Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 July 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 05 July 2021


GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : Solicitor General

संदर्भ

हाल ही में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से मुलाकात कर “आपराधिक कदाचार” और “घोर अनुपयुक्तता” के आधार ‘भारत के महाधिवक्ता’ / सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General of India) के रूप में ‘तुषार मेहता’ को हटाए जाने की माँग की गयी. इस प्रतिनिधिमंडल ने महाधिवक्ता तुषार मेहता द्वारा भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक करने का आरोप लगाया.

संबंधित प्रकरण

सुवेंदु अधिकारी 2016 के ‘नारदा टेप मामले’ (Narada tapes case) में एक आरोपी हैं और मि. मेहता इस मामले में टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध सीबीआई की जांच में सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में एजेंसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

  1. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के सर्वोच्च सेवारत विधि अधिकारियों में से एक, सॉलिसिटर जनरलजिसे सीबीआई के लिए विशेष लोक अभियोजक के रूप में भी नियुक्त किया गया है, तथा एक आरोपी व्यक्ति, जिसकी जाँच उसी एजेंसी द्वारा की जा रही है, के बीच बैठक अनुपयुक्तता से सम्बंधित अत्यंत गंभीर संदेह पैदा करती है.
  2. साथ ही, इस प्रकार की बैठकें ‘आपराधिक न्याय प्रणाली’ का मजाक बनाती हैं और न्यायपालिका में आम आदमी के विश्वास को नष्ट करने का कार्य करेंगी.

अटॉर्नी जनरल और सॉलिस‍िटर जनरल में अंतर

  • देश के सर्वोच्च कानून अधिकारी अटॉर्नी जनरल में मुख्‍य योग्‍यता उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश के बराबर होनी चाहिए. वह भारत का नागरिक हो, उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में काम करने का पांच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का 10 वर्षों का अनुभव हो.
  • देश के दूसरे स्थान का कानूनी अधिकारी सॉलिस‍िटर जनरल होता है, जो अटॉर्नी जनरल की सहायता करता है. विदित हो कि‍ सॉलिसिटर जनरल को चार अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सहयोग देते हैं. योग्‍यता की बात करें तो अटॉर्नी जनरल की तरह, सॉलिसिटर जनरल की योग्‍यता के भी मानक तय हैं.
  • सॉलिसिटर विधि अधिकारियों (नियम और शर्तें) नियम, 1972 के संदर्भ में भारत में सॉलिसिटर जनरल सरकार को सलाह देते हैं और उनकी ओर से पेश होते हैं. सॉलिसिटर जनरल की नियुक्‍त‍ि कैबिनेट समिति सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति करती है.

कौन होते हैं एडवोकेट जनरल?

एडवोकेट जनरल यानी महाधिवक्ता राज्य प्रमुख को विधि संबंधी सलाह देने का कार्य करता है. वो राज्य के दोनों सदनों (विधानसभा तथा विधान परिषद्) की कार्यवाही में और सदन में बोलने की शक्ति रखता है.


GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Pollution related issues.

Topic : Fly Ash

संदर्भ

विद्युत मंत्रालय के अधीन एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSU) और भारत की सबसे बड़ी एकीकृत विद्युत उत्पादक कंपनी NTPC लिमिटेड ने अपने थर्मल पावर प्लांटों द्वारा उत्पादित फ्लाई ऐश (Fly Ash) की 100% उपयोगिता की दिशा में अपने प्रयास के तहत मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों के नामित बंदरगाहों से फ्लाई ऐश की बिक्री के लिए रुचि-प्रपत्र (Expression of Interest – EoI) आमंत्रित किए हैं.

NTPC बिजली संयंत्रों से बंदरगाहों को फ्लाई ऐश की आपूर्ति करेगा और इसके निर्यात हेतु 14.5 मिलियन टन प्रति वर्ष की कुल मात्रा निर्धारित है.

पृष्ठभूमि

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार, थर्मल प्लांट शुरू होने के चौथे वर्ष से फ्लाई ऐश की 100% उपयोगिता सुनिश्चित करना जरूरी है.

फ्लाई ऐश क्या है?

फ्लाई ऐश एक बारीक पाउडर है जो तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले के जलने से उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है. इसमें भारी धातु होते हैं और साथ ही PM 2.5 और ब्लैक कार्बन भी होते हैं.

इसमें पाया जाने वाला PM 2.5 गर्मियों में हवा के माध्यम से उड़ते-उड़ते 20 किलोमीटर तक फ़ैल जाता है. यह पानी और अन्य सतहों पर जम जाता है.

फ्लाई ऐश हानिकारक कैसे?

फ्लाई ऐश में सिलिका, एल्यूमीनियम और कैल्शियम के ऑक्साइड की पर्याप्त मात्रा होती है. आर्सेनिक, बोरान, क्रोमियम तथा सीसा जैसे तत्त्व भी सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं. इस प्रकार इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट उत्पन्न होता है. फैक्ट्रियों से निकलने वाले कोयले के धुओं से फ्लाई ऐश तो वातावरण में फैलता ही है साथ ही साथ कई बार फैक्ट्रियाँ फ्लाई ऐश को जमा कर के बाहर उनका भंडार बना देती हैं. ये सारे कचरे जमा हो-हो कर कभी-कभी पहाड़ जैसा बन जाते हैं. वहाँ से फ्लाई ऐश वातावरण को प्रदूषित करते ही हैं और बहुधा नदी/नहरों में भी फ्लाई ऐश के अंश चले जाते हैं.

फ्लाई ऐश का उपयोग

  • इसे कृषि में अम्लीय मृदाओं के लिए एक अभिकारक के रूप में, मृदा कंडीशनर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है.इससे मृदा की महत्त्वपूर्ण भौतिक-रसायन विशेषताओं, जैसे जल धारण क्षमता, हाइड्रोक्लोरिक कंडक्टिविटी आदि में सुधार होगा.
  • भारत अभी तक फ्लाई ऐश प्रयोग की अपनी संभावनाओं का पूर्ण प्रयोग कर पाने में सक्षम नहीं है. हाल ही के CSE के एक अध्ययन के अनुसार, उत्पादित की जाने वाले फ्लाई ऐश का मात्र 50-60% ही प्रयोग हो पाता है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : Cryptocurrency

संदर्भ

एक रिपोर्ट के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी में भारतीय लोगों का निवेश पिछले एक वर्ष में $200 मिलियन बढ़कर $40 बिलियन हो गया है. ज्ञातव्य है कि भारतीय परिवार अब तक सोने में निवेश को सबसे सुरक्षित मानते रहे हैं. इसी के चलते भारतीयों के पास 25,000 स्वर्ण रखा हुआ है, परन्तु अब क्रिप्टोकरेंसी की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

मुख्य तथ्य

  • भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वालों में कम उम्र के निवेशकों (18-35 वर्ष की आयु) की संख्या ज्यादा है.
  • भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करन वालों की संख्या अब बढ़कर 5 करोड़ हो गई है.
  • भारतीयों के अलावा चीन के नागरिकों ने $161 बिलियन डॉलर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किये हैं.
  • ज्ञातव्य है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2018 में बैंकों समेत सभी विनियामक एजेंसियों को क्रिप्टोकरेंसी से निपटने हतु किसी भी व्यक्ति या इकाई द्वारा आभासी मुद्राओं (virtual currencies) के व्यवसाय को रोकने के लिये निर्देशित किया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने मार्च 2020 में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और व्यापार पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया.
  • सर्वोच्च न्यायालय न कहा कि RBI ने क्रिप्टोकरेंसी के व्यापार के तरीके में किसी खतरे को उजागर नहीं किया है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा क्रिप्टोकरेंसी में निवेश एवं व्यापार पर प्रतिबन्ध लगाने के पीछे निम्न कारण थे-

किसी भी दश या केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित नहीं होने के कारण मुद्रा के रूप में क्रिप्टोकरेंसी की विश्वसनीयता में कमी, पारदर्शिता का अभाव एवं कीमतों की अस्थिरता.

क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

  • क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी करेंसी है जिसे आप देख नहीं सकते इसलिए इसे आभासी मुद्रा भी कहते हैं.
  • सरल शब्दों में आप इसे डिजिटल रुपया या डिजिटल करेंसी भी कह सकते हैं.
  • क्रिप्टोकरेंसी को कोई बैंक जारी नहीं करती है.
  • इसको निर्गत करने वाले ही इसका नियंत्रण और संचालन करते हैं. इसका प्रयोग डिजिटल दुनिया में ही होता है.
  • इस मुद्रा में कोडिंग तकनीक का प्रयोग होता है/इस तकनीक के माध्यम से करेंसी के लेन-देन का सम्पूर्ण लेखा-जोखा होता है.
  • इसको हैक करना बहुत कठिन होता है. यही वजह है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना न के बराबर होती है.
  • इंटरनेट पर इस आभासी मुद्रा का प्रारम्भ जनवरी 2009 में बिटकॉइन के नाम से हुआ था.

विश्व-भर में विभिन्न नाम से क्रिप्टोकरेंसी

वर्तमान समय में पूरे विश्व में कई प्रकार के वर्चुअल करेंसी हैं. विश्व-भर में बिटकॉइन, रिप्लड, एथेरम और कार्डनो जैसे तकरीबन 2,116 क्रिप्टो करेंसियाँ प्रचलित हैं, जिनका बाजार पूंजीकरण 119.46 अरब डॉलर के बराबर है.

  • दुबई (UAE) – Emcash
  • वेनेजुएला – Petro
  • एस्टोनिया – Estcoin
  • रूस – Crypytoruble
  • स्वीडेन – E-Krona
  • जापान – J-Coin

Bitcoin के बारे में डिटेल पढ़ें > Bitcoin in Hindi


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure

Topic : Fame India Scheme

संदर्भ

केंद्र सरकार ने हाल ही में देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित फेम इंडिया-II योजना को दो वर्ष बढ़ाने का निर्णय किया है. पहले इसे वर्ष 2022 तक के लिए लागू किया जाना था, परन्तु अब यह 31 मार्च, 2024 तक लागू रहेगी.

फेम इंडिया योजना

FAME India योजना का पूरा नाम है – Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India अर्थात् भारत में बिजली से चलने वाले वाहनों को अपनाने और उन्हें बनाने में तेजी लाने की योजना.

ई-गतिशीलता के लिए FAME योजना :- FAME योजना 1 अप्रैल, 2015 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य था बिजली और संकर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के निर्माण के तकनीक को बढ़ावा देना और उसकी सतत वृद्धि को सुनिश्चित करना. इस योजना के अंदर सार्वजनिक परिवहन में बिजली की गाड़ियों (EVs) के प्रयोग को बढ़ावा देना है और इसके लिए बाजार और माँग का सृजन करना है. इसके तहत वाहन परिक्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी जायेगी.

  • इस योजना का उद्देश्य देश में बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है.
  • यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से आगामी तीन वर्षों तक चलेगी और इसके लिए 10,000 करोड़ रु. की बजटीय व्यवस्था की गई है.
  • यह योजना FAME India I (1 अप्रैल, 2015 में अनावृत) का विस्तारित संस्करण है.

फेम-इंडिया योजना फेज II के उद्देश्य

सार्वजनिक परिवहन में बिजली से चलने वाली गाड़ियों का अधिक से अधिक प्रयोग सुनिश्चित करना.

नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन (NEMM)

  • यह ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करन हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रोत्साहन देन के लिए 2013 में लाया गया.
  • इसके अंतर्गत सरकार द्वारा 2030 तक 30% विद्यत चलित वाहन रखने का लक्ष्य रखा गया है.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Project BOLD

संदर्भ

राजस्थान में जनजातियों की आय और बांस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा उदयपुर के आदिवासी गांव निकला मंडवा से एक अनोखी ‘BOLD परियोजना’ शुरू की गई है.

  • इसके लिए विशेष रूप से असम से लाए गए बांस की विशेष प्रजातियों- बंबुसा टुल्डा और बंबुसा पॉलीमोर्फा के 5000 पौधों को ग्राम पंचायत की खाली शुष्क भूमि पर लगाया गया है.
  • इस तरह KVIC ने एक ही स्थान पर एक ही दिन में सर्वाधिक संख्या में बांस के पौधे लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है.

प्रोजेक्ट बोल्ड क्या है?

  • बोल्ड का अर्थ “सूखे की स्थिति में भू-क्षेत्र पर बांस मरु-उद्यान” अर्थात् (Bamboo Oasis on Lands in Drought– BOLD) है.
  • यह परियोजना ‘खादी और ग्रामोद्योग आयोग’ (KVIC) द्वारा शुरू की गई है.
  • यह परियोजना, खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित खादी बांस महोत्सव का हिस्सा है.

उद्देश्य

शुष्क और अर्ध-शुष्क भू-क्षेत्रों में बाँस आधारित हरित पट्टियाँ विकसित करना, मरुस्थलीकरण कम करना और आजीविका एवं बहु-विषयक ग्रामीण उद्योग सहायता प्रदान करना.

परियोजना में ‘बांस’ को क्यों चुना गया?

बांस बहुत तेजी से बढ़ते हैं और लगभग तीन साल की अवधि में उन्हें काटा जा सकता है. बांस को पानी के संरक्षण और भूमि की सतह से पानी के वाष्पीकरण को कम करने के लिए भी जाना जाता है, जोकि शुष्क और सूखाग्रस्त क्षेत्रों की एक विशेषता होती है.


Prelims Vishesh

Amendment in Food Security (Assistance to State Govt. Rules), 2015 :-

  • ये नियम सभी स्तरों पर लेनदेन का पारदर्शी अभिलेखन सुनिश्चित करने हेतु उचित मूल्य की दुकान (FPS) के डीलरों को इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस के माध्यम से विक्रय के लिए अतिरिक्त लाभ (एक प्रोत्साहन के रूप में) प्रदान करने के लिए अधिसूचित किए गए थे.
  • संशोधन उन राज्यों को प्रोत्साहन प्रदान करता है, जो ePoS का कुशलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं तथा राज्यों को ePoS संचालन दक्षता में सुधार करने और बचत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.
  • इसका उद्देश्य लाभार्थियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के तहत उनकी पात्रता के अनुसार सब्सिडी आधारित वितरण में खाद्यान्न की उचित मात्रा सुनिश्चित करना है.
  • NFSA सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरणों के उपयोग के माध्यम से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार हेतु प्रावधान करता है.

Inter-State Transmission system charges :-

  • विद्युत मंत्रालय ने सौर और पवन स्रोतों से उत्पादित विद्युत हेतु ISTS शुल्क पर छूट के लिए समय सीमा दो वर्ष (2025 तक) बढ़ाने की घोषणा की है.
  • यह छूट हाइड्रो पंप स्टोरेज प्लांट (PSP) और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजनाओं के लिए भी उपलब्ध होगी.
  • यह कदम सौर, पवन, हाइड्रो PSP और BESS के विकास, विद्युत्‌ एक्सचेंजों में नवीकरणीय ऊर्जा (RE) के व्यापार तथा राज्यों में RE विद्युत के निर्बाध पारेषण को प्रोत्साहन देगा.
  • ISTS का अर्थ एक राज्य से दूसरे राज्य में मुख्य पारेषण लाइन के जरिये विद्युत के संप्रेषण की एक प्रणाली से है.

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