Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 February 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 04 February 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : What is Dividend Distribution Tax?

संदर्भ

भारत सरकार के वित्त मंत्री का कहना है कि लाभांश वितरण कर (Dividend Distribution Tax) अब व्यक्तियों को नहीं वरन कंपनियों को देना होगा.

लाभांश वितरण कर क्या है?

यह वह कर है जो किसी कम्पनी द्वारा अपने लाभ में से अंशधारकों को दिए गये लाभांश पर लगाया जाता है.

लाभांश वितरण कर से सम्बंधित प्रमुख तथ्य

  • लाभांश वितरण कर स्रोत पर लगाया जाता है और उस समय काटा जाता है जब कोई कम्पनी लाभांश वितरित करती है.
  • यह लाभांश कम्पनी के लाभ का अंश होता है और इसे अंशधारकों में बाँटा जाता है.
  • कानून के अनुसार लाभांश वितरण कर कम्पनी पर लगाया जाता है न कि लाभांश पाने वाले अंशधारक पर.
  • परन्तु यदि कोई अंशधारक किसी एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रु. से अधिक का लाभांश प्राप्त करता है तो उस पर एक अतिरिक्त कर थोपा जाता है.

क्या लाभांश वितरण कर निजी कम्पनियों पर लागू होता है?

आयकर अधिनियम के अनुभाग 115-O के अनुसार, कोई भी ऐसा घरेलू प्रतिष्ठान जो लाभांश घोषित करता है अथवा वितरित करता है उसे लाभांश की कुल मात्रा के 15% की दर से लाभांश वितरण कर देना होगा.

क्या लाभांश वितरण कर न्यायोचित है?

बाजार में काम करने वाले लोग, विशेषकर दलाल, बहुत दिनों से लाभांश वितरण कर (Dividend Distribution Tax – DDT) को समाप्त करने की माँग करते रहे हैं क्योंकि इससे निगमों की आय का एक बहुत बड़ा अंश चला जाता है और इस प्रकार बाजार का आकर्षण कम जाता है.

बाजार में पहले से ही कई और कर चल रहे हैं, जैसे – प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax), दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gains) कर आदि.


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : President’s address to both Houses of Parliament

संदर्भ

संसद के बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे.

अभिभाषण के विषय में संविधान की स्थिति

संविधान का अनुच्छेद 87(1) कहता है कि लोक सभा के आम चुनाव के पश्चात् के पहले सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष उस सदन के पहले सत्र के आरम्भ में राष्ट्रपति दोनों सदनों को एक साथ बुलाकर अभिभाषण करेगा.

शुरू-शुरू में संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि प्रत्येक सत्र के आरम्भ में राष्ट्रपति दोनों सदनों को एक जगह बुलाकर अभिभाषण करेगा. बाद में इस प्रावधान को संशोधित कर दिया गया. वास्तव में यही संशोधन संविधान का पहला संशोधन था.

राष्ट्रपति का अभिभाषण

राष्ट्रपति के अभिभाषण में आने वाले वर्ष में सरकार की क्या प्रमुख नीतियाँ होंगी और क्या योजनाएँ होंगी, इस विषय में प्रकाश डाला जाता है. इस अभिभाषण का प्रारूप मंत्रिमंडल द्वारा तैयार किया जाता है.

राष्ट्रपति के संबोधन के पश्चात् क्या होता है?

राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल  के संबोधन के पश्चात् न केवल दिए गये भाषण की विषयवस्तु पर ही चर्चा होती है, अपितु देश के प्रशासन से जुड़े व्यापक विषयों पर भी चर्चा होती है. तत्पश्चात् बजट पर विचार-विमर्श का मार्ग प्रशस्त हो जाता है.

यदि राष्ट्रपति/राज्यपाल भाषण की विषय-वस्तु से सहमत नहीं हों तो क्या उन्हें फिर भी इसे पढ़ना पड़ेगा?

विधायिका के समक्ष भाषण देना एक संवैधानिक कर्तव्य है जिसके पालन से राष्ट्रपति/राज्यपाल मना नहीं कर सकते. किन्तु ऐसी स्थिति हो सकती है कि वे सरकार द्वारा तैयार की गई भाषण सामग्री से इतर संबोधन करें. किन्तु अभी तक ऐसा हुआ नहीं है.

हाँ, एक बार ऐसा हुआ था कि एक राज्यपाल ने विधायिका के समक्ष भाषण पढ़ते हुए उसका एक अंश छोड़ दिया था. ऐसा 1969 में हुआ था. उस समय पश्चिम बंगाल के राज्यपाल धर्म वीर ने संयुक्त मोर्चा सरकार द्वारा तैयार किये गये भाषण के दो अवतरणों को नहीं पढ़ा था. उन दो अवतरणों में इस बात का उल्लेख था कि कांग्रेस-शाषित केंद्र सरकार ने पहली संयुक्त मोर्चा सरकार को जो बर्खास्त किया था वह कार्य असंवैधानिक था.  


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : India’s no-fly list

संदर्भ

भारत की चार वायु सेवाओं – इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया और गो एयर – ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा उनके वायुयानों से यात्रा करने पर रोक लगा दी है क्योंकि कामरा ने इंडिगो से यात्रा करते समय टेलीविज़न न्यूज़ एंकर अर्नब गोस्वामी को कथित रूप से परेशान किया था. ज्ञातव्य है कि ऐसी स्थिति में सम्बंधित यात्री को नो-फ्लाई सूची में अंकित कर दिया जाता है.

किसी को नो-फ्लाई सूची में डालने के नियम क्या हैं?

  • इस विषय में 2017 में सरकार ने कुछ नियम बनाए थे. इन नियमों का उद्देश्य था हवाई यात्रियों को विघ्नकारी व्यवहार करने से रोकना तथा नो-फ्लाई सूची के लिए मार्गनिर्देश निर्धारित करना.
  • इन नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में सबसे पहले प्रभारी पायलट अभद्र व्यापार की एक शिकायत दायर करता है और फिर सम्बंधित वायुसेवा द्वारा गठित एक आंतरिक समिति घटना की जाँच करती है. जब तक जाँच पड़ताल चलती है तब तक सम्बंधित वायुसेवा को उस व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार होता है.
  • समिति को मामले में 21 दिन के अन्दर निर्णय लेना होता है और यह भी बतलाना होता है कि प्रतिबंध कितने दिन चलेगा.

अभद्र व्यवहार किसे कहते हैं?

नियमों के अनुसार, अभद्र व्यवहार की तीन श्रेणियाँ होती हैं –

  1. स्तर 1 श्रेणी – यह उस अभद्र व्यवहार को कहते हैं जो बोलचाल की अभद्रता से सम्बंधित हो. इसके लिए यात्री को तीन महीने तक प्रतिबंधित किया जा सकता है.
  2. स्तर 2 श्रेणी – यह अभद्र व्यवहार शारीरिक दुर्व्यवहार को दर्शाता है और इसके लिए छह महीने तक प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
  3. स्तर 3 श्रेणी जब दुर्व्यवहार जीवन को हानि पहुँचाने के स्तर का होता है तो यह स्तर तीन का अभद्र व्यवहार कहलाता है. इसके लिए न्यूनतम दो वर्षों का प्रतिबंध लगाया जाता है.

हवाई यात्रा के दौरान किन-किन अभद्र व्यवहारों पर कार्रवाई हो सकती है?

नागरिक विमानन महानिदेशालय ने अभद्र व्यवहारों की एक सूची बना रखी है, जो निम्नलिखित हैं –

  1. मदिरा या नशीली दवा का सेवन
  2. विमान के अन्दर धूमपान
  3. विमान चालकों और अन्य यात्रियों को धमकी और गाली देना
  4. विमान चालकों आदि को कर्तव्यपालन से जानबूझकर रोकना

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : What makes WHO declare a disease outbreak a public health emergency?

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को एक अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (public health emergency of international concern) घोषित कर दिया है.

आपातकाल घोषणा की आवश्यकता क्यों पड़ी?

कोरोना वायरस का प्रकोप चीन के बाहर भी देखने को मिल रहा था और इसके रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी. इसका भी प्रमाण मिल रहा था कि यह रोग मनुष्य से मनुष्य तक फ़ैल रहा था. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह वायरस कमजोर स्वास्थ्य तंत्रों वाले देशों में फ़ैल सकता है जहाँ इससे निबटने की तैयारी अच्छी नहीं है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस का प्रकोप एक असाधारण घटना है जो चीन के अतिरिक्त अन्य देशों के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम है अर्थात् यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़ैल सकता है.

इस प्रकोप से निपटने के लिए एक समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की अपेक्षा हो सकती है, ऐसा WHO का सोचना है. स्मरण रहे इसी प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय आपातकाल WHO पहले भी इबोला, जिका और H1N1 के लिए घोषित कर चुका है.

किसी घटना को आपातकाल घोषित करने का दायित्व WHO के महानिदेशक का होता है और इसके लिए सदस्यों की एक समिति का आह्वान करने की आवश्यकता होती है.

आपातकाल घोषणा का निहितार्थ

कोरोना वायरस को अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से WHO इस विषय में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समन्वित कर सकेगा. साथ ही WHO प्रकोपग्रस्त देशों को उसके द्वारा निर्धारित यात्रा, व्यापार, क्वारंटाइन या स्क्रीनिंग से सम्बंधित मानदंडों का सम्यक पालन नहीं करने पर उत्तरदायी घोषित कर सकता है.

पृष्ठभूमि

वर्तमान में कोरोना वायरस की जो प्रजाति फ़ैल रही है, वह उसकी एक नई प्रजाति है जो पहले किसी मनुष्य में नहीं पाई गई थी.

इस प्रजाति के वायरस से लोग बीमार पड़ जाते हैं, उन्हें साधारण खाँसी से लेकर अधिक गंभीर MERS (Middle East Respiratory Syndrome) और SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) तक का शिकार होना पड़ता है.

  • अभी जिस नए कोरोना वायरस का प्रकोप चल रहा है इसका स्रोत क्या है यह पता नहीं चला है. अतः इसके लिए कोई उपचार नहीं निकला है.
  • नए कोरोना वायरस से चीन में 400 से अधिक लोग मर चुके हैं और वहाँ WHO के नवीनतम प्रतिवेदन के अनुसार इस वायरस के चीन में 5,997 सम्पुष्ट मामले हैं.
  • वे अन्य देश जहाँ कोरोना वायरस की सम्पुष्टि हो चुकी है, वे हैं – जापान, वियतनाम, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, नेपाल, जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका, कनाडा आदि.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : World Sustainable Development Summit

संदर्भ

2020 में होने वाले विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन की थीम रखी गई है – “Towards 2030 Goals: Making the Decade Count’.”

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन क्या है?

  • यह TERI का एक मूर्धन्य वार्षिक आयोजन है.
  • यह सम्मेलन 2001 में सम्पन्न दिल्ली सतत विकास शिखर सम्मेलन (DSDS) के उद्देश्यों के अनुरूप सतत विकास को वैश्विक लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में कार्यरत है.
  • यह विकासशील जगत में उभरने वाले वैश्विक मामलों से सम्बंधित संसार का एकमात्र शिखर सम्मेलन है.
  • इस सम्मेलन में संसार-भर के नेता और पेशेवर जमा होकर सार्वभौम महत्त्व की जलवायविक समस्याओं पर विचार-विमर्श करते हैं.
  • यह सम्मेलन विश्व के बड़े-बड़े नेताओं और विचारकों का ऐसा मंच है जहाँ विश्व समुदाय के लाभ के लिए दीर्घकालीन समाधानों तक पहुँचने की चेष्टा की जाती है.

TERI क्या है?

ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) एक अग्रणी विचारक समूह है जो भारत एवं वैश्विक दक्षिण (Global South) में सतत विकास के लिए अनुसंधान हेतु समर्पित है. इसकी स्थापना 1974 में ऊर्जा से सम्बंधित विषयों के एक सूचनाकेंद्र के रूप में हुई थी. परन्तु कालांतर में यह एक अनुसंधान केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित हो गया जिसके द्वारा प्रस्तुत नीतियों एवं तकनीकी समाधानों के फलस्वरूप जन-जीवन और पर्यावरण में बदलाव आया.


Prelims Vishesh

Ujh Multipurpose (National) Project :-

  • रावी नदी की एक बड़ी सहायक नदी ऊझ पर जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में एक परियोजना निर्मित करने पर विचार चल रहा है.
  • यदि यह परियोजना पूरी हो गई तो इससे सिन्धु जलसन्धि के द्वारा भारत को आवंटित पूर्वी नदियों के जल के उपयोग में वृद्धि हो जाएगा.
  • ऊझ नदी का उद्गम स्थल 4,300 मीटर की ऊँचाई पर कैलाश पर्वत पर है.
  • विदित हो कि यह पर्वत पीर पंजाल रेंज के अंग भदरवाह पहाड़ियों के निकट है.

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