुसंधान गठबंधन है.
  • इसकी स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी.  

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास.

Topic: Commission for Air Quality Management – CAQM

संदर्भ

हाल ही में, “वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग” (Commission for Air Quality Management – CAQM) द्वारा 1 जनवरी 2023 से पूरे दिल्ली-NCR क्षेत्र में औद्योगिक, घरेलू और अन्य विविध अनुप्रयोगों में कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश निर्गत किये गये हैं.

CAQM के बारे में

  • इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (air quality index) में उल्लिखित समस्याओं का समाधान और पहचान, अनुसंधान व बेहतर समन्वय के लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश के तहत स्थापित किया गया था.
  • इसने पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण {Environment Pollution (Prevention and Control) Authority- EPCA} को प्रतिस्थापित किया है.
  • 18 सदस्यीय इस आयोग की अध्यक्षता केंद्र द्वारा नियुक्त अध्यक्ष द्वारा की जाती है. इस आयोग का मुख्यालय दिल्‍ली में स्थापित किया जाएगा.

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण क्या है?

राजधानी में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्राधिकृत एक संस्था है, जिसका नाम पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (Environment Pollution Control Authority – EPCA) है. यह प्राधिकरण प्रदूषण के विभिन्न स्तरों के लिए एक क्रमिक प्रतिक्रिया कार्ययोजना (Graded Response Action Plan – GRAP) पर काम करता है.


Sansar Daily Current Affairs, 07 June 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे.

Topic: Sant Kabirdas

संदर्भ

हाल ही में, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा ‘मगहर’ (उत्तर प्रदेश) में ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत ‘संत कबीर अकादमी एवं अनुसंधान केंद्र’ का उद्घाटन किया गया.

संत कबीर दास

  1. संत कबीर दास 15वीं शताब्दी के भारत के एक बहुत प्रसिद्ध संत, कवि और सामाजिक सुधारक थे.
  2. उन्होंने अपनी महान रचनाओं में परमात्मा की एकता और महानता का वर्णन किया है.
  3. वे धार्मिक भेद-भाव पर विश्वास नहीं रखते थे तथा सभी धर्मों को सहर्ष रूप से स्वीकार करते थे.
  4. कबीर दास अपने समय के प्रतिष्ठित कवि थे और उनकी रचनाओं ने भक्ति आन्दोलन को बहुत हद तक प्रभावित किया.
  5. इनकी कुछ रचनाएँ हैं – सखी ग्रन्थअनुराग सागरबीजक.
  6. उनके नाम पर कबीर पन्थ नामक धार्मिक सम्प्रदाय चला जो आज भी चल रहा है. इसके अनुयायी कबीरपंथी कहलाते हैं.
  7. कबीर दास की विचारधारा उनके गुरु स्वामी रामानंद से काफी प्रभावित थी.
  8. उनकी मृत्यु मगहर नामक स्थान में हुई थी.
  9. यहाँ हिन्दुओं ने एक कबीर मंदिर बनाया है और यहाँ मुसलमानों का भी एक मजार है.
  10. उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने मगहर को पर्यटन केंद्र बनाने का निर्णय लिया है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic: Eco-Sensitive Zone- ESZ

संदर्भ

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, देश भर में प्रत्येक संरक्षित वन, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य में, उनकी निर्धारित सीमाओं से न्यूनतम एक किमी भीतर तक अनिवार्य ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (Eco-Sensitive Zone- ESZ) होना चाहिए.

संबंधित प्रकरण:

  • शीर्ष अदालत का यह फैसला तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में ‘वन भूमि की सुरक्षा’ के संबंध में दायर एक याचिका पर आया है.
  • इसके बाद, अदालत ने उक्त रिट याचिका के दायरे में विस्तार कर दिया ताकि, पूरे देश में ऐसे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जा सके.

शीर्ष अदालत के निर्देश

  1. यदि किसी ‘राष्ट्रीय उद्यान’ या ‘संरक्षित वन’ में पहले से ही एक किमी से अधिक का ‘बफर ज़ोन’ है, तो उसे ही अनिवार्य ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) के रूप में मान लिया जाएगा.
  2. यदि ‘बफर ज़ोन’ की सीमा का प्रश्न वैधानिक निर्णय के लिए लंबित है, तो ‘एक किलोमीटर तक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने के लिए अदालत का निर्देश’, कानून के तहत अंतिम निर्णय आने तक लागू रहेगा.
  3. राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों के भीतर खनन की अनुमति नहीं होगी.
  4. राज्यों के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं गृह सचिव, अदालत के इस निर्णय के अनुपालन के लिए उत्तरदायी होंगे.

इको-सेंसिटिव जोन क्या हैं?

  • पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अनुसार घोषित किए गए हैं.
  • इन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002-2016) में शामिल किया गया था.
  • राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभ्यारण्यों की सीमाओं के 10 किमी को इको-फ्रैजाइल जोन या इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के रूप में अधिसूचित किया जाना है.
  • इस 10 किलोमीटर के नियम को सख्ती से लागू नहीं किया जाना है.

इको-सेंसिटिव जोन में किन गतिविधियों की अनुमति है और क्या प्रतिबंधित है?

इको-सेंसिटिव जोन में प्रतिबंधित गतिविधियाँ-

  • वाणिज्यिक खनन
  • सॉमिल्स – ये धूल उत्पन्न करते हैं जो जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
  • लकड़ी आदि का व्यावसायिक उपयोग.

इको-सेंसिटिव जोन में विनियमित गतिविधियाँ

  • पेड़ों की कटाई.
  • होटल और रिसॉर्ट की स्थापना,
  • प्राकृतिक जल का व्यावसायिक उपयोग,
  • विद्युत केबलों का निर्माण,
  • कृषि प्रणाली में भारी बदलाव
  • भारी प्रौद्योगिकी को अपनाना,
  • कीटनाशकों का उपयोग
  • सड़कों का चौड़ीकरण.

अनुमत गतिविधियाँ

  • चल रही कृषि या बागवानी प्रथाएं,
  • वर्षा जल संचयन
  • जैविक खेती

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

Wayanad Wildlife Sanctuary :-

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के आसपास प्रस्तावित इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco-Sensitive Zone-ESZ) को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है.
  • वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल के वायनाड जिले में स्थित है. इसका क्षेत्रफल लगभग 44 वर्ग किमी है.
  • विभिन्न प्रकार के बड़े जंगली जानवर जैसे भारतीय बाइसन, हाथी, हिरण और बाघ यहाँ पाए जाते हैं.
  • वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल का दूसरा सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य है.
  • 1973 में स्थापित, वायनाड वन्यजीव अभयारण्य अब नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का एक अभिन्न अंग है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic: Green Bond

संदर्भ

यदि भारत अपनी पहली ‘सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड’ (Sovereign Green Bond) बिक्री को जारी रखता है, तो भारत को एक कठिन लड़ाई का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि, ‘सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड’ बिक्री का उद्देश्य अधिकांश विदेशी निवेशकों को दूर करते हुए ‘प्रतिभूतियों’ को ‘रुपये’ में जारी करना है.

संबंधित प्रकरण

  • भारत के लिए यह समय, खासकर रुपये जारी करने के लिए संभवतः उपयुक्त नहीं है .
  • इस वर्ष मुद्रा में 4% से अधिक की गिरावट आई है और भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति से निपटने में निर्धारित वक्र के पीछे है, इसके अलावा,  कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ शुद्ध आयात पर दबाव बढ़ रहा है.

‘ग्रीन बॉन्ड’ के बारे में

  • ग्रीन बॉण्ड ऋण प्राप्ति का एक साधन है जिसके माध्यम से ग्रीन ’परियोजनाओं के लिये धन जुटाया जाता है, यह मुख्यतः नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन, स्थायी जल प्रबंधन आदि से संबंधित होता है.
  • बॉण्ड जो कि आय का एक निश्चित साधन होता है, एक निवेशक द्वारा उधारकर्त्ता (आमतौर पर कॉर्पोरेट या सरकारी) को दिये गए ऋण का प्रतिनिधित्व करता है. पारंपरिक बॉण्ड (ग्रीन बॉण्ड के अलावा अन्य बॉण्ड) द्वारा निवेशकों को एक निश्चित ब्याज दर (कूपन) का भुगतान किया जाता है.
  • वर्ष 2007 में यूरोपीय निवेश बैंक और विश्व बैंक जैसे कुछ बैंकों द्वारा ग्रीन बॉण्ड लॉन्च किया गया. इसके बाद वर्ष 2013 में कॉरपोरेट्स द्वारा भी इन्हें जारी किया गया जिस कारण इसका समग्र विकास हुआ.
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India- SEBI) द्वारा ग्रीन बॉण्ड जारी करने एवं इन्हें सूचीबद्ध करने हेतु पारदर्शी मानदंडों को लागू किया गया है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

मसाला बॉन्ड क्या है?

  • मसाला बांड रूपया पर आधारित एक बॉन्ड है जिससे विदेशी बाजार से भारतीय रूपये में धनराशि उठाई जायेगी. ऐसे बांड को विदेश में निर्गत करने के लिए सभी निगम एवं भारतीय बैंक योग्य होंगे.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह कह रखा है कि मसाला बॉन्ड से उठाये जाने वाले पैसे भूसंपदा से सम्बंधित कार्य में नहीं लगाए जा सकते. परन्तु इसका प्रयोग समेकित टाउनशिप के निर्माण अथवा सस्ती आवास परियोजनाओं में किया जा सकता है.
  • इन कार्यों के लिए भी मसाला बॉन्ड से प्राप्त धनराशि का प्रयोग नहीं हो सकता है – पूँजी बाजार में निवेश, जमीन का क्रय और इन्हीं कार्यों के लिए किसी दूसरे प्रतिष्ठान को धन मुहैया करना.

Prelims Vishesh

Buffalopox :-
  • हाल ही में गैर-स्थानिक देशों में मंकीपॉक्स के प्रसार ने फिर से उभार रहे ‘बफेलोपॉक्स’ (Buffalopox) जैसे ‘विषाणुओं’ (Viruses) की ओर ध्यान आकृष्ट किया है. ‘बफेलोपॉक्स’ वायरस को भारत में पहले भी देखा जा चुका है.
  • विश्व स्तर पर 1934 में भारत में इसके संक्रमण का पहला मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से, देश में इसके कई छिटपुट प्रकोप देखे गए हैं.
  • बफेलोपॉक्स भारत में पाई जाने वाली एक जूनोटिक बीमारी है.
  • इसकी जड़ ‘चेचक के टीकों’ में होती है. भारत में चेचक के टीके का उत्पादन करने के लिए ‘भैंसों को टीका लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लाइव वायरस’ समय के साथ ‘बफेलोपॉक्स’ (Buffalopox) के रूप में विकसित हो गया.
  • यह संक्रमण ‘बफेलोपॉक्स विषाण (BPXV) के कारण होता है; यह एक ‘पॉक्सविरिडे’ है जिसके लिए भैंस एक प्राकृतिक मेजबान होती है.
  • इसे ऑर्थोपॉक्सवायरस (Orthopoxvirus – OPV) जीनस में वर्गीकृत किया गया है.
  • लक्षण: इसके संक्रमण से, थनों चूचुक और वंक्षण (inguinal) क्षेत्र, पैरोटिड, और कान और आंखों के नीचे और आंतरिक सतह पर पर घाव होने लगते हैं.

Etalin Hydroelectric Project :-

  • वन्यजीव वैज्ञानिकों और संरक्षणवादियों द्वारा अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित ‘एटालिन जलविद्युत परियोजना’ (Etalin Hydroelectric Project) से स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरों को चिह्नित किया गया है.
  • ‘एटालिन बांध’ अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में स्थित है.
  • परियोजना के अंतर्गत दिबांग की सहायक नदियों (दिर तथा टैंगो) पर दो बांधों के निर्माण की परिकल्पना की गई है.
  • इसे दो ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ योजनाओं के संयोजन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है और इस परियोजना के अंतर्गत दिबांग की सहायक नदियों (दिर तथा टैंगो) पर कंक्रीट ग्रेविटी बांधों का निर्माण शामिल है.
  • यह परियोजना क्षेत्र “हिमालयी क्षेत्र के सबसे समृद्ध जैव-भौगोलिक प्रांत” और “दुनिया के मेगा जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक” के अंतर्गत आता है.

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