Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 October 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 05 October 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Major crops-cropping patterns in various parts of the country, – different types of irrigation and irrigation systems storage, transport and marketing of agricultural produce and issues and related constraints; e-technology in the aid of farmers.

Topic : Brand & Logo of Indian Cotton

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय कपड़ा एवं महिला तथा बाल विकास मंत्री ने 7 अक्टूबर, 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से द्वितीय ‘विश्व कपास दिवस’ (World Cotton Day) पर भारतीय कपास के लिए अब तक का पहला ब्रांड एवं लोगो (Brand & Logo) का अनावरण किया.

प्रमुख बिन्दु

  • भारतीय कपास के लिए ब्रांड एवं लोगो (Brand & Logo) लॉन्च होने से भारत का कपास, विश्व कपास व्यापार में ‘कस्तूरी कॉटन’ (Kasturi Cotton) के रूप में जाना जाएगा.
  • कस्तूरी कॉटन ब्रांड सफेदी, चमक, मृदुलता, शुद्धता, शुभ्रता, अनूठापन एवं भारतीयता का प्रतिनिधित्व करेगा.

भारत में कपास की स्थिति

  • कपास भारत की प्रमुख वाणिज्यिक फसलों में से एक है और यह लगभग 6.00 मिलियन कपास कृषकों को आजीविका प्रदान करती है.
  • भारत कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और विश्व में कपास का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है.
  • भारत प्रति वर्ष लगभग 6.00 मिलियन टन कपास का उत्पादन करता है जो विश्व कपास का लगभग 23 प्रतिशत है.
  • भारत विश्व की कुल जैविक कपास ऊपज के लगभग 51 प्रतिशत का उत्पादन करता है जो वहनीयता की दिशा में भारत के प्रयासों को प्रदर्शित करता है.

कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) एवं सीसीआई

  • हाल ही में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने कपास का अब तक का सर्वोच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का प्रचालन किया है. इससे नए कपास सीजन के दौरान, एमएसपी के तहत कपास की खरीद और बढ़ेगी.
  • सीसीआई ने कपास उत्पादक सभी राज्यों में 430 खरीद केंद्र खोले हैं और किसानों के खातों में 72 घंटे के भीतर डिजिटल तरीके से भुगतान किए जा रहे हैं.
  • प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए, सीसीआई द्वारा एक मोबाइल ऐप ‘कौट-ऐली’ (Cott- Ally) का विकास किया गया है जिससे कि मौसम की स्थिति, फसल की स्थिति तथा सर्वश्रेष्ठ कृषि प्रचलनों के बारे में नवीनतम सूचना उपलब्ध कराई जा सके.
  • एमएसएमई मिलों, खादी ग्रामोद्योग, सहकारी क्षेत्र मिलों को अपनी नियमित बिक्री में सीसीआई द्वारा प्रति कैंडी 300 रुपये की छूट दी जा रही है जिससे कि उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता क्षमता एवं दक्षता बढ़ाई जा सके.

विश्व कपास दिवस क्या है?

  • यह एक कपास से सम्बंधित समारोह है जिसेविश्व व्यापार संगठन (WTO) आयोजित कर रहा है.
  • आयोजन में जिन अन्य संस्थाओं का सहयोग है, वे हैं – संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD), अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र (ITC) तथा राष्ट्रीय कपास परामर्शी समिति (ICAC).
  • यह समारोह अफ्रीका के चार देशों के अनुरोध पर आयोजित हो रहा है जिन्हेंकॉटन फोर (Cotton 4) देश कहा जाता है. ये देश हैं – बेनिन, बुर्किना फासो, चैड और माली.

आयोजन के उद्देश्य

  • कपास, इसके उत्पादन, रूपांतरण और व्यापार से सम्बद्ध सभी हितधारकों को वैश्विक मान्यता प्रदान करना.
  • कपास के विकास को सुदृढ़ करने के लिए दाताओं और लाभार्थियों को सम्मिलित करना.
  • कपास से सम्बंधित उद्योगों और उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र एवं निवेशकों से सहयोग प्राप्त करना.
  • कपास के क्षेत्र में नई तकनीकों के साथ-साथ नए शोध को बढ़ावा देना.

कपास और उसका महत्त्व

  • कपास एक ऐसी वस्तु है जिसका उत्पादन पूरे विश्व में होता है.
  • एक टन कपास के उप्तादन का अर्थ है, औसतन 5 लोगों को वर्ष भर रोजगार मिलना.
  • कपास की फसल सूखी जलवायु वाले क्षेत्रों में भी सरलता से उत्पन्न हो जाती है. वास्तव में विश्व की सिंचित भूमि का मात्र 2.1% ही कपास के उत्पादन में प्रयुक्त होता है, परन्तु पूरे विश्व के 27% कपड़े इसी फसल से उपलब्ध हो जाते हैं.
  • कपास के रेशे का उपयोग कपड़े और परिधान बनाने में होता है. इसके अतिरिक्त खाद्य तेल और पशु चारा जैसी वस्तुएँ भी कपास के बीज से उत्पादित होती हैं.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

  1. भारत में तरह-तरह का कच्चा कपास होता है. इनमें तमिलनाडु में उपजने वाला SUVIN कपास सबसे लम्बे रेशे वाला होता है.
  2. कर्नाटक के धारवाड़ में रंगीन कपास भी उपजते हैं. इनका रंग गहरा भूरा, हल्का भूरा, हरा और लहसुनिया होता है.
  3. 2011 से 2018 के बीच भारत ने अफ्रीका के सात देशों के लिए तकनीकी सहायता का एक कार्यक्रम चलाया जिसे कॉटन TAP-I कहते हैं. 2.85 मिलियन डॉलर के इस सहायता कार्यक्रम का लाभ जिन देशों को मिला, वे हैं – बेनिन, बुर्किना फासो, माली, चैड, युगांडा, मलावी और नाइजीरिया.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders.

Topic : Food Safety and Standards (Amendment) Bill 2020

संदर्भ

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संशोधन) अधिनियम, 2020 [Food Safety and Standards (Amendment) Bill 2020] का प्रारूप निर्गत किया.

यह प्रारूप विधेयक खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को अधिक शक्तियां प्रदान कर, उल्लंघन पर आरोपित दंडों में वृद्धि कर तथा प्रक्रियाओं को सरलीकृत करके खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) को संशोधित करता है.

प्रमुख संशोधन

  • पशु आहार को शामिल करने के लिए FSSAI के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया है.
  • वर्तमान में, FSSAI को केवल खाद्यान्न से संबद्ध शक्तियां ही प्राप्त हैं.
  • पशु आहार का तात्पर्य किसी ऐसे खाद्य पदार्थ से है, जो पशुओं की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है.
  • असुरक्षित खाद्य का निर्माण और बिक्री, भोजन में मिलावट के कारण होने वाली मृत्यु, बिना लाइसेंस के व्यापार करने जैसे उल्लंघनों के लिए और अपराधों की पुनरावृत्ति पर निर्धारित दंड को और अधिक कठोर किया गया है.
  • यह खाद्य संपर्क सामग्री के मानकों को निर्दिष्ट करेगा, जिसका अर्थ खाद्य पैकेजिंग सामग्री के लिए मानकों को निर्धारित करना होगा.
  • कार्यों की निगरानी के लिए FSSAI में सदस्य सचिव के रूप में एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी समाविष्ट किया गया है. अब तक इस भूमिका को परिभाषित नहीं किया गया था.
  • निजस्वमूलक खाद्य (proprietary food) की परिभाषा में परिवर्तन किया गया है, जिसका अर्थ है भोजन का एक प्रकार, जिसके लिए मानक तो निर्दिष्ट नहीं किए गए हैं, परन्तु वह असुरक्षित नहीं है.

FSSAI

  1. FSSAI का full form है – Food Safety and Standards Authority of India.
  2. इसकी स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है.
  3. 2006 के पहले खाद्य सुरक्षा से सम्बंधित कई अधिनियम एवं आदेश थे जो विभिन्न मंत्रालयों द्वारा निर्गत किये गये थे. इन सभी को समेकित कर 2006 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 पारित किया गया था.
  4. इस अधिनियम के तहत स्वस्थ भोजन के लिए निर्माण, भंडारण, वितरण, विक्रय-निर्यात आदि सभी स्तरों पर खाद्य-पदार्थ के लिए विज्ञान पर आधारित मानक निर्धारित किये गये हैं.
  5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार FSSAI का प्रशासनिक मंत्रालय है.
  6. इसका अध्यक्ष भारत सरकार के सचिव-स्तर का होता है.
  7. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सरकार के अन्य प्रयास 

  • राष्ट्रीय कृषक नीति- खाद्य सुरक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिये राष्ट्रीय कृषक नीति को लागू किया गया. इस नीति के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्यप्रणाली को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करना, कृषि उत्पादों को लाभकारी मूल्य प्रदान करना, किसानों को वित्तीय सहायता उचित ब्याज दर पर उपलब्ध कराना, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की सहायता से ग्राम-स्तर पर चौपाल और फर्म, स्कूल स्थापित करना तथा यह सुनिश्चित करना कि किसानों के पास उत्पादन के लिये साधन उपलब्ध है कि नहीं, अच्छी गुणवत्ता के बीज का प्रयोग बढ़ाना आदि क्रियाएँ भी क्रियान्वित करना इस नीति में शामिल हैं.
  • खाद्य सब्सिडी योजना- खाद्य सुरक्षा के लिये सरकार समय-समय पर खाद्य सब्सिडी जारी करती है ताकि खाद्य संकट पैदा न हो.
  • राष्ट्रीय वर्षापोषित क्षेत्र प्राधिकरण की स्थापना- खाद्य सुरक्षा की कल्पना को पूरा करने के लिये राष्ट्रीय वर्षा पोषित क्षेत्र प्राधिकरण की स्थापना की गई. इस प्राधिकरण का ध्येय खाद्य सुरक्षा की स्थिति बरकरार रखने के लिये वर्षा पोषित क्षेत्रों की समस्या पर पूरा ध्यान देना तथा भूमिहीन और छोटे किसानों से संबंधित समस्याओं पर भी ध्यान केन्द्रित करना है जिससे खाद्यान्न उत्पादन में कमी न हो.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

COVID-19 संक्रमण के दौरान भारत स्वास्थ्य चुनौतियों के अतिरिक्त जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें से खाद्य सुरक्षा की चुनौती सबसे प्रमुख चुनौतियों में से एक है. तेज़ी से बढ़ती हुई जनसंख्या, बढ़ते खाद्य मूल्य और जलवायु परिवर्तन का खतरा ऐसी चुनौतियाँ है जिनसे युद्ध स्तर पर निपटे जाने की आवश्यकता है. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘‘जो व्यक्ति अपना पेट भरने के लिये जूझ रहा हो उसे दर्शनवाद नहीं समझाया जा सकता है.” यदि भारत को विकसित राष्ट्रों की सूची में शामिल होना है, तो उसे अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.

भारत में आजादी के समय से ही खाद्यान्न उत्पादन और खाद्य सुरक्षा भारत के लिये एक चुनौती रही है. खाद्यान्न उत्पादन पर ध्यान देने के कारण भारत में खाद्यान्न उत्पादन तेजी से बढ़ा है और कभी खाद्यान्न के क्षेत्र में दूसरों पर निर्भर यह देश आज ना केवल खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना है बल्कि इस क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण निर्यातक के रूप में भी उभरा है. हमारी आर्थिक समीक्षा में 2016-17 में खाद्यान्नों के रिकॉर्ड 273.38 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है, जो 2015-16 की तुलना में 8.67 प्रतिशत अधिक है. इससे पता चलता है कि खाद्य की उपलब्धता की दृष्टि से भारत सुरक्षित है.

किन्तु खाद्य सुरक्षा  का तात्पर्य केवल  भोजन की उपलब्धता से नहीं बल्कि सभी लोगों के लिये सदैव पोषण युक्त भोजन की उपलब्धता, पहुँच और उसे प्राप्त करने की सामर्थ्य से है. वर्तमान समय में विश्व कृषि संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या सर्वाधिक है. भारत का हर दूसरा बच्चा आयोडीन की कमी के कारण सीखने की कम क्षमता रखता है. आज भारत में 50% से अधिक महिलाएँ और 70% से अधिक बच्चे रक्त की कमी से जूझ रहे हैं. दाल तथा प्रोटीन युक्त वस्तुओं में मुद्रास्फीति के कारण कीमत में वृद्धि हुई है जिससे  लोगों तक इनकी पहुँच घटी है. यह आँकड़े दर्शाते हैं कि रिकॉर्ड खाद्य उत्पादन के बाद भी भारत की आबादी का एक हिस्सा खाद्य सुरक्षा से वंचित है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Narco Analysis

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय (SC) के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की बलात (उसकी इच्छा के विरुद्ध) “नार्को विश्लेषण जांच” (Narco Analysis) नहीं की जा सकती है.

हाल ही में, उत्तर प्रदेश सरकार (हाथरस मामले में) ने कथित तौर पर आरोपी और पीड़ित के रिश्तेदारों की पॉलीग्राफिक तथा नार्को विश्लेषण जांच कराने का आदेश दिया है.  

वर्ष 2010 में उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय (सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य में) में नार्को जांच, पॉलीग्राफ परीक्षण और ‘ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टीवेशन प्रोफाइल परीक्षण’ के अनैच्छिक कार्यान्वयन के बारे में निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर टिप्पणी की गई थी.

  • नार्को विश्लेषण जांच जैसी तकनीकों का अनिवार्य कार्यान्वयन अनुच्छेद 21 के सन्दर्भ में “क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार के अंतर्गत आता है.
  • कोई भी व्यक्ति, जो अपराध से पीड़ित है, को जांच के दौरान ऐसे किसी भी परीक्षण से गुजरने के लिए विवश नहीं किया जा सकता है.
  • इस प्रकार के परीक्षणों का बलपूर्वक कार्यान्वयन व्यक्तिगत स्वतंत्रता में एक अनुचित हस्तक्षेप होगा.
  • समाज के कमजोर वर्गों के व्यक्तियों (जो अपने मूल अधिकारों से अनभिज्ञ हैं और विधिक परामर्श लेने में असमर्थ हैं) पर ऐसे परीक्षणों के परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं.
  • आपराधिक न्याय के संदर्भ में ऐसी तकनीकों का स्वेच्छा से कार्यान्वयन अनुज्ञेय है.

उच्चतम न्यायालय के निर्णय में एक अभियुक्त पर पॉलीग्राफ्‌ टेस्ट के संपादन हेतु दिशा-निर्देश” भी पुनः प्रस्तुत किए गए और कहा कि इस प्रकार के रक्षोपायों को अपनाया जाना चाहिए जो नार्को विश्लेषण तकनीक आदि में अपनाए जाते हैं.

नार्को परीक्षण

  • पॉलीग्राफ परीक्षण के विपरीत नार्को परीक्षण में व्यक्ति को सोडियम पेंटोथल (Sodium Pentothal) जैसी दवाओं का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे वह व्यक्ति कृत्रिम निद्रावस्था या बेहोश अवस्था में पहुँच जाता है. इस दौरान जिस व्यक्ति पर यह परीक्षण किया जाता है उसकी कल्पनाशक्ति तटस्थ अथवा बेअसर हो जाती है और उससे सही सूचना प्राप्त करने या जानकारी के सही होने की उम्मीद की जाती है.
  • हाल के कुछ वर्षों में जाँच एजेंसियों द्वारा जाँच के दौरान नार्को परीक्षण किया जाता रहा है और अधिकांश लोग इसे संदिग्ध अपराधियों से सही सूचना प्राप्त करने के लिये यातना और ‘थर्ड डिग्री’ के विकल्प के रूप में देखते हैं.
  • हालाँकि इन दोनों ही विधियों में वैज्ञानिक रूप से 100 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त नहीं हुई है और चिकित्सा क्षेत्र में भी ये विधियाँ विवादास्पद बनी हुई हैं.

नार्को परीक्षण- इतिहास

  • जानकार मानते हैं कि नार्को शब्द, ग्रीक शब्द ‘नार्के ’(जिसका अर्थ बेहोशी अथवा उदासीनता होता है) से लिया गया है और इसका उपयोग एक नैदानिक ​​और मनोचिकित्सा तकनीक का वर्णन करने के लिये किया जाता है.
  • इस प्रकार के परीक्षण की शुरुआत सर्वप्रथम वर्ष 1922 में हुई थी, जब टेक्सास (अमेरिका) के एक प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Obstetrician) रॉबर्ट हाउस ने दो कैदियों के परीक्षण हेतु नशीली दवाओं का प्रयोग किया था.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

अधिकांश मामलों में जाँच एजेंसियाँ ​​आरोपी या संदिग्धों पर किये जाने वाले ऐसे परीक्षणों की अनुमति लेती हैं, किंतु पीड़ितों या गवाहों पर यह परीक्षण शायद ही कभी किया गया हो. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जाँच एजेंसियाँ इस तरह की मांग कर सकती हैं कि ये परीक्षण उनकी जाँच में मदद करने के लिये हैं, किंतु इस संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा परीक्षणों के लिये दी गई सहमति अथवा इनकार करना उसके निर्दोष होने अथवा अपराधी होने को प्रतिबिंबित नहीं करता है. बीते वर्ष जुलाई माह में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता को मारने वाले ट्रक के ड्राइवर और हेल्पर का इस प्रकार के परीक्षण कराए जाने की मांग की थी. CBI ने ही पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कथित धोखाधड़ी मामले में एक आरोपी के परीक्षण की भी मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने अभियुक्त की सहमति न होने की स्थिति में याचिका खारिज कर दी थी.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Nuclear Disarmament

संदर्भ

भारत के अनुसार परमाणु निशस्त्रीकरण (Nuclear Disarmament) के लक्ष्य को बहुपक्षीय संरचना (Multilateral Framework) के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है.

पृष्ठभूमि

भारत द्वारा यह टिप्पणी परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International day for the total elimination of nuclear weapons) (26 सितंबर) को मनाने हेतु आयोजित बैठक में दी गई थी.

भारत का पक्ष

  • भारत ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सार्वभौमिक, निरीक्षण-योग्य और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निशस्त्रीकरण के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई.
  • भारत ने विश्वास निर्माण के लिए परमाणु शस्त्र सम्पन्न सभी देशों के मध्य एक सार्थक विचार-विमर्श का आह्वान किया और एक विखंडनीय सामग्री कटौती संधि (Fissile Material Cut-off Treaty: FMCT) पर तत्काल वार्ता प्रारंभ करने का समर्थन किया.
  • FMCT परमाणु हथियारों या अन्य विस्फोटक उपकरणों के लिए भावी विखंडनीय (Fissile) सामग्री के उत्पादन को प्रतिबंधित करने हेतु प्रस्तावित एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है. इस पर निशस्त्रीकरण सम्मेलन (Conference on Disarmament: CD) में चर्चा हो रही है.
  • भारत ने यह भी उल्लेख किया कि वह निशस्त्रीकरण सम्मेलन को उच्च प्राथमिकता प्रदान करता है और में एक व्यापक परमाणु हथियार अभिसमय (Comprehensive Nuclear Weapons Convention) पर वार्ता प्रारंभ करने का समर्थन करता है.

निशस्त्रीकरण सम्मेलन

निशस्त्रीकरण सम्मेलन का गठन वर्ष 1979 में निशस्त्रीकरण के प्रति समर्पित संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly  – UNGA) के प्रथम विशेष सत्र (वर्ष 1978) के दौरान सदस्य देशों के मध्य संपन्न एक समझौते के पश्चात्‌ एक एकल अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बहुपक्षीय निशस्त्रीकरण वार्ता मंच के रूप में किया गया था.

परमाणु प्रसार और परीक्षणों को रोकने तथा निशस्त्रीकरण में प्रगति को बढ़ावा देने हेतु लागू की गई बहुपक्षीय संधियाँ इस प्रकार हैं:

  • परमाणु हथियारों और उनसे संबद्ध प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकने, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने और निशस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए परमाणु हथियार अप्रसार संधि (Non-Proliferation of Nuclear Weapons: NPT).
  • एक संधि वायुमंडल, बाह्य अंतरिक्ष और जल के भीतर परमाणु हथियार के परीक्षणों पर प्रतिबंध आरोपित करती है, जिसे आंशिक परीक्षण प्रतिबंध संधि (Partial Test Ban Treaty: PTBT) के रूप में जाना जाता है.
  • व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि (Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty: CTBT) जो सभी प्रकार के परमाणु हथियारों के परीक्षण विस्फोटों को निषिद्ध करती है. इसे वर्ष 1996 में हस्ताक्षरित किया गया था, परन्तु इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.
  • परमाणु हथियार निषेध संधि (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons: TPNW) में किसी भी प्रकार की परमाणु हथियार गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंधों का एक व्यापक समुच्चय शामिल है. इसे वर्ष 2017 में हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया गया था, परन्तु यह संधि अभी तक लागू नहीं हुई है.
  • उपर्युक्त चार में से, भारत ने केवल PTBT की ही अभिपुष्टि की है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु निवारण के मध्यमार्ग की तलाश करने के लिये उसी लक्ष्य और आदर्श की आवश्यकता होगी जो परमाणु प्रतिबंध संधि में निहित हैं. परमाणु उपयोग के खतरे को न्यूनतम तथा इस तंत्र को पहचानने और बढ़ावा देने के लिये नवाचार और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होगी. युद्ध क्षेत्र के दोनों ओर स्थित राष्ट्रों और सिविल सोसाइटी कार्यकर्त्ताओं के मध्य विश्वास का सृजन करने की आवश्यकता होगी ताकि दोनों ओर के नागरिकों के मध्य आपसी सुरक्षा को साझा किया जा सके. उन राष्ट्रों में जो परमाणु हथियारों का निषेध करने की इच्छाशक्ति रखते हैं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और तंत्रों को इतना मज़बूत बनाया जाना चाहिये जिससे परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके और परमाणु प्रौद्योगिकी के विश्वसनीय व शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके. परमाणु हथियार प्रतिबंध संधि और एनपीटी, सीटीबीटी (व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि) व परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र संधियों जैसी अन्य संधियों के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिये.


Prelims Vishesh

Shyamji Krishna Verma :-

  • प्रधान मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है.
  • श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा निम्नलिखित को स्थापित किया गया:
  1. वर्ष 1905 में ब्रिटिश भारत में स्व-शासन के कारण को बढ़ावा देने के लिए लंदन में इंडियन होम रूल सोसाइटी (IHRS) श्यामजी कृष्ण वर्मा की स्थापना.
  2. इंडिया हाउस-ब्रिटेन में भारतीय छात्रों के बीच राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1905 और 1910 के मध्य लंदन में छात्र निवास.
  3. द इंडियन सोसियोलोजिस्ट (The Indian Sociologist) राष्ट्रवादी विचारों को प्रचारित करने के लिए उनके द्वारा प्रकाशित एक मासिक पत्रिका थी.

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