Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 05 February 2019


GS Paper 1/ 2  Source: PIB

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Topic : Rules To Allow Employment of Women in Mines

संदर्भ

खनन अधिनियम, 1952 में प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने धरातल के ऊपर अथवा धरातल के नीचे अवस्थित खदानों में काम कर रहीं स्त्रियों को खनन अधिनियम के अनुभाग 46 के प्रावधानों से मुक्त कर दिया है. परन्तु इसके लिए कुछ शर्तें हैं जो नीचे बताई जा रही हैं –

धरातल के ऊपर अवस्थित खान में काम करने वाली स्त्रियाँ

  • ऐसी खान के स्वामी स्त्रियों को 7 बजे सायं से लेकर 6 बजे प्रातः तक काम में लगा सकते हैं.
  • इसके लिए सम्बन्धित स्त्री कर्मचारी से लिखित सहमति लेनी होगी.
  • ऐसी स्त्रियों को उचित सुविधाएँ और व्यावसायिक एवं स्वास्थ्य से सम्बंधित सुरक्षा प्रदान की जायेगी.
  • स्त्रियों को ऐसी खानों में काम देने की प्रक्रिया मुख्य खनन निरीक्षक के द्वारा समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए.
  • ऐसी खानों में स्त्रियों को अकेले नहीं अपितु समूह में भेजना होगा और एक शिफ्ट में तीन से कम स्त्रियाँ नहीं होनी चाहिएँ.

धरातल के नीचे अवस्थित खान में काम करने वाली स्त्रियाँ

  • धारातल के नीचे अवस्थित खान के स्वामी स्त्रियों को 6 बजे से प्रातः से 7 बजे सायं तक तकनीकी, पर्यवेक्षण एवं प्रबंधन कार्य में लगा सकते हैं.
  • इसके लिए भी सम्बंधित स्त्री कर्मचारी से लिखित अनुमति लेना आवाश्यक होगा.
  • ऐसी स्त्रियों को उचित सुविधाएँ और व्यावसायिक एवं स्वास्थ्य से सम्बंधित सुरक्षा प्रदान की जायेगी.
  • स्त्रियों को ऐसी खानों में काम देने की प्रक्रिया मुख्य खनन निरीक्षक के द्वारा समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए.
  • ऐसी खानों में स्त्रियों को अकेले नहीं अपितु समूह में भेजना होगा और एक शिफ्ट में तीन से कम स्त्रियाँ नहीं होनी चाहिएँ.

पृष्ठभूमि

खनन अधिनियम, 1952 में धरातल के ऊपर और धरातल के नीचे दोनों प्रकार की खानों में स्त्रियों को रात में (सात बजे सायं से छ: बजे प्रातः) काम पर लगाने से रोक दिया गया था. परन्तु, खनन उद्योग में काम करने वाली स्त्रियाँ और खनन अभियंत्रण के डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में पढ़ रही स्त्रियाँ बहुत दिनों से सरकार को कह रही थीं कि स्त्रियों को खान में काम करने के लिए समान अवसर प्रदान किया जाए. इसके लिए कुछ खनन कंपनियाँ भी अनुरोध कर रही थीं.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Target Olympic Podium Scheme (TOPS)

संदर्भ

भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय “राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष” के दायरे के अंदर TOPS नामक कार्यक्रम चला रहा है. इस कार्यक्रम का पूरा नाम “टारगेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम” है. इसके अंतर्गत TOPS के लिए चुने गये एथलीटों को देश में और विदेश में स्थित विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों/अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण पाने के लिए धनराशि मुहैया कराई जाती है.

राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष क्या है?

इस कोष की स्थापना 12 नवम्बर, 1998 को धर्मार्थ दान अधिनियम, 1890 (Charitable Endowments Act) के तहत भारत सरकार के द्वारा की गई थी.

कोष का प्रबंधन

  • इस कोष का प्रबंधन भारत सरकार द्वारा गठित एक परिषद् करती है.
  • इस परिषद् के अध्यक्ष भारत सरकार के युवा मामले एवं खेलकूद मंत्री होते हैं.
  • इस परिषद् के कई सदस्य खेलकूद विभाग तथा भारतीय खेलकूद प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं.
  • इस परिषद् में देश के सर्वोच्च औद्योगिक संगठनों, यथा – FICCI, CII और ASSOCHAM के प्रतिनिधि सदस्य होते हैं.
  • इस परिषद् में लब्धप्रतिष्ठ संगठनों के खेलकूद प्रोत्साहन बोर्डों के प्रतिनिधि भी सदस्य होते हैं.
  • परिषद् के पदेन सदस्य सचिव युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय के संयुक्त सचिव होते हैं.

TOPS योजना क्या है?

  • इस योजना को राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष (NSDF) के दायरे में खेलकूद मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था.
  • यह कार्यक्रम आगामी ओलिंपिक खेलों में भारतीय प्रतिभागियों द्वारा पदक पाने की क्षमता में वृद्धि के लिए चलाया जा रहा है.
  • TOPS scheme के अंतर्गत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार क्षमता में संवर्धन करने के लिए हर प्रकार की सहायता मुहैया कराई जायेगी जिससे कि वे पदक पाने में सफल हो सकें.
  • इस योजना के अंतर्गत भारतीय खेलकूद प्राधिकारण (SAI) के द्वारा क्षमतावान खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जायेगी.
  • 2020 और 2024 में होने वाले ओलिंपिक में कौन-कौन खेलों में और कौन-कौन खिलाड़ियों को पदक मिल सकते हैं, इसका आकलन करने के लिए अभिनव बिंद्रा समिति का गठन किया गया है.

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Topic : National Service Scheme

राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) क्या है?

राष्ट्रीय सेवा योजना भारत सरकार द्वारा संपोषित एक सार्वजनिक सेवा कार्यक्रम है जिसका संचालन भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय करता है.

यह योजना 1969 में महात्मा गांधी के जन्म के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में अनावृत की गई थी. इसके लिए डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा अनुशंसा की गई थी.

लक्ष्य

यह योजना शैक्षणिक संस्थानों में स्वेच्छा के आधार पर संचालित होती है. इसका लक्ष्य एक ओर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच सम्पर्क को विकसित करना है तो दूसरी ओर शिक्षा-परिसर और समुदाय के बीच एक रचनात्मक सम्बन्ध स्थापित करना है.

उद्देश्य

  • छात्रों को उस समुदाय से अवगत कराना जिसमें वे काम करते हैं.
  • समुदाय के संदर्भ में अपने आप की समझ को पैदा करना.
  • समुदाय की आवश्यकताओं और समस्याओं को जानना और अपने आप को इनके समाधान की प्रक्रिया से जोड़ना.
  • अपने अंदर सामाजिक और नागरिक उत्तरदायित्व का विकास करना.
  • व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तक पहुँचने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करना.
  • सामूहिक जीवन और उत्तरदायित्व-वहन के लिए अपेक्षित क्षमता विकसित करना.
  • सामुदायिक प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कौशल सीखना.
  • नेतृत्व के गुण और प्रजातांत्रिक दृष्टिकोण अपनाना.
  • आपातकालों और प्राकृतिक विपदाओं से लड़ने की क्षमता विकसित करना.
  • राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता का अभ्यास करना.

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Topic : Draft National River Ganga Bill, 2018

राष्ट्रीय गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण एवं प्रबन्धन) विधेयक, 2018 के मुख्य तथ्य

  • विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि गंगा नदी में जेटी, बंदरगाह अथवा स्थायी हाइड्रोलिक निर्माण तब तक नहीं किये जाएँगे इसके लिए राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण अनुमति न दे.
  • विधेयक में यह प्रावधान है कि एक प्रबंधन संरचना तैयार की जायेगी जिसका काम 2,500 किमी. लम्बी गंगा नदी के स्वास्थ्य पर नजर रखना होगा.
  • विधेयक में गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी के रूप में परिभाषित किया गया है.
  • गंगा नदी के अविरल और पर्यावरणानुकूल प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए विधयेक में ढेर सारे प्रतिबंध लगाये गये हैं. विदित हो कि वर्तमान में गंगा नदी के ऊपरी भागों में अनेक बाँध हैं जिसके चलते गंगा नदी का प्रवाह बाधित होता है.
  • प्रस्तावित विधेयक में पानी को अभियंत्रण द्वारा नई दिशा में ले जाने अथवा उसको रोक देने जैसे कार्यों के कारण जल-प्रवाह में बाधा पहुँचाने वाली अनधिकृत गतिविधियों का वर्णन किया गया है.
  • इन अनधिकृत गतिविधियों के लिए तीन वर्ष के कारावास अथवा 50 करोड़ तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
  • इसमें गंगा सुरक्षा दल (Ganga Protection Corps) बनाने का प्रस्ताव है जिसके सदस्यों को अधिकार होगा कि वे नदी को गंदा करने वालों को गिरफ्तार कर सकते हैं.
  • गंगा सुरक्षा दल के कर्मचारी गृह मंत्रालय द्वारा भेजे जायेंगे और उन्हें राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण (National Ganga Rejuvenation Authority) के द्वारा तैनात किया जाएगा.
  • विधेयक में इन कामों को प्रदूषण करने वाला काम माना जाएगा –  नदी की धारा को अवरुद्ध करने वाला निर्माण कार्य, औद्योगिक अथवा व्यावसायिक खपत के लिए गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों से सटी भूमि से भूजल निकालना, इन नदियों में व्यवसाय के लिए मछली मारना, नाली के पानी को नदी में बहाना.
  • गंगा नदी में गंदा पानी डालने के लिए पाँच वर्ष तक के कारागार अथवा प्रतिदिन 50,000 रु. के जुर्माने अथवा दोनों का दंड दिया जा सकता है.

विधयेक में वर्णित संज्ञेय अपराधों की सूची

  • नदी के प्रवाह को रोकने वाले निर्माण कार्य.
  • गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के पास की भूमि से औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक खपत के लिए जल निकालना.
  • गंगा एवं इसकी सहायक नदियों में व्यापार के लिए मछली मारना अथवा एक्वा कल्चर करना.
  • नदी में अशुद्धीकृत अथवा शुद्धीकृत नाला जल छोड़ना.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Pre-Departure Orientation Programme

संदर्भ

भारत सरकार ने विदेश जाने वाले व्यक्तियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम (Pre-Departure Orientation Training – PDOT) चलाया है. यह कार्यक्रम उनके देश छोड़ने से पहले संचालित किया जाएगा. इसमें उनको उस देश की भाषा और संस्कृति की जानकारी दी जायेगी जहाँ वे जा रहे हैं और साथ ही वहाँ क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इन सब बातों की जानकारी दी जायेगी. इसके अतिरिक्त परिव्रजन की परिक्रिया और कल्याणकारी उपायों के विषय में भी उन्हें अवगत कराया जाएगा.

PDOT के मुख्य तत्त्व

  • यह कार्यक्रम विदेश मंत्रालय का है जो वह कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साहचर्य में चलाएगा.
  • यह कार्यक्रम जिस योजना का अंग है, उसका नाम प्रवासी कौशल विकास योजना (PKVY) है.
  • इस कार्यक्रम की संचालन एजेंसी राष्ट्रीय कौशल विकास निगम है.

प्रवासी कौशल विकास योजना (PKVY)

  • इस योजना का उद्देश्य उन भारतीयों के कौशल में वृद्धि करना है जो रोजगार के लिए विदेश जाते हैं.
  • इस कार्यक्रम का एक उद्देश्य यह भी है कि बाहर जाने वाले भारतीय युवाओं में अपने ऊपर भरोसा पैदा हो और वे नए देश में अपने आप को अजनबी न समझें.
  • इस कार्यक्रम में दिया जाने वाला प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा.
  • कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) करेगा. इसके लिए वह अपने प्रशिक्षण भागीदारों की सहायता लेगा और विदेश मंत्रालय एवं कौशल विकास मंत्रालय से समय-समय पर परामर्श भी लेता रहेगा.

NSDC क्या है?

  • ज्ञातव्य है कि NSDC भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की एक लाभ-रहित कम्पनी है जिसकी स्थापना 2009 में कौशल विकास के लिए की गई थी.
  • इसका उद्देश्य बड़े-बड़े और गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक संस्थानों के निर्माण को उत्प्रेरित करते हुए कौशल विकास को प्रोत्साहन देना है.

Prelims Vishesh

Elephant corridors :-

  • पाँच गैर-सरकारी संगठनों वाले एशियाई हाथी संघ (Asian Elephant Alliance) ने भारत के 12 राज्यों में हाथियों के द्वारा उपयोग में लाये जा रहे 101 गलियारों में से 96 गलियारों को सुरक्षित करने की पहल है.
  • विदित हो कि हाथी गलियारा उस संकीर्ण भूखंड को कहते हैं जो हाथियों के दो बड़े निवास स्थलों को जोड़ता है.

Hoveizeh long-range cruise missile :

  • ईरान ने हाल ही में घोषणा की है कि उसने दूर तक मार करने वाली Hoveizeh नामक क्रूज-मिसाइल का सफल परीक्षण कर लिया है.
  • इस मिसाइल की मारक दूरी 1,350 किमी है.

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