Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 August 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 04 August 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Related to Health Issues. 

Topic : Cataracts

संदर्भ

नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में मोतियाबिंद (Cataracts) की सरल, सस्ती और बिना ऑपरेशन के चिकित्सा की तकनीक विकसित की है.

मुख्य तथ्य

  • भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले एक स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) के वैज्ञानिकों की एक दल ने गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी एस्पिरिन से नैनोरोड विकसित किया है.
  • आईएनएसटी का यह शोध एक सस्ते और कम जटिल तरीके से मोतियाबिंद को खत्म करने या रोकने में सहायता कर सकता है. यह मोतियाबिंद के विरुद्ध एक प्रभावी गैर-आक्रामक छोटे अणु-आधारित नैनोथेरेप्यूटिक्स के रूप में भी उपयोगी है.
  • उम्र बढ़ने के साथ और विभिन्न परिस्थितियों में, लेंस प्रोटीन क्रिस्टलीन समुच्चय नेत्र लेंस में अपारदर्शी संरचनाओं का निर्माण करता है, जो दृष्टि को बाधित करता है और बाद में मोतियाबिंद का कारण भी बनता है.
  • अपने नैनो-आकार के कारण एस्पिरिन नैनोरोड्स जैव उपलब्धता, दवा की गुणवत्ता, कम विषाक्तता आदि में सुधार कर सकते हैं, इसलिए, आई-ड्रॉप के रूप में एस्पिरिन नैनोरोड्स को मोतियाबिंद के उपचार के लिए एक प्रभावी और व्यवहार्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.

मोतियाबिंद

  • मोतियाबिंद अंधेपन का एक प्रमुख रूप है. यह तब होता है जब हमारी आंखों में लेंस बनाने वाले क्रिस्टलीय प्रोटीन की संरचना बिगड़ जाती है, जिससे क्षतिग्रस्त या अव्यवस्थित प्रोटीन एकत्र होकर एक और नीली या भूरी परत बनाते हैं, जो अंततः लेंस की पारदर्शिता को प्रभावित करता है.
  • प्रायः देखा गया है कि 50 से अधिक उम्र के लोगों में मोतियाबिंद की समस्या आ जाती है.
  • मोतियाबिंद हो जाने पर धीरे-धीरे आँखों की रोशनी में धुंधलापन आने लगता है जिससे व्यक्ति को कम दिखाई देने लगता है. मोतियाबिंद की बीमारी जन्मजात भी हो सकती है.
  • मोतियाबिंद का कारण है बढ़ती उम्र, डायबिटीज की समस्या,आंखों पर देर तक सूरज की रोशनी पड़ना, आंख में किसी तरह की चोट या सूजन, धूम्रपान का सेवन, अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के संपर्क में आना,रेडिएशन थेरेपी, अनुवांशिक.
  • मोतियाबिंद के चार प्रकार के होते हैं –  सेकेंडरी मोतियाबिंद, ट्रॉमेटिक मोतियाबिंद, कन्जेनिटल मोतियाबिंद और रेडिएशन मोतियाबिंद.
  • राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम (National Blindness Control Programme-NBCP) की शुरूआत वर्ष 1976 में पूरी तरह से केंद्र प्रायोजित परियोजना के रूप में की गयी थी, जिसमें पहले से जारी ट्रैकोमा नियंत्रण कार्यक्रम को शामिल किया गया था जिसे वर्ष 1963 में शुरू किया गया था.

राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य:

  • अंधेपन की व्यापकता को (वर्ष 1986 से वर्ष 1989 में 1.49%) 0.3 प्रतिशत से कम करना.
  • भविष्य के संचित मामलों को रोकने के लिए हर वर्ष दृष्टिहीनता के नए मामलों की आवश्यकता पूरी करने के लिए कार्यक्रम में आधारभूत ढांचा और कार्यक्षमता स्थापित करना.
उद्देश्य
 
  • प्रत्येक पांच लाख आबादी के लिए नेत्र देखभाल सुविधाएं स्थापित करना,
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सीएचसी, उप-जिले के सभी स्तरों पर नेत्र देखभाल सेवाओं के लिए मानव संसाधन विकसित करना,
  • सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता में सुधार करना;
  • नागरिक समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन रिपोर्ट, 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार, मोतियाबिंद और ट्रेकोमेटस ट्राइकियेसिस के मामले स्त्रियों में अधिक मिलते हैं, विशेषकर उन स्त्रियों में जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहती हैं. कम दृष्टि और मोतियाबिंद के कारण दृष्टिबाधा अथवा अन्धता को झेल रहे 1 बिलियन लोगों को सहायता पहुँचाने के लिए 14.3 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी.

ट्रैकोमा नियंत्रण कार्यक्रम

ट्रैकोमा नियंत्रण कार्यक्रम वर्ष 1963 में शुरू हुआ था. इस कार्यक्रम का उद्देश्य उस समय अंधेपन की व्यापकता को कम करते हुएभविष्य में होने वाले मामलों को रोकने हेतु हर वर्ष आधारभूत ढाँचा एवं कार्यक्षमता स्थापित करना है.

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों की संक्षिप्त चर्चा करें.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Draft Defence Production and Export Promotion Policy 2020

संदर्भ

हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति 2020 (Draft Defence Production and Export Promotion Policy- DPEPP 2020) का प्रारूप तैयार किया है.

DPEPP 2020 को रक्षा उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि तथा आत्मनिर्भर बनने और देश को रक्षा उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए रक्षा मंत्रालय (MoD) का अत्यंत महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में परिकल्पित किया गया है.

DPEPP 2020 में निम्नलिखित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है – 

  1. वर्ष 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा वस्तुओं और सेवाओं में 35,000 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्राप्त करने का लक्ष्य
  2. गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु एयरोस्पेस एवं नैसैनिक पोत निर्माण उद्योग सहित एक गतिशील, दृढ और प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग विकसित करना
  3. आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू डिजाइन और विकास के जरिये “मेक इन इंडिया” पहल को आगे ले जाना
  4. रक्षा उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहन देने और वैश्विक रक्षा मूल्य श्रृंखलाओं का भाग बनना
  5. अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन देने, नवाचारों को पुरस्कृत करने, भारतीय बौद्धिक संपदा स्वामित्व बनाना तथा एक दृढ़ आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने वाले परिवेश का निर्माण करना
  6. कुल रक्षा क्रय में घरेलू खरीद का भाग लगभग 60% है. घरेलू उद्योगों से खरीद में वृद्धि लाने के लिए, वर्ष 2025 तक वर्तमान खरीद को 70,000 करोड़ से बढ़ाकर दोगुना अर्थात् 1,40,000 करोड़ तक करना.

DPEPP 2020 के अंतर्गत विशेष ध्यान दिए जाने वाले क्षेत्र

  1. खरीद सुधार
  2. MSMEs / स्टार्टअप का स्वदेशीकरण तथा सहयोग
  3. अनुकूलतम संसाधन आवंटन
  4. निवेश संवर्धन, FDI तथा व्यापार करने में सरलता
  5. नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D)
  6. DPSUऔर OFB
  7. गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना
  8. निर्यात संवर्धन

नीति के अन्य प्रमुख अंश

  1. नीति में, वार्षिक रूप से क्रमानुसार हथियारों तथा प्लेटफॉर्म्स’ की एक नकारात्मक सूची निर्गत की जायगी, जिसके अंतर्गत दी गयी तिथियों से अधिसूचित हथियारों तथा मंच से आयात प्रतिबंधित किया जायेगा.
  2. एक प्रौद्योगिकी मूल्यांकन प्रकोष्ठ (Technology Assessment Cell– TAC) का गठन किया जायेगा. यह देश के प्रमुख उद्योगों के अतिरिक्त, बख्तरबंद वाहनों, पनडुब्बियों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और राडार जैसी प्रमुख प्रणालियों के उत्पादन के लिए डिजाइन, विकास तथा उत्पादन हेतु औद्योगिक क्षमता का आकलन करेगी.
  3. एक परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management Unit– PMU) की स्थापना की जायेगी, जिसमें उपकरणों तथा हथियार प्रणालियों के रख-रखाव के लिए आवश्यकताओं आदि का आकलन किया जाएगा.
आगे की राह
  • रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, प्रभावी रक्षा क्षमता और राष्ट्रीय संप्रभुता को बनाए रखने तथा सैन्य श्रेष्ठता हासिल करने के लिये यह एक महत्त्वपूर्ण घटक साबित होगी.
  • इसे प्राप्त करने से रणनीतिक स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी साथ ही लागत प्रभावी रक्षा उपकरण और रक्षा आयात से संबंधित व्यय पर बचत हो सकेगी जो बाद में भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढाँचे को सशक्त बनाने में प्रयुक्त हो सकती है.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

रक्षा उत्पादन एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति किस प्रकार ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को दृढ़ता प्रदान कर सकती है? विश्लेषण करें.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : Expression of opinion or anguish is not contempt amounting to scandalising the court: Prashant Bhushan tells SC

संदर्भ

हाल ही में, प्रतिष्ठित सिविल राइट्स अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उनके द्वारा किये गए ट्वीट के आधार पर शुरू की गई स्व-प्रेरित (suo motu) अवमानना ​​कार्रवाई में सर्वोच्च न्यायालय में अपना उत्तर दिया है.

पृष्ठभूमि

कुछ समय पहले प्रशांत भूषण ने दो ट्वीट किए थे – इनमें से एक ट्वीट मोटरसाइकिल पर भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद ए. बोबड़े की फोटो तथा दूसरा ट्वीट गत छह वर्षों में चार मुख्य न्यायाधीशों के अधीन उच्चत्तम न्यायालय के कामकाज के संदर्भ में था.

  1. इसके बाद, न्यायालय द्वारा 22 जुलाई को प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना ​​नोटिस जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि ट्वीट के द्वारा न्यायालय तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद की गरिमा तथा अधिकार का हनन किया गया है.

प्रशांत भूषण द्वारा अपने बचाव में रखा गया पक्ष

  1. अपने विचारों अथवा वास्तविक वेदना की अभिव्यक्ति, मुखर, अप्रिय अथवा अरुचिकर हो सकती है, मगर, इसे न्यायालय की अवमानना के समान नहीं माना जा सकता है,
  2. मुख्य न्यायाधीश, न्यायालय नहीं हैं, और न्यायालय की छुट्टियों के दौरान CJI द्वारा किये गए आचरण के तरीकों के संबंध में चिंता व्यक्त करना, न्यायालय का अपमान करने के जैसा नहीं है.
  3. इसके अतिरिक्त, चार मुख्य न्यायाधीशों द्वारा ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ के रूप में शक्तियों के प्रयोग करने के तरीकों अथवा शक्तियों के प्रयोग करने में विफल रहते हुए निरंकुशता, बहुलतावाद, असहमति का दमन, व्यापक रूप से राजनीतिक बंदीकरण की अनुमति देने के संदर्भ में गंभीर प्रवृत्ति के मामलों को उठाना, न्यायालय का अपमान करने के समान नहीं है.

इस प्रकार के मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के द्वारा किये पहले के निर्णय

मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सी. एस. कर्णन के विरूद्ध अवमानना ​​मामले में उच्त्तम न्यायालय ने टिप्पणी की थी, कि ‘अवमानना ​​का कानून, जनमत के प्रति संवेदनशील हो जाने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा के लिए नहीं बनाया गया है, न्यायाधीशों से दृढ़ और धैर्यवान व्यक्ति होने की अपेक्षा की जाती है.’

न्यायालय द्वारा अवमानना ​​शक्ति का प्रयोग

  1. वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संविधान में स्थापित मूल्यों के ‘मुख्य संरक्षक’ है, इसलिए, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा अवमानना ​​शक्तियों का प्रयोग आवश्यक रूप से, ‘तर्कसंगत प्रतिबंधो’ से परे नहीं किया जाना चाहिए,
  2. अनुच्छेद 129 के अंतर्गत अवमानना ​​की शक्ति का उपयोग न्याय प्रशासन में सहायता के लिए किया जाना चाहिए.
  3. सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली तथा अन्य संबधित विषयों की जानकारी रखने वाले प्रवुद्ध नागरिकों द्वारा की गयी आलोचनात्मक टिप्पणियों को दबाने के लिए अवमानना क़ानून का प्रयोग नहीं किया जा सकता है.

निष्कर्ष

  1. लोकतंत्र में नागरिकों को किसी संस्थान से संबंधित मामलों में स्वतंत्र तथा निष्पक्ष रूप से चर्चा करने और संस्थान में सुधार करने के लिएजनमत बनाने का पूर्ण अधिकार है.
  2. हालांकि, प्रत्येक आलोचना उत्तरदायित्व के साथ की जानी चाहिए तथा इसका सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं कि न्यायिक अवमानना संविधान द्वारा दी गई वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करती है. तर्क सहित अपना मंतव्य प्रस्तुत करें.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Khadi Agarbatti Atma Nirbhar Mission

संदर्भ

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री नितिन गटकरी ने अगरबत्ती उत्पादन में भारत को आत्म-निर्भर बनाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission – KVIC) द्वारा प्रस्तावित ‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ कार्यक्रम को स्वीकृति दे दी है.

खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन क्या है?

‘खादी अगरबत्ती आत्म-निर्भर मिशन’ नाम से शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में बेरोजगारों और प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार पैदा करना और घरेलू अगरबत्ती उत्पादन में पर्याप्त तेजी लाना है.

मिशन से जुड़ें मुख्य बिंदु

  • निजी सार्वजनिक साझेदारी पर केवीआईसी द्वारा बनाई गई इस योजना में बहुत कम निवेश में ही स्थायी रोजगार का सृजन किया जा सकेगा.
  • यह योजना निजी अगरबत्ती निर्माताओं को उनके द्वारा बिना किसी पूंजी निवेश के ही अगरबत्ती का उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगी.
  • इस योजना के अंतर्गत, केवीआईसी सफल निजी अगरबत्ती निर्माताओं के माध्यम से कारीगरों को अगरबत्ती बनाने की स्वचालित मशीन और पाउडर मिक्सिंग मशीन उपलब्ध कराएगा.
  • इस संबंध में पीपीपी मोड पर परियोजना के सफल संचालन के लिए केवीआईसी और निजी अगरबत्ती निर्माता के बीच दो-पक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.
  • केवीआईसी मशीनों की लागत पर 25% सब्सिडी प्रदान करेगा और कारीगरों से हर महीने सरल किस्तों में शेष 75% की वसूली करेगा.
  • कारीगरों के प्रशिक्षण की लागत केवीआईसी और निजी व्यापार भागीदार के बीच साझा की जाएगी, जिसमें केवीआईसी लागत का 75% वहन करेगा, जबकि 25% व्यापार भागीदार द्वारा भुगतान किया जाएगा.

इस योजना के लाभ

  • इस परियोजना के पूर्ण कार्यान्वयन होने पर अगरबत्ती उद्योग में हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर का सृजन होगा.
  • केवीआईसी ने केवल स्थानीय रूप से भारतीय निर्माताओं द्वारा निर्मित मशीनों की खरीद का फैसला किया है, जिससे स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा.

खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) क्या है?

  1. खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना खादी ग्रामोद्योग आयोग 1956 के तहत हुई थी.
  2. 1957 में अखिल भारतीय खाड़ी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (All India Khadi and Village Industries Board) के सारे कार्य इस आयोग को सौंप दिए गये.
  3. यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत एक शीर्ष संगठन है.
  4. इसका कार्य खादी एवं ग्रामीण उद्योगों की स्थापना एवं विकास को संगठित करना और उनके विकास में सहायता देना है.
  5. आयोग के तीन मुख्य उद्देश्य हैं
  • सामाजिक उद्देश्य – ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करना.
  • आर्थिक उद्देश्य – बिक्री योग्य सामान तैयार करना.
  • व्यापक उद्देश्य – लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और उनमें एक मजबूत ग्रामीण सामुदायिक भावना पैदा करना.
मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की नवीन परिभाषा से उद्यमियों को लाभ मिलने की कितनी संभावना है? संक्षिप्त चर्चा करें


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Code on Social Security, 2019

संदर्भ

श्रम मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 पर अपने प्रतिवेदन में सिफारिश की है कि किसी कर्मचारी को उसके रोजगार की समाप्ति के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी के भुगतान की समय सीमा मौजूदा पाँच वर्ष की नियमित सेवा से घटाकर केवल एक वर्ष की नियमित सेवा कर दी जानी चाहिए.

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 के उद्देश्य

  1. वर्तमान कानूनों को एक जगह लाना
  2. नई पहलें करना जैसे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सार्वभौम सामाजिक सुरक्षा तथा अपारम्परिक काम करने वाले गिग श्रमिकों (gig workers) की बीमा और स्वास्थ्य.
  3. EPFO और ESIC जैसे संगठनों को निगमित करना.

संहिता के मुख्य तत्त्व

  1. असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए बीमाभविष्य निधिजीवन बीमा :केंद्र सरकार समय-समय पर असंगठित कर्मचारियों के लिए उचित कल्याण कार्यक्रम बनाएगी जिसमें उनके जीवन एवं अपंगता की बीमा की जायेगी. उन्हें स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा तथा अन्य ऐसे लाभ दिए जाएँगे.
  2. EPFO औरESIC का निगमीकरण : EPFO और ESIC जैसे पेंशन, बीमा एवं सेवा निवृत्ति बचत निकायों को निगमित किया जाएगा. यह व्यवस्था की जायेगी कि इन संगठनों की अध्यक्षता श्रम मंत्री, श्रम सचिव, केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त और ESIC महानिदेशक डिफ़ॉल्ट से प्राप्त न कर सकें.
  3. गिग कर्मियों को लाभ :केंद्र सरकार गिग कर्मियों और प्लेटफार्म कर्मचारियों के लिए समुचित सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ चलाएगी जिसके अंतर्गत उनको जीवन एवं अपंगता बीमा, स्वास्थ्य मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा एवं अन्य लाभ दिए जाएँगे.
  4. मातृत्व लाभ :संहिता में वर्णित प्रावधानों के तहत प्रत्येक स्त्री को मातृत्व लाभ देना होगा. इसके लिए उसकी वास्तविक अनुपस्थिति की अवधि की औसत दैनिक मजदूरी की दर पर भुगतान किया जाएगा.
  5. संहिता के पारित होने पर बनने वाली सामाजिक संहिता में आठ वर्तमान श्रम कानून समाहित हो जाएँगेये हैं– कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923; कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948, कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952; मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961; ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972; सिनेकर्मी कल्याण कोष अधिनियम, 1981; भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक उपकर अधिनियम, 1996 और असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008.
  6. छूट: केंद्र सरकार को यह शक्ति होगी कि वह इस संहिता के सभी या किसी एक प्रावधान से कुछ चुने हुए प्रतिष्ठानों को छूट दे सकती है और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार को अनिवार्य बना सकती है.
  7. वर्तमान में पाँच वर्ष की सेवा पूरी करने पर ही किसी निश्चित अवधि वाले कामगार को ग्रेच्युटी दी जाती है. परन्तु इस संहिता के अनुसार अब एक साल की सेवा पर ही अनुपातिक रुप से ग्रेच्युटी दी जा सकती है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएँ और कार्यस्‍थलों में कामकाज की बेहतर स्थितियाँ श्रमिकों के कल्‍याण के साथ ही देश के आर्थिक विकास के लिये भी पहली शर्त होती है. देश का स्‍वस्‍थ कार्यबल अधिक उत्‍पादक होगा और कार्यस्‍थलों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी जो कर्मचारियों के साथ ही नियोक्‍ताओं के लिये भी लाभप्रद रहेगा. हालाँकि यहाँ इस बात पर भी गौर किये जाने की आवश्यकता है कि अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से श्रमिक अधिकारों में वृद्धि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. लेकिन आर्थिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि यदि श्रमिक अधिकार एवं उनकी समस्याओं को एक उचित मंच प्रदान नहीं किया जाएगा तो धीरे-धीरे यह नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करेगा. इसके अतिरिक्त किसी भी लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार होता है, कुछ विशेष मामलों को छोड़कर औद्योगिक संस्थान भी इसके दायरे में आते हैं. इसी विचार के आधार पर श्रमिक संगठनों एवं हड़ताल को वैधानिक मान्यता दी जाती रही है.

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न
 

“यदि कानून अधिक श्रमिकोन्मुख होते हैं तो उद्योगों की कार्यक्षमता एवं उत्पादन के प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं दूसरी ओर, यदि श्रम कानूनों को निजी क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाया जाता है तो श्रमिकों का शोषण होने की संभावना बनी रहती है.” इस कथन की समालोचनात्मक समीक्षा करें.


Prelims Vishesh

Places in News- Galapagos archipelago :-

  • इक्वाडोर के समीप स्थित समुद्र में इस ऋतु में ठंडी हम्बोल्ट (Humboldt) जलधाराएँ बहती हैं.
  • ये धाराएँ ढेर सारे पोषक तत्त्व लेकर आती हैं जिस कारण यहाँ पर समुद्री प्रजातियों की भरमार हो जाती है.
  • पिछले सप्ताह देखा गया कि चीन के जहाज यहाँ बार-बार आकर मछली मार रहे हैं.
  • यह गतिविधि गालापेगोस द्वीपसमूह के पास देखी गई.
  • ज्ञातव्य है कि प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका महादेश से 1,000 किलोमीटर दूर 60,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ गालापेगोस द्वीपसमूह इक्वाडोर देश का एक अंग है.
  • इस द्वीपसमूह का नाम गालापेगोस इसलिए पड़ा कि यहाँ बड़े-बड़े कछुए मिलते हैं जिन्हें स्पेनिश भाषा में गालापेगोस कहा जाता है.

John Hume :

  • जैसा कि सर्वविदित है कि 1998 के पहले उत्तरी आयरलैंड तीन दशकों तक व्यापक हिंसा का रंगमंच हुआ करता था जिसमें 3500 से अधिक लोगों को अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा था. परन्तु उस वर्ष एक शान्ति समझौता हुआ जिसके मुख्य प्रणेता जॉन ह्यूम नामक एक दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थे. इसके लिए उन्हें शांति का नॉवल पुरस्कार भी मिला था.
  • पिछले दिनों 83 वर्ष की आयु में वे चल बसे.

Electronic Vaccine Intelligence Network (eVIN) :-

  • भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN) नामक ऐप संचालित कर रहा है जिसमें क्षण-प्रतिक्षण की यह सूचना होगी कि पूरे देश में कितने टीके भंडार में पड़े हैं और कितने वहाँ से निकलकर प्रयोग में लाये जा रहे हैं.
  • साथ ही इससे पता चलेगा कि ये टीके जिन शीत भंडारों में रखे जाते हैं वहाँ का तापमान कितना है.

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