Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 December 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 05 December 2019


GS Paper 1 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to women.

Topic : Mahila Kisan Sashaktikaran Pariyojana

संदर्भ

भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय केवल महिला किसानों के लिए एक कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहा है जिसका नाम महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना होगा. यह परियोजना राष्ट्रीय कृषक नीति (NPF) (2007) के प्रावधानों के अनुरूप संचालित होगी.

इस योजना में भारत सरकार राज्यों को 60% धनराशि मुहैया कराएगी. पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90% होगा.

महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना के विषय में मुख्य तथ्य

  • महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना (MKSP) दीनदयाल अन्त्योदय योजना – NRLM (DAY-NRLM)का एक उपांग है जिसका उद्देश्य कृषि में महिलाओं की वर्तमान स्थिति में सुधार लाना तथा उनको नए-बनाये अवसर देकर सशक्त बनाना है.
  • MKSP परियोजना महिलाओं को किसान मानते हुए कृषि तथा पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ प्रथाओं के क्षेत्र में उनकी क्षमता का संवर्धन करना चाहती है.
  • यह परियोजना निर्धन से निर्धन परिवारों तक पहुँच कर महिला किसानों द्वारा वर्तमान में किये जाने वाले कृषि कार्य के दायरे को विस्तारित करने का लक्ष्य रखती है.
  • MKSP का मुख्य बल इस बात पर दिया जाता है कि छोटे-छोटे किसान कृषि की ऐसी पद्धतियाँ अपनाएँ जो जलवायु के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें. ऐसा करने से अंतत: कुशल सामुदायिक पेशेवर तैयार हो जाएँगे.
  • इस संदर्भ में जिन पद्धतियों का सहारा लिया जाएगा वे हैं– समुदाय द्वारा प्रबंधित सतत कृषि (CMSA), नॉन-पेस्टीसाइड मैनेजमेंट (NPM), शून्य बजट प्राकृतिक कृषि (ZBNF), घर-घर जाकर पशु की देखभाल करने के लिए पशु-सखी मॉडल, गैर-इमारती वनोत्पाद को फिर से उत्पन्न करने और काटने के टिकाऊ उपाय.

कृषि में महिलाओं को महत्त्व देने की आवश्यकता

भारत समेत अधिकांश विकासशील देशों में कृषि कार्य में ग्रामीण महिलाएँ सबसे बढ़-चढ़कर के शामिल होती हैं. ज्ञातव्य है कि गाँवों की 80% महिलाएँ अपनी आजीविका के लिए खेती से जुड़ी रहती हैं. लगभग 20% खेती का काम महिलाओं के द्वारा होता है. ऐसा इसलिए होता है कि विधवा हो जाने पर अथवा प्रत्यक्त हो जाने पर अथवा पुरुष के बाहर चले जाने के कारण खेती का काम उनको ही देखना पड़ता है. ऐसी महिलाओं को बीज, पानी, ऋण, सब्सिडी आदि पाने में सहयोग की आवश्यकता होती है. यह परियोजना इन सब पहलुओं को ध्यान में रखकर उन्हें सशक्त बनाएगी.


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Rotavirus

संदर्भ

भारत बायोटेक इंटरनेशनल कंपनी ने मंगलवार को रोटावायरस वैक्सीन का नया संस्करण रोटावैक-5डी का अनावरण किया.

रोटावैक-5डी में क्या नया है?

  • पुरानी वैक्सीन के मुकाबले में इसमें डोज की मात्रा कम रखी गई है.
  • इसे अपेक्षाकृत उच्च तापमान पर भीस्टोर किया जा सकेगा
  • नई रोटावैक-5डी वैक्सीन की एक खुराक 5 मिलीलीटर है.
  • इसे 2-8 डिग्री सेल्सियस पर 24 महीने तक स्टोर किया जा सकेगा. 37 डिग्री सेल्सियस पर रोटावैक-5डी को साथ दिनों तक स्टोर किया जा सकेगा. इसके विपरीत, पहले वाले संस्करण कीरोटावैक वैक्सीन में 5 मिलीलीटर की एक खुराक होती थी और इसे -20 डिग्री सेल्सियस पर ही स्टोर किया जा सकता था.

रोटावायरस क्या है?

रोटावायरस एक ऐसा वायरस है जिससे पाँच वर्ष से नीचे के बच्चों में भयंकर अतिसार हो जाता है और मृत्यु भी हो जाती है. देश में प्रत्येक वर्ष 10% बच्चों की मृत्यु का कारण यही वायरस है.

रोटावायरस संक्रमण के लक्षण

  1. इसमें बच्चे को ज्वर, मिचली और उलटी होती है जिसके पश्चात् पेट में पीड़ा के साथ-साथ पतला मल होता है.
  2. बच्चे को खाँसी और नजला भी हो सकता है.
  3. कभी-कभार अतिसार इतना भयंकर हो जाता है कि शरीर का पानी तेजी से समाप्त होने लगता है.
  4. अन्य वायरसों के समान रोटावायरस के भी संक्रमण के समय कम अथवा शून्य लक्षण प्रकट होते हैं, विशेषकर वयस्कों में.

फैलाव

रोटावायरस का फैलाव निम्न प्रकार से होता है –

  • उलटी या मल से
  • संक्रमित हाथों, सतहों और वस्तुओं को छूने से.
  • साँस के माध्यम से.

इससे होने वाला अतिसार बहुत तेजी से संक्रमित होता है.

पृष्ठभूमि

अन्य वायरसों की तुलना में रोटावायरस से बच्चों में सबसे अधिक अतिसार होता है. देखने में यह अतिसार अन्य अतिसार के सामान्य ही होता है, परन्तु इसे रोटावायरस टीके से रोका जा सकता है. दूसरी ओर, अन्य अतिसारों के लिए कोई टीका नहीं है और उनके रोकथाम के लिए ये उपाय अपनाए जाते हैं – साफ़ सफाई, बार-बार हाथ धोना, निरापद पानी पीना, निरापद भोजन लेना, केवल स्तनपान कराना और विटामिन A की गोली लेना.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures.

Topic : Independent Directors Databank

संदर्भ

हाल ही में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ( Ministry of Corporate Affairs- MCA) द्वारा नई दिल्ली में ‘स्वतंत्र निदेशकों का डेटाबैंक’ (Independent Director’s Databank) पोर्टल प्रारंभ किया गया है.

  • यह मंत्रालय द्वारा उठाया जाने वाला एक अभूतपूर्व कदम है, जिस पर वर्तमान स्‍वतंत्र निदेशकों तथा स्‍वतंत्र निदेशक बनने के आकांक्षियों को पंजीकरण कराने की सुविधा उपलब्‍ध होगी.
  • स्‍वतंत्र निदेशकों के कामकाज़ को मज़बूती प्रदान करने के उद्देश्‍य से कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों तथा उसके अंतर्गत बनाए जाने वाले नियमों को ध्यान में रखते हुए ‘स्‍वतंत्र निदेशकों का डेटाबैंक’ शुरू किया है.

स्‍वतंत्र निदेशकों का डाटाबैंक क्या है?

  • डाटाबैंक पोर्टल को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्‍थान ने विकसित किया है.
  • इस डाटाबैंक के माध्यम से वे कंपनियां भी अपना पंजीकरण करा सकती हैं, जो सही कौशल रखने वाले व्‍यक्तियों को चुनने और उनसे जुड़ना चाहती हैं, ताकि उन व्‍यक्तियों को स्‍वतंत्र निदेशकों के रूप में नियुक्‍त किया जा सके.
  • इसके तहत विभिन्‍न विषयों पर ई-लर्निंग पाठ्यक्रम की विस्‍तृत श्रेणी उपलब्‍ध होगी. इन विषयों में कंपनी अधिनियम, प्रतिभूति नियम, बुनियादी लेखा इत्‍यादि शामिल हैं.
  • अधिसूचित नियमों के अनुसार सभी मौजूदा स्‍वतंत्र निदेशकों के लिए आवश्‍यक है कि वे एक दिसंबर, 2019 से तीन महीने के भीतर डाटाबैंक में अपना पंजीकरण करा लें.
  • उनके लिए यह भी आवश्‍यक होगा कि वे अपने कौशल मूल्‍यांकन के लिए ऑनलाइन परीक्षण करें, जो मार्च, 2020 से उपलब्‍ध होगा. यह कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए.

पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और उसके तीन आसान चरण हैं –

  1. मंत्रालय की वेबसाइट पर यूजर अकाउंट के जरिए लॉग-इन करना
  2. लॉग-इन करने के बाद यूजर के लिए डाटा बैंकखुल जाएगा
  3. ई-लर्निंग और ई-प्रोफिशियंसी मूल्‍यांकन के लिए सब्सिक्रिप्‍शन प्‍लान चुनना होगा.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Land reforms in India.

Topic : Punjab to create land banks in rural areas

संदर्भ

पंजाब मंत्रिमंडल ने हाल ही में औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के लिए राज्य के उद्योग विभाग को शामिलात भूमि के हस्तांतरण के लिए कानून में संशोधन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी.

शामिलात भूमि क्या है?

शामिलात भूमि, वह भूमि है जो बस्ती और खेती के अंतर्गत नहीं आती है और इसे आम उपयोग की जमीन माना जाता है.

निहितार्थ

  • इसका उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास को मजबूत करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में भूमि बैंक का निर्माण करना है.
  • यह संशोधन इसलिए किया गया है, ताकि गांवों के विकास के लिए ग्राम पंचायतें शामिलात अथवा गांव की आम भूमि के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकें.
  • नये नियम से शामिलात भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उद्योग विभाग एवं पीएसआईसी को हस्तांतरित करने का मार्ग प्रशस्त होगा.
  • नए संशोधन के फलस्वरूप पंचायतें अपने हितों के अनुसार समय-समय पर उपयुक्त निर्णय ले सकेंगी.
  • राज्य सरकार की पूर्वानुमति लेकर पंचायतें शामिलात भूमि को बाद में भुगतान की शर्त पर उद्योग विभाग अथवा PSIEC को उनकी औद्योगिक अवसंरचना से सम्बंधित परियोजनाओं के लिए बेच पाएँगी.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology, bio-technology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : CSIR-IICT Nuclear Magnetic Resonance test facility

संदर्भ

हैदराबाद के CSIR-भारतीय रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-Indian Institute of Chemical Technology – CSIR-IICT) ने पिछले दिनों घोषित किया कि उस संस्थान में उपलब्ध आणविक चुम्बकीय प्रतिध्वनि (Nuclear Magnetic Resonance – NMR) परीक्षण की सुविधा को अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (US Food and Drug Administration – USFDA) ने निरीक्षण के उपरान्त “कोई टिपण्णी नहीं/ no observations” ऐसा मंतव्य दिया है अर्थात् उसे परीक्षण में उत्तीर्ण कर दिया है.

पृष्ठभूमि

इसी वर्ष अगस्त 21-22 को USFDA ने CSIR-IICT में स्थित NMR सुविधा का निरीक्षण किया था और पाया था कि वर्तमान वस्तु विनिर्माण प्रथा (Current Good Manufacturing Practice – CGMP) के अनुपालन के मामले में वह सुविधा ठीक-ठाक चल रही है. इसलिए USFDA ने उसका वर्गीकरण “कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई / “no action initiated (NAI)” श्रेणी में किया.

NMR क्या है?

NMR एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है जिसके द्वारा औषधीय एवं अन्य रासायनिक अणुओं के संरचनात्मक स्वरूप का अनवीक्षण किया जाता है और उसका वर्गीकरण किया जाता है.

इस तकनीक का उपयोग औषधि आदि की गुणवत्ता के नियंत्रण तथा साथ ही उसके नमूने के घटकों और उसकी शुद्धता का पता लगाने में होता है. इस प्रकार यह तकनीक आणविक संरचना को जानने की तकनीक है.

यह कैसे काम करता है?

  1. पहले नमूने को एक चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है और फिर NMR सिग्नल उत्पन्न किया जाता है. इसके लिए नमूने पर रेडियो तरंग छोड़े जाते हैं और आणविक चुम्बकीय प्रतिध्वनि उत्पन्न की जाती है जिसका पता संवेदनशील रेडियो संग्राहकों से लगाया जाता है.
  2. सम्बंधित अणु के चारों ओर स्थित आंतरिक चुम्बकीय क्षेत्र प्रतिध्वनि की बारंबारता को परिवर्तित कर देता है और इस प्रकार उस अणु के और उसके अन्य स्वतंत्र सक्रिय समूहों की इलेक्ट्रॉनिक संरचना के विवरण उपलब्ध हो जाते हैं.
  3. अलग-अलग यौगिकों के क्षेत्र अपने-आप में अनूठे और स्वतंत्र लक्षणों वाले होते हैं. इसलिए आधुनिक जैव रसायन (modern organic chemistry) से सम्बंधित अध्ययन में NMR एक अत्यंत सटीक विधा है जिससे एक अणु वाले जैव यौगिकों की पहचान संभव हो जाती है.

Prelims Vishesh

“Top 100 City Destination” ranking :-

  • 2018 में हुए अंतर्राष्ट्रीय आगमनों के आधार पर शीर्षस्थ 100 नगरों में अनुसंधान करके यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल नामक इंग्लैंड की कम्पनी ने एक रैंकिंग प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है जिसके अनुसार भारत यात्रा गंतव्य के रूप में मजबूती से उभर रहा है क्योंकि 100 शीर्षस्थ लोकप्रिय नगरों में सात नगर भारत में ही हैं.
  • दिल्ली को 2019 में आठवां स्थान मिलेगा ऐसी भविष्यवाणी हो रही है.
  • वैश्विक स्तर पर इस वर्ष भी होंग-कोंग पहले स्थान पर है जबकि वहाँ राजनीतिक अस्थिरता चल रही है.
  • महाद्वीपों की दृष्टि से अंतर्राष्ट्रीय यात्राएँ सबसे तेजी से एशिया में ही बढ़ी हैं.

Pacific Air Chiefs Symposium 2019 (PACS 2019) :-

  • हवाई के पर्ल हार्बर-हिकेम संयुक्त अड्डे (Joint Base Pearl Harbor-Hickam in Hawaii) पर प्रशांत क्षेत्र के वायु सेना अध्यक्षों का सिम्पोजियम चल रहा है जिसकी थीम है क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण/ A Collaborative Approach to Regional Security.
  • इस सिम्पोजियम में भारत के अतिरिक्त 20 देशों के वायु सेना प्रमुख प्रतिभागिता कर रहे हैं.

Meteor missiles:

  • पिछले दिनों भारत ने फ़्रांस से अनुरोध किया कि वह मिटियर (Meteor) नामक हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति शीघ्र करे.
  • ज्ञातव्य है कि ये मिसाइलें नंगी आँखों से नहीं दिखती हैं और 150 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद देती हैं.

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