Sansar डेली करंट अफेयर्स, 01 February 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 01 February 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act, 1971

संदर्भ

देश में गर्भपात से सम्बंधित कानूनों को सरल बनाने के लिए केन्द्र सरकार गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (Medical Termination of Pregnancy (MTP) Act, 1971)  में ढेर सारे परिवर्तन लाने जा रही है. इसके लिए एक संशोधन विधेयक तैयार हुआ है.

प्रस्तावित परिवर्तन

  • वर्तमान में 20 सप्ताह तक के भ्रूण के समापन की अनुमति है. अब इस अवधि को 24 सप्ताह किया जा रहा है.
  • वर्तमान प्रावधान के अनुसार, गर्भ निरोध की विफलता से सम्बंधित उपवाक्य में मात्र “विवाहित स्त्री अथवा उसके पति” का उल्लेख है. अब यह “किसी भी स्त्री अथवा उसके साथी” पर भी लागू होगा.
  • प्रारूप विधेयक में यह प्रावधान किया जा रहा है कि 20 सप्ताह के गर्भ की समाप्ति के लिए एक पंजीकृत चिकित्सा डॉक्टर (registered medical practitioner RMP) का मन्तव्य अपेक्षित होगा.
  • परन्तु 20 से लेकर 24 सप्ताह के गर्भ की समाप्ति के लिए दो पंजीकृत डॉक्टरों का मंतव्य अनिवार्य होगा.
  • विधेयक में गर्भ के समापन के लिए बढ़ाई गई समय-सीमा (20 सप्ताह से 24 सप्ताह) उन स्त्रियों पर भी लागू होगी जो बलात्कार के बाद जीवित हों, जो कौटुम्बिक व्यभिचार की शिकार हों आदि.

माहात्म्य

MTP अधिनियम, 1971 के लिए प्रस्तावित इन संशोधनों को स्त्री सशक्तीकरण की दिशा में एक आगे ले जाना वाला एक कदम माना जा रहा है.

गर्भपात को स्त्रियों के प्रजनन स्वास्थ्य का एक महत्त्वपूर्ण पहलू माना जाता है, अतः प्रस्तावित संशोधनों से उन्हें प्रजनन से सम्बंधित अधिक अधिकार मिलेंगे.

असुरक्षित गर्भपात से होने वाली मृत्यु एवं शारीरिक क्षति से बचने का उपाय यह है कि गर्भ समापन के लिए किसी प्रशिक्षित डॉक्टर की सेवाएँ विधिसम्मत रीति से ली जाएँ.

दुनिया-भर में गर्भपात से सम्बंधित कानून

  1. गर्भपात से सम्बंधित कानून विश्व में अलग-अलग ढंग के हैं. लगभग 60 देशों में गर्भ समापन के लिए गर्भ की अवधि के बारे में सीमाएं तय की हुई हैं.
  2. 52% देशों में इसके लिए यह प्रावधान है कि यदि भ्रूण में असामान्यता का पता चले तो 20 सप्ताह के पश्चात् भी उसे समाप्त किया जा सकता है. इनमें से कुछ देश हैं – फ्रांस, यूके, ऑस्ट्रिया, इथियोपिया, इटली, स्पेन, आइसलैंड, फिनलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और नेपाल.
  3. 23 देश ऐसे हैं जहाँ माँ के कहने पर किसी भी समय गर्भ समाप्त किया जा सकता है. इनमें से कुछ देश हैं – कनाडा, जर्मनी, वियतनाम, डेनमार्क, घाना और जाम्बिया.
  4. यूनाइटेड किंगडम में 24 सप्ताह तक के गर्भपात की अनुमति है. वहाँ रॉयल कॉलेज ऑफ़ ऑब्सटेट्रीसियंस एंड गायनीकॉलोजिस्ट ने गर्भपात के विषय में मार्गनिर्देश निर्धारित कर रहे हैं जिनमें 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ की समाप्ति की प्रक्रिया दी हुई है. इसमें यह भी उल्लेख है कि यदि गर्भ 21 सप्ताह और 6 दिन से अधिक पुराना है तो भूर्ण की मृत्यु के लिए एक सुई दी जाए और तब भ्रूण को बाहर निकाला जाए.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : National Commission for Indian System of Medicine Bill, 2019 (NCIM)

संदर्भ

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग विधेयक, 2019 (National Commission for Indian System of Medicine Bill, 2019 – NCISM) में कतिपय संशोधन करने के प्रस्ताव पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अपना अनुमोदन दे दिया है.

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग के उद्देश्य

  • राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) स्थापित करने का मुख्य ध्येय गुणी चिकित्सकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर समानता को बढ़ावा देना तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के अन्दर चिकित्सकीय सेवाओं के सभी पहलुओं में उच्च नैतिक मानकों को लागू करना है.
  • आयोग देश के सभी भागों में सुलभ चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्न करेगा.
  • आयोग भारतीय चिकित्सा पद्धति से सम्बंधित शैक्षणिक संस्थानों के मानदंडों, मूल्यांकन, आकलन एवं अभिप्रमाणन के कार्यकलाप को सुगठित रूप देगा.

NCISM का स्वरूप

  • NCISM में 29 सदस्य होंगे जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी.
  • अध्यक्ष, अंशकालिक सदस्यों तथा NCISM के अंतर्गत गठित चारों स्वायत्त बोर्डों के प्रेसिडेंट के पदों को भरने के लिए केन्द्रीय सरकार को नाम सुझाने हेतु एक अनुसंधान समिति का गठन होगा.
  • इन सभी पदों का अधिकतम कार्यकाल चार वर्ष का होगा.
  • अनुसंधान समिति में पाँच सदस्य होंगे जिनमें एक कैबिनेट सचिव और तीन ऐसे विशेषज्ञ भी होंगे जिनको केंद्र सरकार नामित करेगी. इन नामित सदस्यों में दो ऐसे होने चाहिएँ जिनके पास भारतीय चिकित्सा पद्धति के किसी क्षेत्र में अनुभव हो.

NCISM के प्रधान कार्य

  • भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों और चिकित्सा संस्थानों को विनियमित करने के लिए नीतियाँ गढ़ना.
  • चिकित्सा से सम्बंधित मानव संसाधनों और अवसंरचनाओं की आवश्यकताओं का आकलन करना.
  • यह पक्का करना कि राज्य भारतीय चिकित्सा पद्धति चिकित्सा परिषद् (State Medical Councils of Indian System of Medicine) अवश्य ही विधेयक में वर्णित विनियमों का पालन करें.
  • विधेयक के अधीन स्थापित स्वायत्त बोर्डों के बीच तालमेल बैठना.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Development processes and the development industry the role of NGOs, SHGs, various groups and associations, donors, charities, institutional and other stakeholders

Topic : Ranking of Aspirational districts

संदर्भ

दिसम्बर, 2019 में नीति आयोग ने देश के आकांक्षी जिलों की रैंकिंग प्रकाशित की.

विभिन्न जिलों का प्रदर्शन

आकांक्षी जिलों की रैंकिंग में प्रथम स्थान उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले को मिला. उसके पश्चात् क्रमशः ओडिसा के बोलनगिर जिले और आंध्र प्रदेश के YSR जिले को दूसरा और तीसरा स्थान मिला है.

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme – ADP)

  1. नव भारत निर्माण के उद्देश्य को पाने के लिए भारत के सबसे पिछड़े जिलों के उन्नयन का कार्यक्रम बनाया गया है. इन जिलों को आकांक्षी जिले अर्थात्Aspirational Districts की संज्ञा दी गई है.
  2. Transformation of aspirational जिला कार्यक्रम भारत सरकार के द्वाराजनवरी, 2018 में घोषित किया गया.
  3. इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के सबसेअल्प-विकसित जिलों में तेजी से बदलाव लाना है.
  4. इस कार्यक्रम का मुख्य नारा है – Convergence (समागम – केन्द्रीय और राज्य योजनाओं का), Collaboration (सहयोग – केंद्र स्तरीय एवं राज्य स्तरीय अधिकारीयों एवं जिला समहर्ताओं के बीच, Competition (प्रतिस्पर्द्धा -जिलों के बीच).
  5. इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश के 115 जिले चुने गए हैं जिनमें 35 जिले नक्सल-प्रभावित हैं.

जिलों की रैंकिंग कैसे होती है?

  • जिलों की रैंकिंग इसमें बहुत ही पारदर्शी ढंग से होती है. इसके लिए कई संकेतक निर्धारित हैं, जैसे – स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल्य विकास एवं मूलभूत अवसंरचना आदि.
  • जिस डाटा के आधार रैंकिंग की जाती है, वे चैंपियंस ऑफ़ चेंज डैशबोर्ड पर सर्वसामान्य के लिए उपलब्ध होते है.

ADP की जरुरत

यदि सभी आकांक्षी जिलों में बदलाव आ जायेगा तो देश की आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य में भी सुधार हो जायेगा. साथ ही देश में विकास की गति में तेजी भी आ जाएगी.


GS Paper 3 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Cheetah reintroduction project

संदर्भ

भारत में एक उचित स्थान पर अफ्रीका से चीता लाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को अनुमति दे दी है.

पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के समय राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) ने न्यायालय को बताया था कि नामीबिया से अफ्रीकी चीते लाकर उन्हें राज्य के नौरादेही अभयारण्य में रखा जाएगा. यह भी सूचित किया गया कि इस योजना के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature – IUCN) ने अपनी अनापत्ति दे दी है.

भारत में अब चीते नहीं पाए जाते हैं. अंतिम बार 1947 में छत्तीसगढ़ में एक चीता देखा गया था. 1952 में इसको भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था. चीते के विलुप्त होने के मुख्य कारण उनके निवास-स्थल का नष्ट होना और उनका अँधाधुंध शिकार होना है.

भारत में चीता को फिर से लाने की योजना (Cheetah reintroduction programme) क्या है?

देहरादून में स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान ने आज से छह वर्ष पहले यह योजना बनाई थी और कहा था कि इसमें 260 करोड़ रु. खर्च होंगे. उस योजना के अनुसार मध्य प्रदेश के नौरादेही में 150 वर्ग किलोमीटर का एक बाड़ा बनाया जाएगा जिसको बनाने में ही 25 से 30 करोड़ लग जाएँगे. ये बाड़े बहुत ही ऊँचे होंगे.

नौरादेही ही क्यों?

  • मध्य प्रदेश के नौरादेही अभयारण्य (Nauradehi sanctuary) को चीताओं के लिए एक उपयुक्त अभयारण्य माना गया है क्योंकि यहाँ के जंगल उतने घने नहीं है कि उनके आने-जाने में रुकावट हो.
  • साथ ही ये जिन जीवों का शिकार करते हैं वे यहाँ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. इसलिए पूर्व में यह योजना बनी थी कि अफ्रीका के नामीबिया से 20 चीते लाकर यहाँ रखे जाएँ पर यह योजना वर्षों से लंबित पड़ी है.
  • हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण को इस योजना को फिर से लागू करने के लिए अनुरोध किया था.

चीतों के बारे में मुख्य तथ्य

  • इस चीता का वैज्ञानिक नाम Acinonyx jubatus है.
  • यह बड़ी बिल्लियों की सबसे प्राचीन प्रातियों में से एक है जिसका इतिहास पाँच मिलियन वर्ष पहले के मियोसीन युग (Miocene era) तक जाता है.
  • IUCN की लाल सूची में यह प्रजाति संकटग्रस्त (vulnerable) बताई गई है.
  • चीता भारत में अँधाधुंध शिकार के कारण विलुप्त हो चुका है.
  • देश का अंतिम चीता 1947 में छत्तीसगढ़ में मर गया था.
  • चीता को 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था.
  • IUCN की लाल सूची में एशियाई चीते को विकट रूप से संकटग्रस्त (critically endangered) श्रेणी में रखा गया है क्योंकि यह अब मात्र ईरान में देखा जाता है.

NTCA क्या है?

राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है जिसका गठन वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 (2006 में संशोधित) के प्रावधानों के तहत किया गया था.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Ramsar sites in India

संदर्भ

भारत ने रामसर संधि द्वारा सुरक्षित स्थलों में 10 नई आर्द्रभूमियों को जोड़ दिया है. इस प्रकार रामसर संधि के अंतर्गत भारत में मान्यता प्राप्त स्थलों की संख्या 37 हो गई है.

कौन 10 नए स्थल जोड़े गये हैं?

  1. नंदुर मदमेश्वर – महाराष्ट्र (1)
  2. केशोपुर-मियानी, ब्यास संरक्षण रिजर्व और नांगल – पंजाब (3)
  3. नवाबगंज, पार्वती आगरा, समान, समसपुर, सांडी और सरसई नवार – उत्तर प्रदेश (6)

अन्य रामसर स्थल किन राज्यों में हैं?

राजस्थान, केरल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, मणिपुर, गुजरात, तमिलनाडु और त्रिपुरा.

रामसर संधि क्या है?

  • रामसर आर्द्रभूमि समझौते (Ramsar Convention on Wetlands) पर 2 फरवरी, 1971 में इरान के कैप्सियन सागर के तट पर स्थित शहर रामसर में हस्ताक्षर किये गये थे. इसलिए इसे रामसर संधि कहा जाता है. कुछ लोग इस संधि को आर्द्रभूमि संधि (Wetland Convention) भी कहते हैं.
  • यह 1975 में लागू हुई.
  • इस संधि का औपचारिक नाम है – अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व, विशेषकर जल पक्षी आवास के रूप में आर्द्रभूमियों के विषय में संधि.
  • यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और समुचित उपयोग के सम्बन्ध में मार्गदर्शन प्रदान करती है.
  • भारत ने 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए.
  • भारत में आर्द्रभूमि के संरक्षण के मामलों के लिए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु-परवर्तन मंत्रालय नोडल मंत्रालय घोषित है.
  • विदित हो कि भारत में सम्पूर्ण भूमि के 4.7% पर आर्द्रभूमि फैली हुई है.

मोंट्रोक्स रेकॉर्ड

  • रामसर संधि के तहत आर्द्र भूमि स्थलों की एक पंजी तैयार की गई है जिसे मोंट्रोक्स रेकॉर्ड (Montreux Record) कहते हैं.
  • इस पंजी में विश्व-भर की महत्त्वपूर्ण आर्द्र भूमियों के विवरण अंकित हैं.
  • इसमें यह भी दर्शाया गया है कि तकनीकी विकास, प्रदूषण अथवा अन्य मानवीय हस्तक्षेप से किन आर्द्रभूमियों पर पर्यावरणिक परिवर्तन हो चुके हैं, हो रहे हैं अथवा होने वाले हैं.
  • इस पंजी में कोई नई आर्द्रभूमि का नाम डालना हो अथवा निकालना हो तो उसके लिए कांफ्रेंस ऑफ़ द कांट्रेक्टिंग पार्टीज (1990) का अनुमोदन अनिवार्य होता है.
  • मोंट्रोक्स रेकॉर्ड रामसर सूची के अंग के रूप में संधारित है.
  • वर्तमान में भारत की दो आर्द्रभूमियाँ मोंट्रोक्स रेकॉर्ड में अंकित हैं. ये हैं – केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर, राजस्थान) और लोकताक झील (मणिपुर).
  • एक बार चिल्का झील (ओडिशा) को इस सूची में स्थान दिया गया था, परन्तु आगे चलकर इसे वहाँ से हटा दिया गया था.

Prelims Vishesh

Flags off country’s first ‘fruit train’ :-

  • पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के ताड़ीपत्री रेलवे स्टेशन से देश की एक अनोखी ट्रेन रवाना की गई जिसे फल वाली गाड़ी कहा जा रहा है.
  • इस गाड़ी में 980 मेट्रिक टन केले लदे हुए थे जिनको स्थानीय लोगों ने उपजाया था. यह लदान मुंबई के जवाहरलाल नेहरु बंदरगाह तक पहुँचाई गई जहाँ से इसे ईरान भेजा जाना है.
  • जितने केले इस गाड़ी से भेजे गये उनको ले जाने के लिए 150 ट्रक लगते.

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