Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 February 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 05 February 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Insurance cover on bank FDs, deposits increased to ₹5 lakh

संदर्भ

2020 का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तावित किया कि किसी बैंक के डूबने पर दी जाने वाली बीमा राशि को एक लाख से बढ़ाकर पाँच लाख रु. किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि यह प्रस्ताव मुंबई में स्थित शहरी सहकारिता बैंक, PMC बैंक में घटित संकट के संदर्भ में आया है.

जमा बीमा (DEPOSIT INSURANCE) क्या होती है?

  • जमा बीमा में ग्राहक द्वारा जमा की गई धनराशि पर बीमा का प्रावधान होता है और इसके लिए कुछ प्रीमियम लिया जाता है.
  • किसी बैंक के डूब जाने पर ग्राहकों के द्वारा जमा राशि को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के अधीन एक निगम की स्थापना की है जिसका नामजमा बीमा एवं ऋण प्रतिभूति निगम (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation – DICGC) है.
  • जमा बीमा होने पर बैंक प्रत्येक वर्ष जमा राशि के 001% अंश की समतुल्य राशि DICGC को भुगतान करेगा.

बैंक के डूबने पर जमाकर्ताओं की धनराशि का क्या होगा?

  • जब कोई बैंक डूबता है तो जमाकर्ताओं को अधिकार है कि वे DICGC से प्रति व्यक्ति एक लाख रु. का बीमा प्राप्त कर सकते हैं.
  • इस एक लाख रु. की बीमा राशि में मूल और ब्याज दोनों शामिल होंगे.
  • किसी जमाकर्ता के द्वारा बैंक के विविध खातों, जैसे – बचत, चालू, सावधि, आवर्ति खाते, में जमा मूल राशि और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों एक लाख रु. की बीमा की सीमा के अन्दर होगा.

डूबे हुए बैंक से जमाकर्ता अपनी धनराशि का दावा का कैसे करते हैं?

  • DICGC जमाकर्ताओं से सीधे नहीं बरतता है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा रजिस्टरार को जब निर्देश किया जाता है कि किसी भी बैंक को निरस्त करना है तो वह एक औपचारिक निरसनकर्ता (liquidator) की नियुक्ति करता है जो बैंक को समेटने की प्रक्रिया को देखता है.
  • DICGC अधिनियम के अनुसार, निरसनकर्ता DICGC को अपनी नियुक्ति के तीन महीने के भीतर एक सूची देता है जिसमें सभी बीमित जमाकर्ताओं और उनके बकाये का उल्लेख होता है.
  • DICGC का यह काम है कि वह इस सूची को पाने के दो महीने भीतर सभी बकायों का भुगतान कर दे.

बीमा के अन्दर कौन-से वित्तीय संस्थान आते हैं?

  • DICGC की बीमा सभी वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों पर लागू होती है. इस दायरे में कुछ राज्यों/संघीय क्षेत्रों के बैंक नहीं आते हैं, ये हैं – मेघालय, चंडीगढ़, लक्षद्वीप एवं दादर-नगर हवेली.
  • प्राथमिक सहकारिता सोसाइटियाँ (primary cooperative societies) इस बीमा के अन्दर नहीं आती हैं.

किस प्रकार का जमा DICGC के दायरे में नहीं आता है?

  1. विदेशी सरकारों का जमा
  2. केंद्र राज्य सरकारों का जमा
  3. अंतर-बैंक जमा
  4. राज्य भूमि विकास बैंक का खाता
  5. भारत के बाहर प्राप्त किसी जमा पर देय राशि
  6. कोई भी ऐसी राशि जिसपर DICGC ने RBI की अनुमति से छूट दे रखी हो.

यह सुधार क्यों आवश्यक है?

  1. बीमा कवर और बीमित राशि में बढ़ोतरी के लिए
  2. बीमा कवर देने के लिए निजी प्रतिष्ठानों को अनुमति देने के लिए
  3. दावों के निपटारे में देरी रोकने के लिए.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Appointment to various Constitutional posts, powers, functions and responsibilities of various Constitutional Bodies.

Topic : Finance Commission of India

संदर्भ

पिछले दिनों संसद में 15वें वित्त आयोग का प्रतिवेदन और साथ ही की गई कार्रवाई से समबन्धित प्रतिवेदन (Action Taken Report) उपस्थापित किया गया. विदित हो कि इस आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने यह प्रतिवेदन दिसम्बर, 2019 में राष्ट्रपति को समर्पित किया था.

वित्त आयोग

वित्त आयोग (Finance Commission) को 22 नवम्बर, 1951 में संविधान के अनुच्छेद 280 के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा पहली बार संविधान लागू होने के दो वर्ष के भीतर गठित किया गया. इस आयोग के प्रथम अध्यक्ष के.सी. नियोगी थे. प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले ऐसे समय, जिसे राष्ट्रपति आवश्यक समझे, एक वित्त आयोग को गठित करता है. राष्ट्रपति द्वारा गठित इस आयोग में एक अध्यक्ष (chairman) और चार अन्य सदस्य (members) होते हैं.

अध्यक्ष और अन्य सदस्य की योग्यता

  • इसका अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति चुना जाता है जो सार्वजनिक कार्यों में व्यापक अनुभव वाला होता है. वित्त आयोग 2017 के अध्यक्ष योजना आयोग के पूर्व सदस्य थे.
  • शेष चार सदस्यों में एक उच्च न्यायालाय का न्यायाधीश या किसी प्रकार का योग्यताधारी होता है.
  • दूसरा सदस्य सरकार के वित्त और लेखाओं का विशेष ज्ञानी होता है.
  • तीसरा सदस्य वित्तीय विषयों और प्रशासन के बारे में व्यापक अनुभव वाला होता है.
  • चौथा सदस्य अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञानी होता है.

वित्त आयोग के कार्य

आयोग का यह कर्तव्य है कि वह निम्न विषयों पर राष्ट्रपति को सिफारिश करता है –

  • आय कर और अन्य करों से प्राप्त राशि का केंद्र और राज्य सरकारों के बीच किस अनुपात में बँटवारा किया जाये.
  • “भारत के संचित कोष” से राज्यों के राजस्व में सहायता देने के क्या सिद्धांत हों.
  • सुदृढ़ वित्त के हित में राष्ट्रपति द्वारा आयोग को सौंपे गए अन्य विषय के बारे में आयोग राष्ट्रपति को सिफारिश करता है.

मुख्य तथ्य

  • 1951 में वित्त आयोग का गठन हुआ.
  • अनुच्छेद 280 के तहत गठन.
  • इस अनुच्छेद के अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रारम्भ से दो वर्ष के भीतर एक वित्त आयोग का गठन करेगा और उसके बाद प्रत्येक पाँचवे वर्ष की समाप्ति या उससे पहले जिसे भी राष्ट्रपति द्वारा आवश्यक समझा जायेगा.
  • वित्त आयोग में एक अध्यक्ष और 4 अन्य सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करेगा.
  • अध्यक्ष और सदस्य को दुबारा नियुक्त किया जा सकता है.
  • अध्यक्ष वह बनाया जायेगा जिसके पास सार्वजनिक मामलों का अनुभव हो.
  • जबकि अन्य सदस्यों में एक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या उसकी योग्यता रखने वाला कोई व्यक्ति होना चाहिए.
  • दूसरा व्यक्ति वित्त और लेखों की विशेष जानकारी रखता हो.
  • तीसरा सदस्य वित्तीय मामलों और प्रबंधन का जानकार हो.
  • चौथा सदस्य अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञान रखने वाला हो.
  • संसद कानून बनाकर आयोग के सदस्यों की नियुक्ति और उनकी योग्यता निर्धारित करेगी.

वित्त आयोग को एक स्थायी संस्था बनाया जाना चाहिए?

  • वित्त आयोग एक अस्थायी संस्था है जिसका समय-समय पर विस्तार होता रहा है. इस कारण इसकी नीतियों और दृष्टिकोण में सततता का अभाव देखा जाता है. अलग-अलग वित्त आयोगों ने कर आवंटन के सिद्धांतों पर अलग-अलग रूप अपनाया.
  • अतः यह आवश्यक प्रतीत होता है कि इसके सिद्धांत और कार्य में एकरूपता हो जिससे कि राज्य को मिलने वाले कोष को लेकर अनिश्चितता का वातारण न हो. GST आ जाने के बाद ऐसा करना और भी आवश्यक हो गया है.
  • यदि वित्त आयोग को स्थायी बना दिया जाए तो एक वित्त आयोग के विघटन और नए वित्त आयोग के गठन के बीच के अंतराल में वह अपना कार्यकलाप चालू रख सकेगा. इस अवधि में वह अपनी अनुशंसाओं के कार्यान्वयन में होने वाली अड़चनों का समाधान भी कर पायेगा.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Brexit Deal

संदर्भ

ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ को त्याग दिया है और इस 28 सदस्यों वाले संघ से निकलने वाला वह पहला देश बन गया है. यह अलगाव 31 जनवरी, 2020 के 11 बजे रात (ग्रीनविच समय) से लागू हो गया है.

यूरोपीय यूनियन क्या है?

  • यूरोपियन यूनियन यूरोपीय देशों का राजनैतिक व आर्थिक संगठन है.
  • इसका विकास विभिन्न स्तरों पर हुआ है अर्थात् यूरोपीय संघ की स्थापना किसी एक समझौते या संधि द्वारा नहीं बल्कि विभिन्न संधियों तथा उनमे संशोधन के बाद हुई है. इसके विकास में “पेरिस की संधि (1951)”,”रोम की संधि (1957)”,”मास्त्रिच की संधि (1993)” तथा “लिस्बन की संधि (2009)” का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
  • वर्तमान में ब्रिटेन के यूनियन से बाहर हो जाने के बाद इसके केवल 27 सदस्य रह जायंगे.
  • यूरोपियन यूनियन ने यूरोपीय देशों के राजनितिक व आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे यह संगठन विश्व की लगभग 22% अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है. यूरोपियन यूनियन की अपनी संसद,आयोग,मंत्रिपरिषद,परिषद्,न्यायालय तथा केंद्रीय बैंक है जिन्हें यूनियन के प्रमुख अंग भी कहा जाता है .

BREXIT का इतिहास

इंग्लैंड का EU में बने रहने का समर्थन करने वालों का मानना था कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था EU के निर्णयों से ही फलती-फूलती है. यूरोपियन यूनियन के अन्दर रहकर Britain का लोकतंत्र सुरक्षित है एवं इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलता है. जबकि विरोध करनेवालों का मानना है कि यूरोपीय संघ अपनी वर्तमान राजनैतिक क्षमताओं एवं सीमाओं से बाहर जा रहा है जो ब्रिटेन या किसी भी देश के हित में नहीं है. यूरोपियन संघ (यूरोपियन यूनियन) मुख्यत: यूरोप में स्थित 28 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है. ब्रिटेन की प्रगति एक तरह से रुकी हुई थी. मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री काफी दिनों से सुस्त पड़ी थी. लोगों को घुटन महसूस हो रहा था. लोगों को लगने लगा था कि European Union का कैपिटल Brussels ही ब्रिटेन के अंदरूनी और बाहरी मामलों के सभी निर्णय ले रहा है. इसलिए ब्रिटेन की जनता में एक ऐसी सोच उत्पन्न हो रही थी कि शायद इससे अलग हो जाने (Brexit) में ही ब्रिटेन की भलाई है. ब्रिटेन ने एक जमाने में Commonwealth of nations (राष्ट्रमंडल) बनाया था. Commonwealth of nations 53 स्वतंत्र राज्यों का एक संघ है जिसमें सारे राज्य अंग्रेजी राज्य का हिस्सा थे. अभी के समय में राष्ट्रमंडल भी अधिक सक्रीय नहीं रहा. जिन आर्थिक उद्देश्यों से इस राष्ट्रमंडल का निर्माण हुआ था, ब्रिटेन को इन देशों से उतना आर्थिक फायदा नहीं हो रहा था जितना होना चाहिए. भले ही ब्रिटेन की इन देशों में इन्वेस्टमेंट की गति बरकरार रही हो मगर कई देश 1-2 उत्पाद से अधिक ब्रिटेन को एक्सपोर्ट नहीं करते थे. पिछले चार सालों से ब्रिटेन में Commonwealth nations को पुनर्जीवित करने की चर्चा हो रही थी. मगर इतने महत्त्वपूर्ण निर्णय में भी European Union का शिकंजा था.

संक्रमण काल

  • Brexit की घोषणा का यह अर्थ नहीं कि ब्रिटेन तत्काल प्रभाव से यूरोपीय संघ से अलग हो गया. नियमानुसार उसे एक संक्रमण काल (transition period) से गुजरना होगा. इससे दोनों पक्षों को साँस लेने की फुर्सत मिलेगी जब तक कि एक नया मुक्त व्यापार समझौते का निर्धारण नहीं हो जाए.
  • यह इसलिए आवश्यक है कि संक्रमण काल के अंत में ब्रिटेन एकल बाजार और सीमा-पार शुल्क संघ से बाहर निकल जाएगा.
  • एक मुक्त व्यापार समझौता हो जाने से वस्तुओं का यूरोपीय संघ के अन्दर बेरोक-टोक और बिना अतिरिक्त शुल्क के आना-जाना होता रहेगा.
  • यदि यह नया समझौता समय पर स्वीकार नहीं होता है तो ब्रिटेन पर यूरोपीय संघ को माल भेजने पर शुल्क देना होगा और अन्य व्यापारिक बाधाएँ उपस्थित होंगी.

व्यापार के अतिरिक्त और किन विषयों पर भविष्य में निर्णय लेने होंगे?

  • विधि व्यवस्था लागू करना, डाटा का आदान-प्रदान एवं सुरक्षा
  • विमानन मानदंड एवं सुरक्षा
  • समुद्र में मछली मारने की सुविधा
  • बिजली और गैस की आपूर्ति
  • औषधियों की लाइसेंस और उनका विनियमन

Brexit के कारणों के पीछे के सिद्धांत

विश्लेषक Brexit के आधार-स्वरूप तीन सिद्धांत बताते हैं, जो निम्नलिखित हैं –

आव्रजक :- ब्रिटेन में बाहर से आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही थी. अंग्रेजों का मानना था कि इससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही थी और जीवन जीने की अंग्रेजी शैली का भी क्षरण हो रहा था. आम धारणा था कि शरणार्थियों के मामले में यूरोपीय संघ बहुत उदार है, अतः इससे पीछा छुड़ाना आवश्यक है.

कुलीन वर्ग :- लन्दन शहर से बाहर देश के पुराने औद्योगिक केन्द्रों के आस-पास रहने वाले श्रमिक वर्ग में कुलीन वर्ग के प्रति विद्रोह की भावना थी. कुलीन वर्ग की थैचरवादी नीतियों (Thaterchism) और टोनी ब्लयेर की नई श्रम नीति के कारण दशकों से आर्थिक स्थिति रुकी पड़ी थी और वास्तविक मजदूरी भी ज्यों की त्यों बनी हुई थी.

नौकरशाही :- ब्रिटेन की नौकरशाही का मानना था कि यूरोपीय संघ की कार्यशैली में लालफीताशाही व्याप्त है जो उनके काम करने के आड़े आ रही थी. अतः ब्रिटेन के नौकरशाह चाहते थे कि उन्हें यूरोपीय संघ से मुक्ति मिल जाए और वे अपने ढंग से काम कर सकें.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Challenges to internal security through communication networks, role of media and social networking sites in internal security challenges, basics of cyber security; money-laundering and its prevention.

Topic : What is Anticipatory bail?

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय की एक संवैधानिक पीठ ने यह व्यवस्था दी है कि अग्रिम जमानत (anticipatory bail) के लिए कोई समय-सीमा नहीं हो सकती है और वह अभियोजन के अंत तक चल सकती है.

पृष्ठभूमि

आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुभाग 438 में अग्रिम जमानत के विषय में प्रावधान है. इस प्रावधान के कार्यक्षेत्र के विषय में दायर मामले – सुशीला अग्रवाल बनाम दिल्ली राज्य – में तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने एक रिफरेन्स किया था. इस रिफरेन्स पर सर्वोच्च न्यायालय ने एक संवैधानिक पीठ का गठन करते हुए विचार किया था.

संवैधानिक पीठ द्वारा दिए गये मंतव्य

  1. अनुभाग 438 (आपराधिक प्रक्रिया संहिता) न्यायालयों को अग्रिम जमानत के लिए शर्त थोपने के लिए बाध्य नहीं करता है. परन्तु यदि विशेष परिस्थितियों में ऐसा समझा जाता है तो न्यायालय अग्रिम जमानत की समय-सीमा निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र है.
  2. संसद नागरिकों के अधिकार को कम करना उचित नहीं समझती है यह देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह उचित नहीं होगा कि वह अग्रिम जमानत के विषय में न्यायालय को दी गई शक्तियों में कटौती करे.
  3. प्राथमिकी दायर होने के भी पहले कोई व्यक्ति अग्रिम जमानत का आवेदन दे सकता है.
  4. न्यायालय उसी दशा में अग्रिम जमानत पर शर्तें थोप सकता है जब उसे लगे कि सम्बंधित अपराध गंभीर प्रकृति का है.

अग्रिम जमानत क्या है?

  1. आपराधिक प्रक्रिया संहिता में 1973 में एक संशोधन द्वारा अनुभाग 438 के अन्दर अग्रिम जमानत का प्रावधान किया गया था.
  2. एक ओर जहाँ साधारण जमानत उस व्यक्ति को मिलती है जो गिरफ्तार है, वहीं दूसरी ओर अग्रिम जमानत द्वारा किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी के पहले ही दी जाती है.
  3. अनुभाग 438 का उप-अनुभाग 1 मात्र सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय को ही अग्रिम जमानत देने के लिए अधिकृत करता है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Major crops cropping patterns in various parts of the country.

Topic : Yellow Rust

संदर्भ

पिछले दिनों पंजाब और हरियाणा के कुछ भागों में गेहूँ की फसल में पीले जंग (Yellow Rust) की शिकायत मिली है.

पीला जंग (Yellow Rust) क्या होता है?

  • यह एक रोग है जिसमें गेहूँ के पत्तों पर धूल की पीली-पीली धारियाँ दिखने लगती हैं.
  • यह इसलिए होता है कि पत्तियों पर रहने वाले जंग के कीटाणु पौधे से कार्बोहाइड्रेट सोख लेते हैं और पत्तों के हरे भागों को कम कर देते हैं.
  • यह रोग तब होता है जब बरसात होती है या ओस अथवा कुहासा होता है.

यह कैसे फैलता है?

अनुकूल दशाओं में यह रोग तेजी से फैलता है और पौधे के विकास को दुष्प्रभावित कर देता है. फलस्वरूप उत्पादन भी 5-30% घट जाता है.

पीला जंग भारत में कहाँ-कहाँ होता है?

भारत के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र तथा उत्तरी-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के लिए पीला जंग एक बड़ा पादप रोग होता है. ठन्डे मौसम की शुरुआत में यह उस समय आसानी से फैलता है जब वायु की दशा इसके लिए अनुकूल होती है.

इससे कैसे निबटा जाता है?

इस जंग को नियंत्रित करने के लिए प्रतिरोधी जीन (Breeding resistant) का प्रयोग सबसे अधिक सस्ता और कारगर उपाय है. परन्तु अब इस प्रकार के प्रतिरोधी जीन उतने कारगर नहीं रह गये हैं क्योंकि पौधों में इन जीनों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न हो गई है.


Prelims Vishesh

Burhi Dihing river :-

  • पिछले दिनों पानी के अन्दर स्थित तेल पाइपलाइन में रिसाव के कारण पूर्वी असम की बूढ़ी दिहिंग नदी में दो दिन तक आग लगी रही.
  • दिहिंग अथवा बूढ़ी दिहिंग ऊपरी असम में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी की एक बड़ी सहायक नदी है जिसका उद्गम अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिमालय (पटकई पहाड़ियाँ) में है जहाँ से निकलकर यह असम के तिनसुकिया और डिब्रूगढ़ जिलों के अन्दर बहती हुई दिहिंगमुख में ब्रह्मपुत्र से मिल जाती है.

Mukti Caravan :

बच्चों की बंधुआ मजदूरी, शोषण और यौन दुर्व्यवहार से लड़ने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने हेतु पिछले दिनों राजस्थान में एक मुक्ति कारवां निकाला गया जिसमें बालश्रम से मुक्त किये गये बच्चों ने नेतृत्व किया और जो उन गाँवों और शहरों से गुजरेगा जहाँ मानव तस्करी हुआ करती है.

nCoV outbreak declared a State calamity in Kerala :

  • केरल ने नये कोरोना वायरस (nCoV) संक्रमण को एक राज्य आपदा घोषित कर दिया है.
  • अभी तक वहाँ इस वायरस के प्रकोप के होने के तीन मामलों की सम्पुष्टि हुई है.

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