Sansar डेली करंट अफेयर्स, 23 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 23 November 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues

Topic : Lachit Borphukan

संदर्भ

प्रधानमंत्री ने लचित दिवस पर लाचित बोड़फुकन (Lachit Borphukan) को श्रद्धांजलि अर्पित की.

लाचित बोड़फुकनकौन थे?

  1. वह अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे.
  2. इन्हें सन् 1671 में हुए सराईघाट के प्रसिद्ध युद्ध के लिए जाना जाता है, जिसमे उन्होंने रामसिंह प्रथम के नेतृत्व में मुगल सेना द्वारा अहोम साम्राज्य पर कब्जा करने के प्रयास को विफल कर दिया.
  3. लाचित बोड़फुकन, मोमाई तामुली बोड़बरुआ के पुत्र थे, जो कि प्रताप सिंह के शासन-काल में पहले बोड़बरुआथे. लाचित बोड़फुकन ने मानविकी, शास्त्र और सैन्य कौशल की शिक्षा प्राप्त की थी. उन्हें अहोम स्वर्गदेव के ध्वज वाहक का पद सौंपा गया था, जो कि किसी महत्वाकांक्षी कूटनीतिज्ञ या राजनेता के लिए पहला महत्वपूर्ण कदम माना जाता था. बोड़फुकन के रूप में अपनी नियुक्ति से पूर्व लाचित अहोम राजा चक्रध्वज सिंह की शाही घुड़साल के अधीक्षक, रणनैतिक रूप से महत्वपूर्ण सिमुलगढ़ किले के प्रमुख और शाही घुड़सवार रक्षक दल के अधीक्षक के पदों पर आसीन रहे थे.
  4. सराईघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तट पर लड़ा गया था.
  5. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) द्वारा वर्ष 1999 से प्रतिवर्ष सर्वश्रेष्ठ कैडेट को लाचित बोड़फुकन स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है.

पृष्ठभूमि

सन् 1671 में सराईघाट की लड़ाई के अंतिम चरण के दौरान, जब मुगलों ने सराईघाट में नदी से होकर असमिया सेना पर हमला किया, तो कई असमिया सैनिकों की हिम्मत उखड गयी. ऐसे में आहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित ने सभी सैनिकों का आह्वाहन किया और उन्हें अंतिम सांस तक लड़ने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप मुगलों की जबरदस्त हार हुई.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic :  Corporate Ownership in Indian Banks

संदर्भ

हाल ही में RBI की एक आंतरिक कार्य समूह ने सिफारिश की है कि बड़े कॉर्पोरेट और औद्योगिक घरानों को निजी बैंकों के स्वामित्व की अनुमति दी जानी चाहिए.

भारतीय रिज़र्व बैंक का आंतरिक कार्य समूह के विषय में

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय निजी क्षेत्र केबैंकों के लिए वर्तमान स्वामित्व दिशानिर्देशों और कॉर्पोरेट संरचना की समीक्षा करने के लिए 12 जून 2020 को एक आंतरिक कार्य समूह (आईडबल्यूजी) का गठन किया था.
  • आंतरिक कार्य समूह द्वारा निम्नलिखित प्रमुख विषयों की समीक्षा किया जाना था:
  • बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए व्यक्तियों / संस्थाओं के लिए पात्रता मानदंड की समीक्षा;
  • बैंकों के लिए अधिमान्य कॉर्पोरेट संरचना की जांच और इस संबंध में मानदंडों का सामंजस्य;
  • प्रवर्तकों और अन्य शेयरधारकों द्वारा बैंकों में दीर्घावधि शेयरधारिता के मानदंडों की समीक्षा.
  • आंतरिक कार्य समूह की प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं:
  • लंबी अवधि (15 वर्ष) में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी पर सीमा (कैप) को 15 प्रतिशत के वर्तमान स्तर से बढ़ाकर 26 प्रतिशत किया जा सकता है.
  • बड़े कॉरपोरेट/औद्योगिक घरानों को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में आवश्यक संशोधन के बाद ही बैंकों के प्रवर्तकों के रूप में अनुमति दी जा सकती है.
  • अच्छी तरह से चल रही बड़ीगैर-बैंकिंग वित्त कंपनियाँ (एनबीएफ़सी), जिनकी परिसंपत्ति का आकार 50,000 करोड़ या उससे अधिक है, जिनमें कॉरपोरेट घराने के स्वामित्व वाले भी शामिल हैं, को बैंकों में रूपांतरण के लिए विचार किया जा सकता है बशर्ते परिचालन के 10 वर्ष पूर्ण हुए हो तथा तत्परता से निर्धारित मानदंड का अनुपालन और इस संबंध में निर्दिष्ट अतिरिक्त शर्तों का अनुपालन हो रहा हो.
  • ऐसे भुगतान बैंक जो एक लघु वित्त बैंक में परिवर्तित होने में रूचि रखते हो उन्हें भुगतान बैंक के रूप में 3 वर्षों के अनुभव का ट्रैक रिकॉर्ड पर्याप्त माना जा सकता है.
  • नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए न्यूनतम प्रारंभिक पूंजीगत अपेक्षाओं को सार्वभौमिक बैंकों के लिए 500 करोड़ से 1000 करोड़ और छोटे वित्त बैंकों के लिए 200 करोड़ से 300 करोड़ तक बढ़ाया जाना चाहिए.

क्यों की गयी है बड़े कॉर्पोरेट घरानों को निजी बैंक चलाने की सिफारिश?

  • भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से गठित एक आंतरिक कार्य समूह ने बड़े कॉर्पोरेट और औद्योगिक घरानों को निजी बैंक चलाने की अनुमति देने की शिफारिश की है.
  • इस आंतरिक कार्य समूह (आईडब्ल्यूजी) का गठन देश के निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए मौजूदा स्वामित्व दिशा-निर्देशों और कॉरपोरेट संरचना की समीक्षा करने के लिए किया गया था.
  • आंतरिक कार्य समूह की रिपोर्ट के अनुसार 1947 में भारत की आज़ादी के समय व्यावसायिक बैंक (इनमें से कई बैंक कारोबारी घरानों के नियंत्रण में थे) सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने में पिछड़ गए थे. इसलिए, भारत सरकार ने 1969 में 14 और 1980 में छह बड़े व्यावसायिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था.
  • इसके बाद 1990 दशक के प्रारंभ में आर्थिक सुधारों की शुरुआत के साथ ही निजी बैंकों की भूमिका को भी तेज़ी से स्वीकारा जाने लगा.
  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारतीय बैंक एक विकासशील अर्थव्यवस्था की वित्त की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी बैंकों के हाथों लगातार बाज़ार में हिस्सेदारी खो रहे हैं, ये प्रक्रिया पिछले पाँच सालों में तेज़ हुई है.

इसके साथ ही कारपोरेट घरानों को बैंक खोलने के पीछे अन्य आर्थिक विशेषज्ञों के द्वारा निम्न तर्क दिए गए हैं-

  • भारत को बढ़ती अर्थव्यवस्था के अनुसार अपने विकास की गति को बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होगी खासकर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी की अर्थव्यवस्था के रूपांतरण हेतु. भारत के विकास हेतु वांछित पूंजी को उपलब्ध कराने में कारपोरेट घरानों के द्वारा मदद की जा सकती है.
  • उल्लेखनीय है कि बड़े कारपोरेट घराने काफी समय से व्यापार-वाणिज्य को संचालित कर रही हैं जिनसे उनमें पेशेवर प्रबंधन, विशेषज्ञता,अनुभव में विशेष उपलब्धि हासिल है. कारपोरेट घराने अपने पेशेवर प्रबंधन, विशेषज्ञता,अनुभव से बैंकिंग सेक्टर के विकास को वांछित गति दे सकते हैं.
  • गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तुलना में निजी क्षेत्र अपने ग्राहकों को काफी पेशेवर तरीके से सुविधाओं को उपलब्ध कराते हुए लगातार न केवल मजबूत स्थिति में है बल्कि निरंतर लाभ भी अर्जित कर रहे हैं. अतः ग्राहकों को अच्छी सेवा देने के साथ-साथ कारपोरेट घराने के आ जाने से बैंकिंग क्षेत्र में ना केवल पूंजी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी बल्कि ग्राहकों को भी पेशेवर तरीके से सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

क्यों की जा रही है बड़े कॉर्पोरेट घरानों को निजी बैंक चलाने की सिफारिश का विरोध?

  • आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार कारपोरेट घरानों को बैंक चलाने की अनुमति देना अर्थव्यवस्था के लिए विस्फोटक स्थिति उत्पन्न कर सकती है.
  • आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य का कहना है कि अगर कारपोरेट घरानों को ऐसी अनुमति दी जाती है तो आर्थिक ताक़त कुछ ही कॉरपोरेट्स के हाथों में सिमट कर रह जाएगी.
  • वैश्विक ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर (S&P) ने भी भारतीय रिजर्व बैंक के इस दृष्टिकोण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे हितों का टकराव, आर्थिक ताकत के केंद्रीकरण और वित्तीय अस्थिरता जैसे खतरे हो सकते हैं.
  • विगत कुछ वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था में इंटरग्रुप लैंडिंग, फंड का डायवर्सन और कारपोरेट डिफॉल्ट के खतरे बढ़ गए हैं. इसके साथ ही कई बैंकों जैसे यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, डीएचएफएल बैंक और पीएमसी जैसे बैंकों में कारपोरेट गठजोड़ के द्वारा कई घोटालों को अंजाम दिया गया है. इसलिए ऐसी संभावना बढ़ जाती कॉरपोरेट द्वारा संचालित बैंक में ऐसी संभावना हमेशा बनी रहेगी.
  • इन कॉरपोरेट्स को ख़ुद भी वित्तपोषण की ज़रूरत होती है और ऐसे में वो अपने ही बैंकों से जब चाहे आसानी से पैसा निकाल लेंगे. इसका विनियमन करना बहुत मुश्किल होगा और यह ऋण की स्थिति को अत्यधिक खराब कर सकता है.
  • ऐसी परिस्थितियाँ अत्यधिक विनाशकरी हो सकती है जहाँ कर्जदार ही बैंक का मालिक हो.
  • वैश्विक स्तर सूचनाएं प्राप्त करने वाले एक स्वतंत्र और प्रतिबद्ध नियामक के रूप में आरबीआई के लिए भी ख़राब क़र्ज़ वितरण पर रोक लगा पाना मुश्किल हो रहा है और ऐसे में यदि निजी कारपोरेट घरानों को ही बैंक खोलने की अनुमति दे दी जाती है, तो ये बैंक ऋण वितरण करेंगे, यह सुनिश्चित कर पाना बहुत कठिन होगा.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : 5G Technology

संदर्भ

भारत की दूरसंचार मानक विकास सोसाइटी (Telecommunications Standards Development Society India-TSDSI) द्वारा प्रस्तुत ‘5G’ सहित तीन नई तकनीकें अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के सख्त प्रदर्शन मानकों के अनुरूप किए मूल्यांकन में सफल हुई हैं.

संबन्धित जानकारी

  • भारत द्वारा पांचवीं पीढ़ी के मोबाइल संचार नेटवर्क की पूर्ण पैमाने पर व्यावसायिक तैनाती में उपयोग किए जाने वाले रेडियो इंटरफेस की तीन नई प्रौद्योगिकियों को ITU द्वारा सफल मूल्यांकन के साथ वैश्विक मान्यता प्रदान की गयी है.
  • आईटीयू रेडियोकोम्यूनिकेशन सेक्टर द्वारा बहु-वर्षीय विकास और मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान, इन तकनीकों को रोमिंग सहित संचालन और उपकरणों की वैश्विक अनुकूलता को स्थापित करने के सन्दर्भ में पर्याप्त रूप से सक्षम पाया गया है.
  • ये सभी तकनीक इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकॉम 2020 (IMT-2020) विजन और आईटीयू के सख्त प्रदर्शन आवश्यकता के अनुरूप हैं.
  • आईटीयू के मूल्यांकन में भारत की तकनीकी की सफलता 5G रेडियो इंटरफेस विनिर्देश पर भारत के योगदान को रेखांकित करती है.

5G क्या है?

  • 5G एक वायरलेस दूरसंचार प्रौद्योगिकी है. इसमें डेटा प्रसारण एवं प्राप्ति के लिए रेडियो तरंगे और रेडियो आवृत्ति (RF) का प्रयोग किया जाता है.
  • यह 4G LTE नेटवर्क के बाद मोबाइल नेटवर्क प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी है. 2019 के आरम्भ में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग सेवाओं में क्रमिक रूप से शुरू किया जाएगा और 2024 तक सम्पूर्ण सेवाओं तक इसका विस्तार किया जायेगा.
  • 5G के लिए अंतिम मानकअंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा निर्धारित किया जाएगा.

5G की विशेषताएँ

  • उच्च डेटा दर (Hotspots के लिए 1Gbps, डाउनलोड गति 100Mbps तथा वाइड-एरिया कवरेज हेतु 50Mbps की अपलोड गति).
  • व्यापक कनेक्टिविटी (प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1 मिलियन कनेक्शन)
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी (1 मिलीसेकंड)
  • उच्च विश्वसनीयता (मिशन क्रिटिकल “अल्ट्रा-रिलाएबल” संचार हेतु 999%).
  • उच्च गति पर गतिशीलता (500 किमी./घंटा की गति तक अर्थात् उच्च-गति ट्रेन के लिए).

इस प्रौद्योगिकी को वास्तविकता में परिणत होने में अभी काफी समय लगेगा किन्तु इसमें वायरलेस उपकरणों के साथ अंतर्क्रिया के हमारे वर्तमान तरीके को पूर्णतया परिवर्तित करने की पर्याप्त क्षमता है.

5G के लाभ

  • इन्टरनेट की तीव्र गति – वर्तमान में 4G नेटवर्क एक गीगाबाइट प्रति सेकंड की अधिकतम डाउनलोड गति प्राप्त करने में सक्षम है. 5 के साथ इस गति को 10 गीगाबाइट प्रति सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है.
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी – लेटेंसी उस समय को संदर्भित करती है जो एक device से दूसरी device तक एक डेटा पैकेट को भेजने में लगता है. 4G में लेटेंसी दर 50 milliseconds है जबकि 5G में 1 millisecond तक हो सकती है.
  • अच्छी तरह से कनेक्टेड विश्व – 5G इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसी प्रौद्योगिकियों  के समायोजन के लिए प्रयोक्ता की आवश्यकता के अनुसार क्षमता तथा बैंडविड्थ प्रदान करेगा. इस प्रकार यह आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स को अपनाने में सहायता करेगा.
  • डिजिटल आर्थिक नीति पर आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) समिति के अनुसार 5G प्रौद्योगिकी का क्रियान्वयन GDP में वृद्धि, रोजगारों का सृजन तथा अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने में सहायता करेगा.

भारत को 5G से लाभ

  • भारत पर 5G का संचयी आर्थिक प्रभाव 2035 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है. यह हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सम्मिलित करने में सहायता करेगा और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) के लिए परिवेश प्रदान करने हेतु स्मार्ट उपकरणों को निर्बाध रूप से डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा.
  • 5G कृषि से लेकर, स्मार्ट सिंचाई, मृदा एवं फसल की बेहतर निगरानी एवं पशुधन प्रबन्धन तक सम्पूर्ण मूल्य शृंखला में सुधार को सक्षम बना सकता है.
  • 5G सटीक विनिर्माण के लिए रोबोटिक्स के उपयोग को सक्षम बनायेगा, विशेषत: जहाँ मनुष्य इन कार्यों को सुरक्षित या सटीकता से निष्पादित नहीं कर सकता.
  • ऊर्जा क्षेत्र में, “स्मार्ट ग्रिड” और “स्मार्ट मीटरिंग” को सहायता प्रदान की जा सकती है.
  • स्वास्थ्य देखभाल में, 5G अधिक प्रभावी दूरस्थ-चिकित्सा वितरण, सर्जिकल रोबोटिक्स के दूरस्थ नियंत्रण और महत्त्वपूर्ण आँकड़ों की वायरलेस निगरानी को सक्षम बना सकता है.

चुनौतियाँ

यह एक विशाल कार्य है जिसमें स्पेक्ट्रम और नए एंटेना की स्थापना सम्बन्धित मुद्दे सम्मिलित हैं. जैसे कि ईमारतें, वृक्ष, खराब मौसम आदि भी अवरोधक का कारण बन सकते हैं. अतः बेहतर कनेक्शन हेतु अधिक बेस स्टेशनों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता है.

5G तक संक्रमण हेतु भारत के पास एक मजबूत बैकहॉल (backhaul) का अभाव है. दरअसल बैकहॉल एक प्रकार का नेटवर्क होता है जो सेल साइट्स को सेन्ट्रल एक्सचेंज से जोड़ता है. इस समय 80% सेल साइट्स माइक्रोवेव बैकहॉल तथा 20% साइट फाइबर के माध्यम से कनेक्टेड हैं.  भारतीय बाजार आज की तिथि में सिर्फ 4G के लिए अनुकूल है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Desalination Plants

संदर्भ

हाल ही में महाराष्ट्र ने मुंबई में एक विलवणीकरण संयंत्र (Desalination Plants) स्थापित करने की घोषणा की है.

  • विलवणीकरण संयंत्र प्रतिदिन 200 मिलियन लीटर पानी (MLD) को संसाधित करेगा और मई और जून के महीनों में मुंबई में होने वाली पानी की कमी को दूर करने में मदद करेगा.
  • विलवणीकरण संयंत्र के साथ प्रयोग करने वाला महाराष्ट्र चौथा राज्य होगा.

विलवणीकरण संयंत्र

  • विलवणीकरण संयंत्र खारे पानी को पीने योग्य पानी में परिवर्तित कर देता है. पानी को लवणमुक्त करने की प्रक्रिया विलवणीकरण कहलाती है जो विभिन्न मानव उपयोगों की गुणवत्ता (लवणता) की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले पानी का उत्पादन करता है.
  • इस प्रक्रिया में सबसे अधिक उपयोग रिवर्स ऑस्मोसिस (Reverse Osmosis-RO) तकनीक का किया जाता है. अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली के माध्यम से उच्च-विलेय सांद्रता के क्षेत्र से कम-विलेय सांद्रता वाले क्षेत्र में परिवर्तित करने के लिये बाह्य दाब लगाया जाता है. झिल्ली में मौजूद सूक्ष्म छिद्र जल के अणुओं को अंदर जाने की अनुमति देते हैं, लेकिन दूसरी तरफ से साफ जल छोड़ते हुए नमक और अधिकांश अन्य अशुद्धियों को पीछे छोड़ देते हैं.
  • ये संयंत्र अधिकतर उन क्षेत्रों में स्थापित किये जाते हैं जिनकी पहुँच समुद्र के पानी तक है.

विलवणीकरण संयंत्रों का लाभ

  • यह जलविद्युत चक्र से उपलब्ध जल आपूर्ति का विस्तार कर सकता है, जो ‘असीमित’ जलवायु-स्वतंत्र और उच्च गुणवत्ता वाले पानी की स्थिर आपूर्ति प्रदान करता है.
  • यह उन क्षेत्रों में पीने का पानी उपलब्ध करा सकता है जहाँ पीने योग्य पानी की कोई प्राकृतिक आपूर्ति नहीं है.
  • चूँकि यह आमतौर पर जल गुणवत्ता के सभी मानकों को पूरा करता है या इसकी गुणवत्ता निर्धारित मानकों से अधिक होती है इसलिये विलवणीकरण संयंत्र अतिशोषित जल संसाधन वाले क्षेत्रों से प्राप्त किये जाने वाले मृदु जल की आपूर्ति पर पड़ने वाले दबाव को कम भी कर सकते हैं, जिनका संरक्षण आवश्यक है.

Prelims Vishesh

AICTE Training and Learning (ATAL) Academy Faculty Development Programme (FDPs) :-

  • हाल ही में, शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए 46 ऑनलाइन अटल (ATAL) शैक्षणिक FDPs का प्रारंभ किया है.
  • FDPs का संचालन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) के अनुसार किया जाएगा.
  • इससे IITs, NITs और IIITs जैसे प्रमुख संस्थानों में एक लाख संकाय सदस्य लाभान्वित होंगे.

Megaflood on Mars’ Gale crater :-

  • हाल ही में, नासा के क्यूरियोसिटी रोवर द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों से स्पष्ट यह हुआ है कि लगभग चार बिलियन वर्ष पूर्व मंगल के गेल क्रेटर से विशाल आकस्मिक बाढ़ उत्पन्न हुई थी.
  • यह खोज संकेत करती है कि मंगल ग्रह बहुत समय पहले जीवन को बनाए रखने में सक्षम था.
  • मेगाफ्लड (विशाल बाढ़) की घटना किसी उल्कार्पिड के प्रभाव से उत्पन्न ऊष्मा का परिणाम हो सकती है, जिसने मंगल की सतह पर हिम को पिघला दिया था और विशाल तरंगों को उत्पन्न किया था. इस प्रकार की घटना दो मिलियन वर्ष पूर्व पृथ्ठी पर भी घटित हुई थी.

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