Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 November 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 04 November 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : SCOJTEX 2019

संदर्भ

शहरी भूकम्प अनुसंधान एवं बचाव से सम्बंधित शंघाई सहयोग संगठन का नवीनतम संयुक्त अभ्यास भारत में सम्पन्न हो रहा है.

मुख्य तथ्य

  • यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) आयोजित कर रहा है.
  • इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रतिक्रिया तंत्र का पूर्वाभ्यास करना तथा जानकारी, अनुभव और तकनीक साझा करना और साथ ही पारस्परिक समन्वय स्थापित करना है.
  • शंघाई सहयोग संगठन के ये सभी आठ देश इस अभ्यास में प्रतिभागी हैं – भारत, चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान.
  • इस संयुक्त अभ्यास में मुख्यतः क्षेत्र की सरकारों द्वारा किसी आपदा की प्रतिक्रिया के लिए की गई तैयारी का और आपसी सहयोग का परीक्षण किया जाएगा.

SCO क्या है?

  • शंघाई सहयोग संगठन एक राजनैतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग संगठन है जिसकी शुरुआत चीन और रूस के नेतृत्व में यूरेशियाई देशों ने की थी. दरअसल इसकी शुरुआत चीन के अतिरिक्त उन चार देशों से हुई थी जिनकी सीमाएँ चीन से मिलती थीं अर्थात् रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान. इसलिए इस संघठन का प्राथमिक उद्देश्य था कि चीन के अपने इन पड़ोसी देशों के साथ चल रहे सीमा-विवाद का हल निकालना. इन्होंने अप्रैल 1996 में शंघाई में एक बैठक की. इस बैठक में ये सभी देश एक-दूसरे के बीच नस्ली और धार्मिक तनावों को दूर करने के लिए आपस में सहयोग करने पर राजी हुए. इस सम्मेलन कोशंघाई कहा गया.
  • इसके बाद 2001 में शंघाई 5 में उज्बेकिस्तान भी शामिल हो गया. 15 जून 2001 को शंघाई सहयोग संगठन की औपचारिक स्थापना हुई.

शंघाई सहयोग संगठन के मुख्य उद्देश्य

शंघाई सहयोग संगठन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

  1. सदस्यों के बीच राजनैतिक, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाना.
  2. तकनीकी और विज्ञान क्षेत्र, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्र, ऊर्जा, यातायात और पर्यटन के क्षेत्र में आपसी सहयोग करना.
  3. पर्यावरण का संरक्षण करना.
  4. मध्य एशिया में सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक-दूसरे को सहयोग करना.
  5. आंतकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर सुरक्षा के खतरों से निपटना.
  6. जबकि चार देश इसके पर्यवेक्षक (observer countries) हैं – अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया.
  7. इसके अलावा SCO में छह देश डायलॉग पार्टनर (dialogue partners) हैं – अजरबैजान, आर्मेनिया, कम्बोडिया, नेपाल, तुर्की और श्रीलंका.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP)

संदर्भ

पिछले दिनों थाईलैंड में सम्पन्न क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) शिखर सम्मेलन में भारत ने यह निर्णय लिया कि वह RCEP व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा क्योंकि ऐसा करने से भारत के घरेलू कृषि एवं उद्योग प्रक्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

RCEP से सम्बंधित कुछ तथ्य

  • RCEP आसियान के दस सदस्य देशों (ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) तथा आसियान से सम्बद्ध अन्य छ: देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड) के लिए प्रस्तावित है.
  • RCEP के लिए वार्ताएँ कम्बोडिया में नवम्बर 2012 में आयोजित आसियान के शिखर सम्मलेन में औपचारिक रूप आरम्भ की गई थीं.
  • RCEP का लक्ष्य है अधिकांश शुल्कों और गैर-शुल्क अड़चनों को समाप्त कर वस्तु-व्यापार को बढ़ावा देना. अनुमान है कि ऐसा करने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युक्त उत्पादनों के अधिक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे. इसका एक उद्देश्य निवेश से सम्बंधित मानदंडों को उदार बनाना तथा सेवा व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी है.
  • हस्ताक्षरित हो जाने पर RCEP विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क व्यापार हो जायेगा. विदित हो कि इस सम्बद्ध 16 देशों की GDP $50 trillion की है और इन देशों में साढ़े तीन अरब लोग निवास करते हैं.
  • भारत की GDP-PPP $9.5 trillion की है और जनसंख्या एक अरब तीस लाख है. दूसरी ओर चीन की GDP-PPP $23.2 trillion की है और जनसंख्या एक अरब 40 लाख है.

RCEP को लेकर भारत की चिंताएँ

यद्यपि RCEP पर सहमति देने के लिए भारत पर बहुत दबाव पड़ता रहा था, परन्तु अभी तक भारत इससे बच रहा है. इसके कारण निम्नलिखित हैं –

  • ASEAN आयात शुल्कों को समाप्त करना चाह रहा है जो भारत के लिए लाभप्रद नहीं होगा क्योंकि इसका एक सीधा अर्थ होगा की चीनी माल बिना शुल्क के भारत में आने लगेंगे. यहाँ के उद्योग को डर है कि ऐसा करने से घरेलू बाजार में गिरावट आएगी क्योंकि चीनी माल अधिक सस्ते पड़ेंगे.
  • भारत का यह भी जोर रहा है कि RCEP समझौते में सेवाओं, जैसे – पेशेवरों को आने-जाने के लिए दी जाने वाली कामकाजी VISA, को भी उचित स्थान दिया जाए. अभी तक सेवाओं से सम्बंधित प्रस्ताव निराशाजनक ही रहे हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई भी सदस्य देश सार्थक योगदान करने के लिए तैयार नहीं होगा.

RCEP का वर्तमान स्वरूप भारत के लिए हानिकारक क्यों?

  1. भारत में चालू खाता घाटा (current account deficit – CAD) GDP के 8% तक पहुँच गया है. इस स्थिति में यदि RCEP का समझौता अपने वर्तमान स्वरूप में रह जाता है तो इसका अर्थ यह होगा कि भारत को अपने राजस्व के अच्छे-खासे भाग से हाथ धोना पड़ेगा.
  2. वर्तमान RCEP चीनी माल की भारत में पहुँच बढ़ा देगा जिस कारण देश के निर्माण प्रक्षेत्र को आघात पहुंचेगा. स्मरणीय है कि 2017-18 में चीन के साथ व्यवसाय में भारत को 63 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा झेलना पड़ा था.
  3. आसियान के साथ भी भारत की यही दशा है अर्थात् हम जितना निर्यात करते हैं, उससे अधिक आयात करते हैं. ऐसा इसलिए होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था सेवा प्रधान है.
  4. RCEP से सम्बद्ध देश कई उत्पादों पर सीमा पार शुल्क घटाने की माँग करते हैं और भारतीय बाजार में ज्यादा पहुँच बनाना चाहते हैं जिसके लिए भारत तैयार नहीं है.
  5. भारत अन्य जगहों पर भी मोर्चा हारता हुआ दिख रहा है. ये हैं – सिंगापुर का वित्तीय एवं तकनीकी हब, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के कृषि और दूध उत्पाद, दक्षिण-पूर्व एशिया देशों के प्लांटेशन और चीन और अमेरिका के साथ दवा-व्यापार.
  6. विश्व व्यापार संगठन में भारत डिजिटल व्यापार पर चर्चा नहीं होने देता. पर उसका पक्ष कमजोर है क्योंकि ई-कॉमर्स चर्चा का एक अंग है.
  7. यदि निवेशों का आना-जाना मुक्त कर दिया जाया तो इसका लाभ बहुत कम भारतीय उठा पायेंगे और दूसरी ओर अमेरिका, सिंगापुर, जापान और चीन के निवेशकों को बहुत लाभ पहुँच सकता है.
  8. भारत की चिंता है कि RCEP ऐसे समझौतों का रास्ता खोल सकता है जिनसे TRIPS समझौते के संदर्भ में भारत को हानि पहुँच सकती है. इसका फल यह होगा कि कृषि बीज और दवा निर्माण के मामले में विश्व के बड़े-बड़े प्रतिष्ठान बाजी मार जाएँगे.
  9. इस समझौते में 2014 को टैरिफ घटाने के लिए आधार वर्ष रखा जा रहा है जो भारत के हितों के प्रतिकूल प्रतीत होता है.
  10. RCEP समझौता भारत के Make in India पहल के लिए हानिकारक समझा जा रहा है.

इसमें चीन की इतनी रूचि क्यों हैं?

चीन वस्तु-निर्यात के मामले में विश्व का अग्रणी देश है. इस बात का लाभ उठाते हुए वह चुपचाप अधिकांश व्यापारिक वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की चेष्टा में लगा रहता है और इसके लिए कई देशों पर दबाव बनाता रहता है. उसका बस चले तो व्यापार की 92% वस्तुओं पर से शुल्क समाप्त ही हो जाए. इसलिए चीन RCEP वार्ता-प्रक्रिया में तेजी लाने से और शीघ्र से शीघ्र समझौते को साकार रूप देने में लगा हुआ है.

RCEP के माध्यम से मुक्त एशिया-प्रशांत व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Asia-Pacific – FTAAP) स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें 21 देश होंगे. इन देशों में एशिया-प्रशांत देशों के अतिरिक्त अमेरिका और चीन भी हैं, किन्तु भारत नहीं है.

ज्ञातव्य है कि FTAAP की एक अन्य योजना Trans Pacific Partnership से अमेरिका हट गया है. इससे चीन के लिए अपनी पहल को आगे बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त हो गया है.


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders.

Topic : Skills Build Platform

संदर्भ

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्त्वाधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने IBM के सहकार से कौशल निर्माण मंच (Skills Build Platform) कार्यक्रम का आरम्भ किया है.

मुख्य तथ्य

  • इस कार्यक्रम के अंदर सूचना प्रौद्योगिकी, नेटवर्क निर्माण और क्लाउड कम्प्यूटिंग का एक द्विवर्षीय उन्नत डिप्लोमा कार्यक्रम होगा जिसको देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITIs) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTIs) अपने यहाँ चला सकेंगे. यह पाठ्यक्रम IBM ने रूपांकित किया है.
  • ITI और NSTI संस्थान कौशल निर्माण मंच का उपयोग आगे चलकर कृत्रिम बुद्धि से सम्बंधित कौशल विकास में भी करेंगे.

कार्यक्रम का महत्त्व

  • इस डिजिटल मंच के माध्यम से MyInnerGenius के द्वारा छात्रों की ज्ञानार्जन क्षमताओं और व्यक्तित्व के व्यक्तिगत मूल्यांकन की सुविधा होगी.
  • तत्पश्चात् छात्रों को डिजिटल तकनीकों के बारे में आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा. साथ ही वे रेज्यूमे लिखने, समस्या का समाधान करने और संचार करने जैसे व्यावसायिक कौशलों को भी सीख सकेंगे.
  • छात्रों को उन विशेष नौकरियों के लिए अनुशंसित भी किया जायेगा जिनमें तकनीकी और व्यावसायिक ज्ञान आवश्यक होता है.
  • IBM ने यह वैश्विक प्रतिबद्धता प्रकट की है कि वह नौकरी के लिए तैयार कार्यबल का सृजन करेगा और साथ ही नई कॉलर आजीविकाओं (new collar careers) के लिए अपेक्षित कौशल की नई पीढ़ी का निर्माण करेगा. यह कौशल निर्माण मंच उसके इसी वचनबद्धता का एक अंग है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Global Microscope on Financial Inclusion report

संदर्भ

अर्थशास्त्री आसूचना इकाई (Economist Intelligence Unit – EIU) ने वित्तीय समावेशन के विषय में 2019 का वैश्विक सूक्ष्म वीक्षण प्रतिवेदन प्रकाशित कर दिया है. इस प्रतिवेदन में लैंगिकता से सम्बंधित 11 नए संकेतकों का प्रयोग किया गया है.

प्रतिवेदन में भारत से सम्बंधित सूचनाएँ

  1. भारत उन शीर्षस्थ देशों में है जहाँ वित्तीय समावेशन के लिए सर्वाधिक अनुकूल परिवेश है क्योंकि यहाँ गैर-बैंकिंग संस्थानों को ई-धन निर्गत करने की छूट है तथा साथ ही उपभोक्ता संरक्षण पर पर्याप्त बल दिया गया है.
  2. वैसे वित्तीय समावेशन का परिवेश पूरे विश्व में सुधर रहा है, परन्तु भारत, कोलंबिया, पेरू, उरुग्वे और मैक्सिको ऐसे चुने हुए देश हैं जहाँ इसके लिए सबसे अनुकूल स्थिति है.
  3. भारत उन शीर्षस्थ देशों में है जहाँ ई-धन को जमा-बीमा अथवा संरक्षण के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की गई है.

प्रतिवेदन के बारे में

  • यह प्रतिवेदन The Economist Group का अनुसन्धान एवं विश्लेषण प्रभाग – इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) – तैयार करता है.
  • EIU 1946 में बना था और आज यह वैश्विक व्यवसाय आसूचना के मामले में विश्व की अग्रणी संस्था है.
  • इसने 2007 में पहला सूक्ष्म वीक्षण प्रतिवेदन तैयार किया था जो मात्र लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र के लिए था. 2009 से इस प्रतिवेदन में संसार के 55 देशों को शामिल किया गया.
  • यह प्रतिवेदन वित्तीय समावेशन के परिवेश का आकलन निम्नांकित मानदंडों पर करता है –
  1. सरकारी एवं नीतिगत समर्थन
  2. उत्पाद एवं विक्रयस्थल
  3. स्थायित्व एवं एकात्मता
  4. उपभोक्ता संरक्षण
  5. अवसंरचना

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Disaster and disaster management.

Topic : ‘Red Atlas Action Plan Map’ atlas and CFLOWS-Chennai

संदर्भ

उपराष्ट्रपति ने पिछले दिनों चेन्नई में बाढ़ को कम करने के लिए रेड एटलस एक्शन प्लान मैप नामक एटलस और CFLOWS-चेन्नई नामक तटीय बाढ़ चेतावनी प्रणाली ऐप का अनावरण किया.

रेड एटलस एक्शन प्लान मैप क्या है?

  • यह एक त्वरित आकलन मानचित्र है जिसे ने तैयार किया है.
  • इसका उद्देश्य 2015 में बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त होने वाले नगर चेन्नई को बाढ़ से कुशलतापूर्वक निपटने में समर्थ बनाना था.
  • इस एटलस में बाढ़ के संकट को कम करने और इसके लिए पहले से तैयार रहने के विषय में जानकारियाँ देने के साथ-साथ आपदा प्रतिरोध के संचालन और प्रबंधन के पहलुओं का भी समावेश किया गया है.
  • यह एटलस बताता है कि कब-कब कैसा वृष्टिपात होगा और बाढ़ से कौन-कौन निगम वार्ड दुष्प्रभावित होंगे तथा कहाँ-कहाँ से लोगों को खाली कराना आवश्यक होगा.

CFLOWS-चेन्नई क्या है?

  • CFLOWS-चेन्नई (Coastal Flood Warning System app for Chennai) भारत का पहला समुद्र-तटीय बाढ़ की चेतावनी देने वाला ऐप है जिसे राष्ट्रीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Ocean Technology – NIOT) ने बनाया है.
  • यह ऐप समेकित भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर आधारित है और यह बाढ़ आने के 10 दिन पहले ही पूर्वानुमान दे देता है.
  • इस ऐप में मौसम विज्ञान से सम्बंधित जो सूचनाएँ एकत्र हैं वे इन स्रोतों से आती हैं – भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) तथा भारतीय राष्ट्रीय समुद्री सूचना सेवा केंद्र (INCOIS).

Prelims Vishesh

India and Bangladesh using the Indo Bangladesh Protocol (IBP) routes :-

  • राष्ट्रीय जलमार्ग 1 पर यातायात पिछले दो वर्षों में बढ़ गया. 2017-18 में इस मार्ग से 5.48 मिलियन टन माल ढुलाई हुई थी जो 2018-19 में 6.79 मिलियन टन हो गई.
  • इस 6.79 मिलियन टन के अन्दर 3.15 मिलियन टन का यातायात भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्गों (IBP route) से होकर हुआ.
  • ज्ञातव्य है कि IBP मार्ग कलकत्ता (NW 1) से सीलघाट (NW 2) होते हुए करीमगंज (NW 16) तक जाता है.

Dustlik 2019 :-

  • उज्बेकिस्तान के ताशकंद में पहला भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास हो रहा है जिसका मुख्य ध्यान आतंकवाद के निरोध पर है.
  • इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देश की सेनाएँ अपने यहाँ प्रचलित उत्कृष्ट प्रथाओं और अनुभवों को साझा करेंगी.

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