Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 August 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 02 August 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Regional Comprehensive Economic Partnership (RCEP)

संदर्भ

भारत ने अभी तक क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं. आसियान देशों के नेतृत्व में 16 देशों का एक समूह यह प्रयास कर रहा है कि भारत उसे हस्ताक्षरित कर दे.

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RCEP से सम्बंधित कुछ तथ्य

  • RCEP आसियान के दस सदस्य देशों (ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) तथा आसियान से सम्बद्ध अन्य छ: देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड) के लिए प्रस्तावित है.
  • RCEP के लिए वार्ताएँ कम्बोडिया में नवम्बर 2012 में आयोजित आसियान के शिखर सम्मलेन में औपचारिक रूप आरम्भ की गई थीं.
  • RCEP का लक्ष्य हैअधिकांश शुल्कों और गैर-शुल्क अड़चनों को समाप्त कर वस्तु-व्यापार को बढ़ावा देना. अनुमान है कि ऐसा करने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युक्त उत्पादनों के अधिक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे. इसका एक उद्देश्य निवेश से सम्बंधित मानदंडों को उदार बनाना तथा सेवा व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी है.
  • हस्ताक्षरित हो जाने पर RCEP विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क व्यापार हो जायेगा. विदित हो कि इस सम्बद्ध 16 देशों की GDP $50 trillion की है और इन देशों में साढ़े तीन अरब लोग निवास करते हैं.
  • भारत की GDP-PPP $9.5 trillion की है और जनसंख्या एक अरब तीस लाख है. दूसरी ओर चीन की GDP-PPP $23.2 trillion की है और जनसंख्या एक अरब 40 लाख है.

RCEP को लेकर भारत की चिंताएँ

यद्यपि RCEP पर सहमति देने के लिए भारत पर बहुत दबाव पड़ रहा है, परन्तु अभी तक भारत इससे बच रहा है. इसके कारण निम्नलिखित हैं –

  • ASEANआयात शुल्कों को समाप्त करना चाह रहा है जो भारत के लिए लाभप्रद नहीं होगा क्योंकि इसका एक सीधा अर्थ होगा की चीनी माल बिना शुल्क के भारत में आने लगेंगे. यहाँ के उद्योग को डर है कि ऐसा करने से घरेलू बाजार में गिरावट आएगी  क्योंकि चीनी माल अधिक सस्ते पड़ेंगे.
  • भारत का यह भी जोर रहा है कि RCEP समझौते में सेवाओं, जैसे – पेशेवरों को आने-जाने के लिए दी जाने वाली कामकाजी VISA, को भी उचित स्थान दिया जाए. अभी तक सेवाओं से सम्बंधित प्रस्ताव निराशाजनक ही रहे हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में कोई भी सदस्य देश सार्थक योगदान करने के लिए तैयार नहीं होगा.

इसमें चीन की इतनी रूचि क्यों हैं?

चीन वस्तु-निर्यात के मामले में विश्व का अग्रणी देश है. इस बात का लाभ उठाते हुए वह चुपचाप अधिकांश व्यापारिक वस्तुओं पर से शुल्क हटाने की चेष्टा में लगा रहता है और इसके लिए कई देशों पर दबाव बनाता रहता है. उसका बस चले तो व्यापार की 92% वस्तुओं पर से शुल्क समाप्त ही हो जाए. इसलिए चीन RCEP वार्ता-प्रक्रिया में तेजी लाने से और शीघ्र से शीघ्र समझौते को साकार रूप देने में लगा हुआ है.

RCEP के माध्यम से मुक्त एशिया-प्रशांत व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Asia-Pacific – FTAAP) स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें 21 देश होंगे. इन देशों में एशिया-प्रशांत देशों के अतिरिक्त अमेरिका और चीन भी हैं, किन्तु भारत नहीं है.

ज्ञातव्य है कि FTAAP की एक अन्य योजना Trans Pacific Partnership से अमेरिका हट गया है. इससे चीन के लिए अपनी पहल को आगे बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त हो गया है.


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Consumer Protection Bill, 2019

संदर्भ

पिछले दिनों लोक सभा में उपभोक्ता संरक्षण विधयेक, 2019 पारित हो गया. इस विधेयक का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों को अधिक संरक्षण प्रदान करना और उनकी शिकायतों का समय पर निपटारा करना है.

उपभोक्ता संरक्षण विधयेक, 2019 के मुख्य तथ्य

  • विधेयक में उपभोक्ता की परिभाषा देते हुए कहा गया है कि उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो मूल्य देकर कोई वस्तु अथवा सेवा खरीदता है. तात्पर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति फिर से बेचने के लिए अथवा वाणिज्यिक उद्देश्य से कोई वस्तु अथवा सेवा हस्तगत करता है तो वह व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलायेगा.
  • विधेयक में सब प्रकार के लेन-देन को शामिल किया गया है, जैसे – ऑफलाइन, ऑनलाइन, टेली शौपिंग, बहु-स्तरीय विपणन अथवा प्रत्यक्ष विक्रय.
  • विधेयक में उपभोक्ताओं के कुछ मुख्य अधिकार बताये गये हैं : i) जीवन एवं संपत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं एवं सेवाओं के विपणन से संरक्षण पाना ii) वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, कार्य क्षमता, शुद्धता, मानक तथा मूल्य से सम्बंधित सूचना पाना iii)  प्रतिस्पर्धात्मक दामों पर कई प्रकार की वस्तुओं अथवा सेवाओं तक पहुँचना iv) अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापार प्रचलनों का समाधान माँगना.
  • विधेयक के अनुसार केंद्र सरकार एक केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) गठित करेगी जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देना, सुरक्षित करना और लागू करना होगा. यह प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अन्यायपूर्ण व्यापारिक प्रचलनों तथा भ्रामक विज्ञापनों से सम्बंधित विषयों के लिए नियामक निकाय होगा. इस प्राधिकरण में एक अन्वेषण शाखा भी होगी जिसका प्रमुख एक महानिदेशक होगा जो इन उल्लंघनों के विषय में जाँच अथवा विवेचना कर सकेगा.
  • असत्य अथवा भ्रामक विज्ञापन के लिए CCPA निर्माता अथवा प्रचारकर्ता को 10 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं दो वर्षों के कारावास का दंड लगा सकता है. यदि कोई निर्माता अथवा प्रचारकर्ता ऐसा अपराध दुबारा करता है तो उसपर 50 लाख रु. तक का आर्थिक दंड एवं पाँच वर्षों के कारावास का दंड लगाया जा सकता है.

उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग (CDRC)

विधेयक में एक उपभोक्ता विवाद समाधान आयोगों (Consumer Disputes Redressal Commission – CDRCs) की अभिकल्पना भी है. ये आयोग राष्ट्रीय, राज्यीय तथा जिले के स्तर पर गठित होंगे. इन आयोगों के समक्ष कोई भी उपभोक्ता इन वस्तुओं के लिए शिकायत दायर कर सकता है – अन्यायपूर्ण अथवा बंधनकारी व्यापारिक प्रचलन, दोषयुक्त वस्तु अथवा सेवा, अधिक अथवा छुपा हुआ दाम लगाना, जीवन एवं सम्पत्ति के लिए हानिकारक वस्तुओं अथवा सेवाओं के विक्रय का प्रस्ताव.   

विधेयक में विभिन्न CDRCs के लिए अधिकार क्षेत्रों का वर्णन किया गया है. जिला-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें सम्बंधित वस्तु एवं सेवा का मूल्य एक करोड़ रु. के अन्दर है. राज्य-स्तरीय CDRC उन शिकायतों को देखेगा जिनमें वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य एक करोड़ रु. से दस करोड़ रु. के बीच होगा. दस करोड़ रु. से अधिक मूल्य वाली वस्तु एवं सेवा की शिकायतें राष्ट्रीय CDRC द्वारा देखी जाएँगी.

CCPA के कार्य

  1. उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में जाँच एवं विवेचना करना तथा समुचित मंच पर मुकदमा दायर करना.
  2. हानिकारक वस्तुओं या सेवाओं को वापस करने और चुकाए गये मूल्य को लौटाने के विषय में आदेश निर्गत करना एवं विधेयक में परिभाषित अन्यायपूर्ण व्यापरिक प्रथाओं को बंद करना.
  • झूठा अथवा भ्रामक विज्ञापन बंद करने अथवा उसमें सुधार करने के लिए सम्बंधित व्यापारी/निर्माता/प्रचारकर्ता/विज्ञापनकर्ता/प्रकाशक को निर्देश निर्गत करना.
  1. दंड लगाना, एवं
  2. उपभोक्ताओं को असुरक्षित वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रति सतर्क करने के लिए सूचनाएँ निर्गत करना.

माहात्म्य

  1. वर्तमान व्यवस्था में उपभोक्ताओं को न्याय के लिए एक ही स्थान पर जाना होता है जिसके कारण निपटारे में बहुत अधिक समय लग जाता है. CCPA हो जाने से काम बँट जाएगा और निपटारे में तेजी आएगी.
  2. प्रस्तावित विधेयक में ऐसे दंडात्मक प्रावधान किए गये हैं जो भ्रामक विज्ञापनों और वस्तुओं में मिलावट की रोकथाम करने में सहायक होंगे.
  3. इसमें उत्पाद का उत्तरदायित्व स्पष्ट किया गया है. अतः अब निर्माता और सेवा प्रदाता दोषयुक्त उत्पादों अथवा सेवाओं को बेचने से बचेंगे.
  4. विधेयक में उपभोक्ता आयोग तक पहुँचने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और साथ ही मुकदमा चलने की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है.
  5. विधेयक में आपसी समझौते से भी निपटारे का प्रावधान किया गया है जिस कारण कुछ मामलों का निस्तारण बहुत शीघ्र हो सकता है.

विधेयक पर लगाये जा रहे आक्षेप

  • विधेयक में निपटारे में होने वाली देरी और जटिलता की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया है जबकि उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी समस्या यही है.
  • विधेयक में नियामक का प्रावधान तो है पर उसके कर्तव्यों पर सम्यक प्रकाश नहीं डाला गया है.
  • विधेयक में उपभोक्ता अधिकारों की जो परिभाषा दी गई है वह न तो सरल है और न ही स्पष्ट. इस कारण उपभोक्ता अपने अधिकारों के विषय में भ्रांति का शिकार हो सकते हैं.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : New Code on Wages

संदर्भ

पिछले दिनों लोक सभा में पारिश्रमिक संहिता विधेयक, 2019 पारित हुआ. यह संहिता विभिन्न पुराने अधिनियमों का विलय करके तैयार हुई है, जो हैं – पारिश्रमिक भुगतान अधिनियम, 1936, न्यूनतम पारिश्रमिक अधिनियम, 1948, बोनस भुगतान अधिनयम, 1965 और समान मुआवजा अधिनियम, 1976.

  • इस संहिता में न्यूनतम पारिश्रमिक निर्धारित करने के मानदंड बताये गये हैं. ये मानदंडसरकारी कर्मचारियों और महात्मा गाँधी नरेगा कर्मियों को छोड़कर सभी संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों के कर्मियों पर लागू होंगे.

पृष्ठभूमि

पारिश्रमिक संहिता उन चार संहिताओं में से एक है जिनके अन्दर सभी 44 श्रम कानून आ जाएँगे. ये चार संहिताएँ पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण तथा औद्योगिक संबंधों से सम्बंधित प्रावधान करती हैं.

पारिश्रमिक संहिता विधेयक, 2019 की मुख्‍य विशेषताएँ

  • वेतन संहिता सभी कर्मचारियों के लिए क्षेत्र और वेतन सीमा पर ध्‍यान दिए बिना सभी कर्मचारियों के लिए न्‍यूनतम वेतन और वेतन के समय पर भुगतान को सार्वभौमिक बनाती है.
  • आज की तिथि में न्‍यूनतम वेतन अधिनियम और वेतन का भुगतान अधिनियम दोनों को एक विशेष वेतन सीमा से कम और अनुसूचित रोजगारों में नियोजित कामगारों पर ही लागू करने के प्रावधान हैं. इस विधेयक से हर कामगार के लिए भरण-पोषण का अधिकार सुनिश्चित होगा और लगभग 40 से 100 प्रतिशत कार्यबल को न्‍यूनतम मजदूरी के विधायी संरक्षण को प्रोत्साहन मिलेगा.
  • इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर कामगार को न्‍यूनतम वेतन मिले, जिससे कामगार की क्रय शक्ति बढ़ेगी और अर्थव्‍यवस्‍था में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा. न्‍यूनतम जीवन यापन की स्थितियों के आधार पर गणना किये जाने वाले वैधानिक स्‍तर वेतन की प्रारम्भ से देश में गुणवत्तापूर्ण जीवन स्‍तर को प्रोत्साहन मिलेगा और लगभग 50 करोड़ कामगार इससे लाभान्वित होंगे.
  • इस विधेयक में राज्‍यों द्वारा कामगारों को डिजिटल मोड से वेतन के भुगतान को अधिसूचित करने की परिकल्‍पना की गई है.
  • विभिन्‍न श्रम कानूनों में वेतन की 12 परिभाषाएँ हैं, जिन्‍हें लागू करने में कठिनाइयों के अतिरिक्त मुकदमेबाजी को भी प्रोत्साहन मिलता है. इस परिभाषा को सरलीकृत किया गया है, जिससे मुकदमेबाजी कम होने और एक नियोक्‍ता के लिए इसका अनुपालन सरलता करने की उम्‍मीद है. इससे प्रतिष्‍ठान भी लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि रजिस्‍टरों की संख्‍या, रिटर्न और फॉर्म आदि न केवल इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकेंगे और उनका रख-रखाव किया जा सकेगा, बल्कि यह भी कल्‍पना की गई है कि कानूनों के माध्‍यम से एक से अधिक नमूना निर्धारित नहीं किया जाएगा.
  • वर्तमान में अधिकांश राज्‍यों में न्‍यूनतम वेतन को लेकर विविधता है. वेतन पर कोड के जरिये न्‍यूनतम वेतन निर्धारण की प्रणाली को सरल और युक्तिसंगत बनाया गया है. रोजगार के विभिन्‍न प्रकारों को अलग करके न्‍यूनतम वेतन के निर्धारण के लिए एक ही मानदंड बनाया गया है. न्‍यूनतम वेतन निर्धारण मुख्‍य रूप से स्‍थान और कौशल पर आधारित होगा. इससे देश में वर्तमान 2000 न्‍यूनतम वेतन दरों में कटौती होगी और न्‍यूनतम वेतन की दरों की संख्‍या कम होगी.
  • निरीक्षण प्रक्रिया में अनेक परिवर्तन किए गए हैं. इनमें वेब आधारित रेंडम कम्‍प्‍यूटरीकृत निरीक्षण योजना, अधिकार क्षेत्र मुक्‍त निरीक्षण, निरीक्षण के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक रूप से जानकारी मांगना और जुर्मानों का संयोजन आदि शामिल हैं. इन सभी परिवर्तनों से पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ श्रम कानूनों को लागू करने में सहायता मिलेगी.
  • ऐसे अनेक उदाहरण थे कि कम समयावधि के कारण कामगारों के दावों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका. अब सीमा अवधि को बढ़ाकर तीन वर्ष किया गया है और न्‍यूनतम वेतन, बोनस, समान वेतन आदि के दावे दाखिल करने को एक समान बनाया गया है. फिलहाल दावों की अवधि 6 महीने से 2 वर्ष के बीच है.
  • इसलिए यह कहा जा सकता है कि न्‍यूनतम वेतन के वैधानिक संरक्षण करने को सुनिश्चित करने तथा देश के 50 करोड़ कामगारों को समय पर वेतन भुगतान मिलने के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है. यह कदम जीवन सरल बनाने और व्‍यापार को अधिक सरल बनाने के लिए भी वेतन संहिता के माध्‍यम से उठाया गया है.

न्यूनतम पारिश्रमिक के निर्धारण की विधि

  • प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, न्यूनतम पारिश्रमिक कौशल और भौगोलिक क्षेत्र जैसे कारकों से जोड़ा जाएगा. अभी क्या होता है कि न्यूनतम पारिश्रमिक का निर्धारण काम की श्रेणियों के आधार पर होता है, जैसे – कुशल काम, अकुशल काम, अर्ध-कुशल काम और उच्च कुशलता वाले काम. इसके अतिरिक्त अभी भौगोलिक क्षेत्र के साथ-साथ काम की प्रकृति का भी ध्यान रखा जाता है जैसे खनन आदि. न्यूनतम पारिश्रमिक केन्द्रीय सरकार के अंतर्गत 45 अनुसूचित आजीविकाओं तथा राज्यों के अंतर्गत 1,709 अनूसूचित आजीविकाओं पर लागू होता है.
  • जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, अन्य सभी कारकों को हटाते हुए मात्र कौशल और भौगोलिक क्षेत्र को ही न्यूनतम पारिश्रमिक के निर्धारण का आधार रखा गया है.

निर्धारण की नई विधि का लाभ

विधेयक में प्रस्तावित न्यूनतम पारिश्रमिक के निर्धारण की विधि से आशा की जाती है की पूरे देश में अभी जो 2,500 न्यूनतम पारिश्रमिक दरें चल रही हैं, उनकी संख्या घटकर 300 रह जायेगी.


GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : NASA’s Kepler Space telescope

संदर्भ

NASA ने पिछले दिनों अपने TESS नामक उपग्रह के माध्यम से एक नई ग्रह प्रणाली का पता लगाया है जिसको TESS रोचक वस्तु (TESS Object of Interest – TOI) 270 नाम दिया गया है. यह पिंड पृथ्वी से लगभग 73 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है पिक्टर नक्षत्र पुंज में अवस्थित है. विदित हो कि पिक्टर दक्षिणी अन्तरिक्षीय गोलार्द्ध का एक नक्षत्र पुंज है.

TESS क्या है?

  • TESS का full form है – Transiting Exoplanet Survey Satellite.
  • यह सौर प्रणाली के बाहर उपग्रहों की खोज के लिए एक नया मिशन है.
  • विदित हो कि इसी उद्देश्य से पूर्व में भेजे गए Kepler mission का जीवनकाल 20 वर्षों में लगभग 3,700 बाहरी ग्रहों का पता लगाने के पश्चात् समाप्त होने जा रहा है. यह मिशन उसी का स्थान ले रहा है. यह मिशन उसी का स्थान ले रहा है.
  • TESS मिशन का प्रारम्भ सौरमंडल के पड़ोस में स्थित छोटे ग्रहों का पता लगाने के लिए 18 April 2018 को किया गया.
  • जब कोई उपग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है तो उस घटना को संक्रमण (transit) कहा जाता है. उस समय उस तारे की चमक में रुक-रुक कर और नियमित रूप से कमी आ जाती है. यह यान इस घटना का अध्ययन करेगा. इसके लिए यह कम से कम 2 लाख तारों पर नजर रखेगा.
  • यह जिन तारों पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगा वे केपलर द्वारा परीक्षित तारों की तुलना में 30 से 100 गुने अधिक चमकीले हैं.
  • यह यान पृथ्वी और चन्द्रमा के परिक्रमा पथ पर रहकर समस्त आकाश का सर्वेक्षण करेगा.
  • TESS पृथ्वी के ऊपर एक ऐसे कक्ष में स्थित होगा जिसमें आज तक और कोई दूसरा अन्तरिक्षयान नहीं रखा गया है. इस अंडाकार कक्ष को P/2 कहा गया है जो चंद्रमा के परिक्रमाकाल का ठीक आधा है. तात्पर्य यह कि TESS प्रत्येक 7 दिन में पृथ्वी की परिक्रमा कर लेगा.

GS Paper  2 Source: Indian Express

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Topic : Regulatory sandbox

संदर्भ

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) शीघ्र ही नियामक सैंडबॉक्स का प्रयोग करने की छूट देने जा रहा है जिससे कि नए एवं नवाचारी उत्पादों और औद्योगिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिल सके.

IRDAI सैंडबॉक्स क्या है?

  1. IRDAI सैंडबॉक्स एक नियामक सैंडबॉक्स है. इस सैंडबॉक्स में शामिल होने के लिए किसी कम्पनी का शुद्ध मूल्य 10 लाख रु. होना चाहिए और उसका कम से कम 1 वर्ष का वित्तीय रिकॉर्ड भी होना चाहिए.
  2. इस सैंडबॉक्स में कम्पनियों को पाँच श्रेणियों के अंतर्गत अपने उत्पादों का एक वर्ष तक परीक्षण करने की छूट होगी.
  • जिन श्रेणियों में कम्पनियाँ अपने उत्पाद जाँच सकेंगी, वे हैं – बीमा का आवेदन अथवा वितरण, बीमा उत्पाद, अंडर राइटिंग, पालिसी और दावों का निस्तारण.

नियामक सैंडबॉक्स क्या है?

नियामक सैंडबॉक्स उस सुरक्षित स्थान को कहते हैं जहाँ व्यवसायीगण शिथिल नियामक दशाओं में अपने नवाचारी उत्पादों की जाँच कर सकते हैं. इसमें सम्मिलित होने वाली कंपनियाँ अपने नए उत्पादों का विमोचन एक नियंत्रित परिवेश के अन्दर गिने-चुने उपभोक्ताओं के समक्ष एक सीमित समय के लिए करती हैं.

नियामक सैंडबॉक्स का महत्त्व और लाभ

  • नियामक सैंडबॉक्स से Fintech कम्पनियों को अपने नवाचारी उत्पादों को कम लागत पर और कम समय में अनावरण करने में सहायता मिलेगी.
  • सैंडबॉक्स की व्यवस्था से यह लाभ भी है कि Fintech कंपनियाँ अपने नए उत्पादों और सेवाओं का परीक्षण प्रत्यक्ष रूप से अथवा आभासी रूप से कर सकती हैं.
  • इससे कंपनियाँ बिना किसी व्यापक और खर्चीले तामझाम के अपने उत्पाद की व्यवहार्यता का परीक्षण कर सकेंगी.
  • नियामक सैंडबॉक्स का एक अतिरिक्त लाभ यह है कि Fintech कंपनियाँ अपने उत्पादों से सम्बंधित नए-नए प्रयोग कर पाएँगे और इसमें विफलता का खतरा कम होगा और यदि होगा भी तो उसके कारणों का विश्लेषण किया जा सकता है.

नियामक सैंडबॉक्स की आवश्यकता क्यों?

  • नीति आयोग के अनुसार भारत का फिनटेक बाजार विश्व में सबसे अधिक तेजी से बढ़ने वाला बाजार है. एक औद्योगिक अनुसंधान से पता चला है कि 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर अर्थात् खुदरा और SME का 60% कर्ज डिजिटल तरीके से भुगतान किया जाएगा.
  • भारतीय फिनटेक अर्थतंत्र विश्व का तीसरा बड़ा अर्थतंत्र है जिसने 2014 से लगभग 6 बिलियन डॉलर के निवेश को आकर्षित किया है. फिनटेक अथवा वित्तीय तकनीक वाली कंपनियाँ विभिन्न वित्तीय सेवाओं के लिए तकनीक का प्रयोग करती हैं, जैसे – भुगतान, पियर टू पियर उधारी, क्लाउड फंडिंग आदि.
  • इसलिए ग्राहकों की सुरक्षा तथा सभी हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए आज फिनटेक प्रतिष्ठानों के नियन्त्रण हेतु नियामक और पर्यवेक्षणात्मक तन्त्र की अत्यंत आवश्यकता है.

Prelims Vishesh

What are Microdots? :-

  • सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना का प्रारूप निर्गत किया है जिसमें केन्द्रीय मोटर वाहन नियमावली में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि सभी मोटर वाहनों तथा उनके पुर्जों, अवयवों, असेंबलियों और सब-असेंबलियों पर लगभग अदृश्य छोटे-छोटे बिंदु (Microdots) लगाये जाएँगे जो स्थायी होंगे.
  • इन छोटे बिन्दुओं को सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखा जा सकेगा और अल्ट्रा-वायलट प्रकाश से पहचाना जा सकेगा.
  • यह सब गाड़ियों और उनके पुर्जों की चोरी को रोकने के लिए किया गया है.

AMBIS :

  • महाराष्ट्र देश का एक ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने AMBIS प्रणाली को अंगीकृत किया है.
  • AMBIS का पूरा नाम है – Automated multimodal biometric identification system.
  • इस प्रणाली में अँगुलियों के चिन्ह और छायाचित्र का डिजिटल डेटाबेस तो है ही, साथ ही इसमें आँख की पुतली और चेहरे की बायो-मैट्रिक्स जोड़कर एक आपराधिक डेटाबेस बनाया गया है.

Muthulakshmi Reddi :

  • गूगल ने पिछले दिनों मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी की 33वीं जयंती पर एक डूडल बनाया.
  • विदित हो कि डॉ. मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी भारत की पहली महिला विधायक थी और साथ ही वे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत भारत की पहली महिला सर्जन (first female legislator) भी थीं.
  • तमिलनाडु इनकी जयंती पर प्रत्येक वर्ष अस्पताल दिवस मनाया करता है.

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