Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 March 2021

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 02 March 2021


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Distribution of key natural resources across the world; changes in critical geographical features (including water bodies and ice-caps) and in flora and fauna and the effects of such changes;

Topic : Interlinking of Rivers: ILR

संदर्भ

नदियों के अंतर्योजन (Interlinking of Rivers: ILR) पर कार्य बल ने हाल ही में महानदी (बरमू ल)-गोदावरी (दौलेश्वरम) लिंक को स्वीकृति प्रदान की है. इस निर्णय को, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए नदियों के अंतर्योजन पर एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

मुख्य बिंदु

  • विदित हो कि महानदी-गोदावरी लिंक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के प्रायद्वीपीय घटक के तहत महानदी-गोदावरी-कृष्णा-पेन्नार-कावेरी-वैगई-गुंडर की नौ लिंक प्रणाली की प्रथम तथा एक महत्त्वपूर्ण श्रृंखला है.
  • जल शक्ति मंत्रालय द्वारा तैयार National Perspective Plan (NPP) के तहत, राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने जल अधिशेष बेसिन से जल-न्यून बेसिन में जल स्थानांतरित करने के लिए जल के अंतर-बेसिन स्थानांतरण के लिए हिमालयी नदी घटक के तहत 14 संयोजन और प्रायद्वीपीय नदी घटक के तहत 16 संयोजन की पहचान की है.
  • परियोजना का उद्देश्य भारत की नदियों को जलाशयों और नहरों के नेटवर्क से जोड़ना है जिससे उनकी जल क्षमताओं को साझा करने और पुनर्वितरित करने में सहयोग प्राप्त हो सके.

नदी संयोजन के लाभ

  • इससे सुखाड़-उन्मुख तथा जल की कमी वाले क्षेत्रों को पानी मिलेगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी.
  • नदी संयोजन परियोजनाओं को लागू करने से हिमालय से निकलने वाली नदियों में उपलब्ध अतिरिक्त पानी प्रायद्वीपीय भारत की ओर स्थानांतरित किया जायेगा, जहाँ पानी की कमी रहती है. प्रायद्वीपीय नदियों का भी बहुत सारा पानी समुद्र में चला जाता है और उसका कोई उपयोग नहीं होता है. ऐसे पानी को प्रायद्वीप के कम पानी वाले क्षेत्रों की ओर नदी संयोजन परियोजनाओं के माध्यम से ले जाया जायेगा.
  • विदित हो कि गंगा घाटी और ब्रह्मपुत्र घाटी में लगभग हर वर्ष बाढ़ आती है. नदी संयोजन परियोजनाओं के माध्यम से इन घाटियों में बह रही नदियों के जल की दिशा दूसरे कम पानी वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से बाढ़ की समस्या का समाधान सम्भव है.
  • नदियों को जोड़ने से घरेलू जलमार्ग के रूप में इनका उपयोग हो सकता है. ऐसा करने से सार्वजनिक यातायात और माल ढुलाई पहले से तीव्र हो जायेगी.
  • नदी संयोजन से यह लाभ होगा बनाई गई नई नहरों के आस-पास रहने वाले लोगों को रोजगार मिलेगा और मछली पालन का काम भी बड़े पैमाने पर हो सकेगा.

नदी संयोजन के संभावित दुष्प्रभाव

  • नदियों को जोड़ने से वर्तमान पर्यावरण में बहुत बड़ी उथल-पुथल होगी. इसके लिए नहरें और जलाशय बनाए जायेंगे जिनके चलते बहुत बड़े पैमाने पर जंगलों की सफाई की जायेगी. इसका प्रभाव वर्षा पर पड़ेगा और अंततः सम्पूर्ण जीवन चक्र प्रभावित हो जायेगा.
  • नदियों को जोड़ा भी जाए तो ऐसा अनुमान है कि 100 वर्ष के अन्दर ये अपना रास्ता और दिशा फिर से बदल सकते हैं.
  • नदियों के संयोजन से एक हानि यह है कि समुद्र में प्रवेश करने वाले मीठे जल की मात्रा घट जाएगी जिसके कारण सामुद्रिक जीवन तंत्र पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा और यह एक महान् पर्यावरणिक आपदा सिद्ध होंगे.
  • बहुत सारी नहरों और जलाशयों के निर्माण से लोगों को विस्थापित करना आवश्यक हो जायेगा और इनका पुनर्वास करना एक समस्या हो जाएगी.
  • नदी संयोजन के परियोजनाओं पर संभावित खर्च बहुत विशाल होगा और इसके लिए सरकार को विदेशी स्रोतों से ऋण लेना होगा. फलतः देश ऋण के जाल में फँस सकता है.

हिमालयी क्षेत्र की संयोजक नहरें

  1. सोन बांध-गंगा की दक्षिणी सहायक नदियां
  2. सुवर्णरेखा-महानदी
  3. शारदा-यमुना
  4. राजस्थान-साबरमती
  5. यमुना-राजस्थान
  6. ब्रह्मपुत्र-गंगा(जोगीगोपा-तीस्ता-फरक्का)
  7. ब्रह्मपुत्र-गंगा (मानस-संकोश-तीस्ता-गंगा)
  8. फरक्का-सुंदरवन
  9. फरक्का-दामोदर-सुवर्णरेखा
  10. चुनार-सोन बैराज
  11. घाघरा-यमुना
  12. गंडक-गंगा
  13. कोसी-मेकी
  14. कोसी-घाघरा

प्रायद्वीपीय क्षेत्र की संयोजक नहरें

  1. कावेरी (कट्टई)- वईगई-गुंडुर
  2. कृष्णा (अलमाटी)-पेन्नार
  3. कृष्णा (नागार्जुन सागर)-पेन्नार (स्वर्णशिला)
  4. कृष्णा (श्रीसैलम)-पेन्नार (प्रोडात्तुर)
  5. केन-बेतवा लिंक
  6. गोदावरी (इंचमपाली लो डैम)-कृष्णा (नागार्जुन टेल पाँड)
  7. गोदावरी (इंचमपाली)-कृष्णा (नागार्जुन सागर)
  8. गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा)
  9. दमनगंगा-पिंजाल
  10. नेत्रावती-हेमावती
  11. पम्बा-अचनकोविल-वप्पार
  12. पार-तापी- नर्मदा
  13. पार्वती-काली सिंध-चंबल
  14. पेन्नार (स्वर्णशिला)-कावेरी (ग्रांड आर्नीकट)
  15. महानदी (मणिभद्रा)-गोदावरी (दौलाईस्वरम)
  16. वेदती-वरदा

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : VIVAD SE VISHWAS SCHEME

संदर्भ

हाल ही में, आयकर विभाग द्वारा, प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना ‘विवाद से विश्वास’ के अंतर्गत कर जमा करने की घोषणा करने और भुगतान करने की समय सीमा क्रमशः 31 मार्च और 30 अप्रैल तक बढ़ा दी गयी है.

विवाद से विश्वास योजना

फ़रवरी 1, 2020 को बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विवाद से विश्वास नामक एक योजना की घोषणा की थी जिसका उद्देश्य प्रत्यक्ष कर के लंबित असंख्य मामलों का निपटारा करना है.

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में कई अपीलीय मंचों में प्रत्यक्ष कर से जुड़े 483,000 मामले अनिष्पादित पड़े हैं. सरकार की इस योजना से आशा की जाती है कि अब ये मामले शीघ्र ही निष्पादित हो जाएँगे.

विवाद से विश्वास योजना के मुख्य तथ्य

  • यह एक माफ़ी योजना है जो उन विवादों से सम्बंधित है जो आय कर अपीलीय ट्रिब्यूनल (Income Tax Appellate Tribunals – ITAT), उच्च न्यायालयों, सर्वोच्च न्यायालय तथा अंतर्राष्ट्रीय पंचाटों में लंबित चले आ रहे हैं.
  • विवाद से विश्वास योजना के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति मार्च 31 तक अपने लंबित करों का भुगतान कर देता है तो उसको पूर्ण रूप से ब्याज और दंड से मुक्ति मिल जायेगी.
  • इस योजना का उद्देश्य उन करदाताओं को लाभ पहुँचाना है जिनके मामले अनेक मंचों पर फँसे पड़े हैं.
  • यदि करदाता मार्च 31 तक प्रत्यक्ष करों का भुगतान नहीं कर पायेगा तो उसको फिर जून 30 तक का समय दिया जाएगा. परन्तु इसके लिए उसे 10% अधिक कर देना होगा.
  • यदि मात्र ब्याज और दंड पर विवाद है तो करदाता को विवादित राशि का 25% मार्च 31 तक भुगतान करना पड़ेगा और उसके बाद 30% का भुगतान करना होगा.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in Space.

Topic : Amazônia-1

संदर्भ

ISRO ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV-C51 को  सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. इस रॉकेट में 637 किलो के ब्राजीलियाई सैटेलाइट अमेजोनिया-1 सहित 18 अन्य सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में भेजे गए. इनमें से 13 अमेरिका से हैं.

अमेजोनिया-1 ब्राजील का पहला सेटेलाइट है जो कि भारत में प्रक्षेपित गया. स्पेस किड्ज इंडिया ने एक एसडी कार्ड में भगवद गीता की इलेक्ट्रॉनिक प्रति को अंतरिक्ष में भेजा है.

मिशन की विशेषताएँ

  • यह मिशन इसरो की दूसरी वाणिज्यिक विंग न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का पहला समर्पित व्यावसायिक मिशन है.
  • 25 जनवरी 2004 को, भारत और ब्राजील के बीच बाहरी अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.
  • फ्रेमवर्क समझौते के एक भाग के रूप में, इसरो, ब्राजील की अंतरिक्ष एजेंसी (AEB) का एक माइक्रो-उपग्रह लॉन्च करेगा.

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)

  • यह इसरो का प्रमुख प्रक्षेपण यान हैं.
  • 1993 में इसकी शुरुआत से लेकर अब तक 47 सफल प्रक्षेपण किए हैं.
  • इसके द्वारा वर्ष 2017 में एक साथ 104 उपग्रहों के प्रक्षेपण का रिकॉर्ड भी बनाया गया.

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

भारत एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरा है. व्यावसायिक रूप से अपनी अंतरिक्ष क्षमता का दोहन करने के लिए एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का गठन किया जाएगा. इससे इसरो को तो मदद मिलेगी ही, देश को भी लाभ होगा. 2019 के बजट में कहा गया है कि कि प्रौद्योगिकी और उपग्रह प्रक्षेपित करने की क्षमता एवं वैश्विक कम लागत पर अंतरिक्ष उत्पादों के साथ भारत प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरा है. अब समय आ गया है कि इस क्षमता का वाणिज्यिक उपयोग भी हो. एक सरकारी क्षेत्र उद्यम अर्थात न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड को इसरो द्वारा किए गए अनुसंधान और विकास के लाभों को काम में लाने के लिए अंतरिक्ष विभाग की नई वाणिज्यिक शाखा के रूप में सम्मिलित किया गया है. यह कंपनी विभिन्न अंतरिक्ष उत्पादों के वाणिज्यीकरण का नेतृत्व करेगी. इसके अंतर्गत लांच व्हीकल का उत्पादन, प्रौद्योगिकियों का अंतरण और अंतरिक्ष उत्पादों का विपणन सममिलित है.

एंट्रिक्स

  • एंट्रिक्स इसरो की एक विपणन शाखा है. यह अंतरिक्ष उत्पादों के प्रचार और वाणिज्यिक दोहन, तकनीकी परामर्श सेवाओं तथा इसरो द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए उत्तरदायी है.
  • यह भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली लघु रत्न श्रेणी की कंपनी है.
  • इसका गठन 1992 में किया गया था.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Inflation Targeting

संदर्भ

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए मुद्रा और वित्त संबंधी रिपोर्ट निर्गत की गई है जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि, +/-2 प्रतिशत के गुंजाइश स्तर (tolerance band) के साथ 4 प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य, आगामी पाँच सालों के लिए उपयुक्त है.

रिपोर्ट के महत्त्वपूर्ण बिंदु

  1. लचीले-मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (flexible-inflation targeting FIT) के दौरान, मुद्रास्फीति प्रवृत्ति में 8-4.3 % तक गिरावट दर्ज हुई है, जबकि FIT से पूर्व यह 9% से अधिक थी. यह इंगित करती है कि मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने के लिए 4% एक उपयुक्त स्तर है.
  2. 6% दर का मुद्रास्फीति लक्ष्य, गुंजाइश के लिए उपयुक्त ऊपरी सीमा है.
  3. 2% से अधिक मुद्रास्फीति की निचली सीमा निर्धारित करने के चलते वास्तविक मुद्रास्फीति, गुंजाइश स्तर से नीचे तक पहुँच सकती है, जबकि 2% से कम मुद्रास्फीति की निचली सीमा निर्धारित करने पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि में रुकावट आ सकती है. यह इस बात का भी संकेत है, कि, 2% मुद्रास्फीति, गुंजाइश स्तर के लिए उपयुक्त निचली सीमा है.

लचीले-मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (FIT)  के परिणाम

  1. FIT अवधि के दौरान, मुद्रा बाजार में मौद्रिक संचरण पूर्ण और यथोचित रूप से तेज रहा था. वैसे बौंड बाजार में मौद्रिक संचरण, पूर्ण स्तर से कम रहा.
  2. बैंकों के ऋण और जमा दरों के संचरण में सुधार हुआ है, तथा ऋण और जमा की सभी श्रेणियों में बाहरी बेंचमार्क मौद्रिक संचरण में और सुधार किया जा सकता था.

लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण फ्रेमवर्क

  • वर्ष 2015 में रिज़र्व बैंक और सरकार के मध्य एक नीतिगत ढाँचे पर सहमति बनी जिसमें विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिक उद्देश्य निर्धारित किया गया.
  • वर्ष 2016 में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अधिनियम, 1934 में संशोधन के पश्चात् भारत में एक ‘लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण फ्रेमवर्क’ (Flexible Inflation Targeting Framework) कार्यरत है.

भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?

संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, भारत सरकार, हर पाँच वर्ष में एक बार, रिजर्व बैंक के परामर्श से मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करती है.

वर्तमान मुद्रास्फीति लक्ष्य

केंद्र सरकार द्वारा, 5 अगस्त, 2016 से 31 मार्च, 2021 की अवधि के लिए प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति को अधिसूचित किया गया है. साथ ही साथ, 6 प्रतिशत की ऊपरी गुंजाइश सीमा तथा 2 प्रतिशत की निचली गुंजाइश सीमा निर्धारित की गयी है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

Imported Inflation :–

  • जुलाई और अगस्त 2019 में भारतीय मुद्रा के कमजोर पड़ जाने से देश में आयातित मुद्रा स्फीति (imported inflation) होने की संभावना जताई जा रही है.
  • ज्ञातव्य है कि जब आयातित वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि के कारण किसी देश में सामान्य मूल्य स्तर ऊँचा हो जाता है तो ऐसी मुद्रा स्फीति को आयातित मुद्रा स्फीति कहा जाता है.
  • भारत में मात्र कच्चे तेल और सोना इन दो वस्तुओं का आयात मूल्य बढ़ जाने से हमारे आयात का खर्च ऊपर की ओर भाग जाता है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

एक मुक्त अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति का संचालन, विदेशी मुद्रा भंडार और संबंधित चलनिधि प्रबंधन काफी प्रमुख होते हैं; अतः पूंजी प्रवाह में वृद्धि की स्थिति से निपटने के लिये रिज़र्व बैंक की वंध्यीकरण क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है. मूल्य स्थिरता पर लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (FIT) का प्राथमिक ध्यान पूंजी खाते के अधिक उदारीकरण और भारतीय रुपए के संभव अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिये बेहतर है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Related to Space.

Topic : Way to predicting solar cycles– Kodaikanal Solar Observatory Digitized Data probes Sun’s rotation over the Century

संदर्भ

कोडइकनाल सौर वेधशाला (Kodaikanal Solar Observatory) (तमिलनाडु में पलनि पर्वत श्रृंखला में स्थित) के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि विगत शताब्दी के दौरान सूर्य ने किस प्रकार परिक्रमा की है. इस अध्ययन से निम्नलिखित में सहायता प्राप्त होगीः

  • इससे सूर्य के आंतरिक भाग में निर्मित होने वाले चुंबकीय क्षेत्र के अध्ययन में मदद मिलेगी, जो कि सौर कलकों (sunspots) के लिए उत्तरदायी है.
  • इसके परिणामस्वरूप ही पृथ्वी पर ऐतिहासिक लघु हिमयुग (सौर धब्बों का अभाव) जैसी चरम परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं.
  • यह सौर चक्रों और भविष्य में इनमें होने वाले परिवर्तनों का अनुमान लगाने में भी सहायता प्रदान कर सकता है.

वैज्ञानिक सौर गतिविधियों पर किस प्रकार निगाह रखते हैं?

  1. वैज्ञानिक, सौर-कलंकों (Sunspots) के माध्यम से सौर चक्र का पता लगाते हैं.
  2. किसी सौर चक्र की प्रारम्भ में आमतौर पर मात्र कुछ सौर-कलंक (Sunspots) होते हैं और इसलिए इसे “सौर न्यूनतम” (Solar Minimum) कहा जाता है.

सौर न्यूनतम’ तथा ‘सौर अधिकतम’ क्या होते है?

सौर चक्र पर निगाह रखने की एक विधि सौर-कलंकों (Sunspots) की संख्या की गणना होती है.

  1. सौर चक्र की प्रारम्भ में सौर न्यूनतम” (Solar Minimum) की स्थिति होती है, अर्थात् सूर्य में सबसे कम सौर-कलंक होते हैं. समय के साथ, सौर गतिविधि – और सौर-कलंकों की संख्या ने वृद्धि होती जाती है.
  2. सौर चक्र की मध्य स्थिति में ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum) होता है, अर्थात् सूर्य में सौर-कलंकों की संख्या सबसे ज्यादा होती है. जैसे ही चक्र समाप्त हो जाता है, यह पुनः सौर न्यूनतम पर आ जाता है और फिर से एक नया चक्र प्रारम्भ होता है.

पृथ्वी पर सौर चक्र के प्रभाव

  1. सौर विस्फोटों से आकाश में बिजली पैदा हो सकती है, जिसे औरोरा (Aurora) कहा जाता है, तथा ये रेडियो संचार को प्रभावित करते है. चरम विस्फोट होने पर ये पृथ्वी पर स्थित बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं.
  2. सौर गतिविधियां, इलेक्ट्रॉनिक्स उपग्रहों को प्रभावित कर सकती है तथा उनके जीवनकाल को प्रभावित कर सकती है.
  3. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सौर विकिरण हानिकारक हो सकता है.

सौर कलंक (Sunspots):  ये सूर्य के प्रकाश मंडल की अस्थायी घटनाएं हैं. जब सूर्य के किसी भाग का ताप अन्य भागों की तुलना में कम हो जाता है तो धब्बे के रूप में दिखता है, इसे सौर कलंक कहते हैं. इस धब्बे का जीवनकाल कुछ घंटे से लेकर कुछ सप्ताह तक होता है.

सौर प्रज्वाल (solar flare): यह सूरज की सतह के किसी स्थान पर अचानक बढ़ने वाली चमक को कहते हैं. यह प्रकाश वर्णक्रम के बहुत बड़े भाग के तरंगदैर्घ्यों (wavelength) पर उत्पन्न होता है. सौर प्रज्वाल में कभी-कभी कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (coronal mass ejection) भी होता है जिसमें सूरज के कोरोना से प्लाज़्मा और चुम्बकीय क्षेत्र बाहर फेंक दिये जाते हैं. यह सामग्री तेज़ी से सौर मंडल में फैलती है और इसके बादल बाहर फेंके जाने के एक या दो दिन बाद पृथ्वी तक पहुँच जाते हैं. इनसे अंतरिक्ष यानों पर दुष्प्रभाव के साथ-साथ पृथ्वी के आयनमंडल पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिस से दूरसंचार प्रभावित होने की सम्भावना बनी रहती है.


Prelims Vishesh

Sindhu Netra :-

  • हाल ही में DRDO ने ‘सिंधु नेत्र’ (Sindhu Netra) नामक निगरानी उपग्रह को निर्मित किया है जो हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी करने में सहायता करेगा.
  • ‘सिंधु नेत्र’ (Sindhu Netra) उपग्रह को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के ‘PSLV-C51’ नामक प्रक्षेपण यान के द्वारा सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में तैनात किया गया.
  • ज्ञातव्य है कि हाल ही में ‘PSLV-C51’ प्रक्षेपण यान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च करके कुल 19 उपग्रह (सैटेलाइट) अंतरिक्ष में भेजे गए हैं.

Swachh Iconic Places – SIP :-

  • जल शक्ति मंत्रालय (MoJS) ने स्वच्छ आइकॉनिक प्लेसेज (SIP) के चरण-IV के तहत 12 स्थलों को “स्वच्छ पर्यटन स्थलों” में रूपांतरित करने की घोषणा की है.
  • इनमें से प्रमुख स्थल हैं – अजन्ता गुफाएँ (महाराष्ट्र), रॉक गार्डन (चंडीगढ़), साँची स्तूप (मध्य प्रदेश), सूर्य मंदिर (ओडिशा), आगरा का किला (उत्तर प्रदेश) आदि. 
  • स्वच्छ आइकॉनिक स्थल कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन के तहत पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की एक पहल है. स्वच्छ इकोनिक स्थल कार्यक्रम का उद्देश्य सुप्रसिद्ध स्थलों को अति-स्वच्छ रखना है जिससे कि वहाँ पहुँचने वाले यात्रियों को स्वच्छ वातावरण मिले और ये स्थल स्वच्छता के लिए जाने जाएँ.
  • इस परियोजना के कार्यान्वयन में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के अतिरिक्त ये तीन और केन्द्रीय मंत्रालय शामिल हैं – शहरी विकास मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय एवं पर्यटन मंत्रालय.
  • साथ ही इस परियोजना में सम्बंधित राज्यों और सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र की कम्पनियाँ भी भागीदार होती हैं.

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