कणिका कंप्यूटर क्या है? – Quantum Computing in Hindi

Richa KishoreScience TechLeave a Comment

फरवरी 1, 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के द्वारा प्रस्तुत 2020-21 के केन्द्रीय बजट में राष्ट्रीय कणिका प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोग मिशन (National Mission on Quantum Technologies and Applications) के लिए आगामी पाँच वर्षों में 8,000 करोड़ रु. का आवंटन प्रस्तावित हुआ है.

कणिका प्रौद्योगिकी (Quantum Technologies) क्या है?

कणिका प्रौद्योगिकी के अन्दर ये सब आते हैं – कणिका संगणन, कणिका संचार, कणिका प्रकाशिकी, कणिका सूचना प्रसंस्करण, कणिका इन्टरनेट और कणिका कृत्रिम बुद्धि.

कणिका प्रौद्योगिकी पर बल देने के कारण

  • कणिका कंप्यूटर (quantum computer) बहुत ही रोचक एवं उत्तेजनापूर्ण उपकरण है क्योंकि यह साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आवश्यक जटिल आकलन करने की क्षमता रखता है. कहना नहीं होगा कि आजकल डिजिटल कंप्यूटर इस प्रकार के आकलन किया करते हैं.
  • कणिका संचार (Quantum communications) से साइबर सुरक्षा बढ़ेगी और इससे अनूठे उंगली के चिन्ह भी प्राप्त हो सकते हैं. साथ ही इन्टरनेट संजाल के लिए यह वर्तमान बैंडविथ में बढ़ोतरी ला सकता है.

कणिका कंप्यूटर क्या है?

  • कणिका यांत्रिकी (quantum mechanics) के गुणधर्मों का उपयोग करके ही कणिका कंप्यूटर काम करते हैं.
  • कणिका कंप्यूटरों में कणिका अंशों अर्थात् क्यूबिट्स (qubits) नामक लॉजिकल इकाइयों का प्रयोग होता है.
  • इन क्यूबिटों को कणिका दशा में डाला जा सकता है जिससे वे एक ही समय 0 और 1 दोनों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं.

शास्त्रीय एवं कणिका कंप्यूटरों में अंतर (Difference between classical and quantum computers)

  • शास्त्रीय कंप्यूटर सूचना को बिट नामक एक बाइनरी फॉर्मेट में प्रसंस्कृत करते हैं जो या तो 0 अथवा 1 के रूप में होते हैं.
  • शास्त्रीय कंप्यूटर में ये सारे बिट एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर काम करते हैं. दूसरी ओर, क्वांटम अथवा कणिका कंप्यूटर में एक क्यूबिट की दशा प्रणाली के अंतर्गत काम कर रहे अन्य क्यूबिटों की दशा को प्रभावित करती है जिस कारण वे सभी मिलकर किसी समाधान को सिद्ध कर सकते हैं.

कणिका कंप्यूटर में परिणाम कैसे आते हैं?

पारम्परिक कंप्यूटर किसी समस्या का उत्तर सदैव एक ही देते हैं चाहे कितनी बार ही गणना क्यूँ न की जाए. परन्तु कणिका कंप्यूटर के परिणाम संभावनात्मक अर्थात् प्रोबेबिलिस्टिक (probabilistic) होते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि ये सदैव एक ही उत्तर नहीं देते. इसलिए कणिका कंप्यूटर का उपयोग करते समय किसी गणना को हजारों या यहाँ तक कि लाखों बार करना पड़ता है और ऐसे में उस उत्तर को सही माना जाता है जिसकी ओर ये सारी संगणनायें आकर मिल जाती हैं.

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