Sansar डेली करंट अफेयर्स, 01 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 01 July 2020


GS Paper 1 Source : UN News

un news

UPSC Syllabus : Women Related issues. Population and associated issues, poverty and developmental issues, urbanization, their problems and their remedies.

Topic : State of world population report by UNFPA

संदर्भ 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund – UNFPA) द्वारा हाल ही में एक प्रतिवेदन में कहा गया है कि हर साल लाखों लड़कियों को ऐसी प्रथाओं का सामना करना पड़ता है जिससे उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से क्षति पहुँचती है, और उनके परिवारों, दोस्तों व समुदायों की इस स्थिति की जानकारी होती है और उनकी सहमति भी.

रिपोर्ट से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • तथाकथित ख़ानदान या परिवार के सम्मान (प्रतिष्ठा)के नाम पर अपराधों से लेकर दहेज सम्बन्धी हिंसा तक, कम से कम 19 हानिकारक प्रथाएँ मानवाधिकार उल्लंघन मानी जाती हैं.
  • इस रिपोर्ट में तीन सबसे अधिक प्रचलित प्रथाओं पर ध्यान केन्द्रित किया गया है: बाल विवाह, पुत्र वरीयता और लिंग पक्षपाती सैक्स चयन व महिला जननांग विकृति (महिला ख़तना).
  • पुत्र होने की इच्छा (पुत्रों को प्राथमिकता) और लिंग-पक्षपातपूर्ण सैक्स चयन के परिणामस्वरूप दुनिया भर में 14 करोड़ 20 लाख से ज़्यादा लड़कियाँ गायब हो गई हैं.
  • रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक 3 अरब 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश करने से इन दो हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करके अनुमानित 8 करोड़ 40 लाख लड़कियों की परेशानियों का अन्त किया जा सकता है.

भारत की स्थिति

  • भारत में, गर्भ में लिंग पक्षपाती सैक्स चयन (लड़कियों के बजायलड़कों को वरीयता) के चलन की वजह से वर्ष 2013-17 के बीच, प्रत्येक वर्ष लगभग 4 लाख 60 हज़ार लड़कियाँ जन्म से पहले ही मौत का शिकार हो गईं. लिंग-पक्षपाती चयन के कारण केवल चीन (50%) और भारत (40%) में ही दुनियाभर के 90 प्रतिशत यानि कुल मिलाकर 1 करोड़ 20 लाख लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देने के मामले होते हैं. 
  • हालाँकि बाल विवाह जैसी कुछ हानिकारक प्रथाएँ उन देशों में जारीरही हैं, जहाँ वो पहले सबसे अधिक प्रचलित थीं. उदाहरण के लिए, 2005-06 में भारत में बाल विवाह में 47 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी देखी गई, वहीं 2015-16 में 27 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं को समर्थन देती अर्थव्यवस्थाएँऔर क़ानूनी प्रणालियाँ इस तरह पुनर्गठित की जानी चाहिए कि हर महिला को समान अवसर की गारण्टी मिले.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर कन्वेन्शन, बाल अधिकारों पर कन्वेन्शन और 1994 की जनसंख्या और विकास पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन की कार्रवाई जैसी अन्तरराष्ट्रीय सन्धियों और समझौतों की पुष्टि करने वाले देशों का कर्तव्य है कि वे परिवार के सदस्यों, धार्मिक समुदायों, स्वास्थ्य कर्मियों, वाणिज्यिक उद्यमों या राज्य संस्थानों द्वारा महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ होने वाली क्षति और भेदभाव को समाप्त करें. कई देशों ने इस बारे में क़ानून तो बनाए हैं, लेकिन अनेक स्थानों पर उनका कार्यान्वयन कमज़ोर है. हालाँकि क़ानून, कार्रवाई के लिए एक अहम ढाँचा प्रदान करते हैं, लेकिन केवल क़ानून बनाने से मसला हल नहीं होता. दशकों के अनुभव और अनुसन्धान से स्पष्ट है कि बिल्कुल निचले स्तर पर, ज़मीनी दृष्टिकोण के ज़रिये, स्थाई परिवर्तन लाने में ज़्यादा मदद मिलती है. इस समस्या से निपटने के लिए हमें मूल कारणों पर प्रहार करना होगा, विशेष रूप से लिंग-पक्षपाती मानदण्डों पर. इसकी रोकथाम के लिए हमें समुदायों को बेहतर सहयोग देना होगा और समझना होगा कि इन प्रथाओं का लड़कियों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है तथा इसकी रोकथाम से पूरे समाज को कितना फ़ायदा हो सकता है. “केवल भारत में ही 4 करोड़ 60 लाख लड़कियाँ गुमशुदा हैं. यह एक गम्भीर वास्तविकता है और इसे क़तई स्वीकार नहीं किया जा सकता. इस स्थिति को तुरन्त बदलने की आवश्यकता है. परिवर्तन तभी आ सकता है जब लड़कियों और महिलाओं को महत्व देने के लिए असमान संरचना और मानदण्ड बदले जाएँ. हमें समानता, स्वायत्तता और पसन्द के सिद्धान्तों पर चलने वाली दुनिया के निर्माण की ओर बढ़ने की आवश्यकता है.


GS Paper 2 Source : Times of India

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UPSC Syllabus : Issues Related to Health.

Topic : National Doctor’s Day

संदर्भ 

1 जुलाई को देशभर में राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (National Doctor’s Day) मनाया जाता है. इस बार इस दिवस की महत्ता इसलिए बढ़ गयी थी क्योंकि इस बार कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हमारे भारतीय चिकित्सक अग्रिम पंक्ति में तैनात थे.

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस क्या है?

  • देश के जाने-माने चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधानचंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) के जन्म तिथि और पुण्यतिथि के अवसर पर प्रतिवर्ष 1 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है.
  • भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम 1991 में नेशनल डॉक्टर डे मनाया गया था.
  • विदित हो कि यह दिवस स्वास्थ्य क्षेत्र के मानवतावादी पेशे में काम करने वाले उन सारे डॉक्टरों को समर्पित है जो हर विकट परिस्थिति में चिकित्सक मूल्य को बरकरार रख मानव धर्म को निभाते हुए मरीजों के इलाज हेतु बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाते हैं.

dr bidhan chandr raay

डॉ. बिधान चंद्र राय के बारे में

  • 1 जुलाई 1882 को डॉ बिधान चंद्र राय का जन्म बिहार के पटना जिले के बांकीपुर स्थित खजांची रोड में हुआ था. कोलकाता से अपनी चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद डॉक्टर विधान चंद्र राय ने आगे की पढ़ाई के लिए लंदन का रूख किया. लंदन से उन्होंने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि प्राप्त की. पुनः पढ़ाई पूरी करने के उपरांत वह भारत लौट कर चिकित्सीय कार्यों में जुट गए एवं बाद में कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता के रूप में नियुक्त हुए. ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने कभी भी मरीजों से शुल्क नहीं लिया.
  • डॉ बिधान चंद्र की ख्याति मात्र एक चिकित्सक के रूप में नहीं थी बल्कि वह एक प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी भी थे.
  • असहयोग आंदोलन से जुड़ने के उपरांत उनको प्रसिद्धि मिली एवं इसके उपरांत उन्होंने बढ़ चढ़कर सभी गांधीवादी राष्ट्रवादी आंदोलन में भाग लिया.
  • इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ते हुए सक्रिय राजनीति में कदम रखा. भारत की आजादी के बाद यह पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त हुए लेकिन मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनका परम उद्देश्य मानव सेवा और जन कल्याण ही था.
  • उनकी अभिनव सोच और दूरदर्शी नेतृत्व के लिए प्राय उन्हें पं. बंगाल राज्य का आर्किटेक्ट भी कहा जाता है. महान स्वतंत्रता सेनानी एवं महान मानवतावादी के रूप में विख्यात डॉ बिधान चंद्र की 1962 में 80 वर्ष की आयु में अपने जन्मदिन के दिन अर्थात् 1 जुलाई को मृत्यु हो गई.
  • डॉ बिधान चंद्र राय को उनके योगदान के कारण भारत सरकार के द्वारा बाद में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government Policies & Interventions.

Topic : Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana

संदर्भ 

  • केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि के न्यूज लेटर “मत्स्य सम्पदा” के पहले संस्करण और प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों (PMMSY) को जारी किया गया.
  • न्यूज़लेटर “मत्स्य सम्पदा” मत्स्य पालन विभाग के प्रयासों का एक परिणाम है जिसके द्वारा संचार के विभिन्न साधनों के माध्यम से हितधारकों विशेष रूप से मछुआरों और मत्स्य पालकों तक पहुंचा जा सकेगा.
  • उन्हें मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र की नवीनतम घटनाओं के संदर्भ में जानकारी प्रदान की जा सकेगी.
  • इसे वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही से शुरू करते हुए तिमाही आधार पर प्रकाशित किया जाएगा.

प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की प्रमुख विशेषताएँ

  1. PMMSY भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास के माध्यम से नीली क्रांति लाने के बनाई गई है. इसके दो अवयव हैं –केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS) और केंद्र प्रायोजित योजना (CSS).
  2. यह योजना वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक 5 वर्षों की अवधि के दौरान लागू की जाएगी.
  3. इस योजना का नोडल मंत्रालयमत्स्य पालनपशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय है.

कार्यान्वयन

केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS) : संपूर्ण परियोजना / इकाई लागत केंद्र सरकार (अर्थात् 100% केंद्रीय वित्त पोषण) द्वारा वहन की जाएगी.

इस योजना के केन्द्रीय प्रायोजित योजना अवयव के दो भाग हैं – i) पहला, जिसमें लाभार्थी नहीं होंगे ii) और दूसरा, जो लाभार्थियों के लिए होंगे.

इसके अंतर्गत जो काम होगा वे हैं –

  1. उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि.
  2. अवसंरचना एवं फसल कटने के बाद का प्रबंधन.
  3. मत्स्यपालन और नियामक ढांचा.

PMMSY के मुख्य लाभ

  1. मत्स्यपालन क्षेत्र में जो महत्त्वपूर्ण कमियाँ हैं उनपर ध्यान देना और इसकी पूर्ण क्षमता को साकार करना.
  2. निरंतर औसत वार्षिक विकास दर पर मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता में बढ़ोतरी.
  3. प्रमाणित गुणवत्ता वाले मछली के बीज और दाने की उपलब्धता, मछली कहाँ-कहाँ उपलब्ध हैं यह पता लगाने की प्रक्रिया के साथ-साथ समुद्र आदि में मछुआरों के स्वास्थ्य के कुशल प्रबंधन में सुधार लाना.
  4. आधुनिकीकरण और मूल्य शृंखला के सुदृढीकरण समेत महत्त्वपूर्ण अवसंरचना का सृजन.
  5. 15 लाख मछुआरों, मत्स्य पालकों, मत्स्यकर्मियों, मत्स्य विक्रेताओं एवं मत्स्यपालन एवं सम्बद्ध गतिविधियों में लगे हुए ग्रामीण और शहरी लोगों के लिए प्रत्यक्ष लाभदायी रोजगार के अवसरों का सृजन.
  6. मत्स्यपालन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना तथा मछली और मत्स्य उत्पादों में प्रतिस्पर्धा में वृद्धि करना.
  7. मछुआरों और मत्स्यकर्मियों के लिए सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना.
  •  

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes.

Topic : Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana

संदर्भ 

हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने देश के 80 करोड़ लोगों को लाभान्वित करने उद्देश्य से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दी है.

पृष्ठभूमि

कोरोना वायरस के कारण हुई लॉकडाउन के फलस्वरूप आर्थिक मंदी ने लोगों के सम्मुख आजीविका तथा भूख का संकट उत्पन्न कर दिया. इसके साथ ही साथ जुलाई से नवंबर तक भारत में लगातार त्यौहार आते हैं जिसमे लोगों का व्यय बढ़ जाता है इन दोनों ही स्थितियों का सामना करने हेतु प्रधानमंत्री जी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में विस्तार की घोषणा की है. योजना के अंतर्गत 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किग्रा खाद्यान्न और प्रति परिवार एक किलोग्राम चने का वितरण किया जाएगा.

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के विषय में

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को कोविड समस्या के दौरान खाद्यान आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु लाया गया था. पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का प्रारम्भ मार्च में किया गया था. इसके तहत 80 करोड़ व्यक्तियों, अर्थात् , भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को इस योजना के तहत कवर किया गया एवं इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना अन्‍न दिया गया. इसके अतिरिक्त लोगो को यह अनाज मुफ्त में प्रदान किया गया.
  • अद्यतन अधिसूचना के अनुसार, परिवार के प्रत्येक सदस्य को 5 किग्रा मुफ्त चावल / गेहूं प्रदान करने के साथप्रत्येक परिवार को प्रति माह 1 किग्रा मुफ्त चना भी प्रदान किया जाएगा.
  • वर्तमान में प्रधानमत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि नवंबर के अंत तक विस्तारित कर दी है.

योजना की प्रगति

  • PMGKY के अंतर्गत, विभिन्न राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों ने अप्रैल-जून अवधि के लिए 116.34 एलएमटी खाद्यान्न का उठान किया है. अप्रैल, 2020 में 74.12 करोड़ लाभार्थियों को 37.06 एलएमटी (93 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया; मई, 2020 में 73.66 करोड़ लाभार्थियों को 36.83 एलएमटी (91 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण किया गया और जून, 2020 महीने में 59.29 करोड़ लाभार्थियों को 29.64 एलएमटी (74 प्रतिशत) खाद्यान्न का वितरण हुआ.
  • भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 46,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत वित्तीय व्यय वहन कर रही है. 6 राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों- पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और गुजरात को गेहूं का आवंटन किया जा चुका है और शेष राज्यों/ संघ शासित क्षेत्रों को चावल का आवंटन किया गया है
  • दाल हेतु अप्रैल से जून तक कुल 5.87 एलएमटी की आवश्यकता का अनुमान था. भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत लगभग 5,000 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत भार वहन कर रही है. अभी तक, 5.79 एलएमटी दालें राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को भेजी जा चुकी हैं और 5.59 एलएमटी राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों तक पहुंच चुकी हैं, वहीं 4.47 एलएमटी दालों का वितरण किया जा चुका है.
  • 18 जून 2020 तक भंडार में कुल 8.76 एलएमटी दालें (तुअर-3.77 एलएमटी, मूंग-1.14 एलएमटी, उड़द-2.28 एलएमटी, चना- 1.30 एलएमटी और मसूर- 0.27 एलएमटी) उपलब्ध थीं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : PCR testing is a double-edged sword

संदर्भ 

SARS-CoV-2 वायरस, Covid19 बीमारी के लिए रोग-कारक एजेंट है. यह एक आरएनए वायरस (RNA virus) होता है, अर्थात् , यह अपनी वृद्धि करने हेतु एक स्वस्थ कोशिका में पैठ बनाता है.

SARS-CoV-2 RNA का पता लगाने के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन’ (Reverse Transcriptase Polymerase Chain Reaction- RT-PCR) परीक्षण किया जाता है. इस परीक्षण में वायरस का पता लगाने हेतु ‘रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन’ नामक प्रक्रिया के माध्यम से RNA को DNA में परिवर्तित किया जाता है.

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क्रियाविधि

SARS-CoV-2 RNA वायरस का सामान्यतः संक्रमण के तीव्र चरण के दौरान में ‘श्वसन नमूनों’ (respiratory specimens) में पता लगाया जा सकता है.

  1. इसके लिए ऊपरी और निचले श्वसन नमूने (नाक, नासाग्रसनी संबंधी- Nasopharyngeal) एकत्र किए जाते हैं.
  2. इन नमूनों को कई रासायनिक विलयनों में संशोधित करके प्रोटीन तथा वसा जैसे पदार्थों को हटा दिया जाता है, तथा इसके उपरांत नमूने में उपस्थित RNA को अलग किया जाता है.
  3. यह रियल-टाइम RT-PCR सेटअप, सामान्यतः 35 चक्रों से गुजरता है, अर्थात् , प्रक्रिया के अंत तक, नमूने में मौजूद वायरस के प्रत्येक कतरे से करीब विषाणुजनित DNA खंडो की लगभग 35 बिलियन नई प्रतियाँ बनाई जाती हैं.
  4. विषाणुजनित DNA खंडो की नई प्रतियाँ बनते ही प्रत्येक को चिन्हित करके फ्लोरोसेंट रंग छोड़ा जाता है, जिसे रियल टाइम में मशीन से जुड़े कंप्यूटर द्वारा नापा जाता है.
  5. कंप्यूटर प्रत्येक चक्र के पश्चात् नमूने में फ्लोरोसेंट की मात्रा को अनुगमन (track) करता है. जब फ्लोरोसेंट की मात्रा, एक निश्चित स्तर से ज्यादा हो जाती हैतब नमूने में वायरस की उपस्थिति की पुष्टि हो जाती है.

 फिर इसे दोधारी तलवार क्यों कहा जाता है?

PCR परीक्षण का लाभ तथा हानि यह है कि, यदि नमूने की 35 बिलियन नई प्रतियों में से एक में भी विषाणु जीन की उपस्थिति का संकेत मिलता है, तो इस परीक्षण में पूरे नमूने को ‘पॉजिटिव’ होने की पुष्टि कर देता है.

  1. इस परीक्षण से फायदा यह है कि इससे वायरस की उपस्थिति का सटीक पता लगाया जा सकता है.
  2. इसकी हानि यह है, कि इसमें गलत नेगेटिव’ (false negative) तथा ‘गलत पॉजिटिव’ (false positive) परिणामों की अधिकता होती है.

इस परीक्षण में गलत रिपोर्ट आने का कारण

परीक्षण के लिए नमूना तैयार करने के समय, यदि प्रयोगशाला वातावरण से किसी जीन का एक भी अंश, परीक्षण ट्यूब में गिर जाता है, तो परीक्षण के दौरान यह परिवर्धित हो जायेगा, तथा परीक्षण का परिणाम ‘पॉजिटिव’ हो जायेगा – परन्तु ‘गलत-पॉजिटिव’.

एक ‘गलत नेगेटिव’ (false negative) PCR रिपोर्ट का अर्थ होगा कि, परीक्षण के दौरान व्यक्ति में संक्रमण का पता नहीं लग सका है.

चिंताएँ

‘गलत नेगेटिव’ परिणामों की अपेक्षाकृत उच्च आवृत्ति से महामारी की भयावहता का सही आकलन करना असंभव हो जाता है. इसके अतिरिक्त, जिन संक्रमित व्यक्तियों की परीक्षण के दौरान ‘गलत नेगेटिव’ रिपोर्ट आती है, उन्हें  एकान्तवाद (Quarantined) नहीं दिया जाएगा, जिससे वायरस का प्रसरण होगा तथा परिणाम स्वरूप महामारी फैलने की गति में वृद्धि होगी.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कई नमूनों के परीक्षण करने वाली प्रयोगशालाओं को पर-संदूषण (cross-contamination) से बचना चाहिए. परीक्षणों की विश्वसनीयता के लिए, केवल गुणवत्ता प्रमाणित प्रयोगशालाओं को परीक्षण करने की अनुमति दी जानी चाहिए. जनवरी में मात्र एक प्रयोगशाला (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे) में PCR परीक्षण किये जाते थे, जिनकी संख्या बढ़कर 1,000 हो चुकी है. किसी एक गलत पॉजिटिव’ (false positive) परिणाम के संदेहात्मक होने पर चिकित्सक द्वारा अधिकारियों को सतर्क कर देना चाहिए, तथा संदिग्ध व्यक्ति का अन्य मान्यता-प्राप्त प्रयोगशाला में पुन: परीक्षण किया जाना चाहिए. नतीजों में विसंगति होने पर, संबंधित प्रयोगशाला को सील किया जाना चाहिए तथा प्रोटोकॉल और रिकॉर्ड अनुपालन संबंधी जांच की जानी चाहिए.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues of Buffer Stocks and Food Security; Technology Missions

Topic : Locust Attack in India

संदर्भ 

देश के कई हिस्सों में टिड्डियों के प्रकोप से निपटने के लिए वायुसेना के Mi 17 हेलिकॉप्टरों का भी प्रयोग करने के लिए ट्रायल किया गया. इस ट्रायल में सभी तरह के देशी कम्पोनेंट का प्रयोग करते हुए आसमान से कीटनाशक का छिड़काव किया गया जो कि सफल रहा है. इसके पहले टिड्डियों के प्रकोप से निपटने के लिए ड्रोन का भी सफलतम प्रयोग किया गया था .

टिड्डियों के दल ने भारत के कई राज्यों पंजाब, राजस्थान,उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश में धावा बोल दिया है. ये जहाँ कृषि क्षेत्र को क्षति पहुँचा रहे हैं, वहीं सिविल एविएशन समेत अन्य क्षेत्र के इससे प्रभावित होने की आशंका है. FAO के अनुसार, टिड्डियों से खतरे के संदर्भ में सोमालिया व इथोपिया के बाद भारत का तीसरा स्थान है.

इन हॉटस्पॉट में स्थिति अभी क्या है?

  1. इन तीनों में हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका को दुष्प्रभावित क्षेत्र बताया जा रहा है जहाँ FAO के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और रोजगार पर अभूतपूर्व खतरा मंडरा रहा है.
  2. यूथोपिया और सोमालिया से निकलर ये टिड्डी दल दक्षिण में केन्या और अफ्रीका 14 अन्य देशों तक चले गये हैं.
  3. लाल सागर क्षेत्र में इन टिड्डियों का प्रकोप सऊदी अरब, ओमान और यमन में देखा जा सकता है.
  4. दक्षिण-पश्चिम एशिया में इनसे ईरान, पाकिस्तान और भारत में क्षति की सूचना मिल रही है.
  5. पाकिस्तान और सोमालिया ने पिछले दिनों टिड्डियों के प्रकोप को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया है.

टिड्डी क्या होते हैं?

टिड्डी छोटे श्रृंगों वाले ग्रासहोपर होते हैं जो उत्पाती भीड़ बनाकर लम्बी दूरी तक (1 दिन में 50 किलोमीटर तक) चले जाते हैं और इसी बीच उनकी संख्या तेजी से बढ़ती जाती है.

भारत में चार प्रकार के टिड्डे पाए जाते हैं –

  1. मरुभूमि टिड्डा (Schistocerca gregaria)
  2. प्रव्राजक टिड्डा (Locusta migratoria)
  3. बम्बई टिड्डा (Nomadacris succincta)
  4. पेड़ वाला टिड्डा (Anacridium)

टिड्डे कैसे क्षति पहुँचाते हैं?

ये हजारों के झुण्ड में आते हैं और पत्ते, फूल, फल, बीज, छाल और फुनगियाँ सभी खा जाते हैं और ये इतनी संख्या में पेड़ों पर बैठते हैं कि उनके भार से ही पेड़ नष्ट हो जाते हैं.

भारत और विश्व-भर में सबसे विध्वंसकारी कीट मरुभूमि टिड्डा होता है. इसका एक वर्ग किलोमीटर तक फैला छोटा झुण्ड एक दिन में उतना ही अनाज खा जाता है जितना 35,000 लोग खाते हैं.

टिड्डी नियंत्रण के उपाय

  • टिड्डियों को नष्ट करने के लिए मुख्य रूप से वाहनों के माध्यम से ओर्गेनोफोस्फेट (organophosphate) रसायन का छिड़काव किया जाता है. यह छिड़काव हाथ से चलने वाले स्प्रेयर से भी किया जाता है और कभी-कभी हेलीकॉप्टर से भी.
  • कभी-कभी कुछ ऐसे जीव और परजीवी भी हैं जो इन टिड्डियों को खाते हैं और वे उनका खात्मा नहीं कर पाते हैं क्योंकि टिड्डी दल एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से चले जाते हैं.
  • टिड्डियों का कम आक्रमण होने पर यांत्रिक विधि से टिड्डियों का नियंत्रण किया जा सकता है. इसमे खाइयां खोद कर या शाखाओं के साथ हॉपरों को गिरा कर या पीट कर नियंत्रित कर सकते है, लेकिन यह बहुत अधिक श्रम का काम है.
  • जहर युक्त चारे द्वारा: टिड्डियों के नियंत्रण के लिए इस विधि का परयोग 1950 के दशक में बहुत होता है. इस विधि में गेहूँ के भूसे या मक्के के दानों में कीटनाशकों की धूल मिलाकर टिड्डियों के आक्रमण वाली जगह या उनके रास्तों में डाल दिया जाता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

  • इस वर्ष भारत में टिड्डी दल का पहला हमला राजस्थान के गंगानगर में 11 अप्रैल को हुआ था. ये टिड्डियां पाकिस्तान से भारत में प्रवेश हुईं थीं. टिड्डे की एक प्रजाति रेगिस्तानी टिड्डा सामान्यत: सूनसान क्षेत्रों में पाई जाती है. ये एक अंडे से पैदा होकर पंखों वाले टिड्डे में तब्दील होता है. लेकिन कभी-कभी रेगिस्तानी टिड्डा ख़तरनाक रूप ले लेता है. जब हरे-भरे घास के मैदानों पर कई सारे रेगिस्तानी टिड्डे इकट्ठे होते हैं तो ये निर्जन स्थानों में रहने वाले सामान्य कीट-पतंगों की तरह व्यवहार नहीं करते हैं.
  • टिड्डी नियंत्रण (Locust Control) के लिए सरकारी स्तर पर कीटनाशक छिड़काव (Pesticides Spray) के साथ अब किसानों को अपने खेतों को टिड्‌डी दलों के हमलों से बचाने के लिए अनुदान (Subsidy On Pesticides) देना चाहिए.
  • ऐसा प्रावधान किया जाना चाहिए जिससे किकिसान किसी भी लाइसेंस धारक ग्राम सेवा सहकारी समिति, क्रय-विक्रय सहकारी समिति, लैम्प्स, कीटनाशी निर्माता, पंजीकृत विक्रेता से रसायन संपूर्ण कीमत अदा कर खरीद सकें.
  • कृषि विभाग की ओर से अनुदान राशि का कृषक के खाते में ऑनलाइन भुगतान किया जाना चाहिए ताकि उन्हें दस्तावेजों को जमा करने के लिए अनावश्यक लम्बी कतार में खड़ा न होना पड़े.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

  • इफकोऐप – टिड्डियों के प्रकोप से फसल को बचाने के लिए इफको किसान के विशेषज्ञों की सलाह दी जाती है. इफको किसान ऐप के माध्यम से भी फसल सुरक्षा के उपाय बताए जाते हैं.
  • वयस्क टिड्डे सबसे अधिक हानिकारक और लंबी दूरी की यात्रा करने सक्षम होते हैं.

Prelims Vishesh

Indian Oil Corp agrees to form joint venture with Beximco LPG to set up a terminal to import LPG in Bangladesh :-

  • हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की दुबई बेस्ड सब्सिडियरी IOC मिडिल ईस्ट FZE और बांग्लादेश के बेक्सिमको LPG लिमिटेड की संयुक्त अरब अमीरात आधारित होल्डिंग कंपनी आरआर होल्डिंग्स लिमिटेड के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किये गये.
  • इस हस्ताक्षर कार्यक्रम की अध्यक्षता आभासी माध्यम से  धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री) ने किया.
  • इस समझौते के अनुसार, बांग्लादेश में एलपीजी व्यवसाय के लिए 50:50 संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) का गठन किया जाएगा. बांग्लादेश में एलपीजी बाजार की मिश्रित वार्षिक विकास दर (CAGR) लगभग 12-13% होने की उम्मीद है. बांग्लादेश में एलपीजी बाजार ने पिछले पांच वर्षों में पांच गुना वृद्धि दर्ज की है.

World Bank Approves $750 Million Emergency Response :-

  • विश्व बैंक समूह द्वारा भारत में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए 750 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी गई. विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा ऋण की राशि के लिए स्वीकृति 30 जून, 2020 को दी गयी थी. COVID-19 महामारी के परिणामस्वरूप, MSME क्षेत्र निर्यात और घरेलू व्यवसायों की कमी के कारण गंभीर वित्तीय तनाव में है, भारत में MSMEs के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यक्रम के तहत यह ऋण स्वीकृति है.
  • यह ऋण राशि देश में लगभग 15 लाख (1.5 मिलियन) एमएसएमई के लिए तरलता और ऋण की तत्काल आवश्यकता को संबोधित करने में मदद करेगी. यह राशि लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के माध्यम से वितरित की जाएगी, जो एसएफबी और एनबीएफसी को मजबूत करने में मदद करेगी.


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