SANSAR डेली करंट अफेयर्स, 01 June 2022

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Sansar Daily Current Affairs, 01 June 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

Topic : President’s Rule

संदर्भ

भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन भारत के 16वें राष्ट्रपति के लिए चुनाव 18 जुलाई 2022 को आयोजित किये जाएंगे तथा परिणाम 21 जुलाई को घोषित किये जायेंगे।

राष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल

अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में संसद के उच्च एवं निम्न सदन के सभी निर्वाचित सदस्य (राज्यसभा और लोकसभा सांसद) एवं राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों (पुदुच्चेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर) की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (विधायक) शामिल होते हैं।

निर्वाचन प्रणाली

राष्ट्रपति का चुनाव ‘अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली’ द्वारा किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 55 में राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया दी गई है, इसके अतिरिक्त अन्य बातें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति निर्वाचन अधिनियम, 1952 में हैं। अनुच्छेद 55 के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार ‘एकल संक्रमणीय मत प्रणाली’ द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा तथा यथासंभव विभिन राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापन में एकरूपता रखी जाएगी। एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत यदि प्रत्याशियों की संख्या एक से अधिक है तो प्रत्येक मतदाता प्रत्येक प्रत्याशी को अपना मत बरीयता क्रम के अनुसार देता है। उदाहरण के तौर पर यदि कुल 3 प्रत्याशी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे हैं, तो मतदाता 3 प्रत्याशियों को प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय वरीयता क्रम के अनुसार अपना मत देगा।

नामांकन प्रक्रिया

राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार 50 प्रस्तावकों एवं 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल करता है। एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।

मतदाताओं के मत का मूल्य

  • प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 708 निश्चित है जबकि विधायकों के वोट का मूल्य अलग- अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है।
  • प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य राज्य की जनसंख्या को विधानसभा में निर्वाचित विधायकों की संख्या से विभाजित करके तथा प्राप्त भागफल को पुन: 1000 से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के लिये सबसे अधिक वोट मूल्य 208 है जबकि अरुणाचल प्रदेश में यह सिर्फ 8 है। 
  • संविधान (84वाँ संशोधन) अधिनियम 2001 के अनुसार, वर्ष 2026 तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए 1971 की जनसंख्या को ही आधार माना जायेगा।

मतगणना

राष्ट्रपति पद के लिए उस व्यक्ति को सफल घोषित किया जाता है, जो कुल बैध मतों के आधे से कम से कम एक अधिक (50% + 1) मत प्राप्त करे। मतगणना में सबसे पहले प्रथम वरीयता के मतों की गणना की जाती है। यदि कोई प्रत्याशी न्यूनतम कोटा प्राप्त कर लेता है तो उसे सफल घोषित कर दिया जाता है। यदि कोई भी उम्मीदवार न्यूनतम कोटा प्राप्त नहीं करता तो द्वितीय चक्र की गणना प्रारंभ होती है। इसमें सबसे कम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को स्पर्धा से बाहर कर उसके मतपत्रों के द्वितीय वरीयता के मतों की गणना की जाती है तथा उसे अन्य उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त प्रथम वरीयता के मतों में जोड़ दिया जाता है। यदि द्वितीय चक्र की गणना के बाद भी कोई उम्मीदवार न्यूनतम कोटा प्राप्त नहीं कर पाता है तो उक्त प्रक्रिया पुन: दोहराई जाती और यह तब तक चलती रहती है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को न्यूनतम कोटा प्राप्त नहीं हो जाता है।

अन्य तथ्य

  • अनुच्छेद 71 के तहत, राष्ट्रपति चुनाव सम्बन्धी विवादों का निपटारा उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है तथा उसका निर्णय अंतिम होता है।
  • राष्ट्रपति को CJI शपथ दिलाता है, इस शपथ का प्रारूप अनुच्छेद 60 में दिया गया है।
  • राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के सदस्य राष्ट्रपति के महाभियोग प्रक्रिया में भाग नहीं लेते हैं।

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

Topic : Har Ghar Tiranga

संदर्भ

पूरे देश में ‘संशोधित भारतीय ध्वज संहिता’ (Revised Flag Code of India) में लागू हो गयी है। केंद्र सरकार ने द्वारा दिसंबर 2021 में धवज संहिता (फ्लैग कोड) में संशोधन किया गया था।

संशोधित नियमों के तहत

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज या तिरंगा को अब ‘पॉलिएस्टर’ कपडे से और मशीनों की मदद से बनाया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

इससे पहले ‘भारतीय ध्वज संहिता’, 2002 के अनुसार, राष्ट्रीय धवज के निर्माण में केवल खादी या हाथ से काता हुआ कपड़ा की प्रयोग करने की अनुमति थी।

हर घर तिरंगा (हर दरवाजे पर तिरंगा) कार्यक्रम

‘हर घर तिरंगा’ (Har Ghar Tiranga) कार्यक्रम में सरकारी भवनों, निजी कार्यालयों और आवासों को कवर करने का प्रस्ताव किया गया है।

राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग करने संबंधी क़ानून

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि संविधान में किसी राज्य को अपना झंडा रखने की मनाही नहीं है. परन्तु राज्य के झंडे को इस तरह नहीं फहराना चाहिए कि राष्ट्रीय झंडे का अपमान हो.

संविधान की सातवीं अनुसूची में वर्णित समवर्ती सूची में झंडे का उल्लेख नहीं है. परन्तु अनुच्छेद 51A यह निर्देश करता है कि सभी नागरिक संविधान का पालन करेंगे और इसके आदर्शों एवं संस्थानों, राष्ट्रीय झंडे और राष्ट्रगीत का सम्मान करेंगे.

2002 की भारतीय झंडा संहिता (FLAG CODE OF INDIA) क्या कहती है?

यह संहिता राज्य के अलग झंडे का निषेध नहीं करता है. इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अन्य झंडे इस शर्त पर फहराए जा सकते हैं कि उन्हें उसी डंडे में नहीं लगाया जाए जिसमें भारतीय झंडा लगा हो अथवा उन्हें राष्ट्रीय झंडे से अधिक ऊँचे स्थान पर नहीं लगाया जाए.  

किसी राज्य के लिए अलग झंडा स्वीकृत करने का निहितार्थ

एक राज्य को अपना झंडा रखने की छूट मिलेगी तो शेष अन्य राज्य भी अपना-अपना झंडा माँगने लगेंगे. कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि जर्मनी और अमेरिका में राज्यों को अलग-अलग झंडा मिला हुआ है इसलिए भारत में भी ऐसा होना चाहिए. परन्तु भारत और उन देशों के बीच बहुत अंतर है क्योंकि उन देशों की तुलना में भारत का संघीय स्वरूप अधिक प्रबल है और यहाँ के राज्य उतने स्वतंत्र नहीं हैं जितने कि उन देशों में.

indian flag dimension

उल्लेखनीय तथ्य

  • भारत का राष्ट्रीय ध्वज, हाथ से काते गए और हाथ से बुने हुए ऊन / कपास /रेशम खादी की पट्टियों से निर्मित होगा.
  • राष्ट्रीय ध्वज, आकार में आयताकार होगा. झंडे की लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई) का अनुपात 3:2 होगा.
  • सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सार्वजनिक भवनों पर झंडे को आधा झुकाए जाने के अवसरों को छोड़कर, आधा झुका हुआ झंडा नहीं फहराया जाएगा.
  • राज्य द्वारा किए जाने वाले अंतिम संस्कार या सशस्त्र बलों अथवा अन्य अर्धसैनिक बलों के अंत्येष्टि संस्कार को छोड़कर, निजी अंतिम संस्कार सहित किसी भी रूप में ध्वज का उपयोग, किसी भी रूप में शव- आवरण के रूप में नहीं किया जाएगा.
  • ध्वज का उपयोग किसी भी प्रकार की पोशाक या वर्दी के हिस्से के रूप में नहीं किया जाएगा, और न ही इसकी, किसी तकिया, रूमाल, नैपकिन या किसी ड्रेस सामग्री पर छपाई या कशीदाकारी की जाएगी.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

Topic : GST compensation

संदर्भ

केंद्र सरकार द्वारा 31 मई, 2022 तक राज्यों को देय ‘वस्तु और सेवा कर’ (जीएसटी) क्षतिपूर्ति की पूरी राशि- ₹86,912 करोड़ जारी कर दी गयी है।

यह कदम, राज्यों को उनके संसाधनों के प्रबंधन में सहायता करने और वित्तीय वर्ष के दौरान उनके कार्यक्रमों, विशेष रूप से पूंजीगत व्यय, को सफलतापूर्वक पूरा किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

‘जीएसटी क्षतिपूर्ति’ क्या है?

एक समान राष्ट्रव्यापी ‘वस्तु एवं सेवा कर’ (जीएसटी) लागू करने हेतु, ‘संविधान (101वां संशोधन) अधिनियम’, 2016 (Constitution (One Hundred and First Amendment) Act, 2016) के अंतर्गत एक ‘तंत्र’ का निर्माण किया गया था।

इसके तहत, राज्यों को ‘जीएसटी का SGST घटक अर्थात ‘राज्य जीएसटी’ और IGST अर्थात समन्वित जीएसटी (Integrated GST) का एक भाग दिया जाना निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त, इस नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था अपनाए जाने से राज्यों को होने वाली ‘राजस्व क्षति’ को, पांच साल की अवधि के लिए, एक समेकित ‘जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष’ से पूरा किए जाने पर सहमति हुई थी।

‘जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष’ का वित्तीयन

  • इस कोष को एक ‘क्षतिपूर्ति उपकर’ (Compensation Cess) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाता है। यह उपकर तथाकथित ‘अवगुण’ समझी जाने वाली वस्तुओं (Demerit Goods) पर लगाया जाता है।
  • इन वस्तुओं में पान मसाला, सिगरेट और तम्बाकू उत्पाद, वायवीय पानी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, कोयला और कुछ यात्री मोटर वाहन शामिल हैं।

राजस्व क्षतिपूर्ति की गणना

राजस्व क्षतिपूर्ति की गणना, आधार वर्ष (2015-2016) के सकल राजस्व में प्रतिवर्ष 14% चक्रवृद्धि दर के हिसाब से वृद्धि के आधार पर ‘अनुमानित राजस्व’, तथा गणना वर्ष के आंकलित आंकड़े और वास्तविक जीएसटी संग्रह के मध्य अंतर की गणना करके प्रतिवर्ष की जाती है।

क्षतिपूर्ति समयसीमा में वृद्धि

जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए समय सीमा, मूल-कानून में निर्धारित की गई थी, और इसलिए इसमें वृद्धि करने हेतु, ‘जीएसटी परिषद’ को पहले इस संदर्भ में केंद्र सरकार के लिए सिफारिश करनी होगी।

इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी क्षतिपूर्ति योजना की समाप्ति तारीख को आगे बढाए जाने हेतु जीएसटी कानून में एक संशोधन प्रस्ताव पारित करना होगा।


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

Topic : Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi

संदर्भ

हाल ही में, ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) या ‘पीएम-किसान’  (PM-KISAN) की 11वीं किस्त के रूप में 20,000 करोड़  रुपये से अधिक राशि, 10 करोड़ से अधिक किसानों को अंतरित की गयी।

पीएम-किसान योजना

  • इस योजना के तहत दो हेक्‍टेयर त‍क के मिश्रित जोतों/स्‍वामित्‍व वाले पात्र छोटे और मध्यम किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी.
  • यह धनराशि प्रति 2000 रुपये की तीन किस्‍तों में प्रदान की जाएगी.

पीएम-किसान योजना के लाभ

  • योजना के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की प्रक्रिया मानवीय हस्‍तक्षेप के बिना लाभार्थियों के बैंक खातों में पारदर्शी रूप से बिना किसी देर के डिजिटली प्रमाणिक भुगतान सुनिश्चित करती है.
  • भारत सरकार की योजनाओं के लिए समस्‍त भुगतान डीबीटी के जरिये किये जा रहे हैं.
  • पीएम-किसान योजना के अंतर्गत पब्लिक फाइनेंशियल मैंनेजमेंट सिस्टम (PFMS) द्वारा इतने कम अर्से में लाभार्थियों की विशाल संख्‍या के खातों में धनराशि के इलेक्‍ट्रॉनिक अंतरण का सफल परिचालन, पीएफएमएस की ऐतिहासिक उपलब्घि है, जिसने भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को और ज्‍यादा मजबूती प्रदान की है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

Topic : Liquid Nano Urea

संदर्भ

हाल ही में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के ‘कलोल’ में देश के पहले ‘तरल नैनो यूरिया’ (Liquid Nano Urea) संयंत्र का उद्घाटन किया।

‘तरल नैनो यूरिया’ का उत्पादन ‘भारतीय किसान उर्वरक सहकारी’ लिमिटेड (IFFCO) द्वारा किया जाएगा।

‘नैनो यूरिया’ (तरल) के विषय में

नैनो यूरिया ठोस यूरिया का ही तरल (liquid) रूप है। यह सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करता है। यह तरल यूरिया किसानों के लिए काफी सुविधाजनक और किफायती है। तरल नैनो यूरिया (Liquid nano urea), मुख्यतः यूरिया का ‘नैनो कणों’ में परिवर्तित रूप होती है।

 

 

‘तरल नैनो यूरिया’ एवं ‘आयातित यूरिया’ में अंतर

  • लागत: ‘तरल नैनो यूरिया’ अपेक्षाकृत सस्ती होती है। बगैर सब्सिडी के इसके आधा लीटर का मूल्य 240 रुपये तक होता है, जबकि ‘यूरिया’ के एक बैग (बोरी) की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,500 रुपये से 4,000 रुपये के बीच होती है। ‘नैनो यूरिया’ की एक बोतल, प्रभावी ढंग से ‘यूरिया’ के कम से कम एक बैग के बराबर कार्य कर सकती है।
  • सरकार के लिए लाभ: ‘तरल नैनो यूरिया’ सरकार के उर्वरक सब्सिडी भार को कम करेगी। भारत में, देश में उपयोग किए जाने वाले उर्वरकों का व्यापक रूप से आयात किया जाता है अर्थात उर्वरकों के आयात पर निर्भर है।
  • ‘तरल नैनो यूरिया’ की दक्षता 85-90 प्रतिशत तक हो सकती है, जबकि पारंपरिक यूरिया की दक्षता मात्र लगभग 25 प्रतिशत होती है।
  • ‘तरल नैनो यूरिया’ के भंडारण और उपयोग करने तक की अवधि अर्थात ‘शेल्फ लाइफ’ (Shelf Life) एक साल होती है, यानि कि इसे एक साल की अवधि तक रखा और उपयोग किया जा सकता है, और किसानों को ‘तरल नैनो यूरिया’ के ‘नमी’ के संपर्क में आने पर जम जाने (केकिंग) के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है।

‘तरल नैनो यूरिया’ के अन्य लाभ

  1. ‘नैनो रूप’ में उपलब्ध उर्वरक, फसलों को पोषक तत्वों की लक्षित आपूर्ति प्रदान करते हैं, क्योंकि अति सूक्ष्म (नैनो) रूप में बोए जाने वाले उर्वरक, पत्तियों की बाह्य-त्वचा पर पाए जाने वाले रंध्रों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
  2. इसके प्रयोग से, पारंपरिक यूरिया का असंतुलित और अंधाधुंध उपयोग कम हो जाता है।
  3. इससे फसल उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  4. ‘तरल नैनो यूरिया’ से मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण कम होता है।

Prelims Vishesh

Astra Mark-1 :-

  • हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा ‘अस्त्र मार्क -1’ (Astra Mark-1) की आपूर्ति के लिए हैदराबाद स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ‘भारत डायनेमिक्स लिमिटेड’ (बीडीएल) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • ‘अस्त्र मार्क -1’ एक ‘दृश्य सीमा से परे’ (Beyond Visual Range – BVR), हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-To-Air Missile – AAM) है।
  • इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारतीय वायुसेना के सुखोई -30 एमकेआई और तेजस और नौसेना के मिग-29 के जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनाती के लिए डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • मारक क्षमता: 110 किमी।

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