Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 August 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 04 August 2021


GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : National Gallery of Australia to hand over 14 artefacts

संदर्भ

ऑस्ट्रेलिया का नेशनल आर्ट म्यूजियम भारत को 14 कलाकृतियाँ वापस लौटाएगा. इनमें से कुछ 12वीं शताब्दी की हैं जो तमिलनाडु के चोल राजवंश से जुड़ी हैं. लौटाई जा रही मूर्तियों में बाल संत सांबंदर की मूर्ति, राजस्थान से ले जाई गई 11-12वीं सदी की मेहराबदार वेदिका पर आसन मुद्रा में बैठे जैन तीर्थंकर की मूर्ति शामिल है.

चोल राजवंश (9वीं से 12वीं शताब्दी तक)

  • चोलों के विषय में प्रथम जानकारी पाणिनी कृत अष्टाध्यायी से मिलती है.
  • चोल वंश के विषय में जानकारी के अन्य स्रोत हैं – कात्यायन कृत ‘वार्तिक’, ‘महाभारत‘, ‘संगम साहित्य’, ‘पेरिप्लस ऑफ़ दी इरीथ्रियन सी’ एवं टॉलमी का उल्लेख आदि.
  • चोल राज्य आधुनिक कावेरी नदी घाटी, कोरोमण्डल, त्रिचनापली एवं तंजौर तक विस्तृत था.
  • यह क्षेत्र उसके राजा की शक्ति के अनुसार घटता-बढ़ता रहता था.
  • इस राज्य की कोई एक स्थायी राजधानी नहीं थी.
  • साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि, इनकी पहली राजधानी ‘उत्तरी मनलूर’ थी.
  • बाद में ‘उरैयुर’ तथा ‘तंजावुर’ चोलों की राजधानी बनी.
  • चोलों का शासकीय चिह्न बाघ था.
  • चोल राज्य ‘किल्लि’, ‘बलावन’, ‘सोग्बिदास’ तथा ‘नेनई’ जैसे नामों से भी प्रसिद्ध है.
  • अलग-अलग कालों में ‘उरगपुर’ (वर्तमान ‘उरैयूर’, ‘त्रिचनापली’ के पास) ‘तंजोर’ और ‘गंगकौण्ड’, ‘चोलपुरम’ (पुहार) को राजधानी बनाकर इस पर विविध राजाओं ने शासन किया.
  • चोलमण्डल का प्राचीन इतिहास स्पष्ट रूप से पता नहीं है.
  • पल्लव वंश के राजा उस पर बहुधा आक्रमण करते रहते थे, और उसे अपने राज्य विस्तार का उपयुक्त क्षेत्र मानते थे.
  • वातापी के चालुक्य राजा भी दक्षिण दिशा में विजय यात्रा करते हुए इसे आक्रान्त करते रहे.
  • यही वजह है कि, नवीं सदी के मध्य भाग तक चोलमण्डल के इतिहास का विशेष महत्त्व नहीं है, और वहाँ कोई ऐसा प्रतापी राजा नहीं हुआ, जो कि अपने राज्य के उत्कर्ष में विशेष रूप से समर्थ हुआ हो.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Related to Health.

Topic : Ayush 64

संदर्भ

हाल ही में सरकार ने कहा है कि आयुर्वेदिक औषधि आयुष – 64” मानव उपयोग के लिए सुरक्षित है. ज्ञातव्य है कि आयष मंत्रालय द्वारा 29 अप्रैल, 2021 को कोविड 19 के इलाज के लिए इसके उपयोग की घोषणा की गई थी.

आयुष – 64

  • आयुष – 64 एक पॉलीहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है.
  • नैदानिक परीक्षणों में सामने आया है कि इसमें एंटीवायरल, इम्यून- मोडुलेटर और एंटीपायरेटिक गुण हैं तथा इसे कोविड- 19 के हल्के से लेकर मध्यम स्तर के संक्रमण के इलाज में बहुत उपयोगी पाया गया है.
  • ‘आयुष- 64’ को मूल रूप से मलेरिया के उपचार के लिए 1980 में विकसित किया गया था और यह सभी नियामक से सम्बंधित आवश्यकताओं और गुणवत्ता एवं फार्माकोपियोअल मानकों का अनुपालन करता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Appointment to various Constitutional posts, powers, functions and responsibilities of various Constitutional Bodies.

Topic : Rule 255 and 256

संदर्भ

हाल ही में, राज्यसभा सभापति द्वारा तृणमूल कांग्रेस के छह सांसदों को उनके ‘अत्यंत उपद्रवी’ आचरण के कारण, राज्यसभा में दिन भर की शेष कार्यवाही के लिए सदन से बाहर जाने के आदेश दिया गया था. ये संसद सदस्य पेगासस कांड का विरोध करते हुए हाथों में पोस्टर लेकर सभापति के आसन के सामने आ गए थे.

नियम 255 : सदस्य का चला जाना

सभापति किसी सदस्य को जिसका व्यवहार उसकी राय में घोर अव्यवस्थापूर्ण हो, तत्काल राज्य सभा से चले जाने का निदेश दे सकेगा और जिस सदस्य को इस तरह चले जाने का आदेश दिया जाये वह तुरन्त चला जायेगा और उस दिन बैठक के अवशिष्ट समय तक अनुपस्थित रहेगा.

नियम 256 : सदस्य का निलम्बन

  1. यदि सभापति आवश्यक समझे तो वह उस सदस्य का नाम ले सकेगा जो सभापीठ के अधिकार की अपेक्षा करे या जो बार-बार और जान बूझकर राज्य सभा के कार्य में बाधा डालकर राज्य सभा के नियमों का दुरूपयोग करे.
  2. यदि किसी सदस्य का सभापति द्वारा इस तरह नाम लिया जाये तो वह एक प्रस्ताव उपस्थित किये जाने पर, किसी संशोधन, स्थुगन अथवा वाद-विवाद की अनुमति न देकर, तुरन्त इस प्रस्ताव पर मत लेगा कि सदस्य को ( उसका नाम लेकर ) राज्य सभा की सेवा से ऐसी अवधि तक निलम्बित किया जाये जो सत्र के अवशिष्ट भाग से अधिक नहीं होगी; परन्तु राज्य सभा किसी भी समय, प्रस्ताव किये जाने पर, संकल्प कर सकेगी कि ऐसा निलम्बन समाप्त किया जाये.
  3. इस नियम के अधीन निलम्बित सदस्य तुरन्त राज्य सभा की प्रसीमा के बाहर चला जायेगा.

लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की शक्तियों में अंतर

  • लोकसभा अध्यक्ष की भांति, राज्यसभा के सभापति को राज्य सभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन विषयक नियम पुस्तिका के नियम संख्या 255 के तहत “किसी भी सदस्य को जिसका आचरण, उसकी राय में पूरी तरह से अव्यव्स्थापूर्ण हो, तत्काल राज्यसभा से चले जाने का निदेश” की शक्ति प्राप्त है.
  • हालांकि, राज्यसभा के सभापति के पास, लोकसभा अध्यक्ष के विपरीत, किसी सदस्य को निलंबित करने की शक्ति नहीं होती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes.

Topic : Fast Track Special Courts

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 1,023 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (Fast Track Special Courts – FTSCs) को ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ के रूप में अगले दो वर्षो तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है. इसके लिए ₹1,572.86 करोड़ की राशि का परिव्यय किया जाएगा.

योजना के तहत, केंद्रीय हिस्से की धनराशि, ₹971.70 करोड़, निर्भया फंड से उपलब्ध करायी जाएगी.

फास्ट ट्रैक न्यायालय (FTC)

  • फास्ट ट्रैक न्यायालय (FTC) को पहली बार 2000 में ग्यारहवें वित्त आयोग द्वारा “अगले पाँच वर्षों में ज़िला और अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों को काफी हद तक कम करने के लिये”अनुशंसित किया गया था.
  • वित्त आयोग की रिपोर्ट के बाद केंद्र द्वारा पाँच साल की अवधि के लिये विभिन्न राज्यों में 1,734 अतिरिक्त अदालतें बनाने हेतु 502.90 करोड़ रुपए जारी किये गए.
  • वर्ष 2011 में केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक न्यायालय को फंड देना बंद कर दिया था. इस निर्णय को वर्ष 2012 में उच्चतम न्यायलय में चुनौती दी गई थी, परन्तु सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह राज्यों पर निर्भर है कि वे अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर इन अदालतों को जारी रखें या बंद करें.
  • तीन राज्यों – महाराष्ट्र, तमिलनाडु और केरल ने इन न्यायालयों का संचालन जारी रखा, जबकि दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक ने कहा था कि वे 2013 तक जारी रखेंगे.
  • दिसंबर 2012 के गैंगरेप और हत्या के बाद केंद्र सरकार ने निर्भया फंड की स्थापना की, किशोर न्याय अधिनियम में संशोधन किया और फास्ट-ट्रैक महिला न्यायालयों की स्थापना की.
  • इसके पश्चात् कुछ अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, बिहार आदि ने भी बलात्कार के मामलों के लिये FTC की स्थापना की.

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की जरूरत

फास्ट-ट्रैक कोर्ट को अधिक प्रभावी बनाने के लिये समयबद्ध तरीके से परीक्षण पूरा किया जाना चाहिये. इसके लिये पुनर्गठन प्रक्रियाओं के दौरान समर्पित न्यायाधीशों और सक्षम कर्मचारियों के साथ इन न्यायालयों की मानवीय क्षमता में सुधार करने के लिए दो-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Economy.

Topic : Anthraquinone

संदर्भ

भारत ने विश्व व्यापार संगठन की बैठक में एन्थ्राक्विनोन (चाय में पाया जाता है) को एक कीटनाशक के रूप में वर्गीकृत करने और इसे गैर-प्रशुल्क बाधा के रूप में घोषित करने के यूरोपीय संघ के निर्णय के बारे में चिंता व्यक्त की है.

भारत ने तर्क दिया है कि एन्थ्राक्विनोन एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रदूषक या हाइड्रोकार्बन है, न कि एक कीटनाशक. इसके अतिरिक्त, रूस ने चाय को “फलों और सब्जियों” के रूप में वर्गीकृत किया है. इसके कारण चाय पर उच्च स्तर के गुणवत्ता-जांच मापदंडों को लागू किया गया है.

एन्थ्राक्विनोन क्या है?

  • यह वायु, जल, मृदा, पादप, मत्स्य/समुद्री खाद्य और जानवरों के ऊतकों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है.
  • यह रंग, वस्त्र और कागज उद्योगों में प्रयोग होने वाले पक्षी विकर्षक (bird repellent) के रूप में विख्यात है.

भारत की चाय सांख्यिकी

  • भारत विश्व में चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है.
  • इसके अतिरिक्त यह केन्या, चीन और श्रीलंका के बाद विश्व में चाय का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक भी है.
  • वित्त वर्ष 2019 में कुल चाय निर्यात 830.90 मिलियन डॉलर और वित्त वर्ष 2020 में 826.47 मिलियन डॉलर था.
  • भारत दार्जिलिंग (भौगोलिक संकेतक टैग युक्त), असम ऑर्थोडॉक्स और उच्च श्रेणी की नीलगिरी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली विशेष चाय प्रदान करता है. इनमें एक विशिष्ट सुगंध, कड़कपन, रंग और स्वाद होता है.
  • भारत क्रश-टियर-कर्ल (CTC) और ऑर्थोडॉक्स किस्म की चाय, दोनों का उत्पादन करता है.

Prelims Vishesh

Hunger Hotspot :-

  • संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी जारी की है कि 23 देशों में तीव्र खाद्य असुरक्षा के और विकृत होने की संभावना है.
  • संघर्ष, चरम जलवायु और आर्थिक आघात तीव्र खाद्य असुरक्षा के प्राथमिक चालक हैं.
  • कुल मिलाकर, विश्व-भर में 41 मिलियन से अधिक लोगों को यदि तत्काल जीवन और आजीविका बचाने वाली सहायता नहीं मिलती तो उनके अकाल या अकाल जैसी स्थितियों में पहुँचने का खतरा है.
  • इथियोपिया और मेडागास्कर विश्व के सबसे नए “उच्चतम अलर्ट” वाले हंगर हॉटस्पॉट हैं.
  • भारत हॉटस्पॉट में से एक नहीं है.

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