Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 June 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 04 June 2019


GS Paper  2 Source: Indian Express

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Topic : Can an individual simultaneously be a member of both Houses of Parliament?

संदर्भ

पिछले दिनों होने वाले चुनावों के परिणाम घोषित होने पर देखा गया कि कुछ लोग एक से अधिक चुनाव क्षेत्र से जीत गये और कुछ लोग ऐसे भी थे जो पहले से ही या तो राज्य सभा के सदस्य थे अथवा किसी राज्य की विधान मंडल के सदस्य थे. नियमानुसार, एक व्यक्ति एक से अधिक पद पर नहीं रह सकता है. अतः, जितने वाले सांसद को अपनी एक सीट खाली करनी ही पड़ेगी.

इस सम्बन्ध में कानूनी प्रक्रिया

  • संविधान की धारा 101 (1) तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 68 (1) में यह विधान है कि यदि कोई व्यक्ति एक साथ ही राज्यसभा और लोकसभा दोनों के लिए चुन लिया जाता है और उसने अभी तक किसी एक सदन में सीट ग्रहण नहीं किया है तो वह दस दिनों के अन्दर यह निर्णय करेगा कि वह किस सदन का सदस्य रहना चाहेगा.
  • जीता हुआ व्यक्ति किस सदन में रहना चाहेगा इसकी सूचना उसे 10 दिन की निर्धारित अवधि के भीतर-भीतर भारतीय निर्वाचन आयोग के सचिव को लिखित रूप में देनी होगी. अन्यथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 68 (2) के अनुसार उसकी राज्य सभा की सीट 10 दिन की अवधि पूरी होने पर खाली हो जायेगी. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार यदि कोई सदस्य अपनी पसंद बता देता है तो वह बाद में बदली नहीं जा सकती है.
  • यदि किसी ने किसी एक सदन का सदस्य रहते हुए दूसरे सदन की सीट जीती है तो उसके पास 10 दिनों के अन्दर अपनी पसंद बताने का विकल्प नहीं होगा. इसका अर्थ यह हुआ कि यदि राज्य सभा का कोई सदस्य लोकसभा चुनाव में जीत जाता है तो राज्य सभा की उसकी सीट उस तिथि से स्वतः खाली मान ली जायेगी जिस तिथि को उसे निर्वाचित घोषित किया गया है. यही बात उस लोक सभा के सदस्य पर लागू होगी जो राज्य सभा के लिए होने वाले चुनाव में जीतता है [जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग के 69 और 67A].

दो लोकसभा सीट पर निर्वाचित

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 33 (7) के अनुसार कोई व्यक्ति चाहे तो दो संसदीय चुनाव क्षेत्रों से लड़ सकता है. परन्तु यदि वह दोनों जगह जीत जाता है तो उसको परिणाम घोषित होने के 14 दिनों के भीतर एक सीट से त्यागपत्र देना होगा, नहीं तो उसकी दोनों सीटें खाली मान ली जाएँगी.  [Sec 70, RPA, 1951 read with Rule 91 of the Conduct of Elections Rules, 1961]

विधान सभा और लोक सभा

संविधान की धारा 101 (2) तथा एक साथ एकाधिक सदस्यता निषेध नियम, 1950 के नियम 2 के अनुसार यदि राज्य विधान मंडल का कोई सदस्य लोक सभा के लिए चुन लिया गया हो तो उसे अपनी एक सीट चुनाव परिणामों के राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से 14 दिनों के भीतर छोड़नी होगी. अन्यथा उसकी लोक सभा की सीट स्वतः खाली हो जायेगी.


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Cabinet committees

संदर्भ

पिछले दिनों भारत सरकार ने नए सिरे से आठ मुख्य कैबिनेट समितियाँ गठित कीं. ऐसा  Transaction of Business Rules के अंतर्गत किया गया है.

कैबिनेट समितियाँ क्या होती हैं?

कैबिनेट समितियाँ वे संगठन हैं जो कैबिनेट के कार्यभार को घटाने में सहायक होती हैं. इन समितियाँ के विषय में संविधान में उल्लेख नहीं है, परन्तु परम्परा में ये स्थाई रूप ले चुकी हैं.

कैबिनेट समितियों के प्रकार

स्थायी कैबिनेट समितियाँ :-  ये समितियाँ किसी विशेष कार्य के लिए बनाई गई स्थाई प्रकृति की समितियाँ होती हैं. इसके सदस्य कैबिनेट मंत्री होते हैं. इनमें कैबिनेट स्तर से भिन्न जो सदस्य होते हैं उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य (special invitees) कहा जाता है.

तदर्थ कैबिनेट समितियाँ :- ये समितियाँ तात्कालिक प्रकृति की होती हैं और इन्हें समय-समय पर आवश्यकतानुसार विशेष कार्यों के लिए गठित किया जाता है.

कैबिनेट समितियों की बनावट

किसी कैबिनेट समिति में तीन से लेकर आठ तक सदस्य हो सकते हैं. जो मंत्री कैबिनेट के अंग नहीं हैं उनको भी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. साधारणतः प्रत्येक कैबिनेट समिति में कम से कम एक कैबिनेट मंत्री अवश्य होता है. कैबिनेट समिति के सदस्य लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य हो सकते हैं.


GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Nandan Nilekani-led panel on digital payments

संदर्भ

नंदन निलेकनी की अध्यक्षता में गठित डिजिटल भुगतान से सम्बंधित पैनल ने अपने सुझाव समर्पित कर दिए हैं.

पृष्ठभूमि

भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस वर्ष के आरम्भ में आधार परियोजना के पुरोधा और इनफ़ोसिस के भूतपूर्व अध्यक्ष नंदन निलेकनी की अध्यक्षता में पाँच सदस्यों के एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन किया था. इस पैनल को कहा गया था कि वह सभी बड़े-बड़े हितधारकों से परामर्श कर एक व्यापक प्रतिवेदन सौंपे जिसमें डिजिटल भुगतान उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए सुझाव दिए जाएँ. विदित हो कि विगत पाँच वर्षों में इस उद्योग में दस गुनी वृद्धि हुई है.

मुख्य सुझाव

  • लक्ष्य : पैनल ने सुझाव दिया है कि सरकार और नियामक संस्थाएँ अगले तीन वर्ष में डिजिटल भुगतान को 10 गुना करने का प्रयास करे. इसके लिए वर्तमान अवसरंचना की उपलब्धता को बढ़ाया जाए और मूल्य निर्धारित करने की प्रणाली को उपभोक्ता के अनुकूल बनाया जाए.
  • बैंक यह सुरक्षित करें कि कोई भी उपभोक्ता बैंकों से 5 किलोमीटर दूर नहीं रहे. यदि ऐसे स्थल पाए जाते हैं तो उनको “छाया क्षेत्र/shadow areas” मानते हुए वहाँ के किसी स्थानीय वेंडर को बैंक का प्रतिनिधि बनाया जाए क्योंकि वे पैसे का काम करते हैं और सदैव उसी स्थान पर रहते हैं.
  • सरकार को सुझाव दिया गया है कि वह डिजिटल भुगतान पर लगने वाले लेन-देन प्रभार को हटा दें और मूल्य निर्धारण की व्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक व्यापारी छूट दरें (Merchant Discount Rates – MDR) लागू करें तथा बैंक के द्वारा KYC हेतु लिए गये शुल्क को हल्का कर दें. पैनल का कहना है कि सरकार भुगतान के मामले में सबसे बड़ी प्रतिभागी होती है, अतःभुगतान को डिजिटल बनाने से सम्बंधित सभी पहलुओं का उसे नेतृत्व करना चाहिए.
  • पैनल ने भारतीय रिज़र्व बैंक को यह कहा है कि वह उपभोक्ताओं के बीच लेन-देन की इंटरचेंज दर स्वयं निर्धारित करे प्रतिस्पर्धात्मक बाजार मूल्य निर्धारण का काम MDR पर छोड़ दे.
  • अपेक्षित वृद्धि के लक्ष्य को पाने के लिए पैनल ने उन भुगतानों को डिजिटल बनाने पर बल दिया है जो आकार में सबसे भारी-भरकम होते हैं, जैसे – आवर्ती विपत्र भुगतान (recurring bill payments), सार्वजनिक सुविधा-स्थलों में टोल और टिकट का भुगतान तथा किराना भंडारों के व्यवसाइयों द्वारा होने वाले भुगतान.
  • पैनल ने सरकार से अनुशंसा की है कि वह जोखिम को कम करने के लिए विशेष पोर्टल के अतिरिक्त शिकायत दर्ज करने के लिए भी एक डिजिटल पोर्टल बनाए.

GS Paper  3 Source: Down to Earth

down to earth

Topic : India’s fertiliser industry needs to prioritise pollution control: CSE Study

संदर्भ

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र के द्वारा ग्रीन रेटिंग प्रोजेक्ट के अंतर्गत कराए गये एक अध्ययन से पता चलता है कि बिजली बचाने में तो भारतीय उर्वरक उद्योग ने अच्छी प्रगति की है, परन्तु उसने पर्यावरण प्रदूषण से सम्बंधित पहलुओं की उपेक्षा भी की है.

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उर्वरक उद्योग को प्रदूषणकारी क्षेत्रों में “लाल श्रेणी” के अन्दर वर्गीकृत किया है.

जल प्रदूषण

  • उर्वरक उद्योग उपयोग से बचे हुए अपशिष्ट जल को बिना उपचार किये अथवा आंशिक उपचार करते हुए बहा देता है जिसके कारण आस-पास के भूजल में अमोनिया की मात्रा भारतीय मानक ब्यूरो के द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक हो गयी है.
  • विदित हो कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार पेय जल में अमोनिया की मात्रा 5 ppm तक ही होनी चाहिए. अध्ययन में कुछ संयंत्रों के पास जल में अमोनिया की मात्रा 93.5 ppm तक पाई गई जो स्वीकृत सीमा से 187 गुना अधिक है.
  • जल का प्रदूषण उर्वरक संयंत्रों के द्वारा प्रवाहित किये गये राख के तालाब के जल (ash pond water) के कारण होता है.
  • जिन नमूनों का अध्ययन किया गया उनमें 57% नमूने ऐसे थे जिनमें विशेषकर साइनाइड की मात्रा खतरनाक थी. कुछ नमूनों में Kjeldahl nitrogen का स्तर चिंताजनक था.
  • कुछ संयंत्र चालाकी से अपशिष्ट जल में मीठा जल मिलाकर प्रदूषण के मानदंड को पूरा करने की चेष्टा करते पाए गये.

वायु प्रदूषण

  • वैसे तो अधिकांश उर्वरक संयंत्र पर्टीकुलेट मैटर (PM) के मानकों पर खतरे उतर रहे थे, परन्तु उनके अन्दर उत्सर्जन का स्तर चिंता का विषय था. ज्ञातव्य है कि भारत में यूरिया निर्माण के समय होने वाले अमोनिया गैस के उत्सर्जन के विषय में कोई नियम नहीं बना हुआ है.
  • अमोनिया के अतिरिक्त यूरिया संयंत्रों से यूरिया की धूल, कार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड भी निकलते हैं जो आस-पास के फसलों को क्षति पहुंचाते हैं.

ठोस कचरा

  • जहाँ तक ठोस एवं हानिकारक कचरा प्रबंधन की बात है, अधिकांश यूरिया संयंत्रों का प्रदर्शन संतोषजनक है. किन्तु कुछ संयंत्र इसमें चूक कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस भी भेजी गई है.
  • यह देखा गया है कि अधिकांश संयंत्र राख के तालाब को ठीक-ठाक संधारित नहीं करते हैं. परिणामतः यह राख उड़-उड़ कर वायुमंडल में तो जाती ही है, इसके अतिरिक्त भूजल तक भी पहुँच जाती हैं.
  • इन संयत्रों में जिन ट्रकों से कोयला आता है वे बहुधा ढंके नहीं होते हैं जिसके कारण भी कचरा फ़ैल जाता है.

Prelims Vishesh

BrahMos :-

  • पिछले दिनों ओडिशा के चांदीपुर समेकित परीक्षण स्थल से ध्वनि से तेज चलने वाले क्रूज प्रक्षेपणास्त्र ब्रह्मोस के जहाज प्रतिरोधी संस्करण का परीक्षण हुआ.
  • ब्रह्मोस का विकास ब्रह्मोस कोर्पोरेशन ने किया है.
  • यह भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroeniya का संयुक्त उपक्रम है.
  • ब्रह्मोस नाम भारत की नदी ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी के नाम पर पड़ा है.
  • रूस इस परियोजना में प्रक्षेपास्त्र तकनीक उपलब्ध करा रहा है.
  • उड़ान के दौरान मार्गदर्शन की इसकी क्षमता (navigation power) भारत ने विकसित की है.
  • यह मिसाइल 3700km/hr के हिसाब से मार सकती है. आमतौर पर इतनी रफ़्तार से उड़ान भरने वाली मिसाइल रडार के कवरेज में नहीं आती है. रडार की कवरेज में नहीं आने की एक और वजह है – इसके अग्र-भाग का non-metallic होना.
  • इसकी गति ध्वनि की गति से तीन गुणा ज्यादा है.
  • यह दुनिया की सबसे तेज मारक मिसाइल मानी जाती है.
  • इसकी गति की दर 8 मैक है.
  • ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 3000 kg है.
  • इसकी लम्बाई 4 मीटर है और व्यास 0.6 मीटर है.
  • इसकी मारक क्षमता 290 km तक है और यह 300 km विस्फोटक अपने साथ ले जा सकता है.
  • BrahMos एक नियंत्रित क्रूज प्रक्षेपास्त्र है.
  • BrahMos को जमीन, विमान, पनडुब्बी से छोड़ा जा सकता है.
  • यह pin point accuracy के साथ टारगेट पर हमला कर सकता है.

Kharga Prahar :-

  • पंजाब के मैदानों में पिछले दिनों स्थल सेना के खड़गा कोर्ज (Kharga Corps) की कई इकाइयों ने प्रशिक्षण अभ्यास किया.
  • खड़गा कोर्ज भारतीय थल सेना का एक अंग है जो अम्बाला से काम करता है.

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