Sansar डेली करंट अफेयर्स, 03 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 03 September 2019


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : Fit India Movement

संदर्भ

पिछले दिनों राष्ट्रीय खेलकूद दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने राष्ट्रव्यापी फिट इंडिया आंदोलन का आरम्भ किया.

फिट इंडिया आन्दोलन क्या है?

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा अभिकल्पित एक राष्ट्रीय आन्दोलन है जिसका उद्देश्य प्रत्येक भारतीय को उसके दिन-प्रतिदिन के जीवन में चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए कुछ साधारण और सरल उपायों को अपनाने हेतु प्रेरित करना है.

कहने की आवश्यकता नहीं कि आज इस प्रकार की पहल अत्यावश्यक है क्योंकि इसके माध्यम से देश एक स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर हो सकता है.

राष्ट्रीय खेलकूद दिवस

यह दिवस 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है. इसी दिन राष्ट्रपति भारतीय खिलाड़ियों को उनकी साधारण उपलब्धियों के लिए ये पुरस्कार प्रदान करते हैं – राष्ट्रीय खेलकूद पुरस्कार, राष्ट्रीय साहसिक खेल पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, खेल रत्न, द्रोणाचार्य पुरस्कार और ध्यानचंद पुरस्कार.


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : North East Rural Livelihood Project (NERLP)

संदर्भ

पिछले दिनों हुए एक अध्ययन से पता चला है कि पूर्वोत्तर ग्रामीण आजीविका परियोजना (North-East Rural Livelihood Project – NERLP) के चलते मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के 11 जिलों में रहने वाले 3 लाख परिवारों की आजीविका की दशा में सुधार हुआ है.

इस परियोजना के अंतर्गत 10,462 लड़के-लड़कियों को विभिन्न प्रकार की आजीविकाओं से सम्बंधित कौशल्य का प्रशिक्षण दिया गया है और उनमें से 5,494 को आज नौकरी मिली हुई है.

NERLP क्या है?

  • यह विश्व बैंक द्वारा सहायता प्राप्त एक बहु-राज्यीय आजीविका परियोजना है जिसे पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) ने 2012 में आरम्भ किया था.
  • यह परियोजना मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के 11 जिलों में कार्यान्वित हुई थी.
  • इस परियोजना का उद्देश्य इन चार पूर्वोत्तर राज्यों के गाँवों में रहने वाले जनों, विशेषतः स्त्रियों, बेरोजगार युवाओं एवं सर्वाधिक वंचित लोगों, को आजीविका प्रदान करना है.
  • यह परियोजना विकास से सम्बंधित पाँच रणनीतियों को लेकर चली है. ये रणनीतियाँ हैं – सामाजिक सशक्तीकरण, आर्थिक सशक्तीकरण, भागीदारी का विकास, परियोजना प्रबंधन एवं आजीविका एवं सम्बद्ध विकास.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health and Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : E-cigarettes

संदर्भ

ई-सिगरेट को प्रतिबंधित करने के लिए अध्यादेश का एक प्रारूप (Prohibition of E-cigarettes Ordinance) तैयार किया गया है जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय निर्देशानुसार एक मंत्री समूह को विचारार्थ भेजा जा रहा है.

प्रारूप क्यों लाया जा रहा है?

ई-सिगरेट की हानिकारकता को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले राज्यों को निर्देश दिया था कि वे इन सिगरेटों के विरुद्ध कार्रवाई करें. परन्तु न्यायालय की नज़रों में यह निर्देश खरा नहीं उतरा. इसलिए इस विषय में एक अध्यादेश लाने की बात सोची गई. पिछले दिनों एक उच्च न्यायालय में यह याचिका दी गई थी कि ई-सिगरेट पर अध्यादेश लाने की तैयारी को रोक दिया जाए. परन्तु उच्च न्यायालय ने यह याचिका स्वीकार नहीं की जिससे उत्साहित होकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने अध्यादेश लाने का संकल्प किया.

प्रारूप में प्रस्तावित प्रावधान

इस प्रारूप में यह प्रावधान किया जा रहा है कि अध्यादेश में वर्णित प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी व्यक्ति को एक से तीन वर्ष का कारावास और 1 से 5 लाख रु. तक अर्थदंड दिया जाएगा.

पृष्ठभूमि

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (ICMR) ने ई-सिगरेट सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन प्रदाता प्रणालियों (Electronic Nicotine Delivery Systems – ENDS) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था.

सुझाव का आधार क्या था?

  • ई-सिगरेट आदि प्रयोग करने वालों में लत पैदा करते हैं. इनमें न केवल निकोटीन होता है अपितु सुगंध देने वाले पदार्थ और वाष्प उत्पन्न करने वाले हानिकारक पदार्थ भी होते हैं. सुगंध और भाप के कारण युवा और किशोर इनके प्रति आकर्षित होते हैं.
  • ENDS अथवा ई-सिगरेट के प्रयोग से तम्बाकू की नई लत का रास्ता खुल जाता है और इस प्रकार जनस्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है.
  • अध्ययनों में यह स्पष्ट किया गया है कि लम्बे समय तक इनके प्रयोग से मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐसे कुछ दुष्प्रभाव ये हैं – DNA में क्षति, साँस की बीमारी, हृदय रोग, स्नायविक विकार, कैंसर, कोषीय एवं आणविक विषाक्तता. यहाँ तक की यह गर्भावस्था के समय भ्रूण के विकास को भी प्रभावित कर देता है.
  • शोध से पता चला है कि जो युवा ई-सिगरेट आदि का प्रयोग करते हैं वे आगे चलकर सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं.
  • ENDS का आदि हो जाने के बाद यह बहुत हद तक संभव है कि व्यक्ति अन्य नियमित उत्पादों के साथ प्रयोग करने लगे और धूमपान की ओर बढ़ जाए.

ई-सिगरेट क्या है?

  • इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट अथवा ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाली एक वाष्पोत्सर्जक (vaporizer) है जिसे देखने से लगता है कि उपभोक्ता तम्बाकू का सेवन कर रहा है. यह वाष्प ई-सिगरेट के अन्दर स्थित तरल निकोटिन (juice) के गर्म होने से निकलता है.
  • निकोटिन जूस भाँति-भाँति के स्वाद के होते हैं और इनमें निकोटिन की मात्रा भी कम-ज्यादा होती है. इस जूस में प्रमुख्य रूप से दो अवयव होते हैं – i) वेजिटेबल ग्लीसरिन (जो टूथपेस्ट और कई भोज्य पदार्थों में प्रयुक्त होता है) और ii) प्रोप्लीन ग्लाईकोल (propylene glycol) (जो fog machines में प्रयुक्त होता है).
  • ई-सिगरेट के पक्षधर यह पक्ष देते हैं कि इसे पीना सामान्य सिगरेट की तुलना में अधिक स्वास्थ्यकर है क्योंकि इसमें उपभोक्ता के शरीर में मात्र जलवाष्प और निकोटिन ही जाता है.

ई-सिगरेट और उसके दुष्प्रभाव पर WHO का रिपोर्ट

  • इस रिपोर्ट के अनुसार e-cigarette में प्रयोग होने वाला निकोटिन गर्भावस्था में भ्रूण के विकास पर बुरा प्रभाव डालता है. इससे दिल के रोग की भी संभावना होती है. इसको पीने से इसकी लत पड़ जाती है.
  • WHO रिपोर्ट के अनुसार निकोटिन कैंसरकारी नहीं है, परन्तु इसके कारण किसी ट्यूमर में वृद्धि हो सकती है और नसों को क्षति पहुँच सकती है.
  • भ्रूणावस्था और किशोरवस्था में निकोटिन लेने से मस्तिष्क का विकास अवरुद्ध हो जाता है और उपभोक्ता को अत्यधिक चिंता करने की आदत पड़ जाती है.

आगे की राह

सरकार को चाहिए कि वह ई-सिगरेट के ऑनलाइन अथवा अन्य प्रकार से विक्रय और विज्ञापन पर उचित प्रतिबंध लगाये तथा इस विषय में स्वास्थ्य से सम्बंधित चेतावनी तत्काल प्रकाशित करे. सरकार इन सिगरेटों से होने वाले खतरों के बारे में स्वतंत्र रूप से वैज्ञानिक शोध करवाए.


GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : National Urban Livelihoods Mission (DAY-NULM)

संदर्भ

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) को उसके PAiSA पोर्टल के लिए प्रतिष्ठित SKOCH शासन स्वर्ण पुरस्कार (SKOCH Governance Gold Award) से सम्मानित किया गया.

PAiSA पोर्टल क्या है?

  • PAiSA का पूरा नाम है – Portal for Affordable Credit and Interest Subvention Access.
  • इस पोर्टल का अनावरण नवम्बर 2018 में हुआ था.
  • भारत सरकार ने दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन(DAY-NULM) के अंतर्गत लाभार्थियों को दिए जाने वाले बैंक ऋण से सम्बन्धित ब्याज के प्रसंस्करण के लिए एक केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक मंच – PAiSA – का अनावरण किया था.
  • इस ऐप का रूपांकन और निर्माणइलाहाबाद बैंक ने किया है जो इसके लिए नाभिक बैंक (nodal bank) है.

PAiSA के लाभ

  • सरकारी सेवाओं को लाभार्थियों तक पहुँचाने में अधिक से अधिक पारदर्शिता और कुशलता आएगी जिसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत रहती है.
  • इससे लाभार्थियों को मासिक स्तर पर प्रत्यक्ष लाभ स्थानान्तरण (DBT) की राशि ससमय प्राप्त हो सकेगी और उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा.
  • यह आशा है कि इस वर्ष के अंत-अंत तक सभी 35 राज्य/केंद्रशाषित क्षेत्र, सभी अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और सहकारी बैंक इस मंच से जुड़ जायेंगे.

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM)

  • यह शहरी आजीविका से सम्बंधित एक राष्ट्रीय मिशन है. इस योजना का पूरा नाम राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशनथा पर अब इसका नाम बदलकर दीनदयाल अन्त्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन रख दिया गया है.
  • यह योजना देश के 4,041 शहरों पर अर्थात् देश की सम्पूर्ण शहरी जनसंख्या पर लागू है.

DAY-NULM के अवयव

योजना के दो अवयव हैं –  शहरी और ग्रामीण.

  • शहरी अवयव का कार्यान्वयन आवास एवं शहरी निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा.
  • ग्रामीण अवयव का नाम दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना है जिसका कार्यान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है.

DAY-NULM के उद्देश्य

  • शहर के निर्धन परिवारों को स्वरोजगार और अन्य कौशल्यपूर्ण रोजगार का अवसर देते हुए उनकी गरीबी और असहायता को दूर करना.
  • शहर के बेघर लोगों को क्रमबद्ध रूप से ऐसे आश्रय मुहैया करना जिनमें जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ हों.
  • शहर में फेरी लगाने वालों को उचित जगह बैंक आदि का ऋण और सामजिक सुरक्षा की सुविधा देना और उन्हें ऐसे कौशल्य सिखाना कि वे बाजार में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Campaign Angikaar

संदर्भ

व्यवहारगत परिवर्तन लाने के लिए सरकार “अंगीकार” नाम एक अभियान पर विचार कर रही है. यह अभियान 2019 की गाँधी जयंती (150वीं) पर अर्थात् अक्टूबर 2 को आरम्भ होगा. इस अभियान का समापन मानवाधिकार दिवस अर्थात् 10 दिसम्बर, 2019 को होगा.

अंगीकार क्या है?

  • अंगीकार एक अभियान है जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री आवासीय योजना (शहरी) के अंतर्गत पूरे किये हुए घर पाने वाले लाभार्थियों के सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन लाना है.
  • यह परिवर्तन इन विषयों पर अपेक्षित होगा – जल एवं ऊर्जा का संरक्षण, अपशिष्ट निपटान, स्वास्थ्य, वृक्ष रोपण, सफाई एवं स्वच्छता.
  • यह अभियान अलग-अलग मंत्रालयों के समान विषयों से सम्बंधित योजनाओं और मिशनों के साथ सामंजस्य रखेगा. इस सन्दर्भ में विशेष रूप से उज्ज्वला और आयुष्मान भारत योजनाओं पर ध्यान रखा जाएगा.
  • इस अभियान में दरवाजे-दरवाजे जाकर प्रचार-प्रसार किया जाएगा तथा साथ ही वार्ड और नगर के सत्र पर भी कार्य्रक्रम आयोजित किये जाएँगे.

PMAY-Urban क्या है?

  • प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी निर्धनता उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा किया गया है.
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अभियान की शुरूआत 25 जून, 2015 को की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी पात्र शहरी परिवारों को 2022 तक आवास प्रदान करना है.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है. यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है. इस ऋण पर 15 साल तक के लिए 5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

Prelims Vishesh

What is Coprolite? :-

  • करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर पशुओं ने जो विष्ठा छोड़ी वह कहीं-कहीं जीवाश्म में बदल गये. ऐसे जीवाश्म को कोप्रोलाइट कहते हैं.
  • ऐसे जीवाश्मों का अध्ययन करके वैज्ञानिक पता लगा सकते हैं कि ये किस पशु के शरीर से निकले हैं और वह पशु क्या खाया करता था.

e-Course on Vulnerability Atlas of India :

  • “e-Course on Vulnerability Atlas of India” एक पाठ्यक्रम है जिसका आयोजन आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय, योजना निर्माण और स्थापत्य स्कूल (SPA), नई दिल्ली तथा निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी प्रोत्साहन परिषद् (BMTPC) संयुक्त रूप से करते हैं.
  • इस पाठ्यक्रम में प्राकृतिक आपदाओं, जैसे- भूकम्प, चक्रवात, भूस्खलन, बाढ़ आदि के बारे में जानकारी दी जाती है तथा यह बताया जाता है कि किस जिले में इन आपदाओं से कितना खतरा है.

Anandan’s day gecko :

Anandan’s-day-gecko

  • नीलगिरी पहाड़ियों में पिछले दिनों एक नए डे गेको (day gecko) का पता चला है जिसको Cnemaspis anandani (Anandan’s day gecko) नाम दिया गया है.
  • इसका आकार मात्र 42 mm है.
  • विदित हो कि पश्चिमी घाटों में इस प्रकार के गेको पाए जाए हैं.

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