Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 July 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 05 July 2019


GS Paper  2 Source: Indian Express

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Topic : Register of Indigenous Inhabitants of Nagaland (RIIN)

संदर्भ

जाली मूल निवासी प्रमाण पत्रों की रोकथाम के उद्देश्य से नागालैंड सरकार ने यह निर्णय लिया है कि वह नागालैंड के मूल निवासियों के लिए एक पंजी तैयार करेगी जिसका नाम RIIN अर्थात् Register of Indigenous Inhabitants of Nagaland होगा.

RIIN से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • RIIN पंजी नागालैंड के सभी मूल निवासियों की मास्टर सूची होगी.
  • यह सूची व्यापक सर्वेक्षण करके तैयार की जायेगी.
  • यह सूची जिला प्रशासन के पर्यवेक्षण में ग्रामीण और शहरी वार्डों के मूल निवासियों से सम्बंधित सरकारी रिकॉर्डों के आधार पर तैयार होगी.
  • सर्वेक्षण के पश्चात् सभी गाँवों और वार्डों में तथा सरकारी वेबसाइटों में एक प्राथमिक सूची सितम्बर 11, 2019 तक प्रकाशित कर दी जायेगी.
  • RIIN की अंतिम सूची में आने वाले व्यक्तियों को एक बार कोड वाला और नम्बर वाला मूल निवासी प्रमाणपत्र निर्गत किया जाएगा.
  • सर्वेक्षण का कार्य नागालैंड में पहले से लागू ऑनलाइन प्रणाली – इनर लाइन परमिट – के एक अंग के रूप में किया जाएगा.
  • RIIN के निर्माण की समूची प्रक्रिया का अनुश्रवण नागालैंड के आयुक्त करेंगे. इसके अतिरिक्त राज्य सरकार सचिव के स्तर के नोडल अधिकारी भी नामित करेगी जिनका काम पंजी को लागू करना होगा.
  • RIIN को एक बार अंतिम रूप दे दिए जाने के पश्चात् कोई नया मूल निवासी प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जाएगा. हाँ, यह अवश्य है कि इन मूल निवासियों को जो बच्चे होंगे उनको यह प्रमाण पत्र अवश्य दिया जायेगा.

इनर लाइन परमिट

बंगाल पूर्वी-सीमांत नियम 1873 :- इस नियम के अनुसार भारत सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह नागाओं की नागरिकता, अधिकारों और विशेषाधिकारों की सुरक्षा के लिए बाहरी लोगों को इनर लाइन परमिट निर्गत कर सकता है. विदित हो कि इनर लाइन परमिट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जो भारत के किसी नागरिक को किसी संरक्षित क्षेत्र के भीतर सीमित अवधि के लिए प्रवेश की छूट देटा है.


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Kisan Credit Card Scheme

संदर्भ

भारत सरकार ने किसान साख कार्ड (KCC) की सुविधा को मत्स्यपालन और पशुपालन करने वाले किसानों को भी उपलब्ध कराने का निर्णय किया है जिससे कि इनको भी कार्यपूँजी विषयक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल सके.

किसान साख कार्ड योजना क्या है?

  • यह योजना 1998-99 के बजट आरम्भ हुई है. इसका उद्देश्य किसानों को खेती के विभिन्न चरणों में संस्थागत साख के माध्यम से वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करना है.
  • इस योजना का खाका NABARD ने वी. गुप्ता समिति के सुझाव पर तैयार किया था.
  • इस योजना को देश के सभी सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक लागू कर रहे हैं.
  • इस योजना के अंदर किसान की मृत्यु अथवा किसी दुर्घटना के कारण उत्पन्न अशक्तता के जोखिम की भी प्रतिपूर्ति की जाती है.

उद्देश्य

  • सस्ते ब्याज पर किसानों को बैंकों से समय पर उचित मात्रा में ऋण दिलवाना.
  • फसल कटने के बाद के खर्च में सहायता करना.
  • खेती से जुड़ी सम्पत्तियों के संधारण और विभिन्न गतिविधियों के लिए कार्यकारी पूंजी का प्रावधान करना.
  • खेतों को बनाने, पंपिंग सेट खरीदने, रोपा करने, बूँद सिंचाई की व्यवस्था करने आदि खेती से जुड़े कामों के लिए आवश्यक ऋण का प्रावधान करना.

योजना के मुख्य तथ्य

  • इसमें दिए गये ऋण की नकद-राशि में से निकासी और भुगतान अनेक बार हो सकते हैं.
  • निकासी के लिए एक सीमा निर्धारित होती है जो खेती की भूमि के आकार, फसल लगाने की पद्धति और आवश्यक वित्त के अनुसार तय की जाती है.
  • सीमा तय करते समय यह देखा जाता है कि वर्ष-भर में कृषि उत्पादन और सम्बद्ध गतिविधियों के लिए कितने रुपयों की आवश्यकता होगी.
  • किसान साख कार्ड 5 वर्षों के लिए वैध होता है, परन्तु इसकी समीक्षा प्रत्येक वर्ष होती है.
  • यदि किसान का प्रदर्शन अच्छा रहा तो प्रोत्साहन स्वरूप उसकी साख की सीमा को बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है.
  • प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को क्षति पहुँचने पर ऋण के स्वरूप, समय-आदि में बदलाव भी किया जा सकता है.
  • इस योजना के तहत दिए गये ऋण पर फसल बीमा योजना लागू रहती है जिससे कि प्राकृतिक आपदाओं, कीटों के आक्रमण आदि से होने वाली क्षति से किसान उबर सकें.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Non-communicable diseases

संदर्भ

पिछले दिनों भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (ICMR) ने एक प्रतिवेदन प्रकाशित किया है जिसका शीर्षक है – India: Health of the Nation’s States अर्थात् भारत के राज्यों में स्वास्थ्य. इसमें बताया गया है कि देश में होने वाली मृत्यु में असंक्रमणीय रोगों (Noncommunicable diseases – NCDs) का प्रतिशत 2016 में 61.5 था जबकि 1990 में यह 37.9 था.

  • प्रतिवेदन के अनुसार केरल, गोवा और तमिलनाडु में संक्रमणीय, प्रसूति से सम्बंधित, नवजात से जुड़े और कुपोषण के कारण हुए रोगों से होने वाली मृत्यु की संख्या घटी है जिस कारण संपूर्ण मृत्यु में असंक्रमणीय रोगों का अंश बढ़ गया है.
  • असंक्रमणीय रोगों में जो रोग मृत्यु के कारण बनते हैं, वे हैं – बुढ़ापा, अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक परिश्रम का अभाव, उच्च रक्तचाप, अनियंत्रित मधुमेह, उच्च क्लोरोस्टोल और अत्यधिक शारीरिक भार.

असंक्रामक रोग (NCD) क्या हैं?

  • असंक्रामक रोग लम्बे चलने वाले रोग हैं जो आनुवांशिक, शारीरिक, पर्यावरणगत, व्यवहारगत कारणों से होते हैं.
  • यह प्रमुख असंक्रामक रोग हैं – हृदयरोग (जैसे – हार्ट अटैक और स्ट्रोक), कैंसर, दमा और श्वास रोग एवं मधुमेह.

क्या किया जाए?

  • असंक्रमणीय रोगों के खतरों को कम करने के लिए रेशेदार और अपरिष्कृत अनाज खाना चाहिए. ऐसा करने से हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप 2 मधुमेह और आन्त्रिक कैंसर को 16% से लेकर 24% तक कम किया जा सकता है.
  • अधिक रेशेदार भोजन लेने से शरीर का भार और उच्च रक्तचाप के साथ कुल कोलेस्ट्रोल में भी कमी आती है.
  • चिकित्सकजन यह भी कहते हैं कि कम खाइए, धीरे-धीरे चबाकर भोजन का आनंद लीजिए, अपनी आधी थाली में फल और तरकारियाँ रखिये, अधिक मात्रा में भोजन लेने से बचिए जिससे शरीर का भार न बढ़े, आप जितना अनाज लेते हैं उनमें आधा अपरिस्कृत अनाज होने चाहिएँ, ट्रांस-फैट वाले भोजन लेना कम करें.

NCD का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

  • 2030 के सतत विकास लक्ष्य में एक लक्ष्य NCD से होने वाले असामयिक मृत्यु की संख्या घटाना भी है.
  • NCD और गरीबी में सीधा सम्बन्ध देखने में आता है. यदि ये रोग तेजी से बढ़ते जाएँ तो निम्न आय वाले देशों में गरीबी घटाने के लिए किये गये प्रयासों को धक्का लगेगा.
  • ऐसा देखने में आता है कि गरीब लोग अधिक शीघ्र बीमार पड़ते हैं और सामाजिक दृष्टि से उच्च लोगों की तुलना में जल्दी मरते भी हैं. ऐसा इसलिए होता है कि गरीब लोग तम्बाकू जैसी हानिकारक वस्तुओं का सेवन करते हैं और उनका खानपान स्वास्थ्यकर नहीं होता. इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य की सुविधाओं तक उनकी पहुँच भी सीमित होती है.
  • NCD का उपचार महँगा होता है और लम्बा चलता है. बहुधा इसके शिकार गरीब लोग मर जाते हैं और हर वर्ष रोटी कमाने वालों की मृत्यु के कारण लाखों परिवार उजड़ जाते हैं.

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : AFSPA

संदर्भ

भारत सरकार ने सैन्य बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम अर्थात् Armed Forces (Special Powers) Act (AFSPA) के अंतर्गत पूरे नागालैंड राज्य को छह महीने की अवधि के लिए “उपद्रवग्रस्त क्षेत्र / disturbed area” घोषित कर दिया है.

AFSPA क्या है?

  • सरल शब्दों में कहा जाए तो AFSPA वह अधिनियम है जो सैन्य बलों को उपद्रवग्रस्त क्षेत्रों में विधि-व्यवस्था बनाने के लिए शक्ति प्रदान करता है.
  • इसके अनुसार सैन्य बल को यह अधिकार होता है कि किसी क्षेत्र में वह पाँच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े को प्रतिबंधित कर सकता है.
  • इसके अतिरिक्त वह बल का प्रयोग कर सकता है अथवा समुचित चेतवानी के बाद गोली भी चला सकता है यदि उसको लगे कि कोई व्यक्ति विधि का उल्लंघन कर रहा है.
  • यदि सैन्य बल को लगे कि किसी व्यक्ति की गतिविधियाँ संदेहास्पद हैं तो वह उस व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है.
  • सेना किसी भी घर में घुसकर बिना वारंट के तलाशी ले सकती है और आग्नेयास्त्र रखने पर रोक लगा सकती है. यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तार होता है अथवा कस्टडी में लिया जाता है तो सेना उसे निकटतम पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को गिरफ्तारी की परिस्थितियों का विवरण देते हुए सौंप सकती है.

पृष्ठभूमि

सैन्य बल (विशेष शक्तियाँ) अधिनियम 1958 में पारित हुआ था और उसको समूचे तत्कालीन असम राज्य और मणिपुर संघीय क्षेत्र पर लागू किया गया था. कालांतर में जब फरवरी 20, 1987 को असम के विभाजन के उपरान्त अरुणाचल प्रदेश का सृजन हुआ तो यह विवादित अधिनियम वहाँ स्वतः लागू हो गया. आगे चलकर मेघालय, मिजोरम और नागालैंड राज्य अस्तित्व में आये तो इस अधिनियम को थोड़- बहुत संशोधित करते हुए इन राज्यों पर भी लागू कर दिया गया.

“उपद्रवग्रस्त क्षेत्र” किसे कहते हैं?

उपद्रवग्रस्त क्षेत्र उस क्षेत्र को कहते हैं जिसको AFSPA के अनुभाग 3 के अंतर्गत इस रूप में अधिसूचित किया जाता है. किसी क्षेत्र के उपद्रवग्रस्त घोषित होने के कारण अनेक हो सकते हैं, जैसे – धार्मिक, नस्ली, भाषाई, जातीय, सामुदायिक, क्षेत्रीय.

केंद्र सरकार अथवा सम्बंधित राज्य के राज्यपाल अथवा सम्बंधित संघीय क्षेत्र के प्रशासक राज्य अथवा सनघीय क्षेत्र के सम्पूर्ण भाग अथवा एक भाग को उपद्रवग्रस्त क्षेत्र घोषित कर सकते हैं. इसके लिए शासकीय राजपत्र में अधिसूचना निकाली जाती है.

फिलहाल इनर लाइन परमिट की आवश्यकता भारतीय नागरिकों को तब होती है जब वह इनतीन राज्यों प्रवेश करना चाहते हैं – अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड. इस विधेयक के पास हो जाने पर मणिपुर में भी यह परमिट लागू हो गया है. वर्तमान में यह परमिटमात्र यात्रा के लिए निर्गत होते हैं. इसमें यह प्रावधान है कि ऐसे यात्री सम्बंधित राज्य में भूसंपदा नहीं खरीद सकेंगे.

वर्तमान में यह परमिटमात्र यात्रा के लिए निर्गत होते हैं. इसमें यह प्रावधान है कि ऐसे यात्री सम्बंधित राज्य में भूसंपदा नहीं खरीद सकेंगे.


GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Fly ash

संदर्भ

राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (National Thermal Power Corporation – NTPC) की एक इकाई के द्वारा उत्पादित फ्लाई ऐश के बारे में यह शिकायत करते हुए कि इसका वैज्ञानिक ढंग से निष्पादन नहीं हो रहा है, सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी. इस याचिका पर विचार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से प्रतिवेदन माँगा है. इस निर्देश के अनुपालन में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने सम्बंधित अधिकारियों से फ्लाई ऐश के निष्पादन और प्रबंधन की वर्तमान स्थिति के विषय में प्रतिवेदन की माँग की है.

fly ash

फ्लाई ऐश हानिकारक कैसे?

फ्लाई ऐश में सिलिका, एल्यूमीनियम और कैल्शियम के ऑक्साइड की पर्याप्त मात्रा होती है. आर्सेनिक, बोरान, क्रोमियम तथा सीसा जैसे तत्त्व भी सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं. इस प्रकार इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट उत्पन्न होता है. फैक्ट्रियों से निकलने वाले कोयले के धुओं से फ्लाई ऐश तो वातावरण में फैलता ही है साथ ही साथ कई बार फैक्ट्रियाँ फ्लाई ऐश को जमा कर के बाहर उनका भंडार बना देती हैं. ये सारे कचरे जमा हो-हो कर कभी-कभी पहाड़ जैसा बन जाते हैं. वहाँ से फ्लाई ऐश वातावरण को प्रदूषित करते ही हैं और बहुधा नदी/नहरों में भी फ्लाई ऐश के अंश चले जाते हैं.

फ्लाई ऐश का उपयोग

  • इसे कृषि में अम्लीय मृदाओं के लिए एक अभिकारक के रूप में, मृदा कंडीशनर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है. इससे मृदा की महत्त्वपूर्ण भौतिक-रसायन विशेषताओं, जैसे जल धारण क्षमता, हाइड्रोक्लोरिक कंडक्टिविटी आदि में सुधार होगा.
  • भारत अभी तक फ्लाई ऐश प्रयोग की अपनी संभावनाओं का पूर्ण प्रयोग कर पाने में सक्षम नहीं है. हाल ही के CSE के एक अध्ययन के अनुसार, उत्पादित की जाने वाले फ्लाई ऐश का मात्र 50-60% ही प्रयोग हो पाता है.
  • फ्लाई ऐश का उपयोग सीमेंट, पूर्वनिर्मित भवन सामग्री, ईंटें, सड़कें, आवास एवं औद्योगिक भवनों, बाँधों, फ्लाईओवर, बंजर भूमि के सुधार, खानों के भराव और अन्य सभी निर्माण कार्यों के लिए किया जा सकता है. इन उपयोगों को उचित रूप से बढ़ावा देना चाहिए.

सरकार द्वारा उठाये गये कदम

इसकी सम्भावनाओं के पूर्ण प्रयोग के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये गये हैं –

  • MoEF (The Ministry of Environment & Forests) द्वारा 2009 में जारी की गई अधिसूचना में फ्लाई ऐश के उपयोग के विषय में दिशानिर्देश दिए गये हैं. उसमें यह लिखा है कि MoEF तापीय बिजली संयंत्र की 100 km. की परिधि में fly ash के प्रयोग का समर्थन करता है.
  • IIT कानपुर और IIT दिल्ली ने NTPC के साथ मिलकर fly ash को लेकर नवाचारी उपयोग करने का प्रयास किया है. उन्होंने हाल ही में Pre-Stressed Railway concrete sleepers का निर्माण किया है.
  • फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए नीति बनाने वाला महाराष्ट्र देश का प्रथम राज्य बन गया है. महाराष्ट्र ने सिंगापुर व दुबई जैसे स्थानों से आने वाली माँग को देखते हुए फ्लाई ऐश के निर्यात की एक नीति भी बनाई है जिसमें तापीय बिजली संयंत्रों के आस-पास सीमेंट जैसे ऐश-आधारित औद्योगिक संकुलों के विकास की घोषणा की गई है.
  • कोल ऐश (coal ash/fly ash) का उपयोग कृषि भूमि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है. इसलिए किसानों के बीच फ्लाई ऐश के उपयोग को बढ़ावा देने के कार्यक्रम में कृषि विभाग को भी शामिल किया गया है.
  • सरकार ने फ्लाई ऐश का निर्यात करने का भी निर्णय लिया है जिससे 1,500 करोड़ रुपये की राजस्व-प्राप्ति हो सकती है.

आगे की राह

फ्लाई ऐश के 100% उपयोग के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाये जा सकते हैं –

  • आस-पास के बाजारों में फ्लाई ऐश आधारित भवन-उत्पादों को उपलब्ध कराना.
  • रेलवे लाइनों को बिछाने के लिए स्लीपर-निर्माण में फ्लाई ऐश के उपयोग को प्रोत्साहित करना.
  • कृषि और बंजर भूमि के सुधार में इसके उपयोग के बारे में जागरूकता में वृद्धि करना.

GS Paper  3 Source: PIB

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Topic : Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY)

संदर्भ

राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (National Mission of Sustainable Agriculture – NMSA) नामक सरकार की विशाल परियोजना के अंतर्गत आने वाले मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (Soil Health Management – SHM) के एक अवयव के रूप में परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) आरम्भ की गई है.

PKVY योजना का स्वरूप

  • इस योजना के अन्दर जैव कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा और इसके लिए संकुल आधार पर जैव ग्राम अपनाए जाएँगे.
  • एक संकुल में ऐसे 50 अथवा अधिक किसान होंगे जिनके पास 50 एकड़ भूमि होगी.
  • ये सभी किसान इस योजना के अंतर्गत जैव कृषि करेंगे.
  • जैव ग्राम में उत्पादित फसलों में कीटनाशक के अवशेष नहीं रहेंगे और इस प्रकार इनसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा.

जैव कृषि क्या है?

जैव कृषि वह कृषि है जिसमें रासायनिक कीटनाशक और खादों का प्रयोग नहीं होता और इस प्रकार यह विभिन्न संकुल पारिस्थितिकी तंत्रों में एक समरस संतुलन बनाये रखने में सहायता पहुंचाती है. साथ ही यह मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाती है जिस कारण भूमि में उपजाई गई फसलों का स्तर भी सुधर जाता है.

आगे चलकर जैव कृषि से जैव विविधता का संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा होती है तथा खेतीबाड़ी हानि का सौदा नहीं होती क्योंकि इसमें जो खाद और कीटनाशकों का प्रयोग होता है, वे मुफ्त में मिल जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि ये खाद केंचुओं, गोबर, गोमूत्र, सड़े हुए पौधों और मलमूत्र से बनाए जाते हैं जो सर्वसुलभ होते हैं. इससे न केवल किसान का खर्च बचता है अपितु मिट्टी भी खराब होने से बच जाती है.


Prelims Vishesh

Strum Ataka :-

पिछले दिनों भारत ने भारतीय वायुसेना के Mi-35 नामक युद्धक विमानों के लिए रूस से Strum Ataka नामक टैंक-निरोधक मिसाइल खरीदने का सौदा किया है.

NASA to send Dragonfly robot to search for life on Saturn’s moon Titan :-

  • अमेरिका की अन्तरिक्ष एजेंसी NASA ने शनि ग्रह के चंद्रमा टाइटन में एक आणविक शक्ति से चलने वाला ड्रोन भेजेगा जिसका नाम ड्रैगनफ्लाई है.
  • यह ड्रोन टाइटन में सूक्ष्म जीवन के चिन्हों की खोज करेगा.

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