Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 August 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 05 August 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Nagara Architecture Of Ayodhya’s Magnificent Ram Mandir

संदर्भ

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण मंदिर वास्तुकला की नागर शैली के अनुसार किया जायेगा. मंदिर वास्तुकला की नागर शैली उत्तर भारत में पाई जाती है.

nagar shaili ayodhya mandir

नागर शैली

  • इस शैली के सबसे पुराने उदाहरण गुप्तकालीन मंदिरों में, विशेषकर, देवगढ़ के दशावतार मंदिर और भितरगाँव के ईंट-निर्मित मंदिर में मिलते हैं.
  • नागर शैली की दो बड़ी विशेषताएँ हैं – इसकी विशिष्ट योजना और विमान.
  • इसकी मुख्य भूमि आयताकार होती है जिसमें बीच के दोनों ओर क्रमिक विमान होते हैं जिनके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है. यदि दोनों पार्श्वों में एक-एक विमान होता है तो वह त्रिरथ कहलाता है. दो-दो विमानों वाले मध्य भाग को सप्तरथ और चार-चार विमानों वाले भाग को नवरथ कहते हैं. ये विमान मध्य भाग्य से लेकर के मंदिर के अंतिम ऊँचाई तक बनाए जाते हैं.
  • मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है.
  • नागर मंदिर के शिखर को रेखा शिखर भी कहते हैं.
  • नागर शैली के मंदिर में दो भवन होते हैं – एक गर्भगृह और दूसरा मंडप. गर्भगृह ऊँचा होता है और मंडप छोटा होता है.
  • गर्भगृह के ऊपर एक घंटाकार संरचना होती है जिससे मंदिर की ऊँचाई बढ़ जाती है.
  • नागर शैली के मंदिरों में चार कक्ष होते हैं – गर्भगृह, जगमोहन, नाट्यमंदिर और भोगमंदिर.
  • प्रारम्भिक नागर शैली के मंदिरों में स्तम्भ नहीं होते थे.
  • 8वीं शताब्दी आते-आते नागर शैली में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नए लक्षण भी प्रकट हुए. बनावट में कहीं-कहीं विविधता आई. जैसा कि हम जानते हैं कि इस शैली का विस्तार उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बीजापुर तक और पश्चिम में पंजाब से लेकर पूरब में बंगाल तक था. इसलिए स्थानीय विविधता का आना अनपेक्षित नहीं था, फिर भी तिकोनी आधार भूमि और नीचे से ऊपर घटता हुआशिखर का आकार सर्वत्र एक जैसा रहा.
  • बोधगया का मंदिर और भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

विभिन्न शैलियों के बारे में यहाँ पढ़ें – नागर, द्रविड़ और वेसर

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

भारत की दो मुख्य मंदिर वास्तुकला शैलियों के बीच महत्त्वपूर्ण अंतर और समानता पर प्रकाश डालें.

Bring out the important differences and common points between two main temple architecture styles in India.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Related to Health Issues. 

Topic : World Breastfeeding Week

संदर्भ

कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान हाल ही में विश्व स्तनपान सप्ताह अगस्त माह के पहले सप्ताह 1 अगस्त से लेकर 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है.

विश्व स्तनपान सप्ताह- 2020 की थीम है – ‘स्वस्थ ग्रह के लिए स्तनपान का समर्थन’ (Support breastfeeding for a healthier planet) है. इस बार के समारोह में स्तनपान की सुरक्षा, प्रोत्साहन और समर्थन पर बल दिया जा रहा है.

स्तनपान से जुड़े महत्त्वपूर्ण बिन्दु

  • बच्चे के लिए मां का दूध बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है जिससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
  • इस आयोजन का लक्ष्य जीवन के पहले 6 महीनों के भीतर बच्चे को स्तनपान कराने को बढ़ावा देना है क्योंकि इस समय स्तनपान कराने से बच्चे के स्वास्थ्य को बड़ा लाभ होता है. स्तनपान से बच्चों को कई महत्त्वपूर्ण पोषक तत्त्व मिलते हैं, निमोनिया जैसे मारक रोगों से सुरक्षा मिलती है और उसका सम्यक विकास भी होता है.

विश्व स्तनपान सप्ताह

  • अगस्त 1 से 7 तक प्रत्येक वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है जिसका आयोजन विश्व स्तनपान कार्रवाई गठबंधन (World Alliance for Breastfeeding Action – WABA), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF द्वारा किया जाता है.
  • इस आयोजन का लक्ष्य जीवन के पहले 6 महीनों के अन्दर बच्चे को स्तनपान कराने को बढ़ावा देना है क्योंकि इस समय स्तनपान कराने से बच्चे के स्वास्थ्य को बड़ा लाभ होता है. स्तनपान से बच्चों को कई महत्त्वपूर्ण पोषक तत्त्व मिलते हैं, निमोनिया जैसे मारक रोगों से सुरक्षा मिलती है और उसका सम्यक विकास भी होता है.

स्तनपान को शीघ्र चालू करने विषयक UNICEF प्रतिवेदन

  • नवजात बच्चों को मां के दूध की उपलब्धता को लेकरयूनिसेफ की एक प्रतिवेदन में चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. इस प्रतिवेदन के अनुसार, विश्व के लगभग 77 करोड़ नवजात या हर दो में से एक शिशु को मां का दूध पहले घंटे में नहीं मिल पाता है. यह आंकड़ा शिशु मृत्यु दर के लिए बेहद अहम है.
  • यूनिसेफ के मुताबिक दो से 23 घंटे तक मां का दूध न मिलने से बच्चे के जन्म से 28 दिनों के भीतर मृत्यु दर का यह आंकड़ा 40% होता है, जबकि 24 घंटे के बाद भी दूध न मिलने से मृत्यु दर का यही आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत तक हो जाता है.
  • यूनिसेफ के मुताबिक अगर जन्म से छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराया जाए तो लगभग आठ लाख शिशुओं को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता है. यह शोध पिछले 15 वर्षों के अध्ययन के आधार पर तय की गई है. भारत में वर्ष 2000 में 16% ऐसे शिशु थे जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाया था. वर्ष 2015 में यह आंकड़ा बढ़कर 45% तक हो गया है.
  • UNICEF और WHO ने 2018 में विश्व-भर के देशों में स्तनपान को शीघ्र चालू करने के विषयक एक प्रतिवेदन निर्गत किया था. इस प्रतिवेदन में 76 देशों से प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण किया गया. इस प्रतिवेदन में श्रीलंका को पहले स्थान पर रखा गया. भारत का इस सूची में 56वाँ स्थान है. कज़ाकिस्तान, रवांडा, भूटान और उरुग्वे भारत से बेहतर स्थिति में हैं. इस सूची में सबसे अंत में आने वाले देश थे – अज़रबैजान, पाकिस्तान और मोंटेनेग्रो प्रतिवेदन से एक बात उभर कर आई है कि पूरे विश्व में जन्मने वाले पाँच शिशुओं से मात्र दो ही पहले घंटे में स्तनपान कर पाते हैं.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

MAA कार्यक्रम

स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आरम्भ किया है जिसका नाम MAA अर्थात् Mother’s Absolute Affection रखा गया है.

इस कार्यक्रम के मुख्य तत्त्व निम्नलिखित हैं –

  1. स्तनपान के विषय में जागरूकता उत्पन्न करना
  2. स्तनपान को प्रोत्साहित करना
  3. सामुदायिक स्तर पर परामर्श देना
  4. स्वास्थ्य सुविधा की निगरानी करना
  5. स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने वालों को पुरस्कृत करना

इस कार्यक्रम के तहत ASHA कर्मियों को गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं तक पहुँचने और उन्हें स्तनपान के सही तरीकों और लाभों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रेरित किया जाता है.

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

स्तनपान के अनेक लाभों के विषय में महिलाओं को कैसे जागरूक किया जा सकता है? इसके लिए उपाय सुझाएँ.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : EWS Reservation

संदर्भ

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 103वें संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को पाँच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ को हस्तांतरित करने का निर्णय किया है.

इस संविधान संशोधन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है.

EWS आरक्षण

  • जनवरी 2019 में संसद ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण देने के लिए 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित करके संविधान में 103वां संशोधन किया था.
  • आरक्षण देने का उद्देश्य केंद्र और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र, सरकारी नौकरियों, चुनाव और कल्याणकारी योजनाओं में हर वर्ग की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है ताकि समाज के हर वर्ग को आगे आने का अवसर मिले.
  • इस संविधान संशोधन के जरिये संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में में संशोधन किया गया था.
  • जिसके बाद सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10% का आरक्षण कानून बन सका.
  • जिसके अनुसार अनुच्छेद 15(6) और अनुच्छेद 16(6) को सम्मिलित करके राज्य को किसी भी आर्थिक रूप से कमजोर नागरिक की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने में सक्षम बनाया गया है.

EWS आरक्षण के लिए योग्यता

  • इस आरक्षण का लाभ उन लोगो को ही मिलेगा जिनके परिवार की सालाना आय आठ लाख रुपए से कम हो.
  • साथ ही उनकी कृषि योग्य ज़मीन भी पाँच एकड़ से कम होनी चाहिए.
  • इसके अलावा आरक्षण का लाभ सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनका मकान एक हजार वर्ग फीट से कम में बना हो.
  • यदि मकान अधिसूचित नगरपालिका में है तो 100 गज़ और गैर अधिसूचित नगरपालिका वाले इलाके में है तो 200 गज़ से कम होना चाहिए.
  • इन सभी नियमों के दायरे में आने वाले सामान्य वर्ग के लोगों को ही ये आरक्षण मिल सकेगा.
  • ये आरक्षण केंद्र और राज्य दोनों तरह की सरकारी नौकरियों पर लागू होगा. राज्यों को ये अधिकार होगा कि वे इस आरक्षण के लिए अपना अलग आर्थिक मानदंड तय कर सकते हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Lebanon

संदर्भ

अभी पिछले दिनों लेबनान की राजधानी और वहाँ के सबसे बड़े नगर बेरुत में असुरक्षित ढंग से रखे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में विस्फोट हो गया जिसके कारण बेरुत के बंदरगाही क्षेत्र में भयानक विनाश देखने को मिला.

ज्ञातव्य है कि यह नगर भूमध्यसागर के तट पर एक प्रायद्वीप के बीचो-बीच स्थित और यह देश का एक बड़ा क्षेत्रीय बंदरगाह है.

बेरूत के धमाके ने पहले से ही आर्थिक संकट एवं गृहयुद्ध झेल से परेशान लेबनान को सदमे में डाल दिया है. इसी अप्रैल में लेबनान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि वह अंतरराष्ट्रीय कर्ज चुकाने में चूक गया. वहीं दूसरी ओर धमाके के ठीक पहले सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच ऊर्जा मंत्रालय के बाहर हाथापाई हुई थी.

लेबनान के बारे में

  • लेबनान पश्चिम एशिया में स्थित एक देश है जिसे रिपब्लिक ऑफ लेबनान भी कहते हैं.
  • इसकी राजधानी बेरूत है और यहाँ की कुल आबादी लगभग 68.6 लाख है, जिसमें से 54% मुस्लिम और 41% ईसाई हैं.
  • इसकी पूर्वी और उत्तरी सीमा सीरिया से लगती है, जबकि इसकी दक्षिणी सीमा में इज़राइल है.
  • इसके पश्चिम में भूमध्य सागर स्थित है.

अमोनियम नाइट्रेट

  • अपने शुद्ध रूप में, अमोनियम नाइट्रेट (NH4NO3) एक सफेद, क्रिस्टलीय रसायन है जो पानी में घुलनशील है.
  • यह खनन और निर्माण में प्रयुक्त वाणिज्यिक विस्फोटकों के निर्माण उपयोग होने वाला मुख्य घटक है.
  • इसका उपयोग कृषि उर्वरकों और अन्य नाइट्रोजन समृद्ध यौगिक के लिए किया जाता है.
  • भारत में, विस्फोटक अधिनियम, 1884 के अंतर्गत अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012, ऐसे किसी भी मिश्रण या यौगिक, जिसमें में 45 प्रतिशत से अधिक अमोनियम नाइट्रेट शामिल है को अमोनियम नाइट्रेट (NH4NO3) यौगिक के रूप में परिभाषित करता है.
  • चूंकि इसका उपयोग औद्योगिक विस्फोटकों, संवेदनाहारी गैसों, उर्वरकों, कोल्ड पैक के उत्पादन के लिए एक घटक के रूप में किया जाता है और इसके दुरुपयोग की प्रबल संभावना है, इसलिए भारत में अमोनियम नाइट्रेट अत्यधिक विनियमित है.
  • अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के अंतर्गत अमोनियम नाइट्रेट की बिक्री या उपयोग के लिए निर्माण, रूपांतरण, आयात, निर्यात, परिवहन, भंडारण आदि सभी को विनियमित किया जाता है.
  • अमोनियम नाइट्रेट के निर्माण के लिए, औद्योगिक विकास और विनियमन अधिनियम, 1951 के अंतर्गत एक औद्योगिक लाइसेंस आवश्यक है. साथ ही अमोनियम नाइट्रेट से संबंधित किसी भी गतिविधि के लिए अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के अंतर्गत भी एक लाइसेंस जरूरी है.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

भारत में हाल ही में  गैस रिसाव की दो बड़ी घटनाएँ घटी हैं. उनका उल्लेख करते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएँ.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Disaster and disaster management.

Topic : 10-point agenda for disaster risk reduction and Sendai Framework

संदर्भ

हाल ही में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संयुक्त रूप से ‘जल-मौसम संबंधी खतरों के जोखिम को कम करना’ (Hydro-Meteorological Hazard Risk Reduction) विषय पर वेबिनार श्रृंखला का आयोजन किया.

इस वेबिनार श्रृंखला में आपदा जोखिम को कम करने तथा प्रभावित समुदायों और परिवेश की सहनशीलता को बढ़ने के लिए प्रधान मंत्री के 10-सूत्रीय एजेंडा एवं SENDAI आपदा जोखिम कमी फ्रेमवर्क को लागू किये जाने पर चर्चा हुई.

वेबिनार शृंखला से जुड़े महत्त्वपूर्ण बिन्दु

  • वेबिनार श्रृंखला में चार विषयों पर वेबिनार आयोजित किये गए – तूफ़ान और आकाशीय बिजली, बादल का फटना और बाढ़, चक्रवात और तूफ़ान का बढ़ना तथा जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम घटनाएं.
  • जल-मौसम संबंधी जोखिमों की बेहतर समझ और प्रभावी सहयोगात्मक कार्रवाइयों के सम्बन्ध में मानवीय क्षमता बढाने पर भी विचार-विमर्श हुआ.
  • आपदा जोखिम को कम करने तथा प्रभावित समुदायों और परिवेश की सहनशीलता को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10-सूत्रीय एजेंडा एवं सेनडाई आपदा जोखिम कमी को लागू किये जाने पर चर्चा हुई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 10-सूत्रीय एजेंडा क्या है?

आपदा जोखिम के न्यूनीकरण हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में 10-सूत्रीय एजेंडा दिया था . पीएम मोदी ने यह एजेंडा सन 2016 में नई दिल्ली में आपदा जोखिम के न्यूनीकरण विषय पर आयोजित ‘एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन’ में सेंडाई फ्रेमवर्क को भारत में लागू करने के लिए दिया था , जो निम्नलिखित है-

  • पहला, सभी विकास क्षेत्रों को आपदा जोखिम प्रबंधन के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए.
  • दूसरा, छोटे से छोटे स्तर से लेकर बडे स्तर तक आपदा जोखिम को कम करने हेतु बीमा की पहुंच बढ़ाना. इसके लिए गरीब परिवारों से लेकर छोटे और मध्यम उपक्रमों, बहुराष्ट्रीय निगमों और राष्ट्र राज्यों आदि सभी को जोखिम कवरेज हेतु काम करना चाहिए.
  • तीसरा, आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं की अधिक भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहित करना चाहिए ; क्योंकि वे किसी आपदा में सबसे ज्यादा शिकार होती हैं तथा उनके पास अनूठी ताकत और अंतर्दृष्टि होती है. पुनर्निर्माण को समर्थन देने वाली महिला इंजीनियरों, राजमिस्त्रियों और भवन-निर्माण कारीगरों और आजीविका बहाली के लिए महिला स्व-सहायता समूहों की जरूरत है.
  • चौथा, विश्व स्तर पर आपदा जोखिम मानचित्रण में निवेश होना चाहिए, यथा -भूकंप जैसी आपदा के खतरों का मानचित्रण किया जाए .
  • पाँचवाँ, आपदा के जोखिम में कमी की जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन को बढ़ावा देने और सतत विकास में एक अहम भूमिका है.
  • छठा, आपदा मुद्दों पर काम करने के लिए विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क विकसित करना चाहिए.
  • सातवाँ, वैश्विक स्तर पर जोखिम आकलन, आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की प्रभाव-क्षमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और सोशल मीडिया तथा मोबाइल प्रौद्योगिकी से मिले अवसरों के उपयोग पर जोर दिया जाना चाहिए.
  • आठवां, स्थानीय क्षमता और पहल पर निर्माण पर ज़ोर दिया जाना चाहिए .
  • नौवां, यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाए कि एक आपदा से सीखने का अवसर बर्बाद नहीं होना चाहिए.
  • दसवां , आपदाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में अधिक सामंजस्य लाया जाना चाहिए.

SENDAI FRAMEWORK क्या है?

Sendai Framework का full form “Sendai Framework for Disaster Risk Reduction 2015-2030” है. यह फ्रेमवर्क आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के विषय में आयोजित तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मलेन के दौरान अंगीकृत किया गया था. यह सम्मेलन मार्च, 2015 में जापान के सेंडई नगर में आयोजित हुआ था.

SENDAI FRAMEWORK के मुख्य तत्त्व

  • 2015 के बाद के विकास से सम्बंधित एजेंडा का यह सबसे बड़ा समझौता है.
  • इसमें 7 लक्ष्य और 4 प्राथमिकताएँ तय की गई थीं.
  • 2015 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मलेन के पश्चात् संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने इसकी पुष्टि की थी.
  • Sendai फ्रेमवर्क 15 वर्ष के लिए है.
  • यह एक ऐसा स्वैच्छिक और अबाध्यकारी समझौता है जिसमें यह माना गया है कि आपदा जोखिम को घटाने में देश की सबसे बड़ी भूमिका होती है परन्तु इस जिम्मेवारी के निर्वहण में अन्य हितधारकों (स्थानीय सरकार सहित), निजी क्षेत्र आदि को भी सहयोग करना चाहिए.

कार्यान्वयन

सेन्डाई फ्रेमवर्क का मूल्य कार्य ऐसे समेकित और समावेशी संस्थागत उपाय करना है जिससे आपदा-प्रवणता को रोका जा सके और आपदा घट जाने पर उसके लिए तैयारी को सुदृढ़ता प्रदान किया जा सके. साथ ही, इसका उद्देश्य आपदा के पश्चात् स्थिति को सामान्य बनाना भी है.

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

प्राकृतिक आपदाओं के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जनसाधारण को किस प्रकार जागरूक किया जा सकता है? इस दिशा में सरकार द्वारा उठाये गये क़दमों की संक्षिप्त चर्चा करें.  


Prelims Vishesh

Parivar Pehchan Patra :-

  • विभिन्न केन्द्रीय एवं राज्य सरकार की योजनाओं के लाभ को घर-घर तक पहुँचाने के लिए हरियाणा सरकार परिवार पहचान पत्र बनवाने जा रही है जिसे परिवार पहचान पत्र (PPP) कहा जा रहा है.
  • इस पहचान पत्र में पूरे परिवार की पहचान अंकित होगी. इसके सबसे ऊपर परिवार के मुखिया का नाम होगा. जब कोई बच्चा जन्म लेगा तो उसका नाम इसमें जोड़ दिया जाएगा. यदि लड़की की शादी हो जायेगी तो उसका नाम उसके ससुराल वालों के परिवार पहचान पत्र में अंकित कर दिया जाएगा.

What is MyGov? :-

  • 2014 में आरम्भ किये गये भारत सरकार के MyGov नामक मंच से जुड़ कर 12 राज्यों ने अपना-अपना MyGov मंच खोल लिया है. पिछले दिनों गोवा भी इससे जुड़ गया.
  • ज्ञातव्य है कि MyGov का उद्देश्य लोकशासन एवं नीति निर्माण में देशवासियों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है.
  • इस मंच के माध्यम से सर्वसाधारण कई प्रकार से अपनी भागीदारी निभा सकता है, जैसे – विमर्श, दिए गये कार्य, नवाचार, मतगणना, सर्वेक्षण, ब्लॉग आदि.

Pokkali variety of rice :-

  • नमकीन पानी में भी पनपने वाला पोक्क्लि चावल केरल के समुद्र तटीय जिलों में बहुत कर के उगाया जाता है.
  • इसका स्वाद कुछ अलग होता है और इसमें प्रोटीन अच्छी मात्रा में होती है. इसके अनूठेपन के कारण इसको भौगोलिक संकेतक टैग (GI tag) मिला हुआ है और इसको लेकर शोध होते रहते हैं.

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