Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 August 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 02 August 2021


GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Volcanoes, Earthquakes and Landslides

Topic : Landslide

संदर्भ

हाल ही में मानसून के दौरान हिमालयी राज्यों में विभिन्‍न जगहों पर भूस्खलन के कारण सैकड़ों मौते दर्ज की गई हैं. ज्ञातव्य है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाले वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा पिछले वर्ष निम्न हिमालय (हिमाचल) में 84 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किये गये अध्ययन के अनुसार, हिमाचल क्षेत्र का 15%, भूस्खलन के प्रति अति संवेदनशील है.

भूस्खलन

गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में चट्टानी मलबे एवं भू-सतह जैसे ढलान पर स्थित पदार्थों का नीचे तथा बाहर की ओर संचलन भूस्खलन कहलाता है.

भूस्खलन के कारण

प्रमुख कारण

Landslide की घटनाएँ मुख्य रूप से प्राकृतिक कारणों से घटित होती हैं जैसे भूकंपीय कम्पन और दीर्घकालिक वर्षा या सीपेज के कारण मृदा परतों के मध्य जल का दाब. हाल के दशकों में, भूस्खलन के लिए उत्तरदायी मानवीय कारण महत्त्वपूर्ण हो गये हैं. इन कारणों में ढलानों पर स्थित वनस्पति की कटाई, प्राकृतिक जल निकासी में अवरोध, जल या सीवर लाइनों में रिसाव तथा सड़क, रेल, भवन-निर्माण के कार्यों के चलते ढलानों को परिवर्तित करना आदि शामिल हैं.

मौसम-प्रेरित भूस्खलन

उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्मकाल के दौरान landslide की घटनाएँ उस समय अपेक्षाकृत अधिक होती हैं, जब एशिया के कुछ हिस्सों में चक्रवात, तूफान और टाइफून की अधिकता होती है और मानसूनी मौसम के कारण भारी वर्षा होती है.

अवैध खनन

पहाड़ों को काटने के कारण होने वाले लैंडस्लाइड ग्रामीण क्षेत्रों में एक प्रमुख समस्या हैं, जहाँ लोग घरों के निर्माण के लिए अवैध रूप से पहाड़ी ढलानों पर स्थित सामग्री को एकत्रित करते हैं. घातक भूस्खलन सामान्यतः सडकों और बहुमूल्य संसाधनों से समृद्ध स्थलों के निकट स्थित बसावटों में अधिक घटित होते हैं.

भूकम्प

लैंडस्लाइड-प्रवण हिमालयी क्षेत्र अत्यधिक भूकम्प-प्रवण क्षेत्र है जहाँ तीव्रता वाले भूकम्प आते हैं और इस प्रकार यह क्षेत्र भूकम्प-प्रेरित भूस्खलन के लिए भी प्रवण बन जाता है. भूकम्प-प्रेरित लैंडस्लाइड के कारण हिमालय में लगभग 70 जलबिजली परियोजनाएँ संकट में हैं.

भारत से सम्बंधित लैंडस्लाइड डाटा

ग्लोबल फैटल लैंडस्लाइड डाटाबेस (Global Fatal Landslide Database : GFLD) के अनुसार, एशिया महाद्वीप को सर्वाधिक प्रभावित माना गया है जहाँ 75% (भारत में 20%) landslide की घटनाएँ घटीं. ये घटनाएँ मुख्य रूप से हिमालयी चाप के साथ संलग्न क्षेत्र में घटित हुई हैं.

लैंडस्लाइड से सम्बन्धित वैश्विक डाटाबेस के अनुसार, विश्व के शीर्ष दो भूस्खलन हॉट स्पॉट भारत में विद्यमान हैं : हिमालयी चाप की दक्षिणी सीमा और दक्षिण-पश्चिम भारत का तट जहाँ पश्चिमी घाट अवस्थित है.

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, भारत के कुल स्थलीय क्षेत्र का लगभग 12.6% भूस्खलन-प्रवण संकटग्रस्त क्षेत्र के अंतर्गत आता है.

सिक्किम की सुभेद्यता: यह 4,895 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लैंडस्लाइड के प्रति संवेदनशील है, जिसमें से 3,638 वर्ग किमी क्षेत्र मानव जनसंख्या, सड़कों और अन्य अवसंरचनाओं से घिरा हुआ है.

भूस्खलन के विषय में विस्तार से जानकारी हेतु यह आर्टिकल जरूर पढ़ें :- भूस्खलन


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UNSC

संदर्भ

1 अगस्त से अगले एक महीने के लिए भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) के अध्यक्ष पद को संभालेगा. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमुर्ति के अनुसार भारत इस दौरान समुद्री सरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद पर लगाम लगाने जैसे प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेगा.

ज्ञातव्य है कि हर माह, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष पद के लिए, इसके 15 सदस्य राज्यों (5 स्थायी, 10 गैर-स्थायी) में से किसी एक देश को चुना जाता है. इसके आधार पर, भारत के पास 2021 के अगस्त महीने में और फिर वर्ष 2022 में एक महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता होगी.

अध्यक्ष के रूप में भारत के आगामी कार्य

  • 9 अगस्त को भारत, समुद्री सुरक्षा पर राष्ट्राध्यक्षों की एक आभासी बैठक की अध्यक्षता करेगा.
  • अध्यक्ष के तौर पर अगस्त के अंत में भारत वैश्विक शांति और सुरक्षा के समक्ष आतंकवाद द्वारा उत्पन्न खतरे पर एक मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित करेगा.
  • भारत, आतंकवाद के वित्त पोषण से निपटने के प्रयासों के तहत, संयुक्त राष्ट्र एवं FATF के बीच सामन्जस्य बढ़ाने पर भी ध्यान देगा.
  • तकनीक एवं शांति स्थापना पर एक मंत्रिस्तरीय वार्ता 18 अगस्त को आयोजित की जाएगी.
  • शांति सेना के सदस्यों की सहायता हेतु एक मोबाइल एप “UNITE AWARE” भी लांच की जा सकती है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुसार शांति एवं सुरक्षा बहाल करने की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद् की होती है. इसकी बैठक कभी भी बुलाई जा सकती है.इसके फैसले का अनुपालन करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य है. इसमें 15 सदस्य देश शामिल होते हैं जिनमें से पाँच सदस्य देश – चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका – स्थायी सदस्य हैं. शेष दस सदस्य देशों का चुनाव महासभा में स्थायी सदस्यों द्वारा किया जाता है. चयनित सदस्य देशों का कार्यकाल वर्षों का होता है.
  • ज्ञातव्य है कि कार्यप्रणाली से सम्बंधित प्रश्नों को छोड़कर प्रत्येक निर्णय के लिए मतदान की जरूरत पड़ती है. अगर कोई भी स्थायी सदस्य अपना वोट देने से मना कर देता है तब इसे “वीटो” के नाम से जाना जाता है. परिषद् (Security Council) के समक्ष जब कभी किसी देश के अशांति और खतरे के मामले लाये जाते हैं तो अक्सर वह उस देश को पहले विविध पक्षों से शांतिपूर्ण हल ढूँढने के लिए प्रयास करने के लिए कहती है.

परिषद् मध्यस्थता का मार्ग भी चुनती है. वह स्थिति की छानबीन कर उस पर रपट भेजने के लिए महासचिव से आग्रह भी कर सकती है. लड़ाई छिड़ जाने पर परिषद् युद्ध विराम की कोशिश करती है.

वह अशांत क्षेत्र में तनाव कम करने एवं विरोधी सैनिक बलों को दूर रखने के लिए शांति सैनिकों की टुकड़ियाँ भी भेज सकती है. महासभा के विपरीत इसके निर्णय बाध्यकारी होते हैं. आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अथवा सामूहिक सैन्य कार्यवाही का आदेश देकर अपने फैसले को लागू करवाने का अधिकार भी इसे प्राप्त है. उदाहरणस्वरूप इसने ऐसा कोरियाई संकट (1950) तथा ईराक कुवैत संकट (1950-51) के दौरान किया था.

कार्य

  • विश्व में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना.
  • हथियारों की तस्करी को रोकना.
  • आक्रमणकर्ता राज्य के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही करना.
  • आक्रमण को रोकने या बंद करने के लिए राज्यों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना.

संरचना

सुरक्षा परिषद् (Security Council) के वर्तमान समय में 15 सदस्य देश हैं जिसमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी हैं. वर्ष 1963 में चार्टर संशोधन किया गया और अस्थायी सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई. अस्थायी सदस्य विश्व के विभिन्न भागों से लिए जाते हैं जिसके अनुपात निम्नलिखित हैं –

  • 5 सदस्य अफ्रीका, एशिया से
  • 2 सदस्य लैटिन अमेरिका से
  • 2 सदस्य पश्चिमी देशों से
  • 1 सदस्य पूर्वी यूरोप से

चार्टर के अनुच्छेद 27 में मतदान का प्रावधान दिया गया है. सुरक्षा परिषद् में “दोहरे वीटो का प्रावधान” है. पहले वीटो का प्रयोग सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य किसी मुद्दे को साधारण मामलों से अलग करने के लिए करते हैं. दूसरी बार वीटो का प्रयोग उस मुद्दे को रोकने के लिए किया जाता है.

परिषद् के अस्थायी सदस्य का निर्वाचन महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों द्वारा किया जाता है. विदित हो कि 1971 में राष्ट्रवादी चीन (ताईवान) को स्थायी सदस्यता से निकालकर जनवादी चीन को स्थायी सदस्य बना दिया गया था.

इसकी बैठक वर्ष-भर चलती रहती है. सुरक्षा परिषद् में किसी भी कार्यवाही के लिए 9 सदस्यों की आवश्यकता होती है. किसी भी एक सदस्य की अनुपस्थिति में वीटो अधिकार का प्रयोग स्थायी सदस्यों द्वारा नहीं किया जा सकता.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure- energy.

Topic : Strategic Petroleum Reserve – SPR Programme 

संदर्भ

केंद्र सरकार ने चंडीखोल (4 एमएमटी) और पादुर (2.5 एमएमटी) में 6.5 एमएमटी की कुल क्षमता रिजर्व के साथ पीपीपी मॉडल के तहत दो अतिरिक्त वाणिज्यिक और रणनीतिक भूमिगत रिजर्व सुविधाओं की स्थापना को मंजूरी दी है. सरकार ने बजट 2021-22 में इसके लिए 210 करोड़ की राशि आवंटित की थी. इससे भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) क्षमता बढ़कर 11.83 एमएमटी हो जाएगी.

उल्लेखनीय है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट के साथ, भारत देश के भीतर और विदेशों में भी अपने तेल रिजर्व को सक्रिय रूप से बढ़ा रहा है. पिछले वर्ष भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत द्वारा अमरीकी धरती पर पेट्रोलियम रिजर्व स्थापित करने पर चर्चा शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे.

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

ज्ञातव्य है कि भारत ने तीन स्थानों पर भूमिगत भंडार बना रखे हैं जिसमें 5.33 मिलियन टन कच्चा तेल सुरक्षित कर दिया गया है. इन भंडारों से देश की तेल सम्बन्धी आवश्यकताएँ 9.5 दिन तक पूरी की जा सकेंगी. जिन स्थानों में भंडारण किया गया है, वे हैं – विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पुदुर (कर्नाटक). इन तीनों भंडारों के अतिरिक्त भारत में कच्चे तेल के और पेट्रोलियम उत्पादों के कई और भंडार भी हैं जो तेल कम्पनियों के पास हैं. यदि कभी विदेश से आपूर्ति में बाधा होगी तो ये भंडार काम आयेंगे.

  • भारत के सामरिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं. इनके अलावा सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी. वर्तमान में ‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम’ (Strategic Petroleum Reserves programme- SPRP) के तहत भारत 87 दिनों तक आवश्यकता पूर्ति की भंडारण क्षमता रखता है. इसलिए आयातित तेल और गैस पर भारत की भारी निर्भरता अपरिहार्य है.

यह निर्भरता जो वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत है, 2030 तक 90 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है. इसलिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए तेल और गैस क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.


GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, nano-technology.

Topic : Central bank digital currency – CBDC

संदर्भ

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी डिजिटल मुद्रा निर्गत करने पर विचार कर रहा है. उल्लेखनीय है कि अमरीकी संघीय बैंक, यूरोपियन संघ एवं चीन आदि अपने केन्द्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (CBDCs) अनावृत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. गत वर्ष बहामास ने विश्व की पहली CBDC का अनावरण किया था.

केन्द्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (CBDC) क्या है?

  • CBDC डिजिटल रूप में रखी हुई मुद्रा होगी, जो एक प्रकार की फिएट मुद्रा ही होगी, जिसके लेनदेन पर केन्द्रीय बैंक द्वारा निगरानी रखी जा सकेगी. विदित हो कि फ़िएट मुद्रा सरकार द्वारा निर्गत की गई मुद्रा होती है जिसका अपना कोई मूल्य नहीं होता लेकिन इसका मूल्य सरकारी नियमों से निर्धारित होता है.
  • यह सोने या चांदी जैसी वस्तुओं द्वारा समर्थित नहीं है जैसे सिक्के, नोट आदि फ़िएट मुद्रा के प्रकार हैं.

डिजिटल मुद्रा

डिजिटल मुद्रा किसी भी प्रकार का धन या भुगतान है, जो केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप से अस्तित्व में होता है. डिजिटल मुद्रा में बिल, चेक या सिक्कों जैसे मूर्त रूपों का अभाव होता है. एक क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल या आभासी मुद्रा होती है, जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा सुरक्षित होती है. यह जालसाजी या डबल स्पेंड (दोहरे व्यय) को लगभग असंभव बना देती है.  

यह ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी पर आधारित विकेंद्रीकृत नेटवर्क के माध्यम से अस्तित्व में होती है.

यद्यपि डिजिटल/क्रिप्टो मुद्राएँ विनियमित नहीं हैं, तथापि भारत में अभी तक इन्हें अवैध घोषित नहीं किया गया है.

लाभ: तीव्र, किफायती लेन-देन और उच्च सुरक्षा.

चिताएँ: डिजिटल मुद्रा का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है, जिससे वित्तीय स्थिरता के समक्ष खतरा उत्पन्न हो सकता है.


Prelims Vishesh

Drink From Tap initiative :-

  • पुरी ड्रिंक फ्रॉम टैप की सुविधा बाला देश का पहला शहर पुरी (ओडिशा), सुजल मिशन के तहत 24 घंटे “ड्रिंक फ्रॉम टैप” की सुविधा वाला देश का पहला शहर बना गया है. अब पुरी के लगभग 2.5 लाख निवासियों को 24 घंटे नलों के जरिये शुद्ध पेयजल आपूर्ति की जाएगी.
  • सुजल मिशन के अंतर्गत अब लोगों को पानी जमा करके रखने या फिल्टर करने की जरूरत नहीं है. कोई भी व्यक्ति सीधा नल खोलकर पानी को खाना बनाने या पीने में इस्तेमाल कर सकता है.

Raja Mirch :-

  • राजा मिर्च हाल ही में नागालैंड के भौगोलिक संकेतक का टैग प्राप्त राजा मिर्च को लंदन को निर्यात किया गया है.
  • वर्ष 2008 में राजा मिर्च को भौगोलिक संकेतक प्रमाणन प्राप्त हुआ था.
  • स्कोविल हीट यूनिट्स के आधार पर राजा मिर्च दुनिया की शीर्ष पांच सबसे तेज़ मिर्चों में से एक है.

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