Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 02 September 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Functions and responsibilities of the Union and the States, issues and challenges pertaining to the federal structure, devolution of powers and finances up to local levels and challenges therein.

Topic : Code of Conduct for MPs and MLAs

संदर्भ

लोक सभा अध्यक्ष ने बताया है कि विधायी सदनों की कार्यवाही में विघ्न को रोकने के लिए एक सामान्य आचार संहिता बनाई जायेगी और इसके लिए अध्यक्षता करने वाले अधिकारियों की एक समिति गठित की जाएगी. यह समिति विधान सभाओं के अध्यक्षों तथा विधान परिषदों के सभापतियों से परामर्श करके इसी वर्ष के अंत-अंत तक अपना प्रतिवेदन समर्पित करेगी.

इतिहास

  1. उच्च पदों पर कार्यरत संवैधानिक अधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों के लिए आचार संहिता पर चर्चा पहले भी होती रही है.
  2. 1964 में केन्द्रीय मंत्रियों के लिए एक संहिता स्वीकार की गई थी और राज्य सरकारों को कहा गया था कि वे इस संहिता को अपने यहाँ लागू करें.
  3. 1999 में मुख्य न्यायाधीशों का एक सम्मलेन हुआ जिसमें सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए एक पन्द्रह-सूत्री संहिता अपनाई गई.
  4. सांसदों के लिए दोनों सदनों में नैतिकता के विषय में संसदीय स्थायी समितियों का गठन हुआ. इसी क्रम में मई 30, 1997 को राज्य सभा के सभापति के.आर. नारायणन ने इस समिति का उद्घाटन किया.

अन्य देशों में क्या स्थिति है?

  • UK में 19 जुलाई, 1995 के एक संकल्प के आलोक में सांसदों के लिए आचार संहिता बनाई गई थी.
  • कनाडा में एक हित विरोध एवं नैतिकता आयुक्त होता है जो किसी अन्य सांसद के कहने पर अथवा इस आशय का सदन से संकल्प प्राप्त होने पर स्वयं अपनी पहल पर उन मामलों की जाँच कर सकता है जहाँ हित विरोध संहिता का उल्लंघन हुआ हो.
  • जर्मनी में 1972 से वहाँ की संसद (बंडेस्टैग) के सदस्यों के लिए एक आचार संहिता लागू है.
  • अमेरिका में भी 1968 से एक आचार संहिता है.
  • पाकिस्तान में सेनेट के सदस्यों के लिए आचार संहिता है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : China’s One Country Two Systems policy

संदर्भ

हॉन्ग कॉन्ग में पिछले 13 सप्ताहों से लगातार एक आन्दोलन चल रहा है. हॉन्ग कॉन्ग के निवासियों का आरोप है कि चीन हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्तता पर प्रहार कर रहा है. इसको लेकर वहाँ के युवाओं और स्थानीय सरकार में भारी तनाव चल रहा है.

इन कारणों से एक बार फिर एक देश दो प्रणाली की नीति (One Country Two Systems Policy) पर फिर से चर्चा होने लगी है.

hong kong protest

एक देश दो प्रणाली की नीति क्या है?

हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटेन का उपनिवेश था. ब्रिटेन ने उसे चीन से 99 वर्ष की लीज पर लिया था. यह लीज 1997 में पूरी हो गयी तो ब्रिटेन ने इसे चीन को लौटा दिया. परन्तु “एक देश दो प्रणालियाँ” इस सिद्धांत के अंतर्गत हॉन्ग कॉन्ग को अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र का दर्जा दे दिया गया. फलतः हॉन्ग कॉन्ग के पास अपने कानून और अपने न्यायालय हैं. इसके अतिरिक्त यहाँ के निवासियों को कई प्रकार की नागरिक स्वतंत्रता मिली हुई है. हॉन्ग कॉन्ग और चीन के बीच प्रत्यर्पण से सम्बंधित कोई समझौता नहीं है.

हॉन्ग कॉन्ग की मुद्रा भी अलग है, परन्तु रक्षा और कूटनीति चीन के हाथ में है. हॉन्ग कॉन्ग के पास अपना एक लघु संविधान है जिसको 2047 तक के लिए मान्य घोषित किया गया है.

मकाउ की स्थिति

हॉन्ग कॉन्ग की भाँति मकाउ भी एक उपनिवेश था जो पुर्तगाल के आधिपत्य में था. दिसम्बर 20, 1999 को मकाउ की संप्रभुता चीन को हस्तांतरित हो गई. चीन एवं पुर्तगाल के बीच में एक समझौता हुआ जिसमें चीन ने वही सारी सुविधाएँ देने का वादा किया जो उसने हॉन्ग कॉन्ग को दी थीं. इसलिए मकाउ में भी एक अलग मुद्रा चलती है और इसकी अपनी आर्थिक और कानूनी प्रणालियाँ हैं. मकाउ के अपने संविधान को भी 2049 तक मान्यता मिली थी. हॉन्ग कॉन्ग की तरह की मकाउ की भी रक्षा और कूटनीति चीन के हाथ में है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life. Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Study to check antibiotic resistance in Ganga

संदर्भ

पूरी गंगा नदी में एंटीबायटिक प्रतिरोधी जीवाणुओं की उपस्थिति की जाँच करने और इसमें जीवाणु विविधता का आकलन करने के लिए भारत सरकार ने एक शोध परियोजना बनाई है जिसमें 9.3 करोड़ रु. का व्यय आएगा.

शोध परियोजना का उद्देश्य

  • नालों और उद्योग प्रतिष्ठानों से बहकर गंगा में आने वाले प्रदूषण के प्रकार को बतलाना.
  • गंगा में एंटीबायटिक-प्रतिरोध की स्थिति और उससे मानव स्वास्थ्य को होने वाले खतरे का आकलन करना.
  • पशुओं और मनुष्यों की आँत में रहने वाले ई-कोलाई (Eschericia coli) बैक्टीरिया के स्रोतों का पता लगाना.

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परियोजना की आवश्यकता क्यों?

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग और UK रिसर्च कौंसिल ने मिलकर 2017 में एक प्रतिवेदन दिया था जिसमें कहा गया था कि भारत में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया से सम्बंधित एंटीबायटिक-प्रतिरोध की दर सबसे अधिक है. इसी प्रकार का एक और अध्ययन हुआ था जिसमें प्रतिवेदित किया गया था कि मई और जून के महीने में जब गंगा में लोग अधिक नहाने आते हैं तो उस समय “सुपरबग” उत्पन्न करने वाले प्रतिरोधी जीनों का स्तर वर्ष के अन्य महीनों की तुलना में लगभग 60 गुना बढ़ जाता है.

एंटीबायटिक-प्रतिरोध क्या है?

  • बैक्टीरिया, वायरस और कुछ परजीवियों में कभी-कभी जीवाणु विरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial resistance – AMR) की क्षमता उत्पन्न हो जाती है और इस कारण इस पर एंटीबायटिक, एंटीवायरल और एंटीमलेरिया दवाओं का कोई असर नहीं होता. फलतः संक्रमण के लिए प्रयोग होने वाली मानक दवाएँ व्यर्थ हो जाती हैं और संक्रमण बना रहता है एवं अन्यत्र फ़ैल भी जाता है.
  • जब कोई जीवाणु एक से अधिक दवा का प्रतिरोधी हो जाता है तो उस जीवाणु को मल्टीड्रग-प्रतिरोधक (multidrug-resistant) कहते हैं.

डॉक्टर चिंतित क्यों हैं?

जीवाणु प्रतिरोध वर्षानुवर्ष बढ़ता जा रहा है और ऐसे सुपरबग हावी होते जा रहे हैं जिनपर एंटीबायटिक दवाओं का असर बंद हो चला है. डॉक्टरों को डर है कि हमलोग धीरे-धीरे उस अवस्था में पहुँच रहे हैं जब संक्रमण जानलेवा सिद्ध हो जाए. उदाहरण के लिए ई-कोलाई में कोलिस्टिन एंटीबायटिक एक रामबाण दवा थी, परन्तु ई-कोलाई ने उसके विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर लिया है. साथ ही यह भी खतरनाक बात है कि एंटीबाय्रिक प्रतिरोध एक बैक्टीरिया से दूसरे बैक्टीरिया तक बहुत सरलता से पहुँच जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंतित है कि जब एंटीबायटिक व्यर्थ हो जाएँगे तो ढेर सारे बैक्टीरिया सुपरबग हो जाएँगे. अभी ही यक्ष्मा, सुजाक और निमोनिया जैसे संक्रमण का परम्परागत एंटीबायटिक से उपचार करना कठिन होता जा रहा है.

क्या करना चाहिए?

  1. समस्या के समाधान के लिए निजी उद्योग, लोकोपकारी समूहों और नागरिक कार्यकर्ताओं सब को आगे आना चाहिए.
  2. निजी दवा निर्माताओं को चाहिए कि वे उत्तरदायित्वपूर्ण रीति से दवाओं के वितरण पर ध्यान दें.
  3. लोकोपकारी धर्मादा प्रतिष्ठानों को नए एंटीबायटिक बनाने में आर्थिक सहायता देनी चाहिए.
  4. नागरिक कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे जीवाणु प्रतिरोध के बारे में जनता को जागरूक करें.
  5. जीवाणु-प्रतिरोध को टालने के लिए सबसे उत्तम उपाय स्वच्छता बरतना और टीके लेना है. अतः इसके लिए अभियान चलाकर काम करना चाहिए.

GS Paper 3 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life. Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : H1N1

संदर्भ

भारत में पिछले एक दशक में 1.58 लाख लोग H1N1 वायरस से संक्रमित हुए और उनमें से 10,000 से अधिक लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा.

H1N1 क्या है?

  • स्वाइन फ्लू एक स्वास रोग है जो टाइप A इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण सूअरों में होता है. इस वायरस का नाम H1N1 है. आजकल यह वायरस मौसम के अनुसार मनुष्यों को भी लग जाता है.
  • यह वायरस उस व्यक्ति को हो सकता है जो इससे संक्रमित सूअरों के सम्पर्क में आता है अथवा ऐसे वातावरण में रहता है जो इस वायरस से प्रदूषित है.
  • गर्म देशों में इसका संक्रमण मानसून में होता है जबकि ठन्डे देशों में ये जाड़ों में फैलता है.
  • इस रोग के लक्षण हैं – खासी, ज्वर, गले की खराश, नजला, सिर-दर्द, शरीर में दर्द आदि.

निदान और उपचार

  • रोग नियंत्रण एवं निवारण केंद्र का सुझाव है कि H1N1 के निदान के लिए real-time polymerase chain reaction पद्धति अपनानी चाहिए.
  • इसके उपचार के लिए एंटी-वायरल दवाइयाँ दी जानी चाहिएँ जिनसे रोग का प्रभाव कम हो जाता है और रोगी तेजी से बेहतर अनुभव करने लगता है.

स्वाइन इन्फ्लुएंजा से बचाव

स्वाइन इन्फ्लुएंजा से बचने के लिए सूअरों को H1N1 से संक्रमित होने से बचाना चाहिए और यदि संक्रमण हो गया हो तो इसे मनुष्य तक पहुँचने से रोकना चाहिए. साथ ही यह ध्यान देना चाहिए कि यह एक व्यक्ति से दूसरे तक न फैल जाए. इस रोग के लिए उपचार के विकल्प थोड़े ही हैं. इसके दुबारा होने का भी खतरा रहता है.


GS Paper 3 Source: Down to Earth

down to earth

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate. Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : REDD+

संदर्भ

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् (Indian Council of Forestry Research and Education – (ICFRE) तथा अंतर्राष्ट्रीय समेकित पर्वत विकास केंद्र (International Centre for Integrated Mountain Development – ICIMOD) के द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित किये जाने वाले REDD+ कार्यक्रम की अवधि जुलाई 2020 तक बढ़ा दी गई है.

REDD+

REDD+ क्या है?

  • इसका पूरा नाम Reducing Emissions from Deforestation and Forest Degradation है.
  • REDD+ एक तन्त्र है जिसका निर्माण उन देशों ने किया है जो UNFCCC में पक्षकार रहे हैं. इस तंत्र के अंतर्गत वनों में जमा कार्बन को एक वित्तीय मान दिया जाता है और इसके लिए उत्प्रेरक राशि देते हुए विकासशील देशों को कहा जाता है कि वे वन भूमियों से उत्पन्न उत्सर्जन को घटाएँ और सतत विकास के ऐसे मार्ग में निवेश करें जहाँ कार्बन का उत्सर्जन कम हो. विकासशील देशों को उनके द्वारा इस विषय में दिए गये काम के अनुसार भुगतान किया जाता है.
  • REDD+ न केवल वनों के कटाव और क्षरण पर ही ध्यान देता है, अपितु यह वनों के संरक्षण, उनके टिकाऊ प्रबंधन और वनों के कार्बन भंडार पर भी विचार करके निर्णय लेता है.
  • REDD+ की अभिकल्पना 2006 में हुई थी और तब से यह तंत्र विश्व-भर में जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में वनों की भूमिका को प्रकट करने वाला सबसे प्रमुख तंत्र बन चुका है.
  • पूरे विश्व में 2006 से लेकर आज तक 300 REDD+ कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं. 2015 के पेरिस समझौते में इस तन्त्र की चर्चा है.
  • भारत में यह कार्यक्रम ICFRE और ICIMOD संयुक्त रूप से चलाते हैं.
  • यह कार्यक्रम 2016 के जनवरी में मिजोरम में आरम्भ किया गया था. इसका उद्देश्य था भारत के हिमालयी राज्यों में वनों के कटाव और क्षरण की समस्या का समाधान करना.

भारत की REDD+ रणनीति

  • UNFCC (United Nations Framework Convention on Climate Change) के निर्णयों के अनुपालन में भारत ने अपनी एक राष्ट्रीय REDD+ रणनीति अपनाई है.
  • यह रणनीति राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए बनाई गई है और यह जलवायु परिवर्तन के विषय में भारत की राष्ट्रीय कार्ययोजना, ग्रीन इंडिया मिशन और UNFCC को किये गये भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के अनुरूप है.
  • REDD+ रणनीति का निर्माण देहरादून में स्थित ICFRE ने किया है.

Prelims Vishesh

Shaheen VIII :-

चीन के नगर होल्टन में पाकिस्तान और चीन संयुक्त रूप से शाहीन VIII (Eagle VIII) नामक द्विपक्षीय वायु अभ्यास कर रहे हैं.

C-DOT’s latest innovations :

  • टेलीमेटिक्स विकास केंद्र (Centre for Development of Telematics (C-DOT) ने पिछले दिनों तीन नए नवाचारों का अनावरण किया है, ये हैं – 1) C-Sat-Fi (C-DOT Satellite WiFi) 2) C-DOT’s XGSPON (10 G Symmetrical Passive Optical Network) 3) C-DOT’s Interoperable Set-Top Box (CiSTB).
  • आशा की जाती है कि इन नवाचारों से बेतार और उपग्रहीय संचार में प्रगति के साथ-साथ HD विडियो, ऑनलाइन गेमिंग जैसे अनेक क्लाउड-आधारित सेवाओं की सुविधा बढ़ेगी. साथ ही CiSTB के सेट-टॉप बॉक्स के प्रयोग से दर्शकों को वर्तमान में प्रयोग हो रहे STB को बदले बिना अधिक से अधिक चैनल देखने और उनका बेहतर आनंद लेने का अवसर मिलेगा.

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