Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 October 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 02 October 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Related to Health

Topic : Decade of Healthy Ageing

संदर्भ

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय वार्धक्य दिवस (1 अक्टूबर) के अवसर पर “स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (Decade of Healthy Ageing) (वर्ष 2020-2030) का शुभारंभ किया.

  • स्वस्थ वृद्धावस्था (बढ़ती आयु के साथ स्वास्थ्य को बनाए रखना) कार्यात्मक क्षमता को विकसित करने और उसके अनुरक्षण की प्रक्रिया है, जो वृद्धावस्था में सकुशलता को बनाए रखती है.
  • “स्वस्थ वृद्धावस्था दशक” (Decade of Healthy Ageing : DHA) अगस्त 2020 में विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) द्वारा समर्थित, वृद्धजनों, उनके परिवारों और समुदायों (जिनमें वे रहते हैं) के जीवन को बेहतर बनाने के लिए दस वर्षों की सहयोगात्मक कार्रवाई के लिए सरकारों, नागरिक समाज, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, पेशेवरों, निजी क्षेत्र आदि को एक साथ लाने का अवसर है.
  • हमारे देश में स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (DHA) के अंतर्गत विभिन्‍न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के समन्वय का प्रयास किया जाएगा और अन्य विभागों /मंत्रालयों के साथ भी अंतर-क्षेत्रीय सामंजस्य को बढ़ावा देने की कोशिश की जायेगी.
  • “भारत में स्वास्थ्य” रिपोर्ट के अनुसार, वृद्ध व्यक्तियों (60 वर्ष और उससे अधिक) का प्रतिशत ग्रामीण भारत में 6.6% और शहरी भारत में 7.8% है.

“स्वस्थ वृद्धावस्था दशक” के लिए 10 प्राथमिकताएँ {विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित}:

  1. नवाचार और परिवर्तन के लिए एक मंच की स्थापना करना,
  2. देश-योजना निर्माण और कार्रवाई का समर्थन करना,
  3. स्वस्थ वृद्धावस्था (Healthy ageing) पर बेहतर वैश्विक डेटा एकत्र करना,
  4. वृद्धजनों की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को संबोधित करने वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना,
  5. वृद्धजनों की आवश्यकताओं के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों को संरेखित करना,
  6. प्रत्येक देश में दीर्घधकालिक-देखभाल प्रणाली हेतु आधार स्थापित करना,
  7. एकीकृत देखभाल के लिए आवश्यक मानव संसाधन सुनिश्चित करना,
  8. वृद्धावस्था का सामना करने के लिए एक वैश्विक अभियान प्रारंभ करना,
  9. निवेश के लिए आर्थिक आयामों को परिभाषित करना तथा
  10. वृद्धजन-सहायक शहरों और समुदायों के वैश्विक नेटवर्क को विस्तारित करना.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

 

भारत में आरंभ की गई विभिन्‍न पहलें:

  • वृद्ध व्यक्तियों के लिए एकीकृत कार्यक्रम, जिसमें आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल आदि जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करके जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जाना शामिल है.
  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के दृष्टिकोण के माध्यम से प्रोत्साहक, निवारक, उपचारात्मक और पुनर्वास सेवाओं तक एक सरल पहुँच प्रदान करने के लिए वृद्धजनों की स्वास्थ्य-देखभाल हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम.
  • राष्ट्रीय वृद्धजन नीति (National Policy on Older Persons: NPOP), 1999: यह वित्तीय एवं खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, वृद्धजनों की आश्रय संबंधी और अन्य आवश्यकताओं, विकास में समान भागीदारी, दुर्व्यवहार व शोषण के विरुद्ध संरक्षण तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने हेतु, सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सहायता की
    परिकल्पना करती है. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, वरिष्ठ नागरिकों हेतु स्वास्थ्य बीमा योजना, वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना 2017, निर्धनता रेखा से नीचे के वरिष्ठ नागरिकों हेतु सहायता एवं जीवन यापन के लिए सहायक उपकरण उपलब्ध करवाने हेतु योजना, वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष इत्यादि इसके अंतर्गत प्रारम्भ की गई विभिन्न योजनाएं
  • भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007: यह अधिनियम वृद्ध अभिभावकों तथा दादा-दादी/नाना-नानी के भरण-पोषण हेतु एक विधिक फ्रेमवर्क उपलब्ध करवाता है. हाल ही में वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 में संशोधन प्रस्तावित किए गए थे. इन संशोधनों में शामिल हैं- भरण-पोषण भत्ते की अधिकतम सीमा को समाप्त करना, प्रतिवादियों के अपील करने के अधिकार में विस्तार, अभिभावकों को सम्पत्ति के हस्तांतरण के निरसन के लाभों का विस्तार, न्यायाधिकरण के द्वारा आवेदनों की प्राप्ति की तिथि से उनके निपटान हेतु समय-सीमा का आकलन इत्यादि.
  • वृद्धजन हेतु एकीकृत कार्यक्रम: यह विविध सुविधाओं जैसे कि वृद्धाश्रमों (old-age homes), डे केयर सेंटर्स, फिजियोथेरपी चिकित्सालयों, अक्षमता सहायता की व्यवस्था आदि के क्रियान्वयन हेतु पंचायती राज संस्थाओं/स्थानीय निकायों, गैरसरकारी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, धर्मार्थ अस्पतालों/ नर्सिंग होम्स इत्यादि को वित्तीय सहायता (90% तक) उपलब्ध करवाता है.
  • वृद्धजनों हेतु स्वास्थ्य देखभाल: वृद्धजनों हेतु स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत क्रियान्वित किया जा रहा है. मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE) 2010-11 के दौरान प्रारम्भ किया गया था.
  • सामाजिक पेंशन: निर्धनों तथा निराश्रित लोगों को सामाजिक सहायता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का आरंभ किया गया था.
  • वरिष्ठ नागरिकों पर राष्ट्रीय नीति, 2011 भी वृद्ध लोगों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करती है, जैसे कि आय सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सुरक्षा, संरक्षण, आवास, उत्पादक वृद्धावस्था (productive aging), लोक कल्याण, बहुपीढ़ीगत संबंध आदि. इसने वृद्धजनों हेतु आवश्यक नीतिगत परिवर्तनों का सुझाव देने हेतु एक राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद की भी स्थापना की है.
  • भारत साउथ एशिया पार्टनरशिप ऑन एजिंग: द काठमांडू डिक्लेरेशन 2016 का हस्ताक्षरकर्ता भी है. यह डिक्लेरेशन दक्षिण
    एशिया क्षेत्र में वृद्ध जनसंख्या की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित करता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत में वृद्धावस्था की चुनौतियाँ

  • प्रवास और वृद्धजनों पर इसके प्रभाव: युवा लोगों के प्रवास के कारण वृद्धजन अकेले या केवल अपने जीवनसाथी के साथ रह
    जाते हैं. इनके कारण उन्हें सामाजिक अलगाव, निर्धनता तथा तनाव का सामना करना पड़ता है.
  • स्वास्थ्य देखभाल में कमी: स्वास्थ्य प्रणाली में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Disease: NCDs) से निपटने हेतु पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं. इसके साथ ही चिकित्सीय स्टाफ डिमेंशिया (dementia) या निर्बलता (frailty) से पीड़ित बुजर्गों का उपचार करने या परामर्श देने में तथा प्रारंभिक निदान एवं उच्च रक्तचाप जैसी अवस्थाओं के प्रबंधन में भली-भांति प्रशिक्षित नहीं है. चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता बहुत ही निम्न स्तरीय है तथा अस्पताल में भर्ती होने की लागत अत्यधिक होती है और यह निर्धन भी बना देती है.
  • सामाजिक सामंजस्य न होने का प्रभाव: NCDs से पीड़ित गाँव में रहने वाले तथा अंतर्जातीय या अन्य संघर्षों का सामना करने वाले वृद्धजनों का अनुपात 2005 से 2012 के दौरान दोगुने से भी अधिक हो गया है. सामाजिक सामंजस्य का अभाव निस्सहायता तथा चिकित्सा आपूर्तियों एवं नेटवर्क समर्थन के विघटन को प्रेरित करता है.
  • डिजिटल निरक्षरताः संचार की आधुनिक डिजिटल भाषा और अधिक चुनौतीपूर्ण जीवनशैली को समझने में परिवार के वृद्ध सदस्यों की असमर्थता के कारण परिवार के वृद्ध एवं युवा सदस्यों के मध्य संचार का अभाव पाया जाता है. वे डिजिटलीकृत योजनाओं के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने में भी कठिनाई का अनुभव करते हैं.
  • वृद्ध महिलाओं की बढ़ती जनसंख्या (वृद्धावस्था का स्त्रीकरण): वर्तमान में सभी राज्यों में वृद्ध पुरुषों की तुलना में वृद्ध महिलाओं की जीवन प्रत्याशा उच्चतर है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार वृद्धजनों में लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 1033 महिलाओं का था. वृद्ध महिलाओं की बढ़ती जनसंख्या का परिणाम महिलाओं द्वारा बढ़ती उम्र के साथ अनुभव किया जाने वाला भेदभाव तथा उपेक्षा है. प्रायः वैधव्य तथा अन्य सदस्यों पर पूर्ण निर्भरता इसमें वृद्धि कर देते हैं.
  • वृद्धजनों का ग्रामीणीकरण: 2011 की जनगणना के अनुसार 71% वृद्धजन ग्रामीण भारत में निवास करते हैं. आय असुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल तक पर्याप्त पहुंच का अभाव तथा अलगाव ग्रामीण वृद्धों हेतु उनके शहरी समकक्षों से अधिक विकट है. यह भी ध्यान देने योग्य है कि ओडिशा, बिहार तथा उत्तर प्रदेश जैसे निर्धनतम राज्यों में ग्रामीण वृद्धजनों का
    प्रतिशत सर्वाधिक है.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Schemes for the vulnerable sections of the society.

Topic : Denying overtime wages affront to worker’s right to life: SC quashes Gujarat govt’s order

संदर्भ

 उच्चतम न्यायालय  ने गुजरात सरकार के एक आदेश को खारिज करते हुए कहा कि समयोपरि (overtime) मजदूरी देने से इंकार करना श्रमिकों के जीवन के अधिकार का अपमान है.

  • उच्चतम न्यायालय, गुजरात सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के विरुद्ध एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो कारखाना अधिनियम, 1948 (Factories Act, 1948) के अंतर्गत कार्य के घंटों और मजदूरी के भुगतान के लिए नियोक्ताओं को अस्थायी छूट प्रदान करती है.
  • राज्य द्वारा कारखाना अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत कोविड-19 महामारी को एक सार्वजनिक आपातकाल घोषित करते हुए संशोधनों को उचित ठहराने की मांग की गई थी.
  • धारा 5 के तहत, एक सार्वजनिक आपातकालीन स्थिति में राज्य सरकार सभी पंजीकृत कारखानों को
  • साप्ताहिक घंटे, दैनिक घंटे, विश्राम हेतु अंतराल आदि से संबंधित विभिन्‍न प्रावधानों से छूट प्रदान कर सकती है.

उच्चतम न्यायालय ने सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया और निम्नलिखित अवलोकन किए :-

  • यह अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 के अंतर्गत प्रदत्त श्रमिकों के प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार तथा बलात्‌ श्रम के विरुद्ध अधिकार के विरुद्ध एक अपमान के समान है.
  • कोविड-19 महामारी से उत्पन्न आर्थिक मंदी की स्थिति राज्य की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली आंतरिक अव्यवस्था के रूप में स्वीकार करने योग्य नहीं है. इसलिए सरकार सभी कारखाानों को व्यापक छूट प्रदान नहीं कर सकती.
  • इस प्रकार की छूट समाज के इस वंचित वर्ग को दासत्व के अधीन करने हेतु महामारी को एक बहाने की भांति प्रयोग किए जाने का संकेत है.
  • उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग कर निर्देश दिया कि ओवरटाइम करने वाले सभी कामगारों को “ओवरटाइम मजदूरी” का भुगतान सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर किया जाए.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

संविधान के अनुच्छेद 21 का दायरा बेहद व्यापक है. जीने के अधिकार में महज इतना ही शामिल नहीं है कि किसी भी व्यक्ति का जीवन सजा-ए-मौत के द्वारा छीना जा सकता है. जीने का अधिकार मात्र एक पहलू है. इसका उतना ही महत्त्वपूर्ण पहलू है कि आजीविका का अधिकार जीने के अधिकार में शामिल है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति आजीविका के साधनों के बिना जी नहीं सकता. यदि आजीविका के अधिकार को संविधान प्रदत्त जीने के अधिकार में शामिल नहीं माना जाएगा तो किसी भी व्यक्ति को उसके जीने के अधिकार से वंचित करने का सबसे सरल तरीका है, उसके आजीविका के साधनों से उसे वंचित कर देना. ऐसी वंचना न केवल जीवन को निरर्थक बना देती है अपितु जीवन जीना ही असंभव बना देती है. किसी व्यक्ति को उसके आजीविका के अधिकार से वंचित करने का मतलब है, उसे जीवन से वंचित कर देना. दरअसल इसी कारण से ग्रमीण जनता का शहरों की ओर पलायन होता है. गांवों में आजीविका के साधन न होने के कारण ही वे शहरों की ओर आते हैं.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Good Samaritans

संदर्भ

हाल ही में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा नेक व्यक्ति (good Samaritans) के संरक्षण के लिए नियम प्रकाशित किए गए.

मोटर यान (संशोधन) अधिनियम, 2019 {Motor Vehicles (Amendment) Act, 2019} में “नेक व्यक्ति की संरक्षा” नामक एक नया खंड समाविष्ट किया गया है, जो यह प्रावधान करता है कि कोई नेक व्यक्ति (संकट के समय सहायता करने वाला व्यक्ति) मोटर यान से हुई किसी दुर्घटना के पीड़ित व्यक्ति को किसी क्षति या उसकी मृत्यु के लिए किसी सिविल अथवा दांडिक कार्रवाई हेतु उत्तरदायी नहीं होगा.

आँकड़े क्या बताते हैं?

विगत दस वर्षों में, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 13 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है. प्रत्येक चार में से तीन लोग पुलिस उत्पीड़न, अस्पतालों में ही रोके रखने और लंबे समय तक कानूनी औपचारिकताओं के भय से सड़कों पर घायल दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने में संकोच करते हैं.

अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने उन नियमों को प्रकाशित किया है, जिनमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल हैं :-

  1. धर्म, राष्ट्रीयता, जाति या लिंग के आधार पर बिना किसी भेदभाव के नेक व्यक्ति को उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किए जाने का अधिकार प्राप्त होगा.
  2. नेक व्यक्ति को उसके नाम, पहचान, पता या ऐसे किसी अन्य व्यक्तिगत विवरण की जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. हालांकि, वह स्वेच्छा से इन सूचनाओं की जानकारी देने के विकल्प का चयन कर सकता है.
  3. प्रत्येक सार्वजनिक और निजी अस्पताल इस अधिनियम के अंतर्गत नेक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लेख करने वाले हिंदी, अंग्रेजी और अन्य स्थानीय भाषा में एक चार्टर प्रकाशित करेगा.
  4. यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से उस मामले में गवाह बनने के लिए सहमत हो गया है, जिसके लिए उसने नेक व्यक्ति के रूप में कार्य किया है, तो उससे पूछताछ के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देशों एवं प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है.

नेक व्यक्ति कौन हैं?

“नेक व्यक्ति” से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जो सद्भावपूर्वक, स्वैच्छिक रूप से और बिना किसी पारितोष या अनुतोष की प्रत्याशा के दुर्घटना स्थल पर किसी पीड़ित व्यक्ति को आपातकाल चिकित्सीय या गैर-थिकित्सीय देखरेख या सहायता उपलब्ध करवाता है या ऐसे पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल तक ह पहुंचाता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

 

  • सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्ति के लिए पहला घंटा “सुनहला घंटा (Golden Hour)” माना जाता है जिस समय चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने पर व्यक्ति के प्राण बच सकते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक में प्रयास किया गया है कि जो व्यक्ति (Good Samaritan) ऐसे समय पीड़ित मनुष्य को प्राथमिक उपचार देना चाहते हैं उनको सुरक्षा मिले और पुलिस की ओर से अथवा जाँच के समय उन्हें कोई परेशानी का भय नहीं हो.
  • प्रस्तावित नए कानून में यह प्रावधान है कि समय पर किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को जो सहायता करते हैं (Good Samaritan), उन्हें आर्थिक सहयाता दी जायेगी. साथ ही उन्हें न्यायालय और पुलिस स्टेशन पर बार-बार जाने से छूट मिलेगी. यदि उनका न्यायालय अथवा पुलिस स्टेशन में उनकी उपस्थति अनिवार्य हो तो सरकार उन्हें आने-जाने का खर्च देगी. यह खर्च जिस कोष से दिया जायेगा, उसका नाम Good Samaritan Fund रखा गया है.
  • VAHAN और SARATHI नाम से दो एप भी शुरू किये गए हैं ताकि लाइसेंस और वाहन पंजीकरण जारी करने में होने वाले भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया जा सके.
    • VAHAN – वाहन पंजीकरण सेवा को ऑनलाइन संचालित करने हेतु
    • SARATHI – ड्राइविंग लाइसेंस हेतु आवेदन करने के लिये ऑनलाइन पोर्टल
  • ‘सेतु भारतम् कार्यक्रम’ के तहत वर्ष 2019 तक भारत के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त किया जाएगा.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

  • भारत में सड़क की दुर्घटनाएँ सामान्य बात हैं. 2015 में 5,01,423 सड़क दुर्घटनाएँ हुई थीं जिनके कारण 1,46,133 लोग मारे गए थे. 2016 में 4,80,652 सड़क दुर्घटनाएँ हुई थीं जिनमें 1,50,785 लोगों का देहांत हो गया.
  • कर्नाटक भारत के पाँच ऐसे शीर्षस्थ राज्यों में है जहाँ 2015 और 2016 में घटित सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोग मारे गए.
  • गुड सैमरिटनों को सुरक्षा देने के लिए भारत सरकार ने अभी कोई कानून नहीं बनाया है परन्तु 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कुछ दिशा-निर्देश निर्गत किये थे जिनका उद्देश्य गुड सैमरिटनों को सुरक्षा देना था.
  • बहुधा देखा जाता है कि लोग दुर्घटना-ग्रस्त व्यक्ति को सहायता पहुँचाने में घबराते हैं और उसके बदले दुर्घटना का छाया-चित्र अथवा विडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं. प्रस्तावित विधेयक के पारित हो जाने पर ऐसी प्रवृत्तियों पर रोकथाम लगेगी.
  • आवश्यक है कि लोगों के व्यवहार में परिवर्तन का प्रयास किया जाए. हेलमेट और सीट-बेल्ट के प्रयोग को प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है, क्योंकि अधिकांश सड़क दुर्घटनाएँ इन्हीं कारणों की वजह से होती हैं. लोगों को शराब पीकर गाड़ी न चलाने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिये. दुर्घटना के पश्चात् तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराना और पीड़ित को जल्द-से-जल्द अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था करना कई लोगों की जान बचा सकता है. दुर्घटना के पश्चात् आस-पास खड़े लोग घायल की जान बचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं. आवश्यक है कि आम लोगों को इस कार्य के प्रति जागरूक किया जाए. सड़कों की योजना, डिज़ाइन और संचालन के दौरान सुरक्षा पर ध्यान देना सड़क दुर्घटनाओं में मौतों को कम करने में योगदान दे सकता है. सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये मास मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिये.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : NCRB report: Sedition cases up in 2019 but conviction at all-time low

संदर्भ

राष्ट्रीय अपराघ रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau: NCRB) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में राजद्रोह (Sedition) के मामलों में वृद्धि हुई है, परंतु दोषसिद्धि दर (conviction rate) अब तक की सबसे कम रही है.

आँकड़े और क्या कहते हैं?

  • NCRB के आंकड़ों से ज्ञात हुआ है कि वर्ष 2019 में 93 राजद्रोह के मामले (वर्ष 2018 में 70) दर्ज किए गए, परन्तु केवल 3% मामलों में ही दोषसिद्धि हुई है.
  • कर्नाटक में राजद्रोह के अधिकतम मामले देखे गए, इसके पश्चात्‌ असम का स्थान है.

राजद्रोह का कानून कब लाया गया?

यह कानून अंग्रेजों का बनाया कानून है. देश द्रोह का ये वो कानून है जो 149 साल पहले भारतीय दंड संहिता में जोड़ा गया. 149 साल यानी 1870 में जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. अंग्रेजों ने ये कानून इसलिए बनाया ताकि वो भारत के देशभक्तों को देशद्रोही करार देकर सजा दे सके. 

रोमेश थापर वाद, केदार नाथ सिंह वाद, कन्हैया कुमार वाद आदि में राजद्रोह कानून की परिधि को सीमित और पुन: परिभाषित किया गया है तथा सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान, विधिसम्मत सरकार के विरुद्ध विद्रोह करने का प्रयास तथा राज्य या जनता की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न करने जैसे कृत्य को इस कानून के अंतर्गत अपराध माना जाएगा.

राजद्रोह की धारा 124ए है?

  • देश के खिलाफ बोलना, लिखना या ऐसी कोई भी हरकत जो देश के प्रति नफरत का भाव रखती हो वो राजद्रोह कहलाएगी.
  • अगर कोई संगठन देश विरोधी है और उससे अंजाने में भी कोई संबंध रखता है या ऐसे लोगों का सहयोग करता है तो उस व्यक्ति पर भी राजद्रोह का मामला बन सकता है.
  • अगर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर मौलिक या लिखित शब्दों, किसी तरह के संकेतों या अन्य किसी भी माध्यम से ऐसा कुछ करता है.
  • जो भारत सरकार के खिलाफ हो, जिससे देश के सामने एकता, अखंडता और सुरक्षा का संकट पैदा हो तो उसे तो उसे उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की स्थापना केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 1986 में इस उद्देश्य से की गई थी कि भारतीय पुलिस को कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये पुलिस तंत्र को सूचना प्रोधोगिकी समाधान और आपराधिक गुप्त सूचनाएँ प्रदान करके समर्थ बनाया जा सके.
  • NCRB नीति संबंधी मामलों और अनुसंधान हेतु अपराध, दुर्घटना, आत्महत्या और जेल संबंधी डाटा के प्रामाणिक स्रोत के लिये नोडल एजेंसी है.
  • NCRB ‘भारत में अपराध’, ‘दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें और आत्महत्या’, ‘जेल सांख्यिकी’ और फिंगर प्रिंट्स पर 4 वार्षिक प्रकाशन जारी करता है.
  • हाल ही में बाल यौन शौषण से संबंधित मामलों की अंडर- रिपोर्टिंग के चलते वर्ष 2017 से NCRB ने बाल यौन शौषण से संबंधित आँकड़ों को भी एकत्रित करना प्रारंभ किया है.
  • ये प्रकाशन आपराधिक आँकड़ों के संदभ में न केवल पुलिस अधिकारियों बल्कि अपराध विज्ञानी, शोधकर्त्ताओं, मीडिया और नीति निर्माताओं के लिये भी सहायक होते है.
  • NCRB को 2016 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डिजिटल इंडिया अवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया था.
  • भारत में पुलिस बलों का कम्प्यूटरीकरण 1971 में प्रारंभ हुआ. NCRB ने CCIS (Crime and Criminals Information System) वर्ष 1995 में, CIPA (Common Integrated Police Application) 2004 में और अंतिम रूप में CCTNS वर्ष 2009 में प्रारंभ किया.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

 

राजद्रोह के आरोपी भारत के नायक 

  • बाल गंगाधर तिलक
  • भगत सिंह
  • लाला लाजपत राय
  • अरविंदो घोष
  • महात्मा गांधी (साल 1922 में यंग इंडिया में राजनीतिक रूप से ‘संवेदनशील’ 3 आर्टिकल लिखने के लिए राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.)

इसकी प्रासंगिकता

अंग्रेजों की इस नीति का विरोध पूरे भारत ने किया था. क्योंकि तब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ने उस दौर में राजद्रोह के इस कानून को आपत्तिजनक और अप्रिय कानून बताया था. लेकिन वो आजादी के पहले की स्थिति थी और पूरा देश स्वतंत्रता कि लड़ाई लड़ रहा था. उस परिस्थितियों की तुलना वर्तमान के दौर से नहीं की जा सकती है.

स्वतंत्रता के सात दशक बाद इस कानून को लेकर अकसर सियासत भी खूब होती रही है. कांग्रेस ने तो बकायदा अपने मेनिफेस्टो में लिख दिया था कि… IPC की धारा 124ए जो राजद्रोह अपराध को परिभाषित करती है. जिसका दुरुपयोग हुआ, उसे खत्म किया जाएगा.

इन देशों ने राजद्रोह का कानून खत्म किया

  • ब्रिटेन ने 2009 में राजद्रोह का कानून खत्म किया और कहा कि दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है.
  • आस्ट्रेलिया ने 2010 में
  • स्काटलैंड ने भी 2010 में
  • दक्षिण कोरिया ने 1988 में
  • इंडोनेशिया ने 2007 में राजद्रोह के कानून को खत्म कर दिया.

भारत में राजद्रोह के कानून का प्रयोग

  • 2014 से 2016  के दौरान राजद्रोह के कुल 112 मामले दर्ज हुए.
  • करीब 179 लोगों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया.
  • राजद्रोह के आरोप के 80 फीसदी मामलों में चार्जशीट भी दाखिल नहीं हो पाई.
  • सिर्फ 2 लोगों को ही सजा मिल पाई.

1962 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा?

  • केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार की आलोचना या फिर प्रशासन पर टिप्पणी करने भर से राजद्रोह का मुकदमा नहीं बनता. राजद्रोह कानून का इस्तेमाल तब ही हो जब सीधे तौर पर हिंसा भड़काने का मामला हो. सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायाधीशों की संवैज्ञानिक बेंच ने तब कहा था कि केवल नारेबाजी राजद्रोह के दायरे में नहीं आती.
  • बलवंत सिंह बनाम पंजाब राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में कहा था कि महज नारेबाजी करना राजद्रोह नहीं है. दो लोगों ने उस समय खालिस्तान की मांग के पक्ष में नारे लगाए थे.

भारतीय लॉ कमीशन का क्या सुझाव है?

धारा 124ए तभी लगे जब कानून व्यवस्था बिगाड़ने या सरकार के खिलाफ हिंसा के मकसद से कोई गतिविधि हो. संविधान की धारा 19 (1) ए की वजह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगे हुए हैं.  ऐसे में धारा 124 की ज़रूरत नहीं है. 

स्वतंत्र भारत के चर्चित राजद्रोह केस

  • 26 मई 1953 को फॉरवर्ड कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य केदारनाथ सिंह ने बिहार के बेगूसराय में एक भाषण दिया था. राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ दिए गए उनके इस भाषण के लिए उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.
  • पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन (31 अक्टूबर 1984) को चंडीगढ़ में बलवंत सिंह नाम के एक शख्स ने अपने साथी के साथ मिलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे.
  • साल 2012 में कानपुर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को संविधान का मजाक उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस मामले में त्रिवेदी के खिलाफ राजद्रोह सहित और भी आरोप लगाए गए. त्रिवेदी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था.
  • गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ भी राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था. जेएनयू में भी छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथी उमर खालिद पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था.
  • दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ साल 2015 में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने राजद्रोह के आरोप लगाए थे. इन आरोपों का आधार नेशनल ज्यूडिशियल कमिशन एक्ट (NJAC) को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना बताया गया.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

शासन चाहे किसी भी प्रवृत्ति का हो, हर प्रकार की व्यवस्था में शासन के खिलाफ आवाज़ उठाना दंडनीय अपराध माना जाता रहा है. भारत में भी प्राचीन और मध्यकाल में यह किसी-न-किसी रूप में मौजूद था. आधुनिक काल में, जब 1860 में भारतीय दंड संहिता बनाई गई तो उसके बाद राजद्रोह संबंधी प्रावधानों को धारा 124 (A) के अंतर्गत स्थान दिया गया. बहरहाल, वह दौर औपनिवेशिक शासन का था और उस समय ब्रिटिश भारत सरकार का विरोध करना देशभक्ति का पर्याय माना जाता था.

दरअसल, हमें यह समझना होगा कि न तो सरकार और राज्य एक हैं, और न ही सरकार तथा देश. सरकारें आती-जाती रहती हैं, जबकि राज्य बना रहता है. राज्य संविधान, कानून और सेना से चलता है, जबकि राष्ट्र अथवा देश एक भावना है, जिसके मूल में राष्ट्रीयता का भाव होता है. इसलिये कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि राजद्रोह राष्ट्रभक्ति के लिये आवश्यक हो जाए. ऐसी परिस्थिति में सरकार की आलोचना नागरिकों का पुनीत कर्त्तव्य होता है. अतः सत्तापक्ष को धारा 124 (A) दुरुपयोग नहीं करना चाहिये.

सच कहें तो देशद्रोह शब्द एक सूक्ष्म अर्थों वाला शब्द है, जिससे संबंधित कानूनों का सावधानी पूर्वक इस्तेमाल किया जाना चाहिये. यह एक तोप के समान है, जिसका प्रयोग राष्ट्रहित में किया जाना चाहिये न कि चूहे मारने के लिये, अन्यथा हम अपना ही घर तोड़ बैठेंगे.


Prelims Vishesh

Atal Tunnel :

  • पिछले दिनों सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित अटल सुरंग का उद्घाटन हुआ. 9.02 किलोमीटर की लम्बाई वाली यह सुरंग हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में समुद्र तल से 3,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है.
  • यह विश्व की सबसे लम्बी राजमार्गीय सुरंग है जो मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है. इसके बन जाने से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर घट गई है और इन दोनों के बीच यात्रा का समय 4-5 घंटे रह गया है.

Two new plant species discovered in Western Ghats :

  • पिछले दिनों पश्चिमी घाट में दो नई पादप प्रजातियों की खोज हुई है, ये हैं – Eriocaulon parvicephalum और Eriocaulon karaavalense.
  • ये पौधे Pipeworts(Eriocaulon) समूह के अंतर्गत आते हैं जिनकी लगभग 111 प्रजातियाँ भारत में मिलती हैं.
  • यह अधिकांशतः पश्चिमी घाट और पूर्वी हिमालय में पाए जाते हैं. ये पौधे कैंसर निरोधी, कीड़ा निरोधी, जलन निरोधक और कसैले होते हैं.

Xoo infection :

Xoo नामक बैक्टीरिया से उत्पन्न होने वाला Xoo संक्रमण धान के पत्तों में चकत्ते को जन्म देता है जिस कारण पूरे विश्व में धान के उत्पादन को बहुत क्षति पहुँचती है.

Section 29 of the POCSO Act :

  • पिछले दिनों दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि POCSO अधिनियम की धारा 29 में वर्णित दोष की अवधारणा आरोपी के ऊपर आरोप निर्धारित हो जाने के पश्चात् ही लागू होती है.
  • विदित हो कि POCSO का पूरा नाम है – बाल यौवनाचार सुरक्षा अधिनियम / Protection of Children from Sexual Offences.

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One Comment on “Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 October 2020”

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