Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 July 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 02 July 2019


GS Paper  1 Source: PIB

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Topic : One Stop Centre Scheme

संदर्भ

पिछले दिनों बिहार सरकार ने केन्द्रीय संपोषित योजना – वन स्टॉप सेंटर (OSC) – के अंतर्गत हिंसा से प्रभावित महिलाओं के लिए अनेक वन स्टॉप सेंटर खोलने की स्वीकृति प्रदान की है.

वन स्टॉप सेंटर (OSC) क्या है?

  • यह योजना राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण मिशन नामक बहु-आयामी योजना के अन्दर आनेवाली एक उप-योजना है.
  • यह योजना 1/7/2015 से राज्यों एवं केंद्र शाषित प्रदेशों के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है. 
  • इस योजना का प्रचलित नाम सखी है.
  • यह एक केंद्र संपोषित योजना है जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा तैयार की गई है.
  • ये केंद्र देश भर में स्थापित किये जा रहे हैं. इस योजना के अंतर्गत ऐसे केंद्र खोले जाते हैं जो एक ही छत के नीचे हिंसा से पीड़ित महिलाओं को निजी और सार्वजनिक दोनों स्थलों में चरणबद्ध रीति से समेकित सहयोग और सहायता प्रदान की जाती है.
  • यह एक केंद्र संपोषित योजना है जो महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा निर्भया कोष से चलाये जाते हैं.
  • दी जाने वाली सहायताएँ कुछ इस प्रकार हैं – प्रथम सूचना प्रतिवेदन (FIR) दायर करने में सहायता, विडियो कांफ्रेंस की सुविधा, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक-सामाजिक परामर्श, कानूनी सहायता, कम-से-कम पाँच दिन का आश्रय आदि.

सुरक्षा की आवश्यकता क्यों?

  • लिंग पर आधारित हिंसा स्वास्थ्य, मानवाधिकार और विकास से सम्बंधित एक वैश्विक समस्या है जो विश्व के किसी भी कोने, वर्ग, संस्कृति, आयु, प्रजाति और धर्म में देखी जाती है.
  • लिंग पर आधारित हिंसा की परिभाषा संयुत राष्ट्र हिंसा उन्मूलन घोषणा के अनुच्छेद 1 में दी गई है. इस परिभाषा के अनुसार, ऐसा कोई भी कार्य लैंगिक हिंसा कहलाएगी जिससे स्त्रियों को शारीरिक, यौन-सम्बंधित अथवा मानसिक चोट पहुँचता है. ऐसे कार्यों की धमकी देना, दबाव डालना अथवा स्वतंत्रता से निरंकुशतापूर्वक वंचित करना भी लिंग-आधारित हिंसा कहलायेगा चाहे यह सब निजी जीवन में गठित हो अथवा सार्वजनिक जीवन में.
  • भारत में लिंग पर आधारित हिंसा के कई रूप हैं. अधिकतर यह घरेलू मारपीट अथवा यौन उत्पीड़न के रूप में देखा जाता है. परन्तु इसके कई अन्य प्रकार भी हैं, जैसे – दहेज, सम्मान के लिए हत्या, एसिड फेकना, डायन हत्या, बाल यौन उत्पीड़न, वाणिज्यिक यौन शोषण के लिए तस्करी, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, सती आदि.

GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Van Dhan Yojana

संदर्भ

वन धन योजना के प्रभावी कार्यान्‍वयन के लिए बनाई गई सौ दिनों की योजना पर हाल ही में नई दिल्ली में जनजातीय कार्य मंत्रालय के भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (TRIFED) द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन किया गया.

वन धन योजना क्या है?

  • सरकार ने पूरे देश में 3000 वन धन विकास केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है जिनमें 30,000 स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सहभागिता होगी.
  • इस पहल का उद्देश्य जनजातीय संग्राहक और कारीगरों (tribal gatherers and artisans) के लिए लघु वन उपज केन्द्रित आजीविका को बढ़ावा देना है.
  • वन धन विकास केंद्र कौशल उन्नयन, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण, प्राथमिक प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्द्धन सुविधा की स्थापना इत्यादि प्रदान करने हेतु बहुउद्देशीय प्रतिष्ठान होते हैं.
  • अभी लकड़ी से इतर वन उत्पादों के व्यवसाय में जनजातियों का हिस्सा 20% है.
  • आशा है कि इस नई पहल से यह हिस्सा बढ़कर 60% हो जायेगा.
  • वन धन योजना केन्द्रीय स्तर पर नोडल विभाग के रुप में जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा तथा राष्ट्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी के रूप में ट्राइफेड (TRIFED) के माध्यम से क्रियान्वित की जायेगी.
  • इस कार्यक्रम के न्यूनतम स्तर पर कार्यान्वयन में राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी और जिला अधिकारी की प्रधान भूमिका होगी.
  • वन धन विकास केन्द्रों के प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर एक प्रबंधन समिति होगी जिसमें सम्बंधित क्लस्टर के वन धन स्वयं सहायता समूह के प्रतिनिधि होंगे. इन वन धन विकास केन्द्रों की स्थापना में TRIFED का सहयोग लिया जायेगा.
  • पहला मॉडल वन धन विकास केंद्र छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थापित किया जा रहा है, जो 300 लाभार्थियों को प्रशिक्षित करेगा.

लघु वन उपज का महत्त्व

  • लघु वन उपज (Minor Forest Produce : MFP) वन क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों के लिए आजीविका का प्रमुख स्रोत है.
  • वन में निवास करने वाले लगभग 100 मिलियन लोग भोजन, आश्रय, औषधि एवं नकदी आय के लिए MFP पर निर्भर करते हैं.
  • जनजातीय लोग अपनी वार्षिक आय का लगभग 20-40% MFP एवं सम्बद्ध गतिविधियों द्वारा प्राप्त करते हैं तथा इसका महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से भी सुदृढ़ संबंध है क्योंकि अधिकांश MFP का संग्रहण, उपयोग और बिक्री महिलाओं द्वारा ही की जाती है.
  • MFP क्षेत्र में देश में वार्षिक रूप से लगभग 10 मिलियन कार्य दिवस के सृजन की क्षमता है.
  • अनुसूचित जनजाति एवं परम्परागत निवासी (वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम), 2006, लघु वन उपज (MFP) को पादपों से उत्पन्न होने वाले सभी गैर-लकड़ी वन उत्पादों के रूप में परिभाषित करता है. इसके अंतर्गत बाँस, ब्रशवुड, स्टम्प, केन, ट्यूसर, कोकून, शहद, मोम, लाख, तेंदु/केंडू पत्तियाँ, औषधीय पौधे, जड़ी-बूटी, जड़ें, कंद इत्यादि सम्मिलित हैं.
  • सरकार ने पहले भी आदिवासी जनसंख्या की आय की सुरक्षा हेतु “लघु वन उपज (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)“नामक योजना आरम्भ की थी.”

GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Pradhan Mantri Awas Yojana – Urban

संदर्भ

पिछले दिनों निर्गत सूचनाओं के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में अब तक 83.62 लाख आवास पूरे भारत में स्वीकृत हो चुके हैं. इस मामले में 13 लाख आवास स्वीकृत कर उत्तर प्रदेश का स्थान सभी राज्यों में पहला है.

PMAY-Urban क्या है?

प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा किया गया है. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अभियान की शुरूआत 25 जून, 2015 को की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी पात्र शहरी परिवारों को 2022 तक आवास प्रदान करना है. योजना ने अभूतपूर्व प्रगति की है और शहरी क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ मकानों की मांग के अनुरूप 73 लाख से अधिक मकानों की मंजूरी दी है. लगभग 40 लाख मकान निर्माण के विभिन्न स्तरों पर हैं और 15 लाख से अधिक मकान बनाए जा चुके हैं. इसके अलावा लगभग 12 लाख मकान नई और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से निर्मित किये जा रहे हैं.

  • सरकार का यह मिशन है कि 2022, जब भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे, तक सभी शहरों में सभी के लिए आवास हो जाए.
  • इस योजना के लाभार्थी वे गरीब लोग, EWS (Economically Weak Sections) के नीचे के लोग और LIG (Low Income Group) के लोग होंगे.
  • यह योजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी.
  • पहले चरण में अप्रैल 2015 से मार्च 2017 में 100 शहरों में ऐसे आवास बनाए जायेंगे.
  • दूसरे चरण में अप्रैल 2017 से मार्च 2019 में 200 और शहरों को लिया जायेगा.
  • तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से मार्च 2022 में बाकी शहर इस योजना में शामिल किये जायेंगे.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है.
  • यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है.
  • इस ऋण पर 15 साल तक के लिए 5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

योजना का माहात्म्य

  • इस योजना से कई क्षेत्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
  • एक करोड़ घर बनने का अर्थ है कि इसके लिए दो लाख करोड़ रु. के गृह ऋण का वितरण अवश्य होगा. साथ ही इस कार्य को पूरा करने में 80 से 100 मिलियन टन सीमेंट और 10 से 15 मिलियन टन इस्पात की आवश्कता होगी जिससे अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा.
  • एक करोड़ घर बनाने में लगभग 4 बिलियन वर्ग फीट जमीन जमीन लगेगी.
  • उपर्युक्त कारणों से संभावना है कि जब तक यह योजना चलेगी तब तक 9 से 10 करोड़ रोजगार के मौके मिलेंगे.

चुनौतियाँ

यह योजना अत्यंत विशाल योजना है परन्तु इसमें कई बाधाएँ भी हैं. कई बार अच्छी जगह जमीन नहीं मिलती है तो कहीं अपने ब्रांड की साख में क्षति अनुभव करते हुए निजी भवन निर्माता उत्साह से भाग नहीं लेते हैं. बोली लगाने कि प्रणाली, लागत एवं काम पूरा करने की समय-सीमा की कठोरता आदि ऐसे कई कारण हैं जिनसे भवन-निर्माण का कार्य उतनी तेजी से हो रहा है और इसके परिणामस्वरूप निर्माण की सामग्री थोक-भाव में उपलब्ध नहीं होने के कारण लागत भी बढ़ती जा रही है. इसके अतिरिक्त नई तकनीक के अभाव में उत्पादकता, लागत क्षमता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : EQUIP project

संदर्भ

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीनस्थ उच्चतर शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों पाँच वर्षों की एक विज़न योजना तैयार कर ली है और उसे निर्गत भी कर दिया है. इस योजना का शीर्षक है – Education Quality Upgradation and Inclusion Programme (EQUIP) अर्थात् शैक्षणिक गुणवत्ता उत्क्रमण एवं समावेशन कार्यक्रम.

मुख्य तथ्य

  • EQUIP का पूरा नाम है – Education Quality Upgradation and Inclusion Programme.
  • इस कार्यक्रम की रूपरेखा सरकार के विशेषज्ञों की अध्यक्षता में गठित दस समितियों ने तैयार की है.

लक्ष्य : EQUIP का लक्ष्य नीति और क्रियानव्यन के बीच के अंतराल को पाटना है. इसके माध्यम से आने वाले पाँच वर्षों में उच्चतर शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना है.

उद्देश्य

  1. इस परियोजना में उच्चतर शिक्षा की उपलभ्यता पर बल देना, विशेषकर वंचित समुदायों के लिए.
  2. नामांकन की संख्या में सुधार लाना.
  3. शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं में सुधार लाना.
  4. शैक्षणिक अवसरंचना का निर्माण करना.
  5. शोध एवं नवाचार की गुणवत्ता बढ़ाना.
  6. शिक्षण में तकनीक और ऑनलाइन साधनों का प्रयोग करना.
  7. अभिप्रमाणन प्रणालियों, प्राशासनिक ढाँचों और वित्त पोषण पर काम करना.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : National Mission on Natural Language Translation

संदर्भ

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय प्राकृतिक भाषा अनुवाद से संबधित एक राष्ट्रीय अभियान का अनावरण करने की योजना बना रहा है.

विदित हो कि यह अभियान उन मुख्य अभियानों में से एक है जिनका चयन प्रधानमंत्री की विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परामर्शदात्री परिषद् द्वारा किया गया है.

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

यह कार्यक्रम अंग्रेजी और एक देशी भारतीय भाषा दोनों में शिक्षण एवं शोध के योग्य सामग्री उपलब्ध कराएगा. इस प्रकार विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सब के दरवाज़े तक पहुँचायेगा.

अनुवाद का महत्त्व और आवश्यकता

अनुवाद कार्य से पढ़े-लिखे बेरोजगार लोगों को आजीविका मिल सकती है. इस अभियान का लाभ न केवल छात्रों को ही मिलेगा, अपितु इससे शिक्षक, लेखक, प्रकाशक, अनुवाद सॉफ्टवेर निर्माता और सामान्य पाठक भी लाभान्वित होंगे.


GS Paper  3 Source: PIB

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Topic : First Resilient Kerala Program

संदर्भ

प्रथम आपदा निरोधक केरल कार्यक्रम (First Resilient Kerala Program) के लिए भारत सरकार, केरल सरकार और विश्व बैंक ने 250 मिलियन डॉलर का एक ऋण समझौता हस्ताक्षरित किया है जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को झेलने की केरल राज्य की क्षमता में वृद्धि करना है.

मुख्य विशेषताएँ

  • कार्यक्रम का मुख्य ध्यान केरल राज्य की सांस्थिक एवं वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ बनाना है जिससे कि एक समावेशी और प्रतिभागी दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्धनों एवं संकटग्रस्त समूहों की सम्पत्तियों और आजीविकाओं की रक्षा हो सके.
  • यह कार्यक्रम विश्व बैंक की विकास नीति से सम्बंधित दो कार्यों में पहला है.

कार्यक्रम का महत्त्व

2018 में केरल में भयंकर बाढ़ आई थी और भूमि-स्खलन हुआ था जिनका सम्पत्ति, भवनों तथा लोगों के जीवन एवं आजीविका पर भीषण दुष्प्रभाव पड़ा था. लगभग 54 लाख लोग अर्थात् राज्य की सम्पूर्ण जनसंख्या का छठा अंश इन विभीषिकाओं की चपेट में आ गया था. 14 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. ऐसे लोग विशेषकर निर्धन और संकटग्रस्त लोग थे.


Prelims Vishesh

Yamuna Water Taxi Project :-

  • यमुना नदी में जल टैक्सी परिचालित करने की एक परियोजना बनी है.
  • इसके अंतर्गत जहाज परिचालन के अतिरिक्त टर्मिनल भी बनाए जाएँगे.
  • यमुना नदी के किनारे-किनारे यह परियोजना दिल्ली में पाँच जगहों पर चलाई जायेगी. ये जगहें हैं –फ़तेहपुर जाट, ट्रोनिका सिटी, जगतपुर, सोनिया विहार और वजीराबाद.

Impressive tortoise from Arunachal Pradesh :-

  • अरुणाचल प्रदेश में एक सुन्दर-सा कछुआ मिला है जिसका नाम उसकी सुन्दरता के कारण Impressed रखा गया है.
  • इस खोज के पहले भारत को मात्र एशियाई वन कछुओं का घर माना जाता है.
  • एशियाई वन कछुआ एशिया के महादेशीय भाग में पाया जाने वाला सबसे बड़ा कछुआ होता है.
  • यह कछुआ केवल पूर्वोत्तर राज्यों में मिलता है.

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